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  • हूतियों के खिलाफ सक्रिय होगा मक्का डिफेंस पैक्ट? सऊदी में पाकिस्तान और तुर्की के सैन्य अधिकारियों की अहम बैठक आज

    हूतियों के खिलाफ सक्रिय होगा मक्का डिफेंस पैक्ट? सऊदी में पाकिस्तान और तुर्की के सैन्य अधिकारियों की अहम बैठक आज

    नई दिल्ली ।सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के सैन्य गठबंधन की अहम बैठक सोमवार को रियाद में हो रही है। तीनों देशों की स्ट्रैटेजिक पॉलिटिकल एंड डिफेंस कमेटी की इस बैठक में मक्का रक्षा समझौते के भविष्य पर चर्चा होगी। बैठक ऐसे समय हो रही है जब सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोहियों के बीच तनाव बना हुआ है। ऐसे में यह सवाल महत्वपूर्ण हो गया है कि क्या मौजूदा परिस्थितियों में मक्का रक्षा समझौते को सक्रिय किया जाएगा और क्या पाकिस्तान तथा तुर्की सऊदी अरब के समर्थन में हूतियों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई में शामिल होंगे।

    रियाद में होने वाली बैठक में पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के विदेश मंत्री, रक्षा मंत्री तथा सेना प्रमुख शामिल होंगे। बैठक के दौरान सऊदी अरब पर हूतियों की ओर से किए जा रहे हमलों से निपटने के तरीकों पर चर्चा होने की संभावना है। इसके अलावा तीनों देशों के बीच हुए सैन्य समझौते के काम करने के तरीके और गठबंधन को भविष्य में अधिक संस्थागत रूप देने के लिए उठाए जाने वाले अगले कदमों पर भी विचार किया जाएगा। बैठक को इस समझौते की आगे की दिशा तय करने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    मक्का रक्षा समझौते पर 7 अगस्त को तीनों देशों के नेताओं ने हस्ताक्षर किए थे। समझौते में सामूहिक रक्षा से जुड़ा एक प्रावधान शामिल है। इसके तहत तीनों देशों में से किसी एक पर होने वाले सशस्त्र हमले को तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। समझौते के बाद से पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब इसके संस्थागत और सैन्य ढांचे को विकसित करने पर काम कर रहे हैं। हाल के दिनों में हूतियों की ओर से सऊदी अरब को ड्रोन और मिसाइलों से निशाना बनाए जाने के कारण इस समझौते की भूमिका को लेकर चर्चा बढ़ गई है।

    सऊदी अरब यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार का समर्थन करता है। दूसरी ओर, ईरान समर्थित हूती विद्रोही राजधानी सना सहित उत्तरी यमन के बड़े हिस्से पर नियंत्रण रखते हैं। हूतियों और सऊदी अरब के बीच जारी टकराव ने मक्का रक्षा समझौते के सामूहिक रक्षा प्रावधान को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। अब रियाद में होने वाली बैठक में यह देखा जाएगा कि मौजूदा स्थिति में तीनों देशों के बीच हुआ सैन्य समझौता किस तरह आगे बढ़ता है और सऊदी अरब की सुरक्षा से जुड़े मामलों में इसकी भूमिका क्या होगी।

    पाकिस्तान ने सऊदी अरब पर हूतियों के हमलों की निंदा की है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा है कि उनका देश समझौते के तहत सऊदी अरब की रक्षा के लिए हर संभव कोशिश करेगा। तुर्की के नेताओं ने भी सऊदी अरब पर हुए हूती हमलों की कई मंचों पर आलोचना की है। हालांकि, पाकिस्तान और तुर्की की ओर से हूतियों के खिलाफ सऊदी अरब के सैन्य अभियानों में सीधे तौर पर शामिल होने की पुष्टि नहीं की गई है। इसी वजह से यह सवाल बना हुआ है कि मक्का रक्षा समझौते के तहत किए गए वादे को व्यवहार में किस तरह लागू किया जाएगा और क्या दोनों देश सऊदी अरब के लिए चल रही सैन्य कार्रवाई में सीधे शामिल होंगे।

