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  • गुजरात का माधवपुर मेला, पूर्व और पश्चिम की संस्कृतियों का संगम: प्रधानमंत्री मोदी की अपील..

    गुजरात का माधवपुर मेला, पूर्व और पश्चिम की संस्कृतियों का संगम: प्रधानमंत्री मोदी की अपील..


    नई दिल्ली:प्रधानमंत्री मोदी ने गुजरात के पोरबंदर में आयोजित माधवपुर मेले के लिए सभी देशवासियों को शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि यह मेला केवल एक उत्सव नहीं बल्कि भारत की विविध संस्कृति और परंपराओं का प्रतीक है। माधवपुर मेला पूर्व और पश्चिम की सांस्कृतिक धरोहरों को एक साथ लाता है और ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को जीवंत करता है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, गुजरात के पोरबंदर में चल रहे माधवपुर मेले के लिए मेरी हार्दिक शुभकामनाएं। यह जीवंत उत्सव हमारी गौरवशाली संस्कृति को उजागर करता है और गुजरात और पूर्वोत्तर के बीच शाश्वत सांस्कृतिक बंधन को और मजबूत बनाता है। यह मेला विविध परंपराओं को एक साथ लाता है, जो ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की सच्ची भावना को दर्शाता है। मैं सभी से आग्रह करता हूं कि इस मेले में पधारें।

    इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने 27 मार्च 2022 के ‘मन की बात’ कार्यक्रम का एक वीडियो भी साझा किया, जिसमें उन्होंने माधवपुर मेले का महत्व और इसकी सांस्कृतिक भूमिका पर प्रकाश डाला था। उन्होंने कहा कि इस मेले के जरिए भारत की विविधता और सांस्कृतिक एकता को सीधे तौर पर महसूस किया जा सकता है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में बताया कि माधवपुर मेला पोरबंदर के माधवपुर गांव में समुद्र के किनारे लगता है, लेकिन इसका संबंध भारत के पूर्वी छोर से भी जुड़ा है। इसका कारण एक पौराणिक कथा है। कहा जाता है कि हजारों वर्ष पहले भगवान श्री कृष्ण का विवाह नार्थ ईस्ट की राजकुमारी रुक्मणि से हुआ था और यह विवाह पोरबंदर के माधवपुर में संपन्न हुआ। यही कारण है कि आज भी माधवपुर मेला वहां मनाया जाता है और यह पूर्व और पश्चिम के सांस्कृतिक बंधन का प्रतीक बन गया है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि समय के साथ इस मेले में नई चीजें भी जुड़ रही हैं। खासतौर पर कन्या पक्ष और नार्थ ईस्ट से आने वाले कलाकार अब मेले की शोभा बढ़ाते हैं। एक सप्ताह तक चलने वाले इस मेले में नार्थ ईस्ट के आर्टिस्ट, हेंडीक्राफ्ट से जुड़े कलाकार और सांस्कृतिक कलाकार शामिल होते हैं। यह मेले की रौनक को चार चांद लगाते हैं और भारत के पूरब और पश्चिम की संस्कृतियों का अद्भुत मेल प्रस्तुत करते हैं।

    प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों से आग्रह किया कि वे इस मेले के बारे में पढ़ें, जानें और भारत की सांस्कृतिक विविधता का अनुभव करें। उनका कहना था कि इस तरह के उत्सव न केवल हमारी सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखते हैं बल्कि समाज में एकता और भाईचारे की भावना को भी मजबूत करते हैं।

    बता दें कि भगवान कृष्ण और रुक्मिणी जी के विवाह की स्मृति में आयोजित माधवपुर मेले का उद्घाटन 27 मार्च को हुआ था और यह पांच दिन तक चलता है। यह मेला गुजरात और नार्थ ईस्ट के बीच शाश्वत सांस्कृतिक संबंधों का प्रतीक बनकर ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ का सजीव उदाहरण प्रस्तुत करता है।

  • देशवासियों को पीएम मोदी का संदेश, संकट में संयम, सतर्कता और एकजुटता बनाए रखें

    देशवासियों को पीएम मोदी का संदेश, संकट में संयम, सतर्कता और एकजुटता बनाए रखें

    नई दिल्ली:प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों से बार-बार अपील की है कि वह जागरूक रहें और अफवाहों के बहकावे में ना आएं। नई दिल्ली में पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण भारत के सामने उत्पन्न चुनौतियों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को संदेश दिया कि कठिन परिस्थितियों में भी संयम और सतर्कता बनाए रखना आवश्यक है। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि हम सब मिलकर इन संकटों से अच्छी तरह बाहर निकलेंगे।

    प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार को रेडियो कार्यक्रम “मन की बात” के 132वें एपिसोड के जरिए राष्ट्र से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि देशवासियों को चाहिए कि वह सरकारी स्रोतों से मिलने वाली जानकारी पर भरोसा करें और उसी के आधार पर किसी भी कदम को आगे बढ़ाएं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अफवाहों और झूठी खबरों के कारण समाज में अस्थिरता पैदा हो सकती है।

