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  • फिट इंडिया अभियान का हिस्सा संडे ऑन साइकिल, अक्षय कुमार के साथ मांडविया ने बताए अनुभव

    फिट इंडिया अभियान का हिस्सा संडे ऑन साइकिल, अक्षय कुमार के साथ मांडविया ने बताए अनुभव


    नई दिल्ली । केंद्रीय युवा मामले और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने संडे ऑन साइकिल कार्यक्रम को लेकर अपनी प्रेरणा साझा करते हुए बताया कि इस पहल की नींव उनके स्कूल जीवन के दो शिक्षकों से मिली सीख पर आधारित है। उन्होंने कहा कि बचपन में दो शिक्षक रोजाना कई किलोमीटर साइकिल चलाकर स्कूल आते थे, और उनकी यही अनुशासन भरी दिनचर्या आज भी उन्हें प्रेरित करती है।

    मांडविया ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक 19 सेकंड का वीडियो साझा किया, जिसमें वह अभिनेता अक्षय कुमार के साथ बातचीत करते नजर आए। इस दौरान उन्होंने अपने शिक्षकों का जिक्र करते हुए बताया कि उनमें से एक शिक्षक अब 92 वर्ष के हैं और दूसरे 94 वर्ष के, लेकिन उनकी जीवनशैली आज भी प्रेरणादायक है।

    उन्होंने कहा कि इन्हीं अनुभवों से प्रेरित होकर उन्होंने संडे ऑन साइकिल जैसी पहल को आगे बढ़ाया, जिसका उद्देश्य लोगों में फिटनेस के प्रति जागरूकता फैलाना और साइकिलिंग को जीवनशैली का हिस्सा बनाना है। यह अभियान न केवल स्वास्थ्य सुधार पर केंद्रित है, बल्कि मोटापे की समस्या से निपटने और पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देता है।

    मांडविया और अक्षय कुमार दोनों ही रविवार को दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में आयोजित 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम में शामिल हुए, जहां फिटनेस और योग को लेकर जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया गया।

    गौरतलब है कि संडे ऑन साइकिल अभियान की शुरुआत दिसंबर 2024 में फिट इंडिया मूवमेंट के तहत की गई थी, जिसका उद्देश्य हर रविवार देशभर में लोगों को एक साथ जोड़कर फिटनेस के प्रति प्रेरित करना है।

  • केंद्रीय मंत्री की स्वीकृति: पंजाब विश्वविद्यालय में आधुनिक एथलेटिक ट्रैक और ग्रामीण खेल केंद्रों का विकास

    केंद्रीय मंत्री की स्वीकृति: पंजाब विश्वविद्यालय में आधुनिक एथलेटिक ट्रैक और ग्रामीण खेल केंद्रों का विकास

    नई दिल्ली । केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने पंजाब विश्वविद्यालय में ओलंपिक स्तर के सिंथेटिक एथलेटिक ट्रैक के निर्माण को आधिकारिक मंजूरी दे दी है। यह निर्णय अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) द्वारा केंद्रीय मंत्री को प्रस्तुत किए गए विस्तृत सुझावों के बाद आया है। प्रस्ताव में देशभर में खेल संस्कृति के विकास और युवा प्रतिभाओं को सशक्त बनाने के लिए कई पहलुओं पर जोर दिया गया।

    इस प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय मंत्री को प्रत्येक राज्य में स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी की स्थापना, राष्ट्रीय स्तर पर खेल उत्कृष्टता केंद्र और मल्टी-स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स विकसित करने के सुझाव भी प्रस्तुत किए। इसके अलावा, ग्रामीण एवं जनजातीय क्षेत्रों में खेल प्रतिभाओं की खोज और उन्हें उचित प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के उपायों पर भी चर्चा हुई।

    विशेष रूप से, ABVP ने 2036 ओलंपिक की तैयारियों के लिए एक राष्ट्रीय ढांचा विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। इसमें खिलाड़ियों के लिए स्वास्थ्य और दुर्घटना बीमा, स्पोर्ट्स सामग्री बैंक, राष्ट्रीय डिजिटल एथलीट पोर्टल और ‘माई भारत’ वालंटियर्स के मानदेय में वृद्धि जैसी सिफारिशें शामिल थीं। इन सभी सुझावों को केंद्रीय मंत्री ने गंभीरता से लिया और कई मामलों में सरकार द्वारा शीघ्र कार्रवाई का आश्वासन दिया।

    पंजाब विश्वविद्यालय में ओलंपिक मानक के सिंथेटिक एथलेटिक ट्रैक की स्थापना इस चर्चा की प्रमुख उपलब्धि मानी जा रही है। निर्माण कार्य की प्रक्रिया को अगले दो से तीन महीनों में तेज़ गति से आगे बढ़ाने की जानकारी दी गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह ट्रैक न केवल छात्रों और एथलीटों के प्रशिक्षण के अवसर बढ़ाएगा बल्कि अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए भारत की तैयारी को भी मजबूत करेगा।

    सरकारी अधिकारियों ने ग्रामीण क्षेत्रों में ‘स्पोर्ट्स सामग्री बैंक’ स्थापित करने की योजना की भी सराहना की। यह पहल खिलाड़ियों को आवश्यक खेल उपकरण और संसाधन प्रदान करने में मदद करेगी। मंत्रालय ने बताया कि इस दिशा में जल्द ही सकारात्मक कदम उठाए जाएंगे।

    ABVP का मानना है कि भारत की युवा शक्ति देश की सबसे बड़ी संपत्ति है और इसे खेल के माध्यम से सशक्त बनाने से न केवल खेल क्षेत्र में बल्कि सामाजिक और आर्थिक विकास में भी योगदान मिलेगा। आधुनिक खेल अवसंरचना, वैज्ञानिक प्रशिक्षण, गुणवत्तापूर्ण कोचिंग और खिलाड़ियों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने से भारत वैश्विक खेल महाशक्ति बनने की ओर तेजी से बढ़ सकता है।

    छात्र संगठन ने सरकार के सकारात्मक आश्वासनों का स्वागत किया और कहा कि शीघ्र और प्रभावी निर्णयों से देश में खेल संस्कृति को नई गति मिलेगी। इसके साथ ही यह पहल युवाओं और खिलाड़ियों के सर्वांगीण विकास के लिए एक मजबूत आधार तैयार करेगी। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की परियोजनाएं भविष्य में देश की अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतिस्पर्धा में बढ़त बनाने में निर्णायक साबित होंगी।

    पंजाब विश्वविद्यालय में इस उच्च स्तरीय ट्रैक के निर्माण से राज्य और देश दोनों में खेल प्रतिभाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन के अवसर मिलेंगे। इस परियोजना से न केवल छात्रों और एथलीटों का विकास होगा बल्कि खेल क्षेत्र में निवेश और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

  • मुख्यमंत्री मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री मांडविया 27 जनवरी को करेंगे खेलो एमपी यूथ गेम्स का भव्य शुभारंभ

    मुख्यमंत्री मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री मांडविया 27 जनवरी को करेंगे खेलो एमपी यूथ गेम्स का भव्य शुभारंभ


    भोपाल।भोपाल में 27 जनवरी 2026 की शाम खेल और युवा ऊर्जा का भव्य उत्सव देखने को मिलेगा। खेलो एमपी यूथ गेम्स की राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं का शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय श्रम एवं रोजगार तथा युवा कार्य मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया द्वारा किया जाएगा। यह भव्य समारोह शाम 6:30 बजे से टीटी नगर स्टेडियम में आयोजित होगा, जिसमें खेलों की थीम पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और देश के जाने-माने पार्श्व गायक कैलाश खेर की विशेष प्रस्तुति आकर्षण का केंद्र रहेगी।

    सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग ने गुरुवार को मीडिया से बातचीत में बताया कि खेलो एमपी यूथ गेम्स की तैयारी व्यापक स्तर पर की गई है। प्रदेश में ब्लॉक स्तर की प्रतियोगिताएं सफलतापूर्वक पूरी हो चुकी हैं, जबकि जिला और संभाग स्तरीय मुकाबले प्रगति पर हैं, जो 25 जनवरी 2026 तक संपन्न हो जाएंगे। इसके बाद राज्य स्तर पर प्रदेश के 10 संभागों की टीमें प्रतिस्पर्धा में उतरेंगी।मंत्री श्री सारंग ने बताया कि शुभारंभ समारोह को पूरी तरह खेलों की भावना और युवा उत्साह पर आधारित रखा गया है। कैलाश खेर की संगीतमय प्रस्तुति के साथ-साथ इंडियाज़ गॉट टैलेंट फेम डांस ट्रूप द्वारा ऊर्जावान नृत्य, खेलों के इतिहास पर आधारित नृत्य-नाटिका और भव्य आतिशबाजी आयोजन को यादगार बनाएगी। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम खेल, संस्कृति और युवा शक्ति का जीवंत संगम होगा।

    खेलो एमपी यूथ गेम्स की एक बड़ी विशेषता यह है कि देश में पहली बार खेल विभाग और सभी मान्यता प्राप्त खेल संघों के समन्वय से इतने बड़े स्तर पर आयोजन किया जा रहा है। मंत्री ने कहा कि इस मॉडल से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों से बड़ी संख्या में प्रतिभाशाली खिलाड़ी सामने आए हैं। यह प्रयोग भविष्य में राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने की दिशा में मध्यप्रदेश का अहम कदम माना जा रहा है।खिलाड़ियों के चयन और सहभागिता को पारदर्शी बनाने के लिए डैशबोर्ड आधारित ऑनलाइन पंजीयन प्रणाली अपनाई गई है। अब तक एक लाख से अधिक खिलाड़ी पंजीकरण करा चुके हैं। पंजीयन से लेकर परिणामों तक की पूरी प्रक्रिया रीयल-टाइम डिजिटल मॉनिटरिंग के जरिए की जा रही है।

    राज्य स्तरीय प्रतियोगिताएं 31 जनवरी 2026 तक चलेंगी, जिनमें कुल 28 खेल शामिल हैं। खेलों का आयोजन प्रदेश के विभिन्न शहरों-भोपाल, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर, रीवा, शिवपुरी, ग्वालियर, सागर और नर्मदापुरम-में उनकी स्थानीय परंपरा और लोकप्रियता के अनुसार किया जाएगा। खास बात यह है कि इस बार पिट्टू और रस्साकशी जैसे पारंपरिक खेलों के साथ-साथ क्रिकेट और थ्रोबॉल को भी विशेष स्थान दिया गया है।मंत्री श्री सारंग ने कहा कि खेलो एमपी यूथ गेम्स प्रदेश के युवाओं को प्रतिभा दिखाने का सशक्त मंच प्रदान कर रहे हैं और यह आयोजन मध्यप्रदेश को खेलों के क्षेत्र में राष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

  • मार्च से पहले पीएफ से यूपीआई लिंक, एटीएम से भी निकलेगा पैसा; प्रोसेस होगा और आसान…

    मार्च से पहले पीएफ से यूपीआई लिंक, एटीएम से भी निकलेगा पैसा; प्रोसेस होगा और आसान…


    नई दिल्ली/केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया ने प्रोविडेंट फंड (PF) से जुड़ी नई डिजिटल पहल का ऐलान किया है। उन्होंने बताया कि मार्च 2026 से पहले कर्मचारी अपने पीएफ खाते को UPI और एटीएम से लिंक कर सकेंगे। इसका मतलब यह होगा कि भविष्य में पीएफ निकालना अब पहले से कहीं आसान और डिजिटल हो जाएगा।

    पीएफ निकालने की मौजूदा प्रक्रिया में कठिनाई

    आज की तारीख में पीएफ निकालने के लिए कर्मचारियों को कई फॉर्म भरने और लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। कई बार लोग फार्म भरते-भरते थक जाते हैं और प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाते। मनसुख मांडविया ने कहा कि यही परेशानी ध्यान में रखकर सरकार ने नियमों में बदलाव किया है। अब कर्मचारी अपने पीएफ का 75 प्रतिशत हिस्सा बिना किसी वजह के निकाल सकेंगे।

    क्यों रखा जाएगा 25 प्रतिशत पीएफ?

    केंद्रीय मंत्री ने बताया कि पीएफ में 25 प्रतिशत राशि इसलिए सुरक्षित रखी जाएगी ताकि कर्मचारियों की नौकरी की निरंतरता बनी रहे। उदाहरण के तौर पर, अगर कोई कर्मचारी 7 महीने काम करने के बाद पूरी राशि निकाल लेता है और बाद में नई नौकरी ज्वाइन करता है, तो उसकी पीएफ कंटिन्यूटी टूट जाती है। वहीं पेंशन के लिए 10 साल की लगातार नौकरी जरूरी होती है। 25 प्रतिशत राशि जमा रहने से कर्मचारी पेंशन के लिए पात्र बने रहेंगे और नई नौकरी मिलने तक सुरक्षा भी मिलती है।

    एटीएम और यूपीआई से पीएफ निकासी कैसे होगी

    मनसुख मांडविया ने बताया कि सरकार ने पीएफ खाते को बैंक खाता, आधार और यूएन से पहले ही जोड़ दिया है। अब इसमें डेबिट कार्ड और एटीएम फंक्शनैलिटी जोड़ने की तैयारी चल रही है। इसका मतलब यह है कि मार्च 2026 से पहले कर्मचारी सीधे एटीएम से अपने पीएफ का पैसा निकाल सकेंगे। इसके अलावा, पीएफ खाते को UPI से भी लिंक किया जा सकेगा। इससे कर्मचारियों को डिजिटल प्लेटफार्म पर पैसा ट्रांसफर करने की सुविधा मिलेगी और उन्हें कागजी प्रक्रिया से मुक्ति मिलेगी। मंत्री ने कहा कि यह फैसला कर्मचारियों के जीवन को आसान बनाने और डिजिटल सुविधा बढ़ाने के उद्देश्य से लिया गया है।

    सरल और डिजिटल भविष्य की ओर

    पीएफ से जुड़े यह बदलाव कर्मचारियों के लिए बड़ा लाभ हैं। अब उन्हें बैंक, ऑफिस या सरकारी विभागों के चक्कर नहीं लगाने होंगे। डिजिटल प्लेटफार्म और एटीएम के माध्यम से कभी भी, कहीं भी पीएफ निकालने की सुविधा उपलब्ध होगी। यह नई पहल सरकारी सेवाओं को और पारदर्शी और सुलभ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

    सरकार की तैयारी और अगला कदम

    मनसुख मांडविया ने यह भी स्पष्ट किया कि यह योजना केवल शुरुआत है। भविष्य में और भी डिजिटल सुधार किए जाएंगे, जिससे पीएफ खाताधारकों को तेजी से और सुरक्षित तरीके से पैसा निकालने की सुविधा मिले। यह पहल कर्मचारियों की मेहनत की कमाई को सुरक्षित और आसान बनाने के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।