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  • सोने की कीमतों में फिर गिरावट, 1.38 लाख रुपये के करीब पहुंचा वायदा भाव….

    सोने की कीमतों में फिर गिरावट, 1.38 लाख रुपये के करीब पहुंचा वायदा भाव….

    नई दिल्ली । देश में सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव का दौर जारी है। 31 अक्टूबर 2026 को सोने के वायदा भाव में एक बार फिर गिरावट दर्ज की गई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर शनिवार सुबह तक 24 कैरेट सोने का वायदा भाव 66 रुपये यानी 0.05 प्रतिशत घटकर 1,38,419 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। इससे पिछले कारोबारी दिन यह 1,38,485 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। शनिवार और रविवार को बाजार बंद रहने के कारण अब कारोबार अगले कारोबारी सत्र में होगा।

    बुलियंस के अनुसार, 24 कैरेट सोने की कीमत 1,38,830 रुपये प्रति 10 ग्राम रही। वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का भाव 3,884.90 डॉलर प्रति औंस दर्ज किया गया। अखिल भारतीय सर्राफा संघ के आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली में सोने की कीमत गिरकर 1,45,200 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गई। इस दर में सभी कर शामिल हैं। दूसरी ओर, शहरों के खुदरा भाव के अनुसार 24 कैरेट सोने की कीमत 1,42,410 रुपये, 22 कैरेट की 1,30,550 रुपये और 18 कैरेट की 1,06,840 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई।

    देश के अलग-अलग शहरों में सोने के भाव में मामूली अंतर देखने को मिल रहा है। दिल्ली, लखनऊ, मेरठ, अयोध्या, कानपुर, आगरा, प्रयागराज, वाराणसी, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम, जयपुर, चंडीगढ़ और अमृतसर में 24 कैरेट सोने का भाव 1,42,410 रुपये प्रति 10 ग्राम है। इन शहरों में 22 कैरेट सोना 1,30,550 रुपये और 18 कैरेट सोना 1,06,840 रुपये प्रति 10 ग्राम पर दर्ज किया गया।

    मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, पुणे, नागपुर, बेंगलुरु, हैदराबाद, रायपुर, भुवनेश्वर और गुवाहाटी जैसे शहरों में 24 कैरेट सोने का भाव 1,42,260 रुपये प्रति 10 ग्राम है। यहां 22 कैरेट सोना 1,30,400 रुपये और 18 कैरेट सोना 1,06,690 रुपये प्रति 10 ग्राम पर है। चेन्नई, कोयंबटूर, मदुरै और तमिलनाडु के कई अन्य शहरों में 18 कैरेट सोने की कीमत 1,06,670 रुपये दर्ज की गई है।

    पटना, इंदौर, भोपाल, अहमदाबाद, वडोदरा, सूरत और राजकोट में 24 कैरेट सोना 1,42,310 रुपये प्रति 10 ग्राम पर है। इन शहरों में 22 कैरेट का भाव 1,30,450 रुपये और 18 कैरेट का 1,06,740 रुपये है। नासिक, वसई-विरार, भिवंडी और लातूर में 24 कैरेट सोना 1,42,290 रुपये, 22 कैरेट 1,30,430 रुपये और 18 कैरेट 1,06,720 रुपये प्रति 10 ग्राम पर दर्ज किया गया।

    इससे पहले शुक्रवार को भी घरेलू बाजार में सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट आई थी। अखिल भारतीय सर्राफा संघ के मुताबिक, 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना 1,300 रुपये टूटकर 1,45,200 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया था। बृहस्पतिवार को इसकी कीमत 1,46,500 रुपये प्रति 10 ग्राम थी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना 122.06 डॉलर यानी 3.04 प्रतिशत गिरकर 3,899.33 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया था और 4,000 डॉलर के स्तर से नीचे बना रहा।

    वायदा बाजार में भी शुक्रवार को सोने पर दबाव दिखाई दिया। कमजोर हाजिर मांग के बीच कारोबारियों ने अपने सौदों का आकार घटाया। इसके चलते एमसीएक्स पर दिसंबर में आपूर्ति वाले सोने के अनुबंध का भाव 976 रुपये यानी 0.68 प्रतिशत गिरकर 1,41,620 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गया। न्यूयॉर्क के बाजार में सोना 0.93 प्रतिशत की गिरावट के साथ 3,983.99 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता रहा।

    एचडीएफसी सिक्योरिटीज के जिंस मामलों के वरिष्ठ विश्लेषक सौमिल गांधी के अनुसार, वैश्विक स्तर पर प्रतिकूल कारकों के चलते बाजार की धारणा प्रभावित हुई। इसका असर घरेलू बाजार में सोने की कीमतों पर भी पड़ा और शुक्रवार को गिरावट जारी रही। कमजोर हाजिर मांग को भी वायदा कीमतों में कमी की प्रमुख वजह बताया गया। इस तरह 31 अक्टूबर को वायदा भाव में मामूली गिरावट के साथ सोना 1.38 लाख रुपये के स्तर के करीब बना रहा, जबकि सर्राफा और खुदरा बाजार में अलग-अलग दरें दर्ज की गईं।

  • सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट, आईटी शेयरों ने संभाला बाजार, मिडकैप और स्मॉलकैप में भारी बिकवाली

    सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट, आईटी शेयरों ने संभाला बाजार, मिडकैप और स्मॉलकैप में भारी बिकवाली

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार, 30 अक्टूबर को कारोबार के दौरान उतार-चढ़ाव देखने को मिला। कारोबारी सत्र के अंत में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों गिरावट के साथ बंद हुए। हालांकि आईटी और हेल्थकेयर कंपनियों के शेयरों में मजबूती ने बाजार को कुछ सहारा दिया, लेकिन मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में बिकवाली का दबाव बना रहा। निवेशकों के बीच महंगाई, वैश्विक ब्याज दरों और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों को लेकर चिंता का असर बाजार के रुख पर दिखाई दिया।

