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  • मणिपुर: सुरक्षा स्थिति पर सेना की पैनी नजर, सीमावर्ती और संवेदनशील इलाकों में तैयारियों की विस्तृत समीक्षा

    मणिपुर: सुरक्षा स्थिति पर सेना की पैनी नजर, सीमावर्ती और संवेदनशील इलाकों में तैयारियों की विस्तृत समीक्षा

    नई दिल्ली ।मणिपुर में लगातार बनी हुई संवेदनशील सुरक्षा स्थिति के बीच भारतीय सेना ने राज्य में अपनी तैयारियों और तैनाती की व्यापक समीक्षा की है। हाल के दिनों में सामने आई हिंसक घटनाओं और सीमावर्ती क्षेत्रों में बढ़ती चुनौतियों को देखते हुए सेना ने अग्रिम इलाकों का दौरा कर जमीनी हालात का गहराई से आकलन किया। इस पूरी कवायद का उद्देश्य क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के साथ-साथ सुरक्षा तंत्र को और अधिक मजबूत बनाना बताया जा रहा है।

    सेना के स्पीयर कोर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग लेफ्टिनेंट जनरल गिरीश कालिया ने राज्य के कई संवेदनशील और अग्रिम क्षेत्रों का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने न केवल तैनात जवानों से सीधे बातचीत की बल्कि स्थानीय परिस्थितियों और मौजूदा सुरक्षा चुनौतियों की विस्तृत जानकारी भी ली। उनके दौरे के दौरान रेड शील्ड डिवीजन के अंतर्गत आने वाले विभिन्न रणनीतिक क्षेत्रों की स्थिति का भी आकलन किया गया, जहां हाल के समय में तनाव की घटनाएं सामने आई थीं।

    लेफ्टिनेंट जनरल कालिया ने प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण भी किया, जिससे उन्हें जमीन पर मौजूद हालात का व्यापक और वास्तविक चित्र देखने को मिला। विशेष रूप से हाल में हुई स्थानीय संघर्ष जैसी घटनाओं से प्रभावित इलाकों पर ध्यान केंद्रित किया गया, ताकि सुरक्षा रणनीति को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके। उन्होंने जवानों की सतर्कता, उनके पेशेवर रवैये और कठिन परिस्थितियों में भी शांति बनाए रखने के प्रयासों की सराहना की।

    दौरे के दौरान सेना के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि क्षेत्र में शांति बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसके लिए सभी स्तरों पर सतर्कता आवश्यक है। कोर कमांडर ने जवानों को संबोधित करते हुए कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में किसी भी प्रकार की लापरवाही की गुंजाइश नहीं है और हर स्थिति पर लगातार नजर रखना बेहद जरूरी है।

    इसके साथ ही लेफ्टिनेंट जनरल कालिया ने लेइमाखोंग स्थित सैन्य स्टेशन में रेड शील्ड ड्रोन लैब का भी निरीक्षण किया। इस निरीक्षण के दौरान उन्हें सेना द्वारा विकसित की जा रही स्वदेशी ड्रोन तकनीक, उसकी मरम्मत, असेंबली और प्रशिक्षण प्रक्रियाओं के बारे में जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि आधुनिक निगरानी और मिशन आधारित ड्रोन तकनीक सुरक्षा अभियानों में तेजी से महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

    सेना प्रमुख ने तकनीकी नवाचारों की सराहना करते हुए कहा कि भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए आधुनिक तकनीक और उन्नत निगरानी प्रणालियां बेहद आवश्यक हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बदलते सुरक्षा परिदृश्य में तकनीकी क्षमता को लगातार विकसित करना समय की मांग है।

    सेना की ओर से जारी बयान में कहा गया कि यह पूरा दौरा न केवल परिचालन क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि भारतीय सेना मणिपुर में शांति, स्थिरता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। राज्य में हालात को सामान्य करने और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए सुरक्षा बलों की तैनाती और तैयारियों को और अधिक मजबूत किया जा रहा है।

  • मणिपुर में महिलाओं का विशाल आंदोलन, सड़कें बनीं विरोध का केंद्र..

