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  • राहुल गांधी पर FIR से एमपी कांग्रेस में उबाल, पटवारी बोले दलित विरोधी है BJP, कमलनाथ ने कहा चोरी और सीनाजोरी

    राहुल गांधी पर FIR से एमपी कांग्रेस में उबाल, पटवारी बोले दलित विरोधी है BJP, कमलनाथ ने कहा चोरी और सीनाजोरी

    भोपाल । उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद कथित शुद्धिकरण यज्ञ को लेकर शुरू हुआ विवाद अब मध्य प्रदेश की सियासत में भी जोर पकड़ चुका है। राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज होने के बाद मध्य प्रदेश कांग्रेस के नेताओं ने बीजेपी और आरएसएस पर तीखा हमला बोला है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे दलितों के सम्मान से जुड़ा मुद्दा बताया है। दोनों नेताओं ने आरोप लगाया कि जिस मामले में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के अपमान का आरोप लगाया जा रहा है उसमें दोषियों पर कार्रवाई करने के बजाय राहुल गांधी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया।

    जीतू पटवारी ने बीजेपी की विचारधारा पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद सभा स्थल का शुद्धिकरण कराया गया। पटवारी के मुताबिक जब राहुल गांधी ने इस कथित घटना और छुआछूत के मुद्दे को सार्वजनिक तौर पर उठाया तो उनके खिलाफ ही FIR दर्ज करा दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी के सिस्टम में दलितों के लिए जगह नहीं है और आवाज उठाने वालों को दबाने की कोशिश की जा रही है। पटवारी ने इस पूरे घटनाक्रम को बीजेपी और आरएसएस की दलित विरोधी सोच से जोड़ते हुए सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए।

    पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी इस मामले में बीजेपी पर हमला बोला। उन्होंने कार्रवाई को चोरी और सीनाजोरी करार देते हुए कहा कि पहले दलित नेता के सम्मान को ठेस पहुंचाने वाला कदम उठाया गया और जब उसका विरोध किया गया तो विरोध करने वाले नेता के खिलाफ ही गंभीर धाराओं में FIR दर्ज कर दी गई। कमलनाथ ने कहा कि कांग्रेस पार्टी मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी के साथ मजबूती से खड़ी है। उन्होंने दावा किया कि इस घटनाक्रम को लेकर दलित समाज में नाराजगी पैदा हुई है और आने वाले समय में इसका राजनीतिक असर देखने को मिल सकता है।

    दरअसल विवाद उत्तराखंड के हल्द्वानी स्थित रामलीला मैदान से जुड़ा है। यहां कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की जनसभा आयोजित हुई थी। आरोप है कि रैली समाप्त होने के कुछ दिन बाद श्री राम सेना नाम के संगठन से जुड़े लोगों ने मैदान में शुद्धिकरण यज्ञ और हवन किया। कांग्रेस ने इस घटना को जातिगत भेदभाव और छुआछूत की मानसिकता से जोड़ते हुए विरोध जताया। कांग्रेस की ओर से यह सवाल उठाया गया कि क्या किसी दलित नेता के कार्यक्रम के बाद सार्वजनिक स्थान को शुद्ध करने की जरूरत पड़ती है।

    मामले ने तब और राजनीतिक रंग ले लिया जब राहुल गांधी ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने संविधान का हवाला देते हुए कहा कि देश में छुआछूत जैसी कुप्रथाओं के खिलाफ सख्त रुख जरूरी है। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तराखंड सरकार से कथित शुद्धिकरण के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। उन्होंने इस घटना को छुआछूत से जोड़ते हुए इसे संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ बताया।
    मामले ने तब और राजनीतिक रंग ले लिया जब राहुल गांधी ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने संविधान का हवाला देते हुए कहा कि देश में छुआछूत जैसी कुप्रथाओं के खिलाफ सख्त रुख जरूरी है। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तराखंड सरकार से कथित शुद्धिकरण के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। उन्होंने इस घटना को छुआछूत से जोड़ते हुए इसे संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ बताया।

    राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस के अगले दिन हल्द्वानी में उनके खिलाफ FIR दर्ज होने से विवाद और गहरा गया। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक यह मामला वाल्मीकि समाज से जुड़े अमित कुमार की शिकायत पर दर्ज किया गया। शिकायत में दावा किया गया कि मैदान में केवल साफ सफाई अभियान और धार्मिक अनुष्ठान हुआ था तथा इसका किसी जाति या मल्लिकार्जुन खड़गे से संबंध नहीं था। शिकायतकर्ता ने राहुल गांधी पर धार्मिक आयोजन को छुआछूत से जोड़कर जातिगत तनाव बढ़ाने का आरोप लगाया।

    पुलिस ने राहुल गांधी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 196 और धारा 299 के साथ SC-ST अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। FIR के बाद मध्य प्रदेश कांग्रेस का विरोध सामने आने से यह विवाद अब उत्तराखंड तक सीमित नहीं रहा है। बीजेपी और कांग्रेस के बीच आरोप प्रत्यारोप तेज होने के साथ मामला राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है।