    कारोबार समाप्त होने पर बीएसई सेंसेक्स 308.49 अंक यानी 0.42 प्रतिशत गिरकर 74,459.53 के स्तर पर बंद हुआ। इसी तरह एनएसई निफ्टी 116.35 अंक यानी 0.51 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 23,053.10 पर आ गया। प्रमुख सूचकांकों में गिरावट के साथ बाजार बंद होने के बावजूद कुछ बड़े शेयरों में खरीदारी बनी रही।

    लार्जकैप शेयरों के मुकाबले मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों के शेयरों में अधिक दबाव देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 540.40 अंक यानी 0.93 प्रतिशत गिरकर 57,301.25 पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 347.75 अंक यानी 1.85 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 18,463.60 के स्तर पर आ गया। इन दोनों सूचकांकों में गिरावट से छोटे और मध्यम आकार की कंपनियों के शेयरों में निवेशकों की बिकवाली का संकेत मिला।

    सेक्टर आधारित कारोबार में आईटी शेयरों ने बाजार को सबसे अधिक समर्थन दिया। निफ्टी आईटी इंडेक्स 2.32 प्रतिशत की बढ़त के साथ दिन के प्रमुख लाभ वाले सूचकांकों में शामिल रहा। निफ्टी हेल्थकेयर में भी 1.58 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। इसके अलावा निफ्टी फार्मा 1.55 प्रतिशत, निफ्टी सर्विसेज 1.17 प्रतिशत, निफ्टी कंजम्पशन 0.29 प्रतिशत और निफ्टी इंफ्रास्ट्रक्चर 0.07 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुए।

    दूसरी ओर, कई सेक्टरों में बिकवाली का दबाव बना रहा। निफ्टी इंडिया डिफेंस में 2.01 प्रतिशत की गिरावट आई। निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 1.78 प्रतिशत और निफ्टी मीडिया 1.46 प्रतिशत कमजोर हुआ। निफ्टी एनर्जी में 0.97 प्रतिशत, निफ्टी पीएसयू बैंक में 0.93 प्रतिशत और निफ्टी ऑटो में 0.87 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

    सेंसेक्स में शामिल शेयरों में ट्रेंट, इंडिगो, इन्फोसिस, एनटीपीसी, पावर ग्रिड, इटरनल, टेक महिंद्रा, एचयूएल टेक, एचडीएफसी बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, सन फार्मा, आईटीसी, एशियन पेंट्स, टीसीएस, आईसीआईसीआई बैंक, एलएंडटी, एचयूएल और टाइटन बढ़त के साथ बंद हुए। इसके विपरीत एसबीआई, एमएंडएम, अल्ट्राटेक सीमेंट, टाटा स्टील, एक्सिस बैंक, बीईएल, रिलायंस इंडस्ट्रीज, बजाज फिनसर्व, भारती एयरटेल और मारुति सुजुकी के शेयरों में गिरावट रही।

    बाजार में कमजोरी के पीछे वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों को भी प्रमुख कारण माना गया। महंगाई को लेकर बनी चिंताओं के बीच यूरोपीय केंद्रीय बैंक और बैंक ऑफ जापान ने भी अमेरिकी फेडरल रिजर्व की तरह ब्याज दरों में बदलाव नहीं किया। इसके साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी कंपनियों के ऊंचे मूल्यांकन को लेकर निवेशकों की चिंता दोबारा बढ़ी है। इसका असर एशियाई बाजारों में भी दिखाई दिया।

    अमेरिका और ईरान के बीच तनाव से जुड़ी नई खबरों के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने भी बाजार की धारणा को कमजोर किया। इस माहौल में मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में बड़े स्तर पर बिकवाली हुई। दूसरी ओर, वैश्विक एआई शेयरों से कुछ निवेश निकलकर चुनिंदा आईटी कंपनियों में खरीदारी के रूप में आया। बेहतर नतीजों और डिफेंसिव मांग के चलते फार्मा तथा हेल्थकेयर शेयरों में भी मजबूती बनी रही। इस तरह आईटी और स्वास्थ्य क्षेत्र की खरीदारी के बावजूद व्यापक बाजार में गिरावट का रुख कायम रहा।

  • गोल्ड-सिल्वर रेशियो 76 पर पहुंचा, सोने के मुकाबले चांदी हुई सस्ती, जानिए अब किस धातु में निवेश का पलड़ा भारी

    गोल्ड-सिल्वर रेशियो 76 पर पहुंचा, सोने के मुकाबले चांदी हुई सस्ती, जानिए अब किस धातु में निवेश का पलड़ा भारी

    नई दिल्ली ।धनतेरस और दिवाली से पहले सोने-चांदी की कीमतों को लेकर निवेशकों और खरीदारों की नजर बाजार के नए संकेतों पर है। इस बीच गोल्ड-सिल्वर रेशियो बढ़कर करीब 76 तक पहुंच गया है। इस बदलाव ने दोनों कीमती धातुओं के प्रदर्शन को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है। बाजार के जानकारों के अनुसार, मौजूदा अनुपात बताता है कि सोने की तुलना में चांदी अपेक्षाकृत सस्ती हो गई है। ऐसे में आने वाले समय में सोने की कीमतों में और गिरावट की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है। हालांकि, यह अनुपात अपने आप में कीमतों की दिशा तय करने वाला संकेत नहीं है।

    गोल्ड-सिल्वर रेशियो का इस्तेमाल सोने और चांदी की तुलनात्मक कीमत समझने के लिए किया जाता है। यह अनुपात बताता है कि एक औंस सोना खरीदने के लिए कितने औंस चांदी की आवश्यकता होगी। उदाहरण के तौर पर, यदि रेशियो 76 है तो एक औंस सोने के बराबर कीमत हासिल करने के लिए लगभग 76 औंस चांदी चाहिए। इस अनुपात में बढ़ोतरी का अर्थ है कि सोना चांदी के मुकाबले महंगा हो रहा है या चांदी का प्रदर्शन कमजोर पड़ रहा है। इसके विपरीत रेशियो घटने पर चांदी की स्थिति मजबूत मानी जाती है।

