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  • खरगे की टिप्पणी पर पीएम मोदी का जवाब, बोले- जीवन की अंतिम सांस तक देश और जनता की सेवा करता रहूंगा

    खरगे की टिप्पणी पर पीएम मोदी का जवाब, बोले- जीवन की अंतिम सांस तक देश और जनता की सेवा करता रहूंगा

    नई दिल्ली ।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की हालिया टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह अपने जीवन की अंतिम सांस तक देश और जनता की सेवा करते रहेंगे। गुजरात के बनासकांठा जिले में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने खरगे की टिप्पणी का जवाब दिया और विपक्ष पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच अफवाह फैलाने का आरोप लगाया। प्रधानमंत्री ने कहा कि उनका उद्देश्य देश के लोगों की सेवा करना है और वह जीवन के आखिरी क्षण तक इस काम में लगे रहेंगे।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बनासकांठा जिले के भिलडी में भारत बोवाइन ब्रीडिंग एंड रिसर्च सेंटर का उद्घाटन करने पहुंचे थे। इस अवसर पर आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने केंद्र सरकार की विभिन्न विकास योजनाओं का भी उल्लेख किया। कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने करीब 14 हजार करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। उन्होंने कहा कि सरकार विकास और जनकल्याण से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता दे रही है।

    अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ राजनीतिक दल देश के कठिन दौर से गुजरने पर भी राजनीतिक लाभ तलाशते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को लेकर विपक्ष ने लोगों के बीच भ्रम फैलाने की कोशिश की। मोदी ने कहा कि ईरान युद्ध के समय यह अफवाह फैलाई गई कि देश में किसानों को खाद नहीं मिलेगी और आम लोगों को LPG सिलेंडर की उपलब्धता में परेशानी होगी।

    प्रधानमंत्री के मुताबिक, इस तरह के दावों का उद्देश्य सरकार को बदनाम करना था। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता और उर्वरकों की कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद केंद्र सरकार ने इसका आर्थिक बोझ किसानों पर नहीं पड़ने दिया। सरकार ने किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए आवश्यक कदम उठाए और कृषि क्षेत्र को समर्थन देने का प्रयास किया।

    मोदी ने अपने भाषण में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस योजना के माध्यम से छोटे किसानों को अब तक 4.5 लाख करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता दी जा चुकी है। प्रधानमंत्री ने इसे किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में सरकार का महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि सरकार ने हमेशा किसानों के कल्याण को प्राथमिकता दी है।

    दरअसल, प्रधानमंत्री की यह प्रतिक्रिया कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की 25 अक्टूबर को पटना में की गई टिप्पणी के बाद सामने आई है। खरगे बिहार के पहले मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण सिंह की 139वीं जयंती के कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। इस दौरान सभा में मौजूद एक व्यक्ति ने नारा लगाते हुए कहा था कि मोदी कहीं नहीं जाएंगे।

    इस टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए खरगे ने कहा था कि मोदी का बाप भी जाएगा। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में विवाद शुरू हो गया था। अब गुजरात में प्रधानमंत्री मोदी ने जवाब देते हुए कहा कि वह अपनी अंतिम सांस तक भारत के लोगों की सेवा करते रहेंगे।

    प्रधानमंत्री के इस बयान को खरगे की टिप्पणी के जवाब के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि अपने संबोधन में उन्होंने केवल व्यक्तिगत टिप्पणी तक बात सीमित नहीं रखी, बल्कि विपक्ष की राजनीति, अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और किसानों से जुड़े मुद्दों पर भी अपनी बात रखी। गुजरात की सभा में विकास परियोजनाओं के साथ केंद्र सरकार की योजनाओं का उल्लेख भी उनके भाषण का प्रमुख हिस्सा रहा।

  • खरगे की टिप्पणी पर राजनाथ सिंह का पलटवार, बोले- प्रधानमंत्री मोदी को विचलित नहीं कर सकती ऐसी बयानबाजी

