Tag: Mallikarjun Kharge

  • मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र पर लगाए जनता की जेब पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के गंभीर आरोप

    मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र पर लगाए जनता की जेब पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के गंभीर आरोप


    नई दिल्ली। देश में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर राजनीतिक माहौल एक बार फिर गरमा गया है। ईंधन दरों में हालिया बढ़ोतरी ने आम जनता की चिंताओं को बढ़ा दिया है, वहीं विपक्ष ने इसे लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि को लेकर सरकार को निशाने पर लिया और आरोप लगाया कि देश में आम नागरिकों पर आर्थिक दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। उन्होंने कहा कि बीते कुछ दिनों के दौरान ईंधन की कीमतों में कई बार बदलाव हुआ है, जिससे आम लोगों के घरेलू बजट पर सीधा असर पड़ा है। उनके अनुसार यह केवल कीमतों में बढ़ोतरी का मामला नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव महंगाई और रोजमर्रा की आवश्यकताओं पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है।

    खड़गे ने कहा कि लगातार बढ़ती कीमतों ने लोगों की आर्थिक योजनाओं को प्रभावित किया है और आम परिवारों के लिए अतिरिक्त खर्च का बोझ बढ़ा दिया है। उनका मानना है कि पेट्रोल और डीजल की दरों में तेजी केवल परिवहन लागत तक सीमित नहीं रहती, बल्कि इसका असर बाजार की लगभग हर वस्तु और सेवा पर पड़ता है। ऐसे में आम आदमी को दोहरी मार झेलनी पड़ती है। उन्होंने यह भी दावा किया कि पिछले कुछ वर्षों में ईंधन से जुड़े फैसलों के कारण जनता पर अप्रत्यक्ष आर्थिक दबाव बढ़ा है और लोगों की बचत तथा खर्च दोनों पर इसका असर देखने को मिला है।

    राजनीतिक बयानबाजी के बीच खड़गे ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस समय आम जनता महंगाई और बढ़ते खर्च से जूझ रही है, उस समय ईंधन कीमतों में लगातार वृद्धि लोगों की परेशानी को और बढ़ाने का काम कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह स्थिति केवल आर्थिक नहीं बल्कि सामाजिक चिंता का विषय भी बनती जा रही है। उनका कहना है कि जब ईंधन महंगा होता है तो उसका असर हर वर्ग पर पड़ता है, चाहे वह नौकरीपेशा व्यक्ति हो, व्यापारी हो या फिर ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाला किसान।

    उन्होंने यह भी कहा कि हालिया मूल्य वृद्धि के बाद सरकारी तेल कंपनियों के प्रदर्शन में तेजी देखने को मिली, जिसे लेकर उन्होंने सवाल उठाए। उनका आरोप है कि नीतिगत फैसलों का लाभ आम जनता तक पहुंचने के बजाय कुछ विशेष क्षेत्रों को अधिक मिलता दिखाई दे रहा है। इस मुद्दे को लेकर उन्होंने सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग भी की और कहा कि जनता को राहत देने के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।

    ईंधन की कीमतें लंबे समय से देश में आर्थिक और राजनीतिक बहस का विषय रही हैं। जैसे-जैसे कीमतों में बदलाव होता है, वैसे-वैसे इसका असर आम नागरिकों के दैनिक जीवन पर भी दिखाई देता है। ऐसे में अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ती है और आम जनता को राहत देने के लिए क्या कदम सामने आते हैं।

  • 18 जून को राज्यसभा चुनाव, 24 सीटें खाली होने से बदलेगा सियासी गणित, कई दिग्गज नेताओं का कार्यकाल समाप्त

    18 जून को राज्यसभा चुनाव, 24 सीटें खाली होने से बदलेगा सियासी गणित, कई दिग्गज नेताओं का कार्यकाल समाप्त


    नई दिल्ली। देश की राजनीति में एक बार फिर बड़ा संसदीय फेरबदल देखने को मिलने वाला है, क्योंकि राज्यसभा की कई महत्वपूर्ण सीटों पर चुनावी प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। चुनाव आयोग द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार 10 राज्यों की कुल 24 राज्यसभा सीटों पर आगामी जून में मतदान कराया जाएगा, जिससे उच्च सदन की राजनीतिक संरचना में महत्वपूर्ण बदलाव संभव हैं।

    इन सीटों पर चुनाव की प्रक्रिया 18 जून को मतदान के साथ पूरी होगी। इससे पहले नामांकन, जांच और नाम वापसी की औपचारिक प्रक्रिया निर्धारित समय के अनुसार संपन्न की जाएगी। यह चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसमें कई वरिष्ठ और अनुभवी सांसदों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, जिससे संसद के ऊपरी सदन में नई राजनीतिक समीकरणों की शुरुआत होगी।

