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महाअष्टमी पर मां अष्टभुजा के दरबार में भक्तों का महाकुंभ, कन्या पूजन और भंडारे में उमड़े हजारों श्रद्धालु
मऊगंज । मध्यप्रदेश के मऊगंज जिले में स्थित ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के अष्टभुजा धाम नईगढ़ी में शारदीय नवरात्रि की महाअष्टमी पर श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत नजारा देखने को मिला। रविवार को मां अष्टभुजा के दर्शन के लिए हजारों श्रद्धालु मंदिर पहुंचे। मंदिर में दर्शन करने वाले भक्तों की संख्या 50 हजार से अधिक बताई गई। सुबह से ही मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में भक्तिमय माहौल बना रहा। मां के जयकारों से पूरा धाम गूंज उठा और श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देर तक लगी रहीं।महाअष्टमी के पावन अवसर पर मंदिर में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का पहुंचना तड़के ही शुरू हो गया था। सुबह करीब तीन बजे से ही मंदिर के बाहर भक्तों की कतारें लगने लगीं। जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ा वैसे-वैसे श्रद्धालुओं की संख्या भी बढ़ती गई। भक्तों ने मां के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। कई श्रद्धालु मध्यप्रदेश के अलग-अलग जिलों के अलावा उत्तर प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से भी अष्टभुजा धाम पहुंचे। रीवा सीधी सतना प्रयागराज और वाराणसी सहित कई स्थानों से आए भक्तों ने मां के दरबार में माथा टेका।दर्शन और पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालुओं ने धार्मिक कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। मंदिर परिसर में सत्यनारायण भगवान की कथा का आयोजन हुआ और भजन-कीर्तन के माध्यम से भक्तों ने देवी की आराधना की। नवरात्रि के इस विशेष अवसर पर कई परिवारों ने बच्चों के मुंडन और कर्णछेदन जैसे धार्मिक संस्कार भी संपन्न कराए। मंदिर परिसर के आसपास मेले जैसा माहौल रहा और बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने धार्मिक गतिविधियों में भाग लिया।महाअष्टमी के अवसर पर अष्टभुजा धाम में विशेष हवन और पूजन किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। इसके बाद नौ कन्याओं को देवी स्वरूप मानकर उनका पूजन किया गया। कन्याओं को भोजन कराया गया और दक्षिणा तथा उपहार भेंट कर आशीर्वाद लिया गया। इसके बाद विशाल भंडारे का आयोजन किया गया जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने महाप्रसाद ग्रहण किया। जिले के दूसरे देवी मंदिरों और दुर्गा पंडालों में भी हवन कन्या पूजन और भंडारे आयोजित किए गए।महाअष्टमी पर केवल अष्टभुजा धाम ही नहीं बल्कि पूरे मऊगंज जिले में भक्ति का माहौल दिखाई दिया। मां जालपा धाम दूबी और बसदेईन माता वसिगड़ा देवी धाम सहित अन्य धार्मिक स्थलों पर भी सुबह से भक्तों की भीड़ रही। नईगढ़ी हनुमना शाहपुर खटखरी पहाड़ी और देवतालाब सहित कस्बों तथा ग्रामीण क्षेत्रों में सजे दुर्गा पंडालों में श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना की। जगह-जगह भजन और धार्मिक आयोजनों के बीच नवरात्रि का उत्साह नजर आया।इस अवसर पर मध्यप्रदेश विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष और देवतालाब विधायक गिरीश गौतम भी अपने परिवार के साथ अष्टभुजा धाम पहुंचे। उन्होंने मां के दर्शन कर चुनरी अर्पित की और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। उन्होंने अपने परिवार के साथ क्षेत्र की सुख-शांति और समृद्धि की कामना की। -

