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  • मणिपुर में भड़की हिंसा…. नगा-कुकी समुदाय के बीच टकराव. 24 घंटे में 9 की हत्या, 14 घर फूंके

    मणिपुर में भड़की हिंसा…. नगा-कुकी समुदाय के बीच टकराव. 24 घंटे में 9 की हत्या, 14 घर फूंके


    इम्फाल। पू
    र्वोत्तर राज्य मणिपुर (Northeastern State of Manipur) में एक बार फिर से हिंसा हुई है. नगा और कुकी समुदाय (Naga and Kuki Communities) के बीच हुए हिंसक टकराव में पिछले 24 घंटे में 9 लोगों की मौत हुई है, जबकि 14 घरों में आग लगा दी गई है. इस घटना के बाद कुकी और नागा समुदायों के बीच फिर से तनाव बढ़ गया है और कांगपोकपी ज़िले में शटडाउन करना पड़ा है।

    अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि हिंसा के शिकार लोगों में कामजोंग ज़िले में गोलीबारी के दौरान मारी गई एक कुकी महिला शामिल है. इसके अलावा कामजोंग और कांगपोकपी में अलग-अलग हमलों का शिकार बने नागा विलेज गार्ड और उखरुल ज़िले में घात लगाकर किए गए हमले में फंसे एक आम नागरिक की मौत हुई है।

    इस हिंसा के कारण कामजोंग ज़िला प्रशासन ने चसाड पुलिस स्टेशन के 400 मीटर के दायरे में लोगों के इकट्ठा होने पर रोक लगा दी. इस बीच, कुकी संगठन ‘कमेटी ऑन ट्राइबल यूनिटी’ (CoTU) ने कांगपोकपी ज़िले में शनिवार शाम 6 बजे से 24 घंटे के बंद का आह्वान किया।

    यह हिंसा शुक्रवार रात तब भड़की जब चसाड पुलिस स्टेशन के पास गोलीबारी में 42 वर्षीय कुकी महिला और पांच बच्चों की मां, डोमखोनी टौथांग की मौत हो गई. पुलिस के अनुसार सिविल पुलिस, इंडिया रिज़र्व बटालियन और बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स के सुरक्षाकर्मियों ने पुलिस स्टेशन के पास कथित अवैध बंकरों के निर्माण की खबरों के बाद उन्हें हटाने के लिए एक ऑपरेशन शुरू किया था।

    इस दौरान जब अज्ञात हथियारबंद हमलावरों ने सुरक्षाकर्मियों पर गोली चलाई और सुरक्षाकर्मियों ने जवाबी कार्रवाई की, तो कथित तौर पर स्थानीय महिलाओं ने इस ऑपरेशन में बाधा डालने की कोशिश की. पुलिस ने बताया कि टौथांग की गर्दन के पास बाईं ओर छाती के ऊपरी हिस्से में गोली लगी और उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

    यह घटना 9 अक्टूबर को रात करीब 9.35 बजे हुई, जब चसाड गांव के वॉलंटियर्स की कथित मनमानी गिरफ्तारी और हिरासत के खिलाफ विरोध प्रदर्शन चल रहा था. इस हत्या के बाद आगजनी हुई और हथियारबंद समूहों और सुरक्षाकर्मियों के बीच फिर से गोलीबारी हुई. हिंसा के दौरान दोनों समुदायों के सदस्यों के कम से कम 14 घरों में आग लगा दी गई. अधिकारियों ने बताया कि उपद्रवियों ने चसाड पुलिस स्टेशन में भी आग लगाने की कोशिश की, जिससे उसके प्रवेश द्वार के पास बनी कुछ लकड़ी की दुकानें क्षतिग्रस्त हो गईं। शनिवार सुबह करीब 5 बजे फिर से गोलीबारी शुरू हुई और लगभग सुबह 7 बजे तक जारी रही।

    कुकी विमेन यूनियन के हेडक्वार्टर ने दावा किया कि 23 साल के माइकल न्गाममिनलेन हाओकिप की भी गोली मारकर हत्या कर दी गई. आरोप है कि यह हत्या नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ़ नागालिम (इसक-मुइवा) यानी NSCN-IM और उसके ईस्टर्न फ्लैंक गुट के लोगों ने की. इस आरोप की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी. एक और घटना में पुलिस ने बताया कि शनिवार सुबह करीब 9:30 बजे कामजोंग ज़िले के निंगचो चिंगडोंग गांव में हुए हमले में दो नागा विलेज गार्ड – 30 साल के न्गाचान्सो निंगशेन और 50 साल के लीशिशन हंग्यो मारे गए। यह गांव चसाड पुलिस स्टेशन से लगभग 17 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में स्थित है।

    एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि भारत-म्यांमार सीमा पर सक्रिय हथियारबंद गुट इस हमले में शामिल हो सकते हैं. हालांकि इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और जांच चल रही है। कांगपोकपी जिले में, हथियारबंद कुकी उग्रवादियों के संदिग्ध गुट द्वारा किए गए घात लगाकर किए गए हमले में एक नागा विलेज वॉलंटियर की मौत हो गई और दो अन्य घायल हो गए. यह हमला सुबह करीब 6 बजे इम्फाल-तामेंगलोंग रोड पर मकुई और तापोक गांवों के बीच हुआ, जो चालवा पुलिस स्टेशन से लगभग 15 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में है।

