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  • भारतीय अर्थव्यवस्था की ताकत पर मारुति चेयरमैन का भरोसा! 2031 तक 63 लाख कारों का बाजार होने का अनुमान

    भारतीय अर्थव्यवस्था की ताकत पर मारुति चेयरमैन का भरोसा! 2031 तक 63 लाख कारों का बाजार होने का अनुमान


    नई दिल्ली। मारुति सुजुकी इंडिया के चेयरमैन आरसी भार्गव ने भारतीय अर्थव्यवस्था और ऑटो सेक्टर को लेकर बड़ा भरोसा जताया है। उन्होंने कहा है कि जीएसटी 2.0 के सुधारों ने न केवल ऑटोमोबाइल सेक्टर को फायदा पहुंचाया है बल्कि अर्थव्यवस्था के कई दूसरे क्षेत्रों को भी मजबूती दी है। पश्चिमी एशिया में युद्ध के कारण पैदा हुई वैश्विक अस्थिरता के बीच भी भारत की अर्थव्यवस्था का मजबूत प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि आर्थिक सुधारों का असर जमीन पर दिखाई दे रहा है। भार्गव ने यह बात कंपनी की वार्षिक आम बैठक में शेयरधारकों को संबोधित करते हुए कही।

    भार्गव के मुताबिक भारतीय अर्थव्यवस्था मौजूदा चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी अच्छा प्रदर्शन कर रही है। पश्चिमी एशिया में युद्ध के कारण दुनिया के कई हिस्सों में आर्थिक अनिश्चितता बढ़ी है लेकिन इसके बावजूद भारत का जीएसटी कलेक्शन अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर बना हुआ है। उनका मानना है कि अगर जीएसटी में सुधार नहीं किए गए होते तो पिछले कुछ मुश्किल महीनों में भारतीय अर्थव्यवस्था इतना बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाती। उन्होंने जीएसटी सुधारों को ऐतिहासिक बदलाव बताते हुए केंद्र सरकार और संबंधित सभी पक्षों के प्रयासों की सराहना की।

    मारुति सुजुकी चेयरमैन ने कहा कि आर्थिक सुधारों से देश की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ती है और इसका सीधा असर आर्थिक गतिविधियों पर पड़ता है। जब कारोबार का विस्तार होता है तो रोजगार के अवसर भी बढ़ते हैं। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों से सुधारों की प्रक्रिया को और तेज करने की अपील की। साथ ही कारोबार करना आसान बनाने और तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उनके अनुसार सरकारी कामकाज में तकनीक का अधिक इस्तेमाल होने से भ्रष्टाचार और देरी को कम करने में मदद मिल सकती है।

    आरसी भार्गव ने यह भी कहा कि देश में जितनी तेजी से संपत्ति का निर्माण होगा उतनी ही तेजी से सरकारी राजस्व में भी बढ़ोतरी होगी। उनका मानना है कि यदि सरकारी कार्यक्रम इसी दिशा में आगे बढ़ते रहे तो आर्थिक विकास का लाभ समाज के ज्यादा बड़े हिस्से तक पहुंच सकता है। इस दौरान उन्होंने भारतीय अर्थव्यवस्था में मौजूद विकास की संभावनाओं को लेकर भी सकारात्मक रुख जाहिर किया।

    ऑटोमोबाइल सेक्टर की बात करें तो मारुति सुजुकी ने आने वाले वर्षों में कार बाजार के मजबूत विस्तार का अनुमान जताया है। कंपनी के अनुसार वर्ष 2031 तक भारत में कार इंडस्ट्री का आकार 61 लाख से 63 लाख यूनिट तक पहुंच सकता है। खासतौर पर छोटी कारों के बाजार में आने वाले वर्षों में तेज वृद्धि की उम्मीद जताई गई है। कंपनी इस बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए अपनी उत्पादन क्षमता में लगातार विस्तार कर रही है।

    मारुति सुजुकी की इंस्टॉल्ड प्रोडक्शन क्षमता वित्त वर्ष 2026-27 के अंत तक 29 लाख यूनिट तक पहुंचाने की योजना है। इसके बाद वित्त वर्ष 2030-31 के अंत तक इसे बढ़ाकर 36.5 लाख यूनिट करने का लक्ष्य रखा गया है। कंपनी ने अगले पांच वर्षों के लिए अपना पूंजीगत खर्च भी बढ़ाकर 77500 करोड़ रुपए कर दिया है। भार्गव ने संकेत दिया कि कंपनी का यह बड़ा निवेश भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास क्षमता और आने वाले समय में ऑटोमोबाइल बाजार में बढ़ती मांग पर भरोसे को दर्शाता है।

  • E20 पेट्रोल पर नया विवाद: कार कंपनियों की ईमेल बातचीत में सामने आई चिंता तो SIAM ने क्यों वापस लिया पत्र?

