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  • मायावती ने भतीजे ईशान आनंद को बनाया बसपा का राष्ट्रीय संयोजक, लखनऊ की बैठक में किया ऐलान

    मायावती ने भतीजे ईशान आनंद को बनाया बसपा का राष्ट्रीय संयोजक, लखनऊ की बैठक में किया ऐलान


    लखनऊ।
    बहुजन समाज पार्टी में संगठन स्तर पर एक और बड़ा बदलाव हुआ है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने बुधवार को लखनऊ में हुई पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में अपने छोटे भतीजे ईशान आनंद को राष्ट्रीय संयोजक बनाने का ऐलान किया। बैठक में ईशान आनंद ने मायावती के पैर छूकर उनका आशीर्वाद भी लिया।

    ईशान आनंद को यह जिम्मेदारी उनके बड़े भाई आकाश आनंद को पार्टी की सभी जिम्मेदारियों से हटाए जाने के बाद मिली है। मायावती ने कुछ दिन पहले ही ईशान आनंद को पार्टी में सम्मानजनक जिम्मेदारी देने की बात कही थी। इसके बाद से ही उनकी नई भूमिका को लेकर अटकलें लगाई जा रही थीं। बुधवार को बैठक में इन चर्चाओं पर विराम लगाते हुए मायावती ने उन्हें राष्ट्रीय संयोजक नियुक्त करने की घोषणा कर दी।

    संगठन और चुनावी तैयारियों पर हुआ मंथन

    लखनऊ में आयोजित इस बैठक में बसपा के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ सभी राज्यों के पार्टी अध्यक्ष भी शामिल हुए। बैठक में संगठन को मजबूत करने के साथ आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर विस्तार से चर्चा हुई। मायावती ने चुनाव की जमीनी तैयारियों और प्रत्याशियों के चयन को लेकर भी पार्टी नेताओं से जानकारी ली।

    इसके अलावा विभिन्न राज्यों में संगठन से जुड़े कामकाज की प्रगति रिपोर्ट भी ली गई। राज्यों से मिली रिपोर्ट के आधार पर संगठन को लेकर आगे की रणनीति और आवश्यक दिशा-निर्देश तय किए जाएंगे। बैठक में मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर भी पार्टी पदाधिकारियों से चर्चा की गई और उन्हें संगठनात्मक स्तर पर काम करने के निर्देश दिए गए।

    ईशान को मिली अहम जिम्मेदारी

    ईशान आनंद, मायावती के छोटे भाई आनंद कुमार के बेटे हैं। उन्होंने एलएलएम और कानून की पढ़ाई की है। हाल के दिनों में बसपा के भीतर हुए संगठनात्मक बदलावों के बीच उनका नाम लगातार चर्चा में था। मायावती ने पहले ही संकेत दिया था कि वह ईशान को पार्टी में आगे बढ़ाएंगी। अब उन्हें राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी देकर संगठन में उनकी भूमिका औपचारिक रूप से तय कर दी गई है।

    पार्टी की बैठक के दौरान ईशान आनंद के नई जिम्मेदारी संभालने को लेकर कार्यकर्ताओं और समर्थकों में उत्साह भी देखने को मिला। बसपा अब आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए संगठन को मजबूत करने और जमीनी स्तर पर तैयारियां तेज करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

  • BSP का सियासी आधार लगातार घटा अब संसद में भी नहीं रहेगा कोई सांसद राष्ट्रीय दर्जे पर भी सवाल BSP के सामने संसद से लेकर राष्ट्रीय दर्जे तक की चुनौती

    BSP का सियासी आधार लगातार घटा अब संसद में भी नहीं रहेगा कोई सांसद राष्ट्रीय दर्जे पर भी सवाल BSP के सामने संसद से लेकर राष्ट्रीय दर्जे तक की चुनौती


    नई दिल्ली । बहुजन समाज पार्टी यानी BSP के सामने उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक के बाद एक बड़ी चुनौतियां सामने आ रही हैं। पार्टी का लोकसभा में पहले से कोई सांसद नहीं है और उत्तर प्रदेश विधानसभा में भी अब उसका कोई विधायक नहीं बचा है। अगस्त 2026 में रसड़ा सीट से BSP के इकलौते विधायक उमाशंकर सिंह के निधन के बाद 403 सदस्यीय विधानसभा में पार्टी का प्रतिनिधित्व खत्म हो गया।

    अब राज्यसभा में भी BSP का प्रतिनिधित्व खत्म होने की स्थिति बन रही है। पार्टी के मौजूदा इकलौते राज्यसभा सांसद रामजी गौतम का कार्यकाल नवंबर में पूरा होना है। इसके बाद BSP के पास संसद के दोनों सदनों में कोई निर्वाचित सांसद नहीं रहेगा। उत्तर प्रदेश विधानसभा में पार्टी के पास राज्यसभा चुनाव के लिए पर्याप्त संख्या नहीं होने के कारण तत्काल वापसी की संभावना भी सीमित है।

