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  • शाजापुर में शादी के नाम पर ठगी: लुटेरी दुल्हन गैंग ने लाखों रुपए ऐंठे, शिकायत दर्ज होने के बाद जांच शुरू

    शाजापुर में शादी के नाम पर ठगी: लुटेरी दुल्हन गैंग ने लाखों रुपए ऐंठे, शिकायत दर्ज होने के बाद जांच शुरू


    शाजापुर । शाजापुर जिले में शादी के नाम पर ठगी करने वाले कथित ‘लुटेरी दुल्हन’ गिरोह का मामला सामने आया है। पनवाड़ी गांव के दो अलग-अलग परिवारों ने आरोप लगाया है कि दलालों और महिलाओं के एक संगठित गिरोह ने उनसे करीब साढ़े पांच लाख रुपये की ठगी की है। शादी के कुछ ही दिनों बाद दोनों दुल्हनें घर छोड़कर फरार हो गईं और अब तक वापस नहीं लौटीं। पीड़ित परिवारों ने 21 मई को सुनेरा थाने और पुलिस अधीक्षक कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई थी, हालांकि आरोप है कि शिकायत के कई दिन बाद भी पुलिस स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

    पहला मामला: 15 दिन बाद ‘दादी की तबीयत’ का बहाना बनाकर फरार
    पहले मामले में पनवाड़ी निवासी निर्भय सिंह ने बताया कि उनके बेटे धर्मेंद्र की शादी कराने के लिए दलाल नारायण पांडा, बाबू और सुखराम ने झाबुआ निवासी ज्योति से संपर्क कराया था। शादी तय कराने के एवज में करीब दो लाख रुपये लिए गए।

    परिवार का कहना है कि 19 नवंबर 2025 को विवाह से जुड़े दस्तावेज भी तैयार किए गए थे। शादी के बाद ज्योति मात्र 15 दिन तक ही घर में रही और फिर ‘दादी की तबीयत खराब’ होने का बहाना बनाकर घर से चली गई, जिसके बाद वह वापस नहीं लौटी।

    दूसरा मामला: तीन लाख लेकर शादी, फिर मोबाइल और जेवर लेकर फरार
    दूसरे मामले में अर्जुन नामक युवक ने आरोप लगाया है कि उसकी शादी रानू बाई मिश्रा से कराने के नाम पर करीब तीन लाख रुपये वसूले गए। आरोप है कि दलालों ने खुद को लड़की का रिश्तेदार बताकर विवाह संपन्न कराया। अर्जुन के अनुसार, शादी के लगभग 15 दिन बाद रानू बाई इंदौर जाने की बात कहकर घर से निकली और फिर वापस नहीं लौटी। वह अपने साथ मोबाइल फोन और चांदी की पायजेब भी ले गई। पीड़ितों का कहना है कि जब उन्होंने अपने पैसे वापस मांगे तो आरोपियों ने गाली-गलौज की और जान से मारने की धमकी दी।

    दलालों का संगठित नेटवर्क, मुख्य आरोपी पर आरोप
    शिकायत में बताया गया है कि इस पूरे मामले में दलालों का एक नेटवर्क सक्रिय है। इसमें नारायण पांडा (शाजापुर), बाबू (तराना, उज्जैन) और सुखराम (धार) शामिल हैं। सुखराम को इस गिरोह का मुख्य दलाल बताया जा रहा है, जो लड़कियों से संपर्क कर शादी तय कराने का काम करता है और पैसों का लेन-देन भी संभालता है। पीड़ित परिवारों ने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और ठगी की राशि वापस दिलाने की मांग की है।

    पुलिस जांच जारी
    सुनेरा थाना प्रभारी अंकित मुकाती ने बताया कि शिकायतें प्राप्त हो चुकी हैं और मामले की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।

  • पहली पत्नी को बचाने के लिए रची गई अनोखी चाल, ग्वालियर में हैरान करने वाला मामला

    पहली पत्नी को बचाने के लिए रची गई अनोखी चाल, ग्वालियर में हैरान करने वाला मामला


    मध्य प्रदेश । Gwalior एक बार फिर एक ऐसे सनसनीखेज मामले को लेकर सुर्खियों में है, जहां शादी के पवित्र रिश्ते को एक सुनियोजित धोखे के खेल में बदल दिया गया। नाका चंद्रवदनी क्षेत्र में सामने आए इस मामले ने पुलिस से लेकर स्थानीय लोगों तक सभी को हैरान कर दिया है।

    जांच के अनुसार, जबलपुर में एक निजी अस्पताल में टीम लीडर के पद पर कार्यरत रतन शर्मा की शादी राधा उर्फ दीक्षा नाम की महिला से कराई गई थी। शुरुआत में सब कुछ सामान्य लगा, लेकिन शादी के कुछ ही दिनों बाद दुल्हन की संदिग्ध गतिविधियों ने पूरे मामले को मोड़ दिया।

    सबसे चौंकाने वाला खुलासा तब हुआ जब रतन शर्मा को पता चला कि जिसे दुल्हन का “मुंहबोला भाई” बताया गया था, वह असल में उसका पति अजय चौहान है। यही नहीं, पूरी शादी एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा थी, जिसे पहली पत्नी से जुड़े विवाद को छिपाने और कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए रचा गया था।

    दरअसल, आरोपी अजय चौहान की पहली शादी 2009 में हुई थी, जिससे उसके बच्चे भी हैं। बाद में उसने दूसरी शादी राधा उर्फ दीक्षा से आगरा के आर्य समाज मंदिर में कर ली थी। जब पहली पत्नी को इस दूसरी शादी की जानकारी मिली, तो उसने कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी। इसी डर से पूरी साजिश तैयार की गई।

    योजना के तहत दीक्षा की शादी किसी अन्य युवक से कराई गई, ताकि पहली पत्नी को भ्रमित किया जा सके और मामला शांत दिखाया जा सके। इसी कड़ी में रतन शर्मा को निशाना बनाया गया, जिनसे शादी के नाम पर लाखों रुपये भी वसूले गए।

    शादी के बाद रतन को पत्नी के व्यवहार पर शक हुआ। वह मोबाइल पर छिपकर बातचीत करती थी, जिससे संदेह और गहरा गया। बाद में जब रतन ने मोबाइल की चैट चेक की, तो उसमें पति-पत्नी जैसी बातचीत सामने आई, जिससे पूरा राज खुल गया।

    इसके बाद रतन ने अगले तीन दिनों तक दुल्हन की गतिविधियों पर नजर रखी और पर्याप्त सबूत इकट्ठा कर पुलिस को सूचना दी। पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि शादी से पहले परिवार ने खुद को गरीब और अनाथ बताकर सहानुभूति हासिल की थी और शादी में भारी खर्च भी करवाया गया।

    आरोप है कि भविष्य में दहेज और घरेलू हिंसा का झूठा केस दर्ज कर और रकम वसूलने की योजना भी बनाई गई थी। पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपी अजय चौहान और उसकी पत्नी दीक्षा को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि पांच अन्य आरोपी फरार हैं।

    पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि क्या यह गिरोह पहले भी इस तरह की ठगी की घटनाओं में शामिल रहा है। Gwalior में सामने आया यह मामला एक बार फिर “लुटेरी दुल्हन” गैंग के नए तरीके को उजागर करता है, जहां रिश्तों का इस्तेमाल आर्थिक धोखाधड़ी के लिए किया जा रहा है।