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  • MGM में फिर रैगिंग की शिकायत से मचा हड़कंप, 10 दिन में दूसरी घटना का आरोप, जूनियर छात्रों की शिकायत पर जांच शुरू

    MGM में फिर रैगिंग की शिकायत से मचा हड़कंप, 10 दिन में दूसरी घटना का आरोप, जूनियर छात्रों की शिकायत पर जांच शुरू


    इंदौर । इंदौर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज में फर्स्ट ईयर MBBS छात्रों से कथित रैगिंग का मामला सामने आने के बाद कॉलेज प्रशासन में हलचल बढ़ गई है। नेशनल मेडिकल कमीशन के एंटी रैगिंग सेल को की गई शिकायत के बाद कॉलेज प्रबंधन से 24 घंटे के भीतर रिपोर्ट मांगी गई है। शिकायत प्रथम वर्ष के छात्रों की ओर से की गई है जिसमें रात के समय सीनियर छात्रों के हॉस्टल में पहुंचने और जूनियर विद्यार्थियों को कमरे से बाहर बुलाने की कोशिश करने का आरोप लगाया गया है।

    शिकायत के मुताबिक घटना रात करीब 1 बजे से 3 बजे के बीच की बताई गई है। छात्रों का आरोप है कि कुछ सीनियर विद्यार्थी हॉस्टल के ब्लॉक नंबर छह में पहुंचे और कमरों के दरवाजे लगातार खटखटाते रहे। डर की वजह से छात्रों ने अपने कमरे के दरवाजे नहीं खोले। शिकायत में यह भी कहा गया है कि सीनियर छात्रों की ओर से जूनियर विद्यार्थियों को हॉस्टल से बाहर आने के लिए कहा गया था।

    छात्रों ने हॉस्टल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए हैं। शिकायत में कहा गया है कि घटना के दौरान हॉस्टल में सुरक्षाकर्मी मौजूद था लेकिन कथित तौर पर उसने सीनियर छात्रों को अंदर आने से नहीं रोका। अब कॉलेज प्रबंधन घटना की वास्तविक स्थिति का पता लगाने के लिए हॉस्टल में लगे CCTV कैमरों की फुटेज की जांच कर रहा है।

    मामले की शिकायत सामने आने के बाद कॉलेज की एंटी रैगिंग कमेटी की बैठक भी बुलाई गई। इसमें फर्स्ट ईयर के विद्यार्थियों को बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया गया है। प्रबंधन ब्लॉक नंबर छह की उस रात की CCTV फुटेज खंगालेगा। कॉलेज प्रशासन के मुताबिक जांच में यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित छात्रों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

    फर्स्ट ईयर के छात्र जिस ब्लॉक नंबर छह में रहते हैं वहां सीनियर छात्रों का प्रवेश नियमों के अनुसार प्रतिबंधित बताया गया है। ऐसे में कथित तौर पर सीनियर छात्रों के वहां पहुंचने का मामला हॉस्टल सुरक्षा और नियमों के पालन से भी जुड़ा हुआ है।

    शिकायत में गणपति उत्सव के दौरान हुई एक मीटिंग का भी जिक्र किया गया है। छात्रों का आरोप है कि उन्हें बैठक के लिए बुलाया गया था और इस दौरान उनके मोबाइल फोन ले लिए गए थे। विद्यार्थियों ने रैगिंग से जुड़े नियमों और न्यायालय के निर्देशों का हवाला देते हुए मामले में कार्रवाई की मांग की है।

    एमजीएम मेडिकल कॉलेज में करीब 10 दिन के भीतर रैगिंग से जुड़ी यह दूसरी शिकायत बताई जा रही है। इससे पहले एमटीएच अस्पताल में एक पीजी छात्र की ओर से रैगिंग की शिकायत सामने आई थी। उस मामले में जांच कमेटी बनाई गई थी और विभागीय स्तर पर कार्रवाई की गई थी।

    कॉलेज में पहले भी रैगिंग से जुड़ी शिकायतें सामने आती रही हैं। सितंबर में 2024 बैच के करीब 50 विद्यार्थियों के रैगिंग से परेशान होकर हॉस्टल छोड़ने की बात सामने आई थी। इससे पहले अक्टूबर 2025 में पीजी छात्रा ने सीनियर डॉक्टरों पर मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगाते हुए शिकायत की थी। नवंबर 2025 में भी MBBS प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों की ओर से सीनियर छात्रों पर मारपीट और अभद्र व्यवहार के आरोप लगाए गए थे। उस मामले की जांच के बाद चार सीनियर छात्रों को निलंबित किया गया था।

