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  • मंदसौर में मुहर्रम की पारंपरिक चौकी निकली, इमाम हुसैन की शहादत को किया याद

    मंदसौर में मुहर्रम की पारंपरिक चौकी निकली, इमाम हुसैन की शहादत को किया याद


    मध्यप्रदेश । मंदसौर शहर में मुहर्रम के पावन अवसर पर बुधवार रात पारंपरिक चौकी श्रद्धा, अनुशासन और अकीदत के साथ निकाली गई। इस धार्मिक आयोजन में हजारों की संख्या में मुस्लिम समाज के लोग शामिल हुए और हजरत इमाम हुसैन की शहादत को याद करते हुए उन्हें खिराज-ए-अकीदत पेश की। पूरे मार्ग पर धार्मिक वातावरण देखने को मिला, जहां लोगों ने शांति, भाईचारे और इंसानियत के संदेश को आत्मसात किया।

    इस्लामिक कैलेंडर का पहला महीना मुहर्रम विशेष महत्व रखता है। यह महीना कर्बला की उस ऐतिहासिक घटना की याद दिलाता है, जिसमें हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों ने सत्य, न्याय और मानवता की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया था। उनकी शहादत आज भी त्याग, सब्र, साहस और इंसानियत की मिसाल मानी जाती है। इसी संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के लिए मुहर्रम के दौरान विभिन्न धार्मिक आयोजन किए जाते हैं।

    मंदसौर में भी वर्षों पुरानी परंपरा के अनुसार ताजियों के आयोजन से पहले चौकी निकाली जाती है। बुधवार रात यह चौकी शेखा चौक क्षेत्र से प्रारंभ हुई। धार्मिक जुलूस शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरता हुआ बोराबाखल, सम्राट मार्केट और घंटाघर क्षेत्र पहुंचा। देर रात लगभग 12:30 बजे मंडी गेट पर चौकी का समापन हुआ। पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं का उत्साह और अनुशासन देखने लायक था।

    चौकी के दौरान अखाड़ों द्वारा प्रस्तुत पारंपरिक करतब लोगों के आकर्षण का मुख्य केंद्र रहे। युवाओं ने अपनी कला, संतुलन और शारीरिक दक्षता का शानदार प्रदर्शन किया। विभिन्न प्रकार के पारंपरिक खेल और युद्धक कलाओं से जुड़े करतबों को देखने के लिए मार्ग के दोनों ओर बड़ी संख्या में लोग एकत्रित हुए। दर्शकों ने इन प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया।

    आयोजन को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। पुलिस विभाग के अधिकारी और जवान पूरे मार्ग पर तैनात रहे। प्रशासनिक अधिकारियों ने भी लगातार व्यवस्थाओं की निगरानी की और यातायात सहित अन्य व्यवस्थाओं को सुचारू बनाए रखा। सुरक्षा व्यवस्था के चलते पूरा आयोजन बिना किसी व्यवधान के संपन्न हुआ।

    मुस्लिम समाज की ओर से भी स्वयंसेवकों की विशेष टीम तैनात की गई थी। इन स्वयंसेवकों ने भीड़ प्रबंधन, श्रद्धालुओं के मार्गदर्शन और अन्य व्यवस्थाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। समाज के वरिष्ठजनों ने कहा कि मुहर्रम केवल शोक का पर्व नहीं, बल्कि त्याग, सत्य और इंसानियत के मूल्यों को याद करने का अवसर भी है।

    चौकी के सफल आयोजन के साथ शहर में धार्मिक सौहार्द और भाईचारे का संदेश भी देखने को मिला। श्रद्धालुओं ने इमाम हुसैन की शिक्षाओं को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया और समाज में शांति, एकता तथा मानवता के मूल्यों को मजबूत करने की अपील की।

  • मंदसौर में नीट परीक्षा की तैयारियां पूरी, 4 केंद्रों पर जैमर-सीसीटीवी और बायोमेट्रिक व्यवस्था रहेगी अनिवार्य

    मंदसौर में नीट परीक्षा की तैयारियां पूरी, 4 केंद्रों पर जैमर-सीसीटीवी और बायोमेट्रिक व्यवस्था रहेगी अनिवार्य


    मध्यप्रदेश । मंदसौर जिले में राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) के सफल और पारदर्शी आयोजन को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह सक्रिय हो गया है। गुरुवार को कलेक्टर अदिति गर्ग ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से परीक्षा केंद्रों के एग्जाम कोऑर्डिनेटर और संबंधित विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक कर तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने सभी अधिकारियों को निर्देश दिए कि परीक्षा का आयोजन पूरी सतर्कता, पारदर्शिता और सुगमता के साथ किया जाए, ताकि विद्यार्थियों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

