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  • भोपाल मास्टर प्लान 2047 पर कांग्रेस की आपत्ति, 21 साल से नई विकास योजना नहीं होने और कानूनी खामियों का उठाया मुद्दा

    भोपाल मास्टर प्लान 2047 पर कांग्रेस की आपत्ति, 21 साल से नई विकास योजना नहीं होने और कानूनी खामियों का उठाया मुद्दा


    मध्य प्रदेश: की राजधानी भोपाल के प्रस्तावित मास्टर प्लान 2047 को लेकर कांग्रेस ने आपत्ति दर्ज कराई है। पार्टी का कहना है कि शहर की पिछली विकास योजना वर्ष 2005 में समाप्त हो गई थी और इसके बाद से भोपाल में नई विकास योजना लागू नहीं हो सकी है। कांग्रेस ने प्रस्तावित प्रारूप में कानूनी प्रक्रियाओं, भूमि उपयोग, सार्वजनिक परिवहन, सस्ते आवास, हरित क्षेत्रों और जल प्रबंधन से जुड़ी कई कमियां होने का दावा किया है।
    कांग्रेस प्रवक्ता अभय दुबे के मुताबिक, कांग्रेस सरकार के 15 महीने के कार्यकाल के दौरान भोपाल विकास योजना 2031 का प्रारूप प्रकाशित किया गया था। उनके अनुसार, उस प्रक्रिया में संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की गई थी और 3,000 से अधिक आपत्तियों पर सुनवाई भी हो चुकी थी। उन्होंने दावा किया कि केवल अंतिम अधिसूचना जारी होना बाकी था, लेकिन बाद में भाजपा सरकार ने उस योजना को निरस्त कर दिया। कांग्रेस ने इस फैसले की वैधानिकता पर सवाल उठाए हैं।

    कांग्रेस ने प्रस्तावित मास्टर प्लान 2047 में पांच प्रमुख कानूनी खामियां होने का आरोप लगाया है। पार्टी के अनुसार, प्रारूप में वर्ष 2024 के मौजूदा भूमि उपयोग मानचित्र का राजपत्र में उल्लेख तो किया गया, लेकिन उसका विधिवत प्रकाशन और उस पर आपत्तियां आमंत्रित करने की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई। कांग्रेस ने नगर विकास योजनाओं की अनंतिम सीमाएं दिखाने से जुड़े प्रावधानों का पालन नहीं होने का भी दावा किया है।

    पार्टी ने आरक्षित भूमि के मालिकों के लिए मुआवजे या क्षतिपूर्ति की व्यवस्था, शहर के जल निकायों के जलग्रहण क्षेत्रों के संरक्षण और वर्ष 2005 की योजना के हरित क्षेत्रों में किए गए बदलावों का तुलनात्मक विवरण सार्वजनिक करने की मांग की है। कांग्रेस के मुताबिक, भोपाल के 18 जल निकायों में से केवल बड़े तालाब के जलग्रहण क्षेत्र को शामिल किया गया है, जबकि सभी जल निकायों के लिए स्पष्ट व्यवस्था होनी चाहिए।

    प्रस्तावित योजना की परिवहन व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस ने कहा कि विकास का प्रारूप लोगों की जरूरतों के बजाय वाहनों की आवाजाही पर अधिक केंद्रित है। अभय दुबे के अनुसार, शहर में लगभग 54 प्रतिशत यात्राएं पैदल, साइकिल या ऑटो से होती हैं, लेकिन मास्टर प्लान में सार्वजनिक परिवहन के लिए स्पष्ट लक्ष्य, बस नेटवर्क, साइकिल ट्रैक और पैदल यात्रियों के लिए निर्धारित क्षेत्रों का पर्याप्त प्रावधान नहीं है।

    कांग्रेस ने ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट यानी टीओडी के प्रावधानों पर भी सवाल उठाए हैं। पार्टी के अनुसार, मेट्रो के दोनों ओर 500 मीटर के दायरे में करीब 9,500 हेक्टेयर क्षेत्र को विकास के लिए प्रस्तावित किया गया है, लेकिन घनत्व, फ्लोर एरिया रेशियो और किफायती आवास जैसे जरूरी प्रावधान स्पष्ट नहीं हैं। इसी तरह, 51 किलोमीटर लंबे बायपास के दोनों ओर 300-300 मीटर क्षेत्र में 2,449 हेक्टेयर भूमि पर सघन विकास प्रस्तावित होने पर भी आपत्ति जताई गई है। कांग्रेस का कहना है कि इस क्षेत्र में मेट्रो या बस लेन जैसी परिवहन सुविधाएं नहीं हैं।

