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  • वैश्विक अनिश्चितता का असर: भारतीय शेयर बाजार की टॉप कंपनियों की संपत्ति में तेज गिरावट..

    वैश्विक अनिश्चितता का असर: भारतीय शेयर बाजार की टॉप कंपनियों की संपत्ति में तेज गिरावट..

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में बीते सप्ताह निवेशकों के लिए काफी उतार-चढ़ाव भरा माहौल देखने को मिला, जहां लगातार बिकवाली के दबाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के कारण देश की शीर्ष कंपनियों के कुल बाजार मूल्य में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। रिपोर्ट के अनुसार, देश की टॉप 10 कंपनियों में से नौ के मार्केटकैप में कमी आने के चलते कुल मिलाकर 3.12 लाख करोड़ रुपए की संपत्ति बाजार से कम हो गई, जो निवेशकों की धारणा में आए बदलाव और वैश्विक संकेतों के कमजोर होने का परिणाम माना जा रहा है। इस दौरान सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांक तेज गिरावट के साथ बंद हुए, जिससे बाजार में नकारात्मक रुझान और गहरा गया। 11 से 15 मई के कारोबारी सत्र में सेंसेक्स में लगभग 2,090 अंकों की गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी भी 532 अंकों की कमजोरी के साथ नीचे आ गया, जिससे पूरे इक्विटी बाजार पर दबाव स्पष्ट दिखाई दिया।

    इस दौरान केवल एक ही कंपनी ऐसी रही जिसने बाजार में सकारात्मक प्रदर्शन दर्ज किया, जबकि बाकी सभी प्रमुख कंपनियों के मूल्यांकन में गिरावट देखने को मिली। भारती एयरटेल ने इस कठिन माहौल में भी मजबूती दिखाई और इसके मार्केटकैप में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई, जिससे यह निवेशकों के बीच एक मजबूत विकल्प के रूप में उभरी। दूसरी ओर, बैंकिंग और आईटी क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों जैसे स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और बजाज फाइनेंस के बाजार मूल्यांकन में भारी गिरावट देखी गई, जिसने पूरे बाजार की दिशा को प्रभावित किया। वित्तीय क्षेत्र में आई कमजोरी का मुख्य कारण वैश्विक बाजारों में अस्थिरता, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और रुपये पर बने दबाव को माना जा रहा है, जिससे जोखिम लेने की क्षमता में कमी आई है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव, विशेष रूप से ऊर्जा बाजार में अस्थिरता और डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है। इसके चलते विदेशी संस्थागत निवेशकों ने बाजार से पूंजी निकालनी शुरू कर दी, जिसका सीधा असर बड़े और मिडकैप शेयरों पर पड़ा है। इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक आर्थिक संकेतकों में कमजोरी ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया है।

    आने वाला सप्ताह भारतीय शेयर बाजार के लिए और भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि कई बड़ी कंपनियों के तिमाही नतीजे जारी होने वाले हैं, जो बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। इसके साथ ही वैश्विक स्तर पर ईरान-अमेरिका तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार पर असर डाल सकती हैं। निवेशकों की नजर अब आर्थिक आंकड़ों और कॉर्पोरेट नतीजों पर टिकी है, जो यह तय करेंगे कि बाजार में स्थिरता लौटेगी या उतार-चढ़ाव का दौर जारी रहेगा।

  • निफ्टी आईटी में 5.5% की भारी गिरावट, मार्केट कैप 1.6 लाख करोड़ रुपए घटा..

    निफ्टी आईटी में 5.5% की भारी गिरावट, मार्केट कैप 1.6 लाख करोड़ रुपए घटा..


    नई दिल्ली। मुंबई। गुरुवार के कारोबारी सत्र में आईटी सेक्टर में भारी बिकवाली ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। निफ्टी आईटी इंडेक्स 5.51 प्रतिशत गिरकर चार महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया। इससे न केवल इंडेक्स प्रभावित हुआ बल्कि आईटी कंपनियों की कुल बाजार पूंजी में भी 1.6 लाख करोड़ रुपए की भारी कमी दर्ज की गई।

    इस दौरान निफ्टी आईटी कंपनियों का मार्केट कैप घटकर 27,32,579 करोड़ रुपए रह गया। प्रमुख सॉफ्टवेयर कंपनियों में गिरावट विशेष रूप से गंभीर रही। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) का शेयर 5.48 प्रतिशत गिरकर 2,750 रुपए पर पहुंच गया, जो पिछले 52 हफ्तों का सबसे निचला स्तर है। इंफोसिस में भी 5.48 प्रतिशत की गिरावट आई। टेक महिंद्रा 6.40 प्रतिशत गिरा, जबकि एचसीएल टेक, एमफैसिस और विप्रो के शेयरों में 4.5 से 5 प्रतिशत तक की कमी दर्ज की गई।

    विशेषज्ञों का कहना है कि इस बिकवाली के पीछे सबसे बड़ा कारण उभरती एआई तकनीक है। हाल ही में ‘एंथ्रोपिक’ नामक कंपनी ने ‘क्लॉड कोवर्क’ नामक नया एआई टूल लॉन्च किया है, जो कई व्यावसायिक कामों को स्वतः पूरा करने में सक्षम है। इस एआई टूल में ऐसे ऑटोमेशन सिस्टम शामिल हैं जो पहले कई अलग-अलग सॉफ्टवेयर की जरूरत वाले कामों को एक ही प्लेटफॉर्म पर कर सकते हैं।

    अंतरराष्ट्रीय ब्रोकरेज फर्म जेफरीज ने इस स्थिति को ‘सासपोकैलिप्स’ कहा है, यानी एआई पारंपरिक सॉफ्टवेयर कंपनियों की जगह ले सकता है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगर एआई ने पारंपरिक आईटी सेवाओं का काम ले लिया, तो कंपनियों की आमदनी में 40 प्रतिशत तक की गिरावट हो सकती है।

    इसके अलावा अमेरिका से मिले मजबूत रोजगार आंकड़े भी बाजार पर दबाव बनाने वाले रहे। जनवरी में अमेरिका में 1.3 लाख नई नौकरियां जुड़ीं और बेरोजगारी दर घटकर 4.3 प्रतिशत हो गई। इससे संकेत मिला कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व जल्दी ब्याज दरें कम नहीं करेगा। इससे भारतीय आईटी कंपनियों की विदेशी आय पर असर पड़ सकता है और शेयरों पर दबाव बढ़ा।

    ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल ने कहा कि आने वाले समय में नए एआई टूल पुराने सॉफ्टवेयर और टेस्टिंग सेवाओं की मांग को घटा सकते हैं। पारंपरिक आईटी कंपनियों को इस बदलाव के लिए तैयार रहना होगा।

    विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि निवेशक एआई तकनीक के प्रभाव और अमेरिका की मौद्रिक नीति पर नजर बनाए रखें। आईटी सेक्टर में उच्च लागत वाले पारंपरिक सॉफ्टवेयर प्रोजेक्ट्स की मांग में कमी आने की संभावना है, जिससे शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

    निवेशक और कंपनियां दोनों ही इस बदलाव की जटिलताओं को समझने की कोशिश कर रहे हैं। आईटी कंपनियों के लिए यह समय चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि उन्हें न केवल टेक्नोलॉजी में बदलाव अपनाना होगा बल्कि वैश्विक आर्थिक संकेतों के आधार पर अपनी रणनीति भी बदलनी होगी।