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  • कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई वैश्विक बाजारों की चिंता, इंडियन बास्केट 120 डॉलर के करीब पहुंचने से बढ़ा दबाव

    कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई वैश्विक बाजारों की चिंता, इंडियन बास्केट 120 डॉलर के करीब पहुंचने से बढ़ा दबाव


    नई दिल्ली ।
    वश्विक बाजारों में सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और कमजोर अंतरराष्ट्रीय संकेतों के कारण निवेशकों की चिंता बनी रही। अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 115 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया, जबकि भारत के लिए महत्वपूर्ण इंडियन क्रूड बास्केट का भाव 120 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया। महंगे तेल का असर भारत के आयात खर्च, महंगाई और तेल विपणन कंपनियों की वित्तीय स्थिति पर पड़ने की आशंका है।

    ब्रेंट क्रूड का भाव पिछले कारोबारी सत्र में बढ़कर 117.41 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था। बाद में यह 116.72 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। सोमवार सुबह इसमें पिछले बंद स्तर के मुकाबले करीब 1.55 प्रतिशत की गिरावट आई और कीमत 114.91 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रही। इसके बावजूद कच्चे तेल का भाव ऊंचे स्तर पर बना हुआ है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल और मई के दौरान भी तेल की कीमतें 115 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंची थीं।

    अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने के बाद ब्रेंट क्रूड का भाव अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंचने की स्थिति में रहा है। सऊदी अरब में हूती हमलों के बाद तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका ने भी कीमतों को समर्थन दिया। सोमवार को भाव में नरमी आने के बावजूद आपूर्ति से जुड़ी चिंताओं और वैश्विक परिस्थितियों के कारण बाजार पर दबाव बना हुआ है।

    भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय कीमतों के साथ-साथ आयात किए जाने वाले कच्चे तेल की वास्तविक लागत भी महत्वपूर्ण है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 22 अक्टूबर को इंडियन क्रूड बास्केट का भाव 119.99 डॉलर प्रति बैरल दर्ज किया गया। अक्टूबर का औसत भाव भी लगभग 120 डॉलर प्रति बैरल बताया गया है। इस स्तर पर कच्चे तेल की खरीद भारत के आयात बिल को बढ़ा सकती है और रुपये तथा महंगाई पर दबाव डाल सकती है।

    महंगे तेल का असर तेल विपणन कंपनियों की कमाई पर भी पड़ रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कंपनियों को प्रतिदिन 500 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हो रहा है। पेट्रोल पर करीब 8 रुपये और डीजल पर 9 रुपये प्रति लीटर का नुकसान बताया गया है। इसके अलावा, प्रत्येक एलपीजी सिलिंडर पर लगभग 300 रुपये की अंडर रिकवरी होने की जानकारी सामने आई है।

    त्योहारी मौसम में पेट्रोल, डीजल और घरेलू गैस की कीमतों में तत्काल बढ़ोतरी की आशंका कम बताई जा रही है। हालांकि, यदि त्योहारों के बाद भी कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो तेल कंपनियां अपनी बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा ग्राहकों तक पहुंचाने पर विचार कर सकती हैं। फिलहाल, खुदरा कीमतों में बदलाव को लेकर कोई निश्चित फैसला सामने नहीं आया है।

    अंतरराष्ट्रीय शेयर बाजारों में भी कमजोरी देखने को मिली। शुक्रवार को अमेरिकी बाजार में डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 652.82 अंक यानी करीब 1.23 प्रतिशत गिरकर 52,215.16 पर बंद हुआ। एसएंडपी 500 में 0.52 प्रतिशत और नैस्डैक कंपोजिट में 0.21 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, सोमवार सुबह अमेरिकी वायदा बाजार में कुछ सुधार दिखाई दिया। डाउ जोन्स फ्यूचर्स 0.24 प्रतिशत बढ़कर 52,341.69 पर कारोबार कर रहा था।

    एशियाई बाजारों में भी मिला-जुला रुख रहा। जापान के निक्केई 225 में करीब 0.26 प्रतिशत, दक्षिण कोरिया के कोस्पी में 0.92 प्रतिशत, चीन के शंघाई कंपोजिट में 0.36 प्रतिशत और सिंगापुर के स्ट्रेट्स टाइम्स में 0.43 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसके विपरीत, हांगकांग का हैंग सेंग 0.31 प्रतिशत ऊपर रहा।

    भारतीय बाजार के लिए शुरुआती संकेत लगभग सपाट रहे। सुबह 7:36 बजे गिफ्ट निफ्टी 22,599.50 पर था, जो पिछले बंद स्तर से 8.50 अंक यानी 0.04 प्रतिशत नीचे था। इस सप्ताह 27 और 28 अक्टूबर को होने वाली अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक भी निवेशकों के लिए अहम है। ऊंची ऊर्जा कीमतों के बीच ब्याज दरों और महंगाई पर फेड के रुख से वैश्विक बाजारों की आगे की दिशा प्रभावित हो सकती है।

  • दो महीने में 250 रुपये प्रति क्विंटल महंगा हुआ गेहूं, त्योहारों से पहले आटा, मैदा और सूजी के दाम बढ़ने की आशंका

    दो महीने में 250 रुपये प्रति क्विंटल महंगा हुआ गेहूं, त्योहारों से पहले आटा, मैदा और सूजी के दाम बढ़ने की आशंका

    नई दिल्ली । त्योहारों के मौसम में आम लोगों के घरेलू बजट पर गेहूं की बढ़ती कीमतों का असर पड़ सकता है। पिछले दो महीनों में गेहूं के भाव में करीब 250 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी दर्ज की गई है। बाजार में कीमतें बढ़कर 3,110 से 3,135 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई हैं। ऐसे में आगामी त्योहारों के दौरान आटा, मैदा और सूजी की कीमतों पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। बाजार में गेहूं की उपलब्धता, मिलों की खरीद और विभिन्न क्षेत्रों से आ रही मांग को इस तेजी की प्रमुख वजहों में गिना जा रहा है।

    गेहूं की सरकारी खरीद निर्धारित लक्ष्य से अधिक होने के बावजूद बाजार में कीमतों में मजबूती बनी हुई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस बार सरकार ने 356 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदने का लक्ष्य रखा था, जिसे पार कर लिया गया। इसके बावजूद पिछले सप्ताह मंडियों में गेहूं की आवक कम होने से कीमतों को सहारा मिला। नमी और रंग के आधार पर गेहूं के भाव 3,110 से 3,135 रुपये प्रति क्विंटल के बीच पहुंच गए। हाल के दिनों में कीमतों में 30 से 35 रुपये प्रति क्विंटल की अतिरिक्त बढ़ोतरी भी दर्ज की गई।

