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  • मरीब की ओर बढ़े बनी हशीश के हथियारबंद लड़ाके, हूतियों की ताकत बढ़ने से सऊदी की बढ़ी चिंता

    मरीब की ओर बढ़े बनी हशीश के हथियारबंद लड़ाके, हूतियों की ताकत बढ़ने से सऊदी की बढ़ी चिंता


    नई दिल्ली। यमन में कबीलाई ताकत और आधुनिक हथियारों का गठजोड़ एक बार फिर क्षेत्रीय तनाव बढ़ाने वाला है। राजधानी सना के पूर्वी पहाड़ी इलाकों से बनी हशीश कबीले के हथियारबंद लड़ाकों की बड़ी लामबंदी मरीब की दिशा में हुई है। लड़ाकों के हाथों में AK-47, रॉकेट प्रोपेल्ड ग्रेनेड और अन्य आधुनिक हथियार दिखाई दे रहे हैं। इस काफिले में युवा और अधेड़ लड़ाकों के साथ 8-10 साल के बच्चे भी नजर आ रहे हैं। हूतियों के समर्थन में हुई यह लामबंदी सऊदी अरब के लिए इसलिए अहम है, क्योंकि मरीब लंबे समय से हूती विरोधी ताकतों का प्रमुख गढ़ रहा है।

    सदियों पुरानी कबीलाई ताकत का नया चेहरा

    यमन के पहाड़ी इलाकों से निकल रहे इस काफिले में परंपरागत पोशाक और जाम्बिया पहने लड़ाके भी दिखाई दे रहे हैं। फर्क इतना है कि पुराने दौर के घोड़ों और तलवारों की जगह अब पिकअप ट्रक, मशीनगन और रॉकेट लॉन्चर हैं।

    बनी हशीश कबीले का क्षेत्र सना के पूर्व में पहाड़ों में फैला है। राजधानी के बेहद करीब होने के कारण इसका रणनीतिक महत्व काफी बड़ा है। यहां प्रभाव रखने वाली ताकतें सना के पूर्वी रास्तों और आसपास के इलाकों पर असर डाल सकती हैं।

    यमन में जनजातियां केवल सामाजिक इकाइयां नहीं रही हैं। दशकों से उनका राजनीतिक और सैन्य प्रभाव भी रहा है। बनी हशीश इसी कबीलाई शक्ति का उदाहरण है।

    कभी हूतियों से हुई थी खूनी लड़ाई

    हूतियों और बनी हशीश के रिश्ते हमेशा से एक जैसे नहीं रहे। 2000 के दशक में हुसैन बद्र अल-दीन अल-हूती के नेतृत्व में आंदोलन उभरने और 2004 के बाद हूती विद्रोह शुरू होने के दौरान उत्तरी यमन की कई जनजातियां बदलते सत्ता समीकरणों में उलझी थीं।

    2008-09 के आसपास बनी हशीश के कुछ हिस्सों और हूती लड़ाकों के बीच गंभीर संघर्ष हुआ था। उस समय दोनों पक्ष एक-दूसरे के विरोध में खड़े थे।

    हालात 2014 में बदले, जब हूतियों ने सना पर कब्जा कर लिया। इसके बाद राजधानी और उसके आसपास के इलाकों में उनका सैन्य प्रभाव तेजी से बढ़ा। कई स्थानीय जनजातियां या तो हूतियों के साथ आ गईं या उनके नियंत्रण में चली गईं। बनी हशीश भी इसी बदलाव का हिस्सा बना।

    आज कबीले के कई प्रभावशाली लोग और लड़ाके हूती नेटवर्क से जुड़े बताए जाते हैं। इसलिए बनी हशीश की लामबंदी हूती नेतृत्व के लिए स्थानीय समर्थन के साथ-साथ सैन्य क्षमता बढ़ाने का जरिया भी मानी जाती है।

    मरीब ही क्यों बना निशाना?