    मणिपुर में महिलाओं का विशाल आंदोलन, सड़कें बनीं विरोध का केंद्र..

    नई दिल्ली।मणिपुर में हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं, जहां रॉकेट हमले में दो बच्चों समेत तीन लोगों की मौत के बाद व्यापक स्तर पर विरोध-प्रदर्शन जारी है। इस घटना के बाद से राज्य में जनाक्रोश बढ़ता जा रहा है और कई इलाकों में बंद और प्रदर्शन की स्थिति बनी हुई है। आम जनजीवन प्रभावित है और सड़कों पर सामान्य गतिविधियां काफी हद तक ठप हो गई हैं।

    इस आंदोलन में सबसे आगे मणिपुर की महिलाएं दिखाई दे रही हैं, जो हजारों की संख्या में सड़कों पर उतरकर विरोध दर्ज करा रही हैं। ये महिलाएं दिन के समय रास्तों को रोककर धरना दे रही हैं और आवाजाही को नियंत्रित कर रही हैं। कई इलाकों में स्थिति ऐसी है कि वहां न तो आम नागरिकों को आने-जाने की अनुमति है और न ही सुरक्षा बलों की सामान्य आवाजाही हो पा रही है। रात के समय ये महिलाएं मशाल रैलियों के जरिए इलाकों में गश्त कर रही हैं, जिससे आंदोलन और अधिक संगठित और प्रभावी दिखाई दे रहा है।

    प्रदर्शन में शामिल महिलाओं का कहना है कि वे घर की जिम्मेदारियों के साथ-साथ आंदोलन में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। उनके अनुसार यह केवल भावनात्मक नहीं बल्कि नैतिक जिम्मेदारी का हिस्सा है, जिसे वे संतुलित तरीके से निभा रही हैं। इस आंदोलन के चलते स्थानीय बाजारों और आर्थिक गतिविधियों पर भी असर पड़ा है, जिससे कई परिवारों पर आर्थिक दबाव बढ़ गया है। इसके बावजूद कुछ महिलाएं अपने काम के साथ-साथ आंदोलन में भागीदारी भी जारी रखे हुए हैं।

    इस आंदोलन का नेतृत्व करने वाली सामुदायिक संरचनाएं लंबे समय से शांति और सामाजिक संतुलन की मांग करती रही हैं। यह संगठन संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में सामाजिक व्यवस्था बनाए रखने और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए सक्रिय भूमिका निभाता रहा है। इतिहास में भी इस तरह के आंदोलन सामाजिक मुद्दों और कानून-व्यवस्था से जुड़े सवालों को लेकर सामने आते रहे हैं, जिन्होंने व्यापक जनसमर्थन हासिल किया है।

    यह पूरा विवाद एक रॉकेट हमले से शुरू हुआ था, जिसमें एक घर को निशाना बनाया गया था। इस हमले में एक छोटे बच्चे, एक बच्ची और उनकी मां की मौत हो गई थी। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में गुस्सा फैल गया और धीरे-धीरे यह विरोध बड़े आंदोलन में बदल गया।

    फिलहाल राज्य में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है और लोग शांति बहाली की मांग कर रहे हैं। महिलाओं के इस व्यापक आंदोलन ने स्थिति को और अधिक गंभीर बना दिया है, जिससे प्रशासन और समाज दोनों के सामने शांति बहाली की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।

  • लिटान गांव में तंगखुल नागा पर हमला, विवाद पारंपरिक तरीके से सुलझा पर बैठक रद्द; हिंसा की आशंका बढ़ी

    लिटान गांव में तंगखुल नागा पर हमला, विवाद पारंपरिक तरीके से सुलझा पर बैठक रद्द; हिंसा की आशंका बढ़ी