     जिन प्रमुख सांसदों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है उनमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा जैसे बड़े नाम शामिल हैं। इनके अलावा विभिन्न दलों के कई अन्य सांसद भी इस सूची में हैं, जिनका राज्यसभा कार्यकाल पूरा हो रहा है। यह स्थिति राजनीतिक दलों के लिए रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इससे आने वाले समय में सदन की संख्या और शक्ति संतुलन प्रभावित हो सकता है।

    राज्यों के हिसाब से देखें तो गुजरात, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में चार-चार सीटों पर चुनाव होगा, जबकि मध्य प्रदेश और राजस्थान में तीन-तीन सीटें खाली हो रही हैं। झारखंड में दो सीटों पर चुनाव होगा, वहीं अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, मणिपुर और मेघालय में एक-एक सीट पर प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इन सभी राज्यों में राजनीतिक दल अपने-अपने गणित को साधने में जुट गए हैं।

     इस चुनावी प्रक्रिया का सबसे बड़ा असर उन राज्यों में देखने को मिलेगा जहां विधानसभा में सीटों का संतुलन बेहद करीबी मुकाबले का है। ऐसे राज्यों में छोटे राजनीतिक अंतर भी राज्यसभा सीटों के नतीजों को प्रभावित कर सकते हैं। इसी वजह से सभी प्रमुख दलों ने अभी से रणनीति बनानी शुरू कर दी है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्यसभा चुनाव सीधे जनता द्वारा नहीं बल्कि विधायकों के माध्यम से होते हैं, इसलिए विधानसभा की संख्या ही अंतिम परिणाम तय करती है। यही कारण है कि हर पार्टी अपने विधायकों को एकजुट रखने और क्रॉस वोटिंग से बचाने पर विशेष ध्यान दे रही है।

     राज्यसभा एक स्थायी सदन है, जिसमें हर दो वर्ष में लगभग एक-तिहाई सदस्य रिटायर होते हैं और उनकी जगह नए सदस्य चुने जाते हैं। इस प्रक्रिया से सदन में निरंतरता बनी रहती है, लेकिन राजनीतिक संतुलन समय-समय पर बदलता रहता है। वर्तमान चुनाव भी इसी बदलाव की एक महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है।

    कुल मिलाकर 24 सीटों पर होने वाला यह चुनाव न केवल संख्या का खेल है, बल्कि आने वाले समय में संसद के भीतर राजनीतिक समीकरणों और दलों की ताकत को भी प्रभावित करेगा। सभी प्रमुख दल अब इन सीटों पर जीत सुनिश्चित करने के लिए अंतिम रणनीति तैयार करने में जुट गए हैं।

  • केरल CM चेहरा तय करने की कवायद तेज, नेताओं से बातचीत के बाद अब अंतिम निर्णय का इंतजार

    केरल CM चेहरा तय करने की कवायद तेज, नेताओं से बातचीत के बाद अब अंतिम निर्णय का इंतजार

    नई दिल्ली।  केरल विधानसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन के बाद अब Kerala में मुख्यमंत्री पद को लेकर सियासी हलचल अपने चरम पर पहुंच गई है। 140 सीटों वाली विधानसभा में कांग्रेस नेतृत्व वाले यूडीएफ ने 102 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया है, लेकिन अब असली चर्चा नए मुख्यमंत्री के चयन को लेकर हो रही है।
    कांग्रेस नेतृत्व इस बार सर्वसम्मति से मुख्यमंत्री चुनने की रणनीति पर काम कर रहा है। इसी कड़ी में पार्टी के वरिष्ठ नेता Rahul Gandhi ने दिल्ली में पूर्व प्रदेश अध्यक्षों और वरिष्ठ नेताओं के साथ मैराथन बैठक की। इस दौरान उन्होंने जमीनी हालात और विधायकों की राय के साथ-साथ जनता की भावनाओं को भी समझने की कोशिश की।
    सूत्रों के मुताबिक, अब फैसला पूरी तरह कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge के हाथ में है। खरगे के बेंगलुरु से दिल्ली लौटने के बाद उनकी सोनिया गांधी से अंतिम दौर की चर्चा होगी, जिसके बाद नए मुख्यमंत्री के नाम पर औपचारिक मुहर लगाई जाएगी। माना जा रहा है कि यह घोषणा बुधवार तक हो सकती है।
    सीएम पद की दौड़ में तीन बड़े नाम सबसे आगे हैं रमेश चेन्निथला, वीडी सतीशन और एआईसीसी महासचिव केसी वेणुगोपाल। इन नेताओं को लेकर पार्टी के भीतर लगातार मंथन चल रहा है। राहुल गांधी ने इन नामों पर राय जानने के लिए कई वरिष्ठ नेताओं से व्यक्तिगत बातचीत भी की है, ताकि एक ऐसा चेहरा चुना जा सके जो सभी गुटों को स्वीकार्य हो।
    इस प्रक्रिया में केवल विधायकों की राय ही नहीं, बल्कि सहयोगी दलों की भूमिका और जनता की पसंद को भी अहमियत दी जा रही है। पार्टी का कहना है कि यूडीएफ गठबंधन की एकजुटता बनाए रखना भी इस फैसले का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
    चुनाव परिणामों के बाद से ही कांग्रेस हाईकमान लगातार बैठकों में व्यस्त है और हर स्तर पर विचार-विमर्श किया जा रहा है। अजय माकन और मुकुल वासनिक जैसे पर्यवेक्षकों ने पहले ही विधायकों से फीडबैक ले लिया है, जिसे अंतिम निर्णय में शामिल किया जाएगा।
    अब पूरे राजनीतिक गलियारों की नजर इस बात पर टिकी है कि केरल की कमान आखिर किसे सौंपी जाएगी। कांग्रेस के लिए यह फैसला न सिर्फ सरकार गठन का हिस्सा है, बल्कि आने वाले वर्षों की राजनीति की दिशा भी तय करेगा।
  • तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव, थलपति विजय के नेतृत्व में नई सरकार, राष्ट्रीय नेताओं की मौजूदगी बनी चर्चा

    तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव, थलपति विजय के नेतृत्व में नई सरकार, राष्ट्रीय नेताओं की मौजूदगी बनी चर्चा

    नई दिल्ली । तमिलनाडु की राजनीति में लंबे इंतजार और गहन राजनीतिक हलचलों के बाद आखिरकार वह क्षण आ गया जिसने राज्य की सत्ता संरचना को नया रूप दे दिया। चेन्नई में आयोजित एक भव्य शपथ ग्रहण समारोह में लोकप्रिय अभिनेता से राजनेता बने Thalapathy Vijay ने आधिकारिक रूप से मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इस घटना को राज्य की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा जा रहा है, जहां परंपरागत राजनीतिक ढांचे से बाहर निकलकर एक नए नेतृत्व ने जिम्मेदारी संभाली है।

    इस समारोह की खास बात यह रही कि इसमें राष्ट्रीय स्तर के प्रमुख राजनीतिक नेता भी शामिल हुए। कांग्रेस नेता Rahul Gandhi ने कार्यक्रम में मौजूद रहकर नई सरकार को शुभकामनाएं दीं और इसे जनता की बदलती सोच का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि राज्य की जनता ने इस बार नई पीढ़ी, नए विचार और नई राजनीतिक कल्पना को अवसर दिया है, जो आने वाले समय में शासन की दिशा तय कर सकता है।

    इसी अवसर पर Mallikarjun Kharge ने भी विजय को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने पर बधाई दी। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि तमिलनाडु की राजनीति हमेशा से सामाजिक न्याय, समानता और प्रगतिशील विचारों पर आधारित रही है और उम्मीद है कि नई सरकार इन्हीं मूल्यों को आगे बढ़ाएगी। उनके अनुसार यह बदलाव केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि राजनीतिक सोच के विकास का संकेत है।

    शपथ ग्रहण समारोह चेन्नई के प्रमुख आयोजन स्थल पर बड़े पैमाने पर आयोजित किया गया, जहां राजनीतिक, सांस्कृतिक और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े कई लोग मौजूद रहे। माहौल में उत्साह और ऐतिहासिक बदलाव की झलक साफ दिखाई दे रही थी। लंबे समय से चल रही राजनीतिक अनिश्चितता अब समाप्त हो गई है और राज्य को एक नई सरकार और नया नेतृत्व मिल गया है।

    मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद अपने पहले संबोधन में थलपति विजय ने खुद को जनता का प्रतिनिधि बताया। उन्होंने कहा कि उनका राजनीतिक सफर किसी पारंपरिक राजनीतिक परिवार से नहीं जुड़ा है, बल्कि जनता के विश्वास और समर्थन ने उन्हें इस स्थान तक पहुंचाया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी सरकार झूठे वादों की बजाय ठोस काम और पारदर्शी प्रशासन पर ध्यान देगी।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह परिवर्तन तमिलनाडु की राजनीति में एक नई दिशा का संकेत है, जहां जनता ने एक गैर-पारंपरिक नेतृत्व को मौका दिया है। यह बदलाव न केवल सत्ता परिवर्तन है, बल्कि राजनीतिक सोच और जन अपेक्षाओं में आए बदलाव का भी प्रतीक है।

    नई सरकार के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि वह जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरे और प्रशासनिक अनुभव के साथ विकास कार्यों को गति दे। रोजगार, शिक्षा, बुनियादी ढांचा और सामाजिक कल्याण जैसे मुद्दे आने वाले समय में सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल रहेंगे।

    इस तरह तमिलनाडु ने एक नए राजनीतिक अध्याय की शुरुआत की है, जहां नेतृत्व, उम्मीदें और जनता की भूमिका मिलकर एक नए शासन मॉडल की ओर इशारा कर रही हैं।

