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  • स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और माघ मेला प्रशासन विवाद हाई कोर्ट तक पहुँचा, अधिकारियों के निलंबन और CBI जांच की मांग

    स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और माघ मेला प्रशासन विवाद हाई कोर्ट तक पहुँचा, अधिकारियों के निलंबन और CBI जांच की मांग

    नई दिल्ली। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और माघ मेला प्रशासन के बीच उत्पन्न विवाद अब इलाहाबाद हाई कोर्ट तक पहुंच गया है। याचिका में 18 जनवरी 2026 को मौनी अमावस्या के दिन घटित घटना की CBI जांच कराने की मांग की गई है। यह मामला धार्मिक भावनाओं, प्रशासनिक हस्तक्षेप और नाबालिगों के अधिकारों के उल्लंघन से जुड़ा हुआ है।

    अधिवक्ता गौरव द्विवेदी ने मुख्य न्यायमूर्ति के समक्ष लेटर पिटीशन दाखिल की है। याचिकाकर्ता का दावा है कि माघ मेला सनातन धर्म का अत्यंत पवित्र उत्सव है, जिसमें मौनी अमावस्या का संगम स्नान सर्वोच्च धार्मिक महत्व रखता है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जब अपने शिष्यों के साथ पालकी में सवार होकर संगम स्नान के लिए जा रहे थे, तब मेला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने उन्हें जबरन पालकी से उतार दिया और पैदल स्नान करने का निर्देश दिया।

    याचिका में यह भी कहा गया है कि स्वामीजी के साथ चल रहे 11 से 14 वर्ष आयु के नाबालिग बटुकों को हिरासत में लिया गया, उनके साथ कथित मारपीट की गई और उनकी शिखा (चोटी) पकड़कर घसीटा गया। याचिकाकर्ता ने स्पष्ट किया है कि नाबालिगों के साथ इस प्रकार का व्यवहार जुवेनाइल जस्टिस (केयर एंड प्रोटेक्शन) एक्ट का उल्लंघन करता है और यह दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है।

    याचिका में यह भी उल्लेख है कि बटुकों की शिखा खींचना सनातन धर्म की धार्मिक भावनाओं का अपमान है। मेला प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के पद और शंकराचार्य नियुक्ति को लेकर सवाल उठाए थे, जबकि याचिकाकर्ता का कहना है कि शंकराचार्य की नियुक्ति की मान्य धार्मिक प्रक्रिया अखाड़ों और काशी विद्वत परिषद के माध्यम से होती है। प्रशासन को इस प्रक्रिया या पद की वैधता पर प्रश्न उठाने का अधिकार नहीं है।

    अधिवक्ता ने कोर्ट से मांग की है कि मामले की तुरंत CBI जांच करवाई जाए, मेला और पुलिस अधिकारियों के खिलाफ निलंबन किया जाए, और नाबालिग बटुकों के साथ मारपीट करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जाए।

    धार्मिक अधिकारों और नाबालिग सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह याचिका हाई कोर्ट में विचाराधीन है। याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि प्रशासनिक हस्तक्षेप ने न केवल धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाई, बल्कि छोटे बच्चों के अधिकारों का भी उल्लंघन किया।

    विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला धार्मिक स्वतंत्रता, प्रशासनिक दखल और बाल सुरक्षा का संगम है और इसका निर्णय पूरे धार्मिक और प्रशासनिक तंत्र के लिए एक मिसाल साबित हो सकता है। कोर्ट से उम्मीद जताई जा रही है कि CBI जांच और अधिकारियों के निलंबन के निर्देश जल्द जारी होंगे।

  • मौनी अमावस्या पर प्रयागराज में बवाल: पुलिस ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को रोका, पालकी खींची गई, स्नान से वंचित रहे

    मौनी अमावस्या पर प्रयागराज में बवाल: पुलिस ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को रोका, पालकी खींची गई, स्नान से वंचित रहे