    जिले में इस वर्ष नीट परीक्षा चार प्रमुख केंद्रों पर आयोजित की जाएगी। इनमें लाल बहादुर शास्त्री उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, महारानी लक्ष्मीबाई शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय और राजीव गांधी शासकीय महाविद्यालय शामिल हैं। इन केंद्रों पर कुल 1,240 परीक्षार्थी परीक्षा में शामिल होंगे। प्रशासन ने सभी केंद्रों पर आवश्यक व्यवस्थाएं समय रहते पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं।

    कलेक्टर ने बताया कि विद्यार्थियों का प्रवेश सुबह 11 बजे से शुरू होगा, जबकि परीक्षा दोपहर 2 बजे से आयोजित होगी। परीक्षार्थियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए केंद्रों पर सुचारू प्रवेश व्यवस्था, बैठने की व्यवस्था और अन्य मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही अभिभावकों के लिए भी अलग वेटिंग एरिया तैयार किया जाएगा, ताकि परीक्षा केंद्रों के बाहर अनावश्यक भीड़ न हो।

    परीक्षा की सुरक्षा और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए प्रशासन ने कड़े कदम उठाए हैं। सभी परीक्षा कक्षों में सीसीटीवी कैमरे अनिवार्य रूप से संचालित रहेंगे और कंट्रोल रूम से उनकी लगातार निगरानी की जाएगी। इसके अलावा प्रत्येक केंद्र पर बायोमेट्रिक ई-मशीनों के माध्यम से अभ्यर्थियों की पहचान सुनिश्चित की जाएगी। किसी भी प्रकार की इलेक्ट्रॉनिक गड़बड़ी या नकल की संभावना को रोकने के लिए सभी केंद्रों पर जैमर लगाए जाएंगे और उनकी कार्यशीलता की पूर्व जांच भी की जाएगी।

    बैठक में यह भी तय किया गया कि परीक्षा केंद्रों के 100 मीटर के दायरे में अनधिकृत व्यक्तियों के प्रवेश पर प्रतिबंध रहेगा। वाहन पार्किंग की व्यवस्था भी निर्धारित स्थानों पर ही की जाएगी। दोपहर 1 बजे के बाद किसी भी बाहरी व्यक्ति को परीक्षा केंद्र परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए मोटरसाइकिल पेट्रोलिंग दल भी तैनात रहेगा, जो लगातार केंद्रों के आसपास निगरानी करेगा।

    स्वास्थ्य विभाग को प्रत्येक परीक्षा केंद्र पर मेडिकल स्टाफ और आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा विद्युत विभाग को निर्बाध बिजली आपूर्ति और पावर बैकअप सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है, ताकि परीक्षा के दौरान किसी प्रकार की तकनीकी बाधा उत्पन्न न हो।

    कलेक्टर अदिति गर्ग ने सभी सेंटर कोऑर्डिनेटर और अधिकारियों को निर्देशित किया कि यदि किसी भी केंद्र पर संसाधनों या व्यवस्थाओं की कमी दिखाई दे तो उसकी जानकारी तत्काल जिला प्रशासन को दी जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि विद्यार्थियों की सुविधा, सुरक्षा और परीक्षा की निष्पक्षता सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा सभी दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए। प्रशासन का लक्ष्य परीक्षा को शांतिपूर्ण, पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराना है।

  • जग्गाखेड़ी औद्योगिक क्षेत्र में निवेश का नया अवसर, 8 औद्योगिक प्लॉटों की ई-बिडिंग शुरू

    जग्गाखेड़ी औद्योगिक क्षेत्र में निवेश का नया अवसर, 8 औद्योगिक प्लॉटों की ई-बिडिंग शुरू


    मध्य प्रदेश । मंदसौर जिले के जग्गाखेड़ी औद्योगिक क्षेत्र में औद्योगिक विकास को नई गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम (एमपीआईडीसी) ने यहां आठ नए औद्योगिक प्लॉटों के आवंटन के लिए ई-बिडिंग प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस पहल को क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने, नए उद्योग स्थापित करने और रोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

    जग्गाखेड़ी औद्योगिक क्षेत्र पहले से ही मंदसौर के औद्योगिक विकास का प्रमुख केंद्र बन चुका है। यहां उपलब्ध आधुनिक सुविधाओं और बेहतर आधारभूत ढांचे के कारण उद्योगपतियों की रुचि लगातार बढ़ रही है। पहले चरण में विकसित सभी औद्योगिक भूखंड आवंटित हो चुके थे, जिसके बाद नए निवेशकों की मांग को देखते हुए अनुपयोगी भूमि का विकास कर आठ नए प्लॉट तैयार किए गए हैं। इन भूखंडों के लिए ई-बिडिंग प्रक्रिया शुरू होने से उद्योग जगत में उत्साह का माहौल है।

