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  • पंजाब में कैंसर का बढ़ता संकट, पांच साल में मामले बढ़े और मृत्यु दर में 9.22 फीसदी की वृद्धि दर्ज हुई

    पंजाब में कैंसर का बढ़ता संकट, पांच साल में मामले बढ़े और मृत्यु दर में 9.22 फीसदी की वृद्धि दर्ज हुई

    नई दिल्ली ।पंजाब में कैंसर का बढ़ता प्रकोप राज्य के लिए गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बनता जा रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में कैंसर से हर 21 मिनट में एक व्यक्ति की मौत हो रही है। पिछले पांच वर्षों के दौरान कैंसर से होने वाली मृत्यु दर में 9.22 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। राज्य का मालवा बेल्ट इस बीमारी से सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में शामिल है।

    कैंसर के बढ़ते मामलों को देखते हुए पंजाब सरकार ने इसे अधिसूचित रोग घोषित किया है। इसके तहत सरकारी और निजी अस्पतालों के लिए कैंसर के नए मामलों और बीमारी से होने वाली मौतों की जानकारी स्वास्थ्य विभाग को देना अनिवार्य किया गया है। इस व्यवस्था का उद्देश्य बीमारी से जुड़े आंकड़ों को व्यवस्थित तरीके से जुटाना और उनके आधार पर उपचार तथा रोकथाम की नीतियां तैयार करना है।

    प्रदेश में कैंसर के नए मामलों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। वर्ष 2021 में पंजाब में 39,521 कैंसर मरीज दर्ज किए गए थे। वर्ष 2022 में यह संख्या बढ़कर 40,435 हो गई। इसके बाद 2023 में 41,337 मामले सामने आए। वर्ष 2024 में मरीजों की संख्या 42,288 तक पहुंच गई, जबकि 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर 43,196 हो गया।

    पांच वर्षों के आंकड़ों से स्पष्ट है कि पंजाब में कैंसर के मामलों में लगातार वृद्धि हुई है। यह बढ़ोतरी स्वास्थ्य व्यवस्था के सामने शुरुआती पहचान, समय पर उपचार और मरीजों की नियमित निगरानी जैसी चुनौतियों को भी रेखांकित करती है। विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी गंभीर बीमारी से निपटने के लिए उसके प्रसार और प्रभावित आबादी से जुड़े विश्वसनीय आंकड़े बेहद महत्वपूर्ण होते हैं।

    मालवा क्षेत्र में कैंसर का प्रभाव लंबे समय से चिंता का विषय रहा है। इस इलाके के कई हिस्सों में बीमारी के मामलों को लेकर लगातार चर्चा होती रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में समय पर जांच की सुविधा, उपचार तक पहुंच और बीमारी के प्रति जागरूकता जैसे मुद्दे भी महत्वपूर्ण बने हुए हैं।

    कैंसर को अधिसूचित रोग का दर्जा मिलने के बाद अस्पतालों से मिलने वाली जानकारी के आधार पर राज्य में बीमारी की वास्तविक स्थिति को समझने में मदद मिल सकती है। इससे अलग-अलग क्षेत्रों में कैंसर के मामलों, मरीजों की संख्या और मृत्यु के आंकड़ों का अधिक व्यवस्थित विश्लेषण संभव होगा।

    सरकार के सामने अब चुनौती केवल आंकड़े जुटाने तक सीमित नहीं है। बढ़ते मामलों के बीच कैंसर की जल्द पहचान, जांच सुविधाओं का विस्तार, उपचार की उपलब्धता और मरीजों को समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना भी जरूरी होगा। ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाना इस दिशा में अहम भूमिका निभा सकता है।

    पंजाब में कैंसर से होने वाली मौतों का आंकड़ा भी चिंता बढ़ा रहा है। हर 21 मिनट में एक मौत का अनुमान इस बीमारी के प्रभाव की गंभीरता को सामने रखता है। ऐसे में रोकथाम, शुरुआती जांच और इलाज को लेकर व्यापक स्वास्थ्य रणनीति की जरूरत महसूस की जा रही है।

    पड़ोसी हरियाणा में भी कैंसर के मामलों और मौतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वर्ष 2021 में वहां 30,015 मामले सामने आए थे, जो 2025 में बढ़कर 33,395 हो गए। इसी अवधि में कैंसर से होने वाली मौतें 16,543 से बढ़कर 18,387 तक पहुंच गईं। इससे स्पष्ट है कि उत्तर भारत के कई राज्यों में कैंसर का बढ़ता बोझ स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन रहा है।

  • मध्यप्रदेश में जनवरी के पहले सप्ताह में मौसम खुला रहेगामालवा में ठंड ने तोड़ा 67 साल का रिकॉर्ड

    मध्यप्रदेश में जनवरी के पहले सप्ताह में मौसम खुला रहेगामालवा में ठंड ने तोड़ा 67 साल का रिकॉर्ड