    प्रयागराज । प्रयागराज माघ मेले में मौनी अमावस्या के पावन स्नान के दौरान रविवार को उस समय तनाव की स्थिति बन गई, जब शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की पालकी को पुलिस ने संगम जाने से रोक दिया। पुलिस ने भीड़ का हवाला देते हुए शंकराचार्य से रथ से उतरकर पैदल संगम जाने का अनुरोध किया, लेकिन उनके शिष्य इस बात पर सहमत नहीं हुए और पालकी आगे बढ़ाने लगे।

    इसी बात को लेकर पुलिस और शिष्यों के बीच पहले बहस हुई और फिर देखते ही देखते धक्का-मुक्की शुरू हो गई। हालात बिगड़ते देख पुलिस ने कई शिष्यों को हिरासत में ले लिया।

    आरोप है कि इस दौरान एक साधु को चौकी में ले जाकर मारपीट भी की गई, जिससे संत समाज में नाराजगी फैल गई।

    घटना की जानकारी मिलते ही शंकराचार्य स्वयं आक्रोशित हो गए और अपने शिष्यों की रिहाई की मांग पर अड़ गए। मौके पर मौजूद वरिष्ठ अधिकारियों ने उन्हें समझाने की कोशिश की, हाथ जोड़कर अनुरोध भी किया, लेकिन शंकराचार्य नहीं माने। करीब दो घंटे तक मौके पर तनावपूर्ण माहौल बना रहा और संगम क्षेत्र में गहमागहमी रही।

    इसके बाद पुलिस ने शंकराचार्य के और समर्थकों को हिरासत में ले लिया और उनकी पालकी को खींचते हुए संगम से लगभग एक किलोमीटर दूर ले जाया गया। इस दौरान पालकी का एक हिस्सा टूट भी गया।

    पूरे घटनाक्रम के कारण शंकराचार्य मौनी अमावस्या का पवित्र स्नान नहीं कर पाए, जिससे उनके अनुयायियों में गहरा आक्रोश देखा गया।

    प्रशासन की ओर से बताया गया कि मौनी अमावस्या के कारण संगम तट पर श्रद्धालुओं की रिकॉर्ड भीड़ है। अब तक करीब 3 करोड़ श्रद्धालु स्नान कर चुके हैं, जबकि प्रशासन का अनुमान है कि दिन खत्म होने तक यह संख्या 4 करोड़ तक पहुंच सकती है। भीड़ नियंत्रण के लिए मेला क्षेत्र में AI आधारित सिस्टम, CCTV कैमरे और ड्रोन से निगरानी की जा रही है। करीब 800 हेक्टेयर में फैले मेला क्षेत्र को 7 सेक्टरों में बांटा गया है और 8 किलोमीटर लंबे अस्थायी घाट बनाए गए हैं।

  • साल की पहली मौनी अमावस्या: ग्वारीघाट-तिलवारा-लम्हेटा पर उमड़ी भीड़, नर्मदा में शुरू हुआ सुबह 4 बजे से स्नान

    साल की पहली मौनी अमावस्या: ग्वारीघाट-तिलवारा-लम्हेटा पर उमड़ी भीड़, नर्मदा में शुरू हुआ सुबह 4 बजे से स्नान


    नई दिल्ली। साल की पहली मौनी अमावस्या पर जबलपुर के ग्वारीघाट, तिलवारा घाट और लम्हेटा घाट पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। रविवार सुबह से ही घाटों पर भक्तों का आगमन शुरू हो गया था और दिन के बढ़ने के साथ संख्या लगातार बढ़ती गई। जबलपुर के साथ-साथ आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से भी हजारों लोग आस्था के साथ मां नर्मदा में डुबकी लगाने पहुंचे।

    श्रद्धालुओं ने मौनी अमावस्या के महत्व को देखते हुए पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।

    कई भक्तों ने घाट पर दीपदान किया और जरूरतमंदों को दान-पुण्य भी किया, जिससे पूरे घाट क्षेत्र में भक्तिमय वातावरण बना रहा। पंडित कृष्णा दुबे ने बताया कि सुबह 4 बजे से ही नर्मदा स्नान शुरू हो गए थे और मान्यता है कि इस दिन नर्मदा में स्नान करने से पापों का नाश होता है और कई पीढ़ियां तर जाती हैं।

    भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा और व्यवस्था के विशेष इंतजाम किए। पुलिस बल तैनात किया गया और यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए विशेष प्रबंध किए गए। इस आस्था के चलते हर वर्ष मौनी अमावस्या पर ग्वारीघाट सहित अन्य नर्मदा घाटों पर भक्तों की भीड़ देखने को मिलती है, जो इस दिन की धार्मिक महत्ता को दर्शाती है।

  • मौनी अमावस्या पर माघ मेले का तीसरा शाही स्नान, संगम में उमड़ेगा आस्था का सैलाब

    मौनी अमावस्या पर माघ मेले का तीसरा शाही स्नान, संगम में उमड़ेगा आस्था का सैलाब


    नई दिल्ली/ प्रयागराज। माघ मेले का तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण शाही स्नान मौनी अमावस्या के अवसर पर 18 जनवरी को संगम तट पर संपन्न होगा। इस पावन अवसर पर देशभर से लाखों श्रद्धालुओं साधु-संतों और कल्पवासियों के प्रयागराज पहुंचने की संभावना है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मौनी अमावस्या के दिन संगम में स्नान करने से जन्म-जन्मांतर के पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। इसी कारण इस स्नान पर्व को माघ मेले का सबसे पवित्र और प्रभावशाली स्नान माना जाता है।

    मौनी अमावस्या का धार्मिक महत्व
    हिंदू पंचांग के अनुसार मौनी अमावस्या माघ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को आती है। वर्ष 2026 में यह तिथि 18 जनवरी की रात 12:03 बजे से 19 जनवरी की रात 1:21 बजे तक रहेगी। हालांकि धार्मिक परंपराओं के अनुसार पर्व 18 जनवरी को ही मनाया जाएगा। इस दिन मौन व्रत रखने गंगा-यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम में स्नान करने तथा दान-पुण्य करने का विशेष महत्व बताया गया है।

    शुभ मुहूर्त और विशेष योग
    ज्योतिषाचार्यों के अनुसार मौनी अमावस्या पर ब्रह्म मुहूर्त में सुबह 5:27 से 6:21 बजे तक संगम स्नान को अमृत स्नान माना गया है। इस दिन पंचग्रही योग पूरे समय प्रभावी रहेगा जबकि सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 10:14 बजे से अगले दिन तक रहेगा। वृंदावन के ज्योतिषाचार्य राधाकांत वत्स के अनुसार इन शुभ योगों में किया गया स्नान जप और दान अक्षय पुण्य प्रदान करता है।

    अखाड़ों का शाही स्नान
    परंपरा के अनुसार मौनी अमावस्या के दिन सबसे पहले अखाड़ों के साधु-संत नागा साधु और ऋषि-मुनि गाजे-बाजे और शाही ठाठ-बाट के साथ संगम में डुबकी लगाएंगे। इसके बाद कल्पवासी और आम श्रद्धालु संगम स्नान करेंगे। मान्यता है कि अखाड़ों के स्नान के बाद संगम जल में विशेष आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है।

    प्रशासन की कड़ी तैयारियां
    श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए मेला प्रशासन और जिला प्रशासन ने सुरक्षा यातायात और स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर व्यापक इंतजाम किए हैं। संगम क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल ड्रोन निगरानी मेडिकल कैंप अस्थायी पुल स्वच्छता कर्मी और दिशा-सूचक बोर्ड लगाए गए हैं। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे निर्धारित घाटों पर ही स्नान करें भीड़ प्रबंधन के नियमों का पालन करें और अफवाहों से बचें।

    महाशिवरात्रि तक चलेगा माघ मेला
    माघ मेला महाशिवरात्रि के दिन संपन्न होगा। धार्मिक मान्यता है कि माघ माह में सभी देवी-देवता संगम तट पर वास करते हैं। ऐसे में मौनी अमावस्या का शाही स्नान पूरे माघ मेले का सबसे महत्वपूर्ण और फलदायी स्नान पर्व माना जाता है। आस्था श्रद्धा और अध्यात्म का यह महासंगम एक बार फिर संगम नगरी को दिव्य स्वरूप प्रदान करेगा।