    जानकारी के अनुसार, फेज-1 में उपलब्ध कराए गए आठ नए प्लॉटों में दो भूखंड 1469.77 वर्गमीटर क्षेत्रफल के हैं, जबकि छह भूखंड 1153.74 वर्गमीटर क्षेत्र में विकसित किए गए हैं। इन पर मुख्य रूप से लघु एवं मध्यम स्तर के उद्योग स्थापित किए जा सकेंगे। औद्योगिक विशेषज्ञों का मानना है कि इन भूखंडों की उपलब्धता से स्थानीय उद्यमियों के साथ-साथ बाहरी निवेशकों को भी व्यवसाय विस्तार का अवसर मिलेगा।

    एमपीआईडीसी द्वारा प्रदेशभर में कुल 213 औद्योगिक प्लॉटों के आवंटन के लिए ई-बिडिंग प्रक्रिया संचालित की जा रही है, जिसमें जग्गाखेड़ी औद्योगिक क्षेत्र भी शामिल है। प्रदेश सरकार की उद्योग-अनुकूल नीतियों और निवेश प्रोत्साहन कार्यक्रमों का सकारात्मक असर अब छोटे और मध्यम शहरों में भी दिखाई देने लगा है। मंदसौर जैसे कृषि प्रधान जिले में औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था के लिए शुभ संकेत माना जा रहा है।

    जग्गाखेड़ी औद्योगिक क्षेत्र की सबसे बड़ी विशेषता यहां उपलब्ध आधुनिक आधारभूत सुविधाएं हैं। बेहतर सड़क नेटवर्क, निर्बाध बिजली आपूर्ति, जल उपलब्धता और अन्य आवश्यक सुविधाओं ने इसे निवेशकों के लिए आकर्षक केंद्र बना दिया है। यही कारण है कि यहां उद्योग स्थापित करने के लिए लगातार मांग बढ़ रही है। उद्योगों के विस्तार से न केवल स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी, बल्कि युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

    वर्तमान में जग्गाखेड़ी औद्योगिक क्षेत्र के फेज-1 में विकसित 136 औद्योगिक प्लॉट पूरी तरह आवंटित हो चुके हैं। यहां संचालित 78 औद्योगिक इकाइयों के माध्यम से लगभग 700 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिल रहा है। इसके अलावा फेज-2 का विकास कार्य भी तेजी से जारी है, जहां 219 नए औद्योगिक प्लॉट विकसित किए जा रहे हैं। इससे आने वाले वर्षों में क्षेत्र के औद्योगिक परिदृश्य में और बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

    एमपीआईडीसी के अधिकारियों का मानना है कि मध्यप्रदेश तेजी से निवेशकों की पसंदीदा औद्योगिक गंतव्य के रूप में उभर रहा है। संतुलित क्षेत्रीय विकास की नीति के तहत छोटे जिलों में भी औद्योगिक निवेश को बढ़ावा दिया जा रहा है। जग्गाखेड़ी में नए भूखंडों की उपलब्धता इसी रणनीति का हिस्सा है, जो भविष्य में मंदसौर को औद्योगिक मानचित्र पर और अधिक मजबूत पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

  • जग्गाखेड़ी औद्योगिक क्षेत्र में निवेश का नया अवसर, 8 औद्योगिक प्लॉटों की ई-बिडिंग शुरू

    जग्गाखेड़ी औद्योगिक क्षेत्र में निवेश का नया अवसर, 8 औद्योगिक प्लॉटों की ई-बिडिंग शुरू


    मध्य प्रदेश । मंदसौर जिले के जग्गाखेड़ी औद्योगिक क्षेत्र में औद्योगिक विकास को नई गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम (एमपीआईडीसी) ने यहां आठ नए औद्योगिक प्लॉटों के आवंटन के लिए ई-बिडिंग प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस पहल को क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने, नए उद्योग स्थापित करने और रोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

    जग्गाखेड़ी औद्योगिक क्षेत्र पहले से ही मंदसौर के औद्योगिक विकास का प्रमुख केंद्र बन चुका है। यहां उपलब्ध आधुनिक सुविधाओं और बेहतर आधारभूत ढांचे के कारण उद्योगपतियों की रुचि लगातार बढ़ रही है। पहले चरण में विकसित सभी औद्योगिक भूखंड आवंटित हो चुके थे, जिसके बाद नए निवेशकों की मांग को देखते हुए अनुपयोगी भूमि का विकास कर आठ नए प्लॉट तैयार किए गए हैं। इन भूखंडों के लिए ई-बिडिंग प्रक्रिया शुरू होने से उद्योग जगत में उत्साह का माहौल है।

