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  • पीयूष गोयल के जापान दौरे से भारत-जापान आर्थिक साझेदारी को नई गति, 200 से अधिक कारोबारी प्रतिनिधि भी प्रतिनिधिमंडल में शामिल

    पीयूष गोयल के जापान दौरे से भारत-जापान आर्थिक साझेदारी को नई गति, 200 से अधिक कारोबारी प्रतिनिधि भी प्रतिनिधिमंडल में शामिल


    नई दिल्ली । 
    वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल का जापान दौरा सोमवार से शुरू हो गया है। चार दिवसीय आधिकारिक यात्रा के दौरान उनका मुख्य फोकस भारत और जापान के बीच आर्थिक साझेदारी को और मजबूत करने, निवेश के अवसर बढ़ाने और विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में सहयोग का विस्तार करने पर रहेगा।

    पीयूष गोयल 27 अगस्त तक जापान में रहेंगे। इस दौरान वह टोक्यो, नागोया और ओसाका का दौरा करेंगे। उनके नेतृत्व में भारत का अब तक का सबसे बड़ा कारोबारी प्रतिनिधिमंडल जापान पहुंचा है, जिसमें 200 से अधिक बिजनेस प्रतिनिधि शामिल हैं। प्रतिनिधिमंडल में विभिन्न प्रमुख औद्योगिक और सेवा क्षेत्रों से जुड़े कारोबारी शामिल हैं।

    भारतीय प्रतिनिधिमंडल में मैन्युफैक्चरिंग, सेमीकंडक्टर, क्लीन एनर्जी और स्टील जैसे क्षेत्रों के प्रतिनिधियों के अलावा ऑटोमोटिव, वित्तीय सेवाओं, हेल्थकेयर और स्टार्टअप क्षेत्र से जुड़े कारोबारी भी शामिल हैं। इससे दौरे के दौरान होने वाली चर्चाओं का दायरा व्यापक रहने की उम्मीद है।

    टोक्यो पहुंचने के बाद गोयल ने जापान की प्रमुख कंपनी सुमितोमो कॉरपोरेशन के प्रेसिडेंट और सीईओ शिंगो उएनो के साथ बैठक की। दोनों पक्षों ने एनर्जी ट्रांसफॉर्मेशन, मोबिलिटी और औद्योगिक बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में भारत के साथ कंपनी के जुड़ाव को और गहरा करने की संभावनाओं पर चर्चा की।

    बैठक के दौरान भारत में निवेश आधारित आर्थिक विकास और तेजी से विस्तार कर रहे मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को जापानी कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण अवसर के तौर पर रेखांकित किया गया। भारत की औद्योगिक क्षमता और जापान की तकनीकी विशेषज्ञता के बीच सहयोग को आगे बढ़ाने पर भी जोर रहा।

    गोयल ने मेइजी सेइका फार्मा कंपनी लिमिटेड के प्रेसिडेंट और रिप्रेजेंटेटिव डायरेक्टर तोशियाकी नागासातो से भी मुलाकात की। इस बैठक में फार्मास्युटिकल क्षेत्र में भारत-जापान सहयोग को मजबूत करने और भारत में कंपनी की मैन्युफैक्चरिंग तथा रिसर्च एंड डेवलपमेंट गतिविधियों का विस्तार करने के अवसरों पर बातचीत हुई।

    भारत का फार्मास्युटिकल इकोसिस्टम जापानी कंपनियों के लिए बड़े स्तर पर कारोबार बढ़ाने और दीर्घकालिक विकास के अवसर उपलब्ध कराता है। ऐसे में इस क्षेत्र में सहयोग दोनों देशों के आर्थिक संबंधों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    गोयल की जापान यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब दोनों देश व्यापार और निवेश संबंधों को नई ऊंचाई देने की दिशा में काम कर रहे हैं। जापान भारत के प्रमुख आर्थिक साझेदारों में शामिल है और दोनों देशों के बीच तकनीक, निवेश, विनिर्माण तथा बुनियादी ढांचे से जुड़े क्षेत्रों में सहयोग की व्यापक संभावनाएं हैं।

    इस दौरे के दौरान कारोबारी बैठकों के साथ विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग और निवेश की संभावनाओं पर चर्चा होने की उम्मीद है। 200 से अधिक भारतीय कारोबारी प्रतिनिधियों की मौजूदगी इस यात्रा को व्यापारिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बनाती है। इससे भारतीय कंपनियों और जापानी उद्योग जगत के बीच सीधे संपर्क को बढ़ावा मिल सकता है।

    दौरे का व्यापक उद्देश्य दोनों देशों की विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी को आर्थिक स्तर पर और मजबूत करना है। निवेश, तकनीक, उत्पादन और औद्योगिक सहयोग के क्षेत्रों में आगे बढ़ने से भारत-जापान संबंधों को नए कारोबारी अवसर मिल सकते हैं।

  • मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पीथमपुर में दो बड़े उद्योगों का किया उद्घाटन, धार में निवेश और रोजगार को मिलेगी नई गति

    मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पीथमपुर में दो बड़े उद्योगों का किया उद्घाटन, धार में निवेश और रोजगार को मिलेगी नई गति

    मध्य प्रदेश: के धार जिले के पीथमपुर में औद्योगिक विकास की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत की मौजूदगी में एडवांस ऑप्टिकल फाइबर और बैटरी मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स का उद्घाटन किया गया। इन दोनों औद्योगिक इकाइयों के शुरू होने से प्रदेश में निवेश को बढ़ावा मिलने के साथ बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है। सरकार के अनुसार, इन उद्योगों से 30 हजार से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलने की संभावना है।

