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  • जसपाल राणा के निधन पर देश शोकाकुल, पीएम मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जताया गहरा दुख

    जसपाल राणा के निधन पर देश शोकाकुल, पीएम मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जताया गहरा दुख


    नई दिल्ली। भारतीय शूटिंग जगत के दिग्गज खिलाड़ी और कोच जसपाल राणा के निधन से पूरे देश में शोक की लहर है। 49 वर्ष की आयु में उनके निधन की खबर सामने आने के बाद खेल जगत, राजनीतिक नेतृत्व और उनके प्रशंसकों ने गहरा दुख व्यक्त किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ (एनआरएआई) के पदाधिकारियों ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए भारतीय खेलों में उनके योगदान को याद किया।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर शोक संदेश जारी करते हुए कहा कि जसपाल राणा का निधन भारतीय खेल जगत के लिए एक बड़ी क्षति है। प्रधानमंत्री ने लिखा कि राणा ने शूटिंग में अपनी असाधारण उपलब्धियों से देश का गौरव बढ़ाया और एक मार्गदर्शक के रूप में भी नई पीढ़ी के खिलाड़ियों को प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि जसपाल राणा का समर्पण, अनुशासन और खेलों के प्रति प्रतिबद्धता उन्हें हमेशा सम्मान दिलाती रहेगी। प्रधानमंत्री ने शोक संतप्त परिवार, मित्रों और खेल समुदाय के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी जसपाल राणा के निधन पर गहरा दुख जताया। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन करने वाले इस महान खिलाड़ी का अचानक निधन बेहद दुखद है। राजनाथ सिंह ने कहा कि जसपाल राणा न केवल एक उत्कृष्ट शूटर और कोच थे, बल्कि बेहद सरल, सहज और नेकदिल इंसान भी थे। उन्होंने भारत में शूटिंग को लोकप्रिय बनाने और युवा खिलाड़ियों को इस खेल की ओर आकर्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    रक्षा मंत्री ने अपने संदेश में यह भी कहा कि जसपाल राणा ने विश्व शूटिंग चैंपियनशिप और एशियाई खेलों जैसे बड़े मंचों पर भारत को स्वर्ण पदक दिलाकर देश का मान बढ़ाया। उनके अनुसार, राणा का जाना भारतीय खेल जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है, जिसकी भरपाई आसान नहीं होगी।

    भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ (एनआरएआई) के अध्यक्ष कलिकेश नारायण सिंह देव ने भी उनके निधन पर शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि जसपाल राणा केवल एक चैंपियन खिलाड़ी ही नहीं, बल्कि एक उत्कृष्ट मेंटोर भी थे। उन्होंने कहा कि भारतीय शूटिंग समुदाय को उनकी कमी हमेशा महसूस होगी और उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।

    जसपाल राणा भारतीय शूटिंग के सबसे सफल खिलाड़ियों में गिने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर के दौरान एशियाई खेलों, कॉमनवेल्थ गेम्स और अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत के लिए कई पदक जीते। खिलाड़ी के रूप में सफलता हासिल करने के बाद उन्होंने कोचिंग में भी उल्लेखनीय योगदान दिया और कई युवा निशानेबाजों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता दिलाई।

    दो बार की ओलंपिक पदक विजेता भारतीय शूटर मनु भाकर सहित कई शीर्ष खिलाड़ियों के करियर को संवारने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। वर्तमान में वह भारतीय पिस्टल निशानेबाजों के हाई-परफॉर्मेंस कोच के रूप में कार्यरत थे और भारतीय शूटिंग टीम को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में जुटे हुए थे।

    रिपोर्ट्स के अनुसार, हाल ही में जर्मनी के म्यूनिख में आयोजित आईएसएसएफ वर्ल्ड कप से लौटते समय उनकी तबीयत बिगड़ गई थी, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनके निधन से भारतीय खेल जगत ने एक ऐसे व्यक्तित्व को खो दिया है, जिसने अपने प्रदर्शन, नेतृत्व और मार्गदर्शन से भारतीय शूटिंग को वैश्विक पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई।