    पुलिस ने मृतक की पहचान तमेई सब-डिविजन के थालोन गांव के 35 वर्षीय माचुंगवांगबोउ के रूप में की. घायलों में एल पाब्रम गांव के 29 वर्षीय नहासोन और काडी गांव के 30 वर्षीय माथांगाम्बोउ शामिल थे।

    पुलिस के अनुसार, चार नागा विलेज वॉलंटियर यह जानकारी मिलने के बाद तापोन गांव से मकुई के लिए निकले थे कि मकुई गांव पर हमला हुआ है घात लगाकर बैठे हथियारबंद लोगों ने तापोन से लगभग 2 किलोमीटर दूर उन पर हमला कर दिया. माचुंगवांगबोउ की मौके पर ही मौत हो गई. नहासोन के दोनों पैरों में गोली लगी, जबकि माथांगाम्बोउ के दोनों पैरों और हाथों में चोटें आईं. घायलों को इलाज के लिए सेनापति ज़िला मुख्यालय ले जाया गया है।

    एक अलग घटना में 30 साल के संदीप राय की मौत हो गई. उन पर नेशनल हाईवे 202 पर कोंजांग गांव के पास अज्ञात हथियारबंद हमलावरों ने घात लगाकर हमला किया. यह हाईवे इम्फाल को उखरुल होते हुए नागालैंड से जोड़ता है।

    पुलिस ने बताया कि यह हमला शनिवार सुबह करीब 5.30 बजे लिटन पुलिस स्टेशन से लगभग 12 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में हुआ. सेनापति ज़िला मुख्यालय के पास तापहोउ सेनापति नेपाली गांव में रहने वाले राय अपनी कार से जा रहे थे तभी हमलावरों ने उन पर हमला कर दिया.

    पुलिस ने शव बरामद कर मामला दर्ज कर लिया है. बाद में शव को पोस्टमार्टम के लिए इम्फाल के जवाहरलाल नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज की मोर्चरी में रखवाया गया. हत्या की वजह और इसके लिए ज़िम्मेदार लोगों का अभी तक पता नहीं चल पाया है। बढ़ती हिंसा के बीच CoTU ने शनिवार शाम 6 बजे से कांगपोकपी ज़िले में 24 घंटे के पूर्ण बंद की घोषणा की।

  • मणिपुर में उग्रवादियों की गतिविधियों पर एजेंसियों की कड़ी नजर…. हो सकती है बड़ी कार्रवाई

    मणिपुर में उग्रवादियों की गतिविधियों पर एजेंसियों की कड़ी नजर…. हो सकती है बड़ी कार्रवाई


    इम्फाल।
    मणिपुर (Manipur) में हिंसा और कानून-व्यवस्था से जुड़ी घटनाओं के बीच उग्रवादी संगठनों (Militant Organizations) की गतिविधियां लगातार केंद्रीय एजेंसियों की निगरानी के दायरे में हैं। सुरक्षा एवं प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, विभिन्न उग्रवादी समूहों व उनके कैडरों की गतिविधियों को लेकर केंद्रीय एजेंसियां (Central agencies) स्थानीय खुफिया तंत्र के साथ लगातार सूचनाएं जुटा रही हैं। इसके आधार पर संवेदनशील और सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा बलों के अभियान तेज किए जा सकते हैं।

    अफसरों के मुताबिक, एनएससीएन (आईएम) समेत अन्य उग्रवादी संगठनों से जुड़े कैडरों की भूमिका को लेकर सुरक्षा एजेंसियों के पास लगातार सूचनाएं पहुंच रही हैं। जमीनी स्तर पर तैनात सुरक्षा बलों के कमांडरों को हिंसक समूहों के खिलाफ पहले की तुलना में अधिक आक्रामक रणनीति अपनाने के लिए तैयार रहने को कहा गया है। पहले सुरक्षा बलों का जोर मुख्य रूप से निवारक कार्रवाई और क्षेत्र में तनाव को नियंत्रित करने पर रहा था, पर मौजूदा परिस्थितियों में रणनीति में बदलाव किया जा रहा है।


    कोबरा कमांडो भी तैनात

    अभियान को मजबूत करने के लिए कोबरा कमांडो बल के जवानों को भी लगाया गया है। इनकी तैनाती का उद्देश्य संवेदनशील और दुर्गम इलाकों में सुरक्षा बलों की कार्रवाई को मजबूत करना तथा उग्रवादी नेटवर्क की गतिविधियों पर अंकुश लगाना है। केंद्रीय और स्थानीय खुफिया एजेंसियों से उग्रवादी संगठनों की गतिविधियों, संभावित ठिकानों और हिंसा में कथित भूमिका को लेकर अधिक से अधिक सूचनाएं जुटाने को कहा गया है। इस का विश्लेषण कर यह तय किया जा रहा है कि किन इलाकों में लक्षित अभियान चलाने की जरूरत है।


    कुकी-नगा तनाव की आशंका

    अधिकारियों का कहना है कि मणिपुर की सुरक्षा स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। लंबे समय से जारी कुकी-मैतेई संघर्ष के बीच अब कुकी-नगा तनाव की आशंका भी सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बन रही है। विभिन्न संगठनों से जुड़े कुछ कैडरों की हिंसा और कानून-व्यवस्था प्रभावित करने वाली गतिविधियों में कथित संलिप्तता की जानकारी सामने आई है।