  • पितरों को प्रसन्न करने का खास मौका है मौनी अमावस्या, कृपा प्राप्ति के लिए करें ये काम

    पितरों को प्रसन्न करने का खास मौका है मौनी अमावस्या, कृपा प्राप्ति के लिए करें ये काम

    नई दिल्ली माघ माह की अमावस्या को मौनी अमावस्या (Mauni Amavasya 2026) के नाम से जाना जाता है। यह तिथि हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखती है, क्योंकि इसी दिन पर माघ मेले में तीसरा प्रमुख स्नान भी किया जाता है। इस दिन किए गए गंगा स्नान करने से साधक को पुण्य फलों की प्राप्ति हो सकती है। साथ ही यह तिथि पितरों की कृपा प्राप्ति के लिए भी विशेष महत्व रखती है।

    नहीं सताएगा पितृ दोष
    हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, मौनी अमावस्या के दिन गंगा स्नान से साधक के जाने-अनजाने में किए गए पाप नष्ट हो जाते हैं। ऐसे में मौनी अमावस्या के दिन सुबह जल्दी उठकर गंगा स्नान के लिए जरूर जाएं। अगर आपके लिए ऐसा करना संभव नहीं है, तो आप घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर भी स्नान कर सकते हैं।

    इससे भी विशेष लाभ मिल सकता है। इसके बाद पितरों के निमित्त तर्पण व दान पुण्य करें। आप इस दिन पर सफेद रंग के वस्त्रों या फिर गर्म कपड़ों का दान कर सकते हैं। जिससे आपको पितृ दोष से भी राहत मिल सकती है।

    जरूर करें ये काम
    मौनी अमावस्या के दिन स्नान के बाद एक पात्र में जल लेकर उसमें कुश, अक्षत और काले तिल मिलाएं। इसके बाद दक्षिण दिशा में पितरों के निमित्त जल अर्पित करें और इस दौरान ‘ॐ पितृभ्यो नमः’ मंत्र का जप करें। इस मंत्र का जप कम-से-कम 11 बार करना चाहिए। साथ ही इस दिन पर ब्राह्मणों को भोजन करवाएं और यदि संभव हो तो हरिद्वार, गया जैसे तीर्थ स्थलों पर जाकर दान करें। इन सभी कार्यों को करने से पितरों को शांति मिलती है।

    मिलेगी पितरों की कृपा
    हिंदू धर्म में यह माना जाता है कि पीपल के वृक्ष में पितरों का निवास होता है। ऐसे में माघ अमावस्या को शाम के समय पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जरूर जलाएं। इसके साथ ही दूध व गंगाजल अर्पित करें। इसके बाद 7 बार पीपल की परिक्रमा करें। ऐसा करने से पितृ दोष शांत होता है और घर-परिवार में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है

  • मौनी अमावस्या 2026 18 जनवरी को चमकेगी इन 3 राशियों की किस्मत महादेव होंगे मेहरबान

    मौनी अमावस्या 2026 18 जनवरी को चमकेगी इन 3 राशियों की किस्मत महादेव होंगे मेहरबान


    नई दिल्ली । सनातन धर्म में माघ मास की अमावस्या जिसे मौनी अमावस्या के नाम से जाना जाता है का आध्यात्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यधिक महत्व है। यह दिन विशेष रूप से तप ध्यान और आत्म-चिंतन के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इस वर्ष मौनी अमावस्या 18 जनवरी रविवार को मनाई जाएगी। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार इस दिन ग्रहों की स्थिति कुछ राशियों के लिए अत्यंत लाभकारी रहेगी। खासकर कर्क मकर और कुंभ राशियों के जातकों के लिए यह दिन एक वरदान साबित हो सकता है क्योंकि इस दिन भगवान शिव की विशेष कृपा उन पर बरसने वाली है।