    बाजार से जुड़े कारोबारियों के अनुसार, पिछले दो महीनों से गेहूं की मांग में तेजी बनी हुई है। इसके चलते कीमतों में लगभग 250 रुपये प्रति क्विंटल का इजाफा हुआ है। वहीं, निचले स्तरों की तुलना में भाव में कुल तेजी का अंतर 500 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंचने की बात कही जा रही है। पिछले एक महीने से किसानों की ओर से मंडियों में गेहूं की आवक का दबाव भी कम रहा है। इससे कारोबारियों को पर्याप्त मात्रा में माल जुटाने के लिए खरीद जारी रखनी पड़ रही है।

    गेहूं की कीमतों को मजबूती देने में रोलर फ्लोर मिलों की मांग की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। ये मिलें गेहूं से आटा, मैदा और सूजी तैयार करती हैं। त्योहारों के दौरान इन उत्पादों की खपत बढ़ने की संभावना को देखते हुए मिलों की खरीद प्रभावित हो रही है। इसके साथ ही मैदा और सूजी के व्यापार में बढ़ती गतिविधियों से भी गेहूं की मांग को समर्थन मिल रहा है। यदि कच्चे माल की लागत ऊंची बनी रहती है, तो इसका असर प्रसंस्करण से जुड़े कारोबार पर पड़ सकता है।

    दक्षिण भारत की ओर गेहूं की खेप भेजे जाने से भी बाजार में मांग बनी हुई है। माल की ढुलाई के लिए रेल रैक उपलब्ध होने से दूसरे क्षेत्रों तक आपूर्ति करने में मदद मिल रही है। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की मंडियों में भी गेहूं के भाव में दोबारा तेजी आने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा निर्यात मांग को भी कीमतों को सहारा देने वाले कारकों में शामिल किया जा रहा है। हालांकि, अलग-अलग मंडियों में गेहूं की गुणवत्ता, उपलब्धता और परिवहन लागत के आधार पर भाव में अंतर हो सकता है।

    अब बाजार की नजर सरकारी गेहूं की बिक्री पर टिकी हुई है। कारोबारियों का मानना है कि यदि सरकार बाजार में पर्याप्त मात्रा में गेहूं उपलब्ध कराती है, तो कीमतों पर दबाव कम हो सकता है। दूसरी ओर, सरकारी आपूर्ति सीमित रहने और मंडियों में आवक कम बनी रहने की स्थिति में भाव मजबूत रह सकते हैं। आगे कीमतों की दिशा काफी हद तक इन दोनों कारकों पर निर्भर करेगी।

    आम उपभोक्ताओं के लिए गेहूं की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी चिंता का विषय बन सकती है। आटा, मैदा और सूजी रोजमर्रा के भोजन के साथ त्योहारों पर तैयार होने वाले कई पकवानों में इस्तेमाल होते हैं। मांग बढ़ने पर इन उत्पादों की खुदरा कीमतों में बदलाव की आशंका रहती है, हालांकि गेहूं के थोक भाव में हुई तेजी का असर उपभोक्ताओं तक कितना पहुंचेगा, यह भी प्रसंस्करण लागत, व्यापारियों के मार्जिन और स्थानीय बाजार की स्थिति पर निर्भर करेगा।

  • तीन दिन की गिरावट के बाद शेयर बाजार में लौटी तेजी, सेंसेक्स 517 अंक चढ़ा, आईटी शेयरों में खरीदारी से मिला सहारा

    तीन दिन की गिरावट के बाद शेयर बाजार में लौटी तेजी, सेंसेक्स 517 अंक चढ़ा, आईटी शेयरों में खरीदारी से मिला सहारा

    नई दिल्ली । लगातार तीन कारोबारी दिनों की गिरावट के बाद शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को भारतीय शेयर बाजार ने तेजी के साथ कारोबार की शुरुआत की। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी दोनों हरे निशान में रहे। सेंसेक्स 416.25 अंक यानी 0.57 प्रतिशत की बढ़त के साथ 73,665.64 पर खुला, जबकि निफ्टी 50 ने 54.55 अंक यानी 0.24 प्रतिशत की तेजी के साथ 22,742.20 पर शुरुआत की। पिछले कारोबारी सत्र में सेंसेक्स 73,249.39 और निफ्टी 22,687.65 पर बंद हुआ था।

    कारोबार आगे बढ़ने के साथ सेंसेक्स की तेजी बढ़ी और उसने 517.12 अंक यानी 0.70 प्रतिशत की बढ़त के साथ 73,766.51 का उच्चतम स्तर छुआ। वहीं, निफ्टी 50 करीब 100 अंक यानी 0.43 प्रतिशत चढ़कर 22,787.25 के स्तर तक पहुंचा। बाजार में आई इस तेजी के बावजूद सभी श्रेणियों के शेयरों में खरीदारी का माहौल नहीं दिखा। व्यापक बाजार में दबाव बना रहा और छोटे तथा मझोले शेयरों के सूचकांकों में गिरावट दर्ज की गई।

    निफ्टी स्मॉलकैप 100 सूचकांक में करीब 2 प्रतिशत और निफ्टी मिडकैप 100 में 1.3 प्रतिशत की गिरावट आई। इससे संकेत मिला कि प्रमुख सूचकांकों में बढ़त के बावजूद व्यापक बाजार की स्थिति कमजोर बनी हुई थी। निवेशकों की खरीदारी चुनिंदा क्षेत्रों तक सीमित रही और कई प्रमुख क्षेत्रीय सूचकांक गिरावट में कारोबार करते दिखे।

    क्षेत्रवार प्रदर्शन में आईटी शेयरों ने बाजार को सबसे अधिक सहारा दिया। निफ्टी आईटी सूचकांक में 1.8 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। इसके विपरीत निफ्टी मेटल, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, रियल्टी, ऑटो, पीएसयू बैंक और मीडिया सूचकांकों में सबसे ज्यादा गिरावट रही। इस तरह बाजार की शुरुआती तेजी के बीच अलग-अलग क्षेत्रों के प्रदर्शन में बड़ा अंतर देखने को मिला।

    विदेशी मुद्रा बाजार में भी रुपये में मामूली मजबूती दर्ज की गई। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया तीन पैसे बढ़कर 94.79 पर खुला। इससे पिछले कारोबारी दिन गुरुवार को यह 94.82 के स्तर पर बंद हुआ था। हालांकि, रुपये में सुधार सीमित रहा और वैश्विक बाजारों से मिलने वाले संकेत निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण बने रहे।