  • सऊदी अरब पर हूतियों के हमले जारी…. मक्का के बाद अब मदीना में पावर स्टेशन पर अटैक…

    सऊदी अरब पर हूतियों के हमले जारी…. मक्का के बाद अब मदीना में पावर स्टेशन पर अटैक…


    दुबई।
    मुसलमानों (Muslims) के सबसे पवित्र स्थलों में से एक मक्का (Mecca) पर हमले के बाद अब सऊदी अरब (Saudi Arabia) के मदीना (Medina) पर हमले की खबर सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक यमन के हूती विद्रोहियों ने मदीना (Medina) पर एक बड़ा हमला किया है। सऊदी की सैन्य गठबंधन ने बताया है कि हमला मदीना स्थित ताइबा पावर डिस्ट्रीब्यूशन स्टेशन (Taiba Power Distribution Station) पर हुआ और हूती विद्रोहियों ने इसे ड्रोन के जरिए निशाना बनाया। अहम बात यह है कि यह पावर स्टेशन सीधे तौर पर ‘मस्जिद-ए-नबवी’ मस्जिद को बिजली की आपूर्ति करता है।

    सऊदी सेना के एक प्रवक्ता ने सोशल मीडिया एक्स पर हमले का आरोप लगाया है। पर उन्होंने बताया कि यह हमला बीते मंगलवार को हुआ। ड्रोन हमले में एक ट्रांसफार्मर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। हालांकि, पावर नेटवर्क को तुरंत बहाल कर दिया गया और इसलिए बिजली सेवा पर ज्यादा असर नहीं पड़ा।


    दोनों पवित्र मस्जिदों पर हमले की कोशिश

    सऊदी की गठबंधन ने हूती विद्रोहियों के इस कदम की कड़ी निंदा की है। प्रवक्ता अल-मल्की ने कहा कि यह हमला दोनों पवित्र मस्जिदों को निशाना बनाने की कोशिशों का हिस्सा है। गौरतलब है कि इससे पहले बीते महीने हुती विद्रोहियों द्वारा मक्का को भी निशाना बनाने की खबरें सामने आई थीं। कथित तौर पर ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के मक्का को निशाना बनाने की कोशिश की और ड्रोन हमले किए। इसके बाद से पूरे क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया था। भारत समेत कई देशों ने इस हमले की कड़ी निंदा की थी।


    बैलिस्टिक मिसाइलें दागने की खबर

    मदीना हमले के अलावा, हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के अन्य हिस्सों पर भी ताबड़तोड़ हमले किए हैं। बीते गुरुवार को सऊदी की एयर डिफेंस सिस्टम ने लाल सागर तट के पास खमिस मुशैत और जाज़ान में दो बैलिस्टिक मिसाइलों को मार गिराने का दावा किया। सऊदी प्रेस एजेंसी के मुताबिक खमिस मुशैत में मिसाइल और ड्रोन के मलबे गिरने के कारण कई इमारतों और वाहनों को भारी नुकसान पहुंचा है।


    आतंक मचा रहे हूती

    हूती विद्रोहियों के इन बढ़ते हमलों ने क्षेत्र में तनाव भड़का दिया है। समूह ने यमन में लाल सागर की तटरेखा और रणनीतिक रूप से बेहद अहम बाब अल-मंडेब स्ट्रेट के द्वीपों पर लगभग नियंत्रण कर लिया है। हमले ऐसे समय में हुए हैं जब अमेरिका और ईरान युद्ध की वजह से होर्मुज पहले से ही ठप पड़ा है। ऐसे में वैश्विक तेल आपूर्ति दबाव में है। अब बाब अल-मंडेब पर हमलों से मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।

  • मुस्लिमों के पवित्र शहर मक्का पर मिसाइल अटैक का खतरा…. हूती विद्रोही कर सकते हैं हमला