    कर्क राशि

    कर्क राशि के जातकों के लिए मौनी अमावस्या का दिन बेहद शुभ और लाभकारी रहेगा। भगवान शिव की कृपा से आपके रुके हुए मांगलिक कार्य संपन्न होंगे और जो कार्य पहले कठिन लग रहे थे वे अब सुगमता से पूरे होंगे। इस दिन के दौरान खासकर बिजनेस और वित्तीय मामलों में सकारात्मक बदलाव आएगा।

    लाभ

    व्यापार में लाभ के प्रबल योग हैं। निवेश के लिए यह समय उत्तम रहेगा और आपको अच्छा रिटर्न मिल सकता है।जीवन के अन्य क्षेत्रों में भी सफलता और समृद्धि की संभावनाएं बन रही हैं।

    उपाय

    मानसिक शांति और मनोकामना पूर्ति के लिए गंगाजल में काले तिल मिलाकर भगवान शिव का अभिषेक करें। यह उपाय आपके जीवन में शांति और समृद्धि लाएगा।

    मकर राशि

    मकर राशि के स्वामी शनिदेव हैं और इनके आराध्य भगवान शिव हैं। मौनी अमावस्या पर यह दिन मकर राशि के जातकों के लिए विशेष रूप से शुभ होगा। इस दिन आपको बड़ी उपलब्धियों की प्राप्ति हो सकती है जिनकी आप लंबे समय से प्रतीक्षा कर रहे थे। इसके अलावा पार्टनर का सहयोग और समर्थन भी प्राप्त होगा जिससे आपके व्यक्तिगत और व्यावसायिक कार्यों में गति आएगी।

    लाभ

    लंबे समय से अटके हुए काम अब गति पकड़ेंगे। मानसिक तनाव में कमी आएगी जिससे जीवन में शांति और संतुलन स्थापित होगा। पार्टनर और सहयोगियों से पूरी मदद मिलेगी।

    उपाय

    इस दिन काले तिल का दान करना आपके लिए विशेष रूप से लाभकारी रहेगा। इससे भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होगा और कार्यों में सफलता मिलेगी।

    कुंभ राशि

    कुंभ राशि के जातकों के लिए भी यह मौनी अमावस्या बहुत फायदेमंद साबित हो सकती है। ग्रहों की स्थिति कुंभ राशि के लिए शुभ संकेत दे रही है। इस दिन महादेव की विशेष कृपा से आपके जीवन में आने वाली चुनौतियों से मुक्ति मिल सकती है और जो भी कष्ट चल रहे थे वे दूर हो सकते हैं। आप मानसिक शांति और संतुलन महसूस करेंगे जो आपके व्यक्तिगत जीवन में सुधार लाएगा।

    लाभ

    किसी भी पुराने या लंबित कार्य में सफलता मिलने की संभावना है। इस दिन आपको मानसिक शांति प्राप्त होगी और घर-परिवार में सुख-शांति का माहौल बनेगा कोई नई शुरुआत करने के लिए यह समय अत्यंत अनुकूल रहेगा।

    उपाय

    इस दिन शिवलिंग पर जल अर्पित करने और धूप-दीप से पूजा करने से विशेष लाभ मिलेगा। इससे आपके कार्यों में आ रही अड़चनें दूर होंगी और आपकी जिंदगी में सुख-समृद्धि आएगी। 18 जनवरी 2026 को होने वाली मौनी अमावस्या आपके जीवन में नए बदलाव ला सकती है खासकर कर्क मकर और कुंभ राशियों के जातकों के लिए। इस दिन भगवान शिव की कृपा से आपकी मेहनत का फल मिलेगा रुके हुए कार्य पूरे होंगे और जीवन में सकारात्मक बदलाव आएगा। इन तिथियों पर शिव पूजा और दान का महत्व अधिक बढ़ जाता है और ये उपाय आपके जीवन में शांति समृद्धि और सफलता लाने में सहायक होंगे।

  • संगम स्नान से लेकर कल्पवास तक,जाने माघ मेले से जुड़ी हर जरूरी बात, प्रमुख तिथियां और धार्मिक मान्यताएं

    संगम स्नान से लेकर कल्पवास तक,जाने माघ मेले से जुड़ी हर जरूरी बात, प्रमुख तिथियां और धार्मिक मान्यताएं