    नई दिल्ली । मणिपुर के उखरुल जिला में एक बार फिर हिंसा भड़क उठी है। सोमवार दोपहर लिटान सारेइखोंग गांव में हथियारबंद बदमाशों द्वारा कई घरों में आग लगाए जाने की घटनाएं सामने आई हैं। अधिकारियों के मुताबिक,पहाड़ी इलाकों के आसपास सशस्त्र समूहों ने हवा में कई राउंड गोलियां भी चलाईं जिससे इलाके में दहशत फैल गई।स्थिति बिगड़ने के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण जरूरी सामान लेकर पड़ोसी कांगपोकपी जिला के सुरक्षित इलाकों की ओर पलायन करने को मजबूर हो गए। तंगखुल समुदाय से जुड़े कई ग्रामीणों के भी अपने घर छोड़ने की सूचना है।

    शनिवार रात से हुई थी हिंसा की शुरुआत

    अधिकारियों के अनुसार,हिंसा की शुरुआत शनिवार रात को लिटान गांव में हुई,जब तंगखुल नागा समुदाय के एक सदस्य पर सात से आठ लोगों द्वारा कथित हमला किया गया। शुरुआत में पीड़ित पक्ष और लिटान सारेइखोंग के मुखिया के बीच मामला सुलझ गया था और पारंपरिक तरीकों से समाधान पर सहमति बनी थी। रविवार को इस संबंध में बैठक प्रस्तावित थी,लेकिन वह नहीं हो सकी।इसके बजाय,पास के सिकिबुंग गांव के कुछ ग्रामीणों ने कथित तौर पर लिटान सारेइखोंग के मुखिया के आवास पर हमला कर दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक हमलावरों ने लिटान थाने के पास से गुजरते हुए फायरिंग भी की।

    रविवार को लागू की गई निषेधाज्ञा

    रविवार शाम को दो आदिवासी समूहों के बीच पथराव की घटना के बाद प्रशासन को निषेधाज्ञा लागू करनी पड़ी। इसके बाद मध्यरात्रि के आसपास तंगखुल नागा समुदाय के कई घरों में कथित तौर पर आग लगा दी गई जबकि पास के इलाके में कुकी समुदाय के कुछ मकानों को भी नुकसान पहुंचा।

    हालात अभी भी तनावपूर्ण अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात

    जिले के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि नुकसान का आकलन किया जा रहा है और हालात अभी भी तनावपूर्ण बने हुए हैं। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए महादेव लंबुई शांगकाई और लिटान की ओर जाने वाले मार्गों पर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। रविवार शाम को सुरक्षा बलों ने हिंसक भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले भी दागे।

    सीएम खेमचंद सिंह ने की शांति की अपील

    इस बीच वाई. खेमचंद सिंह ने सोशल मीडिया के जरिए सभी समुदायों से संयम बरतने और शांति बनाए रखने की अपील की। उन्होंने बताया कि वे आरआईएमएस अस्पताल पहुंचे और घायलों से मुलाकात कर उनके इलाज के लिए हर संभव मदद का आश्वासन दिया।

    कर्फ्यू जैसी पाबंदियां लागू

    उखरुल जिले के मजिस्ट्रेट द्वारा जारी एक अधिसूचना में कहा गया है कि तंगखुल नगा और कुकी समुदायों के सदस्यों के बीच तनाव के कारण गांव में शांति और व्यवस्था भंग होने की आशंका है। जिला मजिस्ट्रेट आशीष दास ने अधिसूचना में कहा कि रविवार शाम सात बजे से अगले आदेश तक किसी भी व्यक्ति का अपने निवास स्थान से बाहर निकलना प्रतिबंधित है। इसमें कहा गया है कि यह आदेश सरकारी अधिकारियों और सुरक्षाकर्मियों पर लागू नहीं होगा। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में हथियारबंद लोग मकानों और वाहनों को आग लगाते तथा अत्याधुनिक हथियारों से फायरिंग करते दिखाई दे रहे हैं,हालांकि इन फुटेज की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

