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  • इजराइल अमेरिका और ईरान तनाव पर पीएम Narendra Modi का बड़ा बयान, बोले हालात बेहद चिंताजनक

    इजराइल अमेरिका और ईरान तनाव पर पीएम Narendra Modi का बड़ा बयान, बोले हालात बेहद चिंताजनक


    नई दिल्ली । मिडिल ईस्ट में इजराइल अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गंभीर चिंता है। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के साथ द्विपक्षीय वार्ता के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि पश्चिम एशिया के हालात बेहद चिंताजनक हैं और मौजूदा संकट का समाधान केवल बातचीत और कूटनीति से ही संभव है।

    प्रधानमंत्री ने स्पष्ट कहा कि भारत शांति और स्थिरता का पक्षधर है और विश्व में बढ़ते तनाव को लेकर गंभीर रूप से चिंतित है। उन्होंने कहा जब दो लोकतंत्र एक साथ खड़े होते हैं तो शांति की आवाज और भी मजबूत हो जाती है। वर्तमान संकट का हल संवाद और कूटनीतिक प्रयासों से ही निकलेगा इसके अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है।

    पीएम मोदी ने दोहराया कि भारत सभी देशों के साथ मिलकर शांति बहाली के प्रयासों में सहयोग करेगा। उन्होंने कहा कि भारत का प्राथमिक उद्देश्य क्षेत्र में स्थिरता कायम रखना और वहां रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

    नेतन्याहू से फोन पर बातचीत

    इससे पहले सोमवार देर रात प्रधानमंत्री मोदी ने इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर बात की। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए उन्होंने बताया कि दोनों नेताओं के बीच मौजूदा क्षेत्रीय हालात पर चर्चा हुई और उन्होंने दुश्मनी को जल्द समाप्त करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

    भारतीयों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता

    केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने भी कहा कि केंद्र सरकार खाड़ी देशों में फंसे भारतीय नागरिकों को सुरक्षित वापस लाने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने बताया कि विदेश मंत्रालय और भारतीय मिशन लगातार संपर्क में हैं और हालात पर नजर बनाए हुए हैं।

    जोशी ने चिंतित परिवारों को आश्वस्त करते हुए कहा कि सरकार पहले भी संकटग्रस्त देशों से भारतीयों को सुरक्षित निकाल चुकी है जैसे यूक्रेन संकट के दौरान किया गया था। उन्होंने कहा जहां भी भारतीय नागरिक हैं उनकी सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। घबराने की जरूरत नहीं है सरकार हर संभव कदम उठा रही है।

    मिडिल ईस्ट में जारी इस तनावपूर्ण स्थिति के बीच भारत का रुख स्पष्ट है संवाद कूटनीति और शांति का मार्ग। अब वैश्विक समुदाय की नजर इस बात पर टिकी है कि क्षेत्र में हालात कब सामान्य होते हैं और तनाव किस दिशा में आगे बढ़ता है।

  • कनाडा के PM मार्क कार्नी आएंगे भारत दौरे पर…..इन मुद्दों पर होगी चर्चा, द्विपक्षीय रिश्ते होंगे मजबूत

    कनाडा के PM मार्क कार्नी आएंगे भारत दौरे पर…..इन मुद्दों पर होगी चर्चा, द्विपक्षीय रिश्ते होंगे मजबूत


    नई दिल्ली।
    कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी (Canadian Prime Minister Mark Carney) 26 फरवरी 2026 को भारत का दौरा (India Visit) करने जा रहे हैं। कनाडाई सरकार (Canadian Government) की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यह यात्रा भारत, ऑस्ट्रेलिया और जापान के तीन देशों की एक व्यापक इंडो-पैसिफिक यात्रा का हिस्सा है, जो 26 फरवरी से 7 मार्च तक चलेगी। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य कनाडा-भारत द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना, व्यापार को बढ़ावा देना तथा रक्षा, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), प्रतिभा, संस्कृति और रक्षा जैसे क्षेत्रों में नई महत्वाकांक्षी साझेदारियां स्थापित करना है। कार्नी पहले मुंबई पहुंचेंगे, जहां वे प्रमुख कारोबारियों से मुलाकात करेंगे ताकि कनाडा में निवेश के अवसरों की खोज की जा सके और दोनों देशों के बीच व्यावसायिक सहयोग को बढ़ावा मिले। इसके बाद वे नई दिल्ली जाएंगे, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनकी मुलाकात होगी। दोनों नेता द्विपक्षीय संबंधों को प्रगाढ़ बनाने पर विशेष ध्यान केंद्रित करेंगे।

