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  • मथुरा में गूंजा श्रीकृष्ण भक्ति का संदेश, जन्मभूमि पर विशेष पूजन के बाद उडुपी पीठाधीश्वर का बड़ा बयान

    मथुरा में गूंजा श्रीकृष्ण भक्ति का संदेश, जन्मभूमि पर विशेष पूजन के बाद उडुपी पीठाधीश्वर का बड़ा बयान


    नई दिल्ली। मथुरा में बुधवार को श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर धार्मिक और आध्यात्मिक माहौल देखने को मिला। उडुपी के पेजावर अधोक्षज मठ के पीठाधीश्वर विश्वप्रसन्न तीर्थ महाराज ने श्रीकृष्ण जन्मस्थान मंदिर परिसर में विशेष पूजा अर्चना की। द्वैत वेदांत परंपरा के अनुसार वैदिक मंत्रों के साथ हुए इस अनुष्ठान में उडुपी की उपासना परंपरा और ब्रज की भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला। महाराजश्री अपने साथ करीब 800 वर्ष पुराने भगवान के चल विग्रह लेकर श्रीकृष्ण जन्मभूमि पहुंचे थे। गर्भगृह में तुलसी दल और पुष्पों से भगवान का पूजन किया गया तथा विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करते हुए पुष्प अर्पित किए गए।

    पूजा अर्चना के बाद विश्वप्रसन्न तीर्थ महाराज ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि परिसर का भ्रमण किया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने हरिनाम संकीर्तन किया। मृदंग झांझ और मजीरों की मंगल ध्वनि से पूरा परिसर भक्तिमय नजर आया। श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा ने उनका तुलसी माला पुष्पमाला और अंगवस्त्र से स्वागत किया। इसके बाद महाराजश्री ने श्रीभागवत भवन में भगवान श्रीकृष्ण भगवान श्रीराम और भगवान हयग्रीव के श्रीविग्रह के समक्ष भी पूजा की।

    इस धार्मिक आयोजन की खास बात यह रही कि विश्वप्रसन्न तीर्थ महाराज अपने साथ जगद्गुरु माध्वाचार्य द्वारा पूजित करीब 800 वर्ष पुराने चल विग्रह भी लेकर आए थे। गर्भगृह में उन्होंने वैदिक परंपरा के अनुसार विधिवत पूजा की। तुलसी और पुष्प अर्पित करने के साथ विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे और पूरे परिसर में धार्मिक वातावरण बना रहा।

    पूजन के बाद विश्वप्रसन्न तीर्थ महाराज ने मथुरा में श्रीकृष्ण मंदिर निर्माण से जुड़े विषय पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि सनातन के पवित्र स्थलों पर बने पुराने ढांचों से करोड़ों सनातनियों की भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने अयोध्या और काशी का उल्लेख करते हुए कहा कि अयोध्या में रामलला भव्य मंदिर में विराजमान हो चुके हैं जबकि काशी में बाबा विश्वनाथ मंदिर अपने आध्यात्मिक स्वरूप को प्राप्त कर रहा है। उनके अनुसार अब मथुरा में भगवान श्रीकृष्ण अपनी लीला निश्चित करेंगे।

    विश्वप्रसन्न तीर्थ महाराज ने इसे सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पुनरोत्थान के दौर के रूप में बताया। उन्होंने कहा कि अन्याय और अत्याचार के प्रतीक हटेंगे तथा न्याय की बांसुरी बजेगी। उनका यह बयान श्रीकृष्ण जन्मभूमि को लेकर चल रही धार्मिक चर्चाओं के बीच सामने आया है। हालांकि मंदिर निर्माण और उससे जुड़े विवाद का अंतिम स्वरूप कानूनी और संबंधित संस्थागत प्रक्रियाओं से तय होना है।

