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  • शादी से पहले मंसूर अली खान पटौदी संग लिव-इन में रहती थीं शर्मिला टैगोर, अंतरधार्मिक विवाह के कारण माता-पिता को टेलीग्राम पर मिलती थीं धमकियां

    शादी से पहले मंसूर अली खान पटौदी संग लिव-इन में रहती थीं शर्मिला टैगोर, अंतरधार्मिक विवाह के कारण माता-पिता को टेलीग्राम पर मिलती थीं धमकियां

    नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा की दिग्गज अभिनेत्री शर्मिला टैगोर और भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान नवाब मंसूर अली खान पटौदी का रिश्ता हमेशा से ही चर्चा का विषय रहा है। हाल ही में एक साक्षात्कार में अभिनेत्री ने अपने इस ऐतिहासिक रिश्ते से जुड़े कई अनसुने और चौंकाने वाले पहलुओं को साझा किया है। शर्मिला टैगोर ने बताया कि वर्ष 1968 में विवाह बंधन में बंधने से पहले वे और मंसूर अली खान एक साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रहते थे। उस दौर के रूढ़िवादी सामाजिक ताने-बाने को देखते हुए एक शीर्ष अभिनेत्री और स्टार क्रिकेटर का शादी से पहले साथ रहना बेहद असाधारण और साहसिक कदम माना जाता था।

    इस अंतरधार्मिक और अंतर्जातीय रिश्ते को लेकर तत्कालीन समाज और कट्टरपंथियों में भारी आक्रोश था। अभिनेत्री ने खुलासा किया कि उनके इस फैसले के कारण उनके माता-पिता को लगातार धमकी भरे टेलीग्राम भेजे जाते थे, जिनमें जान से मारने और गोलियां चलाने की बातें लिखी होती थीं। इस वजह से उनके पूरे परिवार में लंबे समय तक डर और भारी मानसिक तनाव का माहौल बना रहा। इसके साथ ही फिल्म जगत और खेल जगत के कई करीबी मित्रों तथा शुभचिंतकों ने भी इस शादी को लेकर दोनों को गंभीर चेतावनी दी थी।

    मशहूर फिल्म निर्देशक यश चोपड़ा, जो शर्मिला टैगोर के बेहद करीबी मित्र थे, उन्होंने भी शादी से पहले अभिनेत्री को सचेत किया था। यश चोपड़ा का मानना था कि नवाबों की जीवनशैली और प्रतिबद्धता पर पूरी तरह भरोसा नहीं किया जा सकता, इसलिए यह रिश्ता आगे चलकर असफल हो सकता है। समाज और मीडिया का भी दोनों परिवारों पर अत्यधिक दबाव था और कई लोगों ने तो शादी होने से पहले ही इस रिश्ते के विफल होने की घोषणा कर दी थी। इन तमाम सामाजिक बाधाओं और विपरीत परिस्थितियों के बावजूद दोनों अपने फैसले पर अडिग रहे।

    लगातार मिल रही धमकियों और सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए शादी के आयोजन स्थल को लेकर भी भारी अनिश्चितता बनी हुई थी। शुरुआत में यह तय किया गया था कि सुरक्षा के लिहाज से सबसे सुरक्षित जगह फोर्ट विलियम में विवाह संपन्न कराया जाएगा। हालांकि, अंतिम समय में अतिथियों की सूची और प्रशासनिक अनुमतियों को लेकर कुछ तकनीकी दिक्कतें आ गईं, जिसके कारण मिली हुई अनुमति रद्द कर दी गई। सुरक्षा खतरों के बीच आखिरी मौके पर विवाह का वेन्यू बदलना पड़ा और अंततः एक विदेशी राजदूत के आवास पर बेहद सुरक्षित माहौल में इस विवाह की रस्में पूरी की गईं।

    तमाम विरोधों, धमकियों और सामाजिक दबावों को दरकिनार कर हुआ यह विवाह आगे चलकर भारतीय फिल्म और खेल जगत के सबसे सफल वैवाहिक रिश्तों में से एक साबित हुआ। इस विवाह से उनके तीन बच्चे सैफ अली खान, सोहा अली खान और सबा अली खान हुए। आज शर्मिला टैगोर अपने नाती-पोतों के साथ एक सुखी और संतुष्ट जीवन व्यतीत कर रही हैं। उनका यह हालिया बयान दर्शाता है कि दशकों पहले भी अपनी मर्जी से जीवन जीने और जीवनसाथी चुनने के लिए फिल्मी सितारों को किस कदर सामाजिक और प्रशासनिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता था।