    यह दौरा कनाडा-भारत संबंधों में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है, क्योंकि 2023 में खालिस्तानी अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या को लेकर तत्कालीन कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो द्वारा भारत पर लगाए गए आरोपों के बाद संबंध बेहद तनावपूर्ण हो गए थे। भारत ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें “बेतुका” करार दिया था। इस विवाद के चलते अक्टूबर 2024 में भारत ने अपने उच्चायुक्त सहित कई राजनयिकों को वापस बुला लिया था और कनाडा ने भी समान संख्या में भारतीय राजनयिकों को निष्कासित किया था। दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध न्यूनतम स्तर पर पहुंच गए थे। हालांकि, अप्रैल 2025 में हुए कनाडाई संसदीय चुनाव में लिबरल पार्टी के नेता मार्क कार्नी की जीत ने संबंध सुधार की प्रक्रिया शुरू की। कार्नी ने मार्च 2025 में प्रधानमंत्री पद संभाला था और उसके बाद दोनों देशों ने एक-दूसरे की राजधानियों में उच्चायुक्तों की नियुक्ति की, जिससे तनाव कम हुआ और बातचीत का रास्ता खुला।


    किन मुद्दों पर होगी बातचीत

    कार्नी की यह यात्रा न केवल संबंधों को पटरी पर लाने का प्रयास है, बल्कि वैश्विक व्यापारिक चुनौतियों के बीच कनाडा को अमेरिका पर निर्भरता कम करने और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में नए साझेदारों के साथ मजबूत आर्थिक संबंध बनाने की रणनीति का हिस्सा भी है। दोनों नेताओं के बीच होने वाली चर्चाओं में व्यापार समझौते, रक्षा समझौते, एआई और प्रौद्योगिकी सहयोग, ऊर्जा क्षेत्र (जैसे क्रिटिकल मिनरल्स और क्लीन एनर्जी) तथा रक्षा साझेदारी पर फोकस रहने की उम्मीद है। कार्नी प्रमुख भारतीय उद्योगपतियों से भी मिलेंगे, जिससे निवेश और संयुक्त उद्यमों के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।

    यह दौरा दोनों देशों के लिए ऐतिहासिक महत्व रखता है, क्योंकि यह निज्जर विवाद के बाद किसी कनाडाई प्रधानमंत्री की पहली भारत यात्रा है। इससे उम्मीद है कि पुराने मतभेदों को पीछे छोड़कर दोनों राष्ट्र भविष्योन्मुखी सहयोग पर ध्यान केंद्रित करेंगे।

  • ट्रम्प का कनाडा पर तीखा हमला: बोले-चीन एक साल में निगल जाएगा, गोल्डन डोम विरोध से बिगड़े रिश्ते

    ट्रम्प का कनाडा पर तीखा हमला: बोले-चीन एक साल में निगल जाएगा, गोल्डन डोम विरोध से बिगड़े रिश्ते


    नई दिल्ली।ट्रम्प का बयान कनाडा अमेरिका की बजाय चीन की ओर झुक रहा है। ट्रम्प ने कहा कि यह उत्तर अमेरिका की सामूहिक सुरक्षा के लिए खतरा है।

    व्यापार विवाद

    कनाडा-चीन व्यापार समझौते में चीनी ईवी पर टैरिफ 100% से घटाकर 6.1% किया गया।

    चीन ने कनाडा के कृषि उत्पादों पर जवाबी शुल्क कम करने पर सहमति दी।

    अमेरिका इसे अपने हितों के खिलाफ मान रहा है।

    गोल्डन डोम प्रोजेक्ट पर मतभेद

    अमेरिका का मिसाइल डिफेंस प्रोजेक्ट 175 अरब डॉलर इजराइल के आयरन डोम पर आधारित है।

    ट्रम्प इसे अमेरिका की सुरक्षा के लिए अहम मानते हैं, जबकि कार्नी इसे क्षेत्रीय असंतुलन बढ़ाने वाला कदम बताते हैं।

    दावोस फोरम में तल्खी

    वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में कार्नी ने बड़ी शक्तियों के दबदबे की आलोचना की।

    ट्रम्प ने इसे अमेरिका के प्रति कृतज्ञता की कमी बताया।

    पूर्व विवाद और संभावित भविष्य

    ग्रीनलैंड और नाटो मुद्दों पर दोनों नेताओं के पहले भी मतभेद रहे।

    विशेषज्ञों के अनुसार, चीन, रक्षा और वैश्विक शक्ति संतुलन के मुद्दों से अमेरिका-कनाडा संबंध और जटिल हो सकते हैं।