    पीथमपुर लंबे समय से मध्य प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में शामिल रहा है और अब यहां नई तकनीक से जुड़े उद्योगों के विस्तार पर जोर दिया जा रहा है। ऑप्टिकल फाइबर निर्माण से दूरसंचार और डिजिटल कनेक्टिविटी से जुड़े क्षेत्र को मजबूती मिलने की उम्मीद है, जबकि बैटरी मैन्युफैक्चरिंग प्लांट ऊर्जा भंडारण और आधुनिक औद्योगिक जरूरतों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों क्षेत्रों में भविष्य में मांग बढ़ने की संभावना को देखते हुए इन संयंत्रों की शुरुआत को औद्योगिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है।

    उद्घाटन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि नए उद्योगों की स्थापना से मध्य प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार होंगे। उन्होंने औद्योगिक निवेश को प्रदेश की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इससे राज्य के विकास के साथ देश की आर्थिक प्रगति को भी गति मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए किए गए समझौतों को अब जमीन पर उतारने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री ने धार जिले के औद्योगिक बदलाव का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बीते एक महीने के दौरान वह दूसरी बार इस क्षेत्र में आए हैं और इससे पहले भी कई उद्योगों का लोकार्पण किया गया था। उनके मुताबिक, पिछले समय में किए गए कई समझौते अब वास्तविक औद्योगिक परियोजनाओं में बदल रहे हैं। इससे निवेशकों का भरोसा बढ़ने के साथ स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियां भी तेज हो रही हैं।

    धार जिले को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह क्षेत्र कभी पिछड़ेपन के लिए जाना जाता था, लेकिन अब औद्योगिक विकास की वजह से इसकी तस्वीर बदल रही है। जनजातीय बहुल धार और पीथमपुर क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ने वाले इलाकों में शामिल हो रहे हैं। औद्योगिक इकाइयों की स्थापना से स्थानीय कारोबार, परिवहन, निर्माण, सेवा और अन्य सहायक क्षेत्रों में भी गतिविधियां बढ़ने की संभावना है।

    ऑप्टिकल फाइबर और बैटरी निर्माण जैसे क्षेत्रों में निवेश को राज्य के औद्योगिक विस्तार के साथ तकनीकी क्षमता बढ़ाने के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे स्थानीय युवाओं को नए प्रकार के कौशल और रोजगार के अवसर मिल सकते हैं। साथ ही उद्योगों के आसपास सहायक इकाइयों और सेवा क्षेत्र के विस्तार की संभावना भी बनेगी।

    सरकार का जोर प्रदेश में बड़े निवेश को प्रोत्साहित करने के साथ रोजगार आधारित औद्योगिक विकास पर है। पीथमपुर में शुरू हुए दोनों प्लांट इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माने जा रहे हैं। आने वाले समय में इन परियोजनाओं से उत्पादन बढ़ने और रोजगार के अवसरों में विस्तार होने की उम्मीद है। इससे धार जिले की औद्योगिक पहचान और मजबूत होने के साथ मध्य प्रदेश के आर्थिक विकास को भी नई गति मिल सकती है।

  • केंद्र का बड़ा फोकस, औद्योगिक कॉरिडोरों में मंजूरी के बाद समयबद्ध निर्माण, निवेश और उत्पादन शुरू कराने की रणनीति तेज

    केंद्र का बड़ा फोकस, औद्योगिक कॉरिडोरों में मंजूरी के बाद समयबद्ध निर्माण, निवेश और उत्पादन शुरू कराने की रणनीति तेज

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने औद्योगिक कॉरिडोर और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को लेकर अपनी प्राथमिकता में बदलाव करते हुए अब केवल मंजूरी देने के बजाय उन्हें समय पर पूरा कराने, निवेश आकर्षित करने और उत्पादन शुरू कराने पर जोर दिया है। सरकार का मानना है कि किसी परियोजना की वास्तविक सफलता उसकी घोषणा या स्वीकृति से नहीं, बल्कि जमीन पर उसके क्रियान्वयन और आर्थिक गतिविधियों में बदलने से तय होती है।

    राष्ट्रीय औद्योगिक कॉरिडोर विकास एवं कार्यान्वयन न्यास की शीर्ष निगरानी प्राधिकरण की तीसरी बैठक में औद्योगिक कॉरिडोर परियोजनाओं की प्रगति और उनसे जुड़ी चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में राज्यों से भूमि उपलब्धता, परिवहन संपर्क, बिजली और पानी जैसी सुविधाओं, वैधानिक मंजूरियों तथा परियोजना विशेष प्रयोजन इकाइयों से जुड़ी बाधाओं को तेजी से दूर करने पर जोर दिया गया।

    वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि औद्योगिक परियोजनाओं के लिए जमीन आवंटन, सड़क और परिवहन संपर्क, आवश्यक उपयोगिताओं तथा नियामकीय मंजूरियों से जुड़ी अड़चनों का प्राथमिकता के आधार पर समाधान होना चाहिए। उन्होंने पीएम गतिशक्ति के माध्यम से समेकित योजना बनाने और निवेशकों के लिए अनुकूल भूमि आवंटन व्यवस्था को लगातार मजबूत करने की आवश्यकता बताई।

    सरकार की योजना औद्योगिक विकास को केवल फैक्टरियों और उत्पादन इकाइयों तक सीमित रखने की नहीं है। औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिकों के लिए आवास, स्वास्थ्य सुविधाएं, कौशल विकास, सार्वजनिक परिवहन और अन्य जरूरी सामाजिक सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया है। इससे उद्योगों के आसपास एक ऐसा समग्र इकोसिस्टम विकसित करने की कोशिश है, जिसमें कर्मचारियों और कंपनियों दोनों की जरूरतें पूरी हो सकें।

    केंद्र सरकार सार्वजनिक पूंजीगत व्यय, राज्यों को सहायता और विनिर्माण क्षेत्र से जुड़े सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए बेहतर ऋण सुविधा के माध्यम से घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर भी काम कर रही है। कर और सीमा शुल्क से जुड़े उपायों के जरिए देश में विनिर्माण और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने की दिशा में भी प्रयास जारी हैं।

    वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने औद्योगिक परियोजनाओं को पीएम गतिशक्ति के साथ जोड़कर समेकित क्षेत्रीय विकास मॉडल के तहत आगे बढ़ाने की जरूरत बताई। उन्होंने निवेशकों तक पहुंच बढ़ाने और औद्योगिक नोड्स की प्रभावी मार्केटिंग पर जोर दिया। उनका कहना है कि वैश्विक निवेश के अवसरों को आकर्षित करने के लिए परियोजनाओं को निवेशकों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप तैयार करना जरूरी है।

    मुक्त व्यापार समझौतों से मिलने वाले अवसरों का लाभ उठाने के लिए देश और क्षेत्र विशेष के औद्योगिक एन्क्लेव विकसित करने की योजना पर भी चर्चा हुई। इसके तहत प्लग एंड प्ले इंफ्रास्ट्रक्चर, फ्लैटेड फैक्ट्री, श्रमिक आवास और आर्थिक-सामाजिक सुविधाओं से युक्त तैयार औद्योगिक व्यवस्था विकसित करने पर बल दिया गया।

    पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने औद्योगिक कॉरिडोरों को राष्ट्रीय जलमार्गों से जोड़ने का सुझाव दिया। उनका कहना है कि जलमार्गों को औद्योगिक विकास की रीढ़ के रूप में विकसित करने से लॉजिस्टिक्स लागत कम करने में मदद मिल सकती है। उन्होंने पूर्वोत्तर राज्यों में भी बेहतर कनेक्टिविटी, उपलब्ध भूमि और स्थानीय संसाधनों के आधार पर औद्योगिक गतिविधियां बढ़ाने पर जोर दिया।

    नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक कुमार लाहिड़ी ने परियोजना एसपीवी को अधिक अधिकार देने की आवश्यकता बताई। उनका कहना है कि योजना निर्माण, विकास और नगर प्रशासन से जुड़े पर्याप्त अधिकार मिलने से औद्योगिक कॉरिडोर परियोजनाओं को तेजी से जमीन पर उतारा जा सकेगा। सरकार का नया फोकस स्पष्ट रूप से मंजूरी से आगे बढ़कर परियोजनाओं को समय पर पूरा करने और उन्हें वास्तविक आर्थिक गतिविधि में बदलने पर केंद्रित है।

  • जुलाई में थोक महंगाई दर घटकर 9.78 प्रतिशत हुई, ईंधन कीमतों में नरमी के बावजूद खाद्य और विनिर्माण दबाव बढ़ा

    जुलाई में थोक महंगाई दर घटकर 9.78 प्रतिशत हुई, ईंधन कीमतों में नरमी के बावजूद खाद्य और विनिर्माण दबाव बढ़ा

    नई दिल्ली ।भारत में थोक स्तर पर वस्तुओं की कीमतों में जुलाई 2026 के दौरान मामूली नरमी देखने को मिली। जुलाई में थोक मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई दर 9.78 प्रतिशत रही, जबकि जून में यह 9.87 प्रतिशत दर्ज की गई थी। इस तरह मासिक आधार पर थोक महंगाई में हल्की कमी आई है, हालांकि कीमतों का दबाव अभी भी ऊंचे स्तर पर बना हुआ है।

    2022-23 को आधार वर्ष मानकर जारी अनंतिम आंकड़ों के अनुसार जुलाई में सभी वस्तुओं का थोक मूल्य सूचकांक 110.0 रहा। जून में यह सूचकांक 110.2 दर्ज किया गया था। समग्र सूचकांक में मामूली गिरावट के बावजूद अलग-अलग श्रेणियों में कीमतों का रुझान एक जैसा नहीं रहा।

    प्राथमिक वस्तुओं की महंगाई दर जुलाई में बढ़कर 8.52 प्रतिशत हो गई, जबकि जून में यह 7.00 प्रतिशत थी। इसका मतलब है कि इस श्रेणी की वस्तुओं की कीमतों में पिछले महीने की तुलना में अधिक दबाव रहा। प्राथमिक वस्तुओं का सूचकांक भी जून के 116.1 से बढ़कर जुलाई में 117.2 हो गया।

    विनिर्मित उत्पादों की कीमतों में भी तेजी देखने को मिली। जुलाई में इस श्रेणी की महंगाई दर 8.29 प्रतिशत रही, जबकि जून में यह 7.48 प्रतिशत थी। विनिर्मित उत्पादों का सूचकांक जून के 107.8 से बढ़कर जुलाई में 108.4 हो गया। इससे उत्पादन क्षेत्र में लागत और कीमतों से जुड़ा दबाव बने रहने का संकेत मिलता है।

    इसके विपरीत ईंधन और ऊर्जा क्षेत्र में महंगाई दर में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई। जून में 27.41 प्रतिशत रही यह दर जुलाई में घटकर 20.05 प्रतिशत पर आ गई। हालांकि गिरावट के बावजूद इस श्रेणी में महंगाई अभी भी काफी ऊंची बनी हुई है। ईंधन और ऊर्जा का सूचकांक जून के 111.1 से घटकर जुलाई में 105.4 हो गया।

    जुलाई में थोक महंगाई को प्रभावित करने वाले प्रमुख क्षेत्रों में खनिज तेल और पेट्रोलियम उत्पाद, खाद्य वस्तुएं, बेसिक मेटल्स, गैर-खाद्य प्राथमिक उत्पाद, खाद्य उत्पादों का विनिर्माण तथा रसायन और रासायनिक उत्पाद शामिल रहे। इन क्षेत्रों में कीमतों की बढ़ोतरी का असर कुल थोक महंगाई के आंकड़े पर पड़ा।