    सीमावर्ती इलाकों में अभियान तेज किए गए

    हाल के दिनों में इंफाल पश्चिम, इंफाल पूर्व, बिष्णुपुर, थौबल और काकचिंग जिलों के संवेदनशील एवं सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा अभियान तेज किए गए हैं। अभियान के दौरान अलग-अलग इलाकों से हथियार, विस्फोटक बरामद किए जाने की जानकारी अधिकारियों ने दी है। अधिकारियों के मुताबिक, एनएससीएन (आईएम) से जुड़े लोग पकड़ में आए हैं।

  • मणिपुर हिंसा के बाद राहत कैंपों में असामान्य मौतों की जांच पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश, FIR और सुरक्षा पर जोर

    मणिपुर हिंसा के बाद राहत कैंपों में असामान्य मौतों की जांच पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश, FIR और सुरक्षा पर जोर

    नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर हिंसा के दौरान विस्थापित लोगों के लिए बनाए गए राहत कैंपों में हुई मौतों के मामले पर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने राज्य के मुख्य सचिव को इन मौतों की जांच, आपराधिक कार्रवाई और राहत कैंपों में रह रहे लोगों की सुरक्षा को लेकर उठाए गए कदमों की जानकारी हलफनामे के माध्यम से देने का निर्देश दिया है।

    चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान मणिपुर सरकार से कई सवाल किए। पीठ में जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल हैं। अदालत ने जस्टिस गीता मित्तल की अध्यक्षता वाली कमेटी की ओर से दी गई जानकारी के आधार पर राज्य सरकार से पूछा कि सामने आए मामलों पर अब तक कड़ी कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

    सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण यानी MSLSA को भी मामले पर अलग स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि राहत कैंपों में हुई असामान्य मौतों के मामलों में तेजी से एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए। इसके साथ ही विस्थापित लोगों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी भी सामने रखनी होगी।

    सुप्रीम कोर्ट के निर्देश जस्टिस गीता मित्तल कमेटी और एक आईएएस अधिकारी की रिपोर्ट पर विचार करने के बाद आए। इन रिपोर्टों में मणिपुर के राहत कैंपों में 30 से अधिक मौतों का उल्लेख किया गया था। इनमें एक मौत कथित यौन उत्पीड़न के बाद होने की बात भी सामने आई थी।

    सुनवाई के दौरान पीठ ने राहत कैंपों में हुई कुल 34 मौतों में से केवल 20 मामलों में पोस्टमार्टम कराए जाने पर भी सवाल उठाया। अदालत ने राज्य सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा कि सभी मामलों में पोस्टमार्टम क्यों नहीं कराया गया। मौतों की परिस्थितियों और उनके कारणों की जांच को लेकर भी राज्य से जवाब मांगा गया।

    पीठ ने राहत कैंपों में रहने वाले विस्थापित लोगों की असामान्य मौतों के बाद दिए गए मुआवजे पर भी सवाल उठाया। अदालत ने राज्य सरकार से पूछा कि ऐसे मामलों में प्रभावित परिवारों को केवल 20 से 30 हजार रुपये का मुआवजा क्यों दिया गया। इस मुद्दे पर भी राज्य को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी।

    अदालत ने यह भी कहा कि राहत कैंपों में रहने वाले विस्थापित लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। असामान्य मौतों के मामलों में कानूनी कार्रवाई और जांच की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। MSLSA को भी अपनी रिपोर्ट के जरिए संबंधित मामलों में की गई कार्रवाई और स्थिति की जानकारी देने को कहा गया है।

    सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर में वर्ष 2023 की हिंसा से जुड़े मामलों की सुनवाई को लेकर भी उम्मीद जताई कि केंद्रीय जांच एजेंसियों से जुड़े मामलों के लिए गठित दो विशेष अदालतें मुकदमों को तेजी से पूरा करेंगी। अदालत के निर्देशों के बाद अब मुख्य सचिव और MSLSA की स्टेटस रिपोर्ट में राहत कैंपों में हुई मौतों, जांच, एफआईआर, सुरक्षा और मुआवजे से जुड़े पहलुओं की जानकारी सामने आने की उम्मीद है।

  • यूपी समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव का काउंटडाउन शुरू, फरवरी-मार्च 2027 में मतदान की तैयारी तेज होने के संकेत

    यूपी समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव का काउंटडाउन शुरू, फरवरी-मार्च 2027 में मतदान की तैयारी तेज होने के संकेत

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी और प्रशासनिक तैयारियां तेज होती दिखाई दे रही हैं। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में वर्ष 2027 में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। मौजूदा परिस्थितियों और प्रशासनिक तैयारियों को देखते हुए इन राज्यों में फरवरी से मार्च के बीच मतदान कराए जाने की संभावना जताई जा रही है।

    पांचों राज्यों में उत्तर प्रदेश सबसे बड़ा चुनावी राज्य है और यहां विधानसभा का मौजूदा कार्यकाल 22 मई 2027 को समाप्त होगा। इसके बावजूद चुनाव इससे काफी पहले कराए जा सकते हैं। यदि फरवरी या मार्च में मतदान होता है, तो उत्तर प्रदेश के मतदाताओं को विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होने से करीब दो महीने पहले ही अपने प्रतिनिधियों के चुनाव का मौका मिल जाएगा।

    मौजूदा समय में पांचों राज्यों के विधानसभा कार्यकाल समाप्त होने की तारीखों पर नजर डालें तो सबसे पहले मणिपुर का कार्यकाल 13 मार्च 2027 को पूरा होगा। इसके अगले दिन यानी 14 मार्च को गोवा विधानसभा का कार्यकाल खत्म होगा। पंजाब विधानसभा का कार्यकाल 16 मार्च और उत्तराखंड विधानसभा का कार्यकाल 28 मार्च 2027 को समाप्त होना है। उत्तर प्रदेश में सबसे बाद में 22 मई 2027 को मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल पूरा होगा।