    खरगे की टिप्पणी पर राजनाथ सिंह का पलटवार, बोले- प्रधानमंत्री मोदी को विचलित नहीं कर सकती ऐसी बयानबाजी

    नई दिल्ली । केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पिता को लेकर की गई टिप्पणी पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि इस तरह की टिप्पणियों से प्रधानमंत्री मोदी विचलित नहीं होंगे और न ही जनसेवा के प्रति उनका संकल्प कमजोर पड़ेगा। राजनाथ सिंह ने इस बयान को सार्वजनिक जीवन की मर्यादा के अनुरूप नहीं बताते हुए राजनीतिक विरोध और व्यक्तिगत टिप्पणी के बीच अंतर बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया।

    राजनाथ सिंह ने सोमवार को इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि रविवार को पटना में खरगे की ओर से की गई टिप्पणी से उन्हें गहरा आघात पहुंचा है। उन्होंने कहा कि इस पूरे प्रकरण में सबसे अधिक चिंताजनक बात यह है कि ऐसी टिप्पणी किसी सामान्य कार्यकर्ता या युवा नेता की ओर से नहीं, बल्कि कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष की ओर से की गई है। उनके मुताबिक, इतने वरिष्ठ पद पर बैठे व्यक्ति से सार्वजनिक जीवन में अधिक संयम और जिम्मेदारी की अपेक्षा की जाती है।

    रक्षा मंत्री ने आरोप लगाया कि खरगे के बयान से देश के करोड़ों लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने यह भी कहा कि टिप्पणी के बाद कांग्रेस के कुछ नेताओं ने उसके शब्दों को उचित ठहराने की कोशिश की। राजनाथ सिंह के अनुसार, इस मामले में गलती स्वीकार कर खेद व्यक्त करने के बजाय बयान का बचाव करना लोगों की भावनाओं को और ठेस पहुंचा सकता है।

    उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पद पर आसीन व्यक्ति के व्यवहार में गंभीरता, संयम और मर्यादा दिखाई देनी चाहिए। यदि किसी राजनीतिक दल का शीर्ष नेतृत्व ही ऐसी भाषा का इस्तेमाल करता है, तो इससे उस पद की गरिमा और पार्टी की राजनीतिक संस्कृति पर सवाल उठते हैं। उन्होंने राजनीतिक दलों से सार्वजनिक बहस में जिम्मेदार आचरण बनाए रखने की अपेक्षा जताई।

    राजनाथ सिंह ने कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक विरोध स्वाभाविक है और सरकार की नीतियों की आलोचना भी की जा सकती है। विपक्ष को नीतियों, फैसलों और कामकाज पर सवाल उठाने का पूरा अधिकार है, लेकिन असहमति को व्यक्तिगत अपमान में बदलना उचित नहीं है। उनके मुताबिक, प्रधानमंत्री और उनके परिवार को निशाना बनाकर की जाने वाली टिप्पणियां राजनीतिक विमर्श की मर्यादा को प्रभावित करती हैं।

    रक्षा मंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले भी पार्टी के कुछ नेताओं की ओर से प्रधानमंत्री की साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि को लेकर टिप्पणियां की जाती रही हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री की मां के प्रति कथित अभद्र भाषा के इस्तेमाल का भी उल्लेख किया। राजनाथ सिंह ने आरोप लगाया कि इस तरह की राजनीति अब पार्टी के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच गई है और इससे राजनीतिक संवाद का स्तर प्रभावित हो रहा है।

    उन्होंने कहा कि वैचारिक मतभेदों को व्यक्तिगत हमलों में बदलना लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुकूल नहीं है। राजनीतिक दलों को सरकार के कामकाज की आलोचना करते समय शब्दों और व्यवहार की मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए। राजनाथ सिंह के अनुसार, किसी व्यक्ति या परिवार को अपमानित करने के बजाय नीतिगत मुद्दों पर चर्चा करना लोकतंत्र के लिए अधिक महत्वपूर्ण है।