    मौजूदा आंकड़ों के मुताबिक, गोल्ड-सिल्वर रेशियो इस साल करीब 27 प्रतिशत बढ़ा है। पिछले एक महीने में ही इसमें लगभग 12 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इसका स्तर लंबे समय के औसत 65 से 70 के दायरे से भी ऊपर पहुंच गया है। इससे संकेत मिलता है कि चांदी की कीमतों में आई गिरावट ने सोने के मुकाबले उसे सस्ता बना दिया है।

    साल 2026 की शुरुआत में दोनों धातुओं के अनुपात में इसके उलट स्थिति देखने को मिली थी। उस समय चांदी की कीमत बढ़कर 121.6 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी। इसके चलते गोल्ड-सिल्वर रेशियो गिरकर लगभग 43.6 रह गया था। यह स्तर एक दशक से अधिक समय में सबसे कम था। इसके बाद बाजार में परिस्थितियां बदलीं और चांदी की कीमतों में तेज गिरावट आई।

    आंकड़ों के अनुसार, चांदी अपने रिकॉर्ड उच्च स्तर से 55 प्रतिशत से अधिक टूट चुकी है। इस साल इसकी कीमत में लगभग 27 प्रतिशत की गिरावट आई है और यह करीब 52.8 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई है। दूसरी ओर सोने की कीमत में इस साल लगभग 7 प्रतिशत की कमी आई है और इसका भाव करीब 4,027 डॉलर प्रति औंस बताया गया है। दोनों धातुओं की कीमतों में गिरावट की रफ्तार अलग-अलग रहने से रेशियो में बढ़ोतरी हुई है।

    कमोडिटी बाजार के विशेषज्ञों का मानना है कि गोल्ड-सिल्वर रेशियो को खरीदारी या बिकवाली का अंतिम संकेत मानने के बजाय निवेश की रणनीति समझने के लिए इस्तेमाल करना चाहिए। जब यह अनुपात ऐतिहासिक औसत से काफी ऊपर चला जाता है, तब निवेशक सोने की तुलना में चांदी में निवेश धीरे-धीरे बढ़ाने पर विचार कर सकते हैं। वहीं, रेशियो बहुत नीचे आने पर चांदी में कुछ मुनाफा निकालकर सोने में निवेश बढ़ाने की रणनीति अपनाई जा सकती है।

    इतिहास में भी इस अनुपात के आधार पर बाजार के बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। मार्च 2020 में कोरोना महामारी के दौरान गोल्ड-सिल्वर रेशियो लगभग 126 तक पहुंच गया था। इसके बाद अगले पांच महीनों में चांदी की कीमतों में करीब 140 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई थी। आमतौर पर 80 से ऊपर का अनुपात चांदी के लिए अनुकूल स्थिति का संकेत माना जाता है, जबकि 50 से नीचे का स्तर सोने के बेहतर प्रदर्शन की ओर इशारा करता है।

    निवेशकों के लिए इस अनुपात का एक अन्य उपयोग पोर्टफोलियो में संतुलन बनाए रखना है। इसके तहत सोने और चांदी में निवेश का एक निश्चित हिस्सा तय किया जा सकता है। रेशियो में बड़ा बदलाव आने पर उसी के अनुसार निवेश का अनुपात बदला जा सकता है। हालांकि, केवल एक संकेतक के आधार पर निवेश का फैसला करने के बजाय चरणबद्ध निवेश और जोखिम का ध्यान रखना जरूरी है।

  • सेंसेक्स-निफ्टी में मामूली बढ़त के बावजूद शेयर बाजार में बिकवाली हावी, कच्चे तेल और ग्लोबल गिरावट ने बढ़ाई चिंता

    सेंसेक्स-निफ्टी में मामूली बढ़त के बावजूद शेयर बाजार में बिकवाली हावी, कच्चे तेल और ग्लोबल गिरावट ने बढ़ाई चिंता

    नई दिल्ली ।भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार, 30 अक्टूबर को कारोबार के दौरान दबाव देखने को मिला। सेंसेक्स और निफ्टी मामूली बढ़त के साथ हरे निशान में कारोबार करते नजर आए, लेकिन व्यापक बाजार में बिकवाली का रुख बना रहा। खासतौर पर मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में निवेशकों की ओर से लगातार बिकवाली देखने को मिली। आईटी और फार्मा कंपनियों के शेयरों में खरीदारी ने प्रमुख सूचकांकों को गिरावट से बचाने में मदद की, लेकिन बाजार की कुल स्थिति कमजोर बनी रही।

    शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 74,422.42 के ऊपरी स्तर और 74,099.33 के निचले स्तर के बीच कारोबार कर रहा था। इसी तरह निफ्टी ने 23,019.25 का उच्चतम और 22,919.85 का न्यूनतम स्तर दर्ज किया। प्रमुख सूचकांकों में मामूली तेजी के बावजूद ज्यादातर शेयरों में गिरावट ने बाजार की वास्तविक स्थिति को कमजोर बनाए रखा।

    बाजार में बिकवाली का अंदाजा मार्केट ब्रेड्थ के आंकड़ों से भी लगाया जा सकता है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर शुरुआती कारोबार के दौरान कुल 3,076 शेयरों में कारोबार हो रहा था। इनमें से 934 शेयर बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे, जबकि 2,053 शेयर गिरावट में थे। वहीं, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर कुल 3,541 शेयरों में कारोबार हुआ। इनमें 1,234 शेयरों में तेजी और 2,097 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। इन आंकड़ों से स्पष्ट था कि बाजार में तेजी का दायरा सीमित था और अधिकांश शेयरों पर बिकवाली का दबाव बना हुआ था।