    यह स्थिति BSP के राजनीतिक सफर में महत्वपूर्ण बदलाव को दिखाती है। पार्टी की स्थापना 1984 में कांशीराम ने की थी और बाद में मायावती ने इसे उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बड़े राजनीतिक संगठन के रूप में स्थापित किया। 2007 के विधानसभा चुनाव में BSP ने उत्तर प्रदेश की 403 सीटों में से 206 सीटें जीतकर पूर्ण बहुमत हासिल किया था। इसके बाद पार्टी का विधानसभा में प्रदर्शन लगातार कमजोर होता गया। 2012 में उसकी सीटें घटकर 80 रह गईं। 2017 में BSP 19 सीटों पर सिमट गई और 2022 में केवल एक सीट जीत सकी। वह एकमात्र सीट रसड़ा थी जहां से उमाशंकर सिंह निर्वाचित हुए थे। उनके निधन के बाद विधानसभा में BSP का खाता खाली हो गया।

    लोकसभा चुनावों में भी पार्टी को लगातार चुनौती मिली है। 2009 के लोकसभा चुनाव में BSP ने 21 सीटें जीती थीं। लेकिन 2014 में पार्टी एक भी सीट नहीं जीत सकी। 2019 में समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोक दल के साथ गठबंधन में BSP ने 10 सीटें जीतीं। 2024 में पार्टी फिर कोई लोकसभा सीट नहीं जीत सकी। इस तरह राष्ट्रीय स्तर पर BSP का संसदीय प्रतिनिधित्व लगातार कमजोर हुआ है।

    अब चर्चा पार्टी के राष्ट्रीय दर्जे को लेकर भी हो रही है। चुनाव आयोग के उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार BSP अभी राष्ट्रीय पार्टी के रूप में मान्यता प्राप्त दलों में शामिल है। आयोग की मौजूदा सूची में BSP को राष्ट्रीय पार्टी के तौर पर दर्ज किया गया है। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि उसका राष्ट्रीय दर्जा अभी खत्म हो गया है। हालांकि भविष्य में चुनावी प्रदर्शन के आधार पर मान्यता की समीक्षा महत्वपूर्ण हो सकती है।

    चुनाव आयोग के नियमों के मुताबिक राष्ट्रीय पार्टी की मान्यता के लिए अलग अलग रास्ते तय हैं। इनमें किसी पार्टी का कम से कम चार राज्यों में लोकसभा या विधानसभा चुनाव में छह प्रतिशत वैध वोट हासिल करना और कम से कम चार लोकसभा सदस्य चुनकर लाना शामिल है। दूसरा रास्ता लोकसभा की कुल सीटों के कम से कम दो प्रतिशत पर जीत हासिल करना है और ये सांसद कम से कम तीन राज्यों से होने चाहिए। इसके अलावा किसी दल का कम से कम चार राज्यों में राज्य पार्टी के रूप में मान्यता प्राप्त होना भी राष्ट्रीय पार्टी की मान्यता का एक आधार है।

    BSP के लिए आने वाला समय इसलिए अहम है क्योंकि उत्तर प्रदेश में 2027 का विधानसभा चुनाव सामने है। पार्टी को जहां अपने संगठन और चुनावी आधार को मजबूत करने की चुनौती है वहीं राष्ट्रीय स्तर पर अपनी राजनीतिक पहचान बनाए रखना भी उसके लिए महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल राष्ट्रीय दर्जा खत्म होना कोई घोषित फैसला नहीं है लेकिन संसद और विधानसभा में प्रतिनिधित्व खत्म होने की स्थिति ने BSP की राजनीतिक स्थिति को लेकर चर्चा जरूर बढ़ा दी है।

  • अखिलेश के ‘PDA रथ’ के भगवा रंग पर मायावती का हमला, पूछा- क्या मुस्लिम वोटरों से भरोसा उठ गया?

    अखिलेश के ‘PDA रथ’ के भगवा रंग पर मायावती का हमला, पूछा- क्या मुस्लिम वोटरों से भरोसा उठ गया?


    लखनऊ।
    उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के बीच सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने सोमवार को अखिलेश यादव के प्रस्तावित ‘PDA रथ’ के रंग को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि रथ में सपा के पारंपरिक लाल रंग की तुलना में आरएसएस-भाजपा से जुड़ा भगवा रंग ज्यादा नजर आ रहा है। इसी आधार पर उन्होंने सवाल किया कि क्या सपा चुनावी लाभ के लिए अपनी पहचान और रणनीति बदल रही है या उसका मुस्लिम मतदाताओं से भरोसा कम हो गया है।

    ‘रंग बदलने’ की रणनीति पर सवाल
    मायावती ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारी के लिए प्रचारित किए जा रहे PDA रथ में सपा का लाल रंग कम और भगवा रंग ज्यादा दिखाई दे रहा है। उन्होंने इसे चुनावी रणनीति से जोड़ते हुए सपा नेतृत्व पर निशाना साधा।

    मायावती ने यह भी दावा किया कि पिछले चुनावों में मुस्लिम समाज ने बड़े पैमाने पर सपा का समर्थन किया, लेकिन इसके बावजूद भाजपा को सत्ता में आने से नहीं रोका जा सका। उन्होंने मुस्लिम मतदाताओं से सवाल किया कि वे बार-बार सपा को वोट देकर अपना वोट क्यों खराब करें। यह मायावती का राजनीतिक दावा है; इसके समर्थन में उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में सपा के पिछले चुनावी प्रदर्शन और भाजपा की सरकार बनने का संदर्भ दिया।

    मुस्लिम वोट को लेकर भी साधा निशाना
    बसपा प्रमुख ने दावा किया कि मुस्लिम मतदाताओं का रुख अब बसपा की ओर बदल रहा है। उन्होंने इसकी तुलना ऊंची जातियों के ब्राह्मण मतदाताओं के पूर्व में बसपा से दूर होने से की। यह भी मायावती का चुनावी आकलन है, न कि स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य।

    उन्होंने उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण और विकास के मुद्दे पर भी अपनी पार्टी के शासनकाल का उल्लेख किया। मायावती ने कहा कि उनके मुताबिक बसपा सरकार के दौरान अपराध नियंत्रण, शांति-व्यवस्था, जनकल्याण और विकास के क्षेत्र में काम हुआ था।

    PDA की परिभाषा पर भी अखिलेश को घेरा
    मायावती ने सपा के PDA फॉर्मूले की व्याख्या पर भी सवाल उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी जरूरत के हिसाब से सपा ने PDA के अर्थ और सामाजिक समीकरणों को अलग-अलग तरीके से पेश किया है।

    उन्होंने कहा कि कभी इसे ‘पिछड़ा, दलित’, कभी ‘पंडित’ से जोड़कर बताया गया और बाद में खुद को अंबेडकरवादी दिखाने के प्रयास भी किए गए। मायावती ने अखिलेश यादव और सपा नेताओं के नीले रंग के कपड़ों में तस्वीरें खिंचवाने का भी जिक्र किया और दावा किया कि जनता ने इसे स्वीकार नहीं किया।

    बसपा की विचारधारा का किया जिक्र
    मायावती ने अपनी पार्टी की विचारधारा का उल्लेख करते हुए कहा कि बसपा ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ के सिद्धांत पर काम करती है। उन्होंने पार्टी को अंबेडकरवादी बताते हुए सभी वर्गों के लिए रोजगार, सम्मान और सामाजिक भागीदारी की बात कही।

    24 सितंबर से अखिलेश का PDA रथ अभियान
    इस बीच अखिलेश यादव 24 सितंबर को PDA रथ के जरिए अपने चुनावी अभियान की शुरुआत करने वाले हैं। रिपोर्टों के मुताबिक उनका कार्यक्रम रायबरेली में हरचंदपुर के विधायक राहुल लोधी के आवास से जुड़ा है। इसी प्रस्तावित अभियान के रथ के रंग को लेकर मायावती ने सवाल उठाए हैं।

    उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सपा और बसपा के बीच यह बयानबाजी दोनों दलों के बीच राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का एक और उदाहरण है। फिलहाल मायावती के हमले पर अखिलेश यादव या समाजवादी पार्टी की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

  • मायावती का नया फैसला, आकाश और दीपिका को जिम्मेदारी नहीं; ईशान आनंद को फिर मिलेगा पार्टी में मौका

    मायावती का नया फैसला, आकाश और दीपिका को जिम्मेदारी नहीं; ईशान आनंद को फिर मिलेगा पार्टी में मौका


    नई दिल्ली ।
    बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने अपने परिवार के सदस्यों की पार्टी में भूमिका को लेकर एक बार फिर बड़ा फैसला लिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि आकाश आनंद और उनकी बहन दीपिका आनंद को अब पार्टी में कोई जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने अपने भाई आनंद कुमार के परिवार से ईशान आनंद को सम्मानजनक जिम्मेदारी देकर आगे बढ़ाने की बात कही है।

    मायावती ने कहा कि उन्होंने यह निर्णय अपने अनुभवों और पार्टी के हित को ध्यान में रखते हुए लिया है। उनके मुताबिक राजनीति में सफलता और समाज के लिए काम करने के लिए व्यक्ति को अपने भाई-बहनों और नजदीकी रिश्तेदारों के मोह से ऊपर उठकर पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ काम करना चाहिए।

    उन्होंने कहा कि बहुजन समाज ही उनका असली परिवार है। उनके अनुसार शोषित वर्ग को सत्ता में भागीदारी दिलाकर उसके हित और कल्याण को सुनिश्चित करना उनका प्रमुख राजनीतिक लक्ष्य है। इसी उद्देश्य के तहत वह जरूरत पड़ने पर अपने परिवार के सदस्यों के खिलाफ भी निर्णय लेने के लिए तैयार हैं।

    आकाश आनंद को लेकर मायावती ने कहा कि उनके भाई आनंद कुमार के विशेष आग्रह पर उन्हें राजनीति में आगे बढ़ाया गया था। हालांकि, शादी के बाद आकाश के रवैये और गतिविधियों को लेकर उन्होंने असहमति जताई। मायावती ने कहा कि इन्हीं परिस्थितियों के कारण आकाश को कुछ समय पहले पार्टी से अलग करना पड़ा।

    मायावती ने आकाश आनंद की पार्टी में वापसी की संभावना से भी इनकार किया। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में उन्हें दोबारा पार्टी में जिम्मेदारी देना संगठन के हित में उचित नहीं होगा। उनके मुताबिक आकाश और उनकी बहन दीपिका को अब पार्टी की किसी भी जिम्मेदारी से पूरी तरह दूर रखा जाएगा और इस फैसले में बदलाव नहीं किया जाएगा।

    दीपिका को लेकर मायावती ने कहा कि पहले उनके परिवार के किसी सदस्य को आगे बढ़ाने को लेकर उनके मन में दुविधा थी। लेकिन भविष्य में पारिवारिक परिस्थितियों के कारण संगठन के सामने किसी तरह की परेशानी पैदा न हो, इसे ध्यान में रखते हुए उन्होंने दीपिका को भी पार्टी की जिम्मेदारी से दूर रखने का फैसला किया है।

    इसके स्थान पर ईशान आनंद को आगे बढ़ाने की घोषणा की गई है। मायावती ने कहा कि आनंद कुमार के परिवार में से अब केवल ईशान आनंद को पार्टी में सम्मानजनक जिम्मेदारी दी जाएगी। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि ईशान ने भविष्य में कोई गंभीर पार्टी विरोधी गतिविधि की, तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

    मायावती ने कहा कि ऐसी स्थिति में आनंद कुमार के परिवार के किसी अन्य सदस्य को भी पार्टी में छोटी या बड़ी जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। इसके बजाय संगठन में काम कर रहे दलित वर्ग के किसी समर्पित और वफादार कार्यकर्ता को आगे बढ़ाया जाएगा।

    अपने फैसले को स्पष्ट करते हुए मायावती ने बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक कांशीराम और डॉ. भीमराव आंबेडकर का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कांशीराम ने अपने नजदीकी रिश्तेदारों को राजनीतिक लाभ देने से दूरी बनाए रखी थी और अपना जीवन बहुजन समाज के हित के लिए समर्पित किया।

    मायावती ने डॉ. आंबेडकर के 23 फरवरी 1956 के एक पत्र का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस पत्र में सार्वजनिक संपत्ति और संगठनात्मक जिम्मेदारियों के मामले में व्यक्तिगत रिश्तों से ऊपर नियम और सार्वजनिक हित को प्राथमिकता देने का संदेश मिलता है।

    मायावती ने बताया कि देश, जनहित और संगठन से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के लिए 23 सितंबर को BSP की ऑल इंडिया बैठक बुलाई गई है। उन्होंने कहा कि इस बैठक के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं को संगठन के काम में पूरी मजबूती और निष्ठा के साथ जुटने की दिशा में आगे बढ़ाया जाएगा।

  • मायावती का सपा-कांग्रेस पर तीखा हमला, बोलीं- नीला रंग पहनने से नहीं बदलेगी जातिवादी सोच

    मायावती का सपा-कांग्रेस पर तीखा हमला, बोलीं- नीला रंग पहनने से नहीं बदलेगी जातिवादी सोच

    लखनऊ। बसपा सुप्रीमो मायावती ने सपा और कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि बीएसपी के नीले रंग को अपनाने और मंचों व कपड़ों में इसका इस्तेमाल करने से विपक्षी दलों की सोच नहीं बदल जाएगी। बहुजन समाज के हित की बात करने से पहले इन दलों को अपना दिल और दिमाग साफ करना चाहिए। मायावती ने सपा के पीडीए और कांग्रेस की राजनीति पर भी सवाल उठाए।

    मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि सपा, कांग्रेस और अन्य विरोधी दल बीएसपी के नीले रंग को अपनाकर उसे कपड़ों और मंचों पर इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन इससे गरीबों, दलितों, आदिवासियों, पिछड़ों और अन्य उपेक्षित वर्गों के प्रति उनकी वर्षों पुरानी सोच नहीं बदल सकती। उन्होंने आरोप लगाया कि इन दलों की सोच जातिवादी, संकीर्ण, सामंती और पूंजीवादी रही है।

    उन्होंने कहा कि केवल नीला रंग अपनाने से कोई दिल से अंबेडकरवादी नहीं बन सकता। बहुजन समाज के वास्तविक हित और कल्याण के लिए पहले इन दलों को अपनी सोच में बदलाव लाना होगा। मायावती ने आरोप लगाया कि ये दल इन वर्गों के मुद्दों पर “गिरगिट की तरह रंग बदलते हैं” और कहते कुछ हैं, जबकि करते उसके विपरीत हैं।

    पीडीए को लेकर सपा पर निशाना
    मायावती ने सपा के पीडीए को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों के मुद्दे पर सपा की सोच, चाल, चरित्र और चेहरा अलग-अलग रहा है। उन्होंने दावा किया कि बहुजन समाज के हितों की वास्तविक लड़ाई केवल बीएसपी ही लड़ती रही है।

    उन्होंने बीएसपी से निष्कासित नेताओं को लेकर भी विरोधी दलों पर हमला बोला। मायावती ने कहा कि अनुशासनहीनता समेत विभिन्न कारणों से पार्टी से निकाले गए कई लोग बाद में दूसरी पार्टियों में चले गए और कुछ ने छोटे संगठन या राजनीतिक दल भी बना लिए। उनके मुताबिक, ऐसे लोग व्यक्तिगत स्वार्थ और अवसरवाद की राजनीति करते हैं और बहुजन समाज के सामूहिक हित के लिए काम नहीं कर सकते।

    कांग्रेस को बताया ‘डूबता जहाज’
    मायावती ने कांग्रेस पर भी तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस जिन लोगों को बीएसपी से निकाले जाने के बाद अपने साथ लेने की बात कर रही है, वह खुद “डूबते जहाज” जैसी स्थिति में है। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसी पार्टी में शामिल होकर कोई अपना राजनीतिक भविष्य अंधकार में क्यों डालेगा।

    मायावती ने अपने बयान में बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर का भी उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने अपने जीवनकाल में बहुजन समाज के लोगों को कांग्रेस से सावधान रहने की चेतावनी दी थी।