    रक्षा मंत्री ने अपने बयान में कहा कि लोकतंत्र में जनता राजनीतिक दलों और नेताओं के व्यवहार पर नजर रखती है। उनके मुताबिक, सार्वजनिक जीवन में दिए गए बयानों और अपनाए गए आचरण का जवाब समय आने पर जनता देती है। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व की आलोचना करते हुए कहा कि राजनीतिक असहमति के दौरान भी भाषा की मर्यादा और जिम्मेदारी बनाए रखना आवश्यक है।

    यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज है। राजनाथ सिंह ने स्पष्ट किया कि इस तरह की टिप्पणियों से प्रधानमंत्री के जनसेवा के संकल्प पर असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने राजनीतिक दलों से अपील की कि वे वैचारिक विरोध को व्यक्तिगत टिप्पणी का रूप देने से बचें और लोकतांत्रिक संवाद की गरिमा बनाए रखें।

  • पीएम मोदी के बयान के बाद खरगे का हमला, शिक्षा व्यवस्था और युवाओं के भविष्य पर उठाए गंभीर सवाल

    पीएम मोदी के बयान के बाद खरगे का हमला, शिक्षा व्यवस्था और युवाओं के भविष्य पर उठाए गंभीर सवाल

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पेपर लीक के मामलों में दोषियों के खिलाफ फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन की घोषणा के बाद देश की राजनीति में इस मुद्दे पर बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि केवल घोषणाओं से युवाओं का भविष्य सुरक्षित नहीं होगा। उनका कहना है कि छात्रों और युवाओं को भरोसा दिलाने के लिए सरकार को ठोस और प्रभावी फैसले लेने होंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले वर्षों में शिक्षा व्यवस्था लगातार कमजोर हुई है और युवाओं के सामने रोजगार तथा भविष्य को लेकर गंभीर चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।

    खरगे ने कहा कि देश के छात्र और युवा लंबे समय से बेहतर शिक्षा व्यवस्था, निष्पक्ष परीक्षाओं और रोजगार की मांग कर रहे हैं। उनके अनुसार कई प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं और पेपर लीक जैसी घटनाओं ने लाखों अभ्यर्थियों का विश्वास प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में केवल नई घोषणाएं पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि दोषियों के खिलाफ समयबद्ध और प्रभावी कार्रवाई भी उतनी ही जरूरी है ताकि युवाओं का भरोसा फिर से कायम हो सके।

    कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार के कार्यकाल में छात्रों के आंदोलनों के दौरान कई स्थानों पर बल प्रयोग किया गया। उन्होंने कहा कि अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करने वाले युवाओं के साथ कठोर व्यवहार किया गया, जबकि लोकतंत्र में अपनी बात रखना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि छात्रों की समस्याओं को कानून-व्यवस्था का विषय बनाने के बजाय संवाद और संवेदनशीलता के साथ समाधान तलाशा जाए।

    खरगे ने केंद्र सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें भी दोहराईं। उन्होंने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाया जाए, छात्रों पर हुई कार्रवाई के लिए सरकार सार्वजनिक रूप से माफी मांगे और जिन विद्यार्थियों को कार्रवाई का सामना करना पड़ा है, उन्हें न्याय सुनिश्चित किया जाए। उनका कहना था कि युवाओं का भविष्य किसी भी राजनीतिक मतभेद से ऊपर होना चाहिए और सरकार को इस दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।