    E20 पेट्रोल पर नया विवाद: कार कंपनियों की ईमेल बातचीत में सामने आई चिंता तो SIAM ने क्यों वापस लिया पत्र?


    नई दिल्ली। देशभर में E20 पेट्रोल को लेकर चल रही बहस के बीच एक नई रिपोर्ट ने ऑटो सेक्टर में हलचल बढ़ा दी है। पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल ब्लेंडिंग को लेकर पहले से ही वाहन मालिकों के बीच कई तरह की चिंताएं सामने आती रही हैं। अब Reuters की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि Tata Motors Maruti Suzuki और Mahindra जैसी बड़ी ऑटो कंपनियों के अधिकारी भी E20 फ्यूल की गुणवत्ता को लेकर आपस में चर्चा कर रहे थे। कंपनियों के बीच हुई ईमेल बातचीत में पेट्रोल में क्लोराइड और नमी की मात्रा को लेकर चिंता सामने आने की बात कही गई है।

    भारत में E20 फ्यूल को पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम करने और प्रदूषण घटाने के उद्देश्य से बढ़ावा दिया गया है। सरकार की इथेनॉल ब्लेंडिंग नीति के तहत देशभर में E20 पेट्रोल का इस्तेमाल बढ़ाया गया है। लेकिन इसके साथ ही वाहन मालिकों की चिंता भी बढ़ी है कि लंबे समय तक ऐसे ईंधन के इस्तेमाल का गाड़ियों पर क्या असर पड़ेगा। इसी बीच ऑटो कंपनियों से जुड़े कुछ आंतरिक डेटा ने इस बहस को और गंभीर बना दिया है।

    रिपोर्ट के मुताबिक कई ऑटोमेकर्स ने करीब एक साल की अवधि में 21 राज्यों के 250 से ज्यादा पेट्रोल पंपों से ईंधन के सैंपल इकट्ठा कर उनकी जांच की थी। दावा है कि 18 राज्यों के कई सैंपल में क्लोराइड की मात्रा और नमी का स्तर ज्यादा पाया गया। कंपनियों से जुड़े अधिकारियों के बीच हुई बातचीत में इन तत्वों की वजह से वाहनों के कुछ हिस्सों में संभावित समस्याओं को लेकर चिंता जताई गई थी।

    हालांकि इस पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण बात यह है कि ऑटो कंपनियां सार्वजनिक तौर पर E20 फ्यूल का विरोध नहीं कर रही हैं। बल्कि उद्योग संगठन SIAM ने भी बाद में सरकार को भेजे गए अपने पत्र को वापस ले लिया था। 28 जुलाई को भेजी गई शिकायत में E20 पेट्रोल में संभावित मिलावट और गुणवत्ता को लेकर चिंता जताई गई थी लेकिन बाद में SIAM ने कहा कि पत्र में इस्तेमाल किए गए कुछ आंकड़ों की और जांच तथा वैलिडेशन की जरूरत है।

    SIAM के मुताबिक यह डेटा आंतरिक चर्चा और वैलिडेशन के लिए जुटाया गया था। संगठन का कहना है कि टेस्टिंग का आधार और सैंपल साइज किसी अंतिम निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए पर्याप्त नहीं था। इसी वजह से सरकार को भेजे गए पत्र को वापस लेने का फैसला किया गया। साथ ही SIAM इस विषय पर ज्यादा व्यापक और वैज्ञानिक अध्ययन कराने की योजना बना रहा है।

    इस बीच पेट्रोलियम मंत्रालय की तरफ से इस रिपोर्ट पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि SIAM का पत्र मिलने से करीब दो सप्ताह पहले ही सरकारी तेल कंपनियां पेट्रोल पंपों पर ईंधन की गुणवत्ता और संभावित मिलावट की जांच शुरू कर चुकी थीं। उनके मुताबिक जांच में केवल चार मामले ही इस तरह की समस्या से जुड़े मिले।

