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  • शारदीय नवरात्रि के तीसरे दिन करें मां चंद्रघंटा की पूजा, जानें पौराणिक कथा, प्रिय भोग, मंत्र और पूजन विधि

    शारदीय नवरात्रि के तीसरे दिन करें मां चंद्रघंटा की पूजा, जानें पौराणिक कथा, प्रिय भोग, मंत्र और पूजन विधि

    नई दिल्ली ।शारदीय नवरात्रि का तीसरा दिन 13 अक्टूबर 2026 को मनाया जा रहा है। इस दिन मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी की आराधना से मन को शांति मिलती है और व्यक्ति में साहस, धैर्य तथा एकाग्रता का भाव विकसित होता है। मां चंद्रघंटा का स्वरूप कठिन परिस्थितियों में भी संयम बनाए रखने की प्रेरणा देता है। आज की व्यस्त दिनचर्या में कामकाज का दबाव और एक साथ कई जिम्मेदारियां निभाने की चुनौती लोगों के मानसिक तनाव को बढ़ा सकती है। ऐसे में भक्त मां चंद्रघंटा की पूजा करके मानसिक शांति और सकारात्मकता की कामना करते हैं।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां चंद्रघंटा के माथे पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित है। इसी कारण देवी को चंद्रघंटा कहा जाता है। देवीभागवत पुराण में उनके स्वरूप का वर्णन मिलता है। उनका शरीर स्वर्ण के समान चमकदार बताया गया है। मां की दस भुजाएं हैं और वे सिंह पर सवार रहती हैं। उनकी भुजाओं में विभिन्न अस्त्र-शस्त्र सुशोभित हैं। देवी का यह रूप सौम्यता और वीरता का प्रतीक माना जाता है। उनकी आराधना में भक्त शक्ति, साहस और कठिन परिस्थितियों का सामना करने की क्षमता प्राप्त करने की प्रार्थना करते हैं।

    पौराणिक कथा के अनुसार, जब महिषासुर नामक दैत्य का अत्याचार बढ़ने लगा और देवताओं को परेशान किया जाने लगा, तब मां दुर्गा ने दुष्ट शक्तियों का मुकाबला करने के लिए चंद्रघंटा का स्वरूप धारण किया। मान्यता है कि देवी के घंटे की भयानक ध्वनि से दैत्यों में भय फैल गया और बुरी शक्तियों का नाश हुआ। इसी कारण उनके घंटे को नकारात्मक शक्तियों को दूर करने और सकारात्मक ऊर्जा के संचार का प्रतीक माना जाता है। मां चंद्रघंटा का स्वरूप यह संदेश भी देता है कि विपरीत परिस्थितियों में घबराने के बजाय धैर्य और साहस के साथ आगे बढ़ना चाहिए।

    नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा को दूध और दूध से बनी मिठाइयों का भोग लगाने की परंपरा है। भक्त माता को मखाने या केसर की खीर, पेड़े, रबड़ी और मेवों से बनी मिठाइयां अर्पित कर सकते हैं। फूलों में कमल और सफेद या पीली चमेली को प्रिय माना जाता है। इसके अलावा लाल गुलाब, गेंदा और पीले रंग के फूल भी पूजा में चढ़ाए जा सकते हैं। पूजन के लिए सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और पूजा स्थल को साफ रखें। इसके बाद मां की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक और धूप जलाएं, फूल अर्पित करें तथा दूध से बनी मिठाई का भोग लगाएं। श्रद्धापूर्वक आरती करें और पूजा के दौरान मन को शांत रखने का प्रयास करें।

    मां चंद्रघंटा की आराधना में मंत्र जाप का भी विशेष महत्व माना जाता है। भक्त देवी का ध्यान करते हुए ‘ॐ देवी चंद्रघण्टायै नमः॥’ मंत्र का जाप कर सकते हैं। उनका ध्यान मंत्र है, ‘पिण्डजप्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता। प्रसादं तनुते मह्यं चंद्रघण्टेति विश्रुता॥’ इसका भावार्थ है कि श्रेष्ठ सिंह पर सवार, दुष्टों के संहार के लिए अस्त्र-शस्त्र धारण करने वाली और चंद्रघंटा के नाम से प्रसिद्ध देवी भक्त पर अपनी कृपा बनाए रखें।