    नई दिल्ली।माघ मेला के बारे में अक्सर लोगों के मन में ढ़ेरो सवाल होते हैं- जैसे कि माघ मेले में स्नान करने के फायदे, स्नान की महत्वपूर्ण तारीखें, और कल्पवास क्या है और यह कितने समय तक चलता है. तो आइए इन्हीं सारे सावालों का जवाब जानते हैं.
    माघ मेला 2026 प्रयागराज
    मेला शुरू – 3 जनवरी, 2026शनिवार
    मेला समाप्त – 15 फरवरी, 2026रविवार
    माघ मेला कितने दिनों तक रहता है – 44 दिन
    माघ मेला कहा लगता है – त्रिवेणी संगम, प्रयागराज
    माघ मेला और कुंभ मेला में क्या अंतर है?
    माघ मेला हर साल प्रयागराज में आयोजित होता है,
    जबकि कुंभ मेला हर 12 साल में एक बार और अर्ध कुंभ मेला
    हर 6 साल में एक बार आयोजित होता है.

    संगम स्नान का सबसे अच्छा समय क्या है?

    संगम स्नान के लिए सबसे अच्छा समय ब्रह्म मुहूर्त माना जाता है. 2026 में महा माघ मेले के आस-पास घूमने की कुछ जगहें कौन सी हैं? संगम में स्नान करने के बाद, आप अक्षय वट, पातालपुरी मंदिर, हनुमान मंदिर और द्वादश माधव मंदिरों में जा सकते हैं.कल्पवास कितने दिनों तक चलता है?  आमतौर पर कल्पवास 30 दिनों तक चलता है, पौष पूर्णिमा से माघी पूर्णिमा तक. क्या माघ मेला में कल्पवास सबके लिए अनिवार्य होता है? नहीं, कल्पवास सभी के लिए अनिवार्य नहीं होता है.

    माघ मेला 2026 स्नान की महत्वपूर्ण तारीखें
    पौष पूर्णिमा स्नान – 3 जनवरी, 2026
    मकर संक्रांति स्नान – 14 जनवरी, 2026
    मौनी अमावस्या स्नान – 18 जनवरी, 2026
    बसंत पंचमी स्नान – 23 जनवरी, 2026
    माघी पूर्णिमा स्नान – 1 फरवरी, 2026
    महाशिवरात्रि स्नान – 15 फरवरी, 2026

    माघ मेले में स्नान करने से क्या फायदा होता है?
    ऐसा माना जाता है कि माघ मेले में स्नान करने से हजारों यज्ञों के बराबर पुण्य मिलता है.यह पवित्र स्नान पापों से मुक्ति दिलाता है और आत्मा को शुद्ध करता है.संगम में स्नान करने से तनाव से राहत मिलती है.माघ मेले में स्नान करना स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद माना जाता है. माघ स्नान और दान से ग्रहों के कष्टों से भी मुक्ति मिलती है.
    कल्पवास क्या होता है? What is Kalpavas?
    कल्पवास एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक अनुष्ठान और अभ्यास है. इस दौरान, भक्त एक महीने तक संगम के किनारे रहते हैं और नियमित रूप से पवित्र स्नान करते हैं. ये स्नान सिर्फ एक बार नहीं, बल्कि दिन में तीन बार किए जाते हैं. इस दौरान केवल शुद्ध और सात्विक भोजन किया जाता है, और वह भी दिन में सिर्फ एक बार. कल्पवास के दौरान स्नान, ध्यान, पूजा और जप अनिवार्य हैं. कल्पवास के दौरान, भक्त केवल जमीन पर सोते हैं, जिसका मतलब है कि वे सांसारिक सुख-सुविधाओं से दूरी बनाते हैं. ऐसा माना जाता है कि जो व्यक्ति कल्पवास करता है, उसके सभी पाप धुल जाते हैं.