    ऐसे में चुनाव कार्यक्रम इस तरह तैयार किए जाने की संभावना है कि पांचों राज्यों में मतदान की प्रक्रिया 13 मार्च से पहले पूरी हो जाए। निर्वाचन प्रक्रिया पूरी करने और परिणाम घोषित करने के लिए चुनाव आयोग को पर्याप्त समय की जरूरत होगी। इसी वजह से फरवरी से मतदान शुरू होने की संभावना महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    चुनाव की तैयारियों में जनगणना और मतदाता सूची से जुड़े काम भी महत्वपूर्ण हैं। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब और गोवा में जनगणना का काम 1 दिसंबर 2026 से 4 जनवरी 2027 के बीच पूरा किए जाने की योजना है। चुनाव और जनगणना दोनों में बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारियों की ड्यूटी लगती है। खासतौर पर शिक्षकों और अन्य सरकारी कर्मचारियों की तैनाती दोनों प्रक्रियाओं में होने के कारण इनके बीच समय का तालमेल बेहद जरूरी होता है।

    जनगणना की तारीखों में बदलाव से चुनावी प्रक्रिया के दौरान कर्मचारियों की उपलब्धता को लेकर संभावित टकराव कम होने की उम्मीद है। इससे चुनाव आयोग और राज्य प्रशासन के लिए चुनावी तैयारियों को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाना आसान हो सकता है।

    मतदाता सूची को लेकर भी पांचों राज्यों में प्रक्रिया चल रही है। विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के बाद उत्तर प्रदेश में मतदाताओं की संख्या करीब 13.4 करोड़ बताई गई है। गोवा में यह संख्या करीब 10.6 लाख और मणिपुर में करीब 19.3 लाख रह गई है। पंजाब और उत्तराखंड की अंतिम मतदाता सूची जारी होने की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण रहेगी।

    आगामी चुनावों को देखते हुए राजनीतिक दलों ने भी अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। सीटों के समीकरण, उम्मीदवारों के चयन, गठबंधन की संभावनाओं और क्षेत्रीय मुद्दों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां आने वाले महीनों में और तेज होने की उम्मीद है। खासकर उत्तर प्रदेश में चुनावी मुकाबला राष्ट्रीय राजनीति पर भी व्यापक असर डाल सकता है।

    हालांकि मतदान की सटीक तारीखों की आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है। अंतिम चुनाव कार्यक्रम निर्वाचन आयोग द्वारा घोषित किया जाएगा। फिलहाल प्रशासनिक तैयारियों और विधानसभा कार्यकाल की समयसीमा को देखते हुए फरवरी-मार्च 2027 का दौर पांचों राज्यों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • न्यायिक सेवा के दौरान कारोबार के आरोपों पर पूर्व चीफ जस्टिस की LPG डीलरशिप रद्द

    न्यायिक सेवा के दौरान कारोबार के आरोपों पर पूर्व चीफ जस्टिस की LPG डीलरशिप रद्द

    नई दिल्ली । मणिपुर हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश और दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश रहे सेवानिवृत्त जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल से जुड़ा एक मामला सामने आने के बाद न्यायिक आचार संहिता और संवैधानिक पदों की गरिमा को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। आरोप है कि न्यायिक सेवा में रहते हुए उनका नाम एक एलपीजी डिस्ट्रीब्यूशन एजेंसी से जुड़ा रहा। मामले की जांच के बाद भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) ने संबंधित एलपीजी डीलरशिप को रद्द कर दिया है।

    जानकारी के अनुसार, जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल का नाम ‘किचन फ्लेम’ नामक एलपीजी डिस्ट्रीब्यूशन एजेंसी से जुड़ा होने का आरोप लगाया गया है। कहा गया कि न्यायिक पद पर रहते हुए भी एजेंसी का संचालन उनके नाम से जारी रहा। न्यायिक सेवा के दौरान किसी भी प्रकार के व्यावसायिक या संविदात्मक संबंधों को लेकर लागू आचार संहिता के संदर्भ में इस मामले को गंभीर माना जा रहा है।

    मामले की जांच के दौरान बीपीसीएल ने संबंधित तथ्यों की समीक्षा की। कंपनी के अनुसार, संवैधानिक पद पर रहते हुए किसी व्यवसाय से जुड़े रहने के आरोपों को ध्यान में रखते हुए संबंधित पक्ष को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। निर्धारित अवधि के भीतर संतोषजनक जवाब प्राप्त नहीं होने पर कंपनी ने छह जुलाई को डीलरशिप रद्द करने का निर्णय लिया। इसके बाद संबंधित एजेंसी का अनुबंध समाप्त कर दिया गया।

    बताया गया है कि यह मामला सबसे पहले एजेंसी के पूर्व प्रबंधक की पत्नी द्वारा मालिकाना अधिकार को लेकर उठाए गए विवाद के बाद सामने आया। इसके बाद संबंधित दस्तावेजों और अभिलेखों की जांच के दौरान यह मुद्दा व्यापक रूप से चर्चा में आया। शिकायत मिलने के बाद कंपनी ने अपने स्तर पर जांच प्रक्रिया शुरू की और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की।