    श्रीकृष्ण जन्मभूमि परिसर में महाराजश्री के आगमन के दौरान श्रद्धालुओं में भी खास उत्साह दिखाई दिया। हरिनाम संकीर्तन के बीच मृदंग झांझ और मजीरों की धुन से वातावरण भक्तिमय बना रहा। द्वैत वेदांत परंपरा से जुड़े विशेष पूजन और ब्रज की भावमय भक्ति के इस संगम ने कार्यक्रम को खास बना दिया। मथुरा की धार्मिक पहचान और श्रीकृष्ण जन्मभूमि की आस्था के बीच यह आयोजन श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व वाला रहा।

  • वृंदावन गुरुकुल में जहरीली गैस का कहर, टैंक में उतरे 4 छात्रों की मौत, साथी को बचाने की कोशिश बनी जानलेवा

    वृंदावन गुरुकुल में जहरीली गैस का कहर, टैंक में उतरे 4 छात्रों की मौत, साथी को बचाने की कोशिश बनी जानलेवा


    वृंदावन । वृंदावन के एक गुरुकुल में मंगलवार रात दर्दनाक हादसे ने सभी को झकझोर कर रख दिया। महर्षि पाणिनि संस्कृत गुरुकुलम में पानी के टैंक की सफाई करने उतरे चार छात्रों की जहरीली गैस की चपेट में आने से मौत हो गई। इस हादसे में एक अन्य छात्र भी बेहोश हो गया जिसे गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचाया गया। घटना के बाद पूरे गुरुकुल परिसर में अफरा तफरी मच गई और छात्रों तथा कर्मचारियों में दहशत फैल गई।

    जानकारी के मुताबिक हादसा रात करीब 10 बजे हुआ। गुरुकुल में मौजूद छात्र पानी के एक गहरे टैंक की सफाई कर रहे थे। बताया जा रहा है कि टैंक से पहले मोटर के जरिए पानी बाहर निकाला गया और इसके बाद बचा हुआ पानी बाल्टी से निकाला गया। पानी लगभग खत्म होने के बाद एक छात्र टैंक के अंदर सफाई के लिए उतरा लेकिन कुछ ही देर में वह बेहोश होकर गिर गया। ऊपर मौजूद छात्रों ने उसे आवाज लगाई लेकिन जब कोई जवाब नहीं मिला तो उसे बचाने के लिए दूसरे छात्र भी एक के बाद एक टैंक में उतरते चले गए।

    बताया जा रहा है कि टैंक के भीतर जहरीली गैस मौजूद थी जिसकी चपेट में आने से सभी छात्र बेहोश हो गए। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। रेस्क्यू अभियान चलाकर सभी छात्रों को टैंक से बाहर निकाला गया और तत्काल अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने मनु कटारे उम्र 20 वर्ष देवांश उम्र 17 वर्ष विशु उम्र 18 वर्ष और आर्यन उम्र 18 वर्ष को मृत घोषित कर दिया। वहीं रुद्राक्ष उम्र 18 वर्ष की हालत गंभीर बताई गई।

    मृत छात्रों में मनु कटारे और देवांश मध्य प्रदेश के जबलपुर और विदिशा के रहने वाले थे जबकि आर्यन कौशांबी और विशु मेरठ का निवासी था। हादसे की सूचना मिलते ही छात्रों के परिवारों में मातम पसर गया। गुरुकुल में पढ़ने वाले अन्य छात्र भी इस घटना से सदमे में हैं।
    मृत छात्रों में मनु कटारे और देवांश मध्य प्रदेश के जबलपुर और विदिशा के रहने वाले थे जबकि आर्यन कौशांबी और विशु मेरठ का निवासी था। हादसे की सूचना मिलते ही छात्रों के परिवारों में मातम पसर गया। गुरुकुल में पढ़ने वाले अन्य छात्र भी इस घटना से सदमे में हैं।

    वृंदावन के चैतन्य विहार स्थित इस गुरुकुल में करीब 120 छात्र पढ़ते हैं। तीन मंजिला इमारत में 43 कमरे हैं और यह संस्थान पिछले करीब तीन वर्षों से संचालित बताया जा रहा है। जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह भी मौके पर पहुंचे और गुरुकुल से जुड़े लोगों तथा छात्रों से घटना की जानकारी ली।