  • बंगाल चुनाव: सुबह 9 बजे तक 18% मतदान, खरगे की अपील- बिना डर के करें वोट; TMC-BJP में जुबानी जंग तेज

    बंगाल चुनाव: सुबह 9 बजे तक 18% मतदान, खरगे की अपील- बिना डर के करें वोट; TMC-BJP में जुबानी जंग तेज

    कोलकाता। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में बुधवार को 142 सीटों पर मतदान जारी है। सुबह 9 बजे तक राज्य में करीब 18 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। इस चरण में कुल 1,448 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला होना है। राज्य की सियासत में इस समय मुकाबला बेहद दिलचस्प है एक ओर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस (TMC) लगातार चौथी बार सत्ता में वापसी की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी ओर भाजपा राज्य में पहली बार सरकार बनाने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है।

    शुभेंदु अधिकारी ने मतदान प्रक्रिया पर उठाए सवाल
    भाजपा नेता और विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के मतदान केंद्रों के आसपास मौजूद रहने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जहां धारा 163 लागू है, वहां मुख्यमंत्री का इस तरह घूमना नियमों पर सवाल खड़ा करता है। शुभेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया कि इस तरह की गतिविधियां चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर प्रभाव डाल सकती हैं।

    खरगे की अपील- बिना डर लोकतांत्रिक अधिकार का प्रयोग करें
    कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पश्चिम बंगाल के मतदाताओं से बड़ी संख्या में मतदान करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि लोग बिना किसी डर या दबाव के अपने लोकतांत्रिक अधिकार का उपयोग करें। खरगे ने कहा कि यह समय उन ताकतों के खिलाफ खड़े होने का है जो जनता के अधिकारों को कमजोर करने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने युवाओं और पहली बार वोट डालने वालों से विशेष रूप से सक्रिय भागीदारी की अपील की। खरगे ने अपने संदेश में कहा कि मतदाता विकास, प्रगतिशील मूल्यों, भाईचारे और सामाजिक सद्भाव के लिए मतदान करें। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल हमेशा बदलाव और लोकतांत्रिक चेतना का केंद्र रहा है और यह चुनाव भी उसी दिशा में महत्वपूर्ण अवसर है।

    मिथुन चक्रवर्ती का बड़ा दावा
    भाजपा नेता और अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती ने मतदान के दौरान दावा किया कि इस बार मतदान प्रतिशत 90 प्रतिशत से अधिक जा सकता है। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा हुआ तो चुनाव के नतीजे बड़े बदलाव का संकेत देंगे।

    अभिषेक बनर्जी का भाजपा पर हमला
    तृणमूल कांग्रेस नेता अभिषेक बनर्जी ने भवानीपुर सीट पर मतदान के बाद भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि इस चुनाव में टीएमसी की जीत तय है और भाजपा 50 से भी कम सीटों पर सिमट सकती है। अभिषेक बनर्जी ने कहा कि भाजपा हर चुनाव में बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन नतीजे हमेशा टीएमसी के पक्ष में आते हैं। उन्होंने पिछले चुनावों के आंकड़े गिनाते हुए अपनी पार्टी की जीत का भरोसा जताया।
    तृणमूल कांग्रेस नेता अभिषेक बनर्जी ने भवानीपुर सीट पर मतदान के बाद भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि इस चुनाव में टीएमसी की जीत तय है और भाजपा 50 से भी कम सीटों पर सिमट सकती है। अभिषेक बनर्जी ने कहा कि भाजपा हर चुनाव में बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन नतीजे हमेशा टीएमसी के पक्ष में आते हैं। उन्होंने पिछले चुनावों के आंकड़े गिनाते हुए अपनी पार्टी की जीत का भरोसा जताया।

    4 मई को आएंगे नतीजे
    राज्य में दूसरे और अंतिम चरण का मतदान जारी है। इससे पहले पहले चरण में 23 अप्रैल को 152 सीटों पर वोटिंग हो चुकी है। सभी सीटों के नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे।

  • मल्लिकार्जुन खरगे के विवादित बयान पर BJP ने कांग्रेस को आड़े हाथों लिया..

    मल्लिकार्जुन खरगे के विवादित बयान पर BJP ने कांग्रेस को आड़े हाथों लिया..


    नई दिल्ली:कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के हालिया ‘सांप’ बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई हलचल पैदा कर दी है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने इस बयान को कांग्रेस की हताशा और राजनीतिक रणनीति का हिस्सा बताया। नबीन ने स्पष्ट किया कि खरगे के शब्द दरअसल गांधी परिवार के निर्देशों के तहत आ रहे हैं और वे रिमोट कंट्रोल की तरह चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह बयान पूरी तरह से लोगों को सांप्रदायिक रूप से भड़काने और राजनीतिक माहौल को तनावपूर्ण बनाने की कोशिश है।

    नितिन नबीन ने सीधे तौर पर सोनिया गांधी और राहुल गांधी को घेरते हुए कहा कि कांग्रेस हमेशा मर्यादा लांघती रही है और जब भी इस तरह के विवादास्पद बयान दिए जाते हैं, जनता भाजपा को मजबूत समर्थन देती है। उन्होंने दावा किया कि पहले ये शब्द सीधे गांधी परिवार से आते थे और अब मल्लिकार्जुन खरगे के माध्यम से जनता तक पहुँच रहे हैं। नबीन ने कहा कि कांग्रेस के इस तरह के बयान इतिहास में हमेशा जनता के दृष्टिकोण को प्रभावित करने में असफल रहे हैं।

    भाजपा अध्यक्ष ने पश्चिम बंगाल और केरल की आगामी विधानसभा चुनावों पर भी प्रकाश डाला। बंगाल में भाजपा के वोट शेयर में लगातार वृद्धि हुई है और पार्टी इस बार राज्य में सरकार बनाने के लिए पूरी तरह तैयार है। केरल में उन्होंने एलडीएफ और यूडीएफ के बीच ‘मैच फिक्सिंग’ का आरोप लगाया और कहा कि जनता इस फिक्सिंग से तंग आ चुकी है। नबीन ने कहा कि भाजपा का वोट बैंक लगातार बढ़ रहा है और लोग पार्टी को एक सशक्त विकल्प के रूप में देख रहे हैं।

    राहुल गांधी द्वारा बीजेपी और एलडीएफ के बीच ‘सेटिंग’ के आरोपों पर नबीन ने पलटवार किया। उन्होंने राहुल गांधी को कमजोर ज्ञान वाला नेता करार देते हुए सवाल उठाया कि अगर सेटिंग होती, तो पड़ोसी राज्य तमिलनाडु में कांग्रेस और कम्युनिस्ट गठबंधन क्यों हैं। उन्होंने सबरीमाला मुद्दे पर भी कांग्रेस को घेरा और पूछा कि क्यों इस संवेदनशील विषय पर राहुल गांधी चुप्पी साध लेते हैं। नबीन ने स्पष्ट किया कि भाजपा का लक्ष्य ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ है और पार्टी देश में कम्युनिस्ट सिस्टम को पूरी तरह उखाड़ फेंकने के लिए प्रतिबद्ध है।

    असम चुनाव को लेकर भी भाजपा अध्यक्ष ने टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पूरी तरह निराश और हताश स्थिति में है, जबकि भाजपा पिछले प्रदर्शन से भी बेहतर परिणाम लाने के लिए तैयार है। दक्षिण भारत में सुपरस्टार और टीवीके प्रमुख विजय की राजनीति में एंट्री पर नबीन ने कहा कि राजनीति में पूर्ण समय और समर्पण जरूरी है, पार्ट-टाइम से कोई काम नहीं चलता। उन्होंने तमिलनाडु में भाजपा के AIADMK के साथ गठबंधन का उल्लेख करते हुए पार्टी की रणनीति का स्पष्ट संकेत दिया।

    नबीन ने यह भी कहा कि राष्ट्रीय हित के मुद्दों पर शब्दों की मर्यादा के साथ कड़ा रुख अपनाना भाजपा का कर्तव्य है और पार्टी जनता के विश्वास और समर्थन को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उसकी रणनीतियों और बयानबाजी का लक्ष्य केवल भ्रम और विवाद फैलाना है, जबकि जनता भाजपा को एक सशक्त विकल्प के रूप में देख रही है।

  • सुप्रिया श्रीनेत का बीजेपी पर हमला: इंदौर-भोपाल में पत्थरबाजी, दूषित पानी से मौतों पर चुप्पी क्यों?

    सुप्रिया श्रीनेत का बीजेपी पर हमला: इंदौर-भोपाल में पत्थरबाजी, दूषित पानी से मौतों पर चुप्पी क्यों?


    भोपालभोपाल में प्रदेश कांग्रेस कार्यालय पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने केंद्र सरकार और बीजेपी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि इंदौर और भोपाल में भाजपा युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस दफ्तरों पर पत्थरबाजी की, बैरिकेड तोड़े और हंगामा किया, जबकि पुलिस मूकदर्शक बनी रही।

    बीजेपी कार्यकर्ता पत्थरबाज बन गए
    श्रीनेत ने कहा कि दोनों शहरों में भाजपा कार्यकर्ताओं ने चार-चार बैरिकेड तोड़कर कांग्रेस कार्यालय तक पहुंचने की कोशिश की। उनके मुताबिक पूरी घटना कैमरों में रिकॉर्ड है, इसके बावजूद नामजद एफआईआर दर्ज नहीं की जा रही। उन्होंने सवाल उठाया, “जब साफ दिख रहा है कि पत्थर कौन चला रहा था, तो कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?उन्होंने इसे राजनीतिक विरोध नहीं बल्कि “संगठित गुंडागर्दी” करार दिया।