  • खड़गे की रैली से शुरू हुआ विवाद फिर भड़का! शुद्धिकरण यज्ञ पर धामी ने साफ की तस्वीर बोले जाति नहीं धार्मिक नारों का हुआ शुद्धिकरण

    खड़गे की रैली से शुरू हुआ विवाद फिर भड़का! शुद्धिकरण यज्ञ पर धामी ने साफ की तस्वीर बोले जाति नहीं धार्मिक नारों का हुआ शुद्धिकरण


    नई दिल्ली। उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद शुरू हुआ शुद्धिकरण यज्ञ का विवाद एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के हमले के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पलटवार करते हुए इस पूरे मामले को अलग नजरिए से सामने रखा है। धामी ने कांग्रेस के उस आरोप को खारिज किया है जिसमें शुद्धिकरण यज्ञ को जातीय भेदभाव से जोड़कर सवाल उठाए गए थे। मुख्यमंत्री का कहना है कि हल्द्वानी के रामलीला मैदान में किसी व्यक्ति या जाति के शुद्धिकरण के लिए यज्ञ नहीं कराया गया बल्कि रैली के दौरान लगाए गए कथित धार्मिक नारों से आहत भावनाओं के बाद हिंदू सामाजिक संगठनों की ओर से यह आयोजन किया गया था।

    मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि खड़गे के नाम पर जातीय शुद्धिकरण की बात करना ही गलत है। उनका तर्क है कि उत्तराखंड में बहुत कम लोग मल्लिकार्जुन खड़गे की जाति के बारे में जानते हैं। ऐसे में इस आयोजन को जातीय नजरिए से देखना उचित नहीं है। धामी ने स्पष्ट किया कि शुद्धिकरण किसी व्यक्ति का नहीं बल्कि उस स्थान का किया गया था जहां कांग्रेस की रैली आयोजित हुई थी। उनके मुताबिक रैली के दौरान एक धर्म विशेष से जुड़े कथित नारे लगाए गए थे जिनसे हिंदू समाज की भावनाएं आहत हुईं और इसी के बाद धार्मिक संगठनों ने यज्ञ का आयोजन किया।

    धामी ने यह भी स्पष्ट किया कि इस आयोजन में बीजेपी के पदाधिकारी या कार्यकर्ता शामिल नहीं थे। उनके अनुसार हिंदू सामाजिक संगठनों ने अपने स्तर पर रामलीला मैदान में यज्ञ कराया। मुख्यमंत्री की इस सफाई के बाद विवाद खत्म होने के बजाय राजनीतिक रूप से और तेज होता दिखाई दे रहा है। कांग्रेस इस घटना को सामाजिक समानता और जातीय भेदभाव के सवाल से जोड़ रही है जबकि बीजेपी इसे धार्मिक भावनाओं से जुड़ा मामला बताते हुए कांग्रेस पर राजनीति करने का आरोप लगा रही है।

    राहुल गांधी के हमले के बाद मुख्यमंत्री धामी ने कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस लगातार तुष्टिकरण की राजनीति करती रही है और उनकी सरकार के सख्त फैसलों से पार्टी असहज है। धामी ने समान नागरिक संहिता धर्मांतरण विरोधी कानून दंगा विरोधी कानून और जिहाद के खिलाफ सख्त कानून जैसे फैसलों का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार उत्तराखंड में कानून व्यवस्था और सामाजिक हितों को प्राथमिकता दे रही है।

    हल्द्वानी का यह विवाद अब केवल एक यज्ञ या राजनीतिक रैली तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि इसके जरिए कांग्रेस और बीजेपी अपने अपने राजनीतिक मुद्दों को धार दे रहे हैं। कांग्रेस जहां इसे सामाजिक भेदभाव का प्रतीक बता रही है वहीं बीजेपी कथित धार्मिक नारों और आहत भावनाओं का मुद्दा उठा रही है। उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ ही ऐसे विवादों का राजनीतिक असर बढ़ना तय माना जा रहा है। आने वाले दिनों में दोनों दल इस मुद्दे को लेकर एक दूसरे पर और तीखे हमले कर सकते हैं।

  • कांग्रेस के बड़े नेताओं से क्यों खफा हुए मल्लिकार्जुन खरगे? CWC बैठक में शुद्धिकरण विवाद पर उठाया मुद्दा

    कांग्रेस के बड़े नेताओं से क्यों खफा हुए मल्लिकार्जुन खरगे? CWC बैठक में शुद्धिकरण विवाद पर उठाया मुद्दा


    नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने हल्द्वानी में उनकी रैली के बाद सामने आए कथित शुद्धिकरण विवाद को लेकर पार्टी के भीतर ही कुछ नेताओं की चुप्पी पर नाराजगी जताई है। बुधवार को हुई कांग्रेस वर्किंग कमेटी यानी CWC की बैठक में खरगे ने कहा कि उन्हें इस बात का दुख है कि कई सदस्य खुलकर उनके समर्थन में सामने नहीं आए और उन्होंने इस घटना की निंदा नहीं की। खास तौर पर उन्होंने उन नेताओं का जिक्र किया जो लगातार मीडिया में सक्रिय रहते हैं। हालांकि खरगे ने किसी नेता का नाम नहीं लिया है। इस घटनाक्रम की जानकारी बैठक में मौजूद नेताओं के हवाले से सामने आई है और कांग्रेस की ओर से खरगे की निजी प्रतिक्रिया को लेकर कोई अलग आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