    अशोक सिद्धार्थ के इस्तीफे पर भी बोला हमला
    मायावती ने बीएसपी से जुड़े रहे और आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि पार्टी की ओर से राजनीति से संन्यास लेने की सलाह दिए जाने के बाद अशोक सिद्धार्थ ने तत्काल घोषणा नहीं की। मायावती के मुताबिक, उन्होंने पूरी रात इसे रोकने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाए और अगले दिन सुबह करीब 6:30 बजे मजबूरी में अपने राजनीतिक संन्यास की घोषणा की।

    मायावती ने कहा कि सही समय आने पर पार्टी के लोगों को इस मामले में और भी जानकारी दी जाएगी। उन्होंने बीएसपी कार्यकर्ताओं से मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों को समझने और पार्टी व आंदोलन के हित में सतर्क रहने की अपील की।

  • यूपी चुनाव से पहले BSP में बड़ा भूचाल! मायावती ने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी से निकाला बाहर

    यूपी चुनाव से पहले BSP में बड़ा भूचाल! मायावती ने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी से निकाला बाहर


    नई दिल्ली ।बहुजन समाज पार्टी में यूपी विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। बसपा प्रमुख मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी से पूरी तरह बाहर कर दिया है। मायावती ने आकाश आनंद को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से मुक्त करने के साथ ही संगठन से भी अलग कर दिया है। इससे पहले 3 सितंबर 2026 को उन्हें राष्ट्रीय संयोजक के पद से हटाया गया था। अब इस कार्रवाई के बाद बसपा के भीतर परिवार और संगठन को लेकर चल रही खींचतान एक बार फिर चर्चा में आ गई है।

    मायावती ने आकाश आनंद पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वह पार्टी की विचारधारा और हितों से ज्यादा पारिवारिक रिश्तों को प्राथमिकता दे रहे थे। मायावती के मुताबिक आकाश आनंद पहले उनके एक्स पोस्ट को लगातार रिपोस्ट किया करते थे लेकिन जब उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ से जुड़ा मामला सामने आया तो उन्होंने मायावती की संबंधित पोस्ट को रिपोस्ट नहीं किया। बसपा प्रमुख ने इसे पार्टी के प्रति उनके रुख में बदलाव का संकेत माना।

    मायावती ने सवाल उठाया कि जो व्यक्ति डबल माइंड होकर काम करेगा वह बहुजन समाज पार्टी का भला कैसे कर सकता है। उनका कहना है कि पार्टी में जिम्मेदारी निभाने वाले व्यक्ति को संगठन और बहुजन आंदोलन को प्राथमिकता देनी चाहिए। इसी को आधार बनाते हुए उन्होंने आकाश आनंद को पार्टी से अलग करने का फैसला लिया है।

    इस पूरे विवाद में आकाश आनंद के ससुर और पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ का नाम भी प्रमुखता से सामने आया है। मायावती ने कहा कि सिद्धार्थ ने राजनीति से संन्यास लेने का फैसला सही समय पर नहीं लिया। उनका कहना है कि यदि अशोक सिद्धार्थ ने पहले ही राजनीति से दूरी बना ली होती तो बसपा और बहुजन आंदोलन के साथ आकाश आनंद को भी लगातार मुश्किल परिस्थितियों का सामना नहीं करना पड़ता।

    मायावती ने अशोक सिद्धार्थ की राजनीतिक भूमिका और उनकी मंशा पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यदि उन्हें वास्तव में आकाश आनंद के राजनीतिक भविष्य और बहुजन आंदोलन की चिंता होती तो वह काफी पहले राजनीति से किनारा कर लेते। हालांकि अब अशोक सिद्धार्थ ने राजनीति से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया है।

    आकाश आनंद को पार्टी से बाहर करने के बाद मायावती ने अब अपना ध्यान सीधे 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव पर केंद्रित कर दिया है। उन्होंने बसपा कार्यकर्ताओं से विरोधियों के राजनीतिक हथकंडों का मजबूती से मुकाबला करने की अपील की है। मायावती ने कार्यकर्ताओं से सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय के सिद्धांत पर आगे बढ़ते हुए पूरी ताकत के साथ चुनावी तैयारी में जुटने को कहा है।

    बसपा प्रमुख ने 2027 में उत्तर प्रदेश में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने का लक्ष्य भी कार्यकर्ताओं के सामने रखा है। आकाश आनंद पर हुई कार्रवाई से पार्टी की आगामी रणनीति को लेकर भी कई सवाल खड़े हो गए हैं। अब देखना होगा कि इस बड़े फैसले का बसपा के संगठन और उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति पर क्या असर पड़ता है।

  • मायावती ने आकाश आनंद से छीनी राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी, बताया राजनीतिक रूप से अपरिपक्व

    मायावती ने आकाश आनंद से छीनी राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी, बताया राजनीतिक रूप से अपरिपक्व

    लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी की बड़ी जिम्मेदारियों से दूर रखने का फैसला किया है। मायावती ने कहा कि आकाश आनंद को अभी राजनीतिक रूप से और परिपक्व होने की जरूरत है। इसी के साथ आकाश आनंद से राष्ट्रीय संयोजक का पद भी हटा दिया गया है। उन्होंने अपने एक्स प्रोफाइल में भी बदलाव करते हुए ‘राष्ट्रीय संयोजक’ की जगह खुद को बसपा कार्यकर्ता बताया है। इस फैसले से आकाश के समर्थकों में निराशा है।

    कांशीराम के सिद्धांतों का दिया हवाला
    मायावती ने मान्यवर कांशीराम के सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने अपने परिवार को पार्टी के काम में सहयोग करने की अनुमति दी थी, लेकिन परिवार के सदस्यों को चुनाव लड़ाने या पार्टी में महत्वपूर्ण पद देने के पक्ष में नहीं थे।

    मायावती ने कहा कि वह भी इसी संकल्प पर आगे बढ़ रही हैं। आकाश आनंद को पार्टी में काम करने की अनुमति रहेगी, लेकिन फिलहाल उन्हें कोई बड़ी संगठनात्मक जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी।

    ‘अभी और परिपक्वता की जरूरत’
    मायावती के मुताबिक आकाश आनंद को राजनीतिक तौर पर अभी और परिपक्व होने की जरूरत है। उनका मानना है कि विरोधी दल चुनाव के दौरान साम, दाम, दंड और भेद जैसे हथकंडों का इस्तेमाल कर सकते हैं। ऐसे में राजनीतिक अनुभव और परिपक्वता की कमी के कारण पार्टी को संभावित चुनावी नुकसान से बचाना जरूरी है।

    आकाश आनंद के एक्स प्रोफाइल में बदलाव भी इसी फैसले के बाद सामने आया है। अब उनकी पहचान राष्ट्रीय संयोजक के बजाय बसपा कार्यकर्ता के रूप में दिखाई जा रही है।

    लखनऊ में हुई बसपा की अहम बैठक
    मायावती ने लखनऊ में पार्टी की ऑल इंडिया स्तर की महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में संगठन को मजबूत करने और विभिन्न ज्वलंत मुद्दों पर पार्टी का रुख स्पष्ट करने को लेकर निर्देश दिए गए। इस दौरान पिछले कार्यों की समीक्षा भी की गई।

    मायावती ने पार्टी के छोटे-बड़े सभी पदाधिकारियों को संगठन की कमियों को दूर करने और पूरी ईमानदारी व निष्ठा के साथ पार्टी के दिशा-निर्देशों का पालन करने की सख्त हिदायत दी।

    कांशीराम के संघर्षों का किया जिक्र
    मायावती ने कांशीराम के संघर्षों को याद करते हुए कहा कि शोषित वर्ग को शासक वर्ग बनाना ही बहुजन आंदोलन का मुख्य उद्देश्य है। इसके लिए सत्ता हासिल करना जरूरी है। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से संगठन को मजबूत करने और इस लक्ष्य की दिशा में लगातार काम करने का आह्वान किया।

    RSS और मोहन भागवत के बयानों पर भी निशाना
    बैठक में मायावती ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के अमेरिका दौरे के दौरान दिए गए बयानों का भी संज्ञान लिया। उन्होंने संघ की कथनी और करनी में भारी अंतर होने का आरोप लगाया।

    मायावती ने कहा कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने समानता के लिए जीवनभर संघर्ष किया। वहीं आरक्षण, मुस्लिम और अन्य अल्पसंख्यक वर्गों की सुरक्षा तथा महिला अधिकारों जैसे मुद्दों पर आरएसएस के दावों में उन्हें सच्चाई की कमी नजर आती है। उन्होंने आरएसएस को सलाह दी कि वह बाबा साहेब के मानवतावादी और समतामूलक संविधान का ईमानदारी से पालन करे और अपने लोगों से भी उसका पालन करवाए।

  • यूपी चुनाव से पहले मायावती का मंथन, बोलीं- विरोधी अपना सकते हैं कई हथकंडे, बसपा कार्यकर्ता रहें सावधान

    यूपी चुनाव से पहले मायावती का मंथन, बोलीं- विरोधी अपना सकते हैं कई हथकंडे, बसपा कार्यकर्ता रहें सावधान

    लखनऊ। आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर बसपा सुप्रीमो मायावती ने सोमवार को लखनऊ में पार्टी की अहम बैठक की। इसमें प्रदेश के सभी राज्य स्तरीय पदाधिकारी और सभी 75 जिलों के जिलाध्यक्ष शामिल हुए। दिवंगत विधायक उमाशंकर सिंह के बेटे युकेश भी बैठक में मौजूद रहे। बैठक में चुनावी तैयारियों के साथ संगठन की प्रगति की समीक्षा की गई।

    मायावती ने पार्टी नेताओं से चुनाव की तैयारियों में तेजी लाने और बदलते राजनीतिक हालात के अनुसार संगठन को और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विरोधी दल साम, दाम, दंड और भेद जैसे हथकंडे अपना सकते हैं, इसलिए बसपा कार्यकर्ताओं को मजबूती से उनका सामना करने के लिए तैयार रहना होगा।

    मायावती ने कहा कि बसपा उत्तर प्रदेश में पांचवीं बार ऐसी सरकार बनाने के लक्ष्य के साथ काम करेगी, जिसमें कानून के जरिए बेहतर कानून का राज स्थापित हो और ‘सर्वजन हिताय-सर्वजन सुखाय’ के उद्देश्य को पूरा किया जा सके।

    ‘चुनावी रेवड़ियों और लुभावने वादों से रहें सावधान’
    बसपा प्रमुख ने चुनाव के दौरान किए जाने वाले वादों और घोषणाओं को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं और जनता को आगाह किया। उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले महिलाओं समेत विभिन्न वर्गों को निजी लाभ देने वाली योजनाओं, लुभावने वादों और घोषणाओं के जरिए मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश की जाती है।

