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  • India's industrial production rose by 8 percent in August; manufacturing and capital goods sectors showed strong momentum.

    India's industrial production rose by 8 percent in August; manufacturing and capital goods sectors showed strong momentum.

    नई दिल्ली, 28 सितंबर। भारत के औद्योगिक उत्पादन में अगस्त के दौरान सालाना आधार पर 8 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई। औद्योगिक उत्पादन सूचकांक यानी आईआईपी में तीन-चौथाई से अधिक हिस्सेदारी रखने वाले मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के बेहतर प्रदर्शन ने इस वृद्धि को गति दी। अगस्त में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की वृद्धि दर 9 प्रतिशत रही और यह लगातार तीसरा महीना रहा, जब इस क्षेत्र ने 8 प्रतिशत या उससे अधिक की वृद्धि दर्ज की।

    मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के 23 प्रमुख उद्योग समूहों में से 18 ने अगस्त के दौरान सकारात्मक वृद्धि दर्ज की। इनमें मोटर वाहनों का विनिर्माण प्रमुख रहा, जिसमें उत्पादन 25.2 प्रतिशत बढ़ा। इलेक्ट्रिकल उपकरणों के विनिर्माण में 30.9 प्रतिशत और मशीनरी एवं उपकरणों के विनिर्माण में 25.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इन क्षेत्रों के बेहतर प्रदर्शन से औद्योगिक गतिविधियों में व्यापक मजबूती दिखाई दी।

    मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर देश के इंजीनियरिंग संस्थानों और विश्वविद्यालयों से पढ़ाई पूरी करने वाले युवाओं के लिए गुणवत्तापूर्ण रोजगार उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में इस क्षेत्र में लगातार उत्पादन बढ़ने से आगे रोजगार और आय से जुड़े अवसरों पर भी असर पड़ सकता है। औद्योगिक उत्पादन में आई तेजी को इसी व्यापक आर्थिक गतिविधि के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    औद्योगिक उत्पादन के अन्य प्रमुख क्षेत्रों में भी अगस्त के दौरान वृद्धि दर्ज की गई। बिजली और गैस आपूर्ति क्षेत्र में उत्पादन 12.3 प्रतिशत बढ़ा, जबकि जल आपूर्ति, सीवरेज और अपशिष्ट प्रबंधन क्षेत्र में 6.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई। हालांकि, खनन क्षेत्र का प्रदर्शन इसके विपरीत रहा और अगस्त में इसमें 5.6 प्रतिशत की नकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई।

    उपयोग-आधारित वर्गीकरण के आंकड़ों में कैपिटल गुड्स के उत्पादन में भी मजबूत तेजी दिखाई दी। कारखानों और औद्योगिक इकाइयों में इस्तेमाल होने वाली मशीनों यानी कैपिटल गुड्स के उत्पादन में अगस्त के दौरान 16.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई। इस श्रेणी को अर्थव्यवस्था में वास्तविक निवेश से जुड़ी गतिविधियों का एक महत्वपूर्ण संकेत माना जाता है। मशीनरी के उत्पादन में बढ़ोतरी से आगे औद्योगिक क्षमता, रोजगार और आय के अवसरों पर असर पड़ सकता है।

    अगस्त के दौरान कंज्यूमर ड्यूरेबल्स के उत्पादन में भी 11.1 प्रतिशत की दोहरे अंक की वृद्धि दर्ज की गई। इलेक्ट्रॉनिक सामान, रेफ्रिजरेटर और टीवी जैसी वस्तुओं के उत्पादन में तेजी उपभोक्ता मांग में बढ़ोतरी से जुड़ी रही। वहीं साबुन और कॉस्मेटिक्स जैसी कंज्यूमर नॉन-ड्यूरेबल्स वस्तुओं के उत्पादन में 2.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई।

    इंफ्रास्ट्रक्चर और कंस्ट्रक्शन गुड्स सेक्टर में अगस्त के दौरान 6.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई। हाईवे, बंदरगाह और रेलवे जैसी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में निवेश से इस क्षेत्र को गति मिली। इन परियोजनाओं से निर्माण गतिविधियों के साथ रोजगार के अवसर पैदा होने और व्यापक आर्थिक गतिविधियों को समर्थन मिलने की संभावना रहती है। कुल मिलाकर अगस्त के औद्योगिक उत्पादन के आंकड़ों में मैन्युफैक्चरिंग, कैपिटल गुड्स और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स जैसे क्षेत्रों की मजबूत वृद्धि प्रमुख रूप से सामने आई।

  • तमिलनाडु बना आर्थिक ग्रोथ का नया पावरहाउस, मैन्युफैक्चरिंग से सर्विस सेक्टर तक तेज रफ्तार विकास

    तमिलनाडु बना आर्थिक ग्रोथ का नया पावरहाउस, मैन्युफैक्चरिंग से सर्विस सेक्टर तक तेज रफ्तार विकास

    नई दिल्ली। तमिलनाडु आज भारत की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक बनकर उभरा है। राज्य ने मैन्युफैक्चरिंग, सर्विस और एक्सपोर्ट सेक्टर में लगातार मजबूत प्रदर्शन करते हुए आर्थिक विकास की रफ्तार को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। इसी वजह से इसे देश का एक प्रमुख ग्रोथ इंजन माना जा रहा है।

    हाल के आंकड़ों के अनुसार राज्य ने लगातार दो वर्षों तक डबल डिजिट ग्रोथ दर्ज की है, जो राष्ट्रीय औसत से काफी अधिक है। इसकी कुल अर्थव्यवस्था भी तेजी से बढ़ते हुए लाखों करोड़ रुपये के स्तर तक पहुंच चुकी है। यह प्रदर्शन बताता है कि तमिलनाडु केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि राष्ट्रीय आर्थिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

    राज्य की इस सफलता के पीछे कई मजबूत कारण हैं। सबसे बड़ा कारण इसका विविध औद्योगिक आधार है, जहां चेन्नई, कोयंबटूर, होसुर और मदुरै जैसे शहर अलग-अलग उद्योगों के केंद्र के रूप में विकसित हुए हैं। ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और टेक्नोलॉजी मैन्युफैक्चरिंग में राज्य की मजबूत पकड़ इसे अन्य राज्यों से अलग बनाती है।

    इसके अलावा तमिलनाडु ने इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास पर भी लगातार ध्यान दिया है। बेहतर सड़क नेटवर्क, बंदरगाहों का विस्तार और बिजली आपूर्ति में सुधार ने निवेशकों के लिए माहौल को और आकर्षक बनाया है। यही वजह है कि देश-विदेश की बड़ी कंपनियां यहां निवेश को प्राथमिकता देती हैं।

    शिक्षित और स्किल्ड वर्कफोर्स भी राज्य की बड़ी ताकत है। उच्च शिक्षा में भागीदारी और तकनीकी कौशल के कारण यहां उद्योगों को प्रशिक्षित श्रमिक आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं। यह कारक भी औद्योगिक विकास को गति देने में अहम भूमिका निभाता है।

    तमिलनाडु इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमोबाइल एक्सपोर्ट के क्षेत्र में भी देश में अग्रणी राज्यों में शामिल है। इलेक्ट्रिक व्हीकल, रिन्यूएबल एनर्जी और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग जैसे नए सेक्टर्स में भी राज्य तेजी से आगे बढ़ रहा है।

    राज्य सरकार का लक्ष्य तमिलनाडु को एक बड़े आर्थिक केंद्र के रूप में विकसित करना है। इसके लिए लगातार निवेश आकर्षित करने और ग्लोबल कंपनियों को जोड़ने पर काम किया जा रहा है। औद्योगिक नीतियों और निवेश अनुकूल माहौल के कारण राज्य भविष्य में और तेजी से विकास की ओर बढ़ने की क्षमता रखता है।