    मुस्लिमों के पवित्र शहर मक्का पर मिसाइल अटैक का खतरा…. हूती विद्रोही कर सकते हैं हमला


    मक्का।
    मुस्लिमों (Muslims) के सबसे पवित्र शहर मक्का (Holiest city, Mecca) पर हमले का साया मंडरा रहा है। ये बात खुद सऊदी अरब (Saudi Arabia) की सुरक्षा एजेंसियां कह रही हैं। उन्हें डर है कि ईरान समर्थित हूती विद्रोही (Houthi rebels) इस पवित्र शहर को अपना निशाना बना सकते हैं। सऊदी सिविल डिफेंस ने गुरुवार को पवित्र शहर मक्का और अन्य इलाकों के लिए अलर्ट जारी किया है। अमूमन ऐसी चेतावनियां मिसाइल हमले के संभावित खतरे का संकेत देती हैं। एजेंसी ने अपने आधिकारिक X हैंडल पर एक पोस्ट में कहा, “मक्का शहर में संभावित खतरे के बारे में आगाह करने के लिए ‘नेशनल अर्ली वार्निंग प्लेटफॉर्म’ की ओर से चेतावनी जारी की गई है।”

    10 दिनों से भी कम समय में यह दूसरी बार है, जब अधिकारियों ने मक्का के लिए ऐसी चेतावनी जारी की है। सऊदी अरब के पश्चिमी तट के अन्य इलाकों के लिए भी अलग-अलग चेतावनियां जारी की गईं, जिनमें लाल सागर के किनारे बसा यानबू (Yanbu) शहर और ताइफ, जेद्दा और तबुक इलाके शामिल हैं। समाचार एजेंसी AFP के अनुसार, कुछ मिनटों बाद ये अलर्ट हटा लिए गए। हाल के हफ्तों में, ऐसे अलर्ट के बाद यमन के हूती विद्रोहियों (ईरान समर्थित एक सशस्त्र समूह) ने हमले किए हैं।

    पिछले हफ्ते, सऊदी अरब ने हूतियों पर मक्का को ड्रोन से निशाना बनाने की कोशिश का आरोप लगाया था, जिसे मार गिराया गया। सऊदी अरब ने कहा कि 2017 के बाद से ऐसी कोशिश पहली बार हुई थी। दूसरी तरफ, हूती समूह ने इन आरोपों से इनकार किया है। पिछला अलर्ट 15 सितंबर को जारी किया गया था, जब सऊदी अरब की एयर डिफेंस सिस्टम ने मक्का के दक्षिण में एक हूती ड्रोन को रोककर नष्ट कर दिया था। वह ड्रोन प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में दाखिल नहीं हो पाया था। कुछ दिनों बाद, हूतियों ने कई सालों में पहली बार सऊदी राजधानी रियाद को निशाना बनाया, जिससे इस संघर्ष में तनाव और बढ़ गया।

    बता दें कि ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों और सऊदी समर्थित यमनी सरकार के बीच नई लड़ाई चल रही है, जो तेहरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच हो रही है। यह संघर्ष तब शुरू हुआ, जब इस सशस्त्र समूह ने सऊदी अरब की समुद्री नाकेबंदी की घोषणा की और लाल सागर में उसके जहाजों को निशाना बनाया। इस महीने की शुरुआत में, हूतियों ने सऊदी समर्थित सरकारी बलों से इलाके छीनने के बाद बाब अल-मंडेब स्ट्रेट के पास रणनीतिक तटीय इलाकों पर कब्जा कर लिया। यह इलाका सऊदी अरब के तेल निर्यात के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

  • मक्का तक पहुंचा हूती हमलों का खतरा, सऊदी के छह शहरों में बजे इमरजेंसी सायरन; 13 लोग घायल

    मक्का तक पहुंचा हूती हमलों का खतरा, सऊदी के छह शहरों में बजे इमरजेंसी सायरन; 13 लोग घायल