500 साल पुरानी आस्था का चमत्कारी धाम, जहां ज्वाला से प्रकट हुईं मां अष्टभुजा, नवरात्रि में उमड़ता है लाखों भक्तों का सैलाब
मऊगंज । मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले के नईगढ़ी में स्थित मां अष्टभुजा का धाम करीब 500 वर्षों से श्रद्धा और आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है। नवरात्रि के पावन अवसर पर यहां भक्तों की भीड़ उमड़ती है। मंदिर की घंटियों की ध्वनि और माता के जयकारों से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठता है। लोक मान्यताओं के अनुसार इस धाम का इतिहास एक ऐसी घटना से जुड़ा है जिसे श्रद्धालु मां आदिशक्ति के प्राकट्य की कथा के रूप में याद करते हैं। कभी घने जंगलों और सुनसान पगडंडियों के लिए पहचाना जाने वाला यह इलाका आज मां अष्टभुजा की आराधना के लिए दूर दूर तक प्रसिद्ध है। मध्य प्रदेश के अलावा उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ से भी श्रद्धालु यहां दर्शन करने पहुंचते हैं।स्थानीय लोकश्रुति के अनुसार लगभग पांच सौ वर्ष पहले इस क्षेत्र के घने जंगल में अचानक आग जैसी प्रचंड ज्वाला दिखाई दी थी। उसी समय लालगंज का एक यादव वहां से गुजर रहा था। जंगल को जलने से बचाने की भावना से उसने अपने लोटे का पानी उस ज्वाला पर डाल दिया। मान्यता है कि पानी अर्पित करते ही ज्वाला शांत हो गई और वहां पिंडी स्वरूप प्रकट हुआ। श्रद्धालु इसी घटना को मां अष्टभुजा के प्राकट्य से जोड़ते हैं। हालांकि यह कथा स्थानीय जनविश्वास और परंपरा का हिस्सा है जो पीढ़ियों से सुनाई जाती रही है। इसी मान्यता ने इस स्थान को धार्मिक पहचान दिलाई और समय के साथ यहां मंदिर विकसित हुआ।नईगढ़ी के नाम से जुड़ी एक अन्य रोचक लोककथा भी प्रचलित है। कहा जाता है कि उस समय सेंगर वंश के राजा प्रताप सिंह इस क्षेत्र में गढ़ी बनवा रहे थे। मान्यता के अनुसार माता ने राजा को स्वप्न में दर्शन देकर इस भूमि को अपनी आराधना के लिए छोड़ने का संदेश दिया। कथा के मुताबिक माता ने राजा को एक श्वेत खरगोश और श्यामवर्णी श्वान का संकेत दिया था। सुबह राजा ने वैसा ही दृश्य देखा और उस स्थान पर नई गढ़ी बसाने का निर्णय लिया। लोकविश्वास में इसी घटना को नईगढ़ी नगर के नामकरण से जोड़ा जाता है। मंदिर के पास बहने वाली देवलहा नदी और देवलहा जलप्रपात भी इस क्षेत्र की पहचान का हिस्सा हैं।वर्तमान मंदिर के निर्माण का श्रेय करीब 135 वर्ष पहले दुवगवां निवासी साधुराम कोड़रिया को दिया जाता है। बाद के वर्षों में मोतीलाल पांडेय सुमेदा और पटवारी राजेंद्र धर द्विवेदी हटवा सहित कई श्रद्धालुओं ने मंदिर के विकास और जीर्णोद्धार में योगदान दिया। समय के साथ यह धाम केवल स्थानीय लोगों का पूजा स्थल नहीं रहा बल्कि आसपास के जिलों और दूसरे राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी महत्वपूर्ण धार्मिक केंद्र बन गया। सोमवार और गुरुवार को यहां विशेष रूप से भक्त पहुंचते हैं। नवरात्रि और आषाढ़ तथा श्रावण में आयोजित हरियाली पुजाई के दौरान मंदिर परिसर में विशेष रौनक रहती है।मां अष्टभुजा के दरबार से जुड़ी कई धार्मिक मान्यताएं भी प्रचलित हैं। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि सच्चे मन से मांगी गई मनोकामना माता के आशीर्वाद से पूरी होती है। यहां मुंडन संस्कार कर्ण छेदन सत्यनारायण कथा भजन कीर्तन और भंडारे जैसे धार्मिक आयोजन होते हैं। कुछ भक्त अपनी मनौती पूरी होने पर पारंपरिक रूप से विशेष अर्पण भी करते हैं। इन मान्यताओं को श्रद्धालु अपनी आस्था का हिस्सा मानते हैं। मंदिर के आसपास लगने वाली दुकानों से स्थानीय लोगों को रोजगार मिलता है और मेले के समय क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियां भी बढ़ जाती हैं।