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  • भारत-अमेरिका रिश्तों में नई ऊर्जा की बात, मार्को रूबियो बोले-भारत को जितना तेल चाहिए, देने को तैयार अमेरिका

    भारत-अमेरिका रिश्तों में नई ऊर्जा की बात, मार्को रूबियो बोले-भारत को जितना तेल चाहिए, देने को तैयार अमेरिका


    नई दिल्ली। वैश्विक कूटनीति और ऊर्जा सहयोग के बीच भारत और अमेरिका के रिश्तों को लेकर एक अहम बयान सामने आया है, जिसने अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक हलकों में ध्यान खींचा है। क्वाड देशों की आगामी बैठक से पहले अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने भारत को लेकर सकारात्मक और सहयोगात्मक रुख अपनाते हुए कहा है कि अमेरिका भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

    मार्को रूबियो ने स्पष्ट किया कि भारत एक महत्वपूर्ण और भरोसेमंद साझेदार है और दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ऊर्जा क्षेत्र में अमेरिका भारत की बढ़ती मांग को पूरा करने की क्षमता रखता है और जितनी मात्रा में भारत तेल या ऊर्जा संसाधनों की आवश्यकता महसूस करेगा, उसे उपलब्ध कराने की दिशा में अमेरिका तैयार है। उनके इस बयान को दोनों देशों के बीच रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को और मजबूती देने वाले संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

    रूबियो ने यह टिप्पणी अपनी आगामी विदेश यात्रा से पहले मियामी में पत्रकारों से बातचीत के दौरान की। उन्होंने कहा कि भारत के साथ सहयोग कई क्षेत्रों में लगातार आगे बढ़ रहा है और दोनों देश वैश्विक चुनौतियों पर मिलकर काम कर रहे हैं। उन्होंने भारत को एक ऐसा साझेदार बताया जिसके साथ अमेरिका लंबे समय से विश्वास और सहयोग के आधार पर संबंध बनाए हुए है।

    ऊर्जा आपूर्ति को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि वैश्विक परिस्थितियों और ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच अमेरिका अपनी उत्पादन और निर्यात क्षमता को लगातार बढ़ा रहा है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ऊर्जा सुरक्षा आज दुनिया के लिए एक महत्वपूर्ण मुद्दा है और अमेरिका इस दिशा में सहयोगी देशों, खासकर भारत के साथ मिलकर काम करना चाहता है।

    नई दिल्ली। आगामी क्वाड बैठक को लेकर भी उन्होंने उत्साह व्यक्त किया। यह बैठक 26 मई को आयोजित होने जा रही है, जिसमें भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्री शामिल होंगे। भारत इस बैठक की अध्यक्षता करेगा और भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर इस महत्वपूर्ण मंच का नेतृत्व करेंगे। माना जा रहा है कि इस बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा, ऊर्जा सहयोग और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होगी।

    रूबियो ने यह भी बताया कि उनका भारत दौरा कई मायनों में महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे उन्हें चार प्रमुख देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और करीब से समझने और आगे बढ़ाने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि क्वाड सहयोग वैश्विक स्थिरता और आर्थिक विकास के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बन चुका है और इसमें भारत की भूमिका अत्यंत अहम है।

    नई दिल्ली। अमेरिकी विदेश मंत्री का यह दौरा 23 मई से 26 मई तक प्रस्तावित है, जिसमें वे नई दिल्ली के अलावा कोलकाता, आगरा और जयपुर जैसे शहरों का भी दौरा करेंगे। कोलकाता यात्रा विशेष रूप से इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि कई वर्षों बाद कोई अमेरिकी विदेश मंत्री वहां पहुंचने वाला है, जिससे दोनों देशों के ऐतिहासिक और कूटनीतिक संबंधों को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।

    कुल मिलाकर मार्को रूबियो का यह बयान और आगामी भारत यात्रा ऐसे समय में सामने आए हैं जब वैश्विक ऊर्जा बाजार और भू-राजनीतिक परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं। भारत और अमेरिका के बीच बढ़ता सहयोग न केवल ऊर्जा क्षेत्र में बल्कि व्यापक रणनीतिक साझेदारी के लिहाज से भी महत्वपूर्ण संकेत दे रहा है।