    अंतरराष्ट्रीय बाजारों का रुख कमजोर रहा। एशियाई शेयर बाजारों में गिरावट देखी गई, जबकि अमेरिकी बाजार भी अधिकांशतः नुकसान के साथ बंद हुए। अमेरिका में कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई पर बढ़ते खर्च और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों को लेकर चिंताओं ने निवेशकों की धारणा प्रभावित की। अमेरिकी तकनीकी शेयरों में बिकवाली के बीच नैस्डैक सूचकांक 2.6 प्रतिशत गिरकर बंद हुआ। एशिया में जापान का निक्केई सूचकांक शुरुआती कारोबार में लगभग 1.7 प्रतिशत नीचे आ गया।

    बाजार विश्लेषकों के अनुसार, ब्रेंट क्रूड की कीमत 114 डॉलर तक पहुंचना अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार के लिए चिंता का विषय है। दूसरी ओर, अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड प्रतिफल में गिरावट और रुपये में मजबूती को सकारात्मक संकेत माना गया। विश्लेषकों का कहना है कि ये कारक विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली का दबाव कम करने में मदद कर सकते हैं।

    बाजार की आगे की दिशा को लेकर विश्लेषकों ने निफ्टी के लिए 22,600 से 22,650 के स्तर को तत्काल समर्थन और 22,900 से 23,000 के स्तर को प्रतिरोध क्षेत्र बताया। निफ्टी का सापेक्ष शक्ति सूचकांक यानी आरएसआई 43.98 पर रहा, जबकि इसका औसत 38.86 था। पुट-कॉल अनुपात यानी पीसीआर घटकर 0.82 पर आ गया।

    गुरुवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 3,459 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध बिकवाली की थी। इसके विपरीत घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 2,891 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की, जिससे बाजार को सहारा मिला। विश्लेषकों ने यह भी अनुमान जताया कि जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ में लगाए गए 3.73 लाख करोड़ रुपये में से तीन लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि शेयर आवंटन के बाद अगले सोमवार तक व्यवस्था में लौट सकती है। उनके मुताबिक, इससे अगले सप्ताह बाजार में नकदी की उपलब्धता बढ़ने की संभावना है, हालांकि बाजार की दिशा वैश्विक संकेतों और निवेशकों की गतिविधियों पर भी निर्भर करेगी।

  • शेयर बाजार में लगातार तीसरे दिन गिरावट, सेंसेक्स 460 अंक टूटा और निफ्टी 22,688 के करीब बंद

    शेयर बाजार में लगातार तीसरे दिन गिरावट, सेंसेक्स 460 अंक टूटा और निफ्टी 22,688 के करीब बंद

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026 को लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में गिरावट दर्ज की गई। कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 460.30 अंक यानी 0.62 प्रतिशत टूटकर 73,249.39 पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई निफ्टी 123.70 अंक यानी 0.54 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 22,687.65 पर आ गया। बाजार में बिकवाली का दबाव कई प्रमुख क्षेत्रों में दिखाई दिया। मीडिया, एफएमसीजी और रक्षा क्षेत्र के शेयरों में गिरावट ने प्रमुख सूचकांकों पर दबाव बढ़ाया।

    बाजार के जानकारों के मुताबिक, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर रहे हैं। कारोबारी सत्र की शुरुआत कमजोर रुख के साथ हुई। इसके बाद प्रमुख सूचकांकों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। निचले स्तरों पर कुछ समय के लिए खरीदारी भी आई, जिससे गिरावट को सीमित करने में मदद मिली, लेकिन बाजार अंत तक मजबूती हासिल नहीं कर सका। लगातार तीसरे दिन की कमजोरी से संकेत मिलता है कि निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपना रहे हैं।

    क्षेत्रीय सूचकांकों में निफ्टी मीडिया सबसे ज्यादा दबाव में रहा और 2.35 प्रतिशत गिरकर बंद हुआ। निफ्टी एफएमसीजी में 1.41 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी इंडिया डिफेंस 1.21 प्रतिशत टूटा, जबकि निफ्टी एनर्जी और निफ्टी आईटी दोनों में 1.05 प्रतिशत की कमजोरी रही। निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स भी 0.96 प्रतिशत गिरकर बंद हुआ। इन क्षेत्रों में बिकवाली ने बाजार की कमजोरी को और व्यापक बना दिया।

    हालांकि, सभी क्षेत्रों में गिरावट नहीं रही। निफ्टी फार्मा, निफ्टी पीएसयू बैंक और निफ्टी हेल्थकेयर बढ़त के साथ बंद हुए। इन क्षेत्रों में खरीदारी से बाजार को कुछ सहारा मिला, लेकिन इसका असर प्रमुख सूचकांकों की गिरावट को पलटने के लिए पर्याप्त नहीं रहा। निवेशकों की नजर अब कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक घटनाक्रम और आने वाले कारोबारी संकेतों पर बनी हुई है।

    बड़े शेयरों के साथ मध्यम और छोटी कंपनियों के शेयरों में भी कमजोरी देखी गई। निफ्टी मिडकैप 100 सूचकांक 501.90 अंक यानी 0.87 प्रतिशत गिरकर 57,063.95 पर बंद हुआ। निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 211.40 अंक यानी 1.14 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 18,275.90 पर आ गया। छोटी कंपनियों के शेयरों में अपेक्षाकृत अधिक गिरावट से पता चलता है कि बिकवाली का असर केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रहा।

    सेंसेक्स में शामिल बजाज फाइनेंस, अल्ट्राटेक सीमेंट, आईसीआईसीआई बैंक, सन फार्मा, भारतीय स्टेट बैंक, भारती एयरटेल, अदाणी पोर्ट्स, टाटा स्टील, कोटक महिंद्रा बैंक, एचसीएल टेक्नोलॉजीज और बजाज फिनसर्व बढ़त के साथ बंद हुए। इन शेयरों में खरीदारी के बावजूद बाजार की समग्र दिशा कमजोर बनी रही।

    दूसरी ओर, इटरनल, एचडीएफसी बैंक, पावर ग्रिड, ट्रेंट, इन्फोसिस, एशियन पेंट्स, आईटीसी, बीएसई, महिंद्रा एंड महिंद्रा, टीसीएस, एलएंडटी, हिंदुस्तान यूनिलीवर, मारुति सुजुकी, टेक महिंद्रा, टाइटन, इंडिगो, एनटीपीसी और एक्सिस बैंक गिरावट के साथ बंद हुए। इन शेयरों में कमजोरी ने बाजार पर दबाव बनाए रखा।

