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  • श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर 9 अगस्त से कारसेवा, मथुरा में जुटने लगे साधु-संत, पुलिस अलर्ट

    श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर 9 अगस्त से कारसेवा, मथुरा में जुटने लगे साधु-संत, पुलिस अलर्ट

    मथुरा। श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए मथुरा में 9 अगस्त से प्रस्तावित कारसेवा को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। राधाकुंड क्षेत्र के जुल्हेंदी स्थित चित्रगुप्त पीठ में 9 अगस्त को कारसेवा का शंखनाद किया जाएगा। आयोजन से पहले ही देश के अलग-अलग हिस्सों से साधु-संतों का मथुरा पहुंचना शुरू हो गया है। कार्यक्रम में 13 अखाड़ों के महंतों के शामिल होने का दावा किया जा रहा है। आयोजन को देखते हुए पुलिस-प्रशासन भी सतर्क हो गया है।

    श्रीराम मंदिर में लगे पत्थरों की पहली खेप पहुंची
    श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए मंगाए गए गुलाबी पत्थरों की पहली खेप शुक्रवार देर रात चित्रगुप्त पीठ पहुंच गई। ये पत्थर राजस्थान के भरतपुर स्थित बंसीपहाड़पुर से मंगाए गए हैं। इसी क्षेत्र के गुलाबी पत्थरों का इस्तेमाल अयोध्या में श्रीराम मंदिर के निर्माण में भी किया गया है। चित्रगुप्त पीठाधीश्वर स्वामी सच्चिदानंद महाराज की ओर से इन पत्थरों का ऑर्डर दिया गया है। रविवार से शंखनाद कार्यक्रम के लिए पत्थरों को तराशने का काम शुरू किए जाने की तैयारी है।

    5 हजार मीट्रिक टन पत्थरों का दिया गया है ऑर्डर
    स्वामी सच्चिदानंद महाराज के अनुसार, 9 अगस्त को आश्रम से विधिवत कारसेवा की घोषणा की जाएगी। इसके लिए एक बड़े कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें 13 अखाड़ों के साधु-संतों को आमंत्रित किया गया है। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण की जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण का संकल्प लिया गया है। इसके लिए गुलाबी रंग के करीब 5 हजार मीट्रिक टन पत्थरों का ऑर्डर दिया गया है। इनमें से एक खेप शुक्रवार देर रात पहुंच चुकी है।

    अयोध्या आंदोलन की तर्ज पर कारसेवा का ऐलान
    स्वामी सच्चिदानंद ने इससे पहले 4 जुलाई को अयोध्या आंदोलन की तर्ज पर श्रीकृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति के लिए कारसेवा का ऐलान किया था। इसके बाद 12 जुलाई को उन्होंने हरिद्वार स्थित वात्सल्य गंगा आश्रम में साध्वी ऋतंभरा से मुलाकात कर इस अभियान के लिए समर्थन मांगा था।

    अब 9 अगस्त को चित्रगुप्त पीठ में होने वाले कार्यक्रम पर सभी की नजर है। साधु-संतों के जुटने और कारसेवा के ऐलान को देखते हुए प्रशासन ने भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है।

  • वृंदावन पहुंचे पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, आज बांकेबिहारी के करेंगे दर्शन, तीन दिन रहेंगे

    वृंदावन पहुंचे पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, आज बांकेबिहारी के करेंगे दर्शन, तीन दिन रहेंगे


    मथुरा।
    पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद शुक्रवार दोपहर अपने निर्धारित कार्यक्रम के तहत वृंदावन पहुंचे। सड़क मार्ग से वृंदावन पहुंचने के बाद वे होटल विवांता गए, जहां कुछ देर विश्राम किया।

    पूर्व राष्ट्रपति के शुक्रवार शाम विश्व प्रसिद्ध ठाकुर श्री बांके बिहारी मंदिर में दर्शन-पूजन करने का कार्यक्रम है। उनके आगमन को लेकर जिला प्रशासन और पुलिस ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। मंदिर परिसर के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए भी विशेष प्रबंध किए गए हैं।

    रामनाथ कोविंद के दर्शन कार्यक्रम को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने भी तैयारियां पूरी कर ली हैं। आम श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो और सुरक्षा व्यवस्था बनी रहे, इसके लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं। बांकेबिहारी मंदिर में दर्शन-पूजन के बाद पूर्व राष्ट्रपति प्रेम मंदिर भी जाएंगे। रामनाथ कोविंद का वृंदावन में तीन दिन प्रवास प्रस्तावित है।

  • 5500 साल पुराने हरिदेव मंदिर पर ताला, सेवा विवाद में आमने-सामने आए दो गुट; दर्शन बंद होने से श्रद्धालुओं में रोष

    5500 साल पुराने हरिदेव मंदिर पर ताला, सेवा विवाद में आमने-सामने आए दो गुट; दर्शन बंद होने से श्रद्धालुओं में रोष



    मथुरा। मथुरा के गोवर्धन स्थित प्राचीन ठाकुर श्री हरिदेव जी महाराज मंदिर में सेवा अधिकार को लेकर गोस्वामी समाज के दो गुटों के बीच बड़ा विवाद खड़ा हो गया। मामला इतना बढ़ा कि शुक्रवार देर रात पुलिस ने मंदिर के मुख्य द्वार पर ताला लगवा दिया। इसके बाद श्रद्धालुओं का मंदिर में प्रवेश बंद हो गया और दर्शन व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो गई।

    स्थानीय लोगों और गोस्वामी समाज के सदस्यों ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि निजी विवाद के बीच पुलिस ने ऐतिहासिक मंदिर को बंद कर श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुंचाई है। लोगों का आरोप है कि मंदिर में विराजमान ठाकुर जी “कैद” हो गए हैं और नियमित पूजा-पाठ भी बाधित हो गया।