श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रशासन की ओर से धर्मशाला पेयजल और सामुदायिक भवन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। मेले के दौरान भीड़ को व्यवस्थित करने और दर्शन को सुगम बनाने के लिए विशेष इंतजाम किए जाते हैं। करीब पांच शताब्दियों से चली आ रही लोकआस्था और लगभग 135 वर्ष पुराने मंदिर की परंपरा ने नईगढ़ी धाम को क्षेत्र की विशिष्ट धार्मिक पहचान दी है। नवरात्रि में यहां पहुंचने वाले भक्त माता के दर्शन कर सुख समृद्धि और परिवार के कल्याण की कामना करते हैं। -

आंगनवाड़ी केंद्रों में लापरवाही पर गिरी गाज, पांच कर्मचारियों की सेवा समाप्त, औचक निरीक्षण में सामने आईं खामियां
मऊगंज । मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले में आंगनवाड़ी केंद्रों के संचालन में कथित अनियमितताओं को लेकर महिला एवं बाल विकास विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। नईगढ़ी परियोजना क्षेत्र में तीन आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और दो सहायिकाओं सहित कुल पांच कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक इन कर्मचारियों के खिलाफ लंबे समय से अनधिकृत अनुपस्थिति और केंद्रों का नियमित संचालन नहीं करने जैसी शिकायतें मिल रही थीं। मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने औचक निरीक्षण कराया और संबंधित कर्मचारियों से स्पष्टीकरण भी मांगा। अधिकारियों का कहना है कि जवाब संतोषजनक नहीं मिलने और कार्यप्रणाली में अपेक्षित सुधार नहीं होने के बाद नियमानुसार सेवा समाप्ति की कार्रवाई की गई है।
जानकारी के अनुसार आंगनवाड़ी केंद्रों में कर्मचारियों की अनुपस्थिति और निर्धारित समय पर केंद्र नहीं खुलने की शिकायतें सामने आ रही थीं। इसके अलावा कुछ कर्मचारियों के मुख्यालय पर निवास नहीं करने और अपने पद से जुड़े दायित्वों का ठीक से निर्वहन नहीं करने के आरोप भी थे। इन शिकायतों को लेकर जनहित में मुद्दा उठाए जाने के बाद प्रशासन ने निगरानी और निरीक्षण की प्रक्रिया तेज की। कलेक्टर के निर्देश और जिला कार्यक्रम अधिकारी के मार्गदर्शन में नईगढ़ी परियोजना के अधिकारियों ने मैदानी स्तर पर केंद्रों की स्थिति का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान कुछ केंद्रों के निर्धारित समय पर नहीं खुलने की बात सामने आई। इससे बच्चों और महिलाओं को मिलने वाली सेवाओं के प्रभावित होने की आशंका जताई गई।
नईगढ़ी परियोजना अधिकारी रविशंकर पांडेय ने विभागीय कार्रवाई के तहत पांच कर्मचारियों की सेवा समाप्ति के आदेश जारी किए। इनमें जुड़मनिया रघुनाथ केंद्र की कार्यकर्ता भारती पटेल और सुअरहा केंद्र की कार्यकर्ता सुशीला उपाध्याय शामिल हैं। इसके अलावा मैर मुहल्ला भटिगवां केंद्र की कार्यकर्ता आरती कारपेंटर की सेवा समाप्त की गई है। छुहिया केंद्र की सहायिका आशा मिश्रा और पहरखा-2 केंद्र की सहायिका गीता मिश्रा शुक्ला पर भी कार्रवाई की गई है। विभाग की ओर से यह कदम संबंधित शिकायतों और कार्रवाई की प्रक्रिया के बाद उठाया गया है।
महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी आशीष द्विवेदी ने बताया कि इन कर्मचारियों के विरुद्ध बिना विधिवत सूचना के अनुपस्थित रहने और आंगनवाड़ी केंद्रों का नियमित संचालन नहीं करने की शिकायतें लंबे समय से मिल रही थीं। उनके मुताबिक परियोजना कार्यालय की ओर से समय-समय पर मौखिक और लिखित निर्देश दिए गए थे। पर्यवेक्षकों ने आकस्मिक निरीक्षण भी किए और नियमों के तहत कारण बताओ नोटिस जारी कर संबंधित कर्मचारियों से जवाब मांगा गया था। विभाग के अनुसार प्राप्त स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाए गए और कार्यप्रणाली में अपेक्षित सुधार भी नहीं हुआ। इसके बाद नियुक्ति आदेश की शर्तों और शासन के दिशा-निर्देशों के अनुसार सेवा समाप्ति का निर्णय लिया गया।
आंगनवाड़ी केंद्र बच्चों को पूरक पोषण और प्रारंभिक शिक्षा उपलब्ध कराने के साथ गर्भवती तथा धात्री महिलाओं तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में केंद्रों का समय पर खुलना और कर्मचारियों की नियमित उपस्थिति जरूरी है। कर्मचारियों की अनुपस्थिति या केंद्रों के बंद रहने से उन परिवारों को परेशानी हो सकती है जो इन सेवाओं पर निर्भर हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि निरीक्षण की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। वहीं स्थानीय नागरिकों और समाजसेवियों ने मऊगंज तथा हनुमना परियोजना क्षेत्रों में भी इसी तरह जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि केंद्रों के संचालन और पोषण आहार वितरण से जुड़ी शिकायतों की भी नियमित जांच होनी चाहिए। विभाग की इस कार्रवाई के बाद अब अन्य केंद्रों की निगरानी और व्यवस्था में सुधार पर भी नजर रहेगी। -

सीमित संसाधन भी नहीं रोक सके ध्रुव की उड़ान, किसान पुत्र ने दो स्वर्ण और एक रजत पदक जीतकर रचा इतिहास
मऊगंज । मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले के एक छोटे से ग्रामीण क्षेत्र से निकलकर कक्षा 10वीं के छात्र ध्रुव शुक्ला ने राज्य स्तरीय एथलेटिक्स प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन किया है। शिवपुरी में आयोजित प्रतियोगिता में ध्रुव ने दो स्वर्ण और एक रजत पदक जीतकर अपने जिले का नाम रोशन किया। उन्होंने 100 मीटर और 200 मीटर दौड़ में पहला स्थान हासिल करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किए। वहीं 4×100 मीटर रिले दौड़ में टीम का प्रतिनिधित्व करते हुए रजत पदक जीता। एक ही प्रतियोगिता में तीन पदक हासिल करने की इस उपलब्धि से उनके विद्यालय और परिवार में खुशी का माहौल है। ध्रुव की सफलता को उनकी मेहनत अनुशासन और खेल के प्रति समर्पण का परिणाम माना जा रहा है।
ध्रुव शुक्ला मऊगंज जिले के नईगढ़ी विकासखंड स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय खर्रा में कक्षा 10वीं के छात्र हैं। उनका परिवार खेती-किसानी से जुड़ा है। उनके पिता रामदीन शुक्ला खेती करके परिवार का भरण-पोषण करते हैं। साधारण किसान परिवार से आने वाले ध्रुव ने सीमित संसाधनों के बावजूद खेल के मैदान में अपनी प्रतिभा साबित की है। उनकी इस उपलब्धि ने यह दिखाया है कि किसी खिलाड़ी की सफलता केवल महंगी सुविधाओं पर निर्भर नहीं करती बल्कि नियमित अभ्यास दृढ़ इच्छाशक्ति और लक्ष्य के प्रति लगन भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
शिवपुरी में आयोजित राज्य स्तरीय एथलेटिक्स प्रतियोगिता में ध्रुव ने अपनी गति और खेल कौशल का परिचय दिया। 100 मीटर और 200 मीटर जैसी प्रतिस्पर्धी दौड़ों में स्वर्ण पदक हासिल करना उनकी तैयारी और मेहनत को दर्शाता है। इसके बाद उन्होंने 4×100 मीटर रिले दौड़ में अपनी टीम के साथ भाग लेते हुए रजत पदक जीता। व्यक्तिगत स्पर्धाओं के साथ टीम स्पर्धा में भी पदक हासिल करना उनके लिए खास उपलब्धि रही। इस प्रदर्शन के जरिए उन्होंने अपने विद्यालय और क्षेत्र को राज्य स्तर पर पहचान दिलाई है।