    विशेषज्ञों के अनुसार, प्रमुख सूचकांकों और व्यापक बाजार में लगातार गिरावट निवेशकों की जोखिम लेने की सीमित इच्छा को दर्शाती है। फिलहाल बाजार की दिशा पर कच्चे तेल की कीमतों, भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक संकेतों का प्रभाव महत्वपूर्ण बना हुआ है। ऐसे माहौल में निवेशक बाजार के अगले रुझान को समझने के लिए सतर्कता से कारोबार कर रहे हैं।

  • कमजोर वैश्विक संकेतों और महंगे कच्चे तेल से शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स 366 अंक टूटा और निफ्टी भी फिसला

    कमजोर वैश्विक संकेतों और महंगे कच्चे तेल से शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स 366 अंक टूटा और निफ्टी भी फिसला

    नई दिल्ली । घरेलू शेयर बाजार में गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026 को कारोबार की शुरुआत गिरावट के साथ हुई। कमजोर वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी की चिंताओं ने निवेशकों की धारणा पर दबाव बनाया। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 366.36 अंक यानी 0.50 प्रतिशत गिरकर 73,343.33 पर खुला। वहीं, एनएसई निफ्टी 50 ने 123.60 अंक यानी 0.54 प्रतिशत की गिरावट के साथ 22,687.75 के स्तर पर कारोबार शुरू किया।

    कारोबार के दौरान बाजार में बिकवाली का दबाव और बढ़ा। सेंसेक्स दिन के शुरुआती कारोबार में 73,005.11 के निचले स्तर तक पहुंच गया। दूसरी ओर, निफ्टी 50 ने 22,554.85 का न्यूनतम स्तर छुआ। निफ्टी में 22,700 का स्तर टूटने से बाजार की कमजोरी को लेकर चिंता बढ़ी। व्यापक बाजार में भी गिरावट देखने को मिली और मिडकैप तथा स्मॉलकैप शेयर दबाव में रहे।

    निफ्टी मिडकैप सूचकांक में 1.04 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप सूचकांक में 0.91 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। क्षेत्रवार कारोबार में ऑटोमोबाइल, धातु और स्वास्थ्य सेवा से जुड़े शेयरों में सबसे ज्यादा कमजोरी दिखाई दी। निफ्टी ऑटो, निफ्टी मेटल और निफ्टी हेल्थकेयर सूचकांकों में 0.98 प्रतिशत तक की गिरावट रही। निफ्टी फार्मा भी 0.78 प्रतिशत कमजोर हुआ। इसके अलावा एफएमसीजी, रियल्टी, सीमेंट और वित्तीय क्षेत्र के शेयरों में भी बिकवाली का दबाव रहा।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में बड़ी कंपनियों के शेयरों का प्रदर्शन मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों की तुलना में बेहतर रहा है। व्यापक बाजार में ऊंचे मूल्यांकन को लेकर चिंताएं बढ़ने के कारण निवेशकों का रुझान अपेक्षाकृत आकर्षक मूल्यांकन वाले बड़े शेयरों की ओर हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के समय में मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों की तेजी को कंपनियों की कमाई के बजाय बाजार में उपलब्ध तरलता से भी समर्थन मिला था। ऐसे में ऊंचे मूल्यांकन वाले शेयरों में सुधार की संभावना बनी हुई है।

    कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड का ऊंचे स्तर पर बने रहना भी घरेलू बाजार के लिए चुनौती माना जा रहा है। ब्रेंट क्रूड वायदा एक प्रतिशत से अधिक चढ़कर लगभग 110 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया। तेल महंगा होने से महंगाई का दबाव बढ़ने की आशंका रहती है, जिसका असर निवेशकों की कारोबारी धारणा पर पड़ सकता है।

    तकनीकी विश्लेषकों के मुताबिक, निफ्टी के लिए 22,590 का स्तर महत्वपूर्ण समर्थन माना जा रहा है। यदि सूचकांक इस स्तर के ऊपर टिकता है, तो बाजार में सुधार की संभावना बनी रह सकती है। हालांकि, तेजी के मजबूत संकेत के लिए निफ्टी का 22,840 के स्तर से ऊपर लौटना जरूरी बताया गया। हालिया गिरावट और 22,700 के स्तर के नीचे कारोबार ने बाजार में संभावित सुधार को लेकर सतर्कता बढ़ाई है।

    इस बीच, बुधवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में लगभग 1,022 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की। घरेलू संस्थागत निवेशकों ने भी करीब 1,614 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध खरीदारी की। इसके बावजूद शुरुआती कारोबार में बाजार गिरावट से नहीं उबर सका।

    एशियाई बाजारों में भी कमजोरी रही। जापान का निक्केई, हांगकांग का हैंगसेंग और दक्षिण कोरिया का कोस्पी शुरुआती कारोबार में दो प्रतिशत तक गिर गए। इसके विपरीत, अमेरिकी बाजारों में बुधवार को तेजी दर्ज की गई थी। प्रौद्योगिकी शेयरों में मजबूती के कारण नैस्डैक लगभग एक प्रतिशत बढ़कर बंद हुआ, जबकि एसएंडपी 500 में 0.58 प्रतिशत की बढ़त रही। कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़ी कंपनियों के बेहतर कारोबारी नतीजों ने अमेरिकी बाजारों को समर्थन दिया था।

  • शेयर बाजार में भारी बिकवाली, सेंसेक्स 876 अंक टूटा और निफ्टी 23 हजार के स्तर से नीचे फिसला

    शेयर बाजार में भारी बिकवाली, सेंसेक्स 876 अंक टूटा और निफ्टी 23 हजार के स्तर से नीचे फिसला


    नई दिल्ली ।
    भारतीय शेयर बाजार में सोमवार, 19 अक्टूबर को भारी बिकवाली देखने को मिली। कमजोर वैश्विक संकेतों और प्रमुख क्षेत्रों के शेयरों में मुनाफावसूली के कारण सेंसेक्स और निफ्टी गिरावट के साथ बंद हुए। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 876.37 अंक यानी 1.17 प्रतिशत टूटकर 73,852.90 पर आ गया। वहीं, निफ्टी 257.20 अंक यानी 1.11 प्रतिशत गिरकर 22,888.95 के स्तर पर बंद हुआ। इस गिरावट के साथ निफ्टी 23,000 के मनोवैज्ञानिक रूप से महत्वपूर्ण स्तर से नीचे चला गया।

