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  • पाकिस्तान पर FATF का शिकंजा कसने की तैयारी, मसूद अजहर और आतंकी फंडिंग पर उठेंगे सवाल

    पाकिस्तान पर FATF का शिकंजा कसने की तैयारी, मसूद अजहर और आतंकी फंडिंग पर उठेंगे सवाल


    नई दिल्ली। पाकिस्तान की आतंकवाद विरोधी कार्रवाई एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन सकती है। भारत फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स यानी FATF की बैठक में जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर के खिलाफ कार्रवाई का मुद्दा उठाने की तैयारी में है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत यह सवाल उठाएगा कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा वैश्विक आतंकवादी घोषित किए जा चुके मसूद अजहर की गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए पाकिस्तान ने क्या ठोस कदम उठाए हैं। हालांकि पाकिस्तान को दोबारा FATF की ग्रे लिस्ट में शामिल किया जाएगा या नहीं इस पर अभी कोई अंतिम फैसला सामने नहीं आया है।

    रिपोर्ट के अनुसार 28 से 30 अक्टूबर के बीच पेरिस में FATF की पूर्ण बैठक आयोजित होनी है। भारत ने इस मुद्दे पर समर्थन जुटाने के लिए सहयोगी देशों के राजनयिकों और संगठन के प्रमुख सदस्य देशों से संपर्क किया है। बैठक में पाकिस्तान के आतंकवाद विरोधी प्रयासों और आतंकवादी संगठनों की फंडिंग रोकने के लिए उठाए गए कदमों की समीक्षा होने की उम्मीद है। भारत का जोर इस बात पर रह सकता है कि पाकिस्तान के दावों के साथ कार्रवाई के प्रमाण भी सामने आने चाहिए।

    इस पूरे मामले में मसूद अजहर भारत के लिए प्रमुख मुद्दा है। जैश-ए-मोहम्मद के संस्थापक मसूद अजहर का नाम संसद पर 2001 में हुए हमले पठानकोट एयरबेस पर 2016 में हुए हमले और 2019 के पुलवामा आतंकी हमले जैसे मामलों से जुड़ा रहा है। भारत लंबे समय से उसके खिलाफ कार्रवाई की मांग करता रहा है। दिसंबर 1999 में इंडियन एयरलाइंस की फ्लाइट IC 814 के अपहरण के बाद यात्रियों की रिहाई के बदले भारत को मसूद अजहर समेत तीन आतंकवादियों को छोड़ना पड़ा था। मई 2019 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित किया था।

    रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पाकिस्तान ने मसूद अजहर के अफगानिस्तान में होने की बात कही थी लेकिन तालिबान शासन ने इस दावे को खारिज कर दिया। भारत इस मुद्दे को उठाकर पाकिस्तान से यह सवाल कर सकता है कि मसूद अजहर के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई और उसके नेटवर्क को रोकने के लिए कौन से कदम उठाए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान ने लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख हाफिज सईद सहित कुछ अन्य आतंकवादियों से जुड़ी गतिविधियों पर कार्रवाई के कदम उठाए हैं लेकिन मसूद अजहर के खिलाफ ठोस कार्रवाई के पर्याप्त प्रमाण सामने नहीं आने की बात कही गई है।

    पाकिस्तान पहले भी FATF की ग्रे लिस्ट में रह चुका है। वर्ष 2018 से 2022 तक उसे इस सूची में रखा गया था। उस दौरान आतंकवाद के वित्तपोषण को रोकने और मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ व्यवस्था मजबूत करने में कमियों को लेकर सवाल उठे थे। जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसे संगठनों की फंडिंग रोकने तथा संयुक्त राष्ट्र के वित्तीय प्रतिबंधों को प्रभावी ढंग से लागू करने को लेकर भी पाकिस्तान पर दबाव रहा था। FATF की निगरानी के बाद पाकिस्तान ने कई सुधारात्मक कदम उठाए और बाद में उसे ग्रे लिस्ट से बाहर कर दिया गया।