    मरीब सना से करीब 175 किलोमीटर पूर्व में उत्तर-मध्य यमन में स्थित है। इसके पश्चिम में सना, उत्तर में अल-जौफ, दक्षिण में अल-बैदा और शबवा तथा पूर्व में हद्रमौत है। भौगोलिक स्थिति के कारण यह राजधानी और यमन के पूर्वी रेगिस्तानी इलाकों के बीच महत्वपूर्ण संपर्क क्षेत्र है।

    मरीब की अहमियत केवल उसके स्थान तक सीमित नहीं है। यह यमन के प्रमुख तेल और गैस क्षेत्रों में शामिल है। 1980 के दशक में यहां बड़े व्यावसायिक तेल भंडार मिले थे। तेल और गैस के अलावा यहां देश का एक महत्वपूर्ण बिजली संयंत्र भी है। मरीब, शबवा और हद्रमौत को मिलाकर यमन का प्रमुख तेल-गैस बेल्ट बनता है।

    यही वजह है कि मरीब पर नियंत्रण की लड़ाई में सत्ता के साथ ऊर्जा संसाधनों का सवाल भी जुड़ा हुआ है।

    हूतियों के लिए मरीब पर कब्जा क्यों अहम

    मरीब लंबे समय से हूती विरोधी यमनी सरकार और स्थानीय कबीलों का मजबूत गढ़ रहा है। ऐसे में यहां अपनी पकड़ बनाना हूतियों के लिए कई मोर्चों पर फायदा दे सकता है।

    मरीब पर दबाव बढ़ने से सना के पूर्व में हूतियों की स्थिति मजबूत होगी। साथ ही उन्हें यमन के ऊर्जा संसाधनों के करीब पहुंच और पूर्वी इलाकों की ओर रणनीतिक रास्तों पर प्रभाव हासिल करने का मौका मिल सकता है।

    2021 में भी हूती सेना ने मरीब पर कब्जे के लिए बड़ा अभियान चलाया था। हालांकि स्थानीय कबीलों और सरकार समर्थक बलों ने उनका मुकाबला किया और हूतियों को सफलता नहीं मिली।

    अब 2026 में फिर बदलते क्षेत्रीय समीकरणों के बीच मरीब महत्वपूर्ण हो गया है। पश्चिमी यमन में हूतियों ने बड़े इलाकों और रणनीतिक बंदरगाहों पर बढ़त बनाई है, जबकि दूसरी ओर सऊदी समर्थित यमनी बल उनके खिलाफ दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

    सऊदी अरब की चिंता सिर्फ मरीब तक सीमित नहीं

    बनी हशीश की यह लामबंदी सीधे सऊदी अरब की सुरक्षा चिंता से भी जुड़ती है। मरीब फिलहाल सऊदी समर्थित यमनी सरकारी सेना के नियंत्रण में है और यह इलाका सना से सऊदी सीमा की ओर जाने वाले रणनीतिक क्षेत्र का हिस्सा है।

    यदि हूती मरीब पर कब्जा करने में सफल होते हैं तो सना के पूर्व में उनकी पकड़ मजबूत हो सकती है। इसके साथ ही तेल-गैस संसाधनों और रणनीतिक मार्गों तक उनकी पहुंच बढ़ने की आशंका है।

    सऊदी अरब के लिए सबसे बड़ी चिंता यह होगी कि मरीब में हूतियों की स्थिति मजबूत होने पर उन्हें सऊदी सीमा की दिशा में रणनीतिक दबाव बढ़ाने के लिए बेहतर भौगोलिक स्थिति मिल सकती है। इससे मिसाइल और ड्रोन हमलों के लिए उनका ऑपरेशनल स्पेस और संसाधन भी बढ़ सकता है।

    यानी बनी हशीश की पहाड़ों से हुई यह लामबंदी सिर्फ एक कबीले के लड़ाकों की आवाजाही नहीं है। इसके पीछे मरीब की सत्ता, यमन के तेल-गैस संसाधन और सऊदी अरब की सुरक्षा—तीनों के समीकरण जुड़े हुए हैं।

  • Houthi Attack: मारिब पर मिसाइल हमले के बाद यमनी सेना का पलटवार, सात प्रांतों में सैन्य उपकरण नष्ट करने का दावा

    Houthi Attack: मारिब पर मिसाइल हमले के बाद यमनी सेना का पलटवार, सात प्रांतों में सैन्य उपकरण नष्ट करने का दावा