    भूमि उपयोग और आवास के संबंध में भी पार्टी ने प्रारूप की आलोचना की है। कांग्रेस के दावे के अनुसार, आवासीय भूमि का हिस्सा निर्धारित मानकों से 5 से 7 प्रतिशत अधिक है, जबकि घनत्व 28 से 48 प्रतिशत कम है। इसी वजह से योजना का क्षेत्रफल 601 वर्ग किलोमीटर से बढ़ाकर 1,017 वर्ग किलोमीटर किए जाने पर सवाल उठाए गए हैं। पार्टी ने करीब 4.8 लाख झुग्गीवासियों वाले शहर में आर्थिक रूप से कमजोर और निम्न आय वर्ग के लिए पर्याप्त भूमि आरक्षित नहीं होने का मुद्दा भी उठाया।

    हरित क्षेत्र और जल आपूर्ति को लेकर कांग्रेस ने कहा कि प्रति व्यक्ति हरित क्षेत्र के लिए 10 से 12 वर्ग मीटर के मानक के मुकाबले प्रस्तावित योजना में लगभग 7 वर्ग मीटर का प्रावधान है। पार्टी ने पानी की उपलब्धता के अनुमान पर भी सवाल उठाए हैं। उसके अनुसार, योजना में जल जरूरतों का आकलन वर्ष 2031 तक किया गया है और 45 लाख की अनुमानित आबादी के लिए 209 एमएलडी पानी की कमी बताई गई है, लेकिन इसके स्रोत स्पष्ट नहीं हैं। सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के लिए भूमि चिन्हित नहीं होने का आरोप भी लगाया गया है।

    कांग्रेस ने शहर के विस्तार पर अनुमानित 59 हजार करोड़ रुपये के खर्च के लिए स्पष्ट वित्तीय योजना की मांग की है। पार्टी ने भूमि उपयोग मानचित्र की कानूनी प्रक्रिया पूरी करने, संशोधित प्रारूप दोबारा प्रकाशित करने और सार्वजनिक परिवहन, किफायती आवास, हरित क्षेत्रों तथा जल प्रबंधन को लेकर ठोस प्रावधान शामिल करने की मांग की है। ये सभी आपत्तियां कांग्रेस की ओर से उठाई गई हैं; प्रस्तावित मास्टर प्लान पर अंतिम निर्णय और संबंधित विभागों का पक्ष इस विवरण में शामिल नहीं है।

  • भोपाल मास्टर प्लान 2047 के ड्राफ्ट पर विवाद, संरक्षित जंगलों में सड़कों के प्रस्ताव को लेकर उठे सवाल

    भोपाल मास्टर प्लान 2047 के ड्राफ्ट पर विवाद, संरक्षित जंगलों में सड़कों के प्रस्ताव को लेकर उठे सवाल

    भोपाल: के प्रस्तावित मास्टर प्लान 2047 के ड्राफ्ट को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। शहर के व्यवस्थित विकास के उद्देश्य से तैयार किए गए इस प्रारूप में संरक्षित वन क्षेत्रों से होकर कई सड़कों के निर्माण का प्रावधान किए जाने पर सवाल उठाए जा रहे हैं। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि इन प्रावधानों से जंगलों और बाघों के आवास क्षेत्र पर असर पड़ सकता है।

    ड्राफ्ट में भोपाल के संरक्षित वन क्षेत्र के भीतर एक दर्जन से अधिक सड़कों का प्रस्ताव बताया गया है। इनमें 18 मीटर, 24 मीटर और 60 मीटर चौड़ी सड़कों के प्रावधान शामिल हैं। जिन क्षेत्रों में इन सड़कों का प्रस्ताव किया गया है, वहां बाघों की आवाजाही और प्रजनन गतिविधियां होने की बात कही गई है। इन वन क्षेत्रों को संरक्षित दर्जा भी प्राप्त है।

