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  • रीति तिवारी के गाली विवाद के बाद बिग बॉस में होगी पिता की एंट्री? मनोज तिवारी काजी तौकीर को सुना सकते हैं खरी-खोटी

    रीति तिवारी के गाली विवाद के बाद बिग बॉस में होगी पिता की एंट्री? मनोज तिवारी काजी तौकीर को सुना सकते हैं खरी-खोटी


    नई दिल्ली। बिग बॉस 20 का घर इस समय विवादों से घिरा हुआ है। शो में कंटेस्टेंट्स के बीच लगातार बहस और टकराव देखने को मिल रहा है और इसी बीच रीति तिवारी और काजी तौकीर के बीच हुआ विवाद चर्चा में बना हुआ है। बीते दिनों एक टास्क के दौरान रीति तिवारी ने काजी तौकीर और उदिति सिंह के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया। मामला इतना बढ़ गया कि घरवालों को बीच में आकर दोनों पक्षों को अलग करना पड़ा। अब इसी विवाद के बीच वीकेंड का वार को लेकर एक नई चर्चा सामने आई है कि भोजपुरी अभिनेता और रीति तिवारी के पिता मनोज तिवारी शो में बेटी का समर्थन करने पहुंच सकते हैं। हालांकि उनके बिग बॉस 20 में आने की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

    रिपोर्ट के मुताबिक वीकेंड का वार में मनोज तिवारी की संभावित एंट्री को लेकर चर्चा चल रही है। बताया जा रहा है कि अगर वह शो में आते हैं तो बेटी रीति के विवाद को लेकर अपनी बात रख सकते हैं। साथ ही काजी तौकीर के साथ हुए विवाद पर भी उनसे बातचीत होने की संभावना जताई जा रही है। रिपोर्ट में यह दावा भी किया गया है कि परिस्थितियां ऐसी बनाई जा सकती हैं जिससे रीति को अगले सप्ताह की नॉमिनेशन प्रक्रिया से राहत मिल सके। हालांकि इन सभी बातों को फिलहाल संभावित घटनाक्रम के तौर पर ही देखा जा रहा है क्योंकि शो की ओर से मनोज तिवारी की एंट्री को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

    दरअसल बुधवार के एपिसोड में बिग बॉस ने घरवालों को एक टास्क दिया था। इसमें अलग अलग टीमों के सदस्यों को रैप के अंदाज में एक दूसरे को रोस्ट करना था। कंटेस्टेंट्स ने एक दूसरे पर मजेदार टिप्पणियां कीं लेकिन रीति तिवारी और काजी तौकीर के बीच बात काफी आगे बढ़ गई। रिपोर्ट के अनुसार रीति ने काजी तौकीर और उदिति सिंह के खिलाफ गाली का इस्तेमाल किया। इसके बाद घर का माहौल गरमा गया और मामला हाथापाई तक पहुंचने की स्थिति में दिखाई दिया। घरवालों ने दोनों को अलग कर स्थिति संभाली।

    गुरुवार के एपिसोड में भी इस विवाद का असर देखने को मिला। रिपोर्ट के मुताबिक रीति ने अपनी गलती मानने के बजाय खुद को सही बताया। इसके बाद बिग बॉस 20 के प्रोमो को लेकर सोशल मीडिया पर भी चर्चा तेज हो गई। कई दर्शकों ने रीति के व्यवहार पर प्रतिक्रिया दी और सोशल मीडिया पर उन्हें आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। वहीं कुछ लोगों ने इस पूरे विवाद को लेकर अलग अलग प्रतिक्रियाएं दीं। ऐसे में अब सभी की नजरें वीकेंड का वार पर टिकी हैं कि सलमान खान इस विवाद को किस तरह उठाते हैं और कंटेस्टेंट्स से क्या सवाल करते हैं।

    बिग बॉस 20 में कुल 16 कंटेस्टेंट्स ने एंट्री की थी। रिपोर्ट के मुताबिक रोहेद खान के बाहर होने के बाद अब घर में मैरी कॉम माही विज कनिका मान आम्रपाली दुबे ईशा रिखी खुशी दुबे अरिश्फा खान कुशल तंवर उर्फ गुल्लू तन्मय सिंह उर्फ ScoutOp रैपर यंग DSA आसिफ खान फैजल खान काजी तौकीर अमन गांधी उदिति सिंह और रीति तिवारी मौजूद हैं। अब वीकेंड का वार में मनोज तिवारी की संभावित एंट्री होती है या नहीं और रीति काजी विवाद पर सलमान खान क्या रुख अपनाते हैं यह आने वाले एपिसोड में साफ होगा।

