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  • चित्रकूट की बाढ़ का सामने आया बड़ा कारण! नदी किनारे अवैध निर्माण और अव्यवस्थित विकास ने बदला मंदाकिनी का प्राकृतिक बहाव

    चित्रकूट की बाढ़ का सामने आया बड़ा कारण! नदी किनारे अवैध निर्माण और अव्यवस्थित विकास ने बदला मंदाकिनी का प्राकृतिक बहाव


    सतना । सतना जिले के चित्रकूट में लगातार हो रही बाढ़ ने एक बार फिर नदी और इंसानी बस्तियों के बीच बिगड़ते संतुलन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पांच दिनों के भीतर तीन बार आई बाढ़ के बाद अब अतिक्रमण अव्यवस्थित विकास और प्रशासनिक लापरवाही को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या मंदाकिनी नदी का प्राकृतिक रास्ता निर्माण और अतिक्रमण की वजह से इतना संकरा हो गया है कि बारिश का पानी अपना रास्ता छोड़कर घरों और दुकानों में पहुंचने लगा है। 29 अगस्त को आई भीषण बाढ़ से चित्रकूट में 500 करोड़ रुपये से ज्यादा के नुकसान का अनुमान सामने आया है। वहीं करीब 1000 करोड़ लीटर पानी के घरों और दुकानों में घुसने का दावा किया गया है।

    पर्यावरणविद और प्रोफेसर घनश्यामदास गुप्ता के आकलन के अनुसार चित्रकूट क्षेत्र में मंदाकिनी नदी करीब पांच किलोमीटर तक बहती है। नदी के दोनों किनारों पर लगभग 100 मीटर के दायरे में निर्माण और अतिक्रमण होने की बात सामने आई है। यदि दोनों तरफ के इस क्षेत्र को जोड़ा जाए तो करीब 10 लाख वर्ग मीटर का क्षेत्र बनता है। विशेषज्ञ के अनुसार यदि यहां पानी के फैलाव के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध होती तो बड़ी मात्रा में पानी को समाने की क्षमता रहती। लेकिन निर्माण और अतिक्रमण ने नदी के प्राकृतिक फैलाव को सीमित कर दिया है जिससे तेज बारिश के दौरान पानी के लिए रास्ता कम पड़ने लगा।

    मंदाकिनी के किनारे अतिक्रमण का मामला नया नहीं है। जबलपुर हाईकोर्ट के अधिवक्ता नित्यानंद मिश्रा के अनुसार एनजीटी ने वर्ष 2014 के बाद 2016 और 2018 में भी जिला प्रशासन को सरयू और मंदाकिनी के किनारे 100 मीटर के दायरे में बने भवनों का सर्वे कराने के निर्देश दिए थे। 1980 के बाद बने निर्माणों को ग्रीन बेल्ट के उल्लंघन के रूप में चिह्नित कर कार्रवाई करने की बात भी सामने आई थी। शुरुआती दौर में कुछ निर्माण हटाए गए लेकिन बाद में कार्रवाई की रफ्तार धीमी पड़ गई।

    चित्रकूट की जल समस्या सिर्फ मंदाकिनी तक सीमित नहीं है। यहां कभी मंदाकिनी पयस्वनी और सरयू के संगम की धार्मिक और ऐतिहासिक मान्यता रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार पयस्वनी और सरयू अब अपने पुराने स्वरूप में नहीं हैं। अतिक्रमण प्रदूषण और बढ़ते निर्माण ने इन जलधाराओं की स्थिति को प्रभावित किया है। राघवप्रयाग घाट के आसपास भी नालों के जरिए गंदा पानी मंदाकिनी में पहुंचने की शिकायतें सामने आती रही हैं।

    मंदाकिनी संरक्षण के लिए करीब 24.62 करोड़ रुपये का रिवर फ्रंट प्रोजेक्ट भी सवालों के घेरे में है। आरोग्यधाम के पास 600 मीटर लंबी और सात मीटर ऊंची प्रोटेक्शन वॉल बनाई गई थी। कुछ लोगों का आरोप है कि इस निर्माण से नदी के प्राकृतिक बहाव पर असर पड़ा। हालांकि इस संबंध में लगाए गए आरोपों की प्रशासनिक जांच जरूरी होगी।

    बाढ़ के बाद मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने भी नदी के प्राकृतिक प्रवाह को लेकर चिंता जताई है। सीएम डॉ. मोहन यादव ने नदी किनारे अतिक्रमण का रिकॉर्ड तैयार कराने की बात कही है जबकि यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने नदी को उसके स्वाभाविक प्रवाह के लिए पर्याप्त जगह देने की जरूरत बताई है।

    अब मंदाकिनी के किनारे हुए निर्माणों की जांच के लिए पांच सदस्यीय टीम गठित की गई है। मझगवां एसडीएम के नेतृत्व वाली टीम में नगर परिषद के अधिकारी नायब तहसीलदार पीडब्ल्यूडी और जल संसाधन विभाग के अधिकारी शामिल हैं। टीम नदी के प्राकृतिक प्रवाह में बाधा डालने वाले सरकारी और निजी निर्माणों को चिह्नित करेगी और नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही मंदाकिनी के हाई फ्लड लेवल को भी नए सिरे से चिन्हित किया जाएगा। 28 और 29 अगस्त की रात नदी का जलस्तर निर्धारित 139.60 मीटर के मुकाबले करीब 145.76 मीटर तक पहुंच गया था। अब सवाल सिर्फ बाढ़ का नहीं बल्कि यह है कि मंदाकिनी को उसका पुराना रास्ता और फैलाव वापस कैसे मिले।