    बाजार में कमजोरी की एक प्रमुख वजह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी रही। शुक्रवार सुबह ब्रेंट क्रूड का भाव करीब 1.20 प्रतिशत बढ़कर 112.13 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। वहीं, अमेरिकी क्रूड ऑयल की कीमत में लगभग 1.12 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह 103.15 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। कच्चे तेल के महंगे होने से भारत जैसे आयात पर निर्भर देश की अर्थव्यवस्था और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है। इसी वजह से तेल की कीमतों में तेजी को बाजार के लिए अहम चिंता माना जा रहा है।

    दूसरा बड़ा कारण एशियाई शेयर बाजारों में आई गिरावट रही। शुक्रवार को जापान का निक्केई 225 करीब 2.58 प्रतिशत टूट गया, जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी 3.87 प्रतिशत नीचे कारोबार कर रहा था। ताइवान के बाजार में 2.53 प्रतिशत और इंडोनेशिया के जकार्ता कंपोजिट में 1.61 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इससे पहले अमेरिकी बाजार में भी नैस्डैक करीब 1.42 प्रतिशत की कमजोरी के साथ बंद हुआ था। वैश्विक बाजारों के इस रुख का असर भारतीय निवेशकों की धारणा पर भी दिखाई दिया।

    तीसरा महत्वपूर्ण संकेत बाजार में बढ़ती अस्थिरता का रहा। इंडिया VIX शुक्रवार सुबह करीब 3.24 प्रतिशत उछलकर 15.61 के स्तर पर पहुंच गया। इसे बाजार में संभावित उतार-चढ़ाव और निवेशकों की अनिश्चितता का संकेतक माना जाता है। इसमें बढ़ोतरी से संकेत मिलता है कि निवेशक आने वाले समय में बाजार में अधिक उतार-चढ़ाव की आशंका जता रहे हैं। इसका असर मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों पर विशेष रूप से पड़ सकता है।

    हालांकि, बिकवाली के बीच आईटी और फार्मा शेयरों में खरीदारी ने बाजार को कुछ सहारा दिया। निफ्टी आईटी इंडेक्स में 1.37 प्रतिशत और निफ्टी फार्मा में 0.96 प्रतिशत की तेजी रही। हेल्थकेयर इंडेक्स भी 0.82 प्रतिशत ऊपर कारोबार कर रहा था। दूसरी ओर कंज्यूमर ड्यूरेबल्स इंडेक्स 1.78 प्रतिशत गिर गया। निफ्टी बैंक में 0.27 प्रतिशत, निफ्टी मेटल में 0.67 प्रतिशत और निफ्टी ऑटो में 0.32 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज की गई।

    इस तरह शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में प्रमुख सूचकांकों की मामूली बढ़त और व्यापक स्तर पर जारी बिकवाली के बीच अंतर दिखाई दिया। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, विदेशी बाजारों की कमजोरी और इंडिया VIX में उछाल ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई।

  • दशहरे पर सोने की कीमतों में गिरावट, 24 कैरेट का भाव 1.48 लाख रुपये के करीब, जानें अपने शहर के रेट

    दशहरे पर सोने की कीमतों में गिरावट, 24 कैरेट का भाव 1.48 लाख रुपये के करीब, जानें अपने शहर के रेट

    नई दिल्ली । दशहरे के अवसर पर मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को देश के सर्राफा बाजार बंद हैं। ऐसे में सोने की खरीदारी करने वाले लोगों को पिछले कारोबारी सत्र के भाव और उपलब्ध शहरवार दरों के आधार पर कीमतों का अंदाजा लगाना होगा। सोने की कीमतों में हाल के दिनों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। घरेलू वायदा बाजार में गिरावट दर्ज की गई, जबकि दिल्ली के सर्राफा बाजार में पिछले कारोबारी दिन सोने की कीमतों में तेजी आई थी। अलग-अलग शहरों में 24, 22 और 18 कैरेट सोने के भाव में भी अंतर देखने को मिल रहा है।

    उपलब्ध दरों के अनुसार, 24 कैरेट सोने की कीमत दिल्ली और लखनऊ जैसे शहरों में 1,48,190 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई है। मुंबई और कोलकाता में इसका भाव 1,48,040 रुपये प्रति 10 ग्राम है। इंदौर, भोपाल, पटना और अहमदाबाद में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,48,090 रुपये प्रति 10 ग्राम बताई गई है। ये दरें शहरवार उपलब्ध कीमतों पर आधारित हैं। स्थानीय दुकानों पर कर, मेकिंग चार्ज और अन्य शुल्क के कारण अंतिम कीमत अलग हो सकती है।

    22 कैरेट सोने की बात करें तो दिल्ली, लखनऊ, कानपुर, जयपुर, चंडीगढ़ और कई अन्य शहरों में इसकी कीमत 1,35,850 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई है। मुंबई, कोलकाता, पुणे और बेंगलुरु में 22 कैरेट सोने का भाव 1,35,700 रुपये प्रति 10 ग्राम है। वहीं, इंदौर, भोपाल, पटना और अहमदाबाद में इसकी कीमत 1,35,750 रुपये प्रति 10 ग्राम बताई गई है। आभूषण खरीदने वाले ग्राहकों के लिए 22 कैरेट सोना महत्वपूर्ण विकल्प होता है, क्योंकि इसका इस्तेमाल सामान्य तौर पर गहने बनाने में किया जाता है।

    18 कैरेट सोने की कीमत भी शहर के अनुसार अलग-अलग है। दिल्ली में इसका भाव 1,11,180 रुपये प्रति 10 ग्राम है, जबकि मुंबई और कोलकाता में यह 1,11,030 रुपये दर्ज किया गया है। इंदौर, भोपाल और पटना में 18 कैरेट सोने की कीमत 1,11,080 रुपये प्रति 10 ग्राम बताई गई है। चेन्नई में इसका भाव 1,11,550 रुपये प्रति 10 ग्राम है। खरीदारी से पहले स्थानीय सर्राफा कारोबारी से ताजा दर की पुष्टि करना जरूरी है।