    सोमवार के कारोबार में बाजार के ज्यादातर प्रमुख क्षेत्रों में कमजोरी रही। निजी बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं, एफएमसीजी और आईटी शेयरों पर दबाव देखने को मिला। निवेशकों की बिकवाली का असर बड़े शेयरों के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों के सूचकांकों पर भी पड़ा। बाजार में व्यापक गिरावट से संकेत मिला कि निवेशक वैश्विक परिस्थितियों और कंपनियों के तिमाही नतीजों को लेकर सतर्क बने हुए हैं।

    क्षेत्रीय सूचकांकों में निफ्टी प्राइवेट बैंक सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में शामिल रहा। यह 1.85 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ। निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज में 1.58 प्रतिशत, निफ्टी एफएमसीजी में 1.44 प्रतिशत और निफ्टी आईटी में 1.28 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज की गई। निफ्टी सर्विसेज 1.25 प्रतिशत, निफ्टी रियल्टी 1.20 प्रतिशत और निफ्टी कंजप्शन 1.05 प्रतिशत गिरकर बंद हुए। निफ्टी इंडिया डिफेंस में भी 0.94 प्रतिशत की गिरावट रही।

    बाजार की व्यापक कमजोरी के बीच निफ्टी पीएसयू बैंक एकमात्र ऐसा प्रमुख क्षेत्रीय सूचकांक रहा, जिसने तेजी दर्ज की। यह 2.46 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को मार्जिन और एसेट क्वालिटी स्थिर रहने की उम्मीदों से समर्थन मिला। इसके विपरीत, निजी बैंकों में तिमाही नतीजों और मुनाफे के मार्जिन को लेकर चिंताओं के कारण दबाव बना रहा।

    बड़ी कंपनियों के अलावा मध्यम और छोटी कंपनियों के शेयरों में भी गिरावट देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप 100 सूचकांक 641.80 अंक यानी 1.09 प्रतिशत टूटकर 58,487.95 पर बंद हुआ। निफ्टी स्मॉलकैप 100 सूचकांक में 194.05 अंक यानी 1.01 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 18,935.75 पर आ गया। इससे स्पष्ट हुआ कि बिकवाली का असर बाजार के अलग-अलग हिस्सों में देखने को मिला।

    सेंसेक्स में शामिल शेयरों में भारतीय स्टेट बैंक, अदाणी पोर्ट्स, एलएंडटी और इंडिगो बढ़त के साथ बंद हुए। दूसरी ओर, एक्सिस बैंक, अल्ट्राटेक सीमेंट, इन्फोसिस, बजाज फाइनेंस, ट्रेंट, एनटीपीसी और एचडीएफसी बैंक समेत कई प्रमुख शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। हिंदुस्तान यूनिलीवर, बजाज फिनसर्व, भारती एयरटेल, इटरनल, आईसीआईसीआई बैंक, टाटा स्टील, सन फार्मा, कोटक महिंद्रा बैंक, आईटीसी, टाइटन, टेक महिंद्रा, एमएंडएम और पावर ग्रिड भी गिरावट के साथ बंद हुए।

    वैश्विक बाजार की परिस्थितियों ने भी निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया। अमेरिका की ओर से रूस से जुड़े प्रमुख प्रतिबंधों में ढील दिए जाने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में कुछ नरमी आने की बात कही गई। इससे वैश्विक बाजार में रूसी ईंधन की आपूर्ति बढ़ने की उम्मीद बनी। हालांकि, भू-राजनीतिक तनावों के कारण कच्चे तेल की कीमतें अब भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं।

    कुल मिलाकर, कमजोर वैश्विक संकेतों, निजी बैंकिंग और आईटी शेयरों में बिकवाली तथा तिमाही नतीजों को लेकर बनी चिंताओं के बीच बाजार दबाव में रहा। निफ्टी का 23,000 से नीचे बंद होना और मिडकैप-स्मॉलकैप में गिरावट निवेशकों की सतर्कता को दर्शाती है।

  • दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों से बाजारों का कारोबार प्रभावित, त्योहारों की बिक्री पर संकट; व्यापारियों ने अमित शाह को लिखा पत्र

    दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों से बाजारों का कारोबार प्रभावित, त्योहारों की बिक्री पर संकट; व्यापारियों ने अमित शाह को लिखा पत्र

    नई दिल्ली । दिल्ली में जारी विरोध प्रदर्शनों का असर राजधानी के बाजारों और व्यापारिक गतिविधियों पर पड़ने की चिंता बढ़ गई है। व्यापारियों का कहना है कि प्रदर्शन के कारण कई इलाकों में दुकानों को बंद रखना पड़ रहा है और बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही भी प्रभावित हो रही है। इसका असर ऐसे समय में दिखाई दे रहा है, जब दशहरा और दिवाली जैसे प्रमुख त्योहारों के कारण कारोबार में तेजी आने की उम्मीद रहती है। इस स्थिति को लेकर विभिन्न व्यापारी संगठनों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर अपनी समस्याएं बताई हैं और बाजारों में सामान्य गतिविधियां बनाए रखने की मांग की है।

    राजधानी में केंद्र सरकार और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन जारी हैं। व्यापारियों के अनुसार, इन प्रदर्शनों के कारण कई बाजारों में लोग खरीदारी के लिए आने से बच रहे हैं। उनका कहना है कि जब सड़कों पर प्रदर्शन होते हैं और लोगों को आवाजाही में परेशानी या असुरक्षा की आशंका रहती है, तो बाजारों में ग्राहकों की संख्या घट जाती है। इससे दुकानदारों की बिक्री प्रभावित होती है और त्योहारों के दौरान होने वाली कमाई पर भी असर पड़ सकता है।

    दिल्ली इलेक्ट्रिकल ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय शर्मा ने कहा कि दशहरा और दिवाली का समय बिजली की सजावटी लाइटों, झूमरों और घरों को सजाने वाले सामान के कारोबार के लिए महत्वपूर्ण होता है। इन त्योहारों के दौरान लोग घरों और प्रतिष्ठानों की सजावट के लिए बड़ी संख्या में सामान खरीदते हैं। ऐसे में बाजारों में मांग बढ़ने से व्यापारियों को साल के इस हिस्से में बेहतर कारोबार की उम्मीद रहती है। हालांकि, मौजूदा प्रदर्शनों के कारण उन्हें बिक्री प्रभावित होने की चिंता सता रही है।