    मामले में कालियाखेड़ा, करवा चौथ, मंडोर और मंदोरी सहित कुछ वन क्षेत्रों का उल्लेख किया गया है। इन इलाकों में बाघों की मौजूदगी और आवाजाही लंबे समय से चर्चा का विषय रही है। साथ ही, इन क्षेत्रों की जमीन को बेहद मूल्यवान माना जाता है। आरोप लगाया गया है कि ऐसी जमीनों पर प्रभावशाली लोगों के हित जुड़े हुए हैं।

    कांग्रेस का कहना है कि इससे पहले प्रस्तावित मास्टर प्लान 2031 में भी जंगलों के बीच सड़क नेटवर्क विकसित करने के प्रावधान किए गए थे। उस समय दावे और आपत्तियां आमंत्रित किए जाने पर बड़ी संख्या में लोगों ने इन प्रावधानों का विरोध किया था। दावा है कि उस प्रक्रिया के दौरान 1500 से अधिक आपत्तियां दर्ज हुई थीं।

    कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने मास्टर प्लान के प्रावधानों पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसमें कई स्तर पर गड़बड़ियां की गई हैं। उनका आरोप है कि प्रभावशाली लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए जंगलों को नुकसान पहुंचाने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने कहा कि पहले इस मामले में आपत्ति दर्ज कराई जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर कानूनी कदम भी उठाए जाएंगे।

    दूसरी ओर, भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी बृज गोपाल लोया ने इन आरोपों पर अलग पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि मास्टर प्लान शहर के विकास और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। इसके लिए विभिन्न प्रावधानों और संबंधित दिशा-निर्देशों का अध्ययन किया गया है।

    उन्होंने स्पष्ट किया कि शहर के जंगलों को किसी भी स्थिति में बर्बाद नहीं होने दिया जाएगा। उनके अनुसार, विकास के साथ वन संरक्षण पर भी ध्यान दिया जाएगा और दोनों के बीच संतुलन बनाए रखने का प्रयास किया जाएगा।

    मास्टर प्लान 2047 का उद्देश्य आने वाले वर्षों में भोपाल के विस्तार और बुनियादी ढांचे को दिशा देना है, लेकिन संरक्षित वन क्षेत्रों से प्रस्तावित सड़कें अब इसके पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर बहस का प्रमुख विषय बन गई हैं। एक ओर शहर के विकास और परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने की जरूरत बताई जा रही है, वहीं दूसरी ओर वन क्षेत्र, बाघों के आवास और जैव विविधता के संरक्षण को लेकर चिंताएं सामने आई हैं।

    अब इस ड्राफ्ट पर आने वाली आपत्तियों और सुझावों की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। इसी दौरान यह स्पष्ट होगा कि संरक्षित वन क्षेत्रों से संबंधित प्रस्तावों में कोई बदलाव किया जाता है या नहीं। फिलहाल मास्टर प्लान 2047 को लेकर राजनीतिक पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो चुके हैं और जंगलों के संरक्षण तथा शहरी विकास के बीच संतुलन का मुद्दा केंद्र में आ गया है।

  • भोपाल-इंदौर मास्टर प्लान पर जीतू पटवारी का अल्टीमेटम, तीन महीने में जारी नहीं हुआ तो 50 हजार लोग निकालेंगे पदयात्रा

    भोपाल-इंदौर मास्टर प्लान पर जीतू पटवारी का अल्टीमेटम, तीन महीने में जारी नहीं हुआ तो 50 हजार लोग निकालेंगे पदयात्रा

    मध्य प्रदेश : कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भोपाल और इंदौर के मास्टर प्लान को लेकर सरकार को तीन महीने का समय देने की बात कही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस अवधि में दोनों शहरों का मास्टर प्लान जारी नहीं किया गया और जनता तथा व्यापारियों की समस्याएं बनी रहीं, तो कांग्रेस इंदौर से भोपाल तक 50 हजार लोगों के साथ पदयात्रा निकालेगी।

    पटवारी भोपाल के रोशनपुरा चौराहे पर पूर्व मंत्री पी.सी. शर्मा द्वारा भोपाल मास्टर प्लान लागू करने की मांग को लेकर आयोजित 31 घंटे के उपवास कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने इस कार्यक्रम को अपना समर्थन दिया। इस दौरान कांग्रेस के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी मौजूद रहे।