    जानकारी के अनुसार, फेज-1 में उपलब्ध कराए गए आठ नए प्लॉटों में दो भूखंड 1469.77 वर्गमीटर क्षेत्रफल के हैं, जबकि छह भूखंड 1153.74 वर्गमीटर क्षेत्र में विकसित किए गए हैं। इन पर मुख्य रूप से लघु एवं मध्यम स्तर के उद्योग स्थापित किए जा सकेंगे। औद्योगिक विशेषज्ञों का मानना है कि इन भूखंडों की उपलब्धता से स्थानीय उद्यमियों के साथ-साथ बाहरी निवेशकों को भी व्यवसाय विस्तार का अवसर मिलेगा।

    एमपीआईडीसी द्वारा प्रदेशभर में कुल 213 औद्योगिक प्लॉटों के आवंटन के लिए ई-बिडिंग प्रक्रिया संचालित की जा रही है, जिसमें जग्गाखेड़ी औद्योगिक क्षेत्र भी शामिल है। प्रदेश सरकार की उद्योग-अनुकूल नीतियों और निवेश प्रोत्साहन कार्यक्रमों का सकारात्मक असर अब छोटे और मध्यम शहरों में भी दिखाई देने लगा है। मंदसौर जैसे कृषि प्रधान जिले में औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था के लिए शुभ संकेत माना जा रहा है।

    जग्गाखेड़ी औद्योगिक क्षेत्र की सबसे बड़ी विशेषता यहां उपलब्ध आधुनिक आधारभूत सुविधाएं हैं। बेहतर सड़क नेटवर्क, निर्बाध बिजली आपूर्ति, जल उपलब्धता और अन्य आवश्यक सुविधाओं ने इसे निवेशकों के लिए आकर्षक केंद्र बना दिया है। यही कारण है कि यहां उद्योग स्थापित करने के लिए लगातार मांग बढ़ रही है। उद्योगों के विस्तार से न केवल स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी, बल्कि युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

    वर्तमान में जग्गाखेड़ी औद्योगिक क्षेत्र के फेज-1 में विकसित 136 औद्योगिक प्लॉट पूरी तरह आवंटित हो चुके हैं। यहां संचालित 78 औद्योगिक इकाइयों के माध्यम से लगभग 700 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिल रहा है। इसके अलावा फेज-2 का विकास कार्य भी तेजी से जारी है, जहां 219 नए औद्योगिक प्लॉट विकसित किए जा रहे हैं। इससे आने वाले वर्षों में क्षेत्र के औद्योगिक परिदृश्य में और बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

    एमपीआईडीसी के अधिकारियों का मानना है कि मध्यप्रदेश तेजी से निवेशकों की पसंदीदा औद्योगिक गंतव्य के रूप में उभर रहा है। संतुलित क्षेत्रीय विकास की नीति के तहत छोटे जिलों में भी औद्योगिक निवेश को बढ़ावा दिया जा रहा है। जग्गाखेड़ी में नए भूखंडों की उपलब्धता इसी रणनीति का हिस्सा है, जो भविष्य में मंदसौर को औद्योगिक मानचित्र पर और अधिक मजबूत पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

  • मंदसौर में स्मार्ट मीटरों के खिलाफ फूटा जनाक्रोश, ढाई घंटे प्रदर्शन के बाद विभाग को सौंपा ज्ञापन

    मंदसौर में स्मार्ट मीटरों के खिलाफ फूटा जनाक्रोश, ढाई घंटे प्रदर्शन के बाद विभाग को सौंपा ज्ञापन


    मध्य प्रदेश । मंदसौर में स्मार्ट मीटरों को लेकर उपभोक्ताओं का असंतोष अब खुलकर सामने आने लगा है। बुधवार को शहर के सरदार वल्लभभाई पटेल चौराहे पर बड़ी संख्या में नागरिकों, किसानों, व्यापारियों और जनप्रतिनिधियों ने स्मार्ट मीटरों के विरोध में करीब ढाई घंटे तक प्रदर्शन किया। दोपहर 12:15 बजे शुरू हुआ यह प्रदर्शन लगभग 2:30 बजे तक चला, जिसमें लोगों ने बिजली विभाग के खिलाफ नाराजगी जताते हुए अपनी विभिन्न समस्याओं को प्रमुखता से उठाया।

    प्रदर्शन का नेतृत्व जिला पंचायत सदस्य दीपक सिंह गुर्जर ने किया। उन्होंने विद्युत विभाग के अधिकारियों को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि स्मार्ट मीटरों की स्थापना के बाद क्षेत्र के अनेक उपभोक्ताओं को बढ़े हुए बिजली बिलों का सामना करना पड़ रहा है। आम लोगों की लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं, लेकिन अब तक उनकी समस्याओं का संतोषजनक समाधान नहीं हो पाया है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते उचित कार्रवाई नहीं हुई तो लोगों का आक्रोश और बढ़ सकता है।

    प्रदर्शनकारियों का सबसे बड़ा आरोप यह था कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिजली बिलों में अप्रत्याशित वृद्धि देखने को मिली है। उपभोक्ताओं का कहना है कि उनकी बिजली खपत में कोई विशेष बढ़ोतरी नहीं हुई, फिर भी बिल पहले की तुलना में काफी अधिक आ रहे हैं। इससे मध्यमवर्गीय परिवारों, किसानों और छोटे व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। लोगों ने मांग की कि ऐसे सभी मामलों की जांच कर बिलों का पुनर्मूल्यांकन किया जाए और जहां आवश्यक हो, वहां संशोधित बिल जारी किए जाएं।

    स्मार्ट मीटरों की कार्यप्रणाली को लेकर भी लोगों ने सवाल उठाए। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि मीटर रीडिंग, पल्स रेट और बिल तैयार करने की प्रक्रिया को लेकर उपभोक्ताओं के बीच पर्याप्त जानकारी नहीं है। पारदर्शिता के अभाव में लोगों के मन में भ्रम और अविश्वास की स्थिति बन रही है। कई उपभोक्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि बिना पूर्व सूचना उनके बिजली कनेक्शन काट दिए गए, जिससे उन्हें अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ा।

    प्रदर्शन के दौरान सोलर ऊर्जा उपभोक्ताओं की समस्याएं भी प्रमुखता से उठाई गईं। दीपक सिंह गुर्जर ने कहा कि कई लोगों ने लाखों रुपये खर्च कर सोलर प्लांट स्थापित किए हैं, लेकिन इसके बावजूद उनके हजारों रुपये के बिजली बिल आ रहे हैं। उन्होंने सवाल किया कि यदि सोलर ऊर्जा अपनाने के बाद भी राहत नहीं मिल रही, तो ऐसी योजनाओं का लाभ आम उपभोक्ताओं को कैसे मिलेगा।

    प्रदर्शनकारियों ने स्मार्ट मीटरों को हटाकर पुराने मीटर दोबारा लगाने की मांग भी की। उनका कहना था कि वर्तमान व्यवस्था लोगों को सुविधा देने के बजाय नई परेशानियां खड़ी कर रही है। साथ ही बिजली बिल जमा करने की अंतिम तिथि बढ़ाने और शिकायतों के निपटारे के लिए विशेष व्यवस्था बनाने की मांग भी रखी गई।

    प्रदर्शन के बाद विद्युत विभाग के अधिकारियों ने उपभोक्ताओं को आश्वस्त किया कि बिजली बिल जमा करने की अंतिम तिथि 18 जून से बढ़ाकर 30 जून कर दी गई है। इसके अलावा 30 जून से पहले एक विशेष शिविर आयोजित किया जाएगा, जिसमें उपभोक्ता अपनी शिकायतें दर्ज करा सकेंगे। विभाग ने भरोसा दिलाया कि जांच के बाद आवश्यक होने पर बिलों में संशोधन भी किया जाएगा।

    हालांकि प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि 30 जून तक समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो वे बड़े आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे। ऐसे में अब सभी की निगाहें विभाग द्वारा किए जाने वाले सुधारात्मक कदमों पर टिकी हुई हैं।

  • मंदसौर डबल मर्डर केस का खुलासा: कारोबारी दंपती की हत्या के बाद आरोपी ने खुद को मारी गोली, 5 महीने बाद जांच पूरी

    मंदसौर डबल मर्डर केस का खुलासा: कारोबारी दंपती की हत्या के बाद आरोपी ने खुद को मारी गोली, 5 महीने बाद जांच पूरी


    मध्यप्रदेश । मंदसौर शहर में 31 दिसंबर 2025 की रात हुई सनसनीखेज डबल मर्डर और आत्महत्या की घटना की जांच अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। करीब पांच महीने तक चली विस्तृत जांच, फॉरेंसिक रिपोर्ट, सीसीटीवी फुटेज और गवाहों के बयानों के आधार पर पुलिस इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि राजस्थान के निम्बाहेड़ा निवासी सराफा कारोबारी विकास सोनी ने सोना कारोबारी दिलीप जैन और उनकी पत्नी रेखा जैन की हत्या की थी तथा इसके बाद खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी।