    डीएम ने बताया कि टैंक करीब 12 फीट गहरा था और उसमें बदबू आने के बाद उसकी सफाई की जा रही थी। प्रारंभिक तौर पर जहरीली गैस के कारण छात्रों के बेहोश होने और चार छात्रों की मौत की आशंका जताई गई है। प्रशासन अब यह पता लगाने में जुटा है कि टैंक में जहरीली गैस कैसे बनी और सफाई के दौरान सुरक्षा के जरूरी इंतजाम क्यों नहीं किए गए।

    हादसे के बाद गुरुकुल के संचालन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी कई सवाल खड़े हो गए हैं। प्रशासन ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री ने भी घटना का संज्ञान लिया है और पीड़ित परिवारों को हर संभव मदद का भरोसा दिया गया है। हादसे ने एक बार फिर बंद टैंकों और गहरे जलाशयों की सफाई के दौरान सुरक्षा मानकों की अनदेखी के खतरनाक परिणाम सामने ला दिए हैं।

  • राधाष्टमी को लेकर बरसाना में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम, 160 बसें चलाएगा परिवहन निगम

    राधाष्टमी को लेकर बरसाना में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम, 160 बसें चलाएगा परिवहन निगम


    मथुरा। बरसाना में 19 सितंबर को होने वाली राधाष्टमी को लेकर प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए सुरक्षा, यातायात, भीड़ नियंत्रण और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तृत खाका तैयार किया गया है। मेला क्षेत्र को सात जोन और 20 सेक्टर में बांटकर व्यवस्थाओं की निगरानी की जाएगी।

    जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्लोक कुमार की संयुक्त अध्यक्षता में गुरुवार को हुई बैठक में अधिकारियों को सभी व्यवस्थाएं समय से पूरी करने के निर्देश दिए गए। अपर जिलाधिकारी प्रशासन अमरेश कुमार ने बताया कि श्रद्धालुओं के सुचारु दर्शन के लिए 38 होल्डिंग एरिया बनाए जाएंगे। इसके अलावा 50 पार्किंग स्थल, छह वॉच टावर और 88 बैरियर लगाए जाएंगे।

    12 गोताखोर और नाव रहेगी तैनात
    जल संबंधी घटनाओं से निपटने के लिए 12 गोताखोर और एक नाव तैनात की जाएगी। जिलाधिकारी ने मेला क्षेत्र की सड़कों को गड्ढामुक्त करने, निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने और खाद्य पदार्थों की नियमित जांच के निर्देश दिए हैं। सफाई और सजावट के साथ घोषणा प्रणाली से लगातार अनाउंसमेंट कराने पर भी जोर दिया गया है।

    जर्जर भवनों को चिह्नित कर नोटिस देने और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पर्याप्त दिशा-सूचक लगाने के निर्देश दिए गए हैं। स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 12 स्वास्थ्य शिविर और मेडिकल टीमें तैनात रहेंगी। बाइक एंबुलेंस के साथ नियमित दूरी पर एंबुलेंस की व्यवस्था भी की जाएगी। श्रद्धालुओं के लिए 35 पानी के टैंकर, 30 मोबाइल शौचालय और 100 लाउडस्पीकर लगाए जाएंगे। सात स्थानों पर जूता घर भी बनाए जाएंगे।

    50 स्थानों पर 155 कैमरों से नजर
    भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था पर नजर रखने के लिए बरसाना में 50 स्थानों पर कुल 155 सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। इनमें कस्बे में पहले से लगे 60 कैमरों और राधारानी मंदिर में मौजूद 32 कैमरों के अतिरिक्त नए कैमरे शामिल होंगे। इसके अलावा 27 स्थानों पर 63 अस्थायी कैमरे भी लगाए जाएंगे।

    पीली कोठी, श्रीजी गेट और कटारा पार्क सहित सात स्थानों पर स्टैटिक सेट के जरिए भीड़ की निगरानी की जाएगी। प्रशासन का जोर भीड़ के दबाव वाले स्थानों पर लगातार नजर रखने और जरूरत के मुताबिक श्रद्धालुओं की आवाजाही को नियंत्रित करने पर रहेगा।