    दरअसल यह पूरा विवाद उत्तराखंड के हल्द्वानी स्थित रामलीला मैदान से जुड़ा है। 8 अगस्त को खरगे ने यहां एक सार्वजनिक सभा को संबोधित किया था। इसके बाद वहां कथित तौर पर शुद्धिकरण अनुष्ठान किए जाने की खबर सामने आई। कांग्रेस ने इस घटना को जातिगत भेदभाव से जोड़ते हुए इसकी आलोचना की और आरोप लगाया कि आयोजन से जुड़े लोगों का बीजेपी से संबंध है। दूसरी तरफ बीजेपी ने इस आयोजन से दूरी बनाई और पार्टी के स्तर पर किसी तरह की भूमिका से इनकार किया। मामले ने धीरे धीरे राजनीतिक रंग ले लिया और अब यह मुद्दा संसद से लेकर कांग्रेस की CWC बैठक तक पहुंच गया है।

    खरगे पहले ही राज्यसभा में इस मुद्दे को उठा चुके हैं। उन्होंने सदन में कहा था कि रैली के बाद मंच का शुद्धिकरण किया जाना उन्हें बेहद अपमानजनक लगा। उन्होंने यह भी कहा कि वह दलित समुदाय से आते हैं लेकिन उन्होंने कभी किसी से अपने लिए विशेष संरक्षण की मांग नहीं की। उनके मुताबिक इस घटना ने उन्हें छुआछूत के दर्द का एहसास कराया। खरगे ने इस मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी उठाई थी।

    CWC की बैठक में खरगे की नाराजगी सामने आने के बाद कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने पार्टी का पक्ष स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने इस घटना का मुद्दा उठाया था और इसकी निंदा भी की थी। उनके मुताबिक कार्य समिति ने इस घटना को अस्वीकार्य और निंदनीय माना है। हालांकि बैठक में खरगे ने यह भी संकेत दिया कि कुछ नेता ऐसे हैं जो पार्टी की आधिकारिक लाइन से अलग बयान देते हैं और लेख भी लिखते हैं। इस टिप्पणी को पार्टी के भीतर चल रही असहजता से जोड़कर देखा जा रहा है।

    विवाद के दूसरे पक्ष में बीजेपी ने भी मामले की जांच का भरोसा दिया है। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने राज्यसभा में घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा कि बीजेपी इस तरह की गतिविधियों का समर्थन नहीं करती। उन्होंने जांच कराने और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई का आश्वासन दिया था। यानी एक तरफ कांग्रेस इस घटना को सामाजिक और जातिगत सम्मान से जोड़कर देख रही है तो दूसरी तरफ बीजेपी इसे पार्टी से जोड़ने के आरोपों से इनकार करते हुए जांच की बात कर रही है।

    इस पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे ज्यादा चर्चा अब खरगे की अपनी पार्टी के नेताओं से अपेक्षा को लेकर हो रही है। CWC जैसी शीर्ष बैठक में उन्होंने जिस तरह अपनी नाराजगी और दुख जाहिर किया है उससे साफ है कि हल्द्वानी का विवाद कांग्रेस के लिए केवल बीजेपी पर हमला करने का मुद्दा नहीं रहा बल्कि पार्टी के भीतर भी चर्चा का विषय बन चुका है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि खरगे की टिप्पणी से किन नेताओं की ओर संकेत था। इसलिए बिना नाम सामने आए किसी नेता को उनकी नाराजगी का जिम्मेदार बताना उचित नहीं होगा। फिलहाल हल्द्वानी का यह विवाद जाति सम्मान राजनीतिक बयानबाजी और दलों के बीच आरोप प्रत्यारोप के कारण लगातार सुर्खियों में बना हुआ है।

  • मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र पर लगाए जनता की जेब पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के गंभीर आरोप

    मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र पर लगाए जनता की जेब पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के गंभीर आरोप


    नई दिल्ली। देश में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर राजनीतिक माहौल एक बार फिर गरमा गया है। ईंधन दरों में हालिया बढ़ोतरी ने आम जनता की चिंताओं को बढ़ा दिया है, वहीं विपक्ष ने इसे लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि को लेकर सरकार को निशाने पर लिया और आरोप लगाया कि देश में आम नागरिकों पर आर्थिक दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। उन्होंने कहा कि बीते कुछ दिनों के दौरान ईंधन की कीमतों में कई बार बदलाव हुआ है, जिससे आम लोगों के घरेलू बजट पर सीधा असर पड़ा है। उनके अनुसार यह केवल कीमतों में बढ़ोतरी का मामला नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव महंगाई और रोजमर्रा की आवश्यकताओं पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है।

    खड़गे ने कहा कि लगातार बढ़ती कीमतों ने लोगों की आर्थिक योजनाओं को प्रभावित किया है और आम परिवारों के लिए अतिरिक्त खर्च का बोझ बढ़ा दिया है। उनका मानना है कि पेट्रोल और डीजल की दरों में तेजी केवल परिवहन लागत तक सीमित नहीं रहती, बल्कि इसका असर बाजार की लगभग हर वस्तु और सेवा पर पड़ता है। ऐसे में आम आदमी को दोहरी मार झेलनी पड़ती है। उन्होंने यह भी दावा किया कि पिछले कुछ वर्षों में ईंधन से जुड़े फैसलों के कारण जनता पर अप्रत्यक्ष आर्थिक दबाव बढ़ा है और लोगों की बचत तथा खर्च दोनों पर इसका असर देखने को मिला है।

    राजनीतिक बयानबाजी के बीच खड़गे ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस समय आम जनता महंगाई और बढ़ते खर्च से जूझ रही है, उस समय ईंधन कीमतों में लगातार वृद्धि लोगों की परेशानी को और बढ़ाने का काम कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह स्थिति केवल आर्थिक नहीं बल्कि सामाजिक चिंता का विषय भी बनती जा रही है। उनका कहना है कि जब ईंधन महंगा होता है तो उसका असर हर वर्ग पर पड़ता है, चाहे वह नौकरीपेशा व्यक्ति हो, व्यापारी हो या फिर ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाला किसान।

    उन्होंने यह भी कहा कि हालिया मूल्य वृद्धि के बाद सरकारी तेल कंपनियों के प्रदर्शन में तेजी देखने को मिली, जिसे लेकर उन्होंने सवाल उठाए। उनका आरोप है कि नीतिगत फैसलों का लाभ आम जनता तक पहुंचने के बजाय कुछ विशेष क्षेत्रों को अधिक मिलता दिखाई दे रहा है। इस मुद्दे को लेकर उन्होंने सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग भी की और कहा कि जनता को राहत देने के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।

    ईंधन की कीमतें लंबे समय से देश में आर्थिक और राजनीतिक बहस का विषय रही हैं। जैसे-जैसे कीमतों में बदलाव होता है, वैसे-वैसे इसका असर आम नागरिकों के दैनिक जीवन पर भी दिखाई देता है। ऐसे में अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ती है और आम जनता को राहत देने के लिए क्या कदम सामने आते हैं।

  • 18 जून को राज्यसभा चुनाव, 24 सीटें खाली होने से बदलेगा सियासी गणित, कई दिग्गज नेताओं का कार्यकाल समाप्त

    18 जून को राज्यसभा चुनाव, 24 सीटें खाली होने से बदलेगा सियासी गणित, कई दिग्गज नेताओं का कार्यकाल समाप्त


    नई दिल्ली। देश की राजनीति में एक बार फिर बड़ा संसदीय फेरबदल देखने को मिलने वाला है, क्योंकि राज्यसभा की कई महत्वपूर्ण सीटों पर चुनावी प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। चुनाव आयोग द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार 10 राज्यों की कुल 24 राज्यसभा सीटों पर आगामी जून में मतदान कराया जाएगा, जिससे उच्च सदन की राजनीतिक संरचना में महत्वपूर्ण बदलाव संभव हैं।

    इन सीटों पर चुनाव की प्रक्रिया 18 जून को मतदान के साथ पूरी होगी। इससे पहले नामांकन, जांच और नाम वापसी की औपचारिक प्रक्रिया निर्धारित समय के अनुसार संपन्न की जाएगी। यह चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसमें कई वरिष्ठ और अनुभवी सांसदों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, जिससे संसद के ऊपरी सदन में नई राजनीतिक समीकरणों की शुरुआत होगी।

     जिन प्रमुख सांसदों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है उनमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा जैसे बड़े नाम शामिल हैं। इनके अलावा विभिन्न दलों के कई अन्य सांसद भी इस सूची में हैं, जिनका राज्यसभा कार्यकाल पूरा हो रहा है। यह स्थिति राजनीतिक दलों के लिए रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इससे आने वाले समय में सदन की संख्या और शक्ति संतुलन प्रभावित हो सकता है।

    राज्यों के हिसाब से देखें तो गुजरात, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में चार-चार सीटों पर चुनाव होगा, जबकि मध्य प्रदेश और राजस्थान में तीन-तीन सीटें खाली हो रही हैं। झारखंड में दो सीटों पर चुनाव होगा, वहीं अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, मणिपुर और मेघालय में एक-एक सीट पर प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इन सभी राज्यों में राजनीतिक दल अपने-अपने गणित को साधने में जुट गए हैं।