     

  • Amavasya 2026: जानें साल 2026 में अमावस्या की सभी 13 तिथियां, मौनी और सोमवती अमावस्या सहित

    Amavasya 2026: जानें साल 2026 में अमावस्या की सभी 13 तिथियां, मौनी और सोमवती अमावस्या सहित


    नई दिल्ली/हिंदू पंचांग के अनुसार प्रत्येक वर्ष 12 या कभी-कभी 13 अमावस्याएं होती हैं। अमावस्या वह तिथि है जब चंद्रमा पूरी तरह लुप्त हो जाता है और कृष्ण पक्ष समाप्त हो जाता है। साल 2026 में कुल 13 अमावस्या पड़ने वाली हैं। इनमें मौनी अमावस्या और सोमवती अमावस्या विशेष महत्व रखती हैं। आइए जानते हैं 2026 में आने वाली सभी अमावस्याओं की तिथियां और उनके महत्व के बारे में।

    साल 2026 की पहली अमावस्या – मौनी अमावस्या

    साल की पहली अमावस्या माघ मास में पड़ रही है, जिसे मौनी अमावस्या कहा जाता है। इस दिन ऋषि मनु का जन्म हुआ था और इसे अत्यंत शुभ माना जाता है। मौनी अमावस्या पर व्रत रखने, दान देने और पितरों का तर्पण करना विशेष रूप से लाभकारी होता है। साथ ही भगवान शिव और भगवान विष्णु की पूजा करने का भी खास महत्व है। मौनी अमावस्या पर मौन व्रत रखने की परंपरा प्रचलित है। इस साल मौनी अमावस्या 18 जनवरी 2026 को पड़ रही है।

    सोमवती अमावस्या 2026
    जब अमावस्या का दिन सोमवार को पड़ता है, उसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है। साल 2026 में दो बार सोमवती अमावस्या है। पहली सोमवती अमावस्या 15 जून 2026 को और दूसरी 9 नवंबर 2026 को है। इस दिन व्रत और विशेष पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि और पितृ दोष से मुक्ति का लाभ माना जाता है।

    शनिश्चरी अमावस्या 2026
    शनिवार के दिन पड़ने वाली अमावस्या को शनिश्चरी अमावस्या कहा जाता है। इस दिन शनिदेव की विशेष पूजा का विधान होता है। साल 2026 में शनिश्चरी अमावस्या दो बार पड़ रही है – 16 मई और 10 अक्टूबर 2026। इस दिन शनिदेव की पूजा और रुद्राभिषेक करने से कष्टों और बाधाओं से मुक्ति मिलती है।

    अमावस्या का धार्मिक महत्व

    अमावस्या की रात चंद्रमा पूरी तरह गायब हो जाता है और इसे काली रात कहा जाता है। इस दिन किया गया दान, व्रत और पितरों के लिए तर्पण अत्यंत लाभकारी माना जाता है। कई बार अमावस्या तिथि दो दिन तक चलती है – पहला दिन स्नान-दान के लिए शुभ होता है और दूसरा दिन तर्पण, व्रत और पूजा-अर्चना के लिए।

    साल 2026 की सभी अमावस्या तिथियां:

    मौनी अमावस्या: 18 जनवरी 2026 अग्रहायण अमावस्या: 16 फरवरी 2026 फाल्गुन अमावस्या: 18 मार्च 2026 चैत्र अमावस्या: 16 अप्रैल 2026 वैशाख अमावस्या: 16 मई 2026 शनिश्चरी ज्येष्ठ अमावस्या: 15 जून 2026 सोमवती  आषाढ़ अमावस्या: 15 जुलाई 2026 श्रावण अमावस्या: 13 अगस्त 2026 भाद्रपद अमावस्या: 12 सितंबर 2026 आश्विन अमावस्या: 10 अक्टूबर 2026 शनिश्चरी
    कार्तिक अमावस्या: 9 नवंबर 2026 सोमवती मार्गशीर्ष अमावस्या: 8 दिसंबर 2026 पौष अमावस्या: 6 जनवरी 2027

    विशेष सलाह:

    अमावस्या पर व्रत रखने, पितरों का तर्पण करने और दान देने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है। मौनी और सोमवती अमावस्या का धार्मिक महत्व अधिक माना जाता है।साल 2026 में अमावस्या के दिन धार्मिक अनुष्ठान और पूजा के माध्यम से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया जा सकता है।