    राधाष्टमी पर 160 बसें चलेंगी
    राधाष्टमी पर श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को देखते हुए परिवहन निगम ने भी तैयारी शुरू कर दी है। 18 और 19 सितंबर को 160 बसों के संचालन की तैयारी है। इसके अलावा 40 अतिरिक्त बसों को रिजर्व रखा जाएगा।

    बसों के संचालन के लिए चालक-परिचालकों की व्यवस्था के साथ प्रमुख मार्गों पर निगरानी रखी जाएगी। श्रद्धालुओं को बरसाना पहुंचाने और वापस लाने के लिए प्रमुख मार्गों पर पर्याप्त बसें उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। परिवहन निगम के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक विवेक अहिरवार के अनुसार, श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने पर बसों के फेरे भी बढ़ाए जा सकते हैं।

  • मथुरा में 6 दिसंबर को नहीं होगी कार सेवा, अखाड़ा परिषद ने किया कार्यक्रम रद्द, जाने क्‍या कहा ?

    मथुरा में 6 दिसंबर को नहीं होगी कार सेवा, अखाड़ा परिषद ने किया कार्यक्रम रद्द, जाने क्‍या कहा ?

    मथुरा। श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह प्रकरण को लेकर 6 दिसंबर को मथुरा में प्रस्तावित कार सेवा पर अखाड़ा परिषद ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। हरिद्वार में परिषद से जुड़े संतों ने कहा कि 6 दिसंबर को अखाड़ा परिषद की ओर से मथुरा में किसी भी तरह की कार सेवा नहीं की जाएगी। परिषद ने कार सेवा से खुद को अलग करते हुए कहा कि मामले का समाधान न्यायालय के जरिए ही होना चाहिए।

    हरिद्वार में श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर निर्माण के संकल्प के साथ लाई गई रजत शिला के विधि-विधान से पूजन के दौरान संतों ने यह बात कही। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष डॉ. रवींद्र पुरी महाराज और निरंजनी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर कैलाशानंद महाराज ने अपने स्थान पर संकल्पित रजत शिला का पूजन किया।

    न्यायालय के आदेश के बिना समर्थन नहीं
    डॉ. रवींद्र पुरी महाराज ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में ऐसा कोई कदम नहीं उठाया जा सकता। श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े मामले का समाधान न्यायालय के माध्यम से ही संभव है। संतों ने स्पष्ट किया कि न्यायालय के आदेश के बिना वे किसी प्रकार की कार सेवा का समर्थन नहीं करेंगे।

    श्रीकृष्ण जन्मभूमि प्रकरण में हिंदू पक्ष के याचिकाकर्ता दिनेश फलाहारी महाराज ने भी कहा कि उन्हें न्यायालय पर पूरा विश्वास है। उन्होंने अयोध्या मामले का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह वहां न्यायालय के माध्यम से फैसला आया, उसी तरह मथुरा प्रकरण में भी न्यायालय से निर्णय आने की उम्मीद है।

    उन्होंने कहा कि 6 दिसंबर को अखाड़ा परिषद की ओर से किसी भी प्रकार की कार सेवा का कार्यक्रम नहीं होगा। उनका दावा है कि प्रकरण से संबंधित प्राचीन साक्ष्य न्यायालय में प्रस्तुत किए जा चुके हैं और इन्हीं के आधार पर न्यायालय निर्णय करेगा।

    सोशल मीडिया की भ्रामक खबरों से सावधान रहने की अपील
    महामंडलेश्वर राधानंद गिरी महाराज ने कहा कि कुछ लोग सोशल मीडिया के माध्यम से भ्रामक खबरें प्रसारित कर रहे हैं। उन्होंने सनातन समाज से ऐसी खबरों पर विश्वास नहीं करने की अपील की। उनका कहना था कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि मामले में संत समाज न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा रखता है।

