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  • यूपी चुनाव से पहले मायावती का मंथन, बोलीं- विरोधी अपना सकते हैं कई हथकंडे, बसपा कार्यकर्ता रहें सावधान

    यूपी चुनाव से पहले मायावती का मंथन, बोलीं- विरोधी अपना सकते हैं कई हथकंडे, बसपा कार्यकर्ता रहें सावधान

    लखनऊ। आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर बसपा सुप्रीमो मायावती ने सोमवार को लखनऊ में पार्टी की अहम बैठक की। इसमें प्रदेश के सभी राज्य स्तरीय पदाधिकारी और सभी 75 जिलों के जिलाध्यक्ष शामिल हुए। दिवंगत विधायक उमाशंकर सिंह के बेटे युकेश भी बैठक में मौजूद रहे। बैठक में चुनावी तैयारियों के साथ संगठन की प्रगति की समीक्षा की गई।

    मायावती ने पार्टी नेताओं से चुनाव की तैयारियों में तेजी लाने और बदलते राजनीतिक हालात के अनुसार संगठन को और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विरोधी दल साम, दाम, दंड और भेद जैसे हथकंडे अपना सकते हैं, इसलिए बसपा कार्यकर्ताओं को मजबूती से उनका सामना करने के लिए तैयार रहना होगा।

    मायावती ने कहा कि बसपा उत्तर प्रदेश में पांचवीं बार ऐसी सरकार बनाने के लक्ष्य के साथ काम करेगी, जिसमें कानून के जरिए बेहतर कानून का राज स्थापित हो और ‘सर्वजन हिताय-सर्वजन सुखाय’ के उद्देश्य को पूरा किया जा सके।

    ‘चुनावी रेवड़ियों और लुभावने वादों से रहें सावधान’
    बसपा प्रमुख ने चुनाव के दौरान किए जाने वाले वादों और घोषणाओं को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं और जनता को आगाह किया। उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले महिलाओं समेत विभिन्न वर्गों को निजी लाभ देने वाली योजनाओं, लुभावने वादों और घोषणाओं के जरिए मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश की जाती है।

    उन्होंने कहा कि चुनाव के बाद इन्हीं वादों को लेकर वादाखिलाफी की शिकायतें सामने आती हैं। इसलिए जनता को विरोधी दलों के छलावे और विश्वासघात से बचना चाहिए और अपने विवेक से स्वतंत्र एवं निष्पक्ष होकर मतदान करना चाहिए।

    9 अक्टूबर को कांशीराम की पुण्यतिथि पर बड़ा कार्यक्रम
    बैठक में बसपा संस्थापक मान्यवर कांशीराम की 9 अक्टूबर को होने वाली पुण्यतिथि के कार्यक्रम की तैयारियों पर भी चर्चा हुई। मायावती ने बताया कि इस बार कार्यक्रम लखनऊ में वीआईपी रोड स्थित बौद्ध स्मृति उपवन के सामने विकसित किए गए ‘मान्यवर श्री कांशीराम जी स्मारक स्थल’ में आयोजित किया जाएगा।

    पार्टी के मुताबिक कार्यक्रम में पश्चिमी उत्तर प्रदेश सहित प्रदेशभर से लोग शामिल होंगे और कांशीराम को श्रद्धांजलि देंगे। बसपा ने कार्यक्रम को ‘कांशीराम का मिशन अधूरा, बीएसपी करेगी पूरा’ और ‘बहनजी करेंगी पूरा’ जैसे संकल्पों के साथ आयोजित करने की बात कही है।

    नेपाल की बाढ़ पर जताई चिंता
    मायावती ने पड़ोसी देश नेपाल में बाढ़ से हुए जान-माल के भारी नुकसान पर भी चिंता जताई। उन्होंने प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए केंद्र और राज्य सरकारों से बाढ़ प्रभावित लोगों तक हरसंभव मदद तत्काल पहुंचाने की अपील की। उन्होंने कहा कि आपदा योजनाओं का लाभ जरूरतमंद परिवारों तक समय पर पहुंचना चाहिए। मायावती ने कहा कि बाढ़ हर साल आने वाली त्रासदी है, इसलिए इसके स्थायी समाधान के लिए भी गंभीरता से प्रयास किए जाने चाहिए।

  • BSP सुप्रीमो का सरकार पर हमला: 'अच्छे दिन' केवल कागजों पर, बहुजनों को SIR के लिए एकजुट होने को कहा

    BSP सुप्रीमो का सरकार पर हमला: 'अच्छे दिन' केवल कागजों पर, बहुजनों को SIR के लिए एकजुट होने को कहा


    नई दिल्ली/लखनऊ। बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की पुण्यतिथि महापरिनिर्वाण दिवस के अवसर पर बसपा सुप्रीमो मायावती ने बहुजन समाज की स्थिति, सामाजिक न्याय और राजनीतिक अधिकारों को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाया। उन्होंने कहा कि आज भी देश के करोड़ों बहुजन नागरिकों को वह सम्मान, समानता और अधिकार नहीं प्राप्त हुए हैं जिनकी कल्पना बाबा साहेब ने भारत का संविधान तैयार करते समय की थी।मायावती ने तीखे शब्दों में पूछा-जब बाकी क्षेत्रों में बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं तो बहुजनों के आत्मसम्मान और जीवन-सुधार से जुड़े ‘अच्छे दिन’ अब तक क्यों नहीं आए?

