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  • सत्य निकेतन इमारत हादसे में मृतकों की संख्या सात पहुंची, मालिक गिरफ्तार, MCD के पांच अधिकारी निलंबित हादसे के बाद

    सत्य निकेतन इमारत हादसे में मृतकों की संख्या सात पहुंची, मालिक गिरफ्तार, MCD के पांच अधिकारी निलंबित हादसे के बाद

    नई दिल्ली । दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में इमारत गिरने की दर्दनाक घटना में मृतकों की संख्या बढ़कर सात हो गई है। मलबा हटाने के दौरान एक और शव बरामद होने के बाद मौतों का आंकड़ा सात पहुंचा। हादसे के बाद राहत और बचाव अभियान लगातार जारी रहा। मलबे के नीचे फंसे लोगों की तलाश और घटनास्थल को सुरक्षित करने के लिए बचाव दलों ने काफी प्रयास किया।

    जानकारी के अनुसार, हादसे में जान गंवाने वालों में मध्य प्रदेश के दो छात्र भी शामिल हैं। कटनी निवासी 18 वर्षीय अक्षत यादव दिल्ली में रहकर PGDI कोर्स कर रहा था। हादसे के बाद उसका शव मलबे से बरामद किए गए पांचवें शव के रूप में पहचाना गया। अक्षत की मौत की खबर सामने आने के बाद उसके परिवार में मातम छा गया। परिजन दिल्ली के लिए रवाना हो गए हैं और पहचान तथा अन्य जरूरी प्रक्रियाओं के लिए मध्य प्रदेश पुलिस की टीम भी अस्पताल पहुंची।

    हादसे में अर्पित नाम के एक अन्य छात्र की भी मौत हुई है। दोनों छात्रों के परिवारों के लिए यह घटना बेहद दुखद रही। हादसे के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों में गहरा आक्रोश और चिंता का माहौल है। प्रशासन की ओर से बचाव कार्य के साथ मृतकों की पहचान और उनके परिवारों तक सूचना पहुंचाने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई गई।

    शुरुआती जांच में पुलिस को आशंका है कि इमारत के बेसमेंट में चल रहे निर्माण कार्य के कारण उसकी नींव कमजोर हुई होगी। हालांकि, हादसे की वास्तविक वजह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। पुलिस निर्माण गतिविधियों, भवन की स्थिति और उससे जुड़े अन्य पहलुओं की पड़ताल कर रही है। यह भी देखा जा रहा है कि निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं।

    मामले में पुलिस ने फरार चल रहे इमारत मालिक हरिराम बंसल गुप्ता को राजस्थान के भिवाड़ी से गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तारी के बाद पुलिस उससे हादसे से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर पूछताछ कर रही है। जांच में निर्माण कार्य की प्रकृति और इमारत की संरचनात्मक स्थिति से संबंधित जानकारी जुटाई जा रही है।

    हादसे के बाद दिल्ली नगर निगम ने भी प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की है। MCD के पांच अधिकारियों को निलंबित किया गया है। निलंबित अधिकारियों में डिप्टी कमिश्नर राकेश कुमार, SE रणवीर सिंह और EE ललित कुमार गोयल समेत पांच अधिकारी शामिल हैं। अधिकारियों के खिलाफ यह कार्रवाई हादसे के बाद जिम्मेदारी तय करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

    सत्य निकेतन की घटना ने निर्माणाधीन या पुराने भवनों में सुरक्षा व्यवस्था और निर्माण गतिविधियों की निगरानी को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। प्रशासन अब हादसे की परिस्थितियों की जांच के साथ यह भी पता लगाने में जुटा है कि निर्माण कार्य के दौरान निर्धारित नियमों और सुरक्षा प्रावधानों का पालन किया गया था या नहीं। जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद हादसे के लिए जिम्मेदारी और आगे की कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

  • बच्चों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता, दिल्ली हाईकोर्ट ने स्कूलों के आसपास सिगरेट, गुटखा और पान मसाला बिक्री पर लगाई रोक

