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  • जुकरबर्ग और काइली जेनर के गुप्त ठिकानों की चर्चा, 12 गुना बढ़ी बंकरों की मांग, आखिर किस खतरे से डर रहे अमीर?

    जुकरबर्ग और काइली जेनर के गुप्त ठिकानों की चर्चा, 12 गुना बढ़ी बंकरों की मांग, आखिर किस खतरे से डर रहे अमीर?


    नई दिल्ली। दुनिया के सबसे अमीर और प्रभावशाली लोग अब केवल आलीशान महलों और महंगी संपत्तियों तक सीमित नहीं रहना चाहते। संभावित युद्ध परमाणु हमले प्राकृतिक आपदाओं और वैश्विक अस्थिरता जैसी आशंकाओं के बीच कई अरबपति जमीन के नीचे सुरक्षित ठिकाने तैयार करवा रहे हैं। इन ठिकानों को आधुनिक बंकर का नाम दिया जा रहा है लेकिन इनकी बनावट किसी साधारण भूमिगत शरणस्थल जैसी नहीं है। इनमें आराम और विलासिता की ऐसी सुविधाएं जुटाई जा रही हैं जो किसी पांच सितारा होटल या आलीशान रिसॉर्ट को भी टक्कर दे सकती हैं। इस बढ़ते चलन ने एक नया सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या दुनिया के अमीरों को किसी बड़ी तबाही का अंदेशा है या वे केवल भविष्य की अनिश्चितताओं से निपटने की तैयारी कर रहे हैं।

    इस चर्चा में फेसबुक की मूल कंपनी मेटा के प्रमुख मार्क जुकरबर्ग का नाम भी सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक हवाई में उनके विशाल परिसर के भीतर करीब 5000 वर्ग फीट का भूमिगत बंकर बनाए जाने की चर्चा है। इसे संभावित आपात स्थिति में सुरक्षित ठिकाने के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि इस तरह की परियोजनाओं से जुड़ी सभी जानकारियों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है। इसी तरह रियलिटी टीवी स्टार और कारोबारी काइली जेनर के लॉस एंजिल्स स्थित घर में भी भूमिगत सुरक्षित ठिकाना तैयार कराने की खबरें सामने आई हैं।

    इन बंकरों की खास बात यह है कि इन्हें केवल जान बचाने के लिए बनाए जाने वाले बंद कमरों की तरह नहीं देखा जा रहा है। आधुनिक तकनीक और आलीशान सुविधाओं के साथ इन्हें लंबे समय तक रहने लायक बनाया जा रहा है। इनमें स्विमिंग पूल जिम आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं और आरामदायक रहने की व्यवस्था जैसी चीजें शामिल हो सकती हैं। यानी किसी बड़ी आपदा या संकट की स्थिति में भी इनके मालिकों को रोजमर्रा की सुविधाओं और आराम से समझौता न करना पड़े।

    इस कारोबार में बढ़ती दिलचस्पी का अंदाजा एक वास्तुकला फर्म के दावे से लगाया जा सकता है। फर्म के मुताबिक पिछले कुछ वर्षों में भूमिगत बंकरों को लेकर पूछताछ में करीब 12 गुना वृद्धि हुई है। यह आंकड़ा बताता है कि सुरक्षित भूमिगत ठिकानों की मांग अब केवल कुछ चुनिंदा लोगों तक सीमित नहीं रह गई है। आर्थिक रूप से सक्षम लोग भविष्य के संभावित खतरों को ध्यान में रखते हुए ऐसी परियोजनाओं में रुचि दिखा रहे हैं।

    आखिर इन बंकरों की मांग इतनी तेजी से क्यों बढ़ रही है। इसके पीछे कई संभावित कारण माने जा रहे हैं। दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में बढ़ते भू राजनीतिक तनाव युद्ध की आशंकाएं परमाणु हथियारों का खतरा और जलवायु परिवर्तन से जुड़ी प्राकृतिक आपदाएं लोगों की चिंता बढ़ा रही हैं। इसके अलावा महामारी और तकनीकी व्यवस्था में बड़े व्यवधान जैसी परिस्थितियों ने भी आपातकालीन तैयारी के महत्व को चर्चा में ला दिया है। हालांकि यह कहना सही नहीं होगा कि बंकर बनवाने वाले सभी लोग किसी निश्चित प्रलय या विनाश की आशंका से ऐसा कर रहे हैं।

    दरअसल अरबपतियों के लिए संपत्ति की सुरक्षा के साथ अपनी और परिवार की सुरक्षा भी एक बड़ा मुद्दा है। जमीन के नीचे तैयार किए जा रहे ये ठिकाने इसी सोच का हिस्सा हो सकते हैं। दूसरी ओर इनकी बढ़ती मांग ने सुरक्षा और विलासिता के नए बाजार को भी जन्म दिया है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि बंकर बनाने का यह चलन केवल अमीरों तक सीमित रहता है या आम लोगों के बीच भी आपातकालीन सुरक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ाता है। फिलहाल इतना साफ है कि दुनिया के कुछ सबसे संपन्न लोग भविष्य की अनिश्चितताओं के लिए जमीन के नीचे अपनी अलग दुनिया तैयार करने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं।