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  • व्हाइट हाउस डिनर में प्रेस की आजादी पर जोर ट्रंप से कहा लोकतंत्र बचाना है तो सवालों से नहीं भागिए

    व्हाइट हाउस डिनर में प्रेस की आजादी पर जोर ट्रंप से कहा लोकतंत्र बचाना है तो सवालों से नहीं भागिए


    नई दिल्ली। व्हाइट हाउस कॉरेस्पोंडेंट्स एसोसिएशन के वार्षिक डिनर में इस बार सबसे प्रमुख मुद्दा प्रेस की स्वतंत्रता और लोकतंत्र की मजबूती रहा। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मौजूदगी में एसोसिएशन के नेताओं ने स्पष्ट संदेश दिया कि लोकतंत्र तभी मजबूत रह सकता है जब मीडिया बिना किसी डर और दबाव के अपना काम करता रहे। कार्यक्रम के दौरान कहा गया कि पत्रकारों से असहमति या उनकी आलोचना लोकतांत्रिक व्यवस्था का सामान्य हिस्सा है लेकिन स्वतंत्र प्रेस को कमजोर करने का कोई भी प्रयास संविधान की भावना और लोकतांत्रिक व्यवस्था दोनों के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है।

    एसोसिएशन की निवर्तमान अध्यक्ष वेइजिया जियांग ने अपने संबोधन में कहा कि अमेरिकी इतिहास में राष्ट्रपति और पत्रकारों के रिश्ते हमेशा आसान नहीं रहे हैं। कई बार तीखी बहस और असहमति देखने को मिली है लेकिन इन सबके बावजूद दोनों की जिम्मेदारी जनता के हित में काम करना है। उन्होंने कहा कि पत्रकार सवाल पूछते हैं और सरकार जवाब देती है। इसी संवाद से लोकतंत्र मजबूत होता है और जनता तक सही जानकारी पहुंचती है। उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप को संबोधित करते हुए कहा कि सवाल पूछना और जवाब देना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का अनिवार्य हिस्सा है तथा इसे किसी टकराव के रूप में नहीं बल्कि जवाबदेही के रूप में देखा जाना चाहिए।

    जियांग ने राष्ट्रपति ट्रंप के कारोबारी अनुभव का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि सौदे की भाषा में बात की जाए तो फर्स्ट अमेंडमेंट कोई ऐसा विषय नहीं है जिस पर समझौता किया जा सके। यह अमेरिकी लोकतंत्र की स्थायी और संवैधानिक व्यवस्था है जिसे किसी भी परिस्थिति में कमजोर नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि प्रेस की आलोचना और प्रेस को कमजोर करने की कोशिश के बीच बहुत बड़ा अंतर है। आलोचना व्यवस्था को बेहतर बनाती है जबकि स्वतंत्र मीडिया को कमजोर करने की कोशिश लोकतंत्र की बुनियाद पर चोट करती है।

    इस वर्ष का समारोह विशेष महत्व रखता था क्योंकि निर्धारित समय पर आयोजित होने वाला यह कार्यक्रम अप्रैल में राष्ट्रपति ट्रंप पर हुए हमले के बाद स्थगित कर दिया गया था। अपने संबोधन में जियांग ने उस घटना को याद करते हुए कहा कि हिंसा ने पत्रकारों का मनोबल तोड़ने के बजाय उनकी जिम्मेदारी और संकल्प को और मजबूत किया। उन्होंने बताया कि संकट की उस घड़ी में भी रिपोर्टर फोटोग्राफर और टीवी क्रू लगातार घटनास्थल से तथ्य जुटाने और लोगों तक सही जानकारी पहुंचाने में लगे रहे। उनका कहना था कि यही स्वतंत्र पत्रकारिता की असली पहचान है।

    उन्होंने उस कठिन समय के अनुभव साझा करते हुए बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप और उनकी टीम लगातार हालात की समीक्षा कर रही थी और जनता तक सही सूचना पहुंचाने के सर्वोत्तम तरीके पर चर्चा कर रही थी। जियांग ने कहा कि यही जिम्मेदारी पत्रकारों की भी होती है और यही कारण है कि सरकार और मीडिया दोनों का अंतिम उद्देश्य नागरिकों तक विश्वसनीय और सटीक जानकारी पहुंचाना होना चाहिए।