    बच्चों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता, दिल्ली हाईकोर्ट ने स्कूलों के आसपास सिगरेट, गुटखा और पान मसाला बिक्री पर लगाई रोक


    नई दिल्ली ।
    राजधानी दिल्ली में स्कूली बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षित वातावरण को ध्यान में रखते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया है कि स्कूलों के आसपास सिगरेट, गुटखा, पान मसाला और अन्य किसी भी प्रकार के तंबाकू उत्पादों की बिक्री की अनुमति नहीं दी जाएगी। न्यायालय ने कहा कि बच्चों की आसान पहुंच से तंबाकू उत्पादों को दूर रखना सार्वजनिक स्वास्थ्य की दृष्टि से आवश्यक है और इस दिशा में सभी संबंधित एजेंसियों को प्रभावी कदम उठाने होंगे।

    यह आदेश एक वेंडर द्वारा दायर याचिका की सुनवाई के दौरान दिया गया। याचिकाकर्ता ने दावा किया था कि वैध वेंडिंग प्रमाणपत्र होने के बावजूद उसे बार-बार कारोबार करने से रोका जा रहा है। मामले की सुनवाई के दौरान नगर निगम ने अदालत को बताया कि संबंधित वेंडर स्कूल के निकट तंबाकू उत्पादों की बिक्री कर रहा था, जो बच्चों के हितों के विपरीत है। साथ ही निगम ने यह भी कहा कि वेंडिंग स्थल पर स्वच्छता संबंधी नियमों का भी पूरी तरह पालन नहीं किया जा रहा था।

    दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी स्कूल के आसपास तंबाकू, पान मसाला, गुटखा और सिगरेट जैसे उत्पादों की बिक्री स्वीकार नहीं की जा सकती। अदालत ने कहा कि स्कूल ऐसे स्थान हैं जहां बड़ी संख्या में बच्चे प्रतिदिन आते-जाते हैं और उनके आसपास इस प्रकार के उत्पादों की उपलब्धता उनके स्वास्थ्य और भविष्य के लिए गंभीर चिंता का विषय है। इसलिए ऐसे मामलों में बच्चों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।

    अदालत ने नगर निगम को निर्देश दिया कि संबंधित वेंडर को निर्धारित नियमों के अनुसार तीन दिन के भीतर वैकल्पिक वेंडिंग स्थल उपलब्ध कराया जाए। साथ ही यह भी कहा गया कि जब तक नया स्थान उपलब्ध नहीं कराया जाता, तब तक वेंडर को न्यायालय द्वारा तय की गई शर्तों का पालन करते हुए अपना कारोबार करने दिया जा सकता है। हालांकि यह स्पष्ट कर दिया गया कि किसी भी स्थिति में स्कूलों के आसपास तंबाकू उत्पादों की बिक्री नहीं होगी।

    हाईकोर्ट ने अपने पूर्व के निर्देशों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि स्कूलों के प्रवेश और निकास द्वार के आसपास अवरोध पैदा करने वाली गतिविधियों से बचना आवश्यक है। अदालत पहले भी स्पष्ट कर चुकी है कि स्कूल परिसरों के आसपास तंबाकू उत्पादों की बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। इसके साथ ही वेंडरों को केवल निर्धारित स्थान पर ही कारोबार करने, अतिरिक्त सार्वजनिक स्थान पर कब्जा न करने और फुटपाथों पर अतिक्रमण से बचने के निर्देश दिए गए हैं।

    न्यायालय ने यह भी दोहराया कि वेंडिंग स्थलों पर स्वच्छता बनाए रखना सभी विक्रेताओं की जिम्मेदारी है। डस्टबिन की व्यवस्था, साफ-सफाई और सार्वजनिक स्थानों का उचित उपयोग सुनिश्चित करना आवश्यक होगा ताकि स्कूलों के आसपास का वातावरण सुरक्षित और स्वच्छ बना रहे। यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई करने का अधिकार रहेगा।