ध्रुव की इस सफलता में उनके कोच और विद्यालय के क्रीड़ा अधिकारी सौरभ त्रिपाठी का महत्वपूर्ण योगदान बताया गया है। उनके मार्गदर्शन में ध्रुव नियमित अभ्यास करते रहे और अपनी दौड़ की तकनीक अनुशासन तथा प्रदर्शन को बेहतर बनाने पर ध्यान दिया। सीमित सुविधाओं के बीच प्रशिक्षण हासिल करते हुए ध्रुव ने प्रतियोगिता में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने का प्रयास किया। खिलाड़ी की मेहनत के साथ सही मार्गदर्शन भी खेल में आगे बढ़ने के लिए महत्वपूर्ण होता है और ध्रुव की उपलब्धि इसका उदाहरण है।
ध्रुव शुक्ला की सफलता ग्रामीण क्षेत्रों के उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो खेलों में करियर बनाने का सपना देखते हैं। कई बार सुविधाओं की कमी खिलाड़ियों के सामने चुनौती बनती है लेकिन निरंतर अभ्यास और मेहनत से आगे बढ़ने के रास्ते तैयार किए जा सकते हैं। ध्रुव की उपलब्धि से यह संदेश मिलता है कि प्रतिभा को अवसर और प्रोत्साहन मिले तो छोटे गांवों से भी खिलाड़ी बड़ी प्रतियोगिताओं में अपनी पहचान बना सकते हैं।
ध्रुव के तीन पदक जीतने पर विद्यालय के प्राचार्य शिक्षकगण जनप्रतिनिधियों और क्षेत्रवासियों ने प्रसन्नता जताई है। सभी ने ध्रुव और उनके कोच सौरभ त्रिपाठी को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। अब ध्रुव के सामने अपनी इस सफलता को आगे बढ़ाने और आगामी प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन करने की चुनौती होगी। उनकी उपलब्धि ने मऊगंज जिले में खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने की उम्मीद भी जगाई है। -

मऊगंज में आरटीओ चेकिंग के दौरान भड़का गुस्सा, ड्राइवरों ने अस्थायी ढांचे को जलाया
मऊगंज जिले के हनुमना आरटीओ चेकिंग पॉइंट पर शुक्रवार देर शाम उस समय भारी हंगामा खड़ा हो गया जब ट्रक ड्राइवरों ने आरटीओ कर्मचारियों पर अवैध वसूली और प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि आक्रोशित ड्राइवरों ने चेक पोस्ट के पास बनी कर्मचारियों की अस्थायी झोपड़ी और कुर्सियों को आग के हवाले कर दियाघटना मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की सीमा के समीप हनुमना बॉर्डर की बताई जा रही है यहां नियमित रूप से आरटीओ द्वारा चेकिंग की जाती है शुक्रवार को जांच के दौरान कर्मचारियों ने दो ट्रकों को रोककर दस्तावेजों की जांच शुरू की इसी बीच ड्राइवरों ने आरोप लगाया कि उनसे नियमों के नाम पर अवैध वसूली की जा रही है और उन्हें अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा है
ड्राइवरों का कहना था कि चेकिंग के नाम पर बार बार वाहनों को रोका जाता है और बिना किसी स्पष्ट कारण के आर्थिक दबाव बनाया जाता है इसी आरोप को लेकर मौके पर बहस शुरू हुई जो कुछ ही देर में उग्र रूप ले बैठी देखते ही देखते अन्य ट्रक चालक भी वहां जमा हो गए और माहौल तनावपूर्ण हो गया
आक्रोशित भीड़ ने कर्मचारियों के अस्थायी ढांचे को निशाना बनाया और वहां रखी कुर्सियों व अन्य सामान को बाहर निकालकर आग लगा दी आगजनी से कुछ समय के लिए अफरा तफरी की स्थिति बन गई हालांकि किसी के गंभीर रूप से घायल होने की सूचना नहीं है
घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया पुलिस ने भीड़ को समझाकर हटाया और आग पर काबू पाया इसके बाद क्षेत्र में अतिरिक्त बल तैनात कर दिया गया ताकि दोबारा तनाव न बढ़े
प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं अधिकारियों का कहना है कि यदि अवैध वसूली के आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित कर्मचारियों पर कार्रवाई की जाएगी वहीं आगजनी और तोड़फोड़ में शामिल लोगों की पहचान भी की जा रही है सीसीटीवी फुटेज और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी
यह घटना सीमा क्षेत्र में चल रही चेकिंग व्यवस्था और परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है विशेषज्ञों का मानना है कि पारदर्शी और डिजिटल व्यवस्था से इस तरह के विवादों को कम किया जा सकता है साथ ही ड्राइवरों और अधिकारियों के बीच संवाद की कमी भी ऐसे टकराव को जन्म देती है
हनुमना बॉर्डर पर स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है लेकिन घटना ने परिवहन व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर नई बहस छेड़ दी है
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50 साल के कब्जे, कोर्ट के स्टे और चार रजिस्ट्री के बावजूद गरजा बुलडोजर: मऊगंज में प्रशासन बनाम गरीब
मऊगंज । कहते हैं कानून अंधा होता है लेकिन मऊगंज का राजस्व अमला इस कहावत से भी एक कदम आगे नजर आ रहा है यहां कानून न सिर्फ अंधा बल्कि बहरा भी दिखाई दे रहा है। देवतालाब उप-तहसील के नौडिया गांव में प्रशासन ने जिस तरह भारी पुलिस बल के साथ गरीबों के घरों पर बुलडोजर चलाने की तैयारी की उसने पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। यह कार्रवाई उस जमीन पर की जा रही है जिस पर लोग पिछले करीब 50 वर्षों से काबिज हैं और जहां सिविल कोर्ट का स्पष्ट स्थगन आदेश स्टे भी लागू है।पूरा विवाद 1988 में की गई एक रजिस्ट्री से शुरू होता है। आरोप है कि भगवानदीन पटेल नाम के एक रसूखदार पटवारी ने जमीन की रजिस्ट्री करवाई नामांतरण भी हुआ लेकिन इसके बाद खेल शुरू हुआ। पटवारी के भाई ने अपील दायर कर खरीदारों का नाम रिकॉर्ड से कटवा दिया और जमीन दोबारा अपने नाम दर्ज करा ली। हैरानी की बात यह है कि जिस अपील के आधार पर मालिकाना हक बदला गया उसका कोई रिकॉर्ड आज राजस्व विभाग के पास मौजूद नहीं है।
यहीं से जमीन की जालसाजी का सिलसिला तेज हो गया। आरोप है कि एक ही जमीन की चार बार रजिस्ट्री की गई। 1988 के बाद वर्षों तक लोग उसी जमीन पर मकान बनाकर रहते रहे फिर 2022 में दोबारा खरीद-फरोख्त हुई। एक ही खसरे की जमीन अलग-अलग लोगों को बेची जाती रही और प्रशासन आंख मूंदे बैठा रहा। अब जब विवाद कोर्ट में है और मामला विचाराधीन है तो अचानक प्रशासन को यह जमीन “सरकारी” नजर आने लगी।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सिविल कोर्ट का स्टे ऑर्डर प्रभावशील है तो प्रशासन किस कानून के तहत अतिक्रमण हटाने पहुंचा? क्या मऊगंज का राजस्व अमला खुद को माननीय न्यायालय से ऊपर समझता है? कार्रवाई के दौरान हालात इतने बिगड़ गए कि कुछ लोगों ने आत्मघाती कदम उठाने की कोशिश क किसी ने हाथ की नस काट ली तो किसी ने खुद को घर में बंद कर लिया।
विडंबना यह भी है कि जिस जमीन को सरकारी बताया जा रहा है उससे जुड़े पुख्ता दस्तावेज प्रशासन के पास नहीं हैं। न यह स्पष्ट है कि जमीन कब और कैसे सरकारी घोषित हुई। इसके बावजूद कार्रवाई के दौरान जब लोगों ने विरोध किया तो अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया भले ही रोक दी गई लेकिन वर्तमान पटवारी ने पीड़ितों पर ही “कानूनी हंटर” चला दिया। नौ लोगों के खिलाफ सरकारी काम में बाधा और गाली-गलौज जैसी धाराओं में केस दर्ज कर लिया गया।
आज नौडिया गांव के लोग अपनी ही जमीन पर खुद को बेगाना महसूस कर रहे हैं। सवाल यह है कि जिसने 27 डिसमिल हिस्से में 40 डिसमिल जमीन बेच दी उस पूर्व पटवारी पर अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या प्रशासन की जिम्मेदारी सिर्फ गरीबों के घर गिराना है या उस सिस्टम को दुरुस्त करना भी है जो भ्रष्टाचार को संरक्षण देता है?