  • भोजपुरी सिनेमा के महामुकाबले में फिर गरमाया पुराना विवाद, मनोज तिवारी ने रवि किशन की पुरानी फीस को लेकर कसा तीखा तंज

    भोजपुरी सिनेमा के महामुकाबले में फिर गरमाया पुराना विवाद, मनोज तिवारी ने रवि किशन की पुरानी फीस को लेकर कसा तीखा तंज

    नई दिल्ली। क्षेत्रीय सिनेमा के इतिहास में अपनी एक अलग पहचान रखने वाले भोजपुरी फिल्म जगत के दो सबसे बड़े सूरमाओं के बीच की पुरानी अदावत एक बार फिर से खुलकर सार्वजनिक मंच पर आ गई है। लंबे समय तक एक-दूसरे के धुर विरोधी रहे मनोज तिवारी और रवि किशन के बीच की खाई राजनीतिक रूप से भले ही पट गई हो, लेकिन अतीत के व्यावसायिक मतभेद आज भी पूरी तरह शांत नहीं हुए हैं।

    हाल ही में दिए गए एक बेबाक साक्षात्कार के दौरान मनोज तिवारी ने भोजपुरी सिनेमा के उत्थान और उसकी वैश्विक लोकप्रियता को लेकर कई ऐसे दावे किए हैं, जिससे दोनों कलाकारों के प्रशंसकों के बीच एक नया विवाद खड़ा हो गया है। इस बातचीत के दौरान जब उनसे यह पूछा गया कि इस फिल्म जगत को पुनर्जीवित करने और एक-दूसरे को मुख्यधारा में लाने का असल श्रेय किसे जाता है, तो मनोज तिवारी ने बिना किसी हिचकिचाहट के खुद को भोजपुरी के तीसरे दौर का मार्गदर्शक घोषित कर दिया।

    उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि उनके आने से पहले रवि किशन सहित कई अन्य कलाकार इस फिल्म जगत में सक्रिय तो थे, लेकिन वे कोई खास प्रभाव छोड़ने या इस सिनेमा को एक मुनाफे वाले उद्योग में बदलने में पूरी तरह से असफल साबित हो रहे थे।

    इस वैचारिक जंग में अपने पक्ष को मजबूती से रखने के लिए मनोज तिवारी ने अपनी ऐतिहासिक फिल्म के बॉक्स ऑफिस आंकड़ों का भी खुलकर हवाला दिया। उन्होंने बताया कि उनकी बेहद चर्चित फिल्म ने मात्र तीस लाख रुपए के अत्यंत सीमित बजट में बनकर रिकॉर्ड तोड़ कमाई का इतिहास रचा था, जिसने न केवल पूरे देश का ध्यान इस क्षेत्रीय सिनेमा की तरफ आकर्षित किया बल्कि इसी एकलौती फिल्म की ऐतिहासिक सफलता के बाद से भोजपुरी में लगभग दो हजार नई फिल्मों के निर्माण का रास्ता साफ हुआ। अपनी बात को और अधिक आक्रामक मोड़ देते हुए उन्होंने समकालीन कलाकारों की उस दौर की आर्थिक स्थिति पर भी टिप्पणी की।

    उन्होंने दावा किया कि जब वे सफलता के शिखर पर थे और बतौर मुख्य अभिनेता फिल्मों के लिए प्रतिदिन के हिसाब से एक से डेढ़ लाख रुपए तक की भारी-भरकम फीस ले रहे थे, उस दौर में रवि किशन को पूरी फिल्म के काम के एवज में केवल पच्चीस हजार रुपए ही मिलते थे। उन्होंने कटाक्ष करते हुए यह भी कहा कि उन्होंने ही इन सभी कलाकारों को यह सिखाया कि किस प्रकार फिल्म उद्योग में अपनी कड़ी मेहनत के लिए सही और बड़ा पारिश्रमिक मांगा जाता है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हो सके।

    हालांकि, वर्तमान परिदृश्य की बात करते हुए मनोज तिवारी ने यह भी साफ किया कि समय के साथ अब उनके आपसी संबंधों में काफी बदलाव आ चुका है। वर्तमान में दोनों ही दिग्गज कलाकार भारतीय जनता पार्टी के बैनर तले सक्रिय राजनीति का हिस्सा हैं और एक ही दल में होने के कारण अब उनके बीच पहले जैसी सीधे तौर पर कोई व्यावसायिक प्रतिद्वंद्विता नहीं बची है। वे दोनों अब अच्छे मित्र के रूप में एक-दूसरे के साथ खड़े दिखाई देते हैं और राजनीतिक रैलियों तथा सार्वजनिक कार्यक्रमों में एक मंच भी साझा करते हैं।