    पटवारी ने कहा कि भोपाल और इंदौर के मास्टर प्लान को लेकर कांग्रेस लगातार आवाज उठाती रही है। उनके मुताबिक, भोपाल में मास्टर प्लान लागू करने की मांग को लेकर पूर्व मंत्री पी.सी. शर्मा ने उपवास किया है। इससे पहले व्यापारियों और विधायक आरिफ मसूद की ओर से भी इस मुद्दे को लेकर आंदोलन किया गया है।

    उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी अलग-अलग अवसरों पर सरकार से भोपाल और इंदौर का मास्टर प्लान लागू करने की मांग करती रही है। अब पार्टी ने नगरीय प्रशासन मंत्री, मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि अगले तीन महीने के भीतर दोनों शहरों का मास्टर प्लान जारी किया जाए।

    पटवारी का कहना है कि मास्टर प्लान के अभाव में दोनों शहरों का विकास बेतरतीब तरीके से हो रहा है। इसका असर आम जनता और व्यापारियों पर पड़ रहा है और उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार तय अवधि में मास्टर प्लान नहीं लाती है तो कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर बड़े स्तर पर आंदोलन करेगी।

    उन्होंने स्पष्ट किया कि इंदौर से भोपाल तक प्रस्तावित पदयात्रा केवल मास्टर प्लान की मांग तक सीमित नहीं रहेगी। पटवारी के अनुसार, इसमें प्रदेश में फैल रहे भ्रष्टाचार और बेतरतीब विकास के खिलाफ भी जनआंदोलन का रूप देने की कोशिश की जाएगी।

    कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि सरकार ने जनता से वोट लिए हैं। यदि वही जनता मूलभूत सुविधाओं और व्यवस्थित विकास के लिए संघर्ष करने को मजबूर है तो इसे जनता के साथ अन्याय माना जाएगा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस जनता और व्यापारियों की आवाज बनकर सड़क से सदन तक संघर्ष करेगी।

    पटवारी ने राहुल गांधी के 19 सितंबर को प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी देश के ऐसे पहले नेता प्रतिपक्ष हैं, जो किसी गैर-राजनीतिक कार्यक्रम में शामिल होने आ रहे हैं। इसके बावजूद सरकार ने कार्यक्रम के लिए मैदान के उपयोग के नाम पर 10 लाख रुपये का शुल्क लिया है।

    उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का उदाहरण देते हुए कहा कि जब वह नेता प्रतिपक्ष के रूप में भोपाल आते थे, तब कांग्रेस सरकार उन्हें कार्यक्रम की अनुमति देती थी और स्वयं भी उनके कार्यक्रम में शामिल होकर उन्हें सुनती थी। पटवारी ने राहुल गांधी के कार्यक्रम के लिए मैदान का शुल्क लिए जाने को दोनों सरकारों की सोच के बीच अंतर बताया।

    उन्होंने कहा कि राहुल गांधी का कार्यक्रम छात्रों और युवाओं से जुड़ा है और इसमें बड़ी संख्या में युवा अपनी बात रखने के लिए शामिल होंगे। पटवारी ने सरकार से राजनीतिक दुर्भावना से ऊपर उठकर लोकतांत्रिक परंपराओं और जनभावनाओं का सम्मान करने की अपील की।

  • मास्टर प्लान को लेकर दिशा बैठक में गरमाई राजनीति विधायक और जनपद अध्यक्ष में तीखी बहस सांसद बोले जल्द हो लागू

    मास्टर प्लान को लेकर दिशा बैठक में गरमाई राजनीति विधायक और जनपद अध्यक्ष में तीखी बहस सांसद बोले जल्द हो लागू


    भोपाल । भोपाल के बहुप्रतीक्षित मास्टर प्लान को लेकर जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति दिशा की बैठक शुक्रवार को राजनीतिक टकराव का अखाड़ा बन गई। मास्टर प्लान के लंबे समय से लागू नहीं होने के मुद्दे पर कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद और आतिफ अकील ने बैठक में तीखा विरोध दर्ज कराया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब राजधानी के विकास का सबसे अहम दस्तावेज ही लागू नहीं हो पा रहा है तो विकास समीक्षा बैठकों का क्या औचित्य रह जाता है। इसी मुद्दे पर चर्चा के दौरान फंदा जनपद पंचायत अध्यक्ष प्रमोद सिंह राजपूत के हस्तक्षेप से माहौल और अधिक गरमा गया और बैठक में तीखी नोकझोंक शुरू हो गई।