  • नागालैंड की जुको घाटी में भीषण आग…3 दिन में मणिपुर की सर्वोच्च चोटी माउंट ईसो तक पहुंची

    नागालैंड की जुको घाटी में भीषण आग…3 दिन में मणिपुर की सर्वोच्च चोटी माउंट ईसो तक पहुंची


    काहिमा।
    नागालैंड (Nagaland) की ज़ुको घाटी (Dzuko Valley) में पिछले तीन दिनों से लगी भीषण जंगल की आग (Massive forest fire.) अब मणिपुर (Manipur) की सबसे ऊंची चोटी माउंट ईसो (Highest peak Mount Iso) तक फैल गई है, जिससे इस जैव-विविधता संपन्न क्षेत्र के पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हो गई हैं। सॉन्ग-सॉन्ग यूथ एंड स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन (SSYSO) के स्वयंसेवक और आसपास के गांवों के निवासी आग बुझाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, उबड़-खाबड़ पहाड़ी इलाके में आग की तीव्रता प्रयासों पर भारी पड़ रही है। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि युवा स्वयंसेवकों के लगातार प्रयासों के बावजूद आग तेजी से आगे बढ़ रही है।

    राज्य सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक रिपोर्ट जारी नहीं की गई है। हालांकि, कई स्थानीय नेताओं ने मणिपुर के राज्यपाल से अपील की है कि आग पर काबू पाने के लिए तत्काल विशेषज्ञ टीमों को तैनात किया जाए। SSYSO के एक सदस्य ने कहा, “स्थिति भयावह है। हमें उचित संसाधनों और उपकरणों के साथ सरकारी हस्तक्षेप की तत्काल आवश्यकता है। हमारे सीमित साधन आग से निपटने के लिए बहुत पर्याप्त नहीं है।” पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि आग पर जल्द काबू नहीं पाया गया, तो यह मणिपुर के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र को भारी नुकसान पहुँचा सकती है और पूरे क्षेत्र के पर्यावरणीय संतुलन को बिगाड़ सकती है।


    2020 और 2021 में भी लगी थी भीषण आग

    यह पहली बार नहीं है जब ज़ुको घाटी और माउंट ईसो क्षेत्र को ऐसी तबाही का सामना करना पड़ा है। दिसंबर 2020 और जनवरी 2021 के बीच भी एक भीषण आग ने इस क्षेत्र की वनस्पतियों के एक बड़े हिस्से को नष्ट कर दिया था। स्थानीय निवासियों का कहना है कि उस समय तेज हवाओं ने आग बुझाने के प्रयासों में काफी बाधा डाली थी। मणिपुर के सेनापति जिले और नागालैंड के कोहिमा जिले की सीमा पर 2,452 मीटर की ऊंचाई पर स्थित ज़ुको घाटी अपनी अनूठी जैव-विविधता के लिए जानी जाती है, जिसमें दुर्लभ ‘ज़ुको लिली’ भी शामिल है। यह क्षेत्र पूर्वोत्तर हिमालय में एक महत्वपूर्ण पारिस्थितिक गलियारे के रूप में भी काम करता है।


    2024 में मणिपुर में लगभग 17.8 हजार हेक्टेयर वन नष्ट

    आधिकारिक स्रोतों के अनुसार, मणिपुर हाल के वर्षों में भारत के सबसे अधिक आग की चपेट में आने वाले राज्यों में से एक बनकर उभरा है। अप्रैल 2025 की शुरुआत में, राज्य में मात्र सात दिनों के भीतर जंगल की आग की 1,424 घटनाएं दर्ज की गईं, जो मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के बाद देश में तीसरे स्थान पर थीं। अकेले 2024 में, मणिपुर ने लगभग 17.8 हजार हेक्टेयर प्राकृतिक वन खो दिए, जिससे वातावरण में अनुमानित 91 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन हुआ।