  • मंदाकिनी फिर उफान पर, खतरे के निशान से 4.5 मीटर ऊपर पहुंचा पानी, रामघाट जलमग्न

    मंदाकिनी फिर उफान पर, खतरे के निशान से 4.5 मीटर ऊपर पहुंचा पानी, रामघाट जलमग्न

    चित्रकूट। मध्य प्रदेश और पहाड़ी इलाकों में हुई तेज बारिश के बाद मंदाकिनी नदी एक बार फिर उफान पर आ गई। मंगलवार को नदी का जलस्तर खतरे के निशान 126.50 मीटर को पार कर करीब 4.5 मीटर ऊपर पहुंच गया। इसके चलते रामघाट सहित आसपास के इलाकों में बाढ़ का पानी फिर भर गया। घाट किनारे बनी दुकानें, मकान, आश्रम और होटल जलमग्न हो गए। रामघाट से कामतानाथ, आरोग्यधाम और जानकीकुंड जाने वाली सड़कें भी पानी में डूब गईं, जिससे इन मार्गों पर नाव चलानी पड़ी।

    कुछ घंटों में बिगड़े हालात, फिर डूबीं दुकानें
    मंगलवार सुबह करीब 4 बजे मंदाकिनी का जलस्तर 126.40 मीटर था, जो खतरे के निशान से सिर्फ 10 सेंटीमीटर नीचे था। इसके बाद मध्य प्रदेश और चित्रकूट क्षेत्र में रातभर हुई तेज बारिश के कारण नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा और कुछ ही घंटों में बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई।

    रामघाट में दोबारा पानी भरने से दुकानदारों की परेशानी बढ़ गई। एक दिन पहले ही की गई साफ-सफाई भी बाढ़ के पानी में बह गई। घरों और दुकानों में पानी घुसने के बाद कई लोग ऊपरी मंजिलों पर चले गए। होटल और आश्रमों में ठहरे लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। सड़कें जलमग्न होने से लोगों के लिए बाहर निकलना मुश्किल हो गया।

    भरत मंदिर में पुजारी समेत 15 लोग फंसे
    रामघाट स्थित भरत मंदिर में पुजारी श्यामजी पांडेय समेत करीब 15 लोग पानी के बीच फंसे हुए हैं। पुजारी के मुताबिक मंदिर के सभी कमरे पानी में डूब गए हैं और वहां रखा राशन भी खराब हो गया है। उनका कहना है कि अब तक मदद के लिए कोई नहीं पहुंचा है।

    डीएम पुलकित गर्ग ने बताया कि तेज बारिश के कारण मंदाकिनी का जलस्तर बढ़ा है। प्रशासन की ओर से लाउडस्पीकर के जरिए लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की गई थी। कई लोगों के लिए रैन बसेरों में ठहरने और भोजन-पानी की व्यवस्था की गई है। डीएम ने कहा कि किसी भी मंदिर में पुजारी या अन्य लोग रुके हैं तो उन्हें भी सुरक्षित बाहर निकाला जाएगा।

    29 अगस्त की बाढ़ में 563 घर क्षतिग्रस्त
    चित्रकूट में 29 अगस्त को आई बाढ़ को अब तक की सबसे बड़ी बाढ़ बताया गया था। इस दौरान करीब 563 घरों के क्षतिग्रस्त होने की रिपोर्ट सामने आई है। टीमें लगातार नुकसान का आकलन कर रही हैं। मंगलवार सुबह फिर आई बाढ़ से रामघाट, तरौंहा सहित कई गांव प्रभावित हुए हैं। प्रशासन अब तक 700 से अधिक राशन किट बांट चुका है।

    कानपुर और आसपास के जिलों में 4 मौतें
    लगातार बारिश के बीच पिछले 24 घंटे में कानपुर और आसपास के जिलों में कच्चे मकान और दीवार गिरने की घटनाओं में चार लोगों की मौत हो गई। कई लोग घायल भी हुए हैं।

    कानपुर के महाराजपुर में मंगलवार सुबह कच्चा मकान गिरने से मलबे में दबकर शकुंतला विश्वकर्मा (56) की मौत हो गई। हरदोई के बेनीगंज में सोमवार रात कच्ची दीवार गिरने से हरिपाल (72) की जान चली गई। लोनार में कच्ची कोठरी ढहने से दंपती समेत चार लोग घायल हुए हैं।

    बांदा के मरका क्षेत्र में सोमवार को कच्चे मकान की दीवार गिरने से हिमांशु (7) की मौत हो गई। वहीं कानपुर देहात के शिवली में मंगलवार सुबह कच्चा घर ढहने से सात माह की मासूम शानवी की मौत हो गई। हादसे में बुजुर्ग दंपती समेत चार लोग घायल हुए हैं।