    खाद्य क्षेत्र में भी कीमतों का दबाव बढ़ा है। जुलाई में डब्ल्यूपीआई फूड इंडेक्स आधारित महंगाई दर 6.65 प्रतिशत रही, जो जून के 6.14 प्रतिशत से अधिक है। खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी का असर थोक बाजार के साथ आगे चलकर अन्य कीमतों पर भी दिखाई दे सकता है।

    इस बीच मई 2026 के थोक महंगाई आंकड़ों में भी संशोधन किया गया है। मई का अंतिम थोक मूल्य सूचकांक 109.9 के प्रारंभिक अनुमान से संशोधित होकर 110.1 हो गया। इसके साथ मई की थोक महंगाई दर भी 9.68 प्रतिशत के प्रारंभिक आंकड़े से संशोधित होकर 9.88 प्रतिशत हो गई।

    मई के अंतिम आंकड़े 98.14 प्रतिशत वेटेड रिस्पॉन्स रेट के आधार पर तैयार किए गए हैं। इसके अलावा आउटपुट प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स का मई का अंतिम आंकड़ा 109.6 के प्रारंभिक अनुमान से बढ़कर 109.9 हो गया है।

    विनिर्माण क्षेत्र के ऑल इंडिया ट्रायल इनपुट प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स की बात करें तो जुलाई में यह 105.9 दर्ज किया गया। मई के इनपुट पीपीआई के अंतिम आंकड़े में भी संशोधन हुआ और यह शुरुआती 104.9 से बढ़कर 106.5 हो गया।

    कुल मिलाकर जुलाई में थोक महंगाई दर में मामूली राहत जरूर मिली, लेकिन प्राथमिक वस्तुओं, खाद्य पदार्थों और विनिर्मित उत्पादों में बढ़ता मूल्य दबाव अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण संकेत है। वहीं ईंधन और ऊर्जा क्षेत्र में आई नरमी ने समग्र महंगाई दर को नीचे लाने में मदद की है।

  • भारत का मेड-टेक इकोसिस्टम मजबूत, घरेलू विनिर्माण और सरकारी योजनाओं से वैश्विक बाजार में बढ़ रही देश की विश्वसनीयता

    भारत का मेड-टेक इकोसिस्टम मजबूत, घरेलू विनिर्माण और सरकारी योजनाओं से वैश्विक बाजार में बढ़ रही देश की विश्वसनीयता

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के तेजी से विकसित हो रहे मेडिकल टेक्नोलॉजी यानी मेड-टेक क्षेत्र की प्रगति को रेखांकित करते हुए कहा है कि घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने, आयात पर निर्भरता घटाने और सरकारी प्रोत्साहन योजनाओं के कारण भारत वैश्विक स्तर पर एक भरोसेमंद मेड-टेक साझेदार के रूप में उभर रहा है। उन्होंने कहा कि देश में सस्ती, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं के लक्ष्य को हासिल करने में मजबूत मेडिकल उपकरण उद्योग की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

    प्रधानमंत्री के मुताबिक, भारत का मेड-टेक क्षेत्र घरेलू उत्पादन बढ़ने और विभिन्न सरकारी पहलों के कारण लगातार मजबूत हो रहा है। मेडिकल उपकरणों के निर्माण को बढ़ावा देने के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव यानी पीएलआई योजना, मेडिकल डिवाइस पार्क और फार्मा-मेडटेक क्षेत्र में अनुसंधान एवं नवाचार को प्रोत्साहित करने वाली योजनाओं पर जोर दिया जा रहा है। इन प्रयासों का उद्देश्य देश में उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ तकनीकी विकास और निवेश को गति देना है।

    सरकार के अनुसार, पीएलआई योजना के तहत भारत में अब तक 50 से अधिक अत्याधुनिक मेडिकल उपकरणों का निर्माण शुरू हो चुका है। इसके साथ ही इस क्षेत्र में विदेशी निवेश में भी वृद्धि देखी जा रही है। निवेश बढ़ने को मेडिकल उपकरण निर्माण क्षेत्र में बढ़ते भरोसे के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। घरेलू उत्पादन का विस्तार भारत को चिकित्सा उपकरणों के लिए केवल आयात आधारित बाजार के बजाय एक बड़े विनिर्माण केंद्र के रूप में विकसित करने में मदद कर सकता है।

    मेडिकल उपकरणों के आयात पर निर्भरता कम होने से आपूर्ति शृंखला मजबूत होने और लागत घटाने में मदद मिलने की उम्मीद है। इसका असर उन्नत डायग्नोस्टिक उपकरणों, इमेजिंग सिस्टम, इम्प्लांट्स और आईसीयू में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों की उपलब्धता पर भी पड़ सकता है। घरेलू स्तर पर इन उपकरणों का उत्पादन बढ़ने से स्वास्थ्य क्षेत्र में जरूरी तकनीक की पहुंच को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।

    मेड-टेक क्षेत्र में नई तकनीकों के लिए भी व्यापक संभावनाएं दिखाई दे रही हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सॉफ्टवेयर ऐज ए मेडिकल डिवाइस, कनेक्टेड मेडिकल डिवाइस, रोबोटिक्स और रिमोट डायग्नोस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में तेजी से विकास हो रहा है। इन तकनीकों का इस्तेमाल आने वाले समय में मरीजों की जांच, निगरानी और उपचार की प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

    मौजूदा आंकड़ों के अनुसार, भारत का मेड-टेक बाजार करीब 15 से 16 अरब डॉलर का है और लगभग 12 प्रतिशत की वार्षिक दर से बढ़ रहा है। भारत एशिया का चौथा सबसे बड़ा मेडिकल टेक्नोलॉजी बाजार है और वैश्विक स्तर पर शीर्ष 20 बाजारों में शामिल है। बाजार के विस्तार से घरेलू कंपनियों, निवेशकों और तकनीकी क्षेत्र के लिए नए अवसर पैदा होने की संभावना है।