    सरकारी तेल कंपनियों ने भी रैंडम और वैज्ञानिक परीक्षणों के आधार पर E20 पेट्रोल की गुणवत्ता को लेकर बड़ी चिंता की बात को खारिज किया है। उनका कहना है कि किए गए परीक्षणों में ईंधन में ऐसी कोई व्यापक समस्या सामने नहीं आई जिससे वाहन मालिकों को घबराने की जरूरत हो।

    वहीं Mahindra ने Reuters की रिपोर्ट में ईमेल के आधार पर निकाले गए निष्कर्षों को पूरी तरह गलत बताया है। कंपनी का कहना है कि उपलब्ध जानकारी के आधार पर निकाले गए परिणाम सही नहीं हैं। दूसरी तरफ Maruti Suzuki और Tata Motors की ओर से इस मामले में कोई विस्तृत जवाब नहीं दिया गया है।

    पूरे विवाद का सबसे अहम पहलू यही है कि एक तरफ सरकारी तेल कंपनियां E20 पेट्रोल की गुणवत्ता को लेकर आश्वस्त कर रही हैं और दूसरी तरफ ऑटो इंडस्ट्री के भीतर हुए परीक्षणों तथा बातचीत को लेकर रिपोर्ट में अलग तस्वीर सामने आई है। ऐसे में अभी यह निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगा कि E20 पेट्रोल सभी वाहनों के लिए नुकसानदायक है। फिलहाल सबसे जरूरी है कि ईंधन की गुणवत्ता और संभावित क्लोराइड तथा नमी की समस्या को लेकर व्यापक वैज्ञानिक जांच हो और उसके निष्कर्ष सार्वजनिक किए जाएं। इससे वाहन मालिकों के बीच बनी आशंकाओं को भी स्पष्ट जवाब मिल सकेगा।

  • मारुति सुजुकी का चालू वित्त वर्ष में 9 लाख सीएनजी वाहन बेचने का लक्ष्य

    मारुति सुजुकी का चालू वित्त वर्ष में 9 लाख सीएनजी वाहन बेचने का लक्ष्य


    नई दिल्ली।
    देश की सबसे बड़ी कार विनिर्माता कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया (एमएसआई) ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 में करीब 9 लाख सीएनजी वाहन बेचने का लक्ष्य रखा है। यह पिछले वित्त वर्ष में बेची गई 7 लाख से अधिक इकाइयों की तुलना में लगभग 30 फीसदी की वृद्धि होगी।

    मारुति सुज़ुकी इंडिया के वरिष्ठ कार्यकारी अधिकारी (विपणन एवं बिक्री) पार्थो बनर्जी ने रविवार को जारी बयान में कहा कि चालू वित्त वर्ष 2026-27 की (अप्रैल-जून) पहली तिमाही में कंपनी ने विभिन्न मॉडल श्रेणियों में 2.2 लाख सीएनजी वाहन बेचे हैं, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि की तुलना में 58 फीसदी अधिक है।

    पार्थो बनर्जी ने कहा कि पश्चिम एशिया युद्ध के बाद ईंधन के दाम बढ़ने से सीएनजी वाहनों की मांग बढ़ी है। उन्होंने बताया कि कंपनी का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बाद ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी से सीएनजी वाहनों की मांग तेजी से बढ़ी है। कंपनी को मांग में पहले ही तीव्र वृद्धि देखने को मिल रही है।

    चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए सीएनजी वाहन बिक्री लक्ष्य के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि पहली तिमाही के आंकड़े को देखते हुए हम लगभग नौ लाख इकाई की बिक्री की उम्मीद कर रहे हैं। बनर्जी ने कहा कि पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी ने सात लाख से ज्यादा सीएनजी वाहन बेचे थे। उन्होंने कहा कि पहले सीएनजी वाहनों की मांग मुख्य रूप से छोटी कारों, वैन और अर्टिगा तक सीमित थी लेकिन अब कंपनी की एसयूवी श्रेणी में भी इनकी मांग तेजी से बढ़ रही है।