    उन्होंने शिक्षा व्यवस्था और रोजगार के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया। खरगे का आरोप है कि देश में युवाओं के लिए रोजगार के अवसर अपेक्षित गति से नहीं बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी स्थायी नौकरियों की संख्या सीमित होती जा रही है, जबकि संविदा आधारित नियुक्तियों का दायरा लगातार बढ़ रहा है। उनके अनुसार उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद भी बड़ी संख्या में युवा रोजगार के लिए संघर्ष कर रहे हैं, जिससे भविष्य को लेकर चिंता बढ़ रही है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में कहा था कि युवाओं का भविष्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है और पेपर लीक जैसे मामलों में दोषियों को शीघ्र एवं कड़ी सजा दिलाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। प्रधानमंत्री के इसी बयान के बाद कांग्रेस अध्यक्ष की प्रतिक्रिया सामने आई है, जिससे शिक्षा, परीक्षाओं की पारदर्शिता और युवाओं के भविष्य का मुद्दा एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गया है।

  • कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के खिलाफ कानूनी जांच की मांग, चुनावी दस्तावेजों में वित्तीय जानकारी छिपाने का आरोप

    कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के खिलाफ कानूनी जांच की मांग, चुनावी दस्तावेजों में वित्तीय जानकारी छिपाने का आरोप

    नई दिल्ली । कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद मल्लिकार्जुन खरगे एक नए विवाद के केंद्र में आ गए हैं। उनके खिलाफ चुनावी हलफनामे में कथित रूप से महत्वपूर्ण वित्तीय जानकारी का खुलासा नहीं करने के आरोप में शिकायत दर्ज कराई गई है। शिकायत में दावा किया गया है कि राज्यसभा चुनाव के दौरान दाखिल किए गए चुनावी दस्तावेजों में एक ट्रस्ट से जुड़ी करोड़ों रुपये की संपत्तियों का उल्लेख नहीं किया गया, जिससे चुनावी पारदर्शिता और वैधानिक दायित्वों को लेकर सवाल खड़े हुए हैं।

    शिकायत सामाजिक कार्यकर्ता दिनेश कल्लाहल्ली द्वारा दर्ज कराई गई है। उनका आरोप है कि कलबुर्गी स्थित सिद्धार्थ विहार ट्रस्ट, जिसकी स्थापना मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा की गई थी, उससे संबंधित वित्तीय विवरण चुनावी हलफनामे में शामिल नहीं किए गए। शिकायत के अनुसार ट्रस्ट की कुल परिसंपत्तियां 31 मार्च 2023 तक लगभग 36.86 करोड़ रुपये आंकी गई थीं, लेकिन इनका उल्लेख चुनावी दस्तावेजों में नहीं किया गया।

    शिकायतकर्ता का कहना है कि चुनाव लड़ने वाले प्रत्येक उम्मीदवार के लिए अपनी वित्तीय स्थिति, संपत्तियों और संभावित हितों से जुड़ी जानकारियां स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करना आवश्यक होता है। उनका आरोप है कि ट्रस्ट से जुड़े वित्तीय हितों और उससे संबंधित अन्य महत्वपूर्ण विवरणों को सार्वजनिक न करना चुनावी पारदर्शिता के सिद्धांतों के विपरीत माना जा सकता है। इसी आधार पर उन्होंने मामले की विस्तृत जांच की मांग की है।

    मामले को लेकर संबंधित अधिकारियों से कानूनी समीक्षा कराए जाने की मांग भी की गई है। शिकायत में ट्रस्ट के ट्रस्टी रिकॉर्ड, ऑडिट रिपोर्ट, आयकर दस्तावेजों तथा अन्य वित्तीय अभिलेखों की जांच कराने का आग्रह किया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि इन दस्तावेजों की पड़ताल से यह स्पष्ट हो सकेगा कि चुनावी हलफनामे में आवश्यक जानकारियां पूरी तरह प्रस्तुत की गई थीं या नहीं।

    शिकायत में चुनावी पारदर्शिता से जुड़े कानूनी प्रावधानों और विभिन्न न्यायिक निर्णयों का भी उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता का तर्क है कि यदि किसी उम्मीदवार द्वारा जानबूझकर अथवा अनजाने में भी महत्वपूर्ण जानकारी छूट जाती है, तो उसकी तथ्यात्मक जांच की जानी चाहिए। उनका मानना है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए चुनावी घोषणाओं की सत्यता और पूर्णता सुनिश्चित करना आवश्यक है।