    भोपाल । मध्यप्रदेश में इस साल सर्दी ने अपने तेवर कुछ अलग ही दिखाए हैं। हवाओं के दिशा परिवर्तन और असामान्य मौसम परिस्थितियों के कारण मालवा अंचल में कड़ाके की ठंड पड़ीजिसने बीते 67 वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ दिया। 18 दिसंबर को इंदौर में न्यूनतम तापमान 4.5 डिग्री सेल्सियस तक गिर गयाजो अब तक का 10वां सबसे कम तापमान रहा।

    मौसम विज्ञानियों के अनुसारइसका मुख्य कारण कश्मीर से सीधे पहुंची उत्तरी ठंडी हवाएं हैं। ये हवाएं प्रतिचक्रवातजेट स्ट्रीम और पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से और भी तीव्र हो गईं। कश्मीर से आई इन ठंडी हवाओं ने मालवा और आसपास के क्षेत्रों में सर्दी की झोंक को और बढ़ा दियाजिससे इस बार की सर्दी असामान्य रूप से कड़ी हो गई।

    कश्मीर की हवाओं ने बढ़ाई ठिठुरन

    मालवासीहोरराजगढ़ और शाजापुर की पट्टी में आमतौर पर पश्चिमी हवाओं का प्रभाव रहता हैजिससे ठंड अधिक तीव्र नहीं होती। लेकिन इस बार पश्चिमी राजस्थान के ऊपर बने प्रतिचक्रवात ने हवाओं की दिशा बदल दी। मौसम विज्ञानी बीएस यादव के अनुसारप्रतिचक्रवात के कारण कश्मीर से आ रही उत्तरी हवाएं मालवा तक पहुंच गईंजिससे तापमान में रिकॉर्ड गिरावट दर्ज की गई। इसने इलाके में कड़ी ठंड का माहौल बना दिया।

    जेट स्ट्रीम और पश्चिमी विक्षोभ का असर

    मध्य भारत के ऊपर सक्रिय जेट स्ट्रीम में अटलांटिक महासागर की ठंडी हवाओं का मिश्रण हो गया। तेज गति से बहने वाली इस जेट स्ट्रीम ने ठंडी हवाओं को जमीन की सतह तक दबायाजिससे ठंड और बढ़ गई। इसके साथ ही कश्मीर के आसपास सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ ने भी उत्तरी भारत से ठंडी हवाएं भेजने में भूमिका निभाई। इन सभी घटनाओं ने मिलकर ठंड को तीव्र कर दियाजिससे प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में कड़ाके की सर्दी महसूस की गई।

    मावठा और बारिश की संभावना कम

    भोपाल के मौसम विज्ञानी डॉ. अरुण शर्मा के अनुसारफिलहाल प्रदेश में किसी सशक्त पश्चिमी विक्षोभ के आसार नहीं हैं। इसका मतलब है कि अगले कुछ दिनों तक मौसम साफ रहेगा और मावठा या बारिश की संभावना बहुत कम है। हालांकिउत्तर-पूर्वी मध्यप्रदेश में अगले चार से पांच दिनों तक कोहरा छा सकता हैलेकिन इसके बाद मौसम सामान्य होने लगेगा।

    ठंड की समय पर विदाईगर्मी का लंबा दौर

    सेवानिवृत्त मौसम विज्ञानी डॉ. डीपी दुबे का कहना है कि 27 दिसंबर को आने वाला पश्चिमी विक्षोभ कमजोर रहेगा। ऐसे में ठंड सामान्य समय यानी फरवरी मध्य तक विदा हो जाएगी। ठंड की समय पर विदाई का मतलब यह भी है कि गर्मी का मौसम लंबा और ज्यादा तीखा हो सकता है।

    आगे का मौसम
    मौसम विभाग के अनुसार26 दिसंबर से तापमान में हल्की बढ़ोतरी होगीक्योंकि मालवा की ओर बने प्रतिचक्रवात उत्तरी हवाओं को रोक देगा। 29 दिसंबर को तापमान में फिर हल्की गिरावट हो सकती हैलेकिन 30 दिसंबर के बाद तापमान में दोबारा बढ़ोतरी होने की संभावना है। जनवरी के पहले सप्ताह में मौसम खुला रहेगा और उत्तर-पूर्वी मध्यप्रदेश को छोड़कर बाकी हिस्सों में ठंड सामान्य रहेगी।

    जलवायु परिवर्तन का असर

    भोपाल मौसम केंद्र के वैज्ञानिक एचएस पांडे अनुसार जलवायु परिवर्तन के कारण वर्षा के दिन घटे हैं और गर्मी के दिन बढ़े हैं। इसी बदलाव के चलते इस बार कुछ शहरों में न्यूनतम तापमान में असामान्य गिरावट देखने को मिली हैजो कि भविष्य में और अधिक देखने को मिल सकती है। जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम के उतार-चढ़ाव और असामान्य बदलावों में वृद्धि हो रही हैजो किसानों और नागरिकों के लिए चिंता का विषय बन सकता है।