    बनर्जी के अनुसार कंपनी की विक्टोरिस एसयूवी की कुल बिक्री में 50 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी गाड़ी के नीचे लगे सीएनजी टैंक (अंडरबॉडी) संस्करण की है। इसी रुझान को देखते हुए कंपनी ने नई ब्रेज़ा एस-सीएनजी में भी अंडरबॉडी सीएनजी टैंक की सुविधा दी है। उन्होंने कहा कि मारुति सुज़ुकी फिलहाल घरेलू बाजार में 15 सीएनजी मॉडल, जिनमें हल्के वाणिज्यिक वाहन भी शामिल हैं, बेच रही है। पिछले महीने कंपनी की कुल बिक्री में सीएनजी वाहनों की हिस्सेदारी 42 प्रतिशत रही, जो इस श्रेणी की बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाता है।

  • PM मोदी की मितव्ययिता की अपील पर मारुति सुजुकी में लागू किया वर्क फ्रॉम होम

    PM मोदी की मितव्ययिता की अपील पर मारुति सुजुकी में लागू किया वर्क फ्रॉम होम


    नई दिल्ली।
    देश की सबसे बड़ी कार कंपनी (Country Largest Car Maker) मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड (एमएसआईएल) (Maruti Suzuki India Limited – MSIL) ने वर्क फ्रॉम होम (Work From Home) को लागू कर दिया है। सप्ताह के दूसरे दिन यानी मंगलवार को कहा कि कंपनी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) की मितव्ययिता की अपील और पश्चिम एशिया में युद्ध के प्रभाव को कम करने की जरूरत को ध्यान में रखते हुए कई कदम उठाए हैं, जिनमें संभव होने पर ‘वर्क फ्रॉम होम’ लागू करना और विदेशी यात्राओं पर रोक शामिल है।


    क्या कहा कंपनी ने?

    कंपनी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट में कहा कि वह प्रधानमंत्री की मितव्ययिता की अपील और पश्चिम एशिया युद्ध के संभावित प्रभाव को कम करने के आह्वान को अत्यधिक महत्व देती है। मारुति सुजुकी ने कहा कि यह सभी प्रक्रियाओं की समीक्षा करने और उन्हें अधिक कुशल बनाने का उपयुक्त समय है, ताकि राष्ट्रीय उद्देश्यों के साथ-साथ कारोबार के स्वास्थ्य को भी बेहतर किया जा सके।

    कंपनी के अनुसार, प्रबंधन ने कर्मचारियों को कई उपायों को संस्थागत रूप देने का संदेश दिया है। इसके तहत जहां संभव हो वहां पर ‘वर्क फ्रॉम होम’ लागू किया जा रहा है, ताकि आवागमन से जुड़े ईंधन की खपत कम की जा सके। कंपनी ने कहा कि यह कदम उसकी मौजूदा रिमोट वर्किंग नीति के अनुरूप है।


    विदेश यात्रा पर क्या कहा?

    इसके अलावा, विदेश यात्राओं को केवल बेहद जरूरी व्यावसायिक जरूरतों तक सीमित करने के निर्देश दिए गए हैं। कंपनी ने कर्मचारियों को बैठकों के लिए वर्चुअल माध्यम को प्राथमिकता देने और घरेलू यात्राओं को भी न्यूनतम रखने को कहा है। मारुति सुजुकी ने कर्मचारियों को भी कार पूलिंग और सार्वजनिक परिवहन के उपयोग जैसे उपाय अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया है।

    साथ ही, कार्यालय और घर दोनों जगह ऊर्जा संरक्षण पर जोर देते हुए एयर कंडीशनर, पंखे और रोशनी के बचत के हिसाब से इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है। कंपनी ने कहा कि इन सभी उपायों की जानकारी आंतरिक कर्मचारियों और व्यावसायिक भागीदारों तक व्यापक रूप से पहुंचाई जा रही है।


    हरियाणा में मैन्युफैक्चरिंग लैब

    इस बीच, मारुति सुजुकी ने सरकार के कौशल विकास मिशन के तहत हरियाणा के रोहतक में अत्याधुनिक मैन्युफैक्चरिंग लैब स्थापित की है। कंपनी ने बयान में कहा कि रोहतक स्थित औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) हसनगढ़ में स्थापित इस मैन्युफैक्चरिंग लैब में पहले वर्ष में लगभग 200 छात्रों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस लैब में छात्रों को वाहन असेंबली, वेल्डिंग और रंगाई जैसे कार्यों का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