    अजय शर्मा ने सरकार और प्रदर्शन कर रहे लोगों से अपील की कि फिलहाल विरोध प्रदर्शनों को टालने पर विचार किया जाए, ताकि व्यापारिक गतिविधियां बाधित न हों। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनों के कारण लोग सड़कों पर निकलने से डर रहे हैं। उनके मुताबिक, अपनी मांगों और मुद्दों को लेकर बातचीत के जरिए समाधान निकालना चाहिए, जिससे विरोध भी दर्ज हो सके और आम लोगों तथा कारोबारियों को परेशानी का सामना न करना पड़े।

    व्यापारी संगठनों ने यह भी चिंता जताई है कि कारोबार में गिरावट का असर केवल दुकानदारों तक सीमित नहीं रहेगा। बाजारों में बिक्री कम होने पर सरकार को मिलने वाले कर राजस्व पर भी प्रभाव पड़ सकता है। व्यापारियों का तर्क है कि त्योहारों के दौरान खरीदारी में कमी आने से व्यापारिक गतिविधियां कमजोर हो सकती हैं, जिसका असर संबंधित कारोबार और उससे जुड़े लोगों की आय पर पड़ेगा।

    फोटो मार्केट ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विजय कुमार सेठी ने कहा कि देश में त्योहारों का कारोबारी मौसम 15 अगस्त के बाद शुरू हो जाता है। रक्षाबंधन से लेकर दिवाली के बाद तक बाजारों में आम तौर पर खरीदारी और बिक्री का स्तर बेहतर रहता है। उन्होंने बताया कि व्यापारियों की सालभर की कमाई का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा इन चार महीनों में आता है। ऐसे में इस अवधि के दौरान कारोबार प्रभावित होने से उनकी आर्थिक स्थिति पर गंभीर असर पड़ सकता है।

    सेठी ने प्रदर्शनों के तरीके पर भी सवाल उठाए और इन गतिविधियों को अराजकता बताते हुए आरोप लगाया कि इनके जरिए देश की स्थिरता को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने अमेरिकी उद्योगपति एलन मस्क पर भी भारत के लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाने की मंशा रखने का आरोप लगाया और अपनी बात रखते हुए नेपाल तथा श्रीलंका में हुए घटनाक्रमों से तुलना की। ये आरोप उनके निजी बयान के रूप में सामने आए हैं।

    सेठी ने सरकार से मांग की कि मध्य दिल्ली के प्रमुख व्यापारिक इलाकों में प्रदर्शनों की अनुमति देने के मामले में विशेष ध्यान रखा जाए। व्यापारियों का कहना है कि विरोध और अपनी मांगें रखने के अधिकार के साथ बाजारों की सामान्य गतिविधियों को बनाए रखना भी जरूरी है। उनका आग्रह है कि ऐसी व्यवस्था हो, जिससे त्योहारों के दौरान ग्राहक बाजारों तक पहुंच सकें और व्यापारियों को लगातार कारोबार प्रभावित होने की स्थिति का सामना न करना पड़े।

  • कच्चे तेल और बॉन्ड यील्ड बढ़ने से शेयर बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स 1,247 अंक टूटा

    कच्चे तेल और बॉन्ड यील्ड बढ़ने से शेयर बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स 1,247 अंक टूटा

    नई दिल्ली ।भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार, 24 सितंबर को भारी बिकवाली देखने को मिली। कच्चे तेल की कीमतों में मजबूती, वैश्विक बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और जोखिम से बचने की प्रवृत्ति बढ़ने के कारण प्रमुख सूचकांक बड़ी गिरावट के साथ बंद हुए। सेंसेक्स 1,247.71 अंक यानी 1.67 प्रतिशत टूटकर 73,580.54 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 50 में 383.70 अंक यानी 1.64 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 23,063.10 के स्तर पर बंद हुआ।

    कारोबार की शुरुआत भी कमजोर रही। सेंसेक्स पिछले सत्र के 74,828.25 के बंद स्तर से 555.85 अंक यानी 0.74 प्रतिशत नीचे 74,272.40 पर खुला। दिन के कारोबार में गिरावट और बढ़ी तथा सूचकांक 1,264.33 अंक यानी 1.68 प्रतिशत फिसलकर 73,563.92 के निचले स्तर तक पहुंच गया।

    निफ्टी 50 भी पिछले बंद स्तर 23,446.80 से 225 अंक यानी 0.95 प्रतिशत नीचे 23,221.80 पर खुला। कारोबार के दौरान यह 400.65 अंक यानी 1.70 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,046.15 के निचले स्तर तक चला गया।

    व्यापक बाजार में भी दबाव देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप में 2.25 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप में 1.53 प्रतिशत की गिरावट रही। सेक्टरवार कारोबार में सभी प्रमुख सेक्टर लाल निशान में बंद हुए। निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज और निफ्टी प्राइवेट बैंक में 2 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई।

    इसके अलावा निफ्टी मेटल 1.96 प्रतिशत, निफ्टी ऑटो 1.57 प्रतिशत, निफ्टी पीएसयू बैंक 1.13 प्रतिशत, निफ्टी रियल्टी 1.10 प्रतिशत और निफ्टी एफएमसीजी 1.08 प्रतिशत गिरकर बंद हुए। निफ्टी 50 में केवल सिप्ला, ओएनजीसी और एनटीपीसी के शेयरों में तेजी रही, जबकि बाकी अधिकतर शेयरों पर बिकवाली का दबाव रहा। एचडीएफसी लाइफ, बजाज फाइनेंस, एक्सिस बैंक और बजाज फिनसर्व में अपेक्षाकृत अधिक गिरावट दर्ज हुई।

    बाजार में व्यापक बिकवाली का असर निवेशकों की संपत्ति पर भी पड़ा। एक ही कारोबारी सत्र में करीब 5 लाख करोड़ रुपये की बाजार पूंजी घट गई। बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण पिछले सत्र के लगभग 485 लाख करोड़ रुपये से घटकर 480.95 लाख करोड़ रुपये रह गया।

    गुरुवार के कारोबार में कच्चे तेल की कीमतों में कुछ नरमी आई, लेकिन वे 102 डॉलर प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर से ऊपर बनी रहीं। इसके साथ वैश्विक बॉन्ड यील्ड में तेज बढ़ोतरी हुई। इससे इक्विटी निवेशकों के बीच जोखिम को लेकर चिंता बढ़ी और जोखिम वाली परिसंपत्तियों का आकर्षण प्रभावित हुआ।

    इसी दिन नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के शेयरों की लिस्टिंग भी हुई। शेयर 1.79 प्रतिशत की बढ़त के साथ 1,817 रुपये पर बंद हुए, जो इसके 1,785 रुपये के आईपीओ प्राइस बैंड से ऊपर था।