    वायदा बाजार में पिछले कारोबारी सत्र के दौरान सोने की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर सोने का भाव 618 रुपये यानी 0.42 प्रतिशत गिरकर करीब 1,47,300 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। इससे पहले यह 1,47,918 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। हालांकि, पिछले सोमवार के कारोबार के अन्य आंकड़ों में दिसंबर आपूर्ति वाले सोने के वायदा अनुबंध में 436 रुपये की तेजी दर्ज की गई थी और इसका भाव 1,48,354 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया था। अलग-अलग समय के आंकड़ों में यह अंतर बाजार के उतार-चढ़ाव को दर्शाता है।

    दिल्ली के सर्राफा बाजार में सोमवार को 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत 400 रुपये बढ़कर 1,50,300 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई थी। इससे पहले इसका भाव 1,49,900 रुपये था। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने की कीमतों में बदलाव दर्ज किया गया। उपलब्ध आंकड़ों में हाजिर सोने का भाव करीब 4,175.57 डॉलर प्रति औंस और एक अन्य कारोबारी अपडेट में 4,145 डॉलर प्रति औंस बताया गया।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, त्योहारी मौसम में खुदरा मांग बढ़ने से घरेलू सोने की कीमतों को समर्थन मिल सकता है। दिवाली और शादी-विवाह के मौसम में आभूषणों की खरीदारी बढ़ने की संभावना रहती है। हालांकि, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों से जुड़े फैसले, कच्चे तेल की कीमतें और अमेरिकी बॉण्ड प्रतिफल जैसे कारक अंतरराष्ट्रीय बाजार की दिशा प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए दशहरे के दिन खरीदारी की योजना बना रहे लोगों को बाजार खुलने पर ताजा भाव की जानकारी लेनी चाहिए।

  • भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स 1045 अंक टूटा और निफ्टी 52 हफ्तों के निचले स्तर पर बंद

    भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स 1045 अंक टूटा और निफ्टी 52 हफ्तों के निचले स्तर पर बंद

    नई दिल्ली ।भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार के कारोबार में भारी गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स 1,045.46 अंक यानी 1.44 प्रतिशत फिसलकर 71,593.24 पर बंद हुआ। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 371.25 अंक यानी 1.64 प्रतिशत की गिरावट के साथ 22,231.80 पर बंद हुआ। पूरे कारोबारी सत्र के दौरान बाजार पर बिकवाली का दबाव बना रहा और प्रमुख सूचकांक लगातार कमजोरी में रहे।

    कारोबार के दौरान निफ्टी ने 22,179.90 का न्यूनतम स्तर छुआ। यह उसका 52 हफ्तों का निचला स्तर रहा। बाजार में गिरावट का असर केवल बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी कमजोरी देखी गई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 1,500.10 अंक यानी 2.53 प्रतिशत गिरकर 57,882.50 पर रहा। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स भी 456.85 अंक यानी 2.34 प्रतिशत की गिरावट के साथ 19,050.10 पर बंद हुआ।

    गुरुवार को लगभग सभी प्रमुख सेक्टर सूचकांक लाल निशान में बंद हुए। निफ्टी मेटल में 3.55 प्रतिशत, निफ्टी रियल्टी में 3.16 प्रतिशत और निफ्टी एनर्जी में 2.82 प्रतिशत की गिरावट रही। निफ्टी कमोडिटीज 2.81 प्रतिशत, निफ्टी मीडिया 2.79 प्रतिशत, निफ्टी इंडिया डिफेंस 2.76 प्रतिशत और निफ्टी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग 2.61 प्रतिशत नीचे रहे। इसके अलावा निफ्टी ऑयल एंड गैस में 2.52 प्रतिशत और निफ्टी ऑटो में 2.49 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

    निफ्टी पीएसई 2.40 प्रतिशत, निफ्टी हेल्थकेयर 2.33 प्रतिशत और निफ्टी फार्मा 2.32 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए। बाजार के प्रमुख शेयरों में आईटीसी, इंडिगो, पावर ग्रिड, बीईएल, एनटीपीसी, मारुति सुजुकी, टाटा स्टील, अल्ट्राटेक सीमेंट, एलएंडटी, भारती एयरटेल, एशियन पेंट्स, बजाज फिनसर्व, सन फार्मा, एचडीएफसी बैंक, इटरनल और एचयूएल प्रमुख गिरावट वाले शेयरों में रहे। दूसरी ओर टेक महिंद्रा, एक्सिस बैंक और इन्फोसिस बढ़त के साथ बंद हुए।

    बाजार में गिरावट की प्रमुख वजहों में कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, रुपये की कमजोरी और विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली बताई गई। कच्चे तेल की कीमत 103 डॉलर प्रति बैरल बताई गई, जबकि डॉलर के मुकाबले रुपया 97 के स्तर पर रहा। इन परिस्थितियों के बीच बाजार के सभी प्रमुख सेक्टरों में बिकवाली देखने को मिली। मेटल और रियल्टी सेक्टर में सबसे ज्यादा कमजोरी रही।

    हालांकि, बाजार में गिरावट के बीच कुछ शेयरों ने बेहतर प्रदर्शन किया। दूसरी तिमाही के शुरुआती नतीजों में अच्छा प्रदर्शन करने वाली कुछ कंपनियों के शेयरों में मजबूती देखी गई। सेन्को गोल्ड का शेयर कारोबार के दौरान 11.9 प्रतिशत तक चढ़ा, हालांकि बाद में बाजार का रुख कमजोर होने से इसकी बढ़त कम हो गई। वहीं पीएनजीएस रेवा डायमंड ज्वेलरी के शेयरों में लगातार चौथे दिन तेजी बनी रही। कंपनी की ओर से इस सप्ताह मजबूत नतीजे जारी किए जाने के बाद उसके शेयरों में यह तेजी देखने को मिली। कुल मिलाकर गुरुवार का कारोबारी सत्र भारतीय शेयर बाजार के लिए तेज गिरावट वाला रहा और निफ्टी 52 हफ्तों के निचले स्तर तक पहुंच गया।

