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  • 13 जुलाई को शेयर बाजार में क्या होगा बड़ा उलटफेर या नई तेजी निवेशकों के लिए जानना क्यों है जरूरी

    13 जुलाई को शेयर बाजार में क्या होगा बड़ा उलटफेर या नई तेजी निवेशकों के लिए जानना क्यों है जरूरी


    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में 13 जुलाई का कारोबारी दिन निवेशकों के लिए काफी अहम माना जा रहा है। पिछले कुछ सत्रों में बाजार में उतार चढ़ाव देखने को मिला है और अब सभी की नजर सोमवार के कारोबार पर टिकी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार की दिशा तय करने में वैश्विक बाजारों का रुख विदेशी निवेशकों की खरीद बिक्री कंपनियों के तिमाही नतीजे और कच्चे तेल की कीमतें महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

    यदि एशियाई और अमेरिकी बाजारों से सकारात्मक संकेत मिलते हैं तो भारतीय बाजार की शुरुआत मजबूती के साथ हो सकती है। हालांकि यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किसी तरह की आर्थिक या भू राजनीतिक चिंता सामने आती है तो बाजार में दबाव भी देखने को मिल सकता है। ऐसे में निवेशकों को जल्दबाजी में बड़े फैसले लेने से बचना चाहिए।

    इस सप्ताह कई बड़ी कंपनियों के पहली तिमाही के वित्तीय नतीजे आने वाले हैं। इन नतीजों का असर बैंकिंग आईटी ऑटो फार्मा और एफएमसीजी सेक्टर के शेयरों पर साफ दिखाई दे सकता है। यदि कंपनियों के परिणाम उम्मीद से बेहतर रहते हैं तो बाजार में नई खरीदारी देखने को मिल सकती है। वहीं कमजोर नतीजों की स्थिति में मुनाफावसूली का दबाव भी बढ़ सकता है।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों और घरेलू निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की चाल तय करेंगी। पिछले कुछ दिनों में विदेशी निवेशकों की खरीदारी ने बाजार को सहारा दिया है। यदि यह रुझान सोमवार को भी जारी रहता है तो सेंसेक्स और निफ्टी में तेजी की संभावना मजबूत हो सकती है। दूसरी ओर बिकवाली बढ़ने पर बाजार में कमजोरी भी आ सकती है।

    तकनीकी विश्लेषकों का कहना है कि निफ्टी के लिए कुछ प्रमुख स्तरों पर नजर रखना जरूरी होगा। यदि बाजार इन स्तरों के ऊपर टिकता है तो आगे तेजी का रास्ता खुल सकता है। वहीं महत्वपूर्ण सपोर्ट स्तर टूटने पर बाजार में गिरावट तेज हो सकती है। इसलिए ट्रेडर्स को स्टॉप लॉस के साथ ही कारोबार करने की सलाह दी जा रही है।

    लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह समय धैर्य बनाए रखने का है। बाजार में आने वाले छोटे उतार चढ़ाव से घबराने के बजाय मजबूत कंपनियों पर भरोसा बनाए रखना बेहतर रणनीति हो सकती है। जिन निवेशकों का लक्ष्य लंबी अवधि का है उन्हें अच्छी गुणवत्ता वाले शेयरों में चरणबद्ध निवेश करने पर विचार करना चाहिए।

    कुल मिलाकर 13 जुलाई का कारोबारी दिन कई महत्वपूर्ण संकेत लेकर आएगा। वैश्विक बाजारों की चाल तिमाही नतीजे विदेशी निवेशकों का रुख और आर्थिक घटनाक्रम भारतीय शेयर बाजार की दिशा तय करेंगे। निवेशकों के लिए सबसे जरूरी बात यह होगी कि वे अफवाहों से दूर रहें सही जानकारी के आधार पर निर्णय लें और जोखिम प्रबंधन को प्राथमिकता दें। यही रणनीति उन्हें बाजार के उतार चढ़ाव के बीच बेहतर अवसर दिला सकती है।

  • भारत-अमेरिका ट्रेड डील का असर बरकरार, शेयर बाजार में आज भी तेजी के मजबूत संकेत

    भारत-अमेरिका ट्रेड डील का असर बरकरार, शेयर बाजार में आज भी तेजी के मजबूत संकेत


    नई दिल्ली । भारत और अमेरिका के बीच हालिया व्यापार समझौते का असर भारतीय शेयर बाजार में लगातार दिखाई दे रहा है। मंगलवार को बाजार में आई जोरदार तेजी के बाद आज के कारोबार में भी निवेशकों के बीच सकारात्मक माहौल बना हुआ है। बाजार संकेतकों और सेक्टोरल ट्रेंड्स से साफ है कि फिलहाल निवेशकों का रुझान खरीदारी की ओर है और बाजार में विश्वास कायम है।

    मंगलवार को बीएसई सेंसेक्स दो हजार अंकों से अधिक की बढ़त के साथ बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी ने ढाई प्रतिशत से ज्यादा की मजबूती दर्ज की। यह तेजी केवल चुनिंदा शेयरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि लार्जकैप, मिडकैप और स्मॉलकैप सभी श्रेणियों में व्यापक खरीदारी देखने को मिली। बाजार की इस मजबूती को भारत-अमेरिका ट्रेड डील से जुड़ी सकारात्मक उम्मीदों से जोड़कर देखा जा रहा है।

    सेक्टोरल प्रदर्शन पर नजर डालें तो रियल्टी और फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर ने बाजार को ऊपर खींचने में अहम भूमिका निभाई। इसके साथ ही हेल्थकेयर, इंफ्रास्ट्रक्चर, फार्मा, एनर्जी, ऑटो और मेटल सेक्टर में भी अच्छी तेजी देखने को मिली। इससे यह संकेत मिलता है कि बाजार की मजबूती व्यापक आधार पर बनी हुई है।मुख्य सूचकांकों में शामिल अधिकांश शेयर हरे निशान में बंद हुए। बैंकिंग, पावर, मैन्युफैक्चरिंग, एविएशन और कंज्यूमर सेक्टर से जुड़े शेयरों में मजबूत खरीदारी दर्ज की गई। हालांकि, कुछ आईटी और डिफेंस सेक्टर के शेयरों में हल्का दबाव देखा गया, जिससे साफ है कि निवेशक सेक्टर चयन को लेकर सतर्क भी बने हुए हैं।

    लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी तेजी का रुझान बना रहा। मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में करीब तीन प्रतिशत तक की बढ़त दर्ज की गई। बाजार की चौड़ाई मजबूत रहने से निवेशकों के भरोसे को बल मिला है।बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस व्यापार समझौते से निर्यात आधारित उद्योगों को लंबी अवधि में लाभ मिल सकता है। खासतौर पर टेक्सटाइल, फार्मा, ऑटो कंपोनेंट और आईटी सर्विसेज से जुड़े क्षेत्रों में आगे बेहतर प्रदर्शन की संभावना जताई जा रही है। अमेरिकी बाजार में भारतीय कंपनियों की स्थिति मजबूत होने से ऑर्डर और राजस्व में इजाफा हो सकता है।

    हालांकि जानकारों की राय है कि तेजी के माहौल में भी निवेशकों को सतर्क रहना चाहिए। वैश्विक बाजारों के संकेत, ब्याज दरों में बदलाव और कच्चे तेल की कीमतों जैसे कारकों पर नजर रखना जरूरी होगा। कुल मिलाकर, मौजूदा संकेत यही बताते हैं कि भारत-अमेरिका ट्रेड समझौते का असर फिलहाल बाजार में बना रह सकता है।