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  • आई-पैक मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त ममता सरकार को नोटिस;सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने का निर्देश

    आई-पैक मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त ममता सरकार को नोटिस;सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने का निर्देश


    नई दिल्ली: पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म आई-पैक I-PAC से जुड़े छापेमारी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को कड़ा संदेश दिया है। शीर्ष अदालत ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्य के पुलिस महानिदेशक डीजीपी राजीव कुमार को नोटिस जारी करते हुए उनसे दो हफ्तों के भीतर जवाब मांगा है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि छापेमारी से संबंधित सभी सीसीटीवी फुटेज और अन्य डिजिटल स्टोरेज को अगली सुनवाई तक सुरक्षित रखा जाए।

    यह मामला प्रवर्तन निदेशालय ईडी द्वारा आई-पैक के कार्यालय और सह-संस्थापक प्रतीक जैन के आवास पर की गई छापेमारी से जुड़ा है। ईडी का आरोप है कि इस दौरान राज्य प्रशासन और पुलिस ने केंद्रीय एजेंसी के काम में बाधा डाली। ईडी की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने अदालत में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि इस प्रकरण में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी स्वयं आरोपी हैं। उन्होंने दावा किया कि डीजीपी राजीव कुमार की मौजूदगी में मुख्यमंत्री ने व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप किया और पुलिस की भूमिका सहयोगी की रही।मामले की सुनवाई जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ ने की। दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा ईडी अधिकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर पर फिलहाल रोक लगा दी। कोर्ट ने कहा कि ईडी की याचिकाओं में गंभीर संवैधानिक और कानूनी सवाल उठाए गए हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

    पीठ ने टिप्पणी की कि यदि ऐसे मामलों को अनसुलझा छोड़ दिया गया तो इससे एक या एक से अधिक राज्यों में अराजकता की स्थिति पैदा हो सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए अदालत ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी डीजीपी राजीव कुमार कोलकाता पुलिस कमिश्नर और अन्य संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया। सभी प्रतिवादियों को दो सप्ताह के भीतर अपना जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई 3 फरवरी को तय की गई है।अपने अंतरिम आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि तलाशी वाले परिसरों के अंदर और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग डीवीआर और अन्य स्टोरेज डिवाइस को किसी भी हाल में नष्ट या छेड़छाड़ नहीं की जानी चाहिए। यह निर्देश अगली सुनवाई तक प्रभावी रहेगा।

    वहीं पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने ईडी की याचिकाओं की वैधता पर सवाल उठाए। उन्होंने तर्क दिया कि इस तरह की कार्रवाइयां अक्सर चुनावों से पहले देखने को मिलती हैं और जब मामला पहले से हाईकोर्ट में लंबित है तब सुप्रीम कोर्ट को इस पर विचार नहीं करना चाहिए।इसी बीच ईडी ने एक नई अर्जी दाखिल कर डीजीपी राजीव कुमार समेत पश्चिम बंगाल पुलिस के शीर्ष अधिकारियों को निलंबित किए जाने की मांग भी की है। इस पर भी सुप्रीम कोर्ट ने ममता सरकार से जवाब तलब किया है। यह मामला अब राजनीतिक और संवैधानिक दोनों दृष्टियों से बेहद अहम बन गया है।

  • कोलकाता में मेसी के दौरे का शर्मनाक अंत: सुरक्षा चूक के कारण 10 मिनट में मैदान छोड़ा, ममता ने मांगी माफी

    कोलकाता में मेसी के दौरे का शर्मनाक अंत: सुरक्षा चूक के कारण 10 मिनट में मैदान छोड़ा, ममता ने मांगी माफी


    कोलकाता । के साल्ट लेक स्टेडियम में शनिवार को फुटबॉल की एक ऐतिहासिक घटना की बजाय एक शर्मनाक कुप्रबंधन का दृश्य सामने आया। वैश्विक फुटबॉल सुपरस्टार लियोनेल मेसी को देखने के लिए आए हजारों दर्शकों को गहरा झटका तब लगा जब सुरक्षा कारणों से उन्हें महज 10 मिनट में मैदान छोड़ना पड़ा। इस अप्रत्याशित घटना के कारण फुटबॉल प्रेमियों में गुस्से की लहर दौड़ गई, और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस पर सार्वजनिक रूप से माफी मांगी।