    हरिद्वार में हुए संकल्पित रजत शिला पूजन कार्यक्रम में राष्ट्रीय कार्यक्रम प्रभारी-संयोजक पं. राजेश पाठक, महामंडलेश्वर डॉ. रमनपुरी महाराज, महंत दिव्यात्मानंद पुरी महाराज, श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के राष्ट्रीय महामंत्री जय राम शर्मा, महंत बाबा हरिदास महाराज, राष्ट्रीय मंत्री उद्देश सैनी, राष्ट्रीय प्रचारक गुलाब चंद सैनी, राष्ट्रीय महामंत्री गिर्राज वाल्मीकि, कान्हा कौशिक, अनिल कृष्ण शास्त्री, ब्रह्मानंद गिरी, महेशानंद सरस्वती, पूजा भार्गव, रामनारायण बृजवासी, गोविंद बल्लभ शास्त्री और मयंक शर्मा सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

  • श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर 9 अगस्त से कारसेवा, मथुरा में जुटने लगे साधु-संत, पुलिस अलर्ट

    श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर 9 अगस्त से कारसेवा, मथुरा में जुटने लगे साधु-संत, पुलिस अलर्ट

    मथुरा। श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए मथुरा में 9 अगस्त से प्रस्तावित कारसेवा को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। राधाकुंड क्षेत्र के जुल्हेंदी स्थित चित्रगुप्त पीठ में 9 अगस्त को कारसेवा का शंखनाद किया जाएगा। आयोजन से पहले ही देश के अलग-अलग हिस्सों से साधु-संतों का मथुरा पहुंचना शुरू हो गया है। कार्यक्रम में 13 अखाड़ों के महंतों के शामिल होने का दावा किया जा रहा है। आयोजन को देखते हुए पुलिस-प्रशासन भी सतर्क हो गया है।

    श्रीराम मंदिर में लगे पत्थरों की पहली खेप पहुंची
    श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए मंगाए गए गुलाबी पत्थरों की पहली खेप शुक्रवार देर रात चित्रगुप्त पीठ पहुंच गई। ये पत्थर राजस्थान के भरतपुर स्थित बंसीपहाड़पुर से मंगाए गए हैं। इसी क्षेत्र के गुलाबी पत्थरों का इस्तेमाल अयोध्या में श्रीराम मंदिर के निर्माण में भी किया गया है। चित्रगुप्त पीठाधीश्वर स्वामी सच्चिदानंद महाराज की ओर से इन पत्थरों का ऑर्डर दिया गया है। रविवार से शंखनाद कार्यक्रम के लिए पत्थरों को तराशने का काम शुरू किए जाने की तैयारी है।

    5 हजार मीट्रिक टन पत्थरों का दिया गया है ऑर्डर
    स्वामी सच्चिदानंद महाराज के अनुसार, 9 अगस्त को आश्रम से विधिवत कारसेवा की घोषणा की जाएगी। इसके लिए एक बड़े कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें 13 अखाड़ों के साधु-संतों को आमंत्रित किया गया है। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण की जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण का संकल्प लिया गया है। इसके लिए गुलाबी रंग के करीब 5 हजार मीट्रिक टन पत्थरों का ऑर्डर दिया गया है। इनमें से एक खेप शुक्रवार देर रात पहुंच चुकी है।

    अयोध्या आंदोलन की तर्ज पर कारसेवा का ऐलान
    स्वामी सच्चिदानंद ने इससे पहले 4 जुलाई को अयोध्या आंदोलन की तर्ज पर श्रीकृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति के लिए कारसेवा का ऐलान किया था। इसके बाद 12 जुलाई को उन्होंने हरिद्वार स्थित वात्सल्य गंगा आश्रम में साध्वी ऋतंभरा से मुलाकात कर इस अभियान के लिए समर्थन मांगा था।

    अब 9 अगस्त को चित्रगुप्त पीठ में होने वाले कार्यक्रम पर सभी की नजर है। साधु-संतों के जुटने और कारसेवा के ऐलान को देखते हुए प्रशासन ने भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है।

  • वृंदावन पहुंचे पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, आज बांकेबिहारी के करेंगे दर्शन, तीन दिन रहेंगे