    उन्होंने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि जैसा कि देश ने पहले भी कठिन परिस्थितियों में अपनी 140 करोड़ जनता की सामर्थ्य से संकटों का सामना किया है, वैसे ही इस बार भी हम सब मिलकर इस कठिनाई से बाहर निकलेंगे। प्रधानमंत्री ने मार्च महीने की वैश्विक घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि पूरी दुनिया कोविड के कारण लंबी समस्याओं से गुजर रही थी और सभी को उम्मीद थी कि महामारी के बाद दुनिया नई प्रगति की ओर बढ़ेगी। लेकिन दुर्भाग्य से अलग-अलग क्षेत्रों में युद्ध और संघर्ष की परिस्थितियां लगातार बनी रहीं, जिससे वैश्विक स्थिरता प्रभावित हुई।

    प्रधानमंत्री मोदी ने विशेष रूप से खाड़ी देशों का आभार व्यक्त किया, जहां भारतीय नागरिक बड़ी संख्या में कार्यरत हैं। उन्होंने बताया कि पड़ोसी देशों में वर्तमान में भीषण युद्ध चल रहा है, और हमारे लाखों परिवारों के सदस्य वहां रहकर रोज़मर्रा की चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। खाड़ी देशों ने भारतीय नागरिकों को हर प्रकार की मदद मुहैया कराई है और उनके प्रयासों के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें धन्यवाद दिया।

    प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि हमें इस समय संयम और धैर्य के साथ काम करने की आवश्यकता है। उन्होंने देशवासियों से यह अपील की कि वे किसी भी अफवाह या सोशल मीडिया की झूठी खबर पर विश्वास न करें और हमेशा सत्यापित जानकारी ही स्वीकार करें। उनका संदेश स्पष्ट था कि संकट चाहे जितना बड़ा क्यों न हो, जब देशवासियों का सामूहिक सामर्थ्य और एकता सामने आती है तो हर मुश्किल परिस्थिति का सामना किया जा सकता है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में आशा और विश्वास के भाव व्यक्त किए और कहा कि भारत की जनता हर चुनौती का सामना करने में सक्षम है। उन्होंने नागरिकों से यह भी आग्रह किया कि वे अपने पड़ोसियों, परिवार और समाज के लोगों को भी सतर्क रहने और अफवाहों से बचने की सीख दें। उनका यह संदेश न केवल सतर्कता का था बल्कि यह लोगों में एकजुटता और देशभक्ति की भावना को भी प्रोत्साहित करता है।

  • राज्यपाल पटेल: मन की बात जन भावनाओं का सम्मान करने और पुलिस सेवा की संवेदनशीलता की सीख देती है

    राज्यपाल पटेल: मन की बात जन भावनाओं का सम्मान करने और पुलिस सेवा की संवेदनशीलता की सीख देती है


    भोपाल । भोपाल में रविवार को मंगुभाई पटेल ने मन की बात कार्यक्रम को केवल एक रेडियो प्रसारण न मानने की अपील की और उसे जन‑भावनाओं की जीवंत गाथा बताया। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम देश के कोने‑कोने में हो रहे सकारात्मक बदलाव और आम नागरिकों की भागीदारी की प्रेरणादायक कहानियों को सामने लाता है, जिससे समाज की नब्ज को समझने और जन‑भावनाओं का सम्मान करने की सीख मिलती है। राज्यपाल ने यह बात प्रशिक्षणाधीन पुलिस अधिकारियों और नव आरक्षकों को संबोधित करते हुए कही।

    उन्होंने कहा कि पुलिस का जनता से सीधा जुड़ाव होता है, इसलिए मन की बात जैसे कार्यक्रम को केवल औपचारिकता न मानकर नियमित रूप से सुनना चाहिए, क्योंकि इससे लोक‑कल्याण की भावना, संवेदनशीलता और कर्तव्यनिष्ठा जैसे गुण विकसित होते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस कार्यक्रम के माध्यम से विपरीत परिस्थितियों में भी समाज के लिए उदाहरण पैदा करने वाले गुमनाम नायकों की कहानियों को साझा करते हैं, जो पुलिस बल को भी अपनी सेवा‑परिवार के प्रति और अधिक संवेदनशील बनाने में मदद करती हैं।

    राज्यपाल पटेल ने कहा कि प्रशिक्षण का समय भविष्य की नींव है और इस दौरान सीखी गई बातें और प्रधानमंत्री के विचार पुलिस अधिकारियों के करियर में मार्गदर्शक की भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि पुलिस सेवा में शालीनता और तत्परता होना चाहिए, ताकि पीड़ित व्यक्ति पुलिस के पास आते समय सुरक्षित महसूस करे। साथ ही पुलिस में अनुशासन के साथ सहानुभूति का होना आवश्यक है, और मन की बात कार्यक्रम हमें मानवीय दृष्टिकोण प्रदान करता है, जो वर्दी को केवल सत्ता का प्रतीक नहीं बल्कि समाज सेवा का संकल्प बनाता है।