    फिलहाल यह मामला शिकायत के स्तर पर है और संबंधित प्राधिकारियों द्वारा इसकी समीक्षा किए जाने की मांग की गई है। अभी तक इस संबंध में किसी प्रकार का आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है। दूसरी ओर, मल्लिकार्जुन खरगे या कांग्रेस पार्टी की ओर से भी इस विषय पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की गई है। ऐसे में आगे की प्रक्रिया और संभावित जांच के बाद ही स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।

    राजनीतिक और कानूनी दृष्टि से यह मामला महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि चुनावी हलफनामों में दी जाने वाली जानकारी की पारदर्शिता लंबे समय से सार्वजनिक विमर्श का विषय रही है। यदि मामले में औपचारिक जांच आगे बढ़ती है तो संबंधित दस्तावेजों और तथ्यों के आधार पर ही यह तय होगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी सत्यता है और क्या किसी प्रकार की कानूनी कार्रवाई की आवश्यकता बनती है।

  • शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग से लेकर चुनाव प्रक्रिया तक, INDIA गठबंधन की बैठक में पांच अहम प्रस्तावों पर सहमति

    शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग से लेकर चुनाव प्रक्रिया तक, INDIA गठबंधन की बैठक में पांच अहम प्रस्तावों पर सहमति

    नई दिल्ली । विपक्षी गठबंधन INDIA alliance की 7वीं महत्वपूर्ण बैठक सोमवार को दिल्ली में आयोजित की गई, जिसमें देश की वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों और हालिया चुनावों के बाद की रणनीति पर व्यापक चर्चा हुई। बैठक में शामिल दलों ने कई मुद्दों पर एकजुट रुख अपनाते हुए केंद्र सरकार की नीतियों और चुनावी प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाए।

    बैठक के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बताया कि गठबंधन में शामिल 25 राजनीतिक दलों ने पांच प्रमुख प्रस्तावों पर सहमति जताई है। उन्होंने कहा कि इन प्रस्तावों का उद्देश्य लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की रक्षा करना, चुनावी प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाना और युवाओं से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता देना है।

    बैठक में लिए गए प्रमुख निर्णयों में चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दे को लेकर भारत के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखने पर सहमति शामिल है। गठबंधन का कहना है कि मतदाता अधिकारों और चुनावी पारदर्शिता से जुड़े मामलों पर गंभीर चिंता है, जिसे सर्वोच्च न्यायालय के संज्ञान में लाया जाएगा। इसके साथ ही NEET-UG परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर शिक्षा मंत्री से इस्तीफे की मांग को भी बैठक में समर्थन मिला।

    गठबंधन नेताओं ने आरोप लगाया कि परीक्षा प्रणाली में लगातार सामने आ रही गड़बड़ियों से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। उनका कहना है कि इस स्थिति की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और उच्च स्तर पर जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए। इसी कारण शिक्षा मंत्रालय की भूमिका पर सवाल उठाते हुए इस्तीफे की मांग को एजेंडे में शामिल किया गया।

    बैठक में आर्थिक स्थिति पर भी चर्चा हुई और सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग रखी गई। विपक्षी दलों ने कहा कि महंगाई, रोजगार और निवेश की धीमी रफ्तार देश की आर्थिक चुनौतियों को बढ़ा रही है। इसके साथ ही छोटे और मध्यम उद्योगों की स्थिति को लेकर भी चिंता जताई गई।

    गठबंधन ने यह भी निर्णय लिया कि अब से हर दो महीने में नियमित रूप से बैठक आयोजित की जाएगी, ताकि राजनीतिक रणनीति और साझा मुद्दों पर लगातार समन्वय बना रहे। अगली बैठक हैदराबाद में निर्धारित की गई है, जिसमें आगे की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।