    रियाद। यमन के हूती विद्रोहियों की ओर से सऊदी अरब पर मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद मंगलवार को देश के छह प्रमुख शहरों में आपातकालीन चेतावनी जारी की गई। इनमें मक्का, जिद्दा और ताइफ जैसे महत्वपूर्ण शहर भी शामिल रहे। सऊदी अरब के लिए यह स्थिति इसलिए बेहद संवेदनशील मानी जा रही है क्योंकि पहली बार मक्का तक संभावित हमले का खतरा पहुंचा और वहां भी लोगों को सतर्क रहने की चेतावनी दी गई।

    सऊदी अरब के सिविल डिफेंस ने अपने नेशनल अर्ली वार्निंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से जिद्दा, ताइफ, आभा, जाजान प्रांत, अल-उला और यान्बू सहित छह क्षेत्रों में अलर्ट जारी किया। चेतावनी मिलते ही प्रशासन ने लोगों से घबराने के बजाय घरों अथवा नजदीकी सुरक्षित स्थानों के भीतर रहने की अपील की। लोगों को खिड़की, दरवाजे, बालकनी और छत से दूर रहने तथा सार्वजनिक स्थानों पर भीड़ नहीं लगाने की सलाह दी गई। प्रशासन ने लोगों से केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने को कहा।

    दक्षिणी सऊदी में हमले, 13 नागरिक घायल

    यह अलर्ट सोमवार को यमन की दिशा से हुए सिलसिलेवार मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद जारी किया गया। सऊदी अरब के नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मलिकी के मुताबिक, 14 सितंबर को हुए हमलों में आम नागरिकों और उनके रिहाइशी इलाकों को निशाना बनाया गया।

    अल-मलिकी ने बताया कि मिसाइल और ड्रोन मुख्य रूप से खमीस मुशैत, आभा और ताइफ शहरों में पहुंचे। हमलों में 13 लोग घायल हुए, जबकि कम से कम सात आवासीय मकानों और दो निजी वाहनों को नुकसान पहुंचा।

    हूतियों ने सऊदी एयरबेस को निशाना बनाने का किया दावा

    दूसरी ओर, हूती विद्रोहियों ने इन हमलों की जिम्मेदारी लेते हुए दावा किया कि उन्होंने सऊदी अरब के भीतर काफी अंदर तक सैन्य कार्रवाई की। हूतियों के अनुसार, उनका मुख्य निशाना खमीस मुशैत में स्थित सऊदी अरब का महत्वपूर्ण सैन्य एयरबेस था।

    हूती प्रवक्ताओं ने दावा किया कि यह हमला यमन में सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन की एयरस्ट्राइक के जवाब में किया गया। उनके मुताबिक, मिसाइल और ड्रोन से एयरबेस के लड़ाकू विमानों के हैंगर, रडार सिस्टम, रनवे और गोला-बारूद के भंडार को निशाना बनाया गया तथा वहां भारी नुकसान हुआ।

    2022 के सीजफायर के बाद फिर बढ़ा तनाव

    हूती हमलों के दावों के बीच सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने अपनी संप्रभुता और नागरिकों की सुरक्षा के लिए कड़ा जवाब देने की बात कही है। मेजर जनरल तुर्की अल-मलिकी ने कहा कि सऊदी अरब अपने नागरिकों और बुनियादी ढांचे की रक्षा करने में सक्षम है तथा भविष्य में ऐसे हमलों को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

    यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब वर्ष 2022 में संयुक्त राष्ट्र की कोशिशों से हुआ सीजफायर प्रभावी नहीं रह गया है। दोनों पक्षों के बीच शांति प्रयासों में ठहराव के बीच क्षेत्र में एक बार फिर सैन्य गतिविधियां बढ़ती दिखाई दे रही हैं।

    तेल ढांचे पर भी मंडरा रहा खतरा

    सऊदी अरब की चिंता केवल मिसाइल और ड्रोन हमलों तक सीमित नहीं है। देश के महत्वपूर्ण ऊर्जा ढांचे पर भी हमलों का खतरा बढ़ रहा है। पिछले सप्ताह एक हवाई हमले के कारण सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन का संचालन प्रभावित हुआ था। हालांकि, उस हमले के लिए हूतियों को जिम्मेदार नहीं बताया गया, बल्कि इराक में सक्रिय ईरान समर्थित शिया गुटों पर संदेह जताया गया।