    90 प्रतिशत जंगल की आग मानवीय कारणों से

    विशेषज्ञों का मानना है कि लगभग 90 प्रतिशत जंगल की आग मानवीय कारणों से लगती है, जो अक्सर वन क्षेत्रों के किनारे रहने वाले समुदायों द्वारा भूमि साफ करने जैसे उद्देश्यों के लिए लगाई जाती है। पारंपरिक ‘झूम खेती’ ने भी इस समस्या को बढ़ाया है। इस पहाड़ी इलाके के दुर्गम होने और तेज हवाओं के कारण आग बुझाना बेहद चुनौतीपूर्ण है। स्वयंसेवकों ने राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) की टीमों को हवाई सहायता के साथ तैनात करने की अपील की है। चूंकि प्रभावित क्षेत्र मणिपुर-नागालैंड सीमा पर स्थित है, इसलिए स्थानीय समुदायों ने इस बात पर जोर दिया है कि आग को नियंत्रित करने के लिए दोनों राज्यों के अधिकारियों के बीच समन्वित कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।

  • मेघालय, मणिपुर और त्रिपुरा के स्थापना दिवस पर मुख्यमंत्री मोहन यादव की शुभकामनाएं, देश की ताकत बताया पूर्वोत्तर का विकास

    मेघालय, मणिपुर और त्रिपुरा के स्थापना दिवस पर मुख्यमंत्री मोहन यादव की शुभकामनाएं, देश की ताकत बताया पूर्वोत्तर का विकास


    मध्य प्रदेश। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मेघालय, मणिपुर और त्रिपुरा के स्थापना दिवस के अवसर पर इन राज्यों के नागरिकों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। अपने संदेश में उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर भारत के ये राज्य न केवल प्राकृतिक सौंदर्य और सांस्कृतिक विरासत से समृद्ध हैं, बल्कि देश की एकता और विविधता का भी सशक्त प्रतीक हैं। उन्होंने कामना की कि आने वाले वर्षों में ये राज्य विकास के नए आयाम स्थापित करें और यहां के नागरिकों के जीवन में सुख, समृद्धि और उल्लास बना रहे।

    मेघालय का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह राज्य भारत का गौरव है। पर्वतमालाओं से घिरा, हरियाली और प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर मेघालय अपनी समृद्ध जनजातीय संस्कृति और परंपराओं के लिए जाना जाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मेघालय की सांस्कृतिक विविधता और पर्यावरण के प्रति जागरूक जीवनशैली देश के अन्य हिस्सों के लिए प्रेरणास्रोत है।मणिपुर को लेकर उन्होंने कहा कि यह राज्य भारत के गहने के रूप में प्रसिद्ध है। मणिपुर की कला, नृत्य और सांस्कृतिक विरासत ने इसे अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई है। मुख्यमंत्री ने बताया कि मणिपुर की पहचान उसकी अद्वितीय संस्कृति, खेल प्रतिभा और सामाजिक समरसता से जुड़ी हुई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि राज्य शांति, विकास और सांस्कृतिक संरक्षण के मार्ग पर निरंतर आगे बढ़ता रहेगा।

    त्रिपुरा के संदर्भ में डॉ. मोहन यादव ने कहा कि यह राज्य माँ त्रिपुरसुंदरी की कृपा से अभिसिंचित है और अपने नैसर्गिक सौंदर्य के लिए सुविख्यात है। उन्होंने त्रिपुरा की सांस्कृतिक परंपराओं ऐतिहासिक धरोहरों और जनजीवन की सरलता को सराहा। मुख्यमंत्री के अनुसार, त्रिपुरा ने सीमित संसाधनों के बावजूद विकास और सामाजिक संतुलन का उदाहरण प्रस्तुत किया है।मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में धार्मिक और सांस्कृतिक आस्था का भी उल्लेख किया और कहा कि बाबा महाकाल से यही मंगलकामना है कि प्रकृति की गोद में बसे ये तीनों राज्य निरंतर प्रगति करें। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र और राज्यों के समन्वय से पूर्वोत्तर भारत विकास की नई ऊंचाइयों को छू रहा है और आने वाला समय इन राज्यों के लिए और अधिक अवसर लेकर आएगा।

    राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में मुख्यमंत्री के इस संदेश को राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक सम्मान का प्रतीक माना जा रहा है। यह संदेश ऐसे समय में आया है, जब देश के अलग-अलग हिस्सों में क्षेत्रीय पहचान के साथ-साथ राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।स्थापना दिवस के अवसर पर मेघालय, मणिपुर और त्रिपुरा में सांस्कृतिक कार्यक्रमों, सरकारी आयोजनों और जनउत्सव की तैयारियां की गई हैं। इन आयोजनों के माध्यम से राज्यों की विकास यात्रा, सांस्कृतिक धरोहर और भविष्य की योजनाओं को जनता के सामने रखा जा रहा है।

  • 24 दिसंबर से 31 दिसंबर तक बैंक बंद, सिर्फ 29 को होगा कामकाज; ATM और नेट बैंकिंग सेवाएं जारी

    24 दिसंबर से 31 दिसंबर तक बैंक बंद, सिर्फ 29 को होगा कामकाज; ATM और नेट बैंकिंग सेवाएं जारी

    नई दिल्ली: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया RBI ने दिसंबर के अंतिम सप्ताह में बैंकों के लिए लंबी छुट्टियों की घोषणा की है। 24 दिसंबर बुधवार को देश के तीन राज्यों- नागालैंड मेघालय और मिजोरम में बैंक बंद रहेंगे। इस दिन क्रिसमस ईव के अवसर पर इन राज्यों में कामकाज नहीं होगा। इसके अलावा 25 दिसंबर गुरुवार को क्रिसमस के मौके पर देशभर के बैंकों में कामकाज नहीं होगा।जानकारी के अनुसार 26 दिसंबर शुक्रवार को नागालैंड मेघालय और मिजोरम में बैंक बंद रहेंगे। वहीं 27 दिसंबर शनिवार को महीने के चौथे शनिवार के चलते देशभर के बैंकों में कामकाज नहीं होगा। 28 दिसंबर रविवार को भी सभी राज्यों में बैंक बंद रहेंगे। केवल 29 दिसंबर सोमवार को बैंकों में सामान्य कामकाज होगा।

    31 दिसंबर बुधवार को न्यू ईयर ईव के अवसर पर मिजोरम और मणिपुर में बैंक बंद रहेंगे। इसके अलावा 30 दिसंबर मंगलवार को मेघालय में बैंक बंद रहेंगे। इस तरह दिसंबर के अंतिम सप्ताह में अलग-अलग राज्यों और शहरों में बैंकों में कामकाज की स्थिति अलग-अलग दिन प्रभावित होगी।RBI की सूची के अनुसार 24 से 31 दिसंबर तक अधिकांश दिनों में विभिन्न राज्यों और शहरों में बैंक बंद रहेंगे। इस दौरान केवल 29 दिसंबर को ही बैंकों में सामान्य कामकाज होगा। इसलिए ग्राहकों को वित्तीय लेनदेन और जरूरी कामकाज में असुविधा से बचने के लिए पूर्व योजना बनाने की सलाह दी जा रही है।