    नई दिल्ली । 
    यमन में सरकारी सेना और हूती विद्रोहियों के बीच संघर्ष एक बार फिर तेज होता दिखाई दे रहा है। यमनी सरकारी सेना ने दावा किया है कि उसने पिछले 24 घंटे के दौरान हूती विद्रोहियों के कब्जे वाले इलाकों में 181 सैन्य ऑपरेशन किए। इन कार्रवाइयों में ड्रोन, तोप और रॉकेट लॉन्चर का इस्तेमाल किए जाने की जानकारी दी गई है। लगातार बढ़ रही सैन्य गतिविधियों के बीच यमन में सुरक्षा स्थिति को लेकर चिंता बढ़ गई है।

    यमनी सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल माजिद अल-नुजैली के अनुसार, सैन्य अभियान के दौरान हूती ठिकानों, हथियारों के भंडार, सैन्य वाहनों और उन सुविधाओं को निशाना बनाया गया, जिनका इस्तेमाल हमलों के लिए किया जा रहा था। सेना ने दावा किया कि इन कार्रवाइयों में हूती समूह के कई सदस्य मारे गए या घायल हुए हैं।

    सरकारी सेना के मुताबिक सात प्रांतों में हूती विद्रोहियों के सैन्य उपकरणों को भी नष्ट किया गया। हालांकि, सेना ने कार्रवाई में मारे गए या घायल हुए लोगों की सटीक संख्या सार्वजनिक नहीं की है। ऐसे में अभियान के मानवीय प्रभाव को लेकर फिलहाल विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

    यमनी सेना ने अपनी कार्रवाई को हाल के हूती हमलों की प्रतिक्रिया बताया है। सेना के अनुसार सरकारी सैनिकों के साथ-साथ नागरिक ढांचे, आर्थिक प्रतिष्ठानों और बंदरगाहों को भी हाल के दिनों में निशाना बनाया गया है। इन हमलों के कारण सरकारी नियंत्रण वाले क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था पर दबाव बढ़ा है।

    इस बीच हूती विद्रोहियों ने शनिवार शाम तेल संपदा वाले मारिब प्रांत की राजधानी मारिब शहर को निशाना बनाने का दावा किया। सरकार समर्थक मीडिया के अनुसार शहर के रिहायशी इलाकों की दिशा में तीन बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं। शुरुआती जानकारी में किसी व्यक्ति के हताहत होने या बड़े नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है।

    स्थानीय लोगों के मुताबिक मिसाइल हमलों के दौरान शहर के अलग-अलग हिस्सों में तेज धमाकों की आवाज सुनी गई। मारिब लंबे समय से यमन के संघर्ष में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र रहा है। यहां ऊर्जा संसाधनों और भौगोलिक स्थिति के कारण सरकारी सेना और हूती विद्रोहियों के बीच संघर्ष का असर विशेष रूप से देखा जाता रहा है।

    यमन के अलावा हूती गतिविधियों का असर पड़ोसी सऊदी अरब तक भी पहुंचा है। हाल के हफ्तों में हूती समूह ने यमन के सरकारी नियंत्रण वाले क्षेत्रों के साथ-साथ सऊदी अरब में मौजूद ठिकानों पर भी मिसाइल और ड्रोन हमले बढ़ाने का दावा किया है। सऊदी अरब यमनी सरकार का प्रमुख समर्थक है और लंबे समय से इस संघर्ष में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

    हूती समूह ने 20 जुलाई को सऊदी जहाजों के लिए समुद्री प्रतिबंध लगाने की घोषणा की थी। इसके बाद संगठन की ओर से लाल सागर में सऊदी तेल टैंकरों और सऊदी अरब के भीतर ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने के दावे भी सामने आए। इन घटनाओं से क्षेत्रीय सुरक्षा और समुद्री मार्गों को लेकर भी चिंता बढ़ी है।

    यमन में मौजूदा संघर्ष की जड़ें 2014 में हुए हूती कब्जे से जुड़ी हैं। विद्रोहियों ने उस दौरान उत्तरी यमन के बड़े हिस्से पर नियंत्रण स्थापित कर लिया था, जिसमें राजधानी सना भी शामिल थी। इसके बाद 2015 में यमनी सरकार के समर्थन में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने सैन्य हस्तक्षेप किया।

    करीब एक दशक से जारी संघर्ष ने यमन को गंभीर मानवीय और आर्थिक संकट में धकेला है। हालिया सैन्य कार्रवाइयों और मिसाइल हमलों के बीच तनाव फिर बढ़ने से नागरिकों की सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और भविष्य की शांति प्रक्रिया को लेकर नई चुनौतियां पैदा होने की आशंका है।