    राज्यपाल ने अधिकारियों से अपेक्षा जताई कि वे देश‑भक्ति और जन‑सेवा की गौरवशाली परंपरा को सशक्त, अनुशासित और मानवीय पुलिस बल के रूप में आगे बढ़ाएंगे। उन्होंने कहा कि मन की बात में प्रधानमंत्री द्वारा स्वच्छता, जल संरक्षण और डिजिटल साक्षरता जैसे विषयों पर दिया गया मार्गदर्शन उन्हें अपने कार्यक्षेत्र में लागू करना चाहिए। यह कार्यक्रम आज के सामाजिक और तकनीकी युग में पुलिस सेवा को लोक‑कल्याण की भावना से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम है।

    राज्यपाल ने प्रशिक्षणाधीन अधिकारियों को कहा कि वे अपने आप को केवल ड्यूटी तक सीमित न रखें, बल्कि समाज में चेंज मेकर के रूप में अपनी पहचान बनाने का प्रयास करें। उन्होंने बताया कि मन की बात में देश के अलग‑अलग हिस्सों से आने वाली सफल कहानियों से यह स्पष्ट होता है कि व्यक्ति का छोटा सा प्रयास भी बड़े परिवर्तन ला सकता है। इस संदेश को अपनाकर पुलिस विभाग समाज में मित्र और रक्षक की छवि को और मजबूत कर सकता है।

    कार्यक्रम की शुरुआत में विशेष पुलिस महानिदेशक और मध्यप्रदेश पुलिस अकादमी के निदेशक ने राज्यपाल का स्वागत किया तथा प्रशिक्षण के अनुभवों को नव आरक्षकों ने साझा किया। इसके अलावा पुलिस अधीक्षक और अकादमी के सहायक निदेशक सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भी उपस्थित रही।

  • प्रधानमंत्री मोदी ने 'ओडिशा की मदर टेरेसा' पार्वती गिरि को दी श्रद्धांजलि; स्वतंत्रता संग्राम और समाज सेवा में उनके योगदान को सराहा

    प्रधानमंत्री मोदी ने 'ओडिशा की मदर टेरेसा' पार्वती गिरि को दी श्रद्धांजलि; स्वतंत्रता संग्राम और समाज सेवा में उनके योगदान को सराहा


    नई दिल्ली/भुवनेश्वर। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी और समाज सुधारक पार्वती गिरि जी की जन्म शताब्दी के अवसर पर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री ने औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध भारत के स्वतंत्रता संग्राम में उनकी अदम्य साहसपूर्ण भूमिका और आजादी के बाद समाज के वंचित वर्गों के उत्थान के लिए किए गए उनके कार्यों को याद किया। स्वतंत्रता संग्राम की प्रखर नायिका प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पूर्व में ट्विटर पर साझा किए गए अपने संदेश में कहा कि पार्वती गिरि जी ने विदेशी शासन के खिलाफ आंदोलन में बेहद सराहनीय भूमिका निभाई थी। मात्र 16 वर्ष की आयु में ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ में सक्रिय भागीदारी करने वाली पार्वती गिरि अपनी अटूट देशभक्ति के लिए जानी जाती हैं। उन्हें उनके सेवा भाव के कारण ‘ओडिशा की मदर टेरेसा’ के नाम से भी जाना जाता है।

    महिला सशक्तिकरण और स्वास्थ्य सेवा में उल्लेखनीय कार्य प्रधानमंत्री ने पार्वती गिरि के सामुदायिक सेवा के प्रति समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि स्वास्थ्य सेवा, महिला सशक्तिकरण और संस्कृति के संरक्षण जैसे क्षेत्रों में उनके कार्य आज भी प्रेरणा देते हैं। उन्होंने समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की सेवा को ही अपना धर्म माना। प्रधानमंत्री ने यह भी साझा किया कि उन्होंने पिछले महीने अपने प्रसिद्ध रेडियो कार्यक्रम मन की बात में भी पार्वती गिरि जी के जीवन संघर्ष और उनकी महानता का विशेष उल्लेख किया था।   एक प्रेरणादायी व्यक्तित्व पार्वती गिरि जी का जन्म 19 जनवरी 1926 को हुआ था। उन्होंने अपना पूरा जीवन अनाथों की सेवा और जेल सुधार जैसे रचनात्मक कार्यों में समर्पित कर दिया। प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि उनकी जन्म शताब्दी पर देशवासी उनके आदर्शों को अपनाकर एक समावेशी समाज के निर्माण का संकल्प लेंगे।