     इस चुनावी प्रक्रिया का सबसे बड़ा असर उन राज्यों में देखने को मिलेगा जहां विधानसभा में सीटों का संतुलन बेहद करीबी मुकाबले का है। ऐसे राज्यों में छोटे राजनीतिक अंतर भी राज्यसभा सीटों के नतीजों को प्रभावित कर सकते हैं। इसी वजह से सभी प्रमुख दलों ने अभी से रणनीति बनानी शुरू कर दी है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्यसभा चुनाव सीधे जनता द्वारा नहीं बल्कि विधायकों के माध्यम से होते हैं, इसलिए विधानसभा की संख्या ही अंतिम परिणाम तय करती है। यही कारण है कि हर पार्टी अपने विधायकों को एकजुट रखने और क्रॉस वोटिंग से बचाने पर विशेष ध्यान दे रही है।

     राज्यसभा एक स्थायी सदन है, जिसमें हर दो वर्ष में लगभग एक-तिहाई सदस्य रिटायर होते हैं और उनकी जगह नए सदस्य चुने जाते हैं। इस प्रक्रिया से सदन में निरंतरता बनी रहती है, लेकिन राजनीतिक संतुलन समय-समय पर बदलता रहता है। वर्तमान चुनाव भी इसी बदलाव की एक महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है।

    कुल मिलाकर 24 सीटों पर होने वाला यह चुनाव न केवल संख्या का खेल है, बल्कि आने वाले समय में संसद के भीतर राजनीतिक समीकरणों और दलों की ताकत को भी प्रभावित करेगा। सभी प्रमुख दल अब इन सीटों पर जीत सुनिश्चित करने के लिए अंतिम रणनीति तैयार करने में जुट गए हैं।

  • केरल CM चेहरा तय करने की कवायद तेज, नेताओं से बातचीत के बाद अब अंतिम निर्णय का इंतजार

    केरल CM चेहरा तय करने की कवायद तेज, नेताओं से बातचीत के बाद अब अंतिम निर्णय का इंतजार

    नई दिल्ली।  केरल विधानसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन के बाद अब Kerala में मुख्यमंत्री पद को लेकर सियासी हलचल अपने चरम पर पहुंच गई है। 140 सीटों वाली विधानसभा में कांग्रेस नेतृत्व वाले यूडीएफ ने 102 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया है, लेकिन अब असली चर्चा नए मुख्यमंत्री के चयन को लेकर हो रही है।
    कांग्रेस नेतृत्व इस बार सर्वसम्मति से मुख्यमंत्री चुनने की रणनीति पर काम कर रहा है। इसी कड़ी में पार्टी के वरिष्ठ नेता Rahul Gandhi ने दिल्ली में पूर्व प्रदेश अध्यक्षों और वरिष्ठ नेताओं के साथ मैराथन बैठक की। इस दौरान उन्होंने जमीनी हालात और विधायकों की राय के साथ-साथ जनता की भावनाओं को भी समझने की कोशिश की।
    सूत्रों के मुताबिक, अब फैसला पूरी तरह कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge के हाथ में है। खरगे के बेंगलुरु से दिल्ली लौटने के बाद उनकी सोनिया गांधी से अंतिम दौर की चर्चा होगी, जिसके बाद नए मुख्यमंत्री के नाम पर औपचारिक मुहर लगाई जाएगी। माना जा रहा है कि यह घोषणा बुधवार तक हो सकती है।
    सीएम पद की दौड़ में तीन बड़े नाम सबसे आगे हैं रमेश चेन्निथला, वीडी सतीशन और एआईसीसी महासचिव केसी वेणुगोपाल। इन नेताओं को लेकर पार्टी के भीतर लगातार मंथन चल रहा है। राहुल गांधी ने इन नामों पर राय जानने के लिए कई वरिष्ठ नेताओं से व्यक्तिगत बातचीत भी की है, ताकि एक ऐसा चेहरा चुना जा सके जो सभी गुटों को स्वीकार्य हो।
    इस प्रक्रिया में केवल विधायकों की राय ही नहीं, बल्कि सहयोगी दलों की भूमिका और जनता की पसंद को भी अहमियत दी जा रही है। पार्टी का कहना है कि यूडीएफ गठबंधन की एकजुटता बनाए रखना भी इस फैसले का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
    चुनाव परिणामों के बाद से ही कांग्रेस हाईकमान लगातार बैठकों में व्यस्त है और हर स्तर पर विचार-विमर्श किया जा रहा है। अजय माकन और मुकुल वासनिक जैसे पर्यवेक्षकों ने पहले ही विधायकों से फीडबैक ले लिया है, जिसे अंतिम निर्णय में शामिल किया जाएगा।
    अब पूरे राजनीतिक गलियारों की नजर इस बात पर टिकी है कि केरल की कमान आखिर किसे सौंपी जाएगी। कांग्रेस के लिए यह फैसला न सिर्फ सरकार गठन का हिस्सा है, बल्कि आने वाले वर्षों की राजनीति की दिशा भी तय करेगा।
  • तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव, थलपति विजय के नेतृत्व में नई सरकार, राष्ट्रीय नेताओं की मौजूदगी बनी चर्चा

    तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव, थलपति विजय के नेतृत्व में नई सरकार, राष्ट्रीय नेताओं की मौजूदगी बनी चर्चा