    दर्शकों का गुस्सा और विरोध प्रदर्शन
    साल्ट लेक स्टेडियम, जिसे ‘भारतीय फुटबॉल का मक्का’ माना जाता है, पर यह घटना कोलकाता के फुटबॉल प्रेमियों के लिए सबसे बड़े झटके के रूप में आई। प्रीमियम टिकटों पर मोटी रकम खर्च कर स्टेडियम पहुंचे दर्शकों को जब मेसी का कार्यक्रम समय से पहले समाप्त होता दिखाई दिया, तो उनका गुस्सा फूट पड़ा। गुस्साए दर्शकों ने विरोध प्रदर्शन किया, बोतलें फेंकीं और आयोजकों के खिलाफ नारेबाजी की। कई होर्डिंग्स और कुर्सियों को नुकसान भी पहुँचाया गया।

    मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा, “आज साल्ट लेक स्टेडियम में जो कुप्रबंधन देखने को मिला, उससे मैं अत्यधिक व्यथित हूं। मैं लियोनेल मेसी, सभी खेल प्रेमियों और उनके प्रशंसकों से दिल से माफी मांगती हूं।”

    जांच कमेटी का गठन
    इस शर्मनाक घटना के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तत्काल एक उच्च स्तरीय जांच कमेटी का गठन किया। कमेटी की अध्यक्षता कलकत्ता हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस आशिम कुमार रे करेंगे। जांच का उद्देश्य घटना की पूरी जाँच करना, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करना और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाना है।

    राजनीतिक हलचल और भाजपा का हमला
    यह घटना न केवल खेल जगत बल्कि राज्य की राजनीति में भी भूचाल ला गई है। भाजपा ने इस मामले को ममता सरकार के कुप्रबंधन का परिणाम बताया और राज्य के खेल मंत्री अरूप बिस्वास से इस्तीफे की मांग की। भाजपा के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने इस घटना को “बड़ा अपमान” और “मेजर स्कैम” करार दिया। उनका आरोप था कि 70 फुट की प्रतिमा का अनावरण राजनीतिक उद्देश्य से किया गया और दर्शकों को गुमराह किया गया।

    मेसी का दौरा अधूरा
    यह घटना लियोनेल मेसी के ‘गोट इंडिया टूर 2025’ का पहला पड़ाव था, जो अब अधूरा रह गया है। सुरक्षा चिंताओं के कारण मेसी ने अपना दौरा समय से पहले ही समाप्त कर दिया। कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम, जैसे कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और पूर्व कप्तान सौरव गांगुली से मुलाकात, अब अधूरे रह गए हैं। मेसी अब अपने अगले कार्यक्रम के लिए हैदराबाद के लिए रवाना हो गए हैं।

    साल्ट लेक स्टेडियम में हुआ कुप्रबंधन फुटबॉल के प्रति कोलकाता की दीवानगी और उसके ऐतिहासिक महत्त्व के लिए एक काला धब्बा बनकर उभरा है। यह घटना न केवल फुटबॉल प्रशंसकों के लिए निराशाजनक थी, बल्कि राज्य सरकार और आयोजकों के लिए भी एक बड़ा कड़ा सबक साबित हुई है।

  • हुमायूं कबीर ने बाबरी मस्जिद निर्माण के लिए जुटाए 5 करोड़ रुपये और सोने के गहने