  • पूर्व भारतीय शूटर और द्रोणाचार्य अवॉर्डी जसपाल राणा का निधन, खेल जगत में शोक की लहर

    पूर्व भारतीय शूटर और द्रोणाचार्य अवॉर्डी जसपाल राणा का निधन, खेल जगत में शोक की लहर


    नई दिल्ली। भारतीय शूटिंग जगत को शुक्रवार को उस समय बड़ा झटका लगा, जब पूर्व अंतरराष्ट्रीय निशानेबाज और प्रतिष्ठित कोच जसपाल राणा के निधन की खबर सामने आई। 49 वर्ष की उम्र में उनके निधन से खेल जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। जसपाल राणा न केवल भारत के सबसे सफल निशानेबाजों में शामिल थे, बल्कि उन्होंने कोच के रूप में भी भारतीय शूटिंग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

    रिपोर्ट्स के अनुसार, जसपाल राणा हाल ही में जर्मनी के म्यूनिख में आयोजित आईएसएसएफ वर्ल्ड कप से लौट रहे थे। यात्रा के दौरान उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालांकि चिकित्सकों के प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। उनके निधन की खबर सामने आते ही खेल जगत, खिलाड़ियों और प्रशंसकों के बीच शोक की भावना फैल गई।

    जसपाल राणा भारतीय शूटिंग के उन चुनिंदा खिलाड़ियों में रहे, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का नाम रोशन किया। उन्होंने एशियाई खेलों, कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियाई चैंपियनशिप में कई पदक जीतकर भारतीय निशानेबाजी को नई पहचान दिलाई। अपने करियर के दौरान उन्होंने चार कॉमनवेल्थ खेलों—1994, 1998, 2002 और 2006—में भारत का प्रतिनिधित्व किया और कुल 15 पदक अपने नाम किए। इनमें 9 स्वर्ण, 4 रजत और 2 कांस्य पदक शामिल रहे। इसके अलावा एशियाई खेलों में भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए देश को कई महत्वपूर्ण पदक दिलाए।

    खिलाड़ी के रूप में सफलता हासिल करने के बाद जसपाल राणा ने कोचिंग की जिम्मेदारी संभाली और नई पीढ़ी के खिलाड़ियों को तैयार करने में जुट गए। भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ (एनआरएआई) ने उन्हें 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा के लिए हाई परफॉर्मेंस कोच नियुक्त किया था। उनकी कोचिंग शैली अनुशासन, तकनीकी दक्षता और कड़े प्रशिक्षण के लिए जानी जाती थी। उनके मार्गदर्शन में कई युवा निशानेबाजों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता हासिल की।

    भारतीय स्टार शूटर मनु भाकर की सफलता में भी जसपाल राणा की भूमिका को बेहद अहम माना जाता है। उनकी देखरेख में मनु ने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया और भारतीय शूटिंग को नई पहचान दिलाई। बतौर कोच उनके योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने वर्ष 2020 में उन्हें प्रतिष्ठित द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित किया था।

    हाल के वर्षों में भी जसपाल राणा भारतीय शूटिंग टीम के साथ सक्रिय रूप से जुड़े हुए थे। म्यूनिख में आयोजित आईएसएसएफ वर्ल्ड कप में भारतीय पिस्टल टीम ने उनके मार्गदर्शन में दो स्वर्ण और दो रजत पदक जीतकर शानदार प्रदर्शन किया था। यह उपलब्धि उनकी कोचिंग क्षमता और खेल के प्रति समर्पण को दर्शाती है।

    भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ (एनआरएआई) के अध्यक्ष कलिकेश नारायण सिंह देव ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि जसपाल राणा केवल एक महान खिलाड़ी ही नहीं, बल्कि उत्कृष्ट मार्गदर्शक और प्रेरणास्रोत भी थे। उनका योगदान हमेशा भारतीय खेल इतिहास में याद रखा जाएगा।

    जसपाल राणा का निधन भारतीय शूटिंग समुदाय के लिए अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। उन्होंने अपने समर्पण, उपलब्धियों और मार्गदर्शन से भारतीय निशानेबाजी को नई दिशा दी। आने वाली पीढ़ियां उन्हें एक महान खिलाड़ी, सफल कोच और खेल के सच्चे दूत के रूप में हमेशा याद रखेंगी।