    हालांकि बैंकों के बंद रहने के बावजूद एटीएम मोबाइल बैंकिंग नेट बैंकिंग और इंटरनेट बैंकिंग सेवाएं सामान्य रूप से चालू रहेंगी। ग्राहक ATM मोबाइल ऐप या नेट बैंकिंग के जरिए पैसे निकालने चेक बैलेंस देखने और ऑनलाइन ट्रांजेक्शन जैसी सुविधाओं का इस्तेमाल कर सकते हैं। लेकिन इस अवधि में शाखाओं में जाकर ड्राफ्ट चेक या अन्य काउंटर सेवाओं का उपयोग संभव नहीं होगा।विशेष रूप से क्रिसमस और न्यू ईयर के अवसर पर यह छुट्टियां बैंक कर्मचारियों के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। ग्राहकों को सलाह दी जाती है कि वे जरूरी बैंकिंग कार्य जैसे पैसे जमा करना चेक क्लियरिंग और फिक्स्ड डिपॉजिट जैसी सेवाओं को पहले निपटा लें।

    RBI की घोषणा के अनुसार यह छुट्टियों का शेड्यूल सालाना बैंक हॉलिडे कैलेंडर के तहत जारी किया गया है। इस दौरान राज्यों और शहरों में छुट्टियों की सूची अलग-अलग हो सकती है। इसलिए ग्राहक अपनी संबंधित शाखा से भी छुट्टियों की पुष्टि कर सकते हैं।इस तरह दिसंबर के अंतिम सप्ताह में बैंकिंग सेवाओं में रुकावट होने के बावजूद डिजिटल बैंकिंग और ATM सेवाएं निरंतर उपलब्ध रहेंगी। ग्राहक अपने जरूरी कामकाज के लिए इन विकल्पों का लाभ उठा सकते हैं।

  • मणिपुर में फिर बढ़ा तनाव गोलीबारी के बाद सुरक्षा बलों को किया गया अलर्ट; सरकार बनाने की कयावद जारी

    मणिपुर में फिर बढ़ा तनाव गोलीबारी के बाद सुरक्षा बलों को किया गया अलर्ट; सरकार बनाने की कयावद जारी


    नई दिल्ली । मणिपुर में मंगलवार रात हुई गोलीबारी के बाद एक बार फिर राज्य में तनाव का माहौल बन गया है। बिष्णुपुर जिले के बाहरी इलाकों में खासकर चूड़ाचांदपुर जिले की सीमा से लगे तोरबंग और फौगाकचाओ इखाई इलाकों के पास कई बार गोलीबारी हुई जिससे स्थानीय लोगों में दहशत फैल गई है। अधिकारियों के मुताबिक गोलीबारी के कारणों और इसके मकसद का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।

    घटना के बाद सुरक्षा बलों को घटनास्थल पर भेजा गया और एहतियात के तौर पर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। मणिपुर के पहाड़ी इलाकों में ताजा गोलीबारी ने पहले से भड़क चुके जातीय संघर्ष को और उग्र बना दिया है। मणिपुर में 3 मई 2023 से जारी हिंसा के बाद यह पहली बार नहीं है जब गोलीबारी की घटना सामने आई है।

    इस बीच राज्य में सरकार गठन की कवायद भी जारी है। बीजेपी नेतृत्व ने मणिपुर में स्थिरता लाने के लिए राज्य के बीजेपी विधायकों के साथ कई दौर की बातचीत की है। इनमें कुकी और मैतेई समुदाय के बीजेपी विधायक भी शामिल हैं। मणिपुर विधानसभा के स्पीकर सत्यब्रत और पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह समेत 34 विधायक हाल ही में पार्टी नेतृत्व से मिलने के लिए एक साथ बैठे थे। यह मुलाकातें हिंसा के बाद पहली बार हुई थीं जब दोनों समुदायों के विधायक एक साथ बातचीत में शामिल हुए थे।