    मारुति सुजुकी के वरिष्ठ कार्यकारी अधिकारी (कॉरपोरेट मामले) राहुल भारती ने कहा- इस लैब में आधुनिक मशीनों और कार्यस्थल जैसे वातावरण का उपयोग किया जाएगा। कौशल विकास मिशन के अनुरूप यह पहल छात्रों को उद्योग की जरूरतों के अनुरूप तैयार होने और बदलते वाहन परिवेश के लिए प्रतिभा को निखारती है। मारुति सुजुकी देशभर में 31 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों को सहयोग दे रही है और अब तक 18 ऐसी लैब स्थापित कर चुकी है।

  • बिक्री में जोरदार उछाल के साथ मारुति सुजुकी की पकड़ और मजबूत, SUV सेगमेंट ने बढ़ाया ग्रोथ

    बिक्री में जोरदार उछाल के साथ मारुति सुजुकी की पकड़ और मजबूत, SUV सेगमेंट ने बढ़ाया ग्रोथ


    नई दिल्ली।

    नए वित्त वर्ष की शुरुआत देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनियों में से एक मारुति सुजुकी के लिए बेहद सकारात्मक रही है। कंपनी ने अप्रैल 2026 में बिक्री के मोर्चे पर मजबूत प्रदर्शन करते हुए यह संकेत दिया है कि ऑटोमोबाइल बाजार में मांग लगातार स्थिर और मजबूत बनी हुई है। इस दौरान कंपनी की बाजार हिस्सेदारी भी बढ़कर करीब 42 प्रतिशत के स्तर तक पहुंच गई, जो उसकी मजबूत पकड़ को दर्शाती है।

    अप्रैल महीने में कंपनी ने घरेलू बाजार में उल्लेखनीय बिक्री दर्ज की। इस दौरान बिक्री का आंकड़ा अपने अब तक के उच्चतम स्तर के करीब पहुंच गया, जिससे यह साफ हुआ कि ग्राहकों की मांग में लगातार सुधार हो रहा है। पिछले महीनों की तुलना में इस बार बिक्री में बेहतर वृद्धि देखने को मिली, जो कंपनी के लिए एक सकारात्मक संकेत है।

    घरेलू बिक्री के साथ-साथ कुल बिक्री में भी कंपनी ने मजबूत प्रदर्शन किया। घरेलू और निर्यात दोनों को मिलाकर बिक्री में अच्छी बढ़त दर्ज की गई, जिससे यह स्पष्ट होता है कि कंपनी की पकड़ केवल भारत तक सीमित नहीं है बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी इसकी मांग बनी हुई है।

    एसयूवी सेगमेंट में कंपनी का प्रदर्शन विशेष रूप से मजबूत रहा। इस श्रेणी में बिक्री लगातार बढ़ रही है, जो बदलते उपभोक्ता रुझानों को दर्शाती है। पहले जहां छोटी कारों का दबदबा अधिक था, वहीं अब एसयूवी की ओर ग्राहकों का रुझान तेजी से बढ़ रहा है। इस बदलाव का सीधा फायदा कंपनी को मिला है।

    इसके अलावा हैचबैक और छोटी कारों की बिक्री में भी सुधार देखा गया है। इससे यह पता चलता है कि कंपनी हर सेगमेंट में संतुलित प्रदर्शन कर रही है और अलग-अलग ग्राहकों की जरूरतों को पूरा करने में सफल हो रही है।

  • मारुति सुजुकी ने कमोडिटी की कीमतें बढ़ने से कारों के दाम में बढ़ोतरी के दिए संकेत

    मारुति सुजुकी ने कमोडिटी की कीमतें बढ़ने से कारों के दाम में बढ़ोतरी के दिए संकेत


    नई दिल्‍ली।
    देश की सबसे बड़ी कार विनिर्माता कंपनी (Country’s Largest Car Manufacturer) मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड (एमएसआईएल) (Maruti Suzuki India Limited – MSIL) के वरिष्ठ कार्यकारी अधिकारी (विपणन एवं बिक्री) पार्थो बनर्जी ने सोमवार को बढ़ती जिंस (कमोडिटी) की लागत को देखते हुए अपने वाहनों की कीमतों में बढ़ोतरी के संकेत दिए हैं।

