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  • चैत्र नवरात्रि 2026: अखंड ज्योति बुझ जाए तो न घबराएं, तुरंत करें ये सरल उपाय

    चैत्र नवरात्रि 2026: अखंड ज्योति बुझ जाए तो न घबराएं, तुरंत करें ये सरल उपाय


    नई दिल्ली । चैत्र नवरात्रि में मां दुर्गा की उपासना के दौरान अखंड ज्योति जलाना अत्यंत शुभ माना जाता है। यह ज्योति श्रद्धा, भक्ति और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक होती है, जिसे पूरे नौ दिनों तक निरंतर जलाने का विधान है। हालांकि, कई बार हवा, घी की कमी या बाती के कारण यह ज्योति बुझ जाती है। ऐसे में भक्तों के मन में डर और चिंता पैदा हो जाती है कि कहीं यह अपशकुन तो नहीं।

    धार्मिक ग्रंथों और ज्योतिष के अनुसार, अखंड ज्योति का बुझना कोई बड़ा अपशकुन नहीं है। यह एक सामान्य भौतिक कारण से होने वाली घटना भी हो सकती है। सबसे महत्वपूर्ण आपकी श्रद्धा और भक्ति है। यदि मन सच्चा है, तो छोटी-मोटी त्रुटियां पूजा को प्रभावित नहीं करतीं।

    अखंड ज्योति का महत्व बहुत गहरा है। यह घर में सुख-शांति, सकारात्मक ऊर्जा और देवी कृपा का प्रतीक मानी जाती है। दुर्गा सप्तशती और मार्कण्डेय पुराण में भी बताया गया है कि पूजा में कर्मकांड से अधिक महत्व भाव और श्रद्धा का होता है।

    अगर किसी कारणवश ज्योति बुझ जाए, तो घबराने की बजाय शांत मन से तुरंत उपाय करना चाहिए। सबसे पहले मां दुर्गा का ध्यान करें और एक छोटा साक्षी दीपक जलाएं। इसके बाद अखंड ज्योति के दीपक को साफ करें और जली हुई बाती को निकाल दें। नई और लंबी बाती डालकर उसमें शुद्ध घी भरें। फिर साक्षी दीपक की लौ से ही अखंड ज्योति को पुनः प्रज्वलित करें।

    इसके बाद हाथ जोड़कर मां से अनजाने में हुई गलती के लिए क्षमा मांगें और ॐ दुं दुर्गायै नमः या ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे मंत्र का 11 या 21 बार जाप करें। इस प्रक्रिया से आपकी पूजा और साधना पुनः सुचारु रूप से जारी रहती है।

    यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि ज्योति बुझने को अपशकुन मानकर पूजा बंद करना या डर जाना गलत धारणा है। शास्त्रों में स्पष्ट कहा गया है कि अनजाने में हुई गलतियां क्षमा योग्य होती हैं। देवी भागवत और अन्य ग्रंथों में भी भक्ति को कर्मकांड से ऊपर बताया गया है।

    अखंड ज्योति को बुझने से बचाने के लिए कुछ सावधानियां भी अपनाई जा सकती हैं। हमेशा अच्छी गुणवत्ता वाली लंबी बाती और शुद्ध घी का उपयोग करें। दीपक को हवा से बचाने के लिए कांच या मिट्टी का कवर लगाएं। समय-समय पर घी की मात्रा जांचते रहें और जरूरत पड़ने पर तुरंत भरें। पूजा स्थान को हवादार लेकिन सुरक्षित रखें।

    नवरात्रि का यह संदेश है कि भक्ति में भाव सबसे महत्वपूर्ण है। यदि आपकी श्रद्धा सच्ची है, तो छोटी भूलों से घबराने की आवश्यकता नहीं है। मां दुर्गा भक्तों की सच्ची भावना को समझती हैं और उन्हें हमेशा आशीर्वाद देती हैं।

  • चैत्र नवरात्रि 2026: दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा, जानिए शुभ मुहूर्त, विधि और मंत्र

    चैत्र नवरात्रि 2026: दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा, जानिए शुभ मुहूर्त, विधि और मंत्र


    नई दिल्ली । चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन 20 मार्च 2026 को मां ब्रह्मचारिणी की पूजा का विशेष महत्व है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार मां ब्रह्मचारिणी तप संयम ज्ञान और वैराग्य की प्रतीक देवी हैं। उनका यह रूप हमें कठिन समय में भी संयम और साहस बनाए रखने की प्रेरणा देता है। कहते हैं कि मां ब्रह्मचारिणी की विधिपूर्वक पूजा और मंत्र जाप से मानसिक शांति आत्मविश्वास और जीवन में बाधाओं को दूर करने की शक्ति प्राप्त होती है।

    मां ब्रह्मचारिणी का नाम ही उनके स्वरूप का परिचायक है। ब्रह्म का अर्थ है तपस्या और चारिणी का अर्थ है आचरण करने वाली। यही कारण है कि उनका पूजन साधना और संयम का अभ्यास करवा कर व्यक्ति को अडिग बनाता है। जीवन या व्यवसाय में अगर कोई बड़ी बाधा बार-बार आती है तो इस दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा आपकी इच्छाओं को पूरा करने में मदद कर सकती है और आत्मविश्वास को नया बल देती है।

    इस दिन का शुभ-मुहूर्त सुबह का समय माना गया है लेकिन विशेष रूप से अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:05 से 12:53 तक है। इस समय में पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। सुबह जल्दी उठकर स्नान करना और सफेद या हल्के पीले वस्त्र धारण करना शुभ होता है। इससे मन और शरीर दोनों में शुद्धता आती है।

    पूजन विधि सरल है लेकिन प्रभावशाली। मां की प्रतिमा के सामने घी का दीपक जलाएं और अपने कृतज्ञता भाव व्यक्त करें। मां को चमेली या कमल के फूल अर्पित करें क्योंकि ये उनके प्रिय माने जाते हैं। भोग में चीनी मिश्री या पंचामृत चढ़ाना शुभ माना जाता है। पूजा के दौरान मंत्रों का जाप करना आवश्यक है जिससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। अंत में आरती करें और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें।

    मां ब्रह्मचारिणी का ध्यान मंत्र है:

    “या देवी सर्वभेतेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।
    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
    दधना करपद्याभ्यांक्षमालाकमण्डलू।
    देवीप्रसीदतु मयी ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥”

    इस मंत्र का अर्थ है कि देवी ब्रह्मचारिणी का स्वरूप अद्भुत और दिव्य है। माता के दाहिने हाथ में जप की माला और बाएं हाथ में कमंडल होता है। साधारण मंत्र भी है: ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः जिसका जाप कर श्रद्धा और भक्ति से मां की आराधना की जाती है।

    इस प्रकार चैत्र नवरात्रि का दूसरा दिन भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है। मां ब्रह्मचारिणी की पूजा न केवल आत्मविश्वास और संयम की शक्ति देती है बल्कि जीवन में सुख शांति और समृद्धि भी लाती है। इस दिन विधि-विधान और उचित मुहूर्त में पूजा करना अत्यंत फलदायी माना गया है।