    विवाद के दौरान स्थिति और तनावपूर्ण तब हो गई जब कुछ लोग मंदिर के पीछे के दरवाजे का ताला तोड़कर अंदर घुस गए। बताया जा रहा है कि उन्होंने खुद को मंदिर परिसर में बंद कर लिया और जबरन सेवा करने का दावा करने लगे। वहीं दूसरा पक्ष आरोप लगा रहा है कि सेवा का अधिकार इस महीने उनका है, लेकिन विरोधी गुट अवैध रूप से कब्जा जमाए बैठा है।

    गोवर्धन का यह हरिदेव मंदिर ब्रज क्षेत्र की आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है। मान्यता है कि इस मंदिर की स्थापना भगवान श्रीकृष्ण के प्रपौत्र ब्रजनाभ ने कराई थी। करीब 5500 साल पुराने इस मंदिर को ब्रज के चार प्रमुख देव स्थलों में गिना जाता है, जहां देशभर से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

    मुख्य द्वार बंद होने और मंदिर के भीतर तनावपूर्ण हालात के चलते पूजा-अर्चना और दर्शन व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। फिलहाल पुलिस और प्रशासन दोनों पक्षों से बातचीत कर विवाद सुलझाने की कोशिश में जुटे हैं, लेकिन मंदिर बंद होने से श्रद्धालुओं में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है।

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    Mathura News, Haridev Temple, Govardhan Temple, Temple Dispute, Mathura Temple Controversy, UP News, Braj News, Krishna Temple, Police Action, Religious Dispute, Govardhan News, Temple Lockdown, Devotees Protest

  • राष्ट्रपति के दौरे से पहले वृंदावन में बंदरों पर सख्ती लंगूर कटआउट से लेकर गुलेल तक बना सुरक्षा कवच

    राष्ट्रपति के दौरे से पहले वृंदावन में बंदरों पर सख्ती लंगूर कटआउट से लेकर गुलेल तक बना सुरक्षा कवच

    नई दिल्ली:उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के वृंदावन में इन दिनों प्रशासन एक अनोखी चुनौती से जूझ रहा है। आमतौर पर धार्मिक और शांत वातावरण के लिए पहचाने जाने वाले इस क्षेत्र में बंदरों का बढ़ता आतंक अब बड़े स्तर की चिंता बन चुका है। स्थिति तब और गंभीर हो गई जब द्रौपदी मुर्मू के आगामी दौरे की घोषणा हुई।

    राष्ट्रपति का यह दौरा 19 मार्च से शुरू होकर तीन दिनों तक चलेगा, जिसमें वे विभिन्न धार्मिक और सामाजिक स्थलों का भ्रमण करेंगी। इस दौरान उड़िया बाबा आश्रम, रामकृष्ण मिशन सेवा चैरिटेबल अस्पताल और गोवर्धन परिक्रमा जैसे कार्यक्रम शामिल हैं। ऐसे में प्रशासन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि उनकी यात्रा पूरी तरह सुरक्षित और व्यवधान रहित रहे।

    वृंदावन के बंदर खासतौर पर अपने अनोखे व्यवहार के लिए कुख्यात हैं। यहां के बंदर राह चलते लोगों के चश्मे छीन लेने के लिए जाने जाते हैं। वे अचानक झपट्टा मारकर चश्मा लेकर भाग जाते हैं और फिर उसे लौटाने के बदले खाने-पीने की चीजों की मांग करते हैं। फ्रूटी जैसे पेय पदार्थ उनके लिए मानो सौदेबाजी का जरिया बन चुके हैं। यही वजह है कि स्थानीय लोग और पर्यटक दोनों ही अक्सर इस समस्या से जूझते नजर आते हैं।

    राष्ट्रपति के दौरे को देखते हुए प्रशासन ने इस बार पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ कुछ अनोखे उपाय भी अपनाए हैं। पहले ऐसे मौकों पर बंदरों को भगाने के लिए प्रशिक्षित लंगूरों की मदद ली जाती थी, लेकिन वन्यजीव संरक्षण कानूनों के चलते अब यह तरीका अपनाना संभव नहीं है। इसके विकल्प के रूप में अब लंगूरों के कटआउट लगाए जा रहे हैं ताकि बंदरों में डर का माहौल बनाया जा सके।

    इसके अलावा वन विभाग ने लगभग 30 सदस्यों की एक विशेष टीम भी तैनात की है। यह टीम गुलेल, लाठी-डंडों और लेजर लाइट जैसे उपकरणों से लैस है। जिन इलाकों में बंदरों की संख्या अधिक है, वहां अतिरिक्त कर्मियों को लगाया जा रहा है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके। प्रशासन की कोशिश है कि राष्ट्रपति के दौरे के दौरान कोई भी बंदर पास न भटके।

    यह पूरा घटनाक्रम न केवल सुरक्षा व्यवस्था की गंभीरता को दर्शाता है बल्कि यह भी दिखाता है कि शहरी और धार्मिक क्षेत्रों में वन्यजीवों के साथ संतुलन बनाए रखना कितना चुनौतीपूर्ण हो गया है। बंदरों का यह व्यवहार एक लंबे समय से चली आ रही समस्या है, लेकिन अब जब मामला देश के सर्वोच्च पद से जुड़ा है, तो प्रशासन हर संभव कदम उठाने में जुटा है।

    वृंदावन में किए गए ये इंतजाम भले ही अस्थायी हों, लेकिन उन्होंने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या भविष्य में इस समस्या का कोई स्थायी समाधान निकाला जा सकेगा। फिलहाल सभी की नजरें राष्ट्रपति के दौरे पर हैं और यह देखने पर कि ये अनोखे उपाय कितने कारगर साबित होते हैं।