    सरकार नियामकीय ढांचे, परीक्षण सुविधाओं और क्लीनिकल डेटा से जुड़ी व्यवस्था को भी मजबूत करने पर ध्यान दे रही है। इसका उद्देश्य मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और भारत में निर्मित मेडिकल उपकरणों को अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों के अनुरूप बनाना है। बेहतर परीक्षण और गुणवत्ता व्यवस्था से भारतीय उत्पादों की वैश्विक बाजार में स्वीकार्यता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

    मेडिकल डिवाइस उद्योग के मजबूत होने से विनिर्माण और रोजगार के साथ निर्यात तथा तकनीकी विकास को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। हालिया अनुमान के अनुसार, करीब 14 अरब डॉलर का भारतीय चिकित्सा उपकरण बाजार इस दशक के अंत तक 30 से 50 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। वर्ष 2047 तक इसके 250 अरब डॉलर तक पहुंचने की संभावना जताई गई है। ऐसे में घरेलू उत्पादन, अनुसंधान, निवेश और नई तकनीकों का विस्तार भारत को वैश्विक मेड-टेक क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की दिशा में आगे ले जा सकता है।

  • वैश्विक तनाव और महंगे कच्चे तेल के बीच भी भारतीय शेयर बाजार का दमदार प्रदर्शन, सेंसेक्स-निफ्टी ने साप्ताहिक बढ़त के साथ दिखाया भरोसा

    वैश्विक तनाव और महंगे कच्चे तेल के बीच भी भारतीय शेयर बाजार का दमदार प्रदर्शन, सेंसेक्स-निफ्टी ने साप्ताहिक बढ़त के साथ दिखाया भरोसा

    नई दिल्ली । वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बनी अनिश्चितता के बावजूद भारतीय शेयर बाजार ने बीते सप्ताह उल्लेखनीय मजबूती का प्रदर्शन किया। मजबूत कॉर्पोरेट नतीजों, सरकार के बड़े विनिर्माण संबंधी फैसलों और निवेशकों के सकारात्मक रुख ने घरेलू बाजार को सहारा दिया। इसी का परिणाम रहा कि सप्ताह के दौरान प्रमुख सूचकांक बढ़त के साथ बंद हुए और निवेशकों का भरोसा कायम रहा।

    सप्ताह भर के कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 582.06 अंकों यानी करीब 0.8 प्रतिशत की बढ़त दर्ज करते हुए मजबूत स्थिति में रहा, जबकि एनएसई निफ्टी 50 में 127.40 अंकों यानी लगभग 0.5 प्रतिशत की वृद्धि देखने को मिली। सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन शुक्रवार को बाजार में खरीदारी का उत्साह और अधिक बढ़ गया। सेंसेक्स 964.58 अंकों की छलांग लगाकर 78,151.45 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 261.55 अंक चढ़कर 24,334.30 के स्तर पर पहुंच गया। यह तेजी इस बात का संकेत रही कि वैश्विक चुनौतियों के बीच भी घरेलू निवेशकों का विश्वास भारतीय अर्थव्यवस्था पर बना हुआ है।

    सप्ताह के दौरान निवेशकों की नजर पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर बनी रही। अमेरिका और ईरान के बीच हालिया घटनाक्रम ने वैश्विक वित्तीय बाजारों में सतर्कता का माहौल पैदा किया। इसके साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई। इसके बावजूद भारतीय बाजार पर इन घटनाओं का सीमित प्रभाव देखने को मिला, क्योंकि घरेलू स्तर पर कई सकारात्मक आर्थिक संकेतकों ने बाजार को संतुलित बनाए रखा।

    बाजार को सबसे बड़ा सहारा प्रमुख कंपनियों के पहली तिमाही के वित्तीय नतीजों से मिला। कई बड़ी कंपनियों ने अपेक्षा से बेहतर प्रदर्शन प्रस्तुत किया, जिससे आईटी और चुनिंदा अन्य क्षेत्रों में निवेशकों की खरीदारी बढ़ी। इसके अलावा केंद्र सरकार द्वारा लगभग 1.9 लाख करोड़ रुपये की लागत वाली दो बड़ी विनिर्माण योजनाओं को मंजूरी दिए जाने से औद्योगिक विकास और निवेश को लेकर सकारात्मक माहौल बना। इन घोषणाओं ने दीर्घकालिक आर्थिक संभावनाओं को लेकर निवेशकों का विश्वास और मजबूत किया।

    सेक्टोरल प्रदर्शन की बात करें तो आईटी क्षेत्र पूरे सप्ताह सबसे अधिक चर्चा में रहा। इस क्षेत्र में सबसे अधिक बढ़त दर्ज की गई, जिससे तकनीकी कंपनियों के शेयरों में मजबूत खरीदारी देखने को मिली। कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, मीडिया, प्राइवेट बैंक और ऑयल एंड गैस सेक्टर ने भी सकारात्मक प्रदर्शन किया। दूसरी ओर रियल्टी, मेटल, डिफेंस, एफएमसीजी और पीएसयू बैंक जैसे कुछ क्षेत्रों में हल्की गिरावट दर्ज की गई, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि निवेशकों ने चुनिंदा क्षेत्रों में ही अधिक भरोसा दिखाया।

    हालांकि प्रमुख सूचकांकों में मजबूती रही, लेकिन व्यापक बाजार अपेक्षाकृत कमजोर नजर आया। मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में सप्ताह के दौरान गिरावट दर्ज की गई। वहीं बाजार की अस्थिरता दर्शाने वाला इंडिया वीआईएक्स भी बढ़ा, जो यह संकेत देता है कि वैश्विक परिस्थितियों को लेकर निवेशकों के बीच सतर्कता अभी भी बनी हुई है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में भारतीय शेयर बाजार की दिशा मुख्य रूप से कंपनियों के आगामी तिमाही नतीजों, प्रबंधन के भविष्य के संकेतों, मानसून की स्थिति, कच्चे तेल की कीमतों और पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर निर्भर करेगी। यदि वैश्विक परिस्थितियां स्थिर रहती हैं और कॉर्पोरेट प्रदर्शन मजबूत बना रहता है, तो घरेलू शेयर बाजार में सकारात्मक रुझान आगे भी जारी रहने की संभावना बनी रहेगी।