    यह फैसला बच्चों को तंबाकू उत्पादों की आसान उपलब्धता से दूर रखने और स्कूलों के आसपास स्वस्थ वातावरण सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। साथ ही अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि वैध वेंडरों के आजीविका के अधिकार और बच्चों के स्वास्थ्य के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए वैकल्पिक वेंडिंग स्थल उपलब्ध कराना भी प्रशासन की जिम्मेदारी है।

  • एमसीडी क्षेत्रों में जनगणना अभियान की शुरुआत, हर घर से जुटाई जाएगी विस्तृत जनसांख्यिकी जानकारी

    एमसीडी क्षेत्रों में जनगणना अभियान की शुरुआत, हर घर से जुटाई जाएगी विस्तृत जनसांख्यिकी जानकारी


    नई दिल्ली ।  देश की राजधानी में जनसंख्या और आवास से जुड़े आंकड़ों को अधिक सटीक और व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से जनगणना 2027 की तैयारियां तेज कर दी गई हैं। इस प्रक्रिया के पहले चरण की शुरुआत एमसीडी क्षेत्रों में घर-घर सर्वेक्षण के साथ की गई है, जिसमें मकानों की सूची तैयार करने और परिवारों से संबंधित विस्तृत जानकारी एकत्र करने का कार्य किया जा रहा है। इस अभियान का मुख्य लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी घर या परिवार का डेटा छूट न जाए और शहर की वास्तविक जनसंख्या संरचना को सही ढंग से समझा जा सके।

    इस व्यापक अभियान के तहत लगभग 32 लाख मकानों का विस्तृत सर्वे किया जाएगा, जिसके लिए पूरे क्षेत्र को 46 हजार से अधिक छोटे ब्लॉकों में विभाजित किया गया है। प्रत्येक ब्लॉक में करीब 180 से 200 घर शामिल किए गए हैं और अनुमान है कि हर ब्लॉक में 700 से 800 लोग निवास करते हैं। इस कार्य के लिए लगभग 50 हजार जनगणना कर्मियों को तैनात किया गया है, जो निर्धारित क्षेत्रों में जाकर डिजिटल टैबलेट के माध्यम से जानकारी एकत्र करेंगे और उसे सीधे ऑनलाइन सिस्टम में दर्ज करेंगे।

    इस प्रक्रिया में प्रत्येक जनगणना कर्मी को एक निश्चित ब्लॉक सौंपा गया है और उन्हें घर-घर जाकर परिवारों की स्थिति, मकान की संरचना, उपलब्ध सुविधाओं और संपत्तियों से जुड़े लगभग 33 प्रश्नों के उत्तर दर्ज करने होंगे। इस बार विशेष रूप से किरायेदारों के आंकड़ों पर भी ध्यान दिया जा रहा है, क्योंकि शहर की बड़ी आबादी किराए के मकानों में रहती है। इस डेटा के आधार पर शहरी विकास और भविष्य की योजनाओं को अधिक प्रभावी और वास्तविक जरूरतों के अनुरूप तैयार किया जाएगा।

    सर्वेक्षण के दौरान यदि किसी घर में ताला लगा हुआ मिलता है तो संबंधित कर्मी दोबारा वहां जाएंगे और यदि कोई परिवार दिन में उपलब्ध नहीं होता है तो उनके घर का दौरा देर रात तक भी किया जा सकता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर परिवार का डेटा सही तरीके से दर्ज किया जाए। इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए जनगणना कर्मियों और सुपरवाइजरों की निगरानी व्यवस्था भी मजबूत की गई है, जहां हर छह कर्मियों पर एक पर्यवेक्षक तैनात किया गया है।

    इसके साथ ही नागरिकों की सुविधा और सुरक्षा के लिए जनगणना कर्मियों की पहचान को भी सत्यापित करने की व्यवस्था की गई है, जिसमें उनके पहचान पत्र और क्यूआर कोड स्कैन करके उनकी प्रामाणिकता की पुष्टि की जा सकती है। पहले से ही कई लोगों ने स्व-गणना के माध्यम से अपनी जानकारी दर्ज कर दी है, जिसे आगे चलकर फील्ड सर्वे के दौरान सत्यापित किया जाएगा।