    पुलिस के अनुसार, 31 दिसंबर की रात विकास सोनी स्कूटी से मंदसौर स्थित गोल चौराहा क्षेत्र में दिलीप जैन के घर पहुंचा था। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि उस समय घर में रेखा जैन मौजूद थीं। कुछ देर बाद दिलीप जैन भी घर पहुंच गए। पुलिस जांच में मिले साक्ष्यों के अनुसार, तीनों के बीच सामान्य बातचीत हुई और उन्होंने साथ बैठकर चाय-नाश्ता भी किया।

    जांच रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ समय बाद दिलीप जैन और विकास सोनी के बीच पुराने कारोबारी लेन-देन को लेकर विवाद शुरू हुआ। पुलिस का कहना है कि इसी दौरान कथित रूप से विकास सोनी ने पहले हथियार निकालकर फायर करने की कोशिश की, लेकिन गोली नहीं चली। इसके बाद उसने चाकू से हमला कर दिया।

    फॉरेंसिक जांच और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के अनुसार, दिलीप जैन पर कई बार चाकू से हमला किया गया, जिससे उनकी मौत हो गई। शोर सुनकर नीचे पहुंचीं रेखा जैन पर भी आरोपी ने हमला किया। गंभीर चोटों के कारण उनकी भी घटनास्थल पर ही मौत हो गई।

    पुलिस का कहना है कि वारदात के बाद आरोपी कुछ समय तक घर में ही मौजूद रहा और बाद में कथित रूप से अपनी कनपटी पर गोली मार ली। बैलिस्टिक और फॉरेंसिक जांच में यह पुष्टि हुई कि घटनास्थल से बरामद हथियार और गोली का संबंध आरोपी से था। गोली घर की छत में धंसी हुई मिली थी, जिसे जांच के दौरान जब्त किया गया।

    सिटी कोतवाली पुलिस ने मामले की जांच के दौरान घटनास्थल से पिस्टल, चाकू, कारतूस, सीसीटीवी रिकॉर्डिंग, फॉरेंसिक साक्ष्य तथा अन्य सामग्री जब्त की थी। पुलिस ने आसपास लगे कई सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली। जांच में आरोपी की आवाजाही स्पष्ट रूप से रिकॉर्ड हुई, जबकि किसी अन्य संदिग्ध व्यक्ति की मौजूदगी सामने नहीं आई।

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार, हत्या और आत्महत्या की इस घटना के पीछे मुख्य कारण कारोबारी लेन-देन से जुड़ा विवाद था। हालांकि कथित बकाया राशि और आर्थिक विवाद से जुड़े सभी पहलुओं की भी जांच की गई। उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पुलिस को किसी तीसरे व्यक्ति की भूमिका नहीं मिली।

    मामले में दर्ज अपराध की जांच पूरी कर पुलिस ने अपनी अंतिम रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारियों को सौंप दी है। अब अदालत में खात्मा प्रतिवेदन (क्लोजर रिपोर्ट) प्रस्तुत करने की प्रक्रिया चल रही है।

    इस दर्दनाक घटना ने दो परिवारों को गहरा आघात पहुंचाया। एक ओर जैन दंपती के बच्चे अपने माता-पिता को खो चुके हैं, वहीं दूसरी ओर आरोपी के परिवार पर भी इसका गंभीर प्रभाव पड़ा है। पुलिस का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्य और वैज्ञानिक जांच इस निष्कर्ष की पुष्टि करते हैं कि यह मामला दोहरी हत्या और उसके बाद आत्महत्या का है।

  • मीनाक्षी नटराजन के नामांकन रद्द होने पर मंदसौर में कांग्रेस का उग्र प्रदर्शन, पुलिस ने पानी की बौछार और बल प्रयोग कर रोका

    मीनाक्षी नटराजन के नामांकन रद्द होने पर मंदसौर में कांग्रेस का उग्र प्रदर्शन, पुलिस ने पानी की बौछार और बल प्रयोग कर रोका


    मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी माहौल लगातार गरमाता जा रहा है। कांग्रेस प्रत्याशी Meenakshi Natarajan का नामांकन निरस्त होने के विरोध में सोमवार को मंदसौर में कांग्रेस और युवक कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच तनावपूर्ण स्थिति बन गई, जिसके बाद पुलिस ने पानी की बौछार कर भीड़ को नियंत्रित करने का प्रयास किया और बाद में बल प्रयोग भी किया।

