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  • मसूद अजहर पर पाकिस्तान ने बढ़ाया इनाम, FIA की नई सूची में 70 लाख रुपये का इनाम और गिरफ्तारी वारंट जारी

    मसूद अजहर पर पाकिस्तान ने बढ़ाया इनाम, FIA की नई सूची में 70 लाख रुपये का इनाम और गिरफ्तारी वारंट जारी


    नई दिल्ली ।
    पाकिस्तान ने जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अजहर के खिलाफ कार्रवाई का दावा करते हुए उसे गिरफ्तार करने के लिए वारंट जारी किया है। पाकिस्तान की जांच एजेंसी फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी यानी FIA की नई मोस्ट वांटेड सूची में मसूद अजहर पर 70 लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया है। यह घोषणा ऐसे समय हुई है जब अक्टूबर में एफएटीएफ की बैठक प्रस्तावित है।

    FIA की नई सूची में मसूद अजहर को वांछित बताया गया है। पाकिस्तान का कहना है कि वह देश से गायब है और अफगानिस्तान में छिपा हुआ है। वहीं, भारतीय खुफिया एजेंसियों से जुड़ी जानकारी में उसके पाकिस्तान में छिपे होने की संभावना जताई गई है। पिछले कुछ महीनों में ऐसी जानकारी सामने आने का दावा किया गया है कि वह पाकिस्तान के सिंध प्रांत के नवाबशाह इलाके में हो सकता है।

    मसूद अजहर पर इससे पहले भी पाकिस्तान की ओर से इनाम घोषित किया जा चुका है। वर्ष 2021 में FIA ने उस पर 50 लाख रुपये का इनाम रखा था। अब पांच साल बाद इस रकम में 20 लाख रुपये की बढ़ोतरी की गई है, जिससे कुल इनाम 70 लाख रुपये हो गया है।

    FIA की नई मोस्ट वांटेड सूची में 26/11 मुंबई हमले से जुड़े 19 लोगों के नाम भी शामिल किए गए हैं। इन लोगों पर हमले में अलग-अलग तरह से मदद करने के आरोप लगाए गए हैं। कुछ पर हमलावरों को समुद्र के रास्ते मुंबई पहुंचाने में सहायता करने का आरोप है, जबकि कुछ पर हमले के लिए आर्थिक मदद उपलब्ध कराने की बात कही गई है।

    नई सूची में 17 लोगों की तस्वीरें और उनके काम से जुड़ी जानकारी दी गई है। वहीं दो लोगों के नाम सूची में मौजूद होने के बावजूद उनकी तस्वीर और संगठन से संबंधित विवरण हटा दिए गए हैं। तुर्बत के मोहम्मद खान पर हमलावरों को मुंबई पहुंचाने वाली नाव उपलब्ध कराने का आरोप लगाया गया था। नई सूची में उसके नाम के साथ तस्वीर और अन्य जानकारी नहीं दी गई है।

    बहावलनगर के अब्दुल रहमान का नाम भी सूची में मौजूद है, लेकिन उसकी तस्वीर और लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ी जानकारी हटा दी गई है। वर्ष 2021 की पुरानी सूची में दोनों के बारे में अधिक विवरण मौजूद था।

    नई सूची में 11 ऐसे लोगों के नाम भी हैं, जिन पर हमलावरों को दो नावों के जरिए समुद्र पार कराने में मदद करने का आरोप लगाया गया है। इनमें मुहम्मद अमजद खान, शाहिद गफूर, मुहम्मद उस्मान, अतीक उर रहमान, रियाज अहमद, मुहम्मद मुश्ताक, मुहम्मद नईम, अब्दुल शकूर, मुहम्मद साबिर सल्फी, मुहम्मद उस्मान और शकील अहमद शामिल हैं।

    इसके अलावा छह लोगों पर हमले के लिए आर्थिक मदद देने का आरोप लगाया गया है। मुहम्मद इफ्तिखार अली पर VOIP कनेक्शन के लिए करीब 70 हजार पाकिस्तानी रुपये खर्च करने का आरोप है। मोहम्मद जिया पर 80 हजार रुपये, मोहम्मद अब्बास नासिर पर 2.53 लाख रुपये, जावेद इकबाल पर 1.86 लाख रुपये और मुख्तार अहमद पर करीब 2.98 लाख रुपये देने का आरोप है। अहमद सईद पर करीब 21 लाख रुपये देने का आरोप लगाया गया है।

    FIA के मुताबिक 26/11 हमले से जुड़े ये लोग करीब 18 साल से फरार हैं। वहीं भारतीय खुफिया सूत्रों का दावा है कि इनमें से कई पाकिस्तान में ही मौजूद हैं। भारत का कहना है कि केवल नाम मोस्ट वांटेड सूची में शामिल करना पर्याप्त कार्रवाई नहीं है। पाकिस्तान की 2021 की सूची में 1,330 मोस्ट वांटेड आतंकियों के नाम थे, जबकि नई सूची में यह संख्या बढ़कर 1,804 हो गई है।

  • मसूद अजहर के अफगानिस्तान में छिपे होने के पाकिस्तानी दावे को तालिबान ने खारिज किया, काबुल ने जवाब में रखी स्थिति स्पष्ट

    मसूद अजहर के अफगानिस्तान में छिपे होने के पाकिस्तानी दावे को तालिबान ने खारिज किया, काबुल ने जवाब में रखी स्थिति स्पष्ट


    नई दिल्ली ।मसूद अजहर को लेकर पाकिस्तान के दावे पर अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने स्पष्ट प्रतिक्रिया दी है। अफगानिस्तान के विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पाकिस्तान के उस दावे से इनकार किया है, जिसमें कहा जाता रहा है कि जैश-ए-मोहम्मद का संस्थापक मसूद अजहर अफगानिस्तान में छिपकर रह रहा है। अधिकारी ने स्पष्ट किया कि मसूद अजहर अफगानिस्तान में मौजूद नहीं है।

    अफगान पक्ष ने यह भी कहा कि उसकी जमीन का इस्तेमाल किसी दूसरे देश के खिलाफ हिंसा या आतंकी गतिविधियों के लिए नहीं होने दिया जाएगा। इस बयान के साथ तालिबान सरकार ने पाकिस्तान के दावे को सीधे तौर पर खारिज कर दिया है। मसूद अजहर की कथित मौजूदगी को लेकर दोनों देशों के दावों में लंबे समय से अंतर रहा है।

    अफगानिस्तान के विदेश मंत्रालय के अधिकारी ने कहा कि मसूद अजहर उनके देश में मौजूद नहीं है। तालिबान की ओर से पहले भी इस तरह का इनकार किया जा चुका है। सितंबर 2022 में तालिबान के एक प्रवक्ता ने मसूद अजहर के अफगानिस्तान में होने से जुड़ी खबरों को गलत बताया था।

    अफगान पक्ष का कहना है कि पाकिस्तान ने भी मसूद अजहर के अफगानिस्तान में मौजूद होने की कोई पुख्ता आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं कराई है। इसके बावजूद पाकिस्तान लगातार यह दावा करता रहा है कि जैश-ए-मोहम्मद का संस्थापक अफगानिस्तान में छिपा हुआ है।

    पाकिस्तान के मुताबिक मसूद अजहर मई 2019 में डूरंड रेखा पार करके अफगानिस्तान चला गया था। इसके बाद से वह अफगानिस्तान में छिपा हुआ है। हालांकि, अफगान सरकार इस दावे को स्वीकार नहीं करती है और अब विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ने भी उसकी मौजूदगी से स्पष्ट रूप से इनकार किया है।

    तालिबान ने अपने बयान में एक बार फिर यह रुख दोहराया कि अफगान जमीन का इस्तेमाल किसी दूसरे देश के खिलाफ हिंसा या आतंकवादी गतिविधियों के लिए नहीं होने दिया जाएगा। इस बयान को पाकिस्तान के आरोपों के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है, क्योंकि मसूद अजहर का नाम लंबे समय से दोनों देशों के बीच सुरक्षा और आतंकवाद से जुड़े मुद्दों में सामने आता रहा है।

    मसूद अजहर को लेकर यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब पाकिस्तान पर आतंकी संगठनों और उनके नेताओं के खिलाफ कार्रवाई को लेकर अंतरराष्ट्रीय दबाव की चर्चा होती रही है। पाकिस्तान पहले वित्तीय कार्रवाई कार्यबल की निगरानी सूची में भी रह चुका है। उसे 2018 से 2022 के बीच इस सूची में रखा गया था।

    उस अवधि में आतंकवाद के लिए उपलब्ध वित्तीय संसाधनों को रोकने और आतंकी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर पाकिस्तान की व्यवस्था पर चिंता जताई गई थी। निगरानी सूची से बाहर आने के लिए पाकिस्तान को कई कदम उठाने पड़े थे। इनमें जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसे संगठनों के खिलाफ कार्रवाई भी शामिल थी।

    अब मसूद अजहर की कथित मौजूदगी को लेकर पाकिस्तान के दावे और तालिबान के इनकार ने इस मुद्दे को फिर चर्चा में ला दिया है। अफगानिस्तान ने जहां अजहर के अपने देश में होने से इनकार किया है, वहीं पाकिस्तान अपने पुराने दावे पर कायम रहा है।