    कुल मिलाकर यह पूरा अभियान न केवल जनसंख्या के सटीक आंकड़े जुटाने की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि यह शहरी नियोजन, संसाधन प्रबंधन और विकास योजनाओं के लिए भी एक मजबूत आधार तैयार करेगा, जिससे आने वाले वर्षों में शहर के विकास को अधिक संतुलित और प्रभावी बनाया जा सकेगा।

  • MCD: दिल्ली में आज BJP की अहम बैठक….मेयर-डिप्टी मेयर के नामों का हो सकता है ऐलान

    MCD: दिल्ली में आज BJP की अहम बैठक….मेयर-डिप्टी मेयर के नामों का हो सकता है ऐलान


    नई दिल्ली।
    एमसीडी (MCD) में महापौर (Mayor), उपमहापौर (Deputy Mayor) और सदन से चुने जाने वाले स्थायी समिति के सदस्यों के नामों का फैसला बुधवार को होने की संभावना है। इस संबंध में एमसीडी में सत्तारूढ़ भाजपा (Ruling BJP) की बुधवार को एक बैठक होगी। लिहाजा सभी की निगाहें बैठक पर टिकी हैं। भाजपा (BJP) ने इन पदों पर पार्षदों के नामों पर फैसला करने के लिए आठ सदस्यीय कमेटी बनाई है।

    प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा (Virendra Sachdeva) की अगुवाई में बनाई गई कमेटी में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता (Chief Minister Rekha Gupta), केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा, सांसद व प्रदेश महामंत्री योगेंद्र चांदोलिया व कमलजीत सहरावत और विष्णु मित्तल, प्रदेश सहप्रभारी अल्का गुर्जर और प्रदेश संगठन महामंत्री पवन राणा शामिल हैं। हालांकि इनमें कई नेता पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में प्रचार करने गए हैं। इस कारण वह विडियो एप के माध्यम से बैठक से जुड़ेंगे।

    पार्टी इस बार संतुलन और अनुभव दोनों को ध्यान में रखते हुए फैसपा लेने की तैयारी में है। महापौर और उपमहापौर जैसे अहम पदों के लिए वरिष्ठ पार्षदों के साथ-साथ पहली बार चुने गए पार्षद भी जोर-आजमाइश में लगे हैं। पिछले करीब 20 दिनों से संभावित उम्मीदवार अपने-अपने राजनीतिक आकाओं के चक्कर काट रहे हैं और समर्थन जुटाने में जुटे हैं।

    इस तरह भाजपा के भीतर इस बार मुकाबला काफी दिलचस्प बना हुआ है। एक ओर अनुभवी पार्षद अपनी दावेदारी को मजबूत बता रहे हैं, वहीं नए चेहरे भी संगठन में अपनी सक्रियता और प्रदर्शन के आधार पर मौका मिलने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। पार्टी नेतृत्व के सामने चुनौती है कि ऐसा चेहरा चुना जाए जो न केवल संगठन में संतुलन बनाए रखे, बल्कि एमसीडी के कामकाज को भी प्रभावी ढंग से आगे बढ़ा सके।

    सदन से चुने जाने वाले भाजपा कोटे के दो सदस्यों के पद को लेकर भी खासी दिलचस्पी बनी हुई है। इन पदों पर चयन के जरिए पार्टी संगठनात्मक संतुलन साधने की कोशिश कर सकती है, जिसमें क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरणों का भी ध्यान रखा जाएगा।

  • दिल्ली सरकार ने एमसीडी को दिए 500 करोड़ रुपये

    दिल्ली सरकार ने एमसीडी को दिए 500 करोड़ रुपये


    नई दिल्ली।
    दिल्ली (Delhi) को साफ, स्वच्छ और प्रदूषण-मुक्त राजधानी बनाने की दिशा में दिल्ली सरकार (Delhi Government) ने बड़ा और दूरगामी कदम उठाया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता (Chief Minister Rekha Gupta) ने शहर की सफाई व्यवस्था को मजबूत करने और धूल से होने वाले प्रदूषण पर काबू पाने के लिए दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) को 500 करोड़ रुपये की एकमुश्त सहायता दी है। इस धनराशि से सफाई व सड़कों की छोटी-मोटी मरम्मत कर धूल उड़ने की समस्या को कम किया जाएगा।