    न्यायिक आचार संहिता के अंतर्गत यह स्पष्ट माना जाता है कि किसी भी संवैधानिक अदालत के न्यायाधीश को प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से किसी व्यापार, व्यवसाय या लाभकारी गतिविधि से नहीं जुड़ना चाहिए। इसका उद्देश्य न्यायपालिका की निष्पक्षता, स्वतंत्रता और सार्वजनिक विश्वास को बनाए रखना है। इसी सिद्धांत के आधार पर न्यायाधीशों से अपेक्षा की जाती है कि वे अपने कार्यकाल के दौरान किसी भी प्रकार के व्यावसायिक हितों से दूर रहें।

    बताया गया कि वर्ष 2025 में कंपनी को इस संबंध में शिकायत प्राप्त हुई थी, जिसके बाद नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया। कंपनी का कहना है कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने के कारण नियमानुसार डीलरशिप समाप्त करने की कार्रवाई की गई। हालांकि, इस पूरे मामले में न्यायिक या अन्य सक्षम प्राधिकरण की ओर से आगे की किसी कार्रवाई को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि न्यायपालिका से जुड़े मामलों में आचार संहिता का पालन संस्थागत विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऐसे मामलों में तथ्यों की निष्पक्ष जांच और नियमों के अनुरूप कार्रवाई को न्याय व्यवस्था में जनता के विश्वास से जोड़कर देखा जाता है। फिलहाल यह मामला न्यायिक नैतिकता और संवैधानिक पदों से जुड़े आचरण को लेकर व्यापक चर्चा का विषय बना हुआ है।

  • मणिपुर: सुरक्षा स्थिति पर सेना की पैनी नजर, सीमावर्ती और संवेदनशील इलाकों में तैयारियों की विस्तृत समीक्षा

    मणिपुर: सुरक्षा स्थिति पर सेना की पैनी नजर, सीमावर्ती और संवेदनशील इलाकों में तैयारियों की विस्तृत समीक्षा

    नई दिल्ली ।मणिपुर में लगातार बनी हुई संवेदनशील सुरक्षा स्थिति के बीच भारतीय सेना ने राज्य में अपनी तैयारियों और तैनाती की व्यापक समीक्षा की है। हाल के दिनों में सामने आई हिंसक घटनाओं और सीमावर्ती क्षेत्रों में बढ़ती चुनौतियों को देखते हुए सेना ने अग्रिम इलाकों का दौरा कर जमीनी हालात का गहराई से आकलन किया। इस पूरी कवायद का उद्देश्य क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के साथ-साथ सुरक्षा तंत्र को और अधिक मजबूत बनाना बताया जा रहा है।

    सेना के स्पीयर कोर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग लेफ्टिनेंट जनरल गिरीश कालिया ने राज्य के कई संवेदनशील और अग्रिम क्षेत्रों का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने न केवल तैनात जवानों से सीधे बातचीत की बल्कि स्थानीय परिस्थितियों और मौजूदा सुरक्षा चुनौतियों की विस्तृत जानकारी भी ली। उनके दौरे के दौरान रेड शील्ड डिवीजन के अंतर्गत आने वाले विभिन्न रणनीतिक क्षेत्रों की स्थिति का भी आकलन किया गया, जहां हाल के समय में तनाव की घटनाएं सामने आई थीं।

    लेफ्टिनेंट जनरल कालिया ने प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण भी किया, जिससे उन्हें जमीन पर मौजूद हालात का व्यापक और वास्तविक चित्र देखने को मिला। विशेष रूप से हाल में हुई स्थानीय संघर्ष जैसी घटनाओं से प्रभावित इलाकों पर ध्यान केंद्रित किया गया, ताकि सुरक्षा रणनीति को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके। उन्होंने जवानों की सतर्कता, उनके पेशेवर रवैये और कठिन परिस्थितियों में भी शांति बनाए रखने के प्रयासों की सराहना की।

    दौरे के दौरान सेना के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि क्षेत्र में शांति बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसके लिए सभी स्तरों पर सतर्कता आवश्यक है। कोर कमांडर ने जवानों को संबोधित करते हुए कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में किसी भी प्रकार की लापरवाही की गुंजाइश नहीं है और हर स्थिति पर लगातार नजर रखना बेहद जरूरी है।

    इसके साथ ही लेफ्टिनेंट जनरल कालिया ने लेइमाखोंग स्थित सैन्य स्टेशन में रेड शील्ड ड्रोन लैब का भी निरीक्षण किया। इस निरीक्षण के दौरान उन्हें सेना द्वारा विकसित की जा रही स्वदेशी ड्रोन तकनीक, उसकी मरम्मत, असेंबली और प्रशिक्षण प्रक्रियाओं के बारे में जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि आधुनिक निगरानी और मिशन आधारित ड्रोन तकनीक सुरक्षा अभियानों में तेजी से महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

    सेना प्रमुख ने तकनीकी नवाचारों की सराहना करते हुए कहा कि भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए आधुनिक तकनीक और उन्नत निगरानी प्रणालियां बेहद आवश्यक हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बदलते सुरक्षा परिदृश्य में तकनीकी क्षमता को लगातार विकसित करना समय की मांग है।

    सेना की ओर से जारी बयान में कहा गया कि यह पूरा दौरा न केवल परिचालन क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि भारतीय सेना मणिपुर में शांति, स्थिरता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। राज्य में हालात को सामान्य करने और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए सुरक्षा बलों की तैनाती और तैयारियों को और अधिक मजबूत किया जा रहा है।

  • मणिपुर में महिलाओं का विशाल आंदोलन, सड़कें बनीं विरोध का केंद्र..