    FATF की ग्रे लिस्ट में शामिल किए जाने का अर्थ है कि किसी देश की वित्तीय व्यवस्था में आतंकवाद के वित्तपोषण या मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े जोखिमों को लेकर कमियां पाई गई हैं और उन्हें दूर करने के लिए निगरानी की जरूरत है। ऐसी सूची में शामिल होने से देश की अंतरराष्ट्रीय वित्तीय छवि प्रभावित हो सकती है और वित्तीय संस्थानों के साथ लेनदेन पर अतिरिक्त जांच का दबाव बढ़ सकता है।

    अब पेरिस में होने वाली बैठक पर नजर रहेगी। भारत मसूद अजहर के मामले को उठाकर आतंकवाद के वित्तपोषण और आतंकवादी नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई की मांग कर सकता है। लेकिन पाकिस्तान को दोबारा ग्रे लिस्ट में डालने का फैसला FATF की समीक्षा और सदस्य देशों के आकलन पर निर्भर करेगा। इसलिए फिलहाल इसे संभावित घटनाक्रम के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

  • अंडरग्राउंड हुआ आतंकी सरगना? मसूद अजहर की हालत और ठिकाने पर उठे सवाल..

    अंडरग्राउंड हुआ आतंकी सरगना? मसूद अजहर की हालत और ठिकाने पर उठे सवाल..


    नई दिल्ली। पाकिस्तान में सक्रिय आतंकी संगठन Jaish-e-Mohammed के सरगना Masood Azhar को लेकर इस समय कई तरह की अटकलें और चर्चाएं सामने आ रही हैं। लंबे समय से सार्वजनिक रूप से नजर न आने के कारण उसके स्वास्थ्य और वर्तमान स्थिति को लेकर संगठन के भीतर ही सवाल उठने लगे हैं, जिससे असमंजस का माहौल बन गया है।

    सूत्रों के अनुसार, संगठन के भीतर यह चर्चा तेज है कि मसूद अजहर की तबीयत ठीक नहीं है और वह लंबे समय से सक्रिय रूप से दिखाई नहीं दे रहा है। हालांकि, कुछ आकलन यह भी बताते हैं कि उसकी स्थिति को लेकर जानबूझकर जानकारी छिपाई जा रही है, ताकि संगठन के भीतर मनोबल पर असर न पड़े बताया जा रहा है कि पहले जहां वह नियमित रूप से अपने कैडरों को संबोधित करता था और गतिविधियों में सक्रिय रहता था, वहीं अब उसकी सार्वजनिक उपस्थिति लगभग समाप्त हो चुकी है। इससे संगठन के अंदर भ्रम और असंतोष की स्थिति पैदा हो गई है।

    खुफिया आकलनों में यह भी संकेत मिलता है कि हाल की घटनाओं और आंतरिक दबावों के कारण उसका प्रभाव पहले की तुलना में कमजोर हुआ है। उसकी शारीरिक और मानसिक स्थिति को लेकर भी कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं, हालांकि इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है।

    इसी बीच यह भी कहा जा रहा है कि संगठन अब संभावित रूप से नए नेतृत्व की तैयारी कर रहा है, क्योंकि मौजूदा हालात में निर्णय लेने की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। इससे पुराने और नए सदस्यों के बीच अनिश्चितता और बेचैनी का माहौल बना हुआ है।

    अब तक मसूद अजहर की स्थिति को लेकर कोई स्पष्ट पुष्टि सामने नहीं आई है, और पूरा मामला रहस्य बना हुआ है। इसी वजह से उसके भविष्य और संगठन में उसकी भूमिका को लेकर लगातार अटकलें जारी हैं।

  • जेल में सुरंग खोदने की विफल कोशिश पर मसूद अजहर ने खुद खोली पोल, बताया कैसे पीटा गया

    जेल में सुरंग खोदने की विफल कोशिश पर मसूद अजहर ने खुद खोली पोल, बताया कैसे पीटा गया


    नई दिल्‍ली । पाकिस्तान(Pakistan) स्थित आतंकी समूह जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के सरगना मसूद अजहर ने 1990 के दशक में जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir)की जेल से भागने की अपनी कोशिश की विफलता पर पछतावा व्यक्त किया है। एक ऑडियो क्लिप में संभवतः पाकिस्तान में हुए एक कार्यक्रम में उसे जेल से सुरंग खोदकर भागने की अपनी असफल कोशिश का विवरण देते हुए सुना गया है। उसकी आवाज लाउडस्पीकर(Loudspeaker) में गूंज रही थी, जिससे संकेत मिलता है कि यह कार्यक्रम एक खुले क्षेत्र में आयोजित किया गया था।

    खुफिया सूत्रों ने भारत के सबसे वांटेड आतंकवादी की इस ऑडियो क्लिप को प्रामाणिक बताया है। मसूद अजहर 2001 में संसद, 2008 में मुंबई और कई अन्य हमलों का मास्टरमाइंड है।

    ऑडियो में मसूद अजहर को यह याद करते हुए टूटते हुए सुना गया कि जम्मू-कश्मीर की कोट भलवाल जेल से सुरंग खोदकर भागने की उसकी योजना कैसे विफल हो गई। यह जेल जम्मू क्षेत्र में एक उच्च सुरक्षा वाली सुविधा है जो भारत द्वारा पकड़े गए कुछ सबसे वांटेड आतंकवादियों को रखने के लिए जानी जाती है।

    जैश सरगना ने ऑडियो क्लिप में बताया कि वह कोट भलवाल में कुछ उपकरणों का इस्तेमाल करके काफी समय से सुरंग खोद रहा था। जिस दिन उसने सुरंग के रास्ते भागने की योजना बनाई थी, उसी दिन जेल अधिकारियों ने उसकी इस गतिविधि का पता लगा लिया।

    मसूद अजहर ने कहा कि आज भी वह उन जेल अधिकारियों से डरता है, जिन्होंने भागने की योजना बनाने के लिए उसे और अन्य आतंकवादियों को पीटा था। उसने रोते हुए कहा, “भागने की मेरी योजना के आखिरी दिन उन्हें सुरंग के बारे में पता चल गया था।”

    भागने की नाकाम कोशिश के बाद जेल उसके और कुछ अन्य कैदियों के लिए एक कठिन जगह बन गई, क्योंकि नियमों को सख्ती से लागू किया गया, जिसमें उल्लंघन के लिए शारीरिक दंड भी शामिल था। मसूद अजहर को यह कहते हुए सुना गया कि उसे जंजीरों से बांधा गया था, और नियमित गतिविधियों पर भी प्रतिबंध लगा दिए गए थे।

    आतंकवादी द्वारा अपनी विफलता को स्वीकार करना एक बार फिर यह साबित करता है कि पाकिस्तान आतंकवाद को भारत को परेशान करने के लिए एक हथियार के तौर पर इस्तेमाल करता रहा है।

    मसूद अजहर फरवरी 1994 में एक नकली पहचान और पुर्तगाली पासपोर्ट के साथ भारत आया था। उसका उद्देश्य जम्मू-कश्मीर में जिहाद फैलाना और आतंकवादियों की भर्ती करना था। उसी साल उसे अनंतनाग में गिरफ्तार कर लिया गया था। वह 1994 से 1999 तक जेल में रहा। हालांकि, दिसंबर 1999 में इंडियन एयरलाइंस की उड़ान IC-814 के अपहरण के बाद, भारत सरकार ने बंधकों के बदले में मसूद अजहर को रिहा कर दिया था। इसके बाद उसने आतंकी समूह जैश-ए-मोहम्मद की स्थापना की और तब से वह भारत में कई आतंकवादी हमलों से जुड़ा रहा है।

    मसूद अजहर ने यह भी बताया कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर भारत के क्रूज मिसाइल हमलों में उसके परिवार के कम से कम 10 सदस्य और चार करीबी सहयोगी मारे गए थे। यह हमला जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में जैश आतंकवादियों द्वारा 26 नागरिकों की हत्या के जवाब में किया गया था।