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  • उज्जैन में स्वतंत्रता दिवस का मुख्य समारोह, गौतम टेटवाल ने फहराया तिरंगा और शहीद परिवारों को किया सम्मानित

    उज्जैन में स्वतंत्रता दिवस का मुख्य समारोह, गौतम टेटवाल ने फहराया तिरंगा और शहीद परिवारों को किया सम्मानित


    मध्य प्रदेश:
    के उज्जैन में स्वतंत्रता दिवस का मुख्य समारोह दशहरा मैदान पर आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत वंदे मातरम के साथ हुई। इसके बाद प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल ने ध्वजारोहण किया। तिरंगा फहराए जाने के बाद राष्ट्रगान हुआ और परेड का आयोजन किया गया।

    ध्वजारोहण के बाद प्रभारी मंत्री ने परेड की सलामी ली। समारोह में प्रशासनिक अधिकारी, जनप्रतिनिधि, स्कूली विद्यार्थी और शहर के नागरिक बड़ी संख्या में मौजूद रहे। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में देशभक्ति और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का विशेष आयोजन किया गया।

    दशहरा मैदान पर ध्वजारोहण के दौरान संभागायुक्त आशीष सिंह, कलेक्टर रौशन सिंह, एसपी प्रदीप शर्मा, डीआईजी नवनीत भसीन, विधायक अनिल जैन कालूखेड़ा और सांसद अनिल फिरोजिया सहित अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और उनके परिजन भी कार्यक्रम में शामिल हुए।

    ध्वजारोहण के बाद समारोह में परेड निरीक्षण और मार्च पास्ट हुआ। इसके साथ ही परेड कमांडरों से परिचय कराया गया। कार्यक्रम में हर्ष फायर के बाद राष्ट्रगान और मध्य प्रदेश गान भी हुआ। स्वतंत्रता दिवस समारोह की निर्धारित गतिविधियों के तहत विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।

    समारोह में स्कूली विद्यार्थियों ने पीटी का प्रदर्शन किया। इसके बाद बच्चों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। देशभक्ति गीतों पर विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों का ध्यान आकर्षित किया। बच्चों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देशभक्ति का संदेश दिया।

    कार्यक्रम के दौरान स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान किया गया। इसके अलावा कारगिल शहीदों के परिवारों को भी सम्मानित किया गया। देहदान करने वाले लोगों के परिजनों का भी समारोह में सम्मान किया गया।

    सम्मान समारोह स्वतंत्रता दिवस के मुख्य कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। शहीद परिवारों और अन्य सम्मानित लोगों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए उन्हें मंच पर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में स्वतंत्रता संग्राम और देश के लिए योगदान देने वाले लोगों को याद किया गया।

    समारोह के दौरान मुख्यमंत्री के संदेश का प्रसारण भी किया गया। इसके बाद मुख्य अतिथि प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल ने उपस्थित लोगों को संबोधित किया। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय भावना, देश के लिए बलिदान और सामाजिक योगदान से जुड़े विषय प्रमुख रहे।

    दशहरा मैदान पर आयोजित समारोह में प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के साथ बड़ी संख्या में शहरवासी भी शामिल हुए। विद्यार्थियों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और परेड के कारण कार्यक्रम में विविध गतिविधियां देखने को मिलीं।

    उज्जैन के मुख्य स्वतंत्रता दिवस समारोह में ध्वजारोहण, परेड, सांस्कृतिक कार्यक्रम और सम्मान समारोह को एक साथ शामिल किया गया। प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल ने तिरंगा फहराकर कार्यक्रम की शुरुआत की और परेड की सलामी ली। इसके बाद विभिन्न प्रस्तुतियों और सम्मान कार्यक्रमों के साथ समारोह आगे बढ़ा।

    इस दौरान स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों, लोकतंत्र सेनानियों और कारगिल शहीदों के परिवारों का सम्मान कर उनके योगदान को याद किया गया। स्कूली बच्चों ने पीटी और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए समारोह में भागीदारी की। बड़ी संख्या में अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और नागरिकों की मौजूदगी में उज्जैन का मुख्य स्वतंत्रता दिवस समारोह संपन्न हुआ।

  • ऑपरेशन सिंदूर पर सियासी संग्राम तेज, कांग्रेस ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के इस्तीफे की उठाई मांग; सरकार के बयान पर छिड़ी नई बहस

    ऑपरेशन सिंदूर पर सियासी संग्राम तेज, कांग्रेस ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के इस्तीफे की उठाई मांग; सरकार के बयान पर छिड़ी नई बहस

    नई दिल्ली । ऑपरेशन सिंदूर को लेकर राजनीतिक विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। कांग्रेस ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के संसद में दिए गए बयान पर सवाल उठाते हुए उनके इस्तीफे की मांग की है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार ने सैन्य अभियान के दौरान शहीद हुए जवानों की जानकारी समय पर सार्वजनिक नहीं की और संसद में तथ्यों को सही तरीके से प्रस्तुत नहीं किया। वहीं केंद्र सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि रक्षा मंत्री के बयान को संदर्भ से अलग करके पेश किया जा रहा है और शहीदों को पूरा सम्मान पहले ही दिया जा चुका था।

    विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब राष्ट्रीय समर स्मारक पर ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शहीद हुए छह सैन्यकर्मियों के नाम दर्ज किए गए। इसके बाद कांग्रेस ने दावा किया कि जुलाई 2025 में संसद के भीतर रक्षा मंत्री ने कहा था कि इस अभियान में कोई भारतीय सैनिक शहीद नहीं हुआ था। विपक्ष का आरोप है कि अब सामने आए तथ्यों से उस बयान पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं और सरकार को इस विषय पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए।

    कांग्रेस के पूर्व सैनिक प्रकोष्ठ से जुड़े नेताओं ने प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि यदि सैन्य अभियान के दौरान जवानों ने सर्वोच्च बलिदान दिया था, तो इसकी जानकारी संसद और देश के सामने समय पर रखी जानी चाहिए थी। पार्टी ने रक्षा मंत्री से इस्तीफे की मांग करने के साथ उनके खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाने की भी बात कही है। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री और सरकार से शहीदों के परिवारों के प्रति सार्वजनिक रूप से संवेदना और स्पष्टीकरण देने की मांग भी दोहराई है।

    दूसरी ओर केंद्र सरकार ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताया है। सरकार का कहना है कि संसद में दिया गया बयान विशेष संदर्भ में था और उसका संबंध उन दावों से था जिनमें भारतीय लड़ाकू विमानों को नुकसान पहुंचने की बात कही जा रही थी। सरकार के अनुसार रक्षा मंत्री का आशय यह था कि अभियान के दौरान किसी भी पायलट की जान नहीं गई और किसी विमान को दुश्मन के कब्जे में नहीं जाने दिया गया। इसलिए बयान की गलत व्याख्या कर राजनीतिक विवाद खड़ा किया जा रहा है।

    सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि सैन्य अभियानों से जुड़ी कई जानकारियां राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक कारणों से तत्काल सार्वजनिक नहीं की जातीं। उसके अनुसार ऑपरेशन से संबंधित संवेदनशील सूचनाओं का समय से पहले खुलासा करना सुरक्षा हितों के विपरीत हो सकता है। सरकार का कहना है कि शहीद सैनिकों का अंतिम संस्कार पूरे सैन्य सम्मान के साथ किया गया और संबंधित परिवारों को सभी औपचारिक सम्मान प्रदान किए गए थे।

    इस पूरे विवाद ने राष्ट्रीय सुरक्षा, सैन्य गोपनीयता और लोकतांत्रिक जवाबदेही के बीच संतुलन को लेकर नई बहस छेड़ दी है। विपक्ष का कहना है कि सैन्य रणनीति और परिचालन संबंधी गोपनीयता अलग विषय है, लेकिन शहीदों की जानकारी और संसद को दी जाने वाली सूचना में पारदर्शिता बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है। वहीं सरकार का तर्क है कि सुरक्षा से जुड़े मामलों में सूचनाओं का सार्वजनिक समय और स्वरूप परिस्थितियों के अनुसार तय किया जाता है।

    फिलहाल भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस की इस्तीफे की मांग पर कोई विस्तृत राजनीतिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। हालांकि विपक्ष ने संकेत दिए हैं कि वह आगामी संसदीय सत्र में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाएगा। ऐसे में आने वाले दिनों में यह विवाद केवल रक्षा मंत्री के बयान तक सीमित न रहकर राष्ट्रीय सुरक्षा, सैन्य अभियानों की सूचना नीति और संसद के प्रति सरकार की जवाबदेही जैसे व्यापक मुद्दों पर राजनीतिक और संसदीय बहस का केंद्र बन सकता है।