    हुमायूं कबीर ने बाबरी मस्जिद निर्माण के लिए जुटाए 5 करोड़ रुपये और सोने के गहने


    कोलकाता । पश्चिम बंगाल(West Bengal) की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee)की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) विधायक हुमायूं कबीर(Humayun Kabir) मुर्शिदाबाद जिले में “बाबरी मस्जिद”(Babri Masjid) के अपने सपने को साकार करने के लिए देश-विदेश से भारी मात्रा में चंदा प्राप्त कर रहे हैं। 6 दिसंबर को बाबरी मस्जिद विध्वंस की 33वीं बरसी पर आधारशिला रखे जाने के बाद से, अब तक लगभग 5 करोड़ की राशि जुटाई जा चुकी है।

    एक रिपोर्ट के मुताबिक, हुमायूं कबीर ने बताया कि उन्हें एक ही व्यक्ति से 1 करोड़ का चंदा देने का वादा किया गया था, जो अभी तक प्राप्त नहीं हुआ है। वह पश्चिम बंगाल इस्लामिक फाउंडेशन ऑफ इंडिया (WBIFI) द्वारा विदेशी फंडिंग प्राप्त करने के लिए बैंकिंग प्रावधान स्थापित किए जाने के बाद विदेशों से और अधिक धन प्राप्त करने की उम्मीद कर रहे हैं।

    उन्होंने बेहद आत्मविश्वास से कहा, “हमें कतर, सऊदी अरब, बांग्लादेश और इंग्लैंड सहित विदेशों से दान के लिए फोन आ रहे हैं।” पूर्व टीएमसी विधायक को न केवल बाबरी मस्जिद के अपने सपने पर भरोसा है, बल्कि आधारशिला समारोह में मिले भारी समर्थन के बाद अपनी नई राजनीतिक पारी पर भी पूरा भरोसा है।

    23 बीघा भूमि पर बाबरी मस्जिद के निर्माण का प्रभारी डब्ल्यूबीआईएफआई की समिति के सदस्यों द्वारा प्रतिदिन शाम को दान बक्सों से जमा किए गए धन के ट्रंक गिने जाते हैं। गुरुवार को ही 23,01,495 की राशि के साथ एक सोने की अंगूठी, एक सोने की नथ और सोने की बालियां एकत्र की गईं।

    पार्टी द्वारा निलंबित किए जाने के बावजूद, हुमायूं कबीर का राजनीति छोड़ने का कोई इरादा नहीं है। वास्तव में, वह बंगाल की राजनीति में एक बड़ी भूमिका निभाने को लेकर आश्वस्त हैं। उन्होंने दावा किया, “चुनाव के बाद मैं किंगमेकर बनूंगा। मेरे बिना कोई सरकार नहीं बना सकता।” भरतपुर से विधायक कबीर 17 दिसंबर को पश्चिम बंगाल विधानसभा में मौजूद रहेंगे, लेकिन उनका इस्तीफा देने का कोई इरादा नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया, “मुझे यह महीना खत्म कर लेने दीजिए, मैं इस्तीफे के बारे में जनवरी में सोचूंगा।”

    वह 22 दिसंबर को अपनी नई पार्टी शुरू करने के लिए तैयार हैं, हालांकि उन्होंने अभी तक नाम का खुलासा नहीं किया है। कबीर असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी, एआईएमआईएम के साथ गठबंधन की उम्मीद कर रहे थे, जो सफल नहीं हो सका। वह मुर्शिदाबाद जिले में कांग्रेस और वाम मोर्चा के साथ सीट शेयरिंग का फॉर्मूला बनाना चाहते हैं, जिसकी घोषणा वह अपनी पार्टी के गठन के बाद करेंगे।

    इस बीच, टीएमसी ने कबीर के ‘बाबरी मस्जिद’ एजेंडे से दूरी बना ली है। टीएमसी का कहना है कि यह पार्टी की समावेशी राजनीति की विचारधारा के अनुरूप नहीं है। आपको बता दें कि पश्चिम बंगाल में मुस्लिम समुदाय के लगभग 30 प्रतिशत मतदाता हैं, जबकि हिंदू अल्पसंख्यक समुदाय में शामिल मतुआ बंगाल में 17 प्रतिशत हैं। इनके वोट भाजपा और टीएमसी के बीच विभाजित हैं।