    उन्होंने कहा कि चुनाव के बाद इन्हीं वादों को लेकर वादाखिलाफी की शिकायतें सामने आती हैं। इसलिए जनता को विरोधी दलों के छलावे और विश्वासघात से बचना चाहिए और अपने विवेक से स्वतंत्र एवं निष्पक्ष होकर मतदान करना चाहिए।

    9 अक्टूबर को कांशीराम की पुण्यतिथि पर बड़ा कार्यक्रम
    बैठक में बसपा संस्थापक मान्यवर कांशीराम की 9 अक्टूबर को होने वाली पुण्यतिथि के कार्यक्रम की तैयारियों पर भी चर्चा हुई। मायावती ने बताया कि इस बार कार्यक्रम लखनऊ में वीआईपी रोड स्थित बौद्ध स्मृति उपवन के सामने विकसित किए गए ‘मान्यवर श्री कांशीराम जी स्मारक स्थल’ में आयोजित किया जाएगा।

    पार्टी के मुताबिक कार्यक्रम में पश्चिमी उत्तर प्रदेश सहित प्रदेशभर से लोग शामिल होंगे और कांशीराम को श्रद्धांजलि देंगे। बसपा ने कार्यक्रम को ‘कांशीराम का मिशन अधूरा, बीएसपी करेगी पूरा’ और ‘बहनजी करेंगी पूरा’ जैसे संकल्पों के साथ आयोजित करने की बात कही है।

    नेपाल की बाढ़ पर जताई चिंता
    मायावती ने पड़ोसी देश नेपाल में बाढ़ से हुए जान-माल के भारी नुकसान पर भी चिंता जताई। उन्होंने प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए केंद्र और राज्य सरकारों से बाढ़ प्रभावित लोगों तक हरसंभव मदद तत्काल पहुंचाने की अपील की। उन्होंने कहा कि आपदा योजनाओं का लाभ जरूरतमंद परिवारों तक समय पर पहुंचना चाहिए। मायावती ने कहा कि बाढ़ हर साल आने वाली त्रासदी है, इसलिए इसके स्थायी समाधान के लिए भी गंभीरता से प्रयास किए जाने चाहिए।

  • अखिलेश के बयान से गरमाई यूपी की सियासत, मायावती ने सपा की जातीय राजनीति और पुराने गठबंधन पर उठाए सवाल

    अखिलेश के बयान से गरमाई यूपी की सियासत, मायावती ने सपा की जातीय राजनीति और पुराने गठबंधन पर उठाए सवाल

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश की राजनीति में समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव की राष्ट्रीय लोकदल और जयंत चौधरी को लेकर की गई टिप्पणी के बाद सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोलते हुए उनके बयान को अमर्यादित और अशोभनीय बताया है। मायावती ने जयंत चौधरी और उनके राजनीतिक परिवार का सम्मान करने की बात कहते हुए अखिलेश यादव से माफी मांगने की मांग की है।

    मायावती ने कहा कि अखिलेश यादव की ओर से यह कहना कि उन्होंने अपने पुराने सहयोगी दल राष्ट्रीय लोकदल और उसके नेता को चवन्नी से रुपया बनाया, राजनीतिक शिष्टाचार के लिहाज से उचित नहीं है। उन्होंने इस टिप्पणी को लेकर अखिलेश यादव से राष्ट्रीय लोकदल, जयंत चौधरी और चौधरी चरण सिंह के परिवार के प्रति कथित अपमान के लिए माफी मांगने को कहा।

    बसपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी का अपने सहयोगी दलों के साथ व्यवहार लंबे समय से राजनीतिक स्वार्थ और संकीर्णता से प्रभावित रहा है। उन्होंने कहा कि सपा की इसी कार्यशैली के कारण कई मौकों पर उसके राजनीतिक सहयोगियों के साथ संबंध खराब हुए हैं। मायावती ने दावा किया कि ऐसे राजनीतिक मतभेदों का लाभ अक्सर भारतीय जनता पार्टी को मिला और विपक्षी या धर्मनिरपेक्ष ताकतें कमजोर हुईं।

    मायावती ने अपने बयान में सपा और बसपा के पुराने गठबंधन का भी उल्लेख किया। उन्होंने 1993 में उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व वाली सपा के साथ बसपा के गठबंधन और बाद में उसके टूटने की घटना को याद किया। उन्होंने 2 जून 1995 के लखनऊ स्टेट गेस्ट हाउस कांड का भी जिक्र करते हुए उस दौर की राजनीतिक परिस्थितियों को अपने आरोपों के संदर्भ में सामने रखा।

    बसपा प्रमुख ने इसके बाद अखिलेश यादव के कार्यकाल में हुए सपा और बसपा के चुनावी गठबंधन का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव के लिए दोनों दलों के बीच गठबंधन हुआ था, लेकिन अपेक्षित चुनावी परिणाम नहीं आने के बाद यह गठबंधन ज्यादा समय तक कायम नहीं रह सका। मायावती ने इसके लिए सपा के रवैये को जिम्मेदार ठहराया।

    मायावती ने अखिलेश यादव की पीडीए राजनीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार अखिलेश यादव पीडीए में शामिल पी शब्द को कभी पिछड़ा वर्ग और कभी पंडितों के हित से जोड़ते हैं। मायावती ने दावा किया कि सपा पिछड़े वर्गों में अपनी जाति के अलावा अन्य समुदायों, अल्पसंख्यकों और विशेष रूप से ब्राह्मण समाज के हितों के प्रति पर्याप्त रूप से संवेदनशील नहीं रही है।