    सऊदी सिविल डिफेंस के अनुसार, छहों क्षेत्रों में जारी आपातकालीन चेतावनी बाद में हटा ली गई और खतरा टल गया। हालांकि, मक्का और जिद्दा जैसे महत्वपूर्ण शहरों तक सुरक्षा अलर्ट पहुंचना इस बात का संकेत है कि यमन से जुड़ा संघर्ष अब व्यापक क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है।

  • पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच हुए मक्का संयुक्त रक्षा समझौते में ईरान को शामिल होने का आधिकारिक प्रस्ताव मिला है।

    पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच हुए मक्का संयुक्त रक्षा समझौते में ईरान को शामिल होने का आधिकारिक प्रस्ताव मिला है।

    नई दिल्ली । अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच पश्चिम एशिया में मुस्लिम देशों के बीच रणनीतिक सहयोग को लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी क्रम में मक्का एग्रीमेंट में ईरान को शामिल करने की संभावना ने क्षेत्रीय राजनीति में नई चर्चा शुरू कर दी है। तेहरान को इस समझौते में शामिल होने के लिए आधिकारिक न्योता दिए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि ईरान ने अभी इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया है और बताया जा रहा है कि इस पर विचार किया जा रहा है।

    मक्का संयुक्त रक्षा समझौते पर पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की पहले ही हस्ताक्षर कर चुके हैं। समझौते का प्रमुख प्रावधान यह है कि तीनों में से किसी एक देश पर हमला होने की स्थिति में इसे सभी संबंधित देशों पर हमला माना जाएगा। ऐसे में यह समझौता क्षेत्रीय सुरक्षा और सामूहिक रक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ईरान के संभावित जुड़ाव से इस व्यवस्था का दायरा और राजनीतिक महत्व दोनों बढ़ सकते हैं।

    ईरानी मीडिया में सामने आई जानकारी के अनुसार, ईरान को मक्का एग्रीमेंट में शामिल होने का प्रस्ताव मिला है। ईरानी संसद से जुड़ी समाचार एजेंसी के प्रमुख मेहदी रहीमी के हवाले से बताया गया कि तेहरान के सामने रखे गए प्रस्ताव पर फिलहाल विचार-विमर्श चल रहा है। अभी तक ईरानी पक्ष की ओर से समझौते में शामिल होने को लेकर अंतिम निर्णय की जानकारी सामने नहीं आई है।

    इस बीच पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर के तेहरान दौरे को लेकर भी क्षेत्रीय स्तर पर नजरें टिकी हुई हैं। रिपोर्टों के मुताबिक उनका ईरान दौरा क्षेत्र में शांति स्थापित करने और मौजूदा तनाव को कम करने की कोशिशों से जुड़ा बताया जा रहा है। ऐसे समय में यह यात्रा महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बना हुआ है और पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति संवेदनशील बनी हुई है।

    मक्का समझौते को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। उन्होंने पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के समझौते में शामिल होने का स्वागत करते हुए इसे साहसिक और ऐतिहासिक कदम बताया। हालांकि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर उनके दावों ने भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया है।

    ईरान के संभावित जुड़ाव का असर केवल रक्षा सहयोग तक सीमित नहीं रहने की संभावना है। यदि तेहरान इस प्रस्ताव को स्वीकार करता है तो पश्चिम एशिया में सुरक्षा समीकरणों पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के साथ ईरान का एक साझा रक्षा ढांचे में आना क्षेत्रीय शक्ति संतुलन के लिहाज से महत्वपूर्ण बदलाव माना जा सकता है।