    दूषित पानी से मौतों पर सरकार घिरी
    कांग्रेस प्रवक्ता ने इंदौर में कथित रूप से दूषित पानी पीने से 35 लोगों की मौत का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि जब लोग जान गंवा रहे थे, तब बीजेपी नेताओं की ओर से न तो संवेदना जताई गई और न ही जिम्मेदारी तय की गई।

    श्रीनेत ने कहा, “जब जनता मर रही थी, तब चुप्पी थी। आज राजनीतिक विरोध के नाम पर सड़क पर हिंसा की जा रही है। जनता सब देख रही है।”

    भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर निशाना
    भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधा। श्रीनेत ने आरोप लगाया कि यह डील किसानों, लघु एवं मध्यम उद्योगों, ऊर्जा सुरक्षा और डेटा संप्रभुता के हितों के खिलाफ है।

    उनके अनुसार, अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ में बड़ी रियायत, रूस से सस्ता तेल खरीदने में दूरी और अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए बाजार खोलने जैसे फैसलों से भारतीय किसानों पर दबाव बढ़ेगा।

    24 फरवरी को किसान महापंचायत
    श्रीनेत ने बताया कि 24 फरवरी को भोपाल में किसान महापंचायत आयोजित की जाएगी, जिसमें राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे शामिल होंगे। उनका कहना है कि मध्यप्रदेश लंबे समय से किसान आंदोलनों की भूमि रहा है और प्रदेश के किसान पहले से आर्थिक दबाव में हैं, इसलिए आंदोलन की शुरुआत यहीं से की जा रही है।

    युवा कांग्रेस के प्रदर्शन का बचाव
    दिल्ली में एआई समिट के दौरान हुए विरोध प्रदर्शन पर श्रीनेत ने कहा कि यह समिट के खिलाफ नहीं, बल्कि “देशहित से समझौते” के खिलाफ था। उन्होंने कहा कि युवा देश की आवाज हैं और आने वाले समय में यह आंदोलन और तेज होगा।

  • चन्नी के बयान पर कांग्रेस हाईकमान सख्त, राहुल गांधी ने दी क्लास, पंजाब में कोई बदलाव नहीं

    चन्नी के बयान पर कांग्रेस हाईकमान सख्त, राहुल गांधी ने दी क्लास, पंजाब में कोई बदलाव नहीं


    नई दिल्ली: पंजाब में पूर्व मुख्यमंत्री और जालंधर से सांसद चरणजीत सिंह चन्नी के बयान को लेकर मचा हंगामा आज नई दिल्ली में कांग्रेस हाईकमान की बैठक के बाद कुछ हद तक शांत हुआ। बैठक कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की अध्यक्षता में हुई जिसमें राहुल गांधी सहित पार्टी के वरिष्ठ नेता मौजूद थे।

    सूत्रों के मुताबिक चन्नी के उस बयान के बाद ही पंजाब कांग्रेस के कई नेताओं को दिल्ली तलब किया गया था। बैठक में राहुल गांधी ने नेताओं को अनुशासन और जिम्मेदारी के पाठ पढ़ाते हुए साफ कर दिया कि कांग्रेस में किसी तरह की अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने चन्नी के बयान पर नाराजगी जताई और स्पष्ट किया कि पंजाब कांग्रेस के प्रमुख पदों पर कोई बदलाव नहीं होगा। राज्य अध्यक्ष महासचिव नेता प्रतिपक्ष और महिला कांग्रेस अध्यक्ष जैसे पद ज्यों के त्यों बने रहेंगे।बैठक में शामिल नेताओं में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी महासचिव केसी वेणुगोपाल पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और पंजाब प्रभारी भूपेश सिंह बघेल सुखजिंदर सिंह रंधावा पंजाब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा वरिष्ठ नेता अंबिका सोनी और अन्य नेता शामिल थे।

    चन्नी ने हाल ही में एक वीडियो में कहा था कि पंजाब में प्रदेश अध्यक्ष महासचिव नेता प्रतिपक्ष और महिला विंग की अध्यक्ष सभी अपर कास्ट से हैं। उनका सवाल था कि बड़े पदों पर दलितों का प्रतिनिधित्व क्यों नहीं है जबकि पंजाब में दलित आबादी लगभग 38 प्रतिशत है। उनके इस बयान ने पार्टी में विभिन्न प्रतिक्रियाओं को जन्म दिया। कुछ नेताओं ने इसे पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाने वाला बताया तो कुछ ने इसे जातीय राजनीति से जोड़ने की कोशिश करार दिया।विवाद बढ़ने पर चन्नी ने सफाई देते हुए कहा कि उनका उद्देश्य किसी के खिलाफ बात करना नहीं था। उन्होंने बताया कि उनके शब्दों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया और उन्हें जातीय राजनीति से जोड़ने की कोशिश की गई। चन्नी ने यह भी कहा कि कांग्रेस ने हमेशा उन्हें सम्मान और जिम्मेदारी दी जिन्हें उन्होंने ईमानदारी से निभाया।

    पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं और चन्नी के बयान ने पार्टी के भीतर नेतृत्व और जातीय संतुलन के सवाल को फिर से ताजा कर दिया। हाईकमान ने स्थिति को संभालते हुए साफ किया कि पार्टी का ढांचा स्थिर रहेगा और किसी तरह का बदलाव नहीं किया जाएगा।इस बैठक के बाद कांग्रेस ने स्पष्ट संदेश दे दिया है कि संगठन में अनुशासन सर्वोपरि है और सभी नेताओं से उम्मीद की जाती है कि वे पार्टी के हित में काम करें।

  • मणिकर्णिका घाट विवाद: मल्लिकार्जुन खरगे ने PM मोदी पर लगाया विरासत नष्ट करने का आरोप, तस्वीरें कीं साझा

    मणिकर्णिका घाट विवाद: मल्लिकार्जुन खरगे ने PM मोदी पर लगाया विरासत नष्ट करने का आरोप, तस्वीरें कीं साझा

    नई दिल्ली वाराणसी के ऐतिहासिक मणिकर्णिका घाट के पुनर्विकास को लेकर अब राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि सौंदर्यीकरण और व्यवसायीकरण के नाम पर सदियों पुरानी धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को बुलडोजर से ध्वस्त किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि इस तरह के कदम काशी की आत्मा और उसकी परंपराओं को नुकसान पहुंचा रहे हैं।

    PM मोदी पर खरगे का तीखा हमला

    गुरुवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट साझा कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा हमला बोला। उन्होंने लिखा कि पहले काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के निर्माण के दौरान छोटे-बड़े मंदिरों और देवालयों को तोड़ा गया और अब प्राचीन घाटों की बारी आ गई है। खरगे का आरोप है कि सरकार इतिहास की धरोहरों को मिटाकर केवल अपनी नेम-प्लेट चिपकाने में जुटी है।

    तस्वीरें और वीडियो किए साझा

    खरगे ने अपने पोस्ट में कुछ तस्वीरें और वीडियो भी साझा किए हैं, जिनमें बुलडोजर, टूटती मूर्तियां और निर्माण कार्य दिखाई दे रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि सदियों पुरानी मूर्तियों और मंदिरों को सुरक्षित कर संग्रहालयों में क्यों नहीं रखा गया। कांग्रेस अध्यक्ष ने लिखा, “लाखों लोग मोक्ष की कामना लेकर काशी आते हैं। क्या सरकार का इरादा भक्तों के साथ धोखा करने का है?”

    मणिकर्णिका घाट का धार्मिक महत्व

    मणिकर्णिका घाट हिंदू धर्म के सबसे पवित्र अंतिम संस्कार स्थलों में से एक माना जाता है। मान्यता है कि यहां अंतिम संस्कार करने से आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह घाट वाराणसी के सबसे पुराने घाटों में शामिल है और इसका ऐतिहासिक संबंध माता सती के कर्णफूल से जुड़ा हुआ बताया जाता है।

    पुनर्विकास परियोजना के उद्देश्य

    मणिकर्णिका घाट के पुनर्विकास की नींव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7 जुलाई 2023 को रखी थी। यह परियोजना काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का हिस्सा है। इसके तहत घाट को चौड़ा करना, यात्रियों के लिए रैंप और बैठने की व्यवस्था, VIP सुविधाएं, लकड़ी बिक्री के लिए वुड प्लाजा, बेहतर साफ-सफाई और बाढ़ सुरक्षा जैसे प्रावधान शामिल हैं। इसके अलावा स्किंदिया घाट से कनेक्टिविटी को भी मजबूत किया जाएगा।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक इस परियोजना की अनुमानित लागत 17.56 करोड़ रुपये है और इसे वर्ष 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। परियोजना में इको-फ्रेंडली तकनीक का उपयोग कर लकड़ी की खपत और प्रदूषण को कम करने का दावा किया गया है।

    क्यों हो रहा है विवाद?