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मऊगंज में 'कागजी' तस्करी का भंडाफोड़: 28 गौवंशों से भरी 3 पिकअप जब्त; सरपंचों के फर्जी पत्राचार ने खोली प्रशासन की पोल
मऊगंज । रीवा और मऊगंज जिले की सीमा पर स्थित लौर थाना क्षेत्र में गौ-तस्करी का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। पटपरा तिराहे पर स्थानीय ग्रामीणों की सजगता से गौवंशों से भरी तीन पिकअप गाड़ियों को पकड़ा गया है। इस कार्रवाई ने न केवल पशु क्रूरता की पराकाष्ठा को उजागर किया है, बल्कि यह भी साफ कर दिया है कि तस्करों ने बचने के लिए पंचायतों और कागजों का एक ऐसा मायाजाल बुना है, जिसकी जड़ें काफी गहरी हैं।क्रूरता की हदें पार, चीख भी नहीं सके बेजुबान ग्रामीणों ने जब घेराबंदी कर तीन पिकअप वाहनों MP17 G3621, MP17 ZH 1466, MP 17 G 346 को रोका, तो अंदर का नजारा देखकर रूह कांप गई। तीन गाड़ियों में कुल 28 गौवंशों को इतनी बेरहमी से ठूंस-ठूंस कर भरा गया था कि वे हिलने-डुलने तक में असमर्थ थे। पकड़े गए आरोपियों की पहचान महेंद्र गुप्ता, अंकित साकेत और सुरेश साहू निवासी मनगवां के रूप में हुई है।
फर्जी दस्तावेजों का मायाजाल पकड़े जाने के बाद आरोपियों ने जो दस्तावेज पेश किए, वे तस्करी के इस खेल को और भी संदिग्ध बनाते हैं। मऊगंज की आमोखर ग्राम पंचायत के सरपंच ने 26 जनवरी को एक पत्र जारी कर 50 किलोमीटर दूर स्थित तिवरीगवां पंचायत से 70 गौवंशों की मांग की थी। हैरानी की बात यह है कि जब तिवरीगवां के सरपंच से संपर्क किया गया, तो उन्होंने ऐसे किसी भी पत्राचार या जानकारी से साफ इनकार कर दिया। आखिर एक पंचायत का सरपंच दूसरी पंचायत के आवारा पशुओं का ‘सौदा’ कैसे कर सकता है?
गौ-सेवा या संगठित तस्करी? सूत्रों की मानें तो यह गौ-सेवा नहीं बल्कि तस्करी का एक संगठित सिंडिकेट है। आमोखर गौशाला, जिसकी क्षमता 400 है और जहाँ पहले से ही 500 से अधिक पशु बदहाली में हैं, वहाँ अचानक दूसरे जिले से पशु क्यों मंगाए जा रहे थे? आरोपियों ने बचाव के लिए रीवा प्रशासन का महीनों पुराना एक पत्र भी दिखाया, जिसका वर्तमान परिवहन से कोई कानूनी लेना-देना नहीं था। यह साफ इशारा करता है कि कागजों को ढाल बनाकर तस्करी की चाल चली जा रही थी।
सवालों के घेरे में ‘खाकी’ और पंचायत आशुतोष मिश्रा और गोलू गौतम जैसे सजग युवाओं की बदौलत यह गिरोह पकड़ में तो आ गया, लेकिन पुलिस की कार्रवाई फिलहाल ‘पशु क्रूरता’ की साधारण धाराओं तक सीमित दिख रही है। सवाल उठता है कि क्या प्रशासन उन सरपंचों पर शिकंजा कसेगा जिन्होंने फर्जी पत्राचार किया? क्या पुलिस इस रैकेट के असली ‘मास्टरमाइंड’ तक पहुँचेगी? मऊगंज एसडीओपी सचि पाठक ने वैधानिक कार्रवाई का भरोसा दिया है, लेकिन ग्रामीणों की मांग है कि इसे केवल क्रूरता नहीं बल्कि संगठित अपराध मानकर जांच की जाए।