    पूजा के दौरान क्रोध, कटुता और अनावश्यक विवाद से बचने की सलाह दी जाती है। घर और पूजा स्थल में स्वच्छता बनाए रखें तथा बासी फूलों को जमा न होने दें। धार्मिक परंपराओं के अनुसार, नवरात्रि में सात्विक भोजन करने और शराब तथा मांसाहार से दूर रहने की सलाह दी जाती है। मां चंद्रघंटा की आराधना का संदेश है कि कामकाज के दबाव और जीवन की कठिनाइयों के बीच भी शांत मन से निर्णय लेना चाहिए। घर और कार्यस्थल पर अनावश्यक शोर से बचना, दूसरों का सम्मान करना और धैर्य बनाए रखना जीवन में संतुलन स्थापित करने में मदद कर सकता है।

  • दिमाग के नकारात्मक विचारों को रोकने का आसान उपाय- बस पढ़ लें ये शक्तिशाली मंत्र

    दिमाग के नकारात्मक विचारों को रोकने का आसान उपाय- बस पढ़ लें ये शक्तिशाली मंत्र


    नई दिल्ली।  आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में तनाव, चिंता और नकारात्मक विचार आम समस्या बन चुके हैं। कई बार बिना किसी कारण के मन में डर, असफलता का खौफ या बेचैनी पैदा होने लगती है, जिससे व्यक्ति का आत्मविश्वास भी प्रभावित होता है। ज्योतिष शास्त्र और आध्यात्मिक मान्यताओं में ऐसे समय में कुछ मंत्रों को बेहद प्रभावी माना गया है, जो मन को शांत करने और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने में मदद करते हैं। मान्यता है कि नियमित रूप से इन मंत्रों का जाप करने से मानसिक संतुलन बेहतर होता है और व्यक्ति भीतर से मजबूत महसूस करता है।

    सबसे पहले आता है दुर्गा मंत्र  “ॐ दुं दुर्गायै नमः”। यह मंत्र मां दुर्गा को समर्पित है और इसे नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा करने वाला माना जाता है। कहा जाता है कि इसका जाप करने से मन का डर कम होता है और आसपास की नकारात्मकता भी दूर होती है। यह व्यक्ति के भीतर एक सुरक्षा कवच की तरह कार्य करता है।

    इसके बाद आता है प्रसिद्ध गायत्री मंत्र  “ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्”। यह मंत्र मानसिक शुद्धि और एकाग्रता बढ़ाने के लिए जाना जाता है। माना जाता है कि इसका नियमित जाप करने से मन शांत होता है और सोचने-समझने की क्षमता मजबूत होती है।

    तीसरा मंत्र है हनुमान मंत्र -“ॐ हनु हनुमते नमो नमः”। यह विशेष रूप से उन लोगों के लिए बताया गया है जिन्हें किसी काम से पहले घबराहट या डर महसूस होता है। ऐसा कहा जाता है कि यह मंत्र आत्मविश्वास बढ़ाता है और नकारात्मक विचारों को दूर करता है।

    इसके अलावा महामृत्युंजय मंत्र “ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिम् पुष्टिवर्धनम्…” को भी अत्यंत शक्तिशाली माना गया है। यह भगवान शिव को समर्पित मंत्र है और इसे भय, चिंता और मानसिक तनाव से मुक्ति दिलाने वाला बताया गया है। श्रद्धा के अनुसार, यह मंत्र जीवन में सकारात्मकता और सुरक्षा की भावना को मजबूत करता है।

    अंत में आता है हनुमान चालीसा, जिसका पाठ हिंदू धर्म में अत्यंत प्रभावशाली माना गया है। मान्यता है कि इसका नियमित पाठ करने से मन मजबूत होता है और नकारात्मक ऊर्जा पास नहीं आती।

    हालांकि, मनोवैज्ञानिक दृष्टि से भी माना जाता है कि किसी भी प्रकार का मंत्र या ध्यान व्यक्ति को फोकस करने, सांसों को नियंत्रित करने और मानसिक स्थिरता पाने में मदद करता है।

    इस तरह, जब भी मन में बार-बार नकारात्मक विचार आएं, तो कुछ देर रुककर शांत मन से इन मंत्रों का जप या पाठ करने से मानसिक राहत और सुकून महसूस किया जा सकता है।

  • चैत्र नवरात्रि 2026: दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा और आरती

    चैत्र नवरात्रि 2026: दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा और आरती


    नई दिल्ली । आज चैत्र नवरात्रि का दूसरा दिन है, जो मां ब्रह्मचारिणी के नाम समर्पित है। हिन्दू धर्मग्रंथों में मां ब्रह्मचारिणी को तपस्या, संयम, ज्ञान और वैराग्य की देवी कहा गया है। उनका यह रूप भक्तों को साधना और संयम की प्रेरणा देता है। मान्यता है कि सच्चे मन से मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से मनचाहा वरदान प्राप्त होता है।

    नवरात्रि के दूसरे दिन श्रद्धालु सुबह जल्दी उठकर स्नान करते हैं और सफेद या पीले वस्त्र धारण कर पूजा करते हैं। मां के सामने दीपक जलाना, फूल अर्पित करना और भोग चढ़ाना शुभ माना जाता है। पूजा के दौरान मंत्र जाप करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और मन को शांति मिलती है। इस दिन अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:05 से 12:53 तक विशेष फलदायी माना गया है।

    पूजा के बाद मां की आरती गाना या सुनना अत्यंत शुभ होता है। आरती के माध्यम से भक्त मां की कृपा प्राप्त कर अपने जीवन में सुख-शांति और समृद्धि की कामना करते हैं। यहां पढ़ें मां ब्रह्मचारिणी माता की आरती:

    ब्रह्मचारिणी माता की आरती

    ओम जय ब्रह्मचारिणी मां
    अपने भक्त जनों पे करती सदा ही दया
    ओम जय ब्रह्मचारिणी मां।

    दर्शन अनुपम मधुरम, साद नारद रेहती
    शिव जी की आराधना, मैया सदा करती
    ओम जय ब्रह्मचारिणी मां।

    बाएँ हाथ कमंडल, दाहिन में माला
    रूप जो तिरीमय अद्भुत, सुख देने वाला
    ओम जय ब्रह्मचारिणी मां।

    देव ऋषि मुनि साधु, सब गुण मां के गाते
    शक्ति स्वरूपा मैया, सब तुझको ध्याते
    ओम जय ब्रह्मचारिणी मां।

    संयम तप वैराग्य, प्राणी वो पाता
    ब्रह्मचारिणी मां को, जो निशिदिनी ध्याता
    ओम जय ब्रह्मचारिणी मां।

    नव दुर्गो में मैया, दूजा तुम्हारा स्वरूप
    श्वेत वस्त्र धारिणी मां, ज्योतिर्मय तेरा रूप
    ओम जय ब्रह्मचारिणी मां।

    दूजे नवरात्रे मैया, जो तेरा व्रत धारे
    करके दया जग जननी, तू उसको तारे
    ओम जय ब्रह्मचारिणी मां।

    शिव प्रिय शिवा ब्रम्हाणी, हम पे दया करियो
    बालक है तेरे ही, दया दृष्टि रखियो
    ओम जय ब्रह्मचारिणी मां।

    शरण तिहारी आए, ब्रम्हाणी माता
    करुणा हम पे दिखाओ, शुभ फल की दाता
    ओम जय ब्रह्मचारिणी मां।

    जो कोई गावे, कहत शिवानंद स्वामी
    मन वांछित फल पावे, ओम जय ब्रह्मचारिणी मां।

    पूजा और आरती के साथ मंत्र का जाप करना भी अत्यंत प्रभावशाली होता है। मां ब्रह्मचारिणी के प्रमुख मंत्र हैं:

    ब्रह्मचारयितुम शीलम यस्या सा ब्रह्मचारिणी
    सच्चीदानन्द सुशीला च विश्वरूपा नमोस्तुते

    या देवी सर्वभेतेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।
    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
    दधाना कर मद्माभ्याम अक्षमाला कमण्डलू।
    देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।।
    इस दिन विधिपूर्वक पूजा, आरती और मंत्र जाप करने से मानसिक शांति, आत्मविश्वास, संयम और जीवन में सफलता प्राप्त होती है। चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की आराधना श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखती है।