  • नए एफटीए से भारत को मिलेगी नई आर्थिक रफ्तार, मैन्युफैक्चरिंग, इनोवेशन और युवाओं के लिए खुलेंगे वैश्विक अवसर

    नए एफटीए से भारत को मिलेगी नई आर्थिक रफ्तार, मैन्युफैक्चरिंग, इनोवेशन और युवाओं के लिए खुलेंगे वैश्विक अवसर

    नई दिल्ली । भारत के नए मुक्त व्यापार समझौते देश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने के साथ-साथ मैन्युफैक्चरिंग, नवाचार और रोजगार के नए अवसर पैदा करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। सरकार का मानना है कि वैश्विक बाजारों तक बढ़ती पहुंच भारतीय उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को मजबूत करेगी और युवाओं के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर करियर के नए रास्ते खोलेगी। इसी उद्देश्य के तहत छात्रों को तकनीकी दक्षता, व्यावहारिक अनुभव और आधुनिक शिक्षा से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

    एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री ने कहा कि भारत तेजी से बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। नए मुक्त व्यापार समझौतों के माध्यम से देश के उद्योगों को नए बाजार मिल रहे हैं, जिससे उत्पादन क्षमता बढ़ने के साथ-साथ इनोवेशन को भी प्रोत्साहन मिल रहा है। उन्होंने कहा कि यह बदलाव केवल उद्योगों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले वर्षों में युवाओं के लिए रोजगार, उद्यमिता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अवसर भी बढ़ाएगा।

    उन्होंने छात्रों से पारंपरिक शिक्षा के साथ-साथ व्यावहारिक कौशल विकसित करने का आग्रह किया। उनका कहना था कि केवल सैद्धांतिक ज्ञान आज के प्रतिस्पर्धी दौर में पर्याप्त नहीं है। उद्योगों की बदलती जरूरतों के अनुरूप तकनीकी दक्षता, समस्या समाधान की क्षमता और व्यावहारिक अनुभव ही भविष्य की सफलता का आधार बनेंगे।

    डिजिटल शिक्षा की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि देश में इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की बड़ी संख्या उच्च शिक्षा को अधिक सुलभ और समावेशी बनाने का अवसर प्रदान करती है। आधुनिक तकनीक के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा अब देश के दूरदराज क्षेत्रों तक भी पहुंचाई जा सकती है, जिससे भौगोलिक और आर्थिक असमानताओं को कम करने में मदद मिलेगी।

    उन्होंने ऑनलाइन द्विभाषी प्रबंधन शिक्षा कार्यक्रम को शिक्षा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल बताया। उनके अनुसार, इस प्रकार के कार्यक्रम ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के विद्यार्थियों के बीच मौजूद अवसरों की खाई को कम करेंगे। अब छोटे शहरों और दूरस्थ इलाकों के छात्र भी घर बैठे उच्च गुणवत्ता वाली प्रबंधन शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे और राष्ट्रीय स्तर के शैक्षणिक संसाधनों का लाभ उठा पाएंगे।

    उन्होंने यह भी कहा कि हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में उपलब्ध पाठ्यक्रम देश के विभिन्न वर्गों के विद्यार्थियों को समान अवसर प्रदान करेंगे। इससे भाषा संबंधी बाधाएं कम होंगी और अधिक संख्या में छात्र उच्च शिक्षा से जुड़ सकेंगे। डिजिटल माध्यमों के जरिए पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों के लिए पारदर्शी और विश्वसनीय मूल्यांकन प्रणाली सुनिश्चित करने हेतु परीक्षाएं ऑफलाइन आयोजित किए जाने की व्यवस्था भी प्रभावी मानी जा रही है।

    कार्यक्रम के दौरान हाइब्रिड शिक्षा मॉडल को और मजबूत बनाने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया। उनका कहना था कि ऑनलाइन अध्ययन के साथ समय-समय पर शिक्षकों और विद्यार्थियों के बीच प्रत्यक्ष संवाद भी आवश्यक है। इससे छात्रों को टीमवर्क, नेतृत्व क्षमता, विचारों के आदान-प्रदान और नेटवर्किंग जैसे महत्वपूर्ण प्रबंधन कौशल विकसित करने का अवसर मिलेगा।

    सरकार का मानना है कि मुक्त व्यापार समझौतों, डिजिटल शिक्षा और कौशल विकास की संयुक्त रणनीति भारत को वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में अधिक प्रतिस्पर्धी बनाएगी। उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार होने से देश की उत्पादन क्षमता, नवाचार और आर्थिक विकास को भी दीर्घकालिक मजबूती मिलने की उम्मीद है।

  • ब्रांड इंडिया' को नई पहचान मिल रही, उद्यमियों से पीयूष गोयल ने कही बड़ी बात

    ब्रांड इंडिया' को नई पहचान मिल रही, उद्यमियों से पीयूष गोयल ने कही बड़ी बात


    नई दिल्ली। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि किसी भी उत्पाद पर ‘मेड इन इंडिया’ लिखना केवल एक कारोबारी पहचान नहीं, बल्कि पूरे देश की प्रतिष्ठा और जिम्मेदारी का प्रतिनिधित्व करना है। उन्होंने भारतीय उद्यमियों से गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की अपील करते हुए कहा कि आज दुनिया में ‘ब्रांड इंडिया’ तेजी से भरोसे और उत्कृष्टता का पर्याय बन रहा है।