    विवाद के दौरान कांग्रेस विधायकों ने आपत्ति जताते हुए कहा कि उनकी बात सांसद से हो रही थी ऐसे में बीच में हस्तक्षेप करने का अधिकार किसे है। दोनों पक्षों के बीच बहस इतनी बढ़ गई कि कुछ समय तक बैठक का माहौल पूरी तरह तनावपूर्ण बना रहा। कांग्रेस विधायकों ने आरोप लगाया कि उनकी बातों को गंभीरता से नहीं सुना जा रहा है और नाराज होकर बैठक से बाहर निकल गए। बैठक की अध्यक्षता कर रहे सांसद आलोक शर्मा ने दोनों नेताओं को रोकने और समझाने का प्रयास किया लेकिन वे वापस नहीं लौटे।

    बैठक के बाद सांसद आलोक शर्मा ने भी स्वीकार किया कि भोपाल के सुनियोजित विकास के लिए मास्टर प्लान का जल्द लागू होना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में मुख्यमंत्री से जल्द मुलाकात कर मास्टर प्लान को शीघ्र लागू कराने का आग्रह किया जाएगा। उनका मानना है कि राजधानी के भविष्य के विकास और बुनियादी ढांचे को व्यवस्थित बनाने के लिए मास्टर प्लान सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज है।

    बैठक के दौरान केवल मास्टर प्लान ही नहीं बल्कि स्मार्ट सिटी परियोजना भी जनप्रतिनिधियों के निशाने पर रही। भाजपा विधायक भगवानदास सबनानी ने परियोजना की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि स्मार्ट सिटी के नाम पर बड़े निर्माण तो हुए लेकिन नागरिक सुविधाओं की अनदेखी की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि कई इमारतों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है और दशहरा मैदान जैसी महत्वपूर्ण जगहों का भी नुकसान हुआ है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि स्मार्ट सिटी के बड़े व्यावसायिक प्लॉट छोटे किए जाएं ताकि उनकी बिक्री आसान हो और परियोजना की आय बढ़ सके।

    महापौर मालती राय ने भी स्मार्ट सिटी की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि स्ट्रीट लाइट जैसी सामान्य समस्याओं का समाधान भी समय पर नहीं हो पाता जिससे आम नागरिकों को परेशानी झेलनी पड़ती है। इस पर कलेक्टर एवं स्मार्ट सिटी बोर्ड के अध्यक्ष प्रियंक मिश्रा ने भरोसा दिलाया कि अलग बैठक कर सभी समस्याओं की समीक्षा की जाएगी और समाधान सुनिश्चित किया जाएगा।

    सांसद आलोक शर्मा ने कहा कि स्मार्ट सिटी परियोजना में विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की कमी दिखाई देती है। उन्होंने पूरे प्रोजेक्ट के लिए एक नोडल एजेंसी बनाने का सुझाव दिया ताकि सभी विभाग मिलकर बेहतर तरीके से काम कर सकें। इस दौरान कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने भी भाजपा विधायक भगवानदास सबनानी द्वारा उठाए गए मुद्दों का समर्थन करते हुए कहा कि यदि वरिष्ठ जनप्रतिनिधि समस्याओं की ओर ध्यान दिला रहे हैं तो अधिकारियों को उन्हें गंभीरता से लेकर जल्द समाधान करना चाहिए।

    बैठक में एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव भोजपाल वेटलैंड प्राधिकरण के गठन को लेकर भी पारित किया गया। प्रस्ताव के अनुसार संभागायुक्त को प्राधिकरण का अध्यक्ष बनाया जाए जबकि भोपाल और सीहोर के कलेक्टर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी तथा जनप्रतिनिधियों को इसमें शामिल किया जाए। इस प्रस्ताव को मुख्यमंत्री के पास भेजने का निर्णय लिया गया। साथ ही भोपाल को आधिकारिक रूप से वेटलैंड सिटी घोषित करने की मांग भी बैठक में प्रमुखता से उठाई गई।