  • भारतीय शेयर बाजार में लगातार दूसरे दिन तेजी, सेंसेक्स 685 अंक चढ़ा, निफ्टी 0.98 प्रतिशत बढ़कर 22,776 पर बंद

    भारतीय शेयर बाजार में लगातार दूसरे दिन तेजी, सेंसेक्स 685 अंक चढ़ा, निफ्टी 0.98 प्रतिशत बढ़कर 22,776 पर बंद

    नई दिल्ली । पिछले सप्ताह लगातार चार कारोबारी सत्रों में गिरावट के बाद भारतीय शेयर बाजार में अब लगातार दूसरे दिन तेजी देखने को मिली है। मंगलवार को घरेलू बाजार के प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी में करीब 1 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति यानी एमपीसी की बैठक के नतीजों से पहले बाजार में खरीदारी का रुख मजबूत रहा। कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 685.34 अंक यानी 0.95 प्रतिशत की बढ़त के साथ 73,067.81 पर बंद हुआ।

    एनएसई निफ्टी 50 भी मंगलवार को 220.35 अंक यानी 0.98 प्रतिशत चढ़कर 22,776.10 के स्तर पर पहुंच गया। निफ्टी 50 में ट्रेंट, बीएसई, कोटक महिंद्रा बैंक, नेस्ले इंडिया और एचयूएल के शेयरों में सबसे अधिक तेजी रही। दूसरी ओर कोल इंडिया, टेक महिंद्रा, मैक्स हेल्थ, टीएमपीवी, अल्ट्राटेक सीमेंट, अपोलो हॉस्पिटल और आईटीसी के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। इस तरह बाजार के प्रमुख सूचकांकों में लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में मजबूती बनी रही।

    व्यापक बाजार की बात करें तो मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप सूचकांक में 1.08 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 1.56 प्रतिशत चढ़ा। सेक्टरवार कारोबार में निफ्टी केमिकल, निफ्टी फार्मा, निफ्टी ऑयल एंड गैस, निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी प्राइवेट बैंक और निफ्टी हेल्थकेयर में 1 प्रतिशत से अधिक की तेजी रही। इसके विपरीत निफ्टी आईटी, निफ्टी रियल्टी और निफ्टी पीएसयू बैंक में सबसे ज्यादा कमजोरी देखने को मिली।

    इस सप्ताह अब तक बाजार में तेजी का असर भी दिखाई दे रहा है। सेंसेक्स इस सप्ताह 1,000 से अधिक अंक चढ़ चुका है, जबकि निफ्टी 50 ने पिछले दो कारोबारी सत्रों में 300 से अधिक अंक जोड़े हैं। आरबीआई एमपीसी की तीन दिवसीय बैठक सोमवार से शुरू हुई है और इसके नतीजे 7 अक्टूबर को आने वाले हैं। बाजार की नजर अब मौद्रिक नीति समिति के फैसले पर बनी हुई है। बैठक के परिणाम से पहले बाजार में लगातार दो सत्रों की तेजी देखने को मिली है।

    शेयर बाजार में इस तेजी के पीछे कच्चे तेल की कीमतों में नरमी को भी एक वजह माना जा रहा है। हालिया तेजी के बाद ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई है। कुछ मध्य पूर्वी देशों की ओर से कच्चे तेल की नई आपूर्ति शुरू होने के बाद कीमतों में यह नरमी देखने को मिली है। कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव का असर बाजार की धारणा पर भी पड़ रहा है।

    वैश्विक संकेतों से भी घरेलू बाजार को समर्थन मिला। बाजार से जुड़े एक विशेषज्ञ के अनुसार, ग्लोबल संकेतों के सहारे लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में बढ़त बनी रही। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में भी सुधार दर्ज किया गया। मंगलवार को अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड में 0.50 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई। घरेलू बाजार में आरबीआई एमपीसी के नतीजों से पहले खरीदारी और वैश्विक संकेतों के बीच प्रमुख सूचकांकों ने दिन का कारोबार बढ़त के साथ समाप्त किया।

  • वैश्विक दबाव के बीच लगातार सातवें सप्ताह शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स और निफ्टी पर रहा बिकवाली का असर

    वैश्विक दबाव के बीच लगातार सातवें सप्ताह शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स और निफ्टी पर रहा बिकवाली का असर

    नई दिल्ली । वैश्विक स्तर पर जारी आर्थिक और भू-राजनीतिक चिंताओं के बीच भारतीय शेयर बाजार लगातार सातवें सप्ताह गिरावट के साथ बंद हुआ। सप्ताह के दौरान कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली ने बाजार पर दबाव बनाए रखा। हालांकि, सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन प्रमुख सूचकांकों में कुछ सुधार देखने को मिला।

    साप्ताहिक आधार पर निफ्टी में 0.88 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। शुक्रवार को निफ्टी 0.34 प्रतिशत की बढ़त के साथ 23,140 के स्तर पर बंद हुआ। इसी तरह सेंसेक्स में शुक्रवार को 315 अंक यानी 0.43 प्रतिशत की तेजी आई और यह 73,895 के स्तर पर बंद हुआ। इसके बावजूद पूरे सप्ताह के आधार पर सेंसेक्स में 0.54 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

    सप्ताह के दौरान बाजार में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। गुरुवार को दोनों प्रमुख सूचकांकों में 1.6 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई थी। इसके बाद शुक्रवार को कुछ चुनिंदा शेयरों में निचले स्तर पर खरीदारी बढ़ने से बाजार में सीमित सुधार आया। हालांकि, सप्ताहभर के दबाव को पूरी तरह दूर करने में यह तेजी सफल नहीं रही।