    ‘मेड इन इंडिया’ का मतलब सिर्फ उत्पाद नहीं, देश की पहचान
    सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किए गए संदेश में पीयूष गोयल ने कहा कि भारतीय उद्यमियों के लिए गुणवत्ता केवल व्यावसायिक मानक नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति उनकी जिम्मेदारी भी है। जब कोई उत्पाद ‘मेड इन इंडिया’ के नाम से वैश्विक बाजार में पहुंचता है, तो वह पूरे देश की छवि को दर्शाता है।

    अंबूर की कंपनी का दिया उदाहरण
    पीयूष गोयल ने तमिलनाडु के अंबूर स्थित फ्लोरेंस शू कंपनी के संस्थापक अकील पनारुना का उदाहरण साझा किया। उन्होंने बताया कि लंदन में आयोजित एक बिजनेस प्लेनरी सेशन के दौरान अकील ने उन्हें एक रोचक अनुभव सुनाया।

    अकील के अनुसार, एक अंतरराष्ट्रीय ग्राहक ने काहिरा हवाई अड्डे पर ह्यूगो बॉस ब्रांड का एक प्रीमियम जूता खरीदा। जब उसने जूते का लेबल देखा तो उस पर ‘Made in India’ लिखा था। यह जूता अंबूर स्थित उनकी कंपनी में तैयार किया गया था।

    रोजगार और महिला सशक्तिकरण पर भी जोर

    गोयल ने कहा कि अकील पनारुना जैसे उद्यमी केवल वैश्विक ब्रांडों के लिए उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद नहीं बना रहे, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रोजगार भी सृजित कर रहे हैं। उन्होंने विनिर्माण क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने और ‘जीरो लिक्विड डिस्चार्ज’ जैसी पर्यावरण अनुकूल तकनीकों को अपनाने की भी सराहना की।

    भारत-यूके व्यापार समझौते से बढ़ेंगे अवसर

    केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत-यूके व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (CETA) के माध्यम से दोनों देशों के व्यापारिक संबंध और मजबूत होंगे। इससे भारतीय उद्योगों को वैश्विक बाजार में नए अवसर मिलेंगे और ‘ब्रांड इंडिया’ को और मजबूती मिलेगी।

    उन्होंने कहा कि अकील जैसे उद्यमी दुनिया को यह दिखा रहे हैं कि भारतीय उत्पाद गुणवत्ता, विश्वसनीयता और उत्कृष्टता के मामले में किसी से कम नहीं हैं।

    निवेश और सहयोग बढ़ाने पर हुई चर्चा

    पीयूष गोयल ने बताया कि उन्होंने एशिया हाउस और कई वैश्विक कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ गोलमेज बैठक में हिस्सा लिया। बैठक में भारत के मजबूत विनिर्माण तंत्र, निवेश के नए अवसरों और आर्थिक साझेदारी को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई।

    इसके अलावा उन्होंने यूके इंडिया बिजनेस काउंसिल (UKIBC) के सदस्यों के साथ भी संवाद किया, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों में निवेश, व्यापार विस्तार और साझा विकास की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया गया।

    गोयल ने विश्वास जताया कि भारतीय उद्यमियों की गुणवत्ता और नवाचार की बदौलत ‘मेड इन इंडिया’ आने वाले समय में वैश्विक बाजार में और मजबूत पहचान बनाएगा।

  • मेड इन इंडिया केवल पहचान नहीं बल्कि भारत की प्रतिष्ठा है पीयूष गोयल ने उद्यमियों को दिया गुणवत्ता का मंत्र

    मेड इन इंडिया केवल पहचान नहीं बल्कि भारत की प्रतिष्ठा है पीयूष गोयल ने उद्यमियों को दिया गुणवत्ता का मंत्र


    नई दिल्ली । भारत तेजी से वैश्विक विनिर्माण शक्ति के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है और इसी दिशा में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भारतीय उद्यमियों को गुणवत्ता और विश्वसनीयता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का संदेश दिया है। उनका कहना है कि किसी भी उत्पाद पर मेड इन इंडिया लिखा होना केवल निर्माण स्थल की जानकारी नहीं बल्कि पूरे देश की प्रतिष्ठा और विश्वास का प्रतीक होता है। इसलिए हर भारतीय निर्माता की जिम्मेदारी है कि वह ऐसा उत्पाद तैयार करे जिस पर दुनिया बिना किसी संकोच के भरोसा कर सके।

    पीयूष गोयल ने कहा कि भारतीय उद्योगों की सफलता केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं होनी चाहिए बल्कि उनका लक्ष्य विश्व स्तरीय गुणवत्ता हासिल करना भी होना चाहिए। जब कोई भारतीय उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहुंचता है तब वह अपने साथ देश की छवि और भारतीय उद्योग की क्षमता भी लेकर जाता है। ऐसे में गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता भारत की वैश्विक साख को प्रभावित कर सकता है।

    उन्होंने तमिलनाडु के अंबूर स्थित फ्लोरेंस शू कंपनी के संस्थापक अकील पनारुना का उदाहरण देते हुए बताया कि उनकी मुलाकात लंदन में आयोजित एक कारोबारी कार्यक्रम के दौरान हुई। अकील ने उन्हें बताया कि एक विदेशी ग्राहक ने काहिरा हवाई अड्डे पर प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय ब्रांड का जूता खरीदा और जब उसने उस पर लगा लेबल देखा तो उस पर मेड इन इंडिया लिखा हुआ था। यह जूता उनकी कंपनी में तैयार किया गया था। इस अनुभव ने यह साबित किया कि भारतीय निर्माता अब दुनिया के बड़े ब्रांडों के भरोसेमंद साझेदार बन चुके हैं।