    परंतु, जब बात भोजपुरी सिनेमा को देश-दुनिया में असली पहचान दिलाने और उसकी रीढ़ बनने की आती है, तो दोनों के बीच की यह वैचारिक जंग और खुद को श्रेष्ठ साबित करने की होड़ आज भी वैसी ही बनी हुई है जैसी सालों पहले फिल्मों के बॉक्स ऑफिस क्लैश के दौरान हुआ करती थी। इस ताजा बयानबाजी ने यह साफ कर दिया है कि भले ही समय बदल गया हो और दोनों के रास्ते राजनीति में आकर मिल गए हों, लेकिन भोजपुरी सिनेमा के इतिहास में अपना नाम सबसे ऊपर दर्ज कराने की यह लड़ाई इतनी जल्दी शांत होने वाली नहीं है।

  • मनोज तिवारी का ममता सरकार पर तीखा हमला, बोले- ‘खेल मंत्री होकर भी सिर्फ चाय-बिस्किट तक सीमित रहा काम’

    मनोज तिवारी का ममता सरकार पर तीखा हमला, बोले- ‘खेल मंत्री होकर भी सिर्फ चाय-बिस्किट तक सीमित रहा काम’

    नई दिल्ली। पूर्व क्रिकेटर और पश्चिम बंगाल के पूर्व खेल मंत्री मनोज तिवारी ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो में उन्होंने दावा किया कि खेल मंत्री रहते हुए उन्हें पिछले पांच वर्षों तक सही तरीके से काम नहीं करने दिया गया।

    मनोज तिवारी ने सीधे तौर पर टीएमसी नेता और पूर्व मंत्री अरूप बिस्वास को निशाने पर लेते हुए कहा कि उनकी लोकप्रियता और छवि से डरकर उन्हें लगातार अलग-थलग रखा गया। उन्होंने कहा कि खेल विभाग में उनकी भूमिका केवल “चाय और बिस्किट खाने” तक सीमित कर दी गई थी।

    ‘कार्यक्रमों में भी नहीं बुलाया गया’
    तिवारी ने आरोप लगाया कि उन्हें खेल विभाग के कई अहम कार्यक्रमों से दूर रखा गया। उन्होंने कहा कि डूरंड कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में मैदान पर मौजूद रहने के बावजूद उन्हें आधिकारिक निमंत्रण तक नहीं दिया गया। उनके मुताबिक, इसके पीछे अरूप बिस्वास की राजनीतिक सोच काम कर रही थी।

    मेसी के कार्यक्रम को लेकर भी साधा निशाना
    पूर्व मंत्री ने लियोनेल मेसी से जुड़े एक कार्यक्रम का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वह उस आयोजन में इसलिए शामिल नहीं हुए क्योंकि उन्हें पहले से अंदेशा था कि वहां उन्हें अपमानित किया जा सकता है। तिवारी ने दावा किया कि आयोजन के दौरान खेल प्रेमियों को भी निराशा हाथ लगी और मेसी कुछ ही मिनटों में कार्यक्रम छोड़कर चले गए।

    ‘सरकार जनता नहीं, अपने हितों के लिए काम कर रही थी’
    मनोज तिवारी ने कहा कि उन्होंने खेल और शिवपुर के विकास से जुड़े कई मुद्दे कैबिनेट बैठकों में उठाए, लेकिन उनकी बातों को कभी गंभीरता से नहीं लिया गया। उन्होंने राज्य सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार की सोच बेहद संकीर्ण थी और उसका फोकस जनता की बजाय अपने राजनीतिक हितों पर ज्यादा था।

    ममता बनर्जी को लेकर भी कही बड़ी बात
    तिवारी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का नाम लेते हुए कहा कि एक बार जब उन्होंने अपनी बात रखने की कोशिश की तो मुख्यमंत्री ने उनसे कहा, “क्या मेरे पास और कोई काम नहीं है?” तिवारी के अनुसार, उन्हें अपनी बात रखने के लिए 20 सेकंड का समय भी नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि उसी दिन उन्हें एहसास हो गया था कि यह सरकार लंबे समय तक टिकने वाली नहीं है, क्योंकि इसकी नींव “झूठे वादों” पर टिकी हुई है।

    मनोज तिवारी का यह बयान ऐसे समय सामने आया है जब पश्चिम बंगाल में खेल प्रशासन और राजनीतिक खींचतान को लेकर लगातार बहस चल रही है। उनके आरोपों ने राज्य की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है।