    वृंदावन पहुंचे पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, आज बांकेबिहारी के करेंगे दर्शन, तीन दिन रहेंगे


    मथुरा।
    पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद शुक्रवार दोपहर अपने निर्धारित कार्यक्रम के तहत वृंदावन पहुंचे। सड़क मार्ग से वृंदावन पहुंचने के बाद वे होटल विवांता गए, जहां कुछ देर विश्राम किया।

    पूर्व राष्ट्रपति के शुक्रवार शाम विश्व प्रसिद्ध ठाकुर श्री बांके बिहारी मंदिर में दर्शन-पूजन करने का कार्यक्रम है। उनके आगमन को लेकर जिला प्रशासन और पुलिस ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। मंदिर परिसर के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए भी विशेष प्रबंध किए गए हैं।

    रामनाथ कोविंद के दर्शन कार्यक्रम को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने भी तैयारियां पूरी कर ली हैं। आम श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो और सुरक्षा व्यवस्था बनी रहे, इसके लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं। बांकेबिहारी मंदिर में दर्शन-पूजन के बाद पूर्व राष्ट्रपति प्रेम मंदिर भी जाएंगे। रामनाथ कोविंद का वृंदावन में तीन दिन प्रवास प्रस्तावित है।

  • 5500 साल पुराने हरिदेव मंदिर पर ताला, सेवा विवाद में आमने-सामने आए दो गुट; दर्शन बंद होने से श्रद्धालुओं में रोष

    5500 साल पुराने हरिदेव मंदिर पर ताला, सेवा विवाद में आमने-सामने आए दो गुट; दर्शन बंद होने से श्रद्धालुओं में रोष



    मथुरा। मथुरा के गोवर्धन स्थित प्राचीन ठाकुर श्री हरिदेव जी महाराज मंदिर में सेवा अधिकार को लेकर गोस्वामी समाज के दो गुटों के बीच बड़ा विवाद खड़ा हो गया। मामला इतना बढ़ा कि शुक्रवार देर रात पुलिस ने मंदिर के मुख्य द्वार पर ताला लगवा दिया। इसके बाद श्रद्धालुओं का मंदिर में प्रवेश बंद हो गया और दर्शन व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो गई।

    स्थानीय लोगों और गोस्वामी समाज के सदस्यों ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि निजी विवाद के बीच पुलिस ने ऐतिहासिक मंदिर को बंद कर श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुंचाई है। लोगों का आरोप है कि मंदिर में विराजमान ठाकुर जी “कैद” हो गए हैं और नियमित पूजा-पाठ भी बाधित हो गया।

    विवाद के दौरान स्थिति और तनावपूर्ण तब हो गई जब कुछ लोग मंदिर के पीछे के दरवाजे का ताला तोड़कर अंदर घुस गए। बताया जा रहा है कि उन्होंने खुद को मंदिर परिसर में बंद कर लिया और जबरन सेवा करने का दावा करने लगे। वहीं दूसरा पक्ष आरोप लगा रहा है कि सेवा का अधिकार इस महीने उनका है, लेकिन विरोधी गुट अवैध रूप से कब्जा जमाए बैठा है।

    गोवर्धन का यह हरिदेव मंदिर ब्रज क्षेत्र की आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है। मान्यता है कि इस मंदिर की स्थापना भगवान श्रीकृष्ण के प्रपौत्र ब्रजनाभ ने कराई थी। करीब 5500 साल पुराने इस मंदिर को ब्रज के चार प्रमुख देव स्थलों में गिना जाता है, जहां देशभर से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

    मुख्य द्वार बंद होने और मंदिर के भीतर तनावपूर्ण हालात के चलते पूजा-अर्चना और दर्शन व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। फिलहाल पुलिस और प्रशासन दोनों पक्षों से बातचीत कर विवाद सुलझाने की कोशिश में जुटे हैं, लेकिन मंदिर बंद होने से श्रद्धालुओं में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है।

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  • राष्ट्रपति के दौरे से पहले वृंदावन में बंदरों पर सख्ती लंगूर कटआउट से लेकर गुलेल तक बना सुरक्षा कवच

    राष्ट्रपति के दौरे से पहले वृंदावन में बंदरों पर सख्ती लंगूर कटआउट से लेकर गुलेल तक बना सुरक्षा कवच

    नई दिल्ली:उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के वृंदावन में इन दिनों प्रशासन एक अनोखी चुनौती से जूझ रहा है। आमतौर पर धार्मिक और शांत वातावरण के लिए पहचाने जाने वाले इस क्षेत्र में बंदरों का बढ़ता आतंक अब बड़े स्तर की चिंता बन चुका है। स्थिति तब और गंभीर हो गई जब द्रौपदी मुर्मू के आगामी दौरे की घोषणा हुई।

    राष्ट्रपति का यह दौरा 19 मार्च से शुरू होकर तीन दिनों तक चलेगा, जिसमें वे विभिन्न धार्मिक और सामाजिक स्थलों का भ्रमण करेंगी। इस दौरान उड़िया बाबा आश्रम, रामकृष्ण मिशन सेवा चैरिटेबल अस्पताल और गोवर्धन परिक्रमा जैसे कार्यक्रम शामिल हैं। ऐसे में प्रशासन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि उनकी यात्रा पूरी तरह सुरक्षित और व्यवधान रहित रहे।

    वृंदावन के बंदर खासतौर पर अपने अनोखे व्यवहार के लिए कुख्यात हैं। यहां के बंदर राह चलते लोगों के चश्मे छीन लेने के लिए जाने जाते हैं। वे अचानक झपट्टा मारकर चश्मा लेकर भाग जाते हैं और फिर उसे लौटाने के बदले खाने-पीने की चीजों की मांग करते हैं। फ्रूटी जैसे पेय पदार्थ उनके लिए मानो सौदेबाजी का जरिया बन चुके हैं। यही वजह है कि स्थानीय लोग और पर्यटक दोनों ही अक्सर इस समस्या से जूझते नजर आते हैं।

    राष्ट्रपति के दौरे को देखते हुए प्रशासन ने इस बार पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ कुछ अनोखे उपाय भी अपनाए हैं। पहले ऐसे मौकों पर बंदरों को भगाने के लिए प्रशिक्षित लंगूरों की मदद ली जाती थी, लेकिन वन्यजीव संरक्षण कानूनों के चलते अब यह तरीका अपनाना संभव नहीं है। इसके विकल्प के रूप में अब लंगूरों के कटआउट लगाए जा रहे हैं ताकि बंदरों में डर का माहौल बनाया जा सके।

    इसके अलावा वन विभाग ने लगभग 30 सदस्यों की एक विशेष टीम भी तैनात की है। यह टीम गुलेल, लाठी-डंडों और लेजर लाइट जैसे उपकरणों से लैस है। जिन इलाकों में बंदरों की संख्या अधिक है, वहां अतिरिक्त कर्मियों को लगाया जा रहा है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके। प्रशासन की कोशिश है कि राष्ट्रपति के दौरे के दौरान कोई भी बंदर पास न भटके।

    यह पूरा घटनाक्रम न केवल सुरक्षा व्यवस्था की गंभीरता को दर्शाता है बल्कि यह भी दिखाता है कि शहरी और धार्मिक क्षेत्रों में वन्यजीवों के साथ संतुलन बनाए रखना कितना चुनौतीपूर्ण हो गया है। बंदरों का यह व्यवहार एक लंबे समय से चली आ रही समस्या है, लेकिन अब जब मामला देश के सर्वोच्च पद से जुड़ा है, तो प्रशासन हर संभव कदम उठाने में जुटा है।

    वृंदावन में किए गए ये इंतजाम भले ही अस्थायी हों, लेकिन उन्होंने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या भविष्य में इस समस्या का कोई स्थायी समाधान निकाला जा सकेगा। फिलहाल सभी की नजरें राष्ट्रपति के दौरे पर हैं और यह देखने पर कि ये अनोखे उपाय कितने कारगर साबित होते हैं।