    कच्चे तेल की कीमतों ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई। सप्ताह के दौरान ब्रेंट क्रूड 105 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना रहा, जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड 90 डॉलर प्रति बैरल से अधिक के स्तर पर कारोबार करता रहा। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आपूर्ति को लेकर बनी चिंताओं ने तेल कीमतों को ऊंचे स्तर पर बनाए रखा। सप्ताह के अंत में तेल की कीमतों में कुछ नरमी आई, जिससे आयात बिल, महंगाई, रुपये और कंपनियों की लागत पर संभावित दबाव को लेकर चिंता कुछ कम हुई।

    अमेरिकी बॉन्ड बाजार में बढ़ी यील्ड भी भारतीय शेयर बाजार के लिए चुनौती बनी रही। अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड सप्ताह के दौरान 5.10 प्रतिशत से ऊपर पहुंच गई। ऊंची बॉन्ड यील्ड से वैश्विक वित्तीय परिस्थितियां सख्त होती हैं और उभरते बाजारों की परिसंपत्तियों के प्रति निवेशकों का आकर्षण प्रभावित हो सकता है।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली ने भी बाजार पर दबाव बनाए रखा। सप्ताह के दौरान विदेशी निवेशकों ने 11,490 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध बिक्री की। यह लगातार छठा सप्ताह रहा, जब विदेशी निवेशक भारतीय बाजार में शुद्ध विक्रेता रहे। इसके विपरीत घरेलू संस्थागत निवेशकों ने खरीदारी जारी रखी और सप्ताह के दौरान 16,398 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश किया। घरेलू निवेश से बाजार में गिरावट को कुछ हद तक सीमित करने में मदद मिली।

    सितंबर में अब तक विदेशी निवेशक 18,531 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली कर चुके हैं, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 52,617 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की है। इसके बावजूद निफ्टी अगस्त के अंत के स्तर से करीब 3.9 प्रतिशत नीचे बना हुआ है।

    आने वाले सप्ताह में बाजार की दिशा कई वैश्विक संकेतों से प्रभावित हो सकती है। पश्चिम एशिया के घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतें, विदेशी निवेशकों का रुख और अमेरिका के दूसरी तिमाही के जीडीपी आंकड़े निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे। तकनीकी स्तर पर 23,000 को निफ्टी के लिए अहम सपोर्ट क्षेत्र और 23,200 को निकटतम रेजिस्टेंस स्तर माना जा रहा है। ऐसे में वैश्विक घटनाक्रम और निवेश प्रवाह बाजार में आगे भी उतार-चढ़ाव की स्थिति बनाए रख सकते हैं।

  • एक हफ्ते में सोना 4 हजार और चांदी 10 हजार रुपये सस्ती, दिल्ली सर्राफा बाजार में फिर दिखी हलचल

    एक हफ्ते में सोना 4 हजार और चांदी 10 हजार रुपये सस्ती, दिल्ली सर्राफा बाजार में फिर दिखी हलचल


    नई दिल्ली ।
    दिल्ली के सर्राफा बाजार में शुक्रवार को सोने और चांदी की कीमतों में सप्ताहभर की बड़ी गिरावट के बाद कुछ बदलाव देखने को मिला। सोने के भाव में शुक्रवार को 200 रुपये की मामूली बढ़त दर्ज की गई और 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना 1,52,600 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। इससे लगातार चार कारोबारी सत्रों से जारी सोने की गिरावट पर फिलहाल विराम लगा।

    इससे एक दिन पहले गुरुवार को सोना 1,52,400 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। शुक्रवार की बढ़त के बावजूद पूरे सप्ताह की तस्वीर देखें तो कीमती धातुओं की कीमतों में काफी दबाव रहा। एक सप्ताह के दौरान सोने के भाव में करीब 4,000 रुपये यानी लगभग 2.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। वहीं, चांदी की कीमत में इससे भी बड़ी गिरावट देखने को मिली और यह एक सप्ताह में करीब 10,000 रुपये यानी लगभग 4 प्रतिशत सस्ती हो गई।

    स्थानीय सर्राफा बाजार में शुक्रवार को चांदी की कीमत 2.37 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर स्थिर रही। सप्ताह की शुरुआत में कीमती धातुओं की कीमतों में कमजोरी का असर लगातार कई कारोबारी सत्रों तक देखने को मिला। हालांकि, शुक्रवार को निचले स्तर पर खरीदारी बढ़ने से सोने के भाव को कुछ सहारा मिला और इसमें मामूली सुधार दर्ज किया गया।

    कीमती धातुओं की कीमतों पर अंतरराष्ट्रीय बाजार के घटनाक्रम का भी असर रहा। सप्ताह के दौरान अमेरिकी डॉलर में तेज मजबूती ने सोने पर दबाव बनाया। डॉलर की मजबूती आम तौर पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर में कारोबार करने वाली कीमती धातुओं के लिए चुनौती पैदा करती है। हालांकि, सप्ताह के अंत में डॉलर अपने हालिया उच्च स्तर से नीचे आया, जिससे सोने और चांदी को कुछ राहत मिली।

    कच्चे तेल की कीमतों में नरमी का असर भी बाजार के माहौल पर पड़ा। शुक्रवार को इन परिस्थितियों के बीच निवेशकों की धारणा में कुछ सुधार दिखाई दिया। इसके साथ ही बॉन्ड बाजार में स्थिरता आने से भी कीमती धातुओं की कीमतों को सीमित समर्थन मिला।

    विदेशी बाजार में भी शुक्रवार को सोने और चांदी की कीमतों में सुधार दर्ज किया गया। हाजिर सोना 27.73 डॉलर यानी करीब 1 प्रतिशत बढ़कर 4,301.40 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। इसी तरह हाजिर चांदी में करीब 1.4 प्रतिशत की तेजी आई और इसकी कीमत 64.72 डॉलर प्रति औंस रही।