    मणिपुर में महिलाओं का विशाल आंदोलन, सड़कें बनीं विरोध का केंद्र..

    नई दिल्ली।मणिपुर में हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं, जहां रॉकेट हमले में दो बच्चों समेत तीन लोगों की मौत के बाद व्यापक स्तर पर विरोध-प्रदर्शन जारी है। इस घटना के बाद से राज्य में जनाक्रोश बढ़ता जा रहा है और कई इलाकों में बंद और प्रदर्शन की स्थिति बनी हुई है। आम जनजीवन प्रभावित है और सड़कों पर सामान्य गतिविधियां काफी हद तक ठप हो गई हैं।

    इस आंदोलन में सबसे आगे मणिपुर की महिलाएं दिखाई दे रही हैं, जो हजारों की संख्या में सड़कों पर उतरकर विरोध दर्ज करा रही हैं। ये महिलाएं दिन के समय रास्तों को रोककर धरना दे रही हैं और आवाजाही को नियंत्रित कर रही हैं। कई इलाकों में स्थिति ऐसी है कि वहां न तो आम नागरिकों को आने-जाने की अनुमति है और न ही सुरक्षा बलों की सामान्य आवाजाही हो पा रही है। रात के समय ये महिलाएं मशाल रैलियों के जरिए इलाकों में गश्त कर रही हैं, जिससे आंदोलन और अधिक संगठित और प्रभावी दिखाई दे रहा है।

    प्रदर्शन में शामिल महिलाओं का कहना है कि वे घर की जिम्मेदारियों के साथ-साथ आंदोलन में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। उनके अनुसार यह केवल भावनात्मक नहीं बल्कि नैतिक जिम्मेदारी का हिस्सा है, जिसे वे संतुलित तरीके से निभा रही हैं। इस आंदोलन के चलते स्थानीय बाजारों और आर्थिक गतिविधियों पर भी असर पड़ा है, जिससे कई परिवारों पर आर्थिक दबाव बढ़ गया है। इसके बावजूद कुछ महिलाएं अपने काम के साथ-साथ आंदोलन में भागीदारी भी जारी रखे हुए हैं।

    इस आंदोलन का नेतृत्व करने वाली सामुदायिक संरचनाएं लंबे समय से शांति और सामाजिक संतुलन की मांग करती रही हैं। यह संगठन संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में सामाजिक व्यवस्था बनाए रखने और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए सक्रिय भूमिका निभाता रहा है। इतिहास में भी इस तरह के आंदोलन सामाजिक मुद्दों और कानून-व्यवस्था से जुड़े सवालों को लेकर सामने आते रहे हैं, जिन्होंने व्यापक जनसमर्थन हासिल किया है।

    यह पूरा विवाद एक रॉकेट हमले से शुरू हुआ था, जिसमें एक घर को निशाना बनाया गया था। इस हमले में एक छोटे बच्चे, एक बच्ची और उनकी मां की मौत हो गई थी। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में गुस्सा फैल गया और धीरे-धीरे यह विरोध बड़े आंदोलन में बदल गया।

    फिलहाल राज्य में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है और लोग शांति बहाली की मांग कर रहे हैं। महिलाओं के इस व्यापक आंदोलन ने स्थिति को और अधिक गंभीर बना दिया है, जिससे प्रशासन और समाज दोनों के सामने शांति बहाली की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।

  • लिटान गांव में तंगखुल नागा पर हमला, विवाद पारंपरिक तरीके से सुलझा पर बैठक रद्द; हिंसा की आशंका बढ़ी

    लिटान गांव में तंगखुल नागा पर हमला, विवाद पारंपरिक तरीके से सुलझा पर बैठक रद्द; हिंसा की आशंका बढ़ी


    नई दिल्ली । मणिपुर के उखरुल जिला में एक बार फिर हिंसा भड़क उठी है। सोमवार दोपहर लिटान सारेइखोंग गांव में हथियारबंद बदमाशों द्वारा कई घरों में आग लगाए जाने की घटनाएं सामने आई हैं। अधिकारियों के मुताबिक,पहाड़ी इलाकों के आसपास सशस्त्र समूहों ने हवा में कई राउंड गोलियां भी चलाईं जिससे इलाके में दहशत फैल गई।स्थिति बिगड़ने के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण जरूरी सामान लेकर पड़ोसी कांगपोकपी जिला के सुरक्षित इलाकों की ओर पलायन करने को मजबूर हो गए। तंगखुल समुदाय से जुड़े कई ग्रामीणों के भी अपने घर छोड़ने की सूचना है।

    शनिवार रात से हुई थी हिंसा की शुरुआत

    अधिकारियों के अनुसार,हिंसा की शुरुआत शनिवार रात को लिटान गांव में हुई,जब तंगखुल नागा समुदाय के एक सदस्य पर सात से आठ लोगों द्वारा कथित हमला किया गया। शुरुआत में पीड़ित पक्ष और लिटान सारेइखोंग के मुखिया के बीच मामला सुलझ गया था और पारंपरिक तरीकों से समाधान पर सहमति बनी थी। रविवार को इस संबंध में बैठक प्रस्तावित थी,लेकिन वह नहीं हो सकी।इसके बजाय,पास के सिकिबुंग गांव के कुछ ग्रामीणों ने कथित तौर पर लिटान सारेइखोंग के मुखिया के आवास पर हमला कर दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक हमलावरों ने लिटान थाने के पास से गुजरते हुए फायरिंग भी की।