  • 44 अमेरिकी सांसदों ने विदेश मंत्री को लिखी चिट्ठी, पाकिस्तान में लोकतंत्र पर चिंता जताई

    44 अमेरिकी सांसदों ने विदेश मंत्री को लिखी चिट्ठी, पाकिस्तान में लोकतंत्र पर चिंता जताई

    नई दिल्ली। अमेरिकी संसद के 44 सांसदों ने विदेश मंत्री मार्को रुबियो को पत्र लिखकर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ आसिम मुनीर पर तुरंत प्रतिबंध लगाने का आग्रह किया है। सांसदों का आरोप है कि पाकिस्तान में सेना सरकार चला रही है और आम नागरिकों के अधिकारों का बड़े पैमाने पर हनन हो रहा है। विदेश में रहने वाले पाकिस्तानी मूल के अमेरिकी नागरिकों को भी सरकार के खिलाफ आवाज उठाने पर धमकियां मिल रही हैं। पत्र का नेतृत्व डेमोक्रेटिक सांसद प्रमिला जयपाल और ग्रेग कासर ने किया। उन्होंने लिखा कि पाकिस्तान में तानाशाही बढ़ रही है। पत्रकारों को धमकाया जा रहा है, अगवा किया जा रहा है या देश छोड़ने पर मजबूर किया जा रहा है।

    प्रमुख घटनाएँ

    वर्जीनिया के जर्नलिस्ट अहमद नूरानी के दोनों भाइयों को पाकिस्तान में एक महीने से अधिक समय तक अगवा रखा गया। मशहूर संगीतकार सलमान अहमद के जीजा का अपहरण हुआ, जिन्हें अमेरिकी हस्तक्षेप के बाद छोड़ा गया। विपक्षी नेताओं को बिना आरोप जेल में डाला जा रहा है। आम नागरिकों को सिर्फ सोशल मीडिया पोस्ट पर गिरफ्तार किया जा रहा है। महिलाओं, धार्मिक अल्पसंख्यकों और बलूचिस्तान के लोगों पर सबसे ज्यादा अत्याचार हो रहे हैं।

    2024 के चुनाव और धांधली

    सांसदों ने 2024 के आम चुनावों में भारी धांधली का जिक्र किया। स्वतंत्र संस्था की ‘पट्टन रिपोर्ट’ और अमेरिकी विदेश विभाग ने गड़बड़ी की पुष्टि की थी। पत्र में कहा गया कि चुनावों के जरिए सिर्फ एक कठपुतली सरकार बनाई गई है, जिसे वास्तव में सेना चलाती है। सेना के दबाव में पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला सुनाया कि आम नागरिकों के केस भी सैन्य अदालतों में चल सकते हैं।

    संभावित अमेरिकी प्रतिबंध

    वीजा बैन: अमेरिका में यात्रा पर पूर्ण रोक। संपत्ति जब्ती: अमेरिका या अमेरिकी प्रभाव वाले देशों में बैंक खाते और लेन-देन रोक ग्लोबल मैग्निट्सकी एक्ट के तहत। अमेरिकी–पाकिस्तानी उच्चस्तरीय बैठकें  आसिम मुनीर 2025 में दो बार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से मिले। सितंबर में शहबाज और मुनीर ने ट्रम्प से लगभग 1 घंटा 20 मिनट की बैठक की।

    इमरान खान और राजनीतिक कैदी

    अमेरिकी सांसदों ने पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान और अन्य राजनीतिक कैदियों की रिहाई की मांग की। इमरान के परिवार को 27 दिन तक उनसे मिलने की अनुमति नहीं मिली; 2 दिसंबर को मिलने की इजाजत मिली। 27वां संवैधानिक संशोधन और सेना का प्रभाव 12 नवंबर को पास हुए 27वें संशोधन से सेना की ताकत बढ़ी और कोर्ट के अधिकार कम हुए।  फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को CDF बनाए जाने की योजना थी लेकिन अभी तक पद खाली है।पीएम शहबाज शरीफ ने नोटिफिकेशन पर साइन नहीं किया; इस बीच वे बहरीन और लंदन यात्रा पर गए।