    बैठक में यह भी कहा गया कि संसद के भीतर विपक्षी दलों के बीच समन्वय को और मजबूत किया जाएगा, ताकि सरकार से जुड़े मुद्दों पर एक संयुक्त और प्रभावी आवाज उठाई जा सके। नेताओं ने आरोप लगाया कि जांच एजेंसियों के दुरुपयोग और विपक्षी दलों के साथ भेदभाव जैसे मुद्दों पर भी गंभीर चर्चा की जरूरत है।

    इस बैठक में कई प्रमुख क्षेत्रीय और राष्ट्रीय दल शामिल हुए, जबकि कुछ दलों ने वर्चुअल रूप से भाग लिया। हालांकि कुछ राजनीतिक दलों की अनुपस्थिति भी चर्चा का विषय रही, लेकिन कुल मिलाकर बैठक को विपक्षी एकजुटता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    गठबंधन ने यह स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य केवल राजनीतिक विरोध नहीं बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करना और जनता से जुड़े मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाना है। बैठक के अंत में यह संदेश भी दिया गया कि आने वाले समय में विपक्षी एकता और समन्वय को और अधिक मजबूत किया जाएगा, ताकि राष्ट्रीय स्तर पर एक वैकल्पिक राजनीतिक मंच तैयार किया जा सके।

  • भोपाल सागर छिंदवाड़ा में बड़ी कार्यकारिणी पर रोक कांग्रेस संगठन के नए फरमान से असमंजस्य

    भोपाल सागर छिंदवाड़ा में बड़ी कार्यकारिणी पर रोक कांग्रेस संगठन के नए फरमान से असमंजस्य


    मध्य प्रदेश /कांग्रेस संगठन में हाल ही में राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल के निर्देश के बाद हलचल बढ़ गई है। कांग्रेस के जिलों की कार्यकारिणी अब छोटी होगी और ज्यादा संख्या में सदस्यों की नियुक्ति पर रोक लगाई गई है। बड़े जिलों में 55 और छोटे जिलों में 35 सदस्य बनाए जाने की गाइडलाइन जारी की गई है।

    राष्ट्रीय महासचिव ने राज्यों की इकाई और जिला अध्यक्षों को पत्र लिखकर यह निर्देश दिए हैं। इस गाइडलाइन को एआईसीसी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की मौजूदगी में बैठक में तय किया गया था। इसके साथ ही 15 दिन के भीतर जिलों की कार्यकारिणी बनाने का निर्देश भी दिया गया।

    मध्य प्रदेश में लंबे समय से जम्बो कार्यकारिणी की परंपरा रही है ताकि अलग-अलग गुटों को संतुलित किया जा सके। लेकिन नई गाइडलाइन आने के बाद कई जिलों में असमंजस्य की स्थिति पैदा हो गई है। 30 जनवरी को मध्य प्रदेश कांग्रेस ने तीन जिलों की कार्यकारिणी जारी की थी, जिसमें गाइडलाइन से ज्यादा पदाधिकारी बना दिए गए।

    छिंदवाड़ा जिला कार्यकारिणी में 240 सदस्य बनाए गए हैं जबकि सागर जिले में 150 से ज्यादा पदाधिकारी हैं। छोटे जिले मऊगंज में 40 पदाधिकारी हैं। वहीं भोपाल शहर की सूची में 106 और ग्रामीण क्षेत्र की सूची में 85 सदस्य बनाए गए हैं। नई गाइडलाइन लागू होने के बाद यह लंबी सूची राष्ट्रीय संगठन के निर्देशों के खिलाफ मानी जा रही है और अब कांग्रेस में असमंजस्य की स्थिति बन गई है।सभी जिलों में जल्द ही नए निर्देश के मुताबिक कार्यकारिणी तैयार करने की तैयारी शुरू हो गई है और संगठन स्तर पर इस पर निगरानी रखी जा रही है।