    रविवार को लागू की गई निषेधाज्ञा

    रविवार शाम को दो आदिवासी समूहों के बीच पथराव की घटना के बाद प्रशासन को निषेधाज्ञा लागू करनी पड़ी। इसके बाद मध्यरात्रि के आसपास तंगखुल नागा समुदाय के कई घरों में कथित तौर पर आग लगा दी गई जबकि पास के इलाके में कुकी समुदाय के कुछ मकानों को भी नुकसान पहुंचा।

    हालात अभी भी तनावपूर्ण अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात

    जिले के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि नुकसान का आकलन किया जा रहा है और हालात अभी भी तनावपूर्ण बने हुए हैं। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए महादेव लंबुई शांगकाई और लिटान की ओर जाने वाले मार्गों पर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। रविवार शाम को सुरक्षा बलों ने हिंसक भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले भी दागे।

    सीएम खेमचंद सिंह ने की शांति की अपील

    इस बीच वाई. खेमचंद सिंह ने सोशल मीडिया के जरिए सभी समुदायों से संयम बरतने और शांति बनाए रखने की अपील की। उन्होंने बताया कि वे आरआईएमएस अस्पताल पहुंचे और घायलों से मुलाकात कर उनके इलाज के लिए हर संभव मदद का आश्वासन दिया।

    कर्फ्यू जैसी पाबंदियां लागू

    उखरुल जिले के मजिस्ट्रेट द्वारा जारी एक अधिसूचना में कहा गया है कि तंगखुल नगा और कुकी समुदायों के सदस्यों के बीच तनाव के कारण गांव में शांति और व्यवस्था भंग होने की आशंका है। जिला मजिस्ट्रेट आशीष दास ने अधिसूचना में कहा कि रविवार शाम सात बजे से अगले आदेश तक किसी भी व्यक्ति का अपने निवास स्थान से बाहर निकलना प्रतिबंधित है। इसमें कहा गया है कि यह आदेश सरकारी अधिकारियों और सुरक्षाकर्मियों पर लागू नहीं होगा। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में हथियारबंद लोग मकानों और वाहनों को आग लगाते तथा अत्याधुनिक हथियारों से फायरिंग करते दिखाई दे रहे हैं,हालांकि इन फुटेज की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

  • नागालैंड की जुको घाटी में भीषण आग…3 दिन में मणिपुर की सर्वोच्च चोटी माउंट ईसो तक पहुंची

    नागालैंड की जुको घाटी में भीषण आग…3 दिन में मणिपुर की सर्वोच्च चोटी माउंट ईसो तक पहुंची


    काहिमा।
    नागालैंड (Nagaland) की ज़ुको घाटी (Dzuko Valley) में पिछले तीन दिनों से लगी भीषण जंगल की आग (Massive forest fire.) अब मणिपुर (Manipur) की सबसे ऊंची चोटी माउंट ईसो (Highest peak Mount Iso) तक फैल गई है, जिससे इस जैव-विविधता संपन्न क्षेत्र के पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हो गई हैं। सॉन्ग-सॉन्ग यूथ एंड स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन (SSYSO) के स्वयंसेवक और आसपास के गांवों के निवासी आग बुझाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, उबड़-खाबड़ पहाड़ी इलाके में आग की तीव्रता प्रयासों पर भारी पड़ रही है। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि युवा स्वयंसेवकों के लगातार प्रयासों के बावजूद आग तेजी से आगे बढ़ रही है।

    राज्य सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक रिपोर्ट जारी नहीं की गई है। हालांकि, कई स्थानीय नेताओं ने मणिपुर के राज्यपाल से अपील की है कि आग पर काबू पाने के लिए तत्काल विशेषज्ञ टीमों को तैनात किया जाए। SSYSO के एक सदस्य ने कहा, “स्थिति भयावह है। हमें उचित संसाधनों और उपकरणों के साथ सरकारी हस्तक्षेप की तत्काल आवश्यकता है। हमारे सीमित साधन आग से निपटने के लिए बहुत पर्याप्त नहीं है।” पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि आग पर जल्द काबू नहीं पाया गया, तो यह मणिपुर के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र को भारी नुकसान पहुँचा सकती है और पूरे क्षेत्र के पर्यावरणीय संतुलन को बिगाड़ सकती है।


    2020 और 2021 में भी लगी थी भीषण आग

    यह पहली बार नहीं है जब ज़ुको घाटी और माउंट ईसो क्षेत्र को ऐसी तबाही का सामना करना पड़ा है। दिसंबर 2020 और जनवरी 2021 के बीच भी एक भीषण आग ने इस क्षेत्र की वनस्पतियों के एक बड़े हिस्से को नष्ट कर दिया था। स्थानीय निवासियों का कहना है कि उस समय तेज हवाओं ने आग बुझाने के प्रयासों में काफी बाधा डाली थी। मणिपुर के सेनापति जिले और नागालैंड के कोहिमा जिले की सीमा पर 2,452 मीटर की ऊंचाई पर स्थित ज़ुको घाटी अपनी अनूठी जैव-विविधता के लिए जानी जाती है, जिसमें दुर्लभ ‘ज़ुको लिली’ भी शामिल है। यह क्षेत्र पूर्वोत्तर हिमालय में एक महत्वपूर्ण पारिस्थितिक गलियारे के रूप में भी काम करता है।