    गोयल ने कहा कि ऐसे उद्यमी केवल कारोबार नहीं कर रहे बल्कि भारत की प्रतिष्ठा को भी नई ऊंचाई दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि फ्लोरेंस शू कंपनी ने ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा किए हैं। महिलाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार उपलब्ध कराया है और पर्यावरण संरक्षण के लिए आधुनिक तथा टिकाऊ तकनीकों को भी अपनाया है। इस तरह के प्रयास भारत के औद्योगिक विकास को नई दिशा देने के साथ सामाजिक और पर्यावरणीय जिम्मेदारियों को भी मजबूत करते हैं।

    उन्होंने कहा कि भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते के लागू होने के बाद दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश के नए अवसर खुलेंगे। इससे भारतीय उत्पादों की वैश्विक बाजार तक पहुंच और मजबूत होगी। ऐसे समय में भारतीय कंपनियों के लिए गुणवत्ता नवाचार और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को लगातार बेहतर बनाना बेहद जरूरी है ताकि वे अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी अलग पहचान कायम रख सकें।

    केंद्रीय मंत्री ने यह भी बताया कि उन्होंने लंदन में कई वैश्विक कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा की। इन बैठकों में भारत की मजबूत विनिर्माण क्षमता निवेश के अवसर और भविष्य की साझेदारियों पर विस्तार से विचार किया गया। उनका मानना है कि भारत आज दुनिया के सबसे भरोसेमंद निवेश और विनिर्माण केंद्रों में तेजी से उभर रहा है।

    उन्होंने सभी भारतीय उद्यमियों का आह्वान किया कि वे हर उत्पाद को उत्कृष्ट गुणवत्ता के साथ तैयार करें ताकि मेड इन इंडिया पूरी दुनिया में विश्वास उत्कृष्टता और गर्व का पर्याय बन सके। उनका विश्वास है कि यदि उद्योग जगत इसी सोच के साथ आगे बढ़ेगा तो ब्रांड इंडिया आने वाले वर्षों में वैश्विक बाजार में और अधिक मजबूत स्थान हासिल करेगा।

  • वैश्विक चुनौतियों के बीच भारतीय ऑटो सेक्टर चमका, मई में 4.4 लाख वाहन बिके..

    वैश्विक चुनौतियों के बीच भारतीय ऑटो सेक्टर चमका, मई में 4.4 लाख वाहन बिके..

    नई दिल्ली । देश के ऑटोमोबाइल क्षेत्र ने एक बार फिर मजबूत प्रदर्शन करते हुए भारतीय अर्थव्यवस्था की गति को नई मजबूती प्रदान की है। मई 2026 में यात्री वाहन बिक्री में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज होने के बाद केंद्र सरकार ने इसे देश की बढ़ती आर्थिक क्षमता, मजबूत उपभोक्ता विश्वास और विनिर्माण क्षेत्र की सफलता का संकेत बताया है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत की विकास यात्रा निरंतर गति पकड़ रही है और विभिन्न क्षेत्रों में इसके सकारात्मक परिणाम दिखाई दे रहे हैं।

    मंत्री ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा किए गए अपने संदेश में बताया कि मई 2026 के दौरान देश में लगभग 4.4 लाख यात्री वाहनों की बिक्री हुई। यह आंकड़ा पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में करीब 23 प्रतिशत अधिक है। उन्होंने कहा कि यह वृद्धि ऐसे समय में दर्ज की गई है जब वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितताओं और बाजार संबंधी चुनौतियों का माहौल बना हुआ है।

    पीयूष गोयल के अनुसार इस उपलब्धि में देश की प्रमुख वाहन निर्माता कंपनियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। विशेष रूप से मारुति सुजुकी इंडिया, टाटा मोटर्स और महिंद्रा एंड महिंद्रा ने बाजार में मजबूत प्रदर्शन करते हुए बिक्री को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है। इन कंपनियों की बेहतर बिक्री ने पूरे ऑटोमोबाइल उद्योग को सकारात्मक दिशा दी है।

    मंत्री ने कहा कि भारतीय उपभोक्ताओं का घरेलू स्तर पर निर्मित वाहनों पर बढ़ता भरोसा देश के विनिर्माण क्षेत्र की मजबूती को दर्शाता है। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ अभियान का सकारात्मक परिणाम बताते हुए कहा कि इस पहल ने देश में औद्योगिक उत्पादन, निवेश और रोजगार के अवसरों को बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। साथ ही भारतीय कंपनियों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए भी अधिक सक्षम बनाया है।

    उन्होंने कहा कि ऑटोमोबाइल क्षेत्र में दिखाई दे रही यह प्रगति केवल बिक्री के आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की आर्थिक संरचना में हो रहे व्यापक बदलावों की भी झलक प्रस्तुत करती है। तकनीकी नवाचार, उत्पादन क्षमता में विस्तार और उपभोक्ताओं की बढ़ती क्रय शक्ति जैसे कारकों ने इस क्षेत्र को नई ऊर्जा प्रदान की है।

    इस बीच देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया ने भी मई महीने में नया रिकॉर्ड कायम किया है। कंपनी ने घरेलू बाजार में डीलरों को 1,90,337 यात्री वाहन भेजे, जो उसके इतिहास की अब तक की सबसे बड़ी मासिक बिक्री मानी जा रही है। उद्योग के अनुमानों के अनुसार यह आंकड़ा पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 40 प्रतिशत अधिक है। इसके साथ ही कंपनी ने अप्रैल में स्थापित अपने पिछले रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया।

    विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बढ़ती वाहन बिक्री से जुड़े आंकड़े भारतीय अर्थव्यवस्था में उपभोक्ता मांग की मजबूती का संकेत देते हैं। यदि आने वाले महीनों में यह रुझान जारी रहता है तो ऑटोमोबाइल क्षेत्र देश के आर्थिक विकास में और अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। मजबूत मांग, बढ़ते निवेश और विनिर्माण क्षेत्र के विस्तार के बीच भारत का ऑटो उद्योग आने वाले वर्षों में वैश्विक बाजार में अपनी स्थिति और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है।