    विदेशी बाजार में आई इस तेजी से सोने की कीमत एक बार फिर 4,300 डॉलर प्रति औंस के स्तर से ऊपर पहुंच गई, जबकि चांदी भी 65 डॉलर प्रति औंस के करीब पहुंची। इससे पिछले दो कारोबारी सत्रों में आई गिरावट से कुछ हद तक उबरने में मदद मिली।

    फिलहाल भारतीय बाजार में सप्ताहभर की गिरावट के बाद सोने और चांदी की कीमतों में शुक्रवार को मिला सुधार निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण रहा। हालांकि, पूरे सप्ताह के आंकड़ों में दोनों कीमती धातुओं की कीमतें अभी भी निचले स्तर पर रहीं। शनिवार और रविवार को सर्राफा बाजार बंद रहने के कारण अब अगले कारोबारी सत्र में कीमतों की दिशा पर बाजार की नजर रहेगी।

  • लिस्टिंग के दूसरे दिन एनएसई शेयरों में गिरावट, शुरुआती तेजी के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली को चुना

    लिस्टिंग के दूसरे दिन एनएसई शेयरों में गिरावट, शुरुआती तेजी के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली को चुना

    नई दिल्ली । नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी एनएसई के शेयरों में लिस्टिंग के अगले ही दिन शुक्रवार को गिरावट देखने को मिली। शुरुआती कारोबार के बाद शेयरों में मुनाफावसूली का दबाव दिखाई दिया। कारोबार के दौरान एनएसई का शेयर करीब 1.6 प्रतिशत फिसलकर 1,790 रुपये के इंट्राडे निचले स्तर तक पहुंच गया। बाद में यह करीब 1,796 रुपये के आसपास कारोबार करता दिखा, जो पिछले बंद भाव के मुकाबले लगभग 1.20 प्रतिशत नीचे था।

    एनएसई के शेयर गुरुवार को अपने इश्यू प्राइस की तुलना में करीब 0.8 प्रतिशत प्रीमियम पर सूचीबद्ध हुए थे। लिस्टिंग वाले दिन शुरुआती कारोबार अपेक्षाकृत सीमित रहा, लेकिन बाद में शेयर में तेजी आई और दिन के दौरान इसमें 5 प्रतिशत से अधिक का उछाल दर्ज किया गया। कारोबार समाप्त होने तक शेयर करीब 1.8 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ था। इसके बाद अगले कारोबारी दिन कुछ निवेशकों ने शुरुआती तेजी का लाभ उठाते हुए मुनाफावसूली की।

    एनएसई का आईपीओ भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में दूसरा सबसे बड़ा सार्वजनिक निर्गम रहा। इससे पहले 2024 में हुंडई मोटर इंडिया का 27,870 करोड़ रुपये का आईपीओ सबसे बड़ा सार्वजनिक निर्गम था। एनएसई के आईपीओ को भी निवेशकों की ओर से मजबूत प्रतिक्रिया मिली थी।

    17 सितंबर से 21 सितंबर तक खुले इस आईपीओ को कुल 5.71 गुना सब्सक्रिप्शन मिला था। 22,568.94 करोड़ रुपये के इश्यू आकार के मुकाबले करीब 90,287.33 करोड़ रुपये की बोलियां प्राप्त हुई थीं। इस मजबूत मांग के बाद कंपनी के शेयरों की लिस्टिंग को लेकर बाजार में काफी दिलचस्पी बनी हुई थी।

    लिस्टिंग के बाद एनएसई का बाजार पूंजीकरण लगभग 4.49 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इस मूल्यांकन के साथ कंपनी भारत की 10वीं सबसे मूल्यवान सूचीबद्ध कंपनियों में शामिल हो गई। बाजार मूल्य के लिहाज से एनएसई ने सन फार्मास्युटिकल्स और टाइटन जैसी कंपनियों को पीछे छोड़ दिया है।

    बाजार पूंजीकरण के आधार पर एनएसई से ऊपर रिलायंस इंडस्ट्रीज, एचडीएफसी बैंक, भारती एयरटेल, आईसीआईसीआई बैंक, भारतीय स्टेट बैंक, टीसीएस, बजाज फाइनेंस, एलएंडटी और हिंदुस्तान यूनिलीवर जैसी कंपनियां हैं। इस तरह शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने के तुरंत बाद एनएसई का मूल्यांकन देश की बड़ी कंपनियों की सूची में महत्वपूर्ण स्तर पर पहुंच गया है।

    लिस्टिंग के बाद शेयर में आई गिरावट को अल्पकालिक मुनाफावसूली के तौर पर देखा जा रहा है। शुरुआती कारोबार में तेजी के बाद कुछ निवेशकों द्वारा मुनाफा बुक किए जाने से शेयर पर दबाव बढ़ा। हालांकि, भारतीय पूंजी बाजार के विस्तार और एनएसई की बाजार में मजबूत स्थिति के कारण कंपनी को लेकर निवेशकों की दीर्घकालिक दिलचस्पी बनी रहने की बात कही गई है।

    एनएसई के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी आशीष कुमार चौहान ने बताया कि एक्सचेंज एक व्यापक मोबाइल-फर्स्ट प्लेटफॉर्म पर काम कर रहा है। इसका उद्देश्य निवेशकों को ट्रेडिंग डेटा, पोर्टफोलियो से जुड़ी जानकारी और विश्लेषणात्मक सुविधाएं एक ही मंच पर उपलब्ध कराना है।

    कंपनी की आय में ट्रांजैक्शन शुल्क की महत्वपूर्ण भूमिका है। वित्त वर्ष 2025-26 में एनएसई की परिचालन आय का 78.65 प्रतिशत हिस्सा ट्रांजैक्शन चार्जेज से आया था। यह आंकड़ा कंपनी के मौजूदा कारोबार मॉडल में लेनदेन आधारित आय के महत्व को दर्शाता है। लिस्टिंग के बाद शेयर में शुरुआती उतार-चढ़ाव के बीच अब बाजार की नजर कंपनी के कारोबार और भविष्य के प्रदर्शन पर बनी हुई है।