    उन्होंने सपा की पिछली सरकारों पर दलितों, पिछड़ों, अल्पसंख्यकों और ऊंची जातियों के लोगों के साथ भेदभाव तथा उत्पीड़न के आरोप भी लगाए। मायावती ने यह भी आरोप लगाया कि सपा शासन के दौरान अपराधी और अराजक तत्वों को बढ़ावा मिला। इन दावों के आधार पर उन्होंने उत्तर प्रदेश के मतदाताओं से आगामी विधानसभा चुनाव में सपा को सत्ता से दूर रखने की अपील की।

    जयंत चौधरी को लेकर शुरू हुई टिप्पणी अब सपा, बसपा और अन्य राजनीतिक दलों के बीच व्यापक बहस का विषय बनती दिखाई दे रही है। उत्तर प्रदेश की राजनीति में गठबंधन, सामाजिक समीकरण और पीडीए की रणनीति आगामी चुनावी माहौल में महत्वपूर्ण मुद्दे बने हुए हैं। मायावती के ताजा हमले ने इन मुद्दों पर राजनीतिक टकराव को और तेज कर दिया है।

  • जयंत चौधरी पर टिप्पणी से बढ़ा यूपी सियासी विवाद, अखिलेश यादव के खिलाफ केशव मौर्य और मायावती हुए मुखर

    जयंत चौधरी पर टिप्पणी से बढ़ा यूपी सियासी विवाद, अखिलेश यादव के खिलाफ केशव मौर्य और मायावती हुए मुखर

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश की राजनीति में समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव की एक टिप्पणी को लेकर सियासी विवाद तेज हो गया है। केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी को लेकर की गई ‘चवन्नी से रुपया’ वाली टिप्पणी पर भारतीय जनता पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने अखिलेश यादव से जयंत चौधरी से माफी मांगने की मांग की है। वहीं बसपा प्रमुख मायावती ने भी इस बयान को जाट समाज से जोड़ते हुए सपा प्रमुख पर निशाना साधा है।

    केशव प्रसाद मौर्य ने अखिलेश यादव पर पलटवार करते हुए कहा कि जयंत चौधरी के खिलाफ की गई टिप्पणी उचित नहीं है। उन्होंने सपा प्रमुख से अपने बयान के लिए माफी मांगने को कहा। मौर्य ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव राजनीतिक परेशानी के कारण अगड़े, पिछड़े और दलित समाज को लेकर भी ऐसी टिप्पणियां कर रहे हैं, जिन्हें उचित नहीं माना जा सकता।

    मौर्य ने अपने बयान में पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि चौधरी चरण सिंह ने सैफई परिवार के लिए काफी कुछ किया था और परिवार पर उनका बड़ा एहसान रहा है। मौर्य के मुताबिक, ऐसे राजनीतिक और पारिवारिक संबंधों की पृष्ठभूमि में जयंत चौधरी को लेकर की गई टिप्पणी पर अखिलेश यादव को विचार करना चाहिए और माफी मांगनी चाहिए।

    उपमुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश की आगामी विधानसभा राजनीति का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि 2027 के विधानसभा चुनाव में प्रदेश की जनता समाजवादी पार्टी को सत्ता से दूर रखेगी। मौर्य ने कहा कि भाजपा के साथ अगड़े, पिछड़े और दलित समाज के लोग खड़े हैं। उनके इस बयान को आगामी चुनाव के सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है।

    इसी विवाद के बीच बसपा प्रमुख मायावती ने भी अखिलेश यादव की टिप्पणी पर नाराजगी जताई। मायावती ने कहा कि ‘चवन्नी से रुपया’ बनाने वाली टिप्पणी जाट समाज को पसंद नहीं आई है। उन्होंने अखिलेश यादव पर राजनीतिक अहंकार का आरोप लगाते हुए कहा कि सपा प्रमुख को अपने बयान के लिए जाट समाज से माफी मांगनी चाहिए।

    जयंत चौधरी पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में प्रभाव रखने वाले प्रमुख नेताओं में शामिल हैं और उनका राजनीतिक आधार मुख्य रूप से जाट समुदाय से जुड़ा माना जाता है। ऐसे में उनके खिलाफ किसी टिप्पणी को लेकर सामाजिक प्रतिक्रिया का मुद्दा बनना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यही वजह है कि भाजपा और बसपा दोनों ने अखिलेश यादव के बयान को लेकर उन्हें घेरने का प्रयास किया है।

    उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप लगातार तेज हो रहे हैं। विभिन्न दल अपने-अपने सामाजिक समीकरण मजबूत करने की कोशिश में जुटे हैं। ऐसे समय में नेताओं के बयानों पर होने वाली राजनीतिक प्रतिक्रिया चुनावी माहौल को प्रभावित करने वाले मुद्दों का रूप ले सकती है।

    फिलहाल विवाद का केंद्र अखिलेश यादव की जयंत चौधरी को लेकर की गई टिप्पणी है। केशव मौर्य और मायावती दोनों ने अलग-अलग तरीके से इस बयान की आलोचना करते हुए माफी की मांग की है। अब राजनीतिक चर्चा इस बात पर केंद्रित है कि अखिलेश यादव इस विवाद पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और क्या उनकी ओर से कोई स्पष्टीकरण सामने आता है।