    राज्य में जातीय हिंसा के कारण स्थिति गंभीर बनी हुई है और सरकार गठन को लेकर राजनीतिक हलचल तेज है। बीजेपी नेतृत्व का उद्देश्य मणिपुर में शांति और स्थिरता सुनिश्चित करते हुए राज्य में एक मजबूत और समावेशी सरकार का गठन करना है।बीजेपी के नेताओं का कहना है कि विभिन्न समुदायों के बीच विश्वास बहाली और समझौते के आधार पर ही राज्य में शांति की स्थिति बहाल की जा सकती है। हालांकि मणिपुर में संघर्ष की जड़ें गहरी हैं और हालात की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार द्वारा कई बार सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाई जा चुकी है। मणिपुर में बढ़ती हिंसा और राजनीतिक अस्थिरता के बीच राज्य के लिए आगामी समय में स्थिरता लाना एक बड़ी चुनौती बन सकता है।

  • बांग्लादेशी नेता ने भारत के खिलाफ तीखा बयान दिया, पूर्वोत्तर राज्यों को लेकर दी धमकी

    बांग्लादेशी नेता ने भारत के खिलाफ तीखा बयान दिया, पूर्वोत्तर राज्यों को लेकर दी धमकी


    नई दिल्ली । बांग्लादेश में जैसे-जैसे आम चुनाव नजदीक आ रहे हैं वहीं राजनीतिक माहौल में भी गर्माहट बढ़ गई है। नेताओं ने भारत के खिलाफ आरोप लगाना शुरू कर दिया है। इस बीच नेशनल सिटिजन पार्टी के प्रमुख संयोजक हसनत अब्दुल्ला ने तीखा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अगर भारत ने बांग्लादेश के चुनावी प्रक्रिया में दखल दिया तो इसका असर भारत के पूर्वोत्तर राज्यों पर पड़ेगा और वे एक-दूसरे से अलग-थलग हो जाएंगे।

    यह बयान पूर्वोत्तर भारत के राज्यों को लेकर आया है जिन्हें “सेवल सिस्टर्स” के नाम से जाना जाता है। इनमें अरुणाचल प्रदेश असम मणिपुर मेघालय नगालैंड मिजोरम और त्रिपुरा शामिल हैं। यह क्षेत्र भौगोलिक रूप से संवेदनशील है और सिलीगुड़ी कॉरिडोर के जरिए मुख्य भूमि से जुड़ा हुआ है। हसनत का यह बयान एक गंभीर चेतावनी के रूप में सामने आया है कि अगर बांग्लादेश के आंतरिक मामलों में कोई हस्तक्षेप किया गया तो इससे पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ सकता है।

    हसनत ने यह भी कहा कि बांग्लादेश की सरकार के खिलाफ विदेशी एजेंटों को समर्थन देने वालों को बांग्लादेश कभी बर्दाश्त नहीं करेगा। उनका आरोप था कि शेख हसीना और उनके समर्थक अपनी सत्ता को बनाए रखने के लिए भारत का समर्थन लेते हैं जिससे बांग्लादेश की संप्रभुता खतरे में पड़ सकती है।

    हसनत ने आगे कहा “यदि भारत ने उन ताकतों को शरण दी जो बांग्लादेश की स्वतंत्रता और संप्रभुता का उल्लंघन करती हैं तो इसका परिणाम गंभीर होगा और यह पूरे क्षेत्र में अशांति पैदा करेगा।” बांग्लादेश के इस वरिष्ठ नेता का मानना है कि भारत को अपनी नीतियों में बदलाव लाकर बांग्लादेश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए वरना दोनों देशों के बीच रिश्ते और भी तनावपूर्ण हो सकते हैं।

    यह बयान बांग्लादेश में बढ़ते राजनीतिक तनाव और शेख हसीना सरकार के खिलाफ विरोध को भी दर्शाता है। हालांकि बांग्लादेश की राजनीतिक स्थिति में बदलाव के बावजूद भारत और बांग्लादेश के बीच संबंधों को सुधारने की आवश्यकता है ताकि दोनों देशों के बीच शांतिपूर्ण और सहयोगात्मक माहौल बना रहे।