    कार्यक्रम में एसोसिएशन की नवनिर्वाचित अध्यक्ष जैकी हेनरिक ने भी स्वतंत्र और निष्पक्ष पत्रकारिता के प्रति संगठन की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि संस्था बिना किसी डर और पक्षपात के तथ्यों की खोज और सत्य को सामने लाने का कार्य जारी रखेगी। उन्होंने कार्यक्रम में शामिल होने के लिए राष्ट्रपति ट्रंप का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह परंपरा लोकतंत्र में स्वतंत्र मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका को सम्मान देने का अवसर है।

    समारोह के दौरान अप्रैल में हुए हमले में बहादुरी दिखाने वाले सीक्रेट सर्विस अधिकारी विक्टर गोंजालेज को सम्मानित किया गया। इसके साथ ही उत्कृष्ट रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों फोटोग्राफरों और मीडिया संस्थानों को भी सम्मान प्रदान किया गया। पूरे कार्यक्रम का केंद्रीय संदेश यही रहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए स्वतंत्र प्रेस केवल एक अधिकार नहीं बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण आधारशिला है।

  • फोकट सवाल पर बवाल: पत्रकार से बदसलूकी पर घिरे विजयवर्गीय, जीतू पटवारी ने मांगा इस्तीफा

    फोकट सवाल पर बवाल: पत्रकार से बदसलूकी पर घिरे विजयवर्गीय, जीतू पटवारी ने मांगा इस्तीफा



    इंदौर। इंदौर में जहरीले पानी से हुई मौतों के मामले ने अब सियासी तूफान खड़ा कर दिया है। इस मुद्दे पर सवाल पूछने वाले एक पत्रकार से मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की बदसलूकी और अपशब्दों का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इसे इंदौर को शर्मसार करने वाला बताते हुए विजयवर्गीय से तत्काल इस्तीफा लेने की मांग की है।

    पटवारी ने कहा कि इस पूरे मामले में सरकार पूरी तरह नाकाम साबित हुई है।

    जो जिम्मेदारी सरकार की थी, वह मीडिया ने निभाई। उन्होंने पत्रकारों का आभार जताते हुए कहा कि मंत्री ने मुफ्त इलाज के दावे किए, लेकिन जब उसी पर एक पत्रकार ने सवाल पूछा तो उसे गालियां दी गईं। कांग्रेस उस पत्रकार के साथ खड़ी है और उसके सम्मान में कोई कमी नहीं आने देगी।

    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार की लापरवाही के कारण मासूम बच्चों समेत कई लोगों की जान गई है। उन्होंने कहा कि पहले 25 बच्चों की मौत हुई, अब 13 और लोगों की जान चली गई, लेकिन आज तक किसी दोषी को सजा नहीं मिली।

    पटवारी ने भाजपा सरकार को हत्यारी सरकार बताते हुए कहा कि जिस इंदौर को जनता ने स्वच्छता का तमगा दिलाया, उसी शहर की जनता को जहर मिला पानी पिलाया गया।

    कांग्रेस ने इस मामले की जांच के लिए दो पूर्व मंत्रियों के नेतृत्व में एक टीम गठित की है। पटवारी ने कहा कि जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी। कांग्रेस की मांग है कि जिम्मेदार अधिकारियों और लोगों पर गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज हो, पीड़ित परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा मिले और घायलों को बेहतर व निशुल्क इलाज उपलब्ध कराया जाए।

    इस बीच कांग्रेस के पूर्व सांसद उदित राज ने भी भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार में गलती मानने की बजाय चोरी और सीनाजोरी की जाती है। हर घटना का ठीकरा विपक्ष या पुराने नेताओं पर फोड़ दिया जाता है। उन्होंने देशभर में बढ़ती हिंसा और कथित घोटालों का जिक्र करते हुए सरकार को कटघरे में खड़ा किया।

    घटना के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बुधवार शाम इंदौर पहुंचे और अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती मरीजों से मुलाकात की। अधिकारियों के साथ बैठक में उन्होंने कहा कि ऐसी कष्टदायक स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए व्यापक इंतजाम किए जाएं। मुख्यमंत्री ने रिपोर्ट आने के बाद दोषियों पर सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया।

    दरअसल, बैठक के बाद मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से जब एक रिपोर्टर ने अस्पताल में भर्ती मरीजों के इलाज खर्च के रिफंड को लेकर सवाल किया, तो मंत्री ने कहा, फोकट सवाल मत पूछो। रिपोर्टर के विरोध करने पर विजयवर्गीय ने आपा खोते हुए अपशब्द कह दिए। हालांकि बाद में उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने शब्दों को लेकर खेद भी जताया, लेकिन तब तक यह मामला सियासी और सामाजिक बहस का बड़ा मुद्दा बन चुका था।