    मुख्यमंत्री ने साफ कहा है कि सफाई व्यवस्था को स्थायी रूप से मजबूत बनाने के लिए सरकार आगे भी नगर निगम को हर साल 300 करोड़ रुपये की नियमित सहायता देती रहेगी।

    इस विषय को लेकर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में शुक्रवार को दिल्ली सचिवालय में उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में दिल्ली के कैबिनेट मंत्री आशीष सूद, दिल्ली के महापौर सरदार राजा इकबाल सिंह, नगर निगम की स्थायी समिति की अध्यक्ष सत्या शर्मा, नेता सदन प्रवेश वाही, दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव राजीव वर्मा, निगम आयुक्त संजीव खिरवार सहित सरकार व नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

    बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि राजधानी को साफ और स्वच्छ रखने के लिए एमसीडी को 500 करोड़ रुपये अतिरिक्त दिए गए हैं। राशि का कुछ हिस्सा उन कंपनियों का पुराना बकाया चुकाने में खर्च होगा जो कचरा प्रबंधन का काम करती हैं ताकि वे बेहतर तरीके से अपने काम को अंजाम दे सकें। कुछ हिस्सा सफाई व्यवस्था को बिना किसी रुकावट के चलाने के लिए दिया जाएगा ताकि कचरा उठाने और उसे ले जाने में होने वाले मासिक घाटे की भरपाई की जा सके। साथ ही, कुछ हिस्सा उन खास इलाकों से कूड़ा हटाने के लिए भी दिया जाएगा जहां ठेकेदार काम नहीं करते। इसके अतिरिक्त सड़कों की छोटी-मोटी मरम्मत, जैसे गड्ढे भरने, छोटे पैच रिपेयर और धूल से होने वाले प्रदूषण को रोकने के कामों पर भी राशि खर्च की जाएगी।

    बैठक में मुख्यमंत्री ने नगर निगम को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि यह पूरी राशि केवल स्वीकृत उद्देश्यों के लिए ही उपयोग की जाए और इसका किसी अन्य योजना में उपयोग नहीं किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि नगर निगम को सभी वित्तीय नियमों का पालन करते हुए खर्च की नियमित निगरानी सुनिश्चित करनी होगी और समय-समय पर प्रगति रिपोर्ट और उपयोगिता प्रमाणपत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राजधानी को सही मायनों में विकसित दिल्ली बनाने के लिए स्वच्छ व प्रदूषण मुक्त किया जाना आवश्यक है। इसके लिए सफाई व्यवस्था का भी चाक-चौबंद रहना जरूरी है। उन्होंने कहा कि कूड़ा आदि से निकली धूल भी प्रदूषण को बढ़ाती है, इसलिए हमारी सरकार ने निर्णय लिया है कि राजधानी को साफ व स्वच्छ बनाने की व्यवस्था को प्रभावी बनाया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि नगर निगम को कूड़ा उठाने की व्यवस्था को और बेहतर बनाना होगा। दिल्ली सरकार सफाई से जुड़े आधुनिक उपकरण खरीदने के लिए निगम को अलग से पर्याप्त धनराशि दे रही है, ताकि सफाई के काम में बेहतर और तेजी से नतीजे मिल सकें। उन्होंने कूड़े से ऊर्जा बनाने वाले नए प्लांट लगाने के निर्देश दिए और मौजूदा प्लांट को अपग्रेड करने को भी कहा। साथ ही, हरित कूड़े के सही उपयोग पर जोर देते हुए प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में आधुनिक मशीनें लगाने के निर्देश एमसीडी नेताओं को दिए। उन्होंने कहा कि कूड़े का बेहतर प्रबंधन भी राजधानी को साफ-सुथरा बनाने में प्रभावी भूमिका निभा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि गीले व सूखे कूड़े का उठाने की प्रक्रिया भी सरल बनाई जाए ताकि लोगों का इस ओर रुझान बढ़े।