    नई दिल्ली । तमिलनाडु की राजनीति में लंबे इंतजार और गहन राजनीतिक हलचलों के बाद आखिरकार वह क्षण आ गया जिसने राज्य की सत्ता संरचना को नया रूप दे दिया। चेन्नई में आयोजित एक भव्य शपथ ग्रहण समारोह में लोकप्रिय अभिनेता से राजनेता बने Thalapathy Vijay ने आधिकारिक रूप से मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इस घटना को राज्य की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा जा रहा है, जहां परंपरागत राजनीतिक ढांचे से बाहर निकलकर एक नए नेतृत्व ने जिम्मेदारी संभाली है।

    इस समारोह की खास बात यह रही कि इसमें राष्ट्रीय स्तर के प्रमुख राजनीतिक नेता भी शामिल हुए। कांग्रेस नेता Rahul Gandhi ने कार्यक्रम में मौजूद रहकर नई सरकार को शुभकामनाएं दीं और इसे जनता की बदलती सोच का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि राज्य की जनता ने इस बार नई पीढ़ी, नए विचार और नई राजनीतिक कल्पना को अवसर दिया है, जो आने वाले समय में शासन की दिशा तय कर सकता है।

    इसी अवसर पर Mallikarjun Kharge ने भी विजय को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने पर बधाई दी। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि तमिलनाडु की राजनीति हमेशा से सामाजिक न्याय, समानता और प्रगतिशील विचारों पर आधारित रही है और उम्मीद है कि नई सरकार इन्हीं मूल्यों को आगे बढ़ाएगी। उनके अनुसार यह बदलाव केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि राजनीतिक सोच के विकास का संकेत है।

    शपथ ग्रहण समारोह चेन्नई के प्रमुख आयोजन स्थल पर बड़े पैमाने पर आयोजित किया गया, जहां राजनीतिक, सांस्कृतिक और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े कई लोग मौजूद रहे। माहौल में उत्साह और ऐतिहासिक बदलाव की झलक साफ दिखाई दे रही थी। लंबे समय से चल रही राजनीतिक अनिश्चितता अब समाप्त हो गई है और राज्य को एक नई सरकार और नया नेतृत्व मिल गया है।

    मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद अपने पहले संबोधन में थलपति विजय ने खुद को जनता का प्रतिनिधि बताया। उन्होंने कहा कि उनका राजनीतिक सफर किसी पारंपरिक राजनीतिक परिवार से नहीं जुड़ा है, बल्कि जनता के विश्वास और समर्थन ने उन्हें इस स्थान तक पहुंचाया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी सरकार झूठे वादों की बजाय ठोस काम और पारदर्शी प्रशासन पर ध्यान देगी।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह परिवर्तन तमिलनाडु की राजनीति में एक नई दिशा का संकेत है, जहां जनता ने एक गैर-पारंपरिक नेतृत्व को मौका दिया है। यह बदलाव न केवल सत्ता परिवर्तन है, बल्कि राजनीतिक सोच और जन अपेक्षाओं में आए बदलाव का भी प्रतीक है।

    नई सरकार के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि वह जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरे और प्रशासनिक अनुभव के साथ विकास कार्यों को गति दे। रोजगार, शिक्षा, बुनियादी ढांचा और सामाजिक कल्याण जैसे मुद्दे आने वाले समय में सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल रहेंगे।

    इस तरह तमिलनाडु ने एक नए राजनीतिक अध्याय की शुरुआत की है, जहां नेतृत्व, उम्मीदें और जनता की भूमिका मिलकर एक नए शासन मॉडल की ओर इशारा कर रही हैं।

  • बंगाल चुनाव: सुबह 9 बजे तक 18% मतदान, खरगे की अपील- बिना डर के करें वोट; TMC-BJP में जुबानी जंग तेज

    बंगाल चुनाव: सुबह 9 बजे तक 18% मतदान, खरगे की अपील- बिना डर के करें वोट; TMC-BJP में जुबानी जंग तेज

    कोलकाता। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में बुधवार को 142 सीटों पर मतदान जारी है। सुबह 9 बजे तक राज्य में करीब 18 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। इस चरण में कुल 1,448 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला होना है। राज्य की सियासत में इस समय मुकाबला बेहद दिलचस्प है एक ओर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस (TMC) लगातार चौथी बार सत्ता में वापसी की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी ओर भाजपा राज्य में पहली बार सरकार बनाने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है।

    शुभेंदु अधिकारी ने मतदान प्रक्रिया पर उठाए सवाल
    भाजपा नेता और विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के मतदान केंद्रों के आसपास मौजूद रहने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जहां धारा 163 लागू है, वहां मुख्यमंत्री का इस तरह घूमना नियमों पर सवाल खड़ा करता है। शुभेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया कि इस तरह की गतिविधियां चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर प्रभाव डाल सकती हैं।