    जानकारी के अनुसार, बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता जिला कांग्रेस कार्यालय पर एकत्रित हुए थे। यहां से वे रैली के रूप में भाजपा कार्यालय का घेराव करने के लिए निकले। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि राज्यसभा चुनाव प्रक्रिया में लोकतांत्रिक मूल्यों की अनदेखी की गई है और इसी के विरोध में वे अपना प्रतिरोध दर्ज कराने पहुंचे थे।

    पुलिस प्रशासन ने गांधी चौराहे से बालाजी मंदिर के बीच पहले से ही बैरिकेडिंग कर सुरक्षा व्यवस्था की थी। जब प्रदर्शनकारी भाजपा कार्यालय की ओर बढ़ने लगे तो पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इसके बाद कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। कई प्रदर्शनकारी बैरिकेड्स पर चढ़ गए और सरकार विरोधी नारेबाजी करने लगे।

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों को शांतिपूर्वक समझाने का प्रयास किया गया, लेकिन भीड़ आगे बढ़ने पर अड़ी रही। इसके बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए फायर ब्रिगेड की मदद से पानी की बौछार की गई। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी सड़क पर बैठ गए और विरोध जारी रखा। बाद में पुलिस ने उन्हें हटाने के लिए हल्का बल प्रयोग किया।

    प्रदर्शन के दौरान कुछ कांग्रेस कार्यकर्ताओं के घायल होने की भी सूचना है। कांग्रेस नेताओं का दावा है कि कई कार्यकर्ताओं को चोटें आई हैं, जबकि पुलिस का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए।

    जिला कांग्रेस अध्यक्ष महेंद्र सिंह गुर्जर ने आरोप लगाया कि कांग्रेस कार्यकर्ता शांतिपूर्ण और गांधीवादी तरीके से विरोध प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन पुलिस ने अनावश्यक बल प्रयोग किया। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन किया जा रहा है और विपक्ष की आवाज दबाने का प्रयास हो रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि कार्यकर्ताओं को जबरन हिरासत में लिया गया।

    वहीं, पुलिस प्रशासन ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया है। सीएसपी जितेंद्र भास्कर के अनुसार, भाजपा कार्यालय घेराव के लिए आवश्यक अनुमति नहीं ली गई थी। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने और समझाने का प्रयास किया, लेकिन वे नहीं माने। इसके बाद कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पानी की बौछार और अन्य आवश्यक कदम उठाए गए।

    पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान 10 से अधिक कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया। बाद में उनके विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई। सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिले के विभिन्न थानों से अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात किया गया था।

    इस घटना के बाद मंदसौर में राजनीतिक माहौल और अधिक गरमा गया है। कांग्रेस नेताओं ने विरोध प्रदर्शन जारी रखने के संकेत दिए हैं, जबकि प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सतर्कता बढ़ा दी है।

  • राज्यसभा नामांकन विवाद पर भाजपा का कांग्रेस पर हमला, ‘नारी सम्मान’ पर उठाए सवाल

    राज्यसभा नामांकन विवाद पर भाजपा का कांग्रेस पर हमला, ‘नारी सम्मान’ पर उठाए सवाल


    मध्य प्रदेश। मध्यप्रदेश के मंदसौर में राज्यसभा नामांकन विवाद को लेकर राजनीतिक तनाव बढ़ गया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए उसके ‘नारी सम्मान’ के दावे को केवल नारा बताया और उस पर दोहरे चरित्र का आरोप लगाया।

    जिला भाजपा कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में भाजपा जिलाध्यक्ष राजेश दीक्षित और जिला पंचायत अध्यक्ष दुर्गा पाटीदार ने कांग्रेस पर कई गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि कांग्रेस महिला सम्मान की बात तो करती है, लेकिन उसके व्यवहार में यह दिखाई नहीं देता।

    भाजपा नेताओं ने कहा कि राज्यसभा नामांकन विवाद के बाद कांग्रेस द्वारा मीनाक्षी नटराजन के नामांकन रद्द होने को महिला सम्मान का मुद्दा बनाया जा रहा है, जबकि वास्तविक मामला नामांकन पत्र में तथ्यों को छिपाने का है।

    प्रेस वार्ता में यह भी आरोप लगाया गया कि कांग्रेस नेतृत्व ने एक महिला कार्यकर्ता से जुड़े मामले में गंभीर शिकायतों को अनदेखा किया। भाजपा ने दावा किया कि संबंधित प्रकरण में कांग्रेस नेता कुंभम शिवकुमार रेड्डी पर गंभीर आरोप लगे थे और उस समय तत्कालीन तेलंगाना प्रभारी के रूप में मीनाक्षी नटराजन की भूमिका पर भी सवाल उठे थे।