    इस परियोजना को लेकर स्थानीय लोगों और विपक्ष की ओर से आरोप लगाए जा रहे हैं कि निर्माण कार्य के दौरान कई प्राचीन मूर्तियां और छोटे-बड़े मंदिर क्षतिग्रस्त हुए हैं। हालांकि जिला प्रशासन ने इन आरोपों को खारिज किया है। प्रशासन का कहना है कि किसी भी मंदिर या सांस्कृतिक संरचना को नुकसान नहीं पहुंचाया जा रहा है और सभी धार्मिक प्रतीकों को सुरक्षित रखते हुए बाद में पुनः स्थापित किया जाएगा।

    वाराणसी जिला प्रशासन ने सोशल मीडिया पर भ्रामक जानकारी फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी है।

  • सोनिया गांधी को पत्र लिखना पड़ा महंगा ओडिशा के पूर्व विधायक मोहम्मद मुकीम कांग्रेस से निष्कासित

    सोनिया गांधी को पत्र लिखना पड़ा महंगा ओडिशा के पूर्व विधायक मोहम्मद मुकीम कांग्रेस से निष्कासित


    नई दिल्ली । भुवनेश्वर कांग्रेस पार्टी ने ओडिशा के पूर्व विधायक मोहम्मद मुकीम को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया है। यह कदम पार्टी की अनुशासन समिति के निर्देश पर लिया गया क्योंकि मुकीम पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप था। यह फैसला पार्टी के भीतर नेतृत्व और कार्यप्रणाली को लेकर बढ़ती असंतोष की स्थितियों के बीच आया है।

    सोनिया गांधी को पत्र लिखकर जताई थी नाराजगी

    मुकीम जो पहले बाराबती-कटक सीट से विधायक रह चुके हैं ने हाल ही में कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को एक पत्र लिखा था जिसमें उन्होंने पार्टी की स्थिति और नेतृत्व पर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की थी। पत्र में उन्होंने कांग्रेस की कमजोर स्थिति का उल्लेख करते हुए सोनिया गांधी से पार्टी के भविष्य के लिए मार्गदर्शन की अपील की थी। मुकीम ने लिखा था कि कांग्रेस वर्तमान में कठिन दौर से गुजर रही है और संगठन जमीनी स्तर पर कमजोर होता जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा था कि सोनिया गांधी का मार्गदर्शन पार्टी के लिए बेहद जरूरी है ताकि पार्टी को इस संकट से उबारा जा सके।

    खड़गे की उम्र और नेतृत्व पर सवाल

    पत्र का सबसे विवादास्पद हिस्सा मल्लिकार्जुन खड़गे की उम्र पर था। मुकीम ने खड़गे की उम्र 83 वर्ष का जिक्र करते हुए यह सवाल उठाया कि विपक्ष के नेता के रूप में इतनी उम्र में सक्रियता दौड़-भाग और जनसंपर्क करना संभव नहीं हो पा रहा है। उन्होंने खड़गे को सलाहकार की भूमिका में रखने की सलाह दी और युवा नेतृत्व को आगे लाने की आवश्यकता पर बल दिया। मुकीम ने प्रियंका गांधी वाड्रा को केंद्रीय भूमिका में और राहुल गांधी को लोकसभा में विपक्ष के नेता के रूप में प्रभावी बनाए जाने की बात भी की।

    युवा नेताओं को आगे लाने की वकालत

    मुकीम ने अपने पत्र में पार्टी में युवा नेताओं को बढ़ावा देने की वकालत की। उन्होंने सचिन पायलट डीके शिवकुमार ए रेवंत रेड्डी और शशि थरूर जैसे नेताओं को पार्टी की शीर्ष नेतृत्व टीम में शामिल करने की बात की। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस को ज्योतिरादित्य सिंधिया मिलिंद देवड़ा और हिमंता बिस्वा सरमा जैसे नेताओं के पार्टी छोड़ने के कारणों को समझना चाहिए और इसे पार्टी की उपेक्षा और अनदेखी का परिणाम बताया।

    राहुल गांधी से मुलाकात न होने की शिकायत

    पत्र में मुकीम ने यह भी शिकायत की थी कि वे पिछले तीन वर्षों से राहुल गांधी से मुलाकात की कोशिश कर रहे थे लेकिन उन्हें कभी समय नहीं मिल सका। उन्होंने इसे अपनी व्यक्तिगत पीड़ा नहीं बल्कि पार्टी कार्यकर्ताओं और नेतृत्व के बीच बढ़ती दूरी का प्रतीक बताया।

    कांग्रेस की अनुशासनात्मक कार्रवाई

    कांग्रेस ने मुकीम के इस पत्र को पार्टी अनुशासन के खिलाफ माना और उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया। ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि पार्टी विरोधी गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और अनुशासन बनाए रखना पार्टी की प्राथमिकता है।
    कांग्रेस पार्टी की ओर से इस मामले पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है लेकिन यह कदम संगठन में अनुशासन बनाए रखने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। पार्टी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पार्टी के भीतर अनुशासनहीनता के लिए कोई स्थान नहीं है।

    संघर्षपूर्ण समय में पार्टी का कदम

    यह घटना उस समय हुई है जब कांग्रेस पार्टी अपने संगठन और नेतृत्व को लेकर आंतरिक असंतोष का सामना कर रही है। मुकीम का पत्र इस असंतोष की गहराई को उजागर करता है और उनकी निष्कासन की कार्रवाई से यह भी साफ हो जाता है कि कांग्रेस नेतृत्व को पार्टी में गहरी अंतर्विरोधों की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।