    जिस दिन मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद की आधारशिला रखी गई थी, टीएमसी ने एकता दिवस का आयोजन किया था। इसके माध्यम से पार्टी ने सांप्रदायिक सद्भाव के लिए खड़े होने का स्पष्ट संदेश दिया।

    टीएमसी ने मुर्शिदाबाद में आधारशिला समारोह से कुछ दिन पहले कबीर को दूसरी बार पार्टी से निष्कासित कर दिया था। कांग्रेस से टीएमसी में शामिल हुए कबीर ने सत्ताधारी सरकार के पहले कार्यकाल में जूनियर कैबिनेट मंत्री के रूप में कार्य किया था, इससे पहले उन्हें 2015 में पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए छह साल के लिए निष्कासित कर दिया गया था। इसके बाद वह 2018 में भाजपा में शामिल हो गए, लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव में टीएमसी से चुनाव हार गए। 6 साल का निष्कासन पूरा होने के बाद कबीर टीएमसी में फिर से शामिल हो गए थे।

  • हुमायूं कबीर ने ममता बनर्जी को दी चुनौती, 2026 विधानसभा चुनाव में नई पार्टी से लड़ेंगे

    हुमायूं कबीर ने ममता बनर्जी को दी चुनौती, 2026 विधानसभा चुनाव में नई पार्टी से लड़ेंगे


    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल (West Bengal)में बाबरी मस्जिद (Babri Masjid)की नींव रख चुके विधायक हुमायूं कबीर(Humayun Kabir) ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी(Mamata Banerjee) को चुनौती दी है। उन्होंने बुधवार को कहा है कि वह अगले विधानसभा चुनाव में सीएम बनर्जी की पार्टी के खिलाफ उम्मीदवार उतारने जा रहे हैं। राज्य में 2026 में चुनाव होने हैं। इससे पहले वह दावा कर चुके हैं कि बनर्जी 2026 में सीएम नहीं बन पाएंगी। तृणमूल कांग्रेस ने कबीर को निलंबित कर दिया है।

    मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा, ‘मैं 22 दिसंबर को एक नई पार्टी का ऐलान करूंगा। मैं ममता बनर्जी की पार्टी के खिलाफ उम्मीदवारों को उतारूंगा। जो भी मुख्यमंत्री बनेगा, उसे ऐसा करने के लिए हुमायूं कबीर का समर्थन लेना पड़ेगा।’ उन्होंने पहले भी कहा था कि वह अगले चुनाव में पश्चिम बंगाल में किंगमेकर बनकर सामने आएंगे।

    सूत्रों के अनुसार, मंगलवार को कबीर ने दावा किया कि 2026 में न तो सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और न ही भारतीय जनता पार्टी अपने दम पर बहुमत का आंकड़ा छू पाएगी। कबीर ने कहा कि उनका अनुमान है कि 294 सदस्यीय विधानसभा में कोई भी पार्टी 148 सीटों का आंकड़ा पार नहीं कर पाएगी।

    उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘चुनाव के बाद मैं किंगमेकर बनूंगा। मेरे समर्थन के बिना कोई भी सरकार नहीं बना सकता।’ कबीर ने कहा, ‘मैंने कहा है कि मैं 135 सीटों पर चुनाव लड़ूंगा। आप देखेंगे कि मैं जो पार्टी बनाऊंगा, वह इतनी सीटें जीतेगी कि जो भी मुख्यमंत्री पद की शपथ लेगा, उसे मेरी पार्टी के विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होगी।’

    TMC ने उड़ाया मजाक
    टीएमसी ने कबीर के इस दावे का मजाक उड़ाया था। सीएम बनर्जी की अगुवाई वाली पार्टी के प्रदेश महासचिव अरूप चक्रवर्ती ने कहा, ‘हुमायूं कबीर दिवास्वप्न देख रहे हैं। सरकार बनाने की बात करने से पहले उन्हें अपनी जमानत बचाने की कोशिश करनी चाहिए। ऐसे निराधार दावे उनकी राजनीतिक हताशा को ही उजागर करते हैं।’