    वहीं बांग्लादेश ने भी इस घटनाक्रम को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। बांग्लादेश के नवनियुक्त विदेश मामलों के राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने समझौते को लेकर बयान दिया है। साथ ही बांग्लादेशी पक्ष ने पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय संबंधों को बातचीत के माध्यम से मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ने के संकेत दिए हैं। ऐसे में मक्का एग्रीमेंट अब केवल तीन देशों के बीच रक्षा सहयोग का विषय नहीं रह गया है, बल्कि पश्चिम एशिया और मुस्लिम देशों की व्यापक रणनीतिक राजनीति से भी जुड़ता दिखाई दे रहा है।

  • तुर्किए बोला, पाकिस्तान-सऊदी के साथ मक्का रक्षा समझौता ईरान के खिलाफ नहीं, जानें क्या है मकसद

    तुर्किए बोला, पाकिस्तान-सऊदी के साथ मक्का रक्षा समझौता ईरान के खिलाफ नहीं, जानें क्या है मकसद


    नई दिल्ली । 
    पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच पाकिस्तान, तुर्किए और सऊदी अरब के बीच हुए मक्का रक्षा समझौते को लेकर क्षेत्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। ईरान की ओर से इस समझौते पर आपत्ति जताए जाने के बाद तुर्किए ने अब अपना रुख स्पष्ट किया है। तुर्किए के विदेश मंत्री हकान फिदान ने कहा कि यह समझौता किसी भी तरह से ईरान के खिलाफ नहीं है।

    हकान फिदान ने शनिवार, 8 अगस्त 2026 को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि पाकिस्तान, तुर्किए और सऊदी अरब के बीच हाल में हुआ मक्का रक्षा समझौता पूरी तरह रक्षात्मक प्रकृति का है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका उद्देश्य किसी देश पर हमला करना या किसी राष्ट्र को समाप्त करना नहीं है।

    तुर्किए के विदेश मंत्री ने इस मामले में सऊदी अरब की स्थिति को भी सामने रखा। उन्होंने कहा कि रियाद ने ईरान के खिलाफ किसी तरह के हमले या उसे तबाह करने की रणनीति नहीं बनाई है। सऊदी अरब का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में जारी हिंसा को रोकना और महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास स्थिरता कायम करना है।

    हकान फिदान के मुताबिक, सऊदी अरब पहले ही अमेरिका को यह संदेश दे चुका है कि ईरान के खिलाफ सैन्य दबाव बढ़ाने से मौजूदा समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकलेगा। रियाद ने अमेरिका और ईरान के बीच जारी विवाद को बातचीत तथा समझौते के जरिए सुलझाने का समर्थन किया है।

    उन्होंने कहा कि सऊदी अरब की नीति क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ाने के बजाय उसे कम करने की दिशा में है। इसी संदर्भ में मक्का में हुई हालिया बैठक को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां क्षेत्रीय सुरक्षा और मौजूदा परिस्थितियों पर चर्चा हुई थी।

    तुर्किए के विदेश मंत्री ने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की भूमिका का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मक्का में हुई बैठक के दौरान क्राउन प्रिंस ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी थी। उनका कहना था कि सऊदी अरब ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को समाधान के तौर पर नहीं देखता।

    फिदान ने यह भी कहा कि यही संदेश बाद में मोहम्मद बिन सलमान और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई बातचीत के दौरान भी पहुंचाया गया। इससे संकेत मिलता है कि रियाद मौजूदा तनाव के बीच सैन्य विकल्प के बजाय बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों को प्राथमिकता दे रहा है।

    मक्का रक्षा समझौते को लेकर ईरान की चिंता ऐसे समय सामने आई है, जब पश्चिम एशिया में पहले से ही कई स्तरों पर तनाव बना हुआ है। अमेरिका और ईरान के बीच मतभेदों के चलते क्षेत्रीय सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री मार्गों को लेकर भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बनी हुई है।

    स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में शामिल है। इस क्षेत्र में किसी भी तरह की हिंसा या अस्थिरता का असर कच्चे तेल और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है। ऐसे में सऊदी अरब की ओर से क्षेत्रीय स्थिरता पर जोर दिए जाने को व्यापक आर्थिक और रणनीतिक संदर्भ में भी देखा जा रहा है।