    पार्थो बनर्जी ने ऑनलाइन प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि माल एवं सेवा कर (जीएसटी) की दरों में कटौती के बाद बाजार में मांग मजबूत बनी हुई है। इसके बावजूद उत्पादन संबंधी बाधाओं के कारण कंपनी के पास फिलहाल 1.75 लाख वाहनों के लंबित ऑर्डर हैं। उन्‍होंने बताया कि केवल जनवरी में ही 2.78 लाख बुकिंग मिली है। कच्चे माल की लागत बढ़ने से निकट भविष्य में कीमतें बढ़ाने की संभावना से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि जिंस के मोर्चे पर कीमतें बढ़ रही हैं। कीमती धातुओं में वृद्धि काफी ज्यादा है। भू-राजनीतिक हालात को देखते हुए हम इस पर नजर बनाए हुए हैं। आने वाले समय में कीमतों की समीक्षा जरूर करेंगे।

    बनर्जी ने कहा कि हमारा प्रयास हमेशा ग्राहकों पर लागत बढ़ोतरी का बोझ कम से कम रखने का रहा है। हमारी आपूर्ति श्रृंखला और उत्पादन दल इस बात पर गौर कर रहे हैं कि जिंस की वजह से बढ़ी लागत को हम कितनी हद तक खुद वहन कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि एक सीमा के बाद अगर हम लागत बढ़ोतरी को समायोजित नहीं कर पाए, तो हमें इसका बोझ ग्राहकों पर डालना पड़ेगा। संभावित कीमत बढ़ोतरी के लिए कोई समय-सीमा बताए बिना बनर्जी ने कहा कि कंपनी ने जनवरी में उन ग्राहकों के लिए ‘प्राइस प्रोटेक्शन स्कीम’ (कीमत सुरक्षाा योजना) शुरू की है, जिनकी बुकिंग के बावजूद आपूर्ति नहीं हो पाई। उन्होंने कहा कि जीएसटी 2.0 सुधारों से मोटर वाहन उद्योग को जो बढ़ावा मिला है। वह केंद्रीय बजट 2026-27 में बुनियादी ढांचे में पूंजीगत व्यय बढ़ाने की घोषणा “मोटर वाहन उद्योग के लिए काफी सहायक साबित होगी।

    जनवरी की बिक्री पर बनर्जी ने कहा कि कंपनी ने अब तक की सबसे अधिक मासिक कुल बिक्री 2,36,963 इकाई दर्ज की है। उन्होंने कहा कि हमें 2.78 लाख से अधिक बुकिंग मिली, जो सालाना आधार पर 25 फीसदी की वृद्धि है। हमें रोजाना करीब 9 से 10 हजार बुकिंग मिल रही है। उन्होंने बताया कि जनवरी में कंपनी का निर्यात भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचते हुए 51,020 इकाई रहा। बनर्जी ने कहा कि कंपनी की नई एसयूवी ‘विक्टोरिस’ ने पांच महीने में 50,000 इकाई की बिक्री का आंकड़ा पार कर लिया है।

    उत्पादन संबंधी बाधाओं पर उन्होंने कहा कि नई क्षमताएं उपलब्ध होने तक कंपनी को कुछ और महीनों तक इससे निपटना होगा। हरियाणा के खरखौदा में मारुति सुजुकी इंडिया का दूसरा संयंत्र अप्रैल 2026 तक परिचालन में आने वाला है। इसके बाद गुजरात स्थित मौजूदा संयंत्र में चौथी उत्पादन ‘लाइन’ शुरू की जाएगी, जिससे सालाना कुल 5 लाख इकाई की अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध होगी। घरेलू बाजार में ‘ई-विटारा’ के पेश होने को लेकर उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक एसयूवी इस महीने बाजार में उतरेगी।

    यात्री वाहन उद्योग के परिदृश्य पर पूछे गए सवाल पर बनर्जी ने कहा कि मोटर वाहन उद्योग फिर से छह से सात प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) पर लौट सकता है। हालांकि, मौजूदा समय में जिंस कीमतें काफी तेजी से बढ़ रही हैं, ऐसे में भू-राजनीतिक हालात को देखते हुए इंतजार करना होगा, तभी बेहतर अनुमान लगाया जा सकेगा।

    कंपनी ने पिछले साल सितंबर में जीएसटी 2.0 लागू होने के बाद एस-प्रेसो की कीमत में 1,29,600 रुपये तक, ऑल्टो के-10 में 1,07,600 रुपये तक, सेलेरियो में 94,100 रुपये और वैगन-आर में 79,600 रुपये तक की कटौती की थी।