  • एक सवाल और बड़ा हंगामा: मनु भाकर के बयान से ज्यादा चर्चा सवाल पूछने के तरीके पर

    एक सवाल और बड़ा हंगामा: मनु भाकर के बयान से ज्यादा चर्चा सवाल पूछने के तरीके पर


    नई दिल्ली । देश में खेलों को लेकर जुनून हमेशा से रहा है लेकिन कई बार यही जुनून बहस और विवाद का कारण भी बन जाता है कुछ ऐसा ही देखने को मिला जब ओलंपिक मेडलिस्ट मनु भाकर से युवा क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी को लेकर सवाल पूछा गया और देखते ही देखते यह मामला सोशल मीडिया पर बड़ी बहस में बदल गया

    दरअसल दिल्ली में नेशनल राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया की 75वीं वर्षगांठ के कार्यक्रम के दौरान मनु भाकर से वैभव सूर्यवंशी के बारे में राय मांगी गई इस पर उन्होंने बेहद संतुलित और सकारात्मक जवाब देते हुए कहा कि अगर किसी खिलाड़ी को सही मार्गदर्शन और अच्छा माहौल मिले तो उम्र सिर्फ एक नंबर रह जाती है और प्रतिभा किसी उम्र की मोहताज नहीं होती उन्होंने यह भी कहा कि सही मेंटरशिप के साथ वैभव आगे चलकर बड़ा स्टार बन सकते हैं

    हालांकि मनु भाकर का यह बयान प्रेरणादायक था लेकिन सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र उनका जवाब नहीं बल्कि उनसे पूछा गया सवाल बन गया कई यूजर्स और खेल से जुड़े लोगों ने इस बात पर नाराजगी जताई कि एक ओलंपिक मेडलिस्ट शूटर से क्रिकेटर के बारे में सवाल करना उनके खेल और उपलब्धियों के साथ न्याय नहीं है

    इस मुद्दे पर जॉय भट्टाचार्य ने भी प्रतिक्रिया दी और कहा कि मनु भाकर जैसी खिलाड़ी से इस तरह का सवाल पूछना उनके योगदान को कम आंकने जैसा है उन्होंने तंज करते हुए कहा कि अगर ऐसा ही है तो अगली बार किसी क्रिकेटर से शूटिंग के उभरते खिलाड़ियों पर सवाल पूछा जाना चाहिए

    सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने यह भी सवाल उठाया कि क्या कभी क्रिकेटरों से अन्य खेलों के खिलाड़ियों के बारे में इस तरह सवाल किए जाते हैं लोगों का मानना है कि क्रिकेट को जरूरत से ज्यादा प्राथमिकता दी जाती है जबकि अन्य खेलों के खिलाड़ी भी उतनी ही मेहनत और उपलब्धियां हासिल करते हैं

    वहीं दूसरी ओर कुछ लोग इसे सामान्य मानते हैं उनका कहना है कि भारत में क्रिकेट सबसे लोकप्रिय खेल है इसलिए अन्य खेलों से जुड़े खिलाड़ियों से भी क्रिकेट पर राय लेना कोई नई बात नहीं है

    अगर बात करें वैभव सूर्यवंशी की तो वह इस समय क्रिकेट जगत में तेजी से उभरते सितारे हैं कम उम्र में उन्होंने कई बड़े रिकॉर्ड अपने नाम किए हैं और Indian Premier League में शानदार प्रदर्शन कर सबका ध्यान खींचा है

    यह पूरा विवाद एक बड़े मुद्दे की ओर इशारा करता है कि क्या भारत में खेलों के बीच संतुलन बन पाया है या नहीं क्या अन्य खेलों को भी क्रिकेट जितनी ही अहमियत मिलनी चाहिए यह बहस लंबे समय से चल रही है और इस घटना ने इसे एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है फिलहाल यह मामला सिर्फ एक सवाल से शुरू हुआ था लेकिन अब यह खेल पत्रकारिता और खेलों के बीच समानता की बड़ी बहस का रूप ले चुका है