    एमजीएम मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया ने बताया कि कॉलेज को शिकायत मिली है। मामले की जांच के लिए कमेटी गठित की गई है। अब छात्रों के बयान और CCTV फुटेज सहित उपलब्ध जानकारी के आधार पर पूरे मामले की जांच की जाएगी।

  • पैसा मंदिर का और 50 में 42 मुस्लिम छात्र! मंजूरी रद्द होने के बाद MBBS कर रहे छात्रों का क्या होगा? समझिए विवाद

    पैसा मंदिर का और 50 में 42 मुस्लिम छात्र! मंजूरी रद्द होने के बाद MBBS कर रहे छात्रों का क्या होगा? समझिए विवाद

    नई दिल्ली। नेशनल मेडिकल कमीशन ने जम्मू-कश्मीर के कटरा में स्थित श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस को MBBS कोर्स चलाने की अनुमति को रद्द कर देन का फैसला लिया है.

    यह फैसला 2 जनवरी 2026 को हुए अचानक निरीक्षण के बाद लिया गया है. जांच में कॉलेज के शिक्षा देने की व्यवस्था, बुनियादी ढांचा, मरीजों की संख्या और क्लिनिकल सुविधाओं में कई गंभीर कमियां पाई गई हैं. मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड ने इसे न्यूनतम मानकों पर खरा नहीं पाया है. जिसके कारण से NMC अध्यक्ष की मंजूरी लेकर उस कॉलेज की अनुमति रद्द कर दी गई है.

    50 छात्रों में से 42 छात्र मुस्लिम
    ये विवाद तब उभरा जब कॉलेज में 50 छात्रों में से 42 कश्मीरी मुस्लिम छात्रों का प्रवेश हुआ था. भाजपा और कुछ हिंदू संगठन इसे लेकर नाराज हुए और सवाल उठाया कि मंदिर ट्रस्ट के फंड से चलने वाले इस कॉलेज में मुस्लिम छात्रों को प्राथमिकता क्यों मिली है. मुख्यमंत्री ओमर अब्दुल्ला ने कहा कि दाखिले पूरी तरह NEET और मेरिट के आधार पर हुए और धर्म के आधार पर किसी प्रकार का भेदभाव नहीं किया गया है. उन्होंने यह भी साफ किया कि यदि कोई संस्था अल्पसंख्यक दर्जा लेना चाहती थी तो उसी समय आवेदन करना चाहिए था.

    MARB ने शिकायतों को जांचने के लिए 2 जनवरी 2026 को अचानक निरीक्षण किया. निरीक्षण में पता चला कि शिक्षण फैकल्टी में 39 फीसदी की कमी थी, ट्यूटर, डेमॉन्स्ट्रेटर और सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों की संख्या 65 फीसदी कम थी. मरीजों की संख्या और क्लिनिकल सेवाएं भी तय मानकों से बहुत कम थीं. OPD में 400 मरीजों की जगह केवल 182 मरीज आए, बेड ऑक्यूपेंसी 80 फीसदी की जगह 45 फीसदी रही और ICU में केवल आधे बेड भरे थे. प्रसव की संख्या हर महीने 25 थी, जबकि यह MARB के अनुसार गंभीर रूप से अपर्याप्त थी.

    हिंदू मुस्लिम नहीं, कॉलेज में थी कमी
    मुख्यमंत्री ओमर अब्दुल्ला ने कहा कि छात्रों का भविष्य सुरक्षित रहना चाहिए और उन्हें अन्य सरकारी मेडिकल कॉलेजों में समायोजित किया जाएगा. उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि शिक्षा और प्रवेश प्रक्रिया में सांप्रदायिक राजनीति की कोशिशें हुई हैं, लेकिन NMC और MARB ने साफ किया कि फैसले का आधार केवल कॉलेज की कमियां और नियमों का उल्लंघन था. छात्रों के अच्छाई के लिए उन्हें दूसरे कॉलेजों में बचे हुए सीटों पर भेजा जाएगा.

    इस पूरे विवाद से साफ संदेश गया कि मेडिकल कॉलेजों की स्थापना और संचालन में नियमों का पालन अनिवार्य है. छात्रों का भविष्य किसी भी राजनीतिक या सामाजिक दबाव, या धर्म के आधार पर प्रभावित नहीं होना चाहिए. NMC और MARB का यह कदम स्वास्थ्य शिक्षा में गुणवत्ता, समानता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में जरूरी माना जा रहा है.