    भाजपा का कहना है कि नामांकन पत्र में न्यायिक कार्यवाही और संबंधित तथ्यों का उल्लेख नहीं किया गया, जो कि नामांकन निरस्त होने का प्रमुख कारण बना। साथ ही यह भी आरोप लगाया गया कि कांग्रेस ने आरोपी नेता को संरक्षण दिया और पीड़ित महिला की शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया।

    भाजपा नेताओं ने कांग्रेस से कई सवाल पूछते हुए कहा कि यदि न्यायिक कार्यवाही की जानकारी थी तो उसे शपथ पत्र में क्यों नहीं बताया गया और महिला शिकायतों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

    प्रेस वार्ता में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का भी उल्लेख किया गया, जिसमें मीनाक्षी नटराजन की याचिका को खारिज कर दिया गया था। अदालत ने चुनावी प्रक्रिया में हस्तक्षेप की सीमाओं का हवाला देते हुए कहा था कि ऐसे मामलों में चुनाव परिणाम के बाद ही कानूनी चुनौती दी जा सकती है।

    भाजपा नेताओं ने कहा कि कांग्रेस को महिला सम्मान के मुद्दे पर बयानबाजी करने से पहले अपने संगठनात्मक व्यवहार की समीक्षा करनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी में महिलाओं से जुड़े मामलों में कई बार शिकायतों को अनदेखा किया जाता है।

    अंत में भाजपा ने कहा कि यह मामला केवल एक चुनावी विवाद नहीं है, बल्कि कांग्रेस की जवाबदेही और महिला सम्मान के प्रति उसके वास्तविक दृष्टिकोण पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

  • पारिवारिक विवाद ने लिया खौ़फनाक रूप, पति ने पत्नी और बुआ पर पेट्रोल डालकर लगाई आग

    पारिवारिक विवाद ने लिया खौ़फनाक रूप, पति ने पत्नी और बुआ पर पेट्रोल डालकर लगाई आग


    मंदसौर । मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले के नाहरगढ़ थाना क्षेत्र के पीपलखूंटा गांव में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसमें एक पति ने अपनी पत्नी और उसकी बुआ पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी। इस जघन्य वारदात में दोनों महिलाएं गंभीर रूप से झुलस गई हैं और उनका इलाज मंदसौर जिला अस्पताल में चल रहा है। घटना से पहले पति-पत्नी के बीच एक लंबा विवाद चल रहा था, जो अंततः हिंसक रूप में बदल गया।जानकारी के अनुसार, ममता और उसके पति राजनाथ के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था, जो कि अदालत तक पहुँच चुका था। दोनों के बीच एक सुनवाई के बाद ममता अपनी बुआ के साथ नाहरगढ़ के पीपलखूंटा गांव में रहने आ गई थी। इसी दौरान, राजनाथ ने अपने गुस्से में आकर दोनों महिलाओं पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी।
    पहले उसने अपनी पत्नी ममता पर पेट्रोल डाला और जब ममता की बुआ उसे बचाने के लिए आगे आई, तो उस पर भी पेट्रोल डालकर आग लगा दी।आग लगने के बाद पूरे इलाके में अफरातफरी मच गई। ग्रामीणों ने तुरंत आग बुझाने का प्रयास किया और घायलों को मंदसौर जिला अस्पताल भेजा। चिकित्सकों के अनुसार, ममता का चेहरा, छाती और पेट बुरी तरह झुलस गए हैं और उनकी हालत गंभीर बनी हुई है। ममता करीब 35 प्रतिशत तक जल चुकी हैं। वहीं, कासूबाई, ममता की बुआ, का भी बर्न वार्ड में इलाज चल रहा है।यह दुखद घटना कई सवाल खड़े करती है, खासकर इस मामले में पुलिस की भूमिका पर।पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया है कि करीब तीन महीने पहले ममता के पिता ने सुवासरा पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करवाई थी ।
    जिसमें उन्होंने अपनी बेटी को जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया था। हालांकि, पुलिस ने इस शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की, जिससे यह घटना घटित हो सकी। ममता के पिता राम सिंह नाथ ने कहा कि यदि समय रहते पुलिस कार्रवाई करती, तो यह हादसा टल सकता था।पीड़ित परिवार और स्थानीय जनता ने इस मामले में पुलिस की लापरवाही पर सवाल उठाए हैं, और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। इस पूरी घटना ने न केवल एक परिवार की खुशियों को छीन लिया, बल्कि समाज को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है कि पारिवारिक विवादों को कैसे हल किया जाए, ताकि ऐसे हादसों से बचा जा सके।