    तुर्किए की ओर से मक्का रक्षा समझौते को रक्षात्मक बताने का उद्देश्य इस समझौते को लेकर पैदा हुई आशंकाओं को स्पष्ट करना है। हकान फिदान के बयान के अनुसार, समझौते का घोषित उद्देश्य किसी विशेष देश के खिलाफ सैन्य अभियान चलाना नहीं, बल्कि संबंधित देशों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना है।

    मौजूदा परिस्थितियों में तुर्किए का यह स्पष्टीकरण ईरान के साथ बढ़ते तनाव को सीमित रखने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। क्षेत्रीय देशों के लिए अब चुनौती सुरक्षा सहयोग और कूटनीतिक संवाद के बीच संतुलन बनाए रखने की है।

  • काबा की सुरक्षा के लिए सऊदी हाई अलर्ट पर, मक्का-मदीना में तैनात हुआ एयर डिफेंस सिस्टम

    काबा की सुरक्षा के लिए सऊदी हाई अलर्ट पर, मक्का-मदीना में तैनात हुआ एयर डिफेंस सिस्टम



    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान-इजरायल-अमेरिका के बीच जारी संघर्ष के बीच सऊदी अरब ने हज 2026 को लेकर सुरक्षा व्यवस्था अभूतपूर्व स्तर तक बढ़ा दी है। मक्का, मदीना और आसपास के पवित्र स्थलों की सुरक्षा के लिए एडवांस एयर डिफेंस सिस्टम, स्पेशल सैन्य यूनिट्स और इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीमें तैनात कर दी गई हैं। सऊदी रक्षा मंत्रालय ने साफ किया है कि हज के दौरान किसी भी मिसाइल, ड्रोन या हवाई खतरे को तुरंत मार गिराया जाएगा।

    सऊदी रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी वीडियो में पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम और काउंटर ड्रोन सिस्टम ‘स्काईगार्ड’ की तैनाती दिखाई गई है। अधिकारियों के मुताबिक एयर डिफेंस फोर्स को हाई अलर्ट पर रखा गया है और मक्का-मदीना के एयरस्पेस पर 24 घंटे कड़ी निगरानी की जा रही है। सऊदी सरकार नहीं चाहती कि क्षेत्रीय तनाव का असर हज यात्रियों की सुरक्षा पर पड़े।

    दरअसल 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद पूरे खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ गया था। इसके जवाब में ईरान ने सऊदी अरब, यूएई और कतर की दिशा में ड्रोन और मिसाइल हमले किए थे। हालांकि अब अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते की चर्चा चल रही है, लेकिन खतरा पूरी तरह टला नहीं माना जा रहा।

    तनावपूर्ण माहौल के बावजूद इस बार हज यात्रियों की संख्या में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सऊदी हज पासपोर्ट फोर्स के कमांडर सालेह अल-मुरब्बा के अनुसार अब तक 15 लाख 18 हजार से ज्यादा विदेशी जायरीन सऊदी पहुंच चुके हैं, जो पिछले साल के मुकाबले अधिक हैं। माना जा रहा है कि अगले कुछ दिनों में यह आंकड़ा और बढ़ सकता है। हज की मुख्य रस्में 25 मई से 29 मई के बीच पूरी होंगी।

    सुरक्षा के साथ-साथ भीषण गर्मी भी इस बार बड़ी चुनौती बनी हुई है। मक्का और आसपास के इलाकों में तापमान 47 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने का अनुमान है। इसे देखते हुए सऊदी स्वास्थ्य मंत्रालय ने जायरीनों को छाता इस्तेमाल करने, ज्यादा पानी पीने और तेज धूप से बचने की सलाह दी है। मेडिकल टीमों, एंबुलेंस और अस्थायी क्लीनिकों को भी अलर्ट मोड पर रखा गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।