    बाजार में कमजोरी के बीच महंगाई और आर्थिक विकास को लेकर बनी अनिश्चितताओं ने ब्याज दरों की दिशा पर भी चिंता बढ़ाई। घरेलू स्तर पर इंश्योरेंस और बैंकिंग क्षेत्र में कमीशन स्ट्रक्चर की नियामकीय समीक्षा तथा मुनाफे पर संभावित असर को लेकर भी दबाव बना रहा।

    आने वाले समय में बाजार की दिशा पर निवेशकों की नजर वैश्विक परिस्थितियों, कच्चे तेल की कीमतों और कंपनियों की कमाई पर बनी रह सकती है।

  • पाकिस्तान में ईंधन संकट… शादियों में सिंगल डिश, मार्केट रात 9 बजे बंद… विदेश यात्रा-सरकारी डिनर पर भी रोक

    पाकिस्तान में ईंधन संकट… शादियों में सिंगल डिश, मार्केट रात 9 बजे बंद… विदेश यात्रा-सरकारी डिनर पर भी रोक


    इस्लामाबाद।
    पाकिस्तान (Pakistan) ने पेट्रोल-डीजल (Petrol-Diesel) बचाने के लिए कई फैसले लागू किए हैं. पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद (Islamabad) में अब सभी दुकानें बाज़ार, किराना स्टोर, ग्रोसरी और जनरल स्टोर, शॉपिंग मॉल पूरे हफ़्ते रात 9 बजे बंद हो जाएंगे. शादी हॉल और मैरिज टेंट रात 10 बजे तक बंद हो जाने चाहिए. रेस्टोरेंट और खाने-पीने की जगहें रात 11 बजे तक बंद हो जानी चाहिए. यही नहीं शादी समारोहों (Wedding Ceremonies) में सिर्फ़ एक ही डिश परोसी जा सकेगी. पाकिस्तान सरकार (Pakistan Government) ने सरकारी डिनर पर भी रोक लगा दी है।

    पाकिस्तान ईरान जंग की वजह से भीषण ईंधन संकट से गुजर रहा है. किफ़ायत के ये नए उपाय फ़िलहाल इस्लामाबाद तक ही सीमित हैं, लेकिन पाकिस्तान की फेडरल सरकार ने राज्यों को कहा है कि वे भी इस उपाय को अपनाएं। यही नहीं पाकिस्तान में अपनाए गए नए उपायों में सरकारी गाड़ियां खरीदने पर पूरी तरह रोक, सरकारी गाड़ियों के लिए ईंधन आवंटन में 50% की कटौती शामिल है।

    खर्चा बचाने के लिए पाकिस्तान ने फ़ेडरल सरकार के कर्मचारियों के विदेश यात्रा करने पर तीन महीने की रोक लगा दी है. अगर मंत्री विदेश यात्रा पर जाएंगे तो उन्हें इकोनॉमी क्लास में ट्रेवल करने को कहा गया है. बता दें कि ईरान युद्ध, इकोनॉमी की खस्ताहालत और कर्जों ने पाकिस्तान को बुरा हाल कर रखा है. इसलिए पाकिस्तान सरकार को ये फैसले लेने पड़े हैं।

    पाकिस्तान ने मार्च में अमेरिका-ईरान युद्ध शुरू होने के बाद इसी तरह के खर्च में कटौती के उपाय लागू किए थे. उन उपायों के तहत इस्लामाबाद ने दो हफ़्ते के लिए स्कूल बंद कर दिए थे, सरकारी अधिकारियों के लिए ईंधन की खपत कम कर दी थी, और ईंधन बचाने व सरकारी खर्च घटाने के मकसद से ऑफ़िस कर्मचारियों को घर से काम करने के लिए कहा था. अब पाकिस्तान एक बार फिर से ऐसे ही उपायों को अपना रहा है।

    पाकिस्तान सरकार के कैबिनेट डिवीज़न ने गुरुवार को इस बारे में नोटिफ़िकेशन जारी किया और ये उपाय तुरंत लागू हो गए. ईंधन की खपत में कटौती और फ़ेडरल अधिकारियों के विदेश यात्रा पर प्रतिबंध समेत कुछ पाबंदियां कम से कम तीन महीने तक लागू रहेंगी।

    PAK के एक अखबार के अनुसार आम लोगों पर असर डालने वाले उपायों में पाकिस्तान सरकार ने निर्देश दिया है कि शादी से जुड़े सभी कार्यक्रमों और आयोजनों में सिर्फ़ एक ही डिश परोसी जाए. सरकार ने कहा है कि कमर्शियल जगहों के लिए जल्दी बंद होने का समय भी तय किया गया है. दुकानों, बाज़ारों, शॉपिंग मॉल, डिपार्टमेंटल और ग्रोसरी स्टोर को रात 9 बजे तक बंद करना होगा।

    शादी-ब्याह के हॉल, टेंट और दूसरे कमर्शियल वेन्यू जहां जश्न वाले कार्यक्रम होते हैं, उन्हें रात 10 बजे तक बंद करना होगा, जबकि रेस्टोरेंट, कैफ़े, खाने-पीने की जगहों और फ़ूड आउटलेट को रात 11 बजे तक बंद करना होगा. टेकअवे और होम-डिलीवरी सेवाओं को इस पाबंदी से छूट दी गई है।


    सरकारी खर्च में 5% की कटौती

    – पाकिस्तान ने कहा है कि चालू वित्त वर्ष के दौरान कर्मचारियों से जुड़े खर्चों को छोड़कर अन्य खर्चों (Non-ERE) में हर महीने 5% की कटौती की जाएगी.
    – यह नियम पाकिस्तान के विदेशी मिशनों और विदेशों में तैनात अधिकारियों पर भी लागू होगा. विकास परियोजनाओं को खर्च में कटौती के दायरे से बाहर रखा गया है.
    – सरकार ने तीन महीने के लिए विदेश दौरों और यात्राओं पर पूरी तरह रोक लगाने की भी घोषणा की है, जिसमें अनिवार्य दौरे भी शामिल हैं.
    – जिन मामलों में विदेश यात्रा ज़रूरी है वहां सरकारी प्रतिनिधियों और अधिकारियों को इकॉनमी क्लास में यात्रा करने का निर्देश दिया गया है.
    – एक रिपोर्ट के मुताबिक, ये पाबंदियां मंत्रियों, सलाहकारों, राज्य मंत्रियों, प्रधानमंत्री के विशेष सहायकों, सांसदों और सरकारी अधिकारियों पर लागू होती हैं.