    खरगे की अपील- बिना डर लोकतांत्रिक अधिकार का प्रयोग करें
    कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पश्चिम बंगाल के मतदाताओं से बड़ी संख्या में मतदान करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि लोग बिना किसी डर या दबाव के अपने लोकतांत्रिक अधिकार का उपयोग करें। खरगे ने कहा कि यह समय उन ताकतों के खिलाफ खड़े होने का है जो जनता के अधिकारों को कमजोर करने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने युवाओं और पहली बार वोट डालने वालों से विशेष रूप से सक्रिय भागीदारी की अपील की। खरगे ने अपने संदेश में कहा कि मतदाता विकास, प्रगतिशील मूल्यों, भाईचारे और सामाजिक सद्भाव के लिए मतदान करें। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल हमेशा बदलाव और लोकतांत्रिक चेतना का केंद्र रहा है और यह चुनाव भी उसी दिशा में महत्वपूर्ण अवसर है।

    मिथुन चक्रवर्ती का बड़ा दावा
    भाजपा नेता और अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती ने मतदान के दौरान दावा किया कि इस बार मतदान प्रतिशत 90 प्रतिशत से अधिक जा सकता है। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा हुआ तो चुनाव के नतीजे बड़े बदलाव का संकेत देंगे।

    अभिषेक बनर्जी का भाजपा पर हमला
    तृणमूल कांग्रेस नेता अभिषेक बनर्जी ने भवानीपुर सीट पर मतदान के बाद भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि इस चुनाव में टीएमसी की जीत तय है और भाजपा 50 से भी कम सीटों पर सिमट सकती है। अभिषेक बनर्जी ने कहा कि भाजपा हर चुनाव में बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन नतीजे हमेशा टीएमसी के पक्ष में आते हैं। उन्होंने पिछले चुनावों के आंकड़े गिनाते हुए अपनी पार्टी की जीत का भरोसा जताया।
    तृणमूल कांग्रेस नेता अभिषेक बनर्जी ने भवानीपुर सीट पर मतदान के बाद भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि इस चुनाव में टीएमसी की जीत तय है और भाजपा 50 से भी कम सीटों पर सिमट सकती है। अभिषेक बनर्जी ने कहा कि भाजपा हर चुनाव में बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन नतीजे हमेशा टीएमसी के पक्ष में आते हैं। उन्होंने पिछले चुनावों के आंकड़े गिनाते हुए अपनी पार्टी की जीत का भरोसा जताया।

    4 मई को आएंगे नतीजे
    राज्य में दूसरे और अंतिम चरण का मतदान जारी है। इससे पहले पहले चरण में 23 अप्रैल को 152 सीटों पर वोटिंग हो चुकी है। सभी सीटों के नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे।

  • मल्लिकार्जुन खरगे के विवादित बयान पर BJP ने कांग्रेस को आड़े हाथों लिया..

    मल्लिकार्जुन खरगे के विवादित बयान पर BJP ने कांग्रेस को आड़े हाथों लिया..


    नई दिल्ली:कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के हालिया ‘सांप’ बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई हलचल पैदा कर दी है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने इस बयान को कांग्रेस की हताशा और राजनीतिक रणनीति का हिस्सा बताया। नबीन ने स्पष्ट किया कि खरगे के शब्द दरअसल गांधी परिवार के निर्देशों के तहत आ रहे हैं और वे रिमोट कंट्रोल की तरह चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह बयान पूरी तरह से लोगों को सांप्रदायिक रूप से भड़काने और राजनीतिक माहौल को तनावपूर्ण बनाने की कोशिश है।

    नितिन नबीन ने सीधे तौर पर सोनिया गांधी और राहुल गांधी को घेरते हुए कहा कि कांग्रेस हमेशा मर्यादा लांघती रही है और जब भी इस तरह के विवादास्पद बयान दिए जाते हैं, जनता भाजपा को मजबूत समर्थन देती है। उन्होंने दावा किया कि पहले ये शब्द सीधे गांधी परिवार से आते थे और अब मल्लिकार्जुन खरगे के माध्यम से जनता तक पहुँच रहे हैं। नबीन ने कहा कि कांग्रेस के इस तरह के बयान इतिहास में हमेशा जनता के दृष्टिकोण को प्रभावित करने में असफल रहे हैं।

    भाजपा अध्यक्ष ने पश्चिम बंगाल और केरल की आगामी विधानसभा चुनावों पर भी प्रकाश डाला। बंगाल में भाजपा के वोट शेयर में लगातार वृद्धि हुई है और पार्टी इस बार राज्य में सरकार बनाने के लिए पूरी तरह तैयार है। केरल में उन्होंने एलडीएफ और यूडीएफ के बीच ‘मैच फिक्सिंग’ का आरोप लगाया और कहा कि जनता इस फिक्सिंग से तंग आ चुकी है। नबीन ने कहा कि भाजपा का वोट बैंक लगातार बढ़ रहा है और लोग पार्टी को एक सशक्त विकल्प के रूप में देख रहे हैं।

    राहुल गांधी द्वारा बीजेपी और एलडीएफ के बीच ‘सेटिंग’ के आरोपों पर नबीन ने पलटवार किया। उन्होंने राहुल गांधी को कमजोर ज्ञान वाला नेता करार देते हुए सवाल उठाया कि अगर सेटिंग होती, तो पड़ोसी राज्य तमिलनाडु में कांग्रेस और कम्युनिस्ट गठबंधन क्यों हैं। उन्होंने सबरीमाला मुद्दे पर भी कांग्रेस को घेरा और पूछा कि क्यों इस संवेदनशील विषय पर राहुल गांधी चुप्पी साध लेते हैं। नबीन ने स्पष्ट किया कि भाजपा का लक्ष्य ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ है और पार्टी देश में कम्युनिस्ट सिस्टम को पूरी तरह उखाड़ फेंकने के लिए प्रतिबद्ध है।

    असम चुनाव को लेकर भी भाजपा अध्यक्ष ने टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पूरी तरह निराश और हताश स्थिति में है, जबकि भाजपा पिछले प्रदर्शन से भी बेहतर परिणाम लाने के लिए तैयार है। दक्षिण भारत में सुपरस्टार और टीवीके प्रमुख विजय की राजनीति में एंट्री पर नबीन ने कहा कि राजनीति में पूर्ण समय और समर्पण जरूरी है, पार्ट-टाइम से कोई काम नहीं चलता। उन्होंने तमिलनाडु में भाजपा के AIADMK के साथ गठबंधन का उल्लेख करते हुए पार्टी की रणनीति का स्पष्ट संकेत दिया।

    नबीन ने यह भी कहा कि राष्ट्रीय हित के मुद्दों पर शब्दों की मर्यादा के साथ कड़ा रुख अपनाना भाजपा का कर्तव्य है और पार्टी जनता के विश्वास और समर्थन को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उसकी रणनीतियों और बयानबाजी का लक्ष्य केवल भ्रम और विवाद फैलाना है, जबकि जनता भाजपा को एक सशक्त विकल्प के रूप में देख रही है।

  • सुप्रिया श्रीनेत का बीजेपी पर हमला: इंदौर-भोपाल में पत्थरबाजी, दूषित पानी से मौतों पर चुप्पी क्यों?

    सुप्रिया श्रीनेत का बीजेपी पर हमला: इंदौर-भोपाल में पत्थरबाजी, दूषित पानी से मौतों पर चुप्पी क्यों?


    भोपालभोपाल में प्रदेश कांग्रेस कार्यालय पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने केंद्र सरकार और बीजेपी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि इंदौर और भोपाल में भाजपा युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस दफ्तरों पर पत्थरबाजी की, बैरिकेड तोड़े और हंगामा किया, जबकि पुलिस मूकदर्शक बनी रही।

    बीजेपी कार्यकर्ता पत्थरबाज बन गए
    श्रीनेत ने कहा कि दोनों शहरों में भाजपा कार्यकर्ताओं ने चार-चार बैरिकेड तोड़कर कांग्रेस कार्यालय तक पहुंचने की कोशिश की। उनके मुताबिक पूरी घटना कैमरों में रिकॉर्ड है, इसके बावजूद नामजद एफआईआर दर्ज नहीं की जा रही। उन्होंने सवाल उठाया, “जब साफ दिख रहा है कि पत्थर कौन चला रहा था, तो कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?उन्होंने इसे राजनीतिक विरोध नहीं बल्कि “संगठित गुंडागर्दी” करार दिया।

    दूषित पानी से मौतों पर सरकार घिरी
    कांग्रेस प्रवक्ता ने इंदौर में कथित रूप से दूषित पानी पीने से 35 लोगों की मौत का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि जब लोग जान गंवा रहे थे, तब बीजेपी नेताओं की ओर से न तो संवेदना जताई गई और न ही जिम्मेदारी तय की गई।

    श्रीनेत ने कहा, “जब जनता मर रही थी, तब चुप्पी थी। आज राजनीतिक विरोध के नाम पर सड़क पर हिंसा की जा रही है। जनता सब देख रही है।”

    भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर निशाना
    भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधा। श्रीनेत ने आरोप लगाया कि यह डील किसानों, लघु एवं मध्यम उद्योगों, ऊर्जा सुरक्षा और डेटा संप्रभुता के हितों के खिलाफ है।

    उनके अनुसार, अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ में बड़ी रियायत, रूस से सस्ता तेल खरीदने में दूरी और अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए बाजार खोलने जैसे फैसलों से भारतीय किसानों पर दबाव बढ़ेगा।

    24 फरवरी को किसान महापंचायत
    श्रीनेत ने बताया कि 24 फरवरी को भोपाल में किसान महापंचायत आयोजित की जाएगी, जिसमें राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे शामिल होंगे। उनका कहना है कि मध्यप्रदेश लंबे समय से किसान आंदोलनों की भूमि रहा है और प्रदेश के किसान पहले से आर्थिक दबाव में हैं, इसलिए आंदोलन की शुरुआत यहीं से की जा रही है।

    युवा कांग्रेस के प्रदर्शन का बचाव
    दिल्ली में एआई समिट के दौरान हुए विरोध प्रदर्शन पर श्रीनेत ने कहा कि यह समिट के खिलाफ नहीं, बल्कि “देशहित से समझौते” के खिलाफ था। उन्होंने कहा कि युवा देश की आवाज हैं और आने वाले समय में यह आंदोलन और तेज होगा।