    2024 में मणिपुर में लगभग 17.8 हजार हेक्टेयर वन नष्ट

    आधिकारिक स्रोतों के अनुसार, मणिपुर हाल के वर्षों में भारत के सबसे अधिक आग की चपेट में आने वाले राज्यों में से एक बनकर उभरा है। अप्रैल 2025 की शुरुआत में, राज्य में मात्र सात दिनों के भीतर जंगल की आग की 1,424 घटनाएं दर्ज की गईं, जो मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के बाद देश में तीसरे स्थान पर थीं। अकेले 2024 में, मणिपुर ने लगभग 17.8 हजार हेक्टेयर प्राकृतिक वन खो दिए, जिससे वातावरण में अनुमानित 91 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन हुआ।


    90 प्रतिशत जंगल की आग मानवीय कारणों से

    विशेषज्ञों का मानना है कि लगभग 90 प्रतिशत जंगल की आग मानवीय कारणों से लगती है, जो अक्सर वन क्षेत्रों के किनारे रहने वाले समुदायों द्वारा भूमि साफ करने जैसे उद्देश्यों के लिए लगाई जाती है। पारंपरिक ‘झूम खेती’ ने भी इस समस्या को बढ़ाया है। इस पहाड़ी इलाके के दुर्गम होने और तेज हवाओं के कारण आग बुझाना बेहद चुनौतीपूर्ण है। स्वयंसेवकों ने राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) की टीमों को हवाई सहायता के साथ तैनात करने की अपील की है। चूंकि प्रभावित क्षेत्र मणिपुर-नागालैंड सीमा पर स्थित है, इसलिए स्थानीय समुदायों ने इस बात पर जोर दिया है कि आग को नियंत्रित करने के लिए दोनों राज्यों के अधिकारियों के बीच समन्वित कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।

  • मेघालय, मणिपुर और त्रिपुरा के स्थापना दिवस पर मुख्यमंत्री मोहन यादव की शुभकामनाएं, देश की ताकत बताया पूर्वोत्तर का विकास

    मेघालय, मणिपुर और त्रिपुरा के स्थापना दिवस पर मुख्यमंत्री मोहन यादव की शुभकामनाएं, देश की ताकत बताया पूर्वोत्तर का विकास


    मध्य प्रदेश। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मेघालय, मणिपुर और त्रिपुरा के स्थापना दिवस के अवसर पर इन राज्यों के नागरिकों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। अपने संदेश में उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर भारत के ये राज्य न केवल प्राकृतिक सौंदर्य और सांस्कृतिक विरासत से समृद्ध हैं, बल्कि देश की एकता और विविधता का भी सशक्त प्रतीक हैं। उन्होंने कामना की कि आने वाले वर्षों में ये राज्य विकास के नए आयाम स्थापित करें और यहां के नागरिकों के जीवन में सुख, समृद्धि और उल्लास बना रहे।

    मेघालय का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह राज्य भारत का गौरव है। पर्वतमालाओं से घिरा, हरियाली और प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर मेघालय अपनी समृद्ध जनजातीय संस्कृति और परंपराओं के लिए जाना जाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मेघालय की सांस्कृतिक विविधता और पर्यावरण के प्रति जागरूक जीवनशैली देश के अन्य हिस्सों के लिए प्रेरणास्रोत है।मणिपुर को लेकर उन्होंने कहा कि यह राज्य भारत के गहने के रूप में प्रसिद्ध है। मणिपुर की कला, नृत्य और सांस्कृतिक विरासत ने इसे अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई है। मुख्यमंत्री ने बताया कि मणिपुर की पहचान उसकी अद्वितीय संस्कृति, खेल प्रतिभा और सामाजिक समरसता से जुड़ी हुई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि राज्य शांति, विकास और सांस्कृतिक संरक्षण के मार्ग पर निरंतर आगे बढ़ता रहेगा।

    त्रिपुरा के संदर्भ में डॉ. मोहन यादव ने कहा कि यह राज्य माँ त्रिपुरसुंदरी की कृपा से अभिसिंचित है और अपने नैसर्गिक सौंदर्य के लिए सुविख्यात है। उन्होंने त्रिपुरा की सांस्कृतिक परंपराओं ऐतिहासिक धरोहरों और जनजीवन की सरलता को सराहा। मुख्यमंत्री के अनुसार, त्रिपुरा ने सीमित संसाधनों के बावजूद विकास और सामाजिक संतुलन का उदाहरण प्रस्तुत किया है।मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में धार्मिक और सांस्कृतिक आस्था का भी उल्लेख किया और कहा कि बाबा महाकाल से यही मंगलकामना है कि प्रकृति की गोद में बसे ये तीनों राज्य निरंतर प्रगति करें। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र और राज्यों के समन्वय से पूर्वोत्तर भारत विकास की नई ऊंचाइयों को छू रहा है और आने वाला समय इन राज्यों के लिए और अधिक अवसर लेकर आएगा।

    राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में मुख्यमंत्री के इस संदेश को राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक सम्मान का प्रतीक माना जा रहा है। यह संदेश ऐसे समय में आया है, जब देश के अलग-अलग हिस्सों में क्षेत्रीय पहचान के साथ-साथ राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।स्थापना दिवस के अवसर पर मेघालय, मणिपुर और त्रिपुरा में सांस्कृतिक कार्यक्रमों, सरकारी आयोजनों और जनउत्सव की तैयारियां की गई हैं। इन आयोजनों के माध्यम से राज्यों की विकास यात्रा, सांस्कृतिक धरोहर और भविष्य की योजनाओं को जनता के सामने रखा जा रहा है।