    सरकारी डिनर और सेमिनार पर भी रोक

    – पाकिस्तान ने सरकारी डिनर पर भी रोक लगा दी है, लेकिन विदेशी प्रतिनिधिमंडलों से जुड़े कार्यक्रमों में इसमें छूट दी गई है. पाकिस्तान ने अपने सरकारी विभागों को निर्देश दिया गया है कि वे शहर के भीतर होने वाली बैठकों को छोड़कर, ज़्यादातर टेलीकॉन्फ़्रेंस के ज़रिए बैठकें करें. सरकार के फ़ंड से होने वाले सरकारी सेमिनार, ट्रेनिंग सेशन और कॉन्फ़्रेंस पर भी रोक लगा दी गई है. अगर ऐसे कार्यक्रम करना ज़रूरी हो, तो विभागों से कहा गया है कि वे बाहरी जगहों पर पैसे खर्च करने के बजाय सरकारी सुविधाओं, जैसे ऑडिटोरियम और कमिटी रूम का इस्तेमाल करें।

  • वैश्विक तनाव और बढ़ते क्रूड दबाव से बाजार में गिरावट, सेंसेक्स 121 अंक टूटा और निफ्टी 0.34 प्रतिशत नीचे बंद

    वैश्विक तनाव और बढ़ते क्रूड दबाव से बाजार में गिरावट, सेंसेक्स 121 अंक टूटा और निफ्टी 0.34 प्रतिशत नीचे बंद

    नई दिल्ली ।पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण वैश्विक शेयर बाजारों में कमजोरी का असर शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार पर भी दिखाई दिया। सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन प्रमुख सूचकांक शुरुआती गिरावट के बाद निचले स्तर से संभले, लेकिन कारोबार का अंत लाल निशान में हुआ। आईटी, एफएमसीजी और बैंकिंग शेयरों से बाजार को कुछ सहारा मिला, इसके बावजूद सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट दर्ज की गई।

    कारोबार समाप्त होने पर 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 120.83 अंक यानी 0.16 प्रतिशत गिरकर 74,781.76 पर बंद हुआ। निफ्टी 50 भी 79.70 अंक यानी 0.34 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,398.10 पर रहा। दिन के दौरान दोनों सूचकांकों ने निचले स्तर से कुछ सुधार किया, जिससे अंतिम गिरावट शुरुआती दबाव की तुलना में सीमित रही।

    सेंसेक्स पिछले बंद स्तर 74,902.59 के मुकाबले 593.42 अंक यानी 0.79 प्रतिशत नीचे 74,309.16 पर खुला था। कारोबार के दौरान यह एक समय 74,917.15 के उच्च स्तर तक पहुंचा, जबकि दिन के निचले स्तर पर 74,160.16 तक फिसल गया। इस तरह सेंसेक्स ने अपने दिन के निचले स्तर से 621.59 अंक की रिकवरी की।

    निफ्टी भी पिछले बंद स्तर 23,477.80 के मुकाबले 207 अंक यानी 0.88 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,270.30 पर खुला। कारोबार के दौरान यह 23,448.10 के उच्च स्तर तक पहुंचा, जबकि 23,231.40 का निचला स्तर भी देखा गया।

    व्यापक बाजार में निफ्टी मिडकैप और निफ्टी स्मॉलकैप क्रमशः 0.26 प्रतिशत और 0.58 प्रतिशत नीचे रहे। सेक्टरों में निफ्टी रियल्टी और निफ्टी मेटल सबसे ज्यादा कमजोर रहे। रियल्टी इंडेक्स में 2.7 प्रतिशत और मेटल इंडेक्स में 2.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। ऑटो, ऑयल एंड गैस, पीएसयू बैंक और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में भी दबाव रहा।

    इसके विपरीत प्राइवेट बैंक, मीडिया और आईटी सूचकांकों में बढ़त देखने को मिली। निफ्टी 50 में एचडीएफसी बैंक, डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज, टेक महिंद्रा, एचडीएफसी लाइफ और विप्रो प्रमुख बढ़त वाले शेयर रहे। वहीं हिंडाल्को इंडस्ट्रीज, जेएसडब्ल्यू स्टील, आयशर मोटर्स, टाटा स्टील और ओएनजीसी में सबसे ज्यादा कमजोरी रही।

    बाजार पर दबाव के प्रमुख कारणों में पश्चिम एशिया का तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, बॉन्ड यील्ड में वृद्धि और विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली शामिल रही। ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर 110 डॉलर की ओर बढ़ा, जिससे आपूर्ति बाधित होने की चिंता बढ़ी।

    कच्चे तेल की महंगाई ने वैश्विक बॉन्ड यील्ड पर भी दबाव बढ़ाया। अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 5 प्रतिशत के करीब पहुंचने से इक्विटी वैल्यूएशन पर दबाव बढ़ा और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख की आशंकाएं मजबूत हुईं। इस बीच रुपया कमजोर होकर 95.6 प्रति डॉलर पर आ गया।

    पूरे सप्ताह की बात करें तो निफ्टी 50 में 2.1 प्रतिशत की गिरावट रही। मिडकैप 100 और स्मॉलकैप 100 में क्रमशः 0.3 प्रतिशत और 0.6 प्रतिशत की कमजोरी आई। प्राइवेट बैंक इंडेक्स 0.5 प्रतिशत चढ़ा, जबकि रियल्टी क्षेत्र कमजोर रहा।

    बैंक यूनियनों की देशव्यापी हड़ताल से भी बैंकिंग गतिविधियां प्रभावित हुईं। कर्मचारी पांच दिन के कार्य सप्ताह और पीएलआई योजना में बदलाव जैसी मांगों को लेकर हड़ताल पर रहे। इस महीने के अंत में और 26 अक्टूबर से भी हड़ताल प्रस्तावित है।

    प्राइमरी बाजार में एनएसई के आईपीओ का प्राइस बैंड 1,700 से 1,785 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है। इश्यू 17 सितंबर को खुलेगा और इससे करीब 22,662 करोड़ रुपये जुटाने की उम्मीद है। अगले सप्ताह निवेशकों की नजर भारत के अगस्त सीपीआई और डब्ल्यूपीआई आंकड़ों के साथ अमेरिकी फेड के नीतिगत फैसले, रिटेल सेल्स और औद्योगिक उत्पादन पर रहेगी। क्रूड, रुपया और वैश्विक बॉन्ड यील्ड भी बाजार की दिशा के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे।