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  • इस्लामिक नाटो’ में शामिल होगा ईरान? राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने मुस्लिम देशों से की एकजुट होने की अपील

    इस्लामिक नाटो’ में शामिल होगा ईरान? राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने मुस्लिम देशों से की एकजुट होने की अपील


    नई दिल्ली। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बीते तनाव और संघर्ष के बाद पश्चिम एशिया की राजनीति में बड़े समझौतों की चर्चा तेज हो गई है। इसी बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने मुस्लिम देशों से एकजुट होने और आपसी सहयोग बढ़ाने की अपील की है। उनके इस बयान को क्षेत्रीय स्तर पर एक मजबूत मुस्लिम गठबंधन बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

    पाकिस्तान दौरे पर पहुंचे पेजेशकियन ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और सेना प्रमुख असीम मुनीर से मुलाकात की। इस दौरान दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों, क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक घटनाओं पर विस्तृत चर्चा हुई।

    संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि पश्चिम एशिया और फारस की खाड़ी क्षेत्र में स्थायी शांति, स्थिरता और विकास तभी संभव है जब क्षेत्रीय देश आपसी सम्मान, संवाद और सहयोग की भावना से आगे बढ़ें। उन्होंने जोर देकर कहा कि मुस्लिम देशों को अपने साझा हितों और जबड़े के प्रति एकजुट होकर काम करना चाहिए।

    पेजेशकियन ने कहा, “मेरा मानना ​​है कि मुस्लिम अपने समुदायों के खिलाफ एकजुट होकर खड़े होंगे।” उनके इस बयान के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि ईरान भविष्य में उस सैन्य-सहयोगी मंच के करीब आ सकता है जिसे मीडिया में अक्सर ‘इस्लामिक नाटो’ कहा जाता है।

    हालांकि यह ध्यान देने योग्य है कि ‘इस्लामिक नाटो’ कोई औपचारिक नाटो जैसी संस्था नहीं है, बल्कि इस्लामिक मिलिट्री काउंटर टेररिज्म कोएलिशन नामक एक बहुराष्ट्रीय सुरक्षा गठबंधन है, जिसे हासिल सऊदी अरब करता है और जिसमें पाकिस्तान सहित कई मुस्लिम देश शामिल हैं। ईरान वर्तमान में इस गठबंधन का सदस्य नहीं है।

    विश्लेषणों का मानना ​​है कि यदि ईरान और पाकिस्तान के बीच राजनयिक सहयोग बढ़ता है और क्षेत्रीय स्वायत्त अनुकूल रहते हैं, तो मुस्लिम देशों के बीच सुरक्षा और राजनीतिक सहयोग का नया ढांचा विकसित हो सकता है। हालांकि ईरान के किसी औपचारिक सैन्य गठबंधन में शामिल होने की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। स्विट्जरलैंड में अमेरिका के साथ वार्ता के बाद पाकिस्तान पहुंचे पेजेशकियां के इस दौरे को क्षेत्रीय आतंकवाद और मुस्लिम देशों के बीच सहयोग बढ़ाने के प्रयासों के रूप में देखा जा रहा है।

  • ईरान के राष्ट्रपति का PM मोदी को न्योता, खामेनेई के अंतिम विदाई समारोह में शामिल होने का आमंत्रण

    ईरान के राष्ट्रपति का PM मोदी को न्योता, खामेनेई के अंतिम विदाई समारोह में शामिल होने का आमंत्रण


    नई दिल्ली ।ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश के पूर्व सर्वोच्च नेता और धार्मिक प्रमुख Ali Khamenei के अंतिम संस्कार और राजकीय विदाई समारोह में शामिल होने का औपचारिक निमंत्रण भेजा है। खामेनेई की 28 फरवरी को हुए सैन्य हमले में मौत के बाद अब उनके अंतिम संस्कार की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।

    ईरान सरकार की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार अंतिम संस्कार और दफन समारोह 5 जुलाई से 9 जुलाई तक आयोजित किए जाएंगे। इस दौरान Tehran, Qom, Mashhad, Najaf और Karbala में कई धार्मिक और राजकीय कार्यक्रम होंगे, जिनमें लाखों लोगों के शामिल होने की संभावना है।

    जानकारी के अनुसार 6 जुलाई को तेहरान में भव्य अंतिम यात्रा निकाली जाएगी। इसके बाद 7 जुलाई को क़ोम में विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होगा। अंतिम चरण में 9 जुलाई को मशहद स्थित Imam Reza Shrine में खामेनेई को सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।

    भारत सरकार की ओर से फिलहाल यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि समारोह में प्रधानमंत्री Narendra Modi स्वयं शामिल होंगे या भारत की ओर से कोई उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भेजा जाएगा।

    तीन दशकों से अधिक समय तक ईरान का नेतृत्व करने वाले खामेनेई को देश की राजनीति, विदेश नीति और धार्मिक व्यवस्था का सबसे प्रभावशाली चेहरा माना जाता था। उनके निधन के बाद यह अंतिम विदाई समारोह ईरान के हालिया इतिहास के सबसे बड़े राजकीय आयोजनों में से एक माना जा रहा है।

  • ईरान का सख़्त संदेश: सरेंडर नहीं करेंगे, ट्रंप की धमकी पर राष्ट्रपति पेजेश्कियान का पलटवार

    ईरान का सख़्त संदेश: सरेंडर नहीं करेंगे, ट्रंप की धमकी पर राष्ट्रपति पेजेश्कियान का पलटवार



    नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के बीच ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने स्पष्ट कहा है कि उनका देश किसी भी हालत में सरेंडर नहीं करेगा। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों का जवाब देते हुए कहा कि बातचीत का मतलब झुकना नहीं होता, बल्कि अपने अधिकारों और गरिमा के साथ चर्चा करना होता है।

    राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि ईरान अपनी संप्रभुता और कानूनी अधिकारों से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि देश पूरी मजबूती और सम्मान के साथ बातचीत की प्रक्रिया में शामिल है, लेकिन दबाव या धमकी के आगे नहीं झुकेगा।

    इससे पहले डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि खाड़ी देशों—कतर, सऊदी अरब और यूएई—के नेताओं के अनुरोध पर ईरान पर प्रस्तावित सैन्य कार्रवाई को फिलहाल रोक दिया गया है। ट्रंप के अनुसार, इस समय क्षेत्र में शांति समझौते को लेकर गंभीर बातचीत चल रही है, लेकिन अगर डील नहीं होती है तो अमेरिका सैन्य विकल्पों के लिए तैयार है।

    ट्रंप ने यह भी कहा कि किसी भी समझौते में सबसे अहम शर्त यह होगी कि ईरान परमाणु हथियार विकसित न कर सके। उन्होंने अमेरिकी सेना को भी निर्देश दिया है कि जरूरत पड़ने पर कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार रहें।

    इस बीच ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा था कि समय तेजी से खत्म हो रहा है और अगर जल्द समझौता नहीं हुआ तो परिणाम गंभीर होंगे। वहीं, दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव के बावजूद कूटनीतिक बातचीत की संभावना अभी भी बनी हुई है।

    फिलहाल हालात यह हैं कि एक तरफ अमेरिका दबाव और चेतावनी की रणनीति अपना रहा है, तो दूसरी तरफ ईरान अपने रुख पर अडिग रहते हुए बातचीत को “सरेंडर नहीं” मानने की बात दोहरा रहा है।

  • पुतिन ईरान वार्ता: ताकत के इस्तेमाल को नकारा, कूटनीतिक समाधान पर जोर

    पुतिन ईरान वार्ता: ताकत के इस्तेमाल को नकारा, कूटनीतिक समाधान पर जोर


    नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन के बीच टेलीफोन पर बातचीत हुई। इस वार्ता को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं कि रूस इस मुश्किल वक्त में ईरान का समर्थन कर सकता है लेकिन पुतिन ने स्पष्ट किया कि तनाव कम करना और मुद्दों का कूटनीतिक हल निकालना ही प्राथमिकता है।

    रूसी विदेश मंत्रालय ने टेलीग्राम पर इस बातचीत की जानकारी साझा की। मंत्रालय ने बताया कि पुतिन ने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह सैय्यद अली खामेनेई उनके परिवार और देश की सेना और नेताओं की मौत पर संवेदना जताई। साथ ही अमेरिका और इजरायल के हमलों में आम नागरिकों की मौत पर भी दुख व्यक्त किया।

    पुतिन ने इस वार्ता में जोर दिया कि किसी भी तरह के संघर्ष या ताकत के इस्तेमाल से समस्याओं का समाधान नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि रूस की नीतियों के अनुसार सभी विवादों का हल डिप्लोमैटिक प्रक्रिया से ही किया जाना चाहिए। इसके अलावा पुतिन ने गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल जीसीसी के देशों के नेताओं के साथ लगातार संपर्क बनाए रखने की बात भी कही।

    ईरानी राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने रूस की एकजुटता और सहयोग के लिए पुतिन का धन्यवाद किया। रूसी विदेश मंत्रालय ने बताया कि ईरान अपनी संप्रभुता और स्वतंत्रता की रक्षा कर रहा है और दोनों नेताओं ने यह तय किया कि आने वाले समय में अलग-अलग माध्यमों से संपर्क जारी रहेगा।

    तेल की आपूर्ति इस वार्ता में एक अहम मुद्दा बनकर उभरी है। अमेरिका लंबे समय से भारत पर रूस से तेल न खरीदने के लिए दबाव डाल रहा है लेकिन हालात ने अमेरिकी चिंताओं को बढ़ा दिया है। भारत में रूसी राजदूत डेनिस अलीपोव ने कहा कि बढ़ती तेल कीमतों के बीच आपूर्ति और स्रोत तय करना भारत का अधिकार है। अलीपोव ने कहा “समाधान हमेशा बातचीत से होता है। संघर्ष जल्द से जल्द समाप्त होना चाहिए। आपूर्ति के लिए रूस हमेशा तैयार है।

    इससे पहले 28 फरवरी को रूस ने बिना कारण ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों की निंदा की थी। रूस ने तत्काल राजनीतिक और कूटनीतिक समाधान की आवश्यकता पर भी जोर दिया। इसके अतिरिक्त रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और ईरानी समकक्ष सैयद अब्बास अराघची के बीच भी शनिवार को टेलीफोन पर बातचीत हुई। इसमें ईरानी पक्ष ने अमेरिका और इजरायल के हमलों को रोकने के अपने कदमों की जानकारी दी साथ ही संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाने की योजना भी साझा की।

  • ईरान ने अमेरिका, इजराइल और यूरोप को बताया युद्धरत पक्ष, राष्ट्रपति बोले-हम पर दबाव बढ़ा लेकिन ताकत भी बढ़ी

    ईरान ने अमेरिका, इजराइल और यूरोप को बताया युद्धरत पक्ष, राष्ट्रपति बोले-हम पर दबाव बढ़ा लेकिन ताकत भी बढ़ी


    नई दिल्ली।/तेहरान।मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने बड़ा और सख्त बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि ईरान इस समय अमेरिका, इजराइल और यूरोपीय देशों के साथ पूर्ण स्तर के टकराव की स्थिति में है। यह बयान ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित किया गया है, जिससे इसकी राजनीतिक और रणनीतिक अहमियत और बढ़ जाती है। राष्ट्रपति पेजेशकियन ने कहा कि मौजूदा हालात 1980-88 के ईरान-इराक युद्ध से भी अधिक जटिल और खतरनाक हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सिर्फ सैन्य संघर्ष नहीं है, बल्कि आर्थिक राजनीतिक और कूटनीतिक मोर्चों पर भी ईरान को अभूतपूर्व दबाव का सामना करना पड़ रहा है।

    यह पारंपरिक युद्ध से अलग है

    अपने बयान में राष्ट्रपति ने कहा कि आज का संघर्ष केवल हथियारों तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा, हम पर प्रतिबंध, राजनीतिक अलगाव, साइबर हमले और सैन्य धमकियां-सब एक साथ हैं। यह पारंपरिक युद्ध से कहीं अधिक कठिन स्थिति है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान को घुटनों पर लाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन देश पहले से ज्यादा संगठित और मजबूत हुआ है।

    राष्ट्रीय एकता की अपील

    पेजेशकियन ने ईरानी जनता से एकजुट रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि दुश्मन देश के भीतर विभाजन पैदा करना चाहते हैं ताकि आंतरिक अस्थिरता के जरिए ईरान को कमजोर किया जा सके। राष्ट्रपति के अनुसार, राष्ट्रीय एकता ही इस चुनौतीपूर्ण दौर में सबसे बड़ा हथियार है।

    परमाणु कार्यक्रम पर विवाद

    अमेरिका और उसके सहयोगी देशों का आरोप है कि ईरान परमाणु हथियार विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। हालांकि, ईरान लगातार इस आरोप को खारिज करता आया है। ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण है और ऊर्जा व शोध के उद्देश्य से संचालित किया जा रहा है।जनवरी 2025 में अमेरिका में सत्ता में लौटने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के खिलाफ ‘मैक्सिमम प्रेशर’ नीति को फिर से लागू किया। इसके तहत ईरान के तेल निर्यात को शून्य करने और नए आर्थिक प्रतिबंध लगाने के कदम उठाए गए। वहीं, फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन ने भी संयुक्त राष्ट्र के पुराने प्रतिबंधों को दोबारा लागू किया है, जिससे ईरान की अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है।

    जून 2025 का ईरान-इजराइल युद्ध
    जून 2025 में ईरान और इजराइल के बीच 12 दिनों तक सीधा सैन्य संघर्ष हुआ था। इस दौरान इजराइल ने ईरान के सैन्य और परमाणु ठिकानों को निशाना बनाया। ईरान में इस युद्ध में 1,000 से अधिक लोगों की मौत हुई, जबकि ईरानी मिसाइल हमलों में इजराइल में 28 लोग मारे गए।बाद में अमेरिका भी इस संघर्ष में शामिल हो गया और उसने नतांज, फोर्डो और इस्फहान स्थित ईरान के प्रमुख परमाणु ठिकानों पर हवाई हमले किए। इसके बाद अमेरिकी मध्यस्थता से संघर्षविराम लागू हुआ और अप्रैल से चल रही परमाणु वार्ता ठप हो गई।

    सेना को लेकर राष्ट्रपति का दावा

    राष्ट्रपति पेजेशकियन ने कहा कि हालिया हमलों के बावजूद ईरान की सैन्य क्षमता कमजोर नहीं हुई है। उन्होंने दावा किया कि ईरानी सेना हथियारों और मानव संसाधनों—दोनों मामलों में पहले से अधिक मजबूत है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर फिर से हमला हुआ, तो ईरान कड़ा और निर्णायक जवाब देगा।

    संभावित युद्ध के असर

    विश्लेषकों के मुताबिक, यदि मौजूदा तनाव पूर्ण युद्ध में बदलता है तो इसका असर ईरान की अर्थव्यवस्था, बुनियादी ढांचे और सामाजिक स्थिरता पर गंभीर रूप से पड़ सकता है। हालांकि ईरान का नेतृत्व लगातार यह संदेश दे रहा है कि देश किसी भी हालात का सामना करने के लिए तैयार है।