    दिल्ली में श्रद्धांजलि, संदेश में गंभीरता
    मायावती ने नई दिल्ली स्थित अपने आवास पर बाबा साहेब को पुष्प अर्पित किए और दो मिनट का मौन रखकर उन्हें याद किया। उन्होंने कहा कि हर साल इस दिन राष्ट्र को यह सोचना चाहिए कि क्या हम अंबेडकर के सपनों का भारत बना पाए हैं? उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस, तथा अंबेडकर जयंती जैसे अवसरों पर यह प्रश्न हमेशा उठेगा कि क्या सामाजिक न्याय पर आधारित वास्तविक समग्र और मानवीय अच्छे दिन कभी आएंगे? मायावती ने यह भी याद दिलाया कि उत्तर प्रदेश में बसपा सरकार के कार्यकाल में बहुजनों के सम्मान और सामाजिक उन्नति के लिए कई ऐसे फैसले लिए गए जो इतिहास में दर्ज हैं। उनके अनुसार जब सरकार की नीयत साफ हो और नीति स्पष्ट हो तब समाज में वास्तविक परिवर्तन संभव होता है।

    मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया SIR में सक्रिय भागीदारी का आग्रह


    महापरिनिर्वाण दिवस पर दिए गए अपने संदेश में मायावती ने बहुजन समाज से आग्रह किया कि वे SIR-मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया में सक्रियता दिखाएं। उन्होंने कहा कि बहुजन समाज की राजनीतिक शक्ति तभी प्रभावी हो सकती है जब हर योग्य व्यक्ति मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराए।उन्होंने चेताया कि कई बार नाम छूटने या गलत विवरण के कारण बहुजन समाज के लोगों को अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का पूर्ण उपयोग करने से वंचित होना पड़ता है। इसलिए SIR प्रक्रिया में भागीदारी केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि बहुजनों की राजनीतिक सशक्तिकरण का आवश्यक हिस्सा है।

    रुपये के अवमूल्यन पर चिंता

    अपने बयान में मायावती ने देश की आर्थिक स्थिति पर भी चिंता व्यक्त की। खासकर रुपये के लगातार गिरते मूल्य को लेकर उन्होंने कहा कि सरकार को केवल विशेषज्ञों की सलाह पर निर्भर न रहकर स्वयं हस्तक्षेप कर स्थिति को स्थिर करने के निर्णायक कदम उठाने चाहिए। उन्होंने कहा कि आर्थिक अस्थिरता का सबसे अधिक बोझ गरीबों, मजदूरों और वंचित वर्गों पर पड़ता है-और इन्हीं वर्गों की रक्षा करने का दावा सरकारें सबसे अधिक करती हैं।

    देशभर में श्रद्धांजलि समारोह
    महापरिनिर्वाण दिवस के कार्यक्रम पूरे देश में बड़े पैमाने पर आयोजित किए गए। लखनऊ के अंबेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थल पर सुबह से ही बड़ी संख्या में लोग जुटने लगे। वहीं नोएडा के दलित प्रेरणा स्थल पर बसपा कार्यकर्ताओं अनुयायियों और आम नागरिकों का विशाल जनसैलाब उमड़ पड़ा।कार्यक्रमों में बाबा साहेब के विचारों को दोहराया गया और संविधान में दिए गए सामाजिक न्याय, समान अधिकारों और अवसरों की संवैधानिक व्यवस्था को मजबूत करने के संकल्प लिए गए।नोएडा में बसपा के राष्ट्रीय समन्वयक आकाश आनंद ने भी बाबा साहेब की प्रतिमा पर फूल चढ़ाकर उन्हें याद किया और कहा कि समाज को आगे बढ़ाने के लिए संगठन की जिम्मेदारी बढ़ जाती है।

    जातिवादी राजनीति पर निशाना

    मायावती ने अपने बयान में यह भी कहा कि देश की मुख्यधारा की कई राजनीतिक पार्टियों की जातिवादी मानसिकता बहुजनों के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा है। उनके अनुसार, राजनीतिक सत्ता की मास्टर चाबी बहुजनों के हाथ में न आए इसके लिए तरह-तरह के हथकंडों का इस्तेमाल किया जाता रहा है। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब के मिशन की सच्ची पूर्ति तभी होगी जब बहुजन समाज अपनी सामूहिक शक्ति को पहचानकर लोकतांत्रिक ढंग से संगठित होगा।

    एक स्पष्ट और मजबूत संदेश

    महापरिनिर्वाण दिवस पर मायावती का यह वक्तव्य केवल श्रद्धांजलि भर नहीं बल्कि बहुजन समाज को राजनीतिक रूप से जागरूक और संगठित होने का आह्वान भी है। उनका संदेश यह स्पष्ट करता है कि आने वाले समय में सामाजिक न्याय, बहुजन अधिकार, और राजनीतिक सक्रियता पर बसपा और अधिक जोर देने वाली है।