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  • सेंसेक्स-निफ्टी मामूली गिरावट के साथ बंद, स्मॉलकैप शेयरों में जोरदार तेजी से बाजार में लौटी रौनक

    सेंसेक्स-निफ्टी मामूली गिरावट के साथ बंद, स्मॉलकैप शेयरों में जोरदार तेजी से बाजार में लौटी रौनक

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को कारोबार के अंत में सेंसेक्स और निफ्टी लगभग सपाट बंद हुए। प्रमुख सूचकांकों में मामूली गिरावट के बावजूद मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में जोरदार खरीदारी देखने को मिली। निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 2.69 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप 50 में 2.67 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। सेक्टरों में मीडिया इंडेक्स सबसे आगे रहा, जबकि बैंकिंग शेयरों पर दबाव बना रहा। अक्टूबर सीरीज के वायदा एवं विकल्प कारोबार की मासिक एक्सपायरी के दिन बाजार में अलग-अलग क्षेत्रों का प्रदर्शन मिला-जुला रहा।

    सेंसेक्स मंगलवार को 8.08 अंक यानी 0.01 प्रतिशत की गिरावट के साथ 73,598.67 पर बंद हुआ। दिन के कारोबार में इसने 73,762.98 का ऊपरी और 73,179.41 का निचला स्तर छुआ। दूसरी ओर, निफ्टी 3.45 अंक यानी 0.02 प्रतिशत फिसलकर 22,749.75 पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान निफ्टी 22,636.85 से 22,829.75 के दायरे में रहा। दोनों प्रमुख सूचकांकों में सीमित उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों की दिलचस्पी छोटे और मझोले शेयरों में अधिक दिखाई दी।

    स्मॉलकैप और मिडकैप शेयरों में खरीदारी बाजार की प्रमुख विशेषता रही। निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 2.69 प्रतिशत, निफ्टी स्मॉलकैप 50 में 2.67 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप 250 में 2.19 प्रतिशत की तेजी आई। निफ्टी नेक्स्ट 50 में 1.30 प्रतिशत और निफ्टी 500 में 0.58 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। निफ्टी मिडकैप 100 भी 1.01 प्रतिशत चढ़ा, जबकि निफ्टी मिडकैप 50 में 0.90 प्रतिशत की तेजी रही। इससे संकेत मिला कि सेंसेक्स और निफ्टी की सुस्ती के बावजूद व्यापक बाजार में खरीदारी का रुझान मजबूत रहा।

    शेयर बाजार की मजबूती का असर कारोबार की व्यापकता में भी नजर आया। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर कारोबार करने वाले 3,665 शेयरों में से 2,455 बढ़त के साथ बंद हुए, जबकि 1,103 शेयरों में गिरावट रही। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज पर कुल 4,547 शेयरों में कारोबार हुआ। इनमें 2,936 शेयर चढ़े और 1,383 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए। इस आंकड़े से पता चलता है कि प्रमुख सूचकांकों के लगभग स्थिर रहने के बावजूद बाजार में बढ़त वाले शेयरों की संख्या अधिक रही।

    सेक्टरवार प्रदर्शन में निफ्टी मीडिया इंडेक्स 3.52 प्रतिशत उछलकर सबसे आगे रहा। निफ्टी मिडस्मॉल हेल्थकेयर में 2.78 प्रतिशत, निफ्टी रियल्टी में 1.91 प्रतिशत, निफ्टी फार्मा में 1.89 प्रतिशत और निफ्टी हेल्थकेयर इंडेक्स में 1.65 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। निफ्टी ऑटो 1.48 प्रतिशत, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 1.20 प्रतिशत और निफ्टी एफएमसीजी 0.74 प्रतिशत बढ़कर बंद हुए। निफ्टी मेटल में भी 0.63 प्रतिशत की बढ़त रही।

    इसके विपरीत, बैंकिंग और कुछ अन्य क्षेत्रों में बिकवाली देखने को मिली। निफ्टी प्राइवेट बैंक 0.73 प्रतिशत और निफ्टी बैंक 0.72 प्रतिशत गिर गया। निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज में 0.62 प्रतिशत और निफ्टी आईटी में 0.26 प्रतिशत की कमजोरी रही। निफ्टी सीमेंट 1.80 प्रतिशत टूटकर कमजोर प्रदर्शन करने वाले क्षेत्रों में शामिल रहा।

    बाजार में उतार-चढ़ाव का संकेत देने वाला इंडिया वीआईएक्स 4.74 प्रतिशत गिरकर 16.35 पर आ गया। वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स का भाव उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 115.90 डॉलर प्रति बैरल रहा। कुल मिलाकर, मंगलवार को प्रमुख सूचकांकों में खास तेजी नहीं दिखी, लेकिन स्मॉलकैप, मिडकैप और मीडिया शेयरों की बढ़त ने बाजार के व्यापक रुझान को मजबूती दी।

  • मीडिया विवाद के बीच व्हाइट हाउस का बड़ा कदम, शुरू हुआ 24 घंटे का ‘ट्रंप टीवी’, जानिए क्या होगा प्रसारण

    मीडिया विवाद के बीच व्हाइट हाउस का बड़ा कदम, शुरू हुआ 24 घंटे का ‘ट्रंप टीवी’, जानिए क्या होगा प्रसारण

    नई दिल्ली ।अमेरिका में व्हाइट हाउस और प्रमुख मीडिया संस्थानों के बीच बढ़े विवाद के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने 24 घंटे चलने वाली अपनी टीवी सेवा शुरू कर दी है। इस सेवा का नाम ‘ट्रंप टीवी’ रखा गया है। इसके जरिए राष्ट्रपति के भाषण, प्रशासन की घोषणाएं और सरकार से जुड़े प्रमुख फैसलों की जानकारी लोगों तक पहुंचाने की तैयारी की गई है।

    यह कदम उस समय सामने आया है, जब कई प्रमुख टीवी चैनलों के पत्रकारों की व्हाइट हाउस में प्रवेश संबंधी अनुमति को लेकर विवाद अदालत तक पहुंच गया। संबंधित मीडिया संस्थानों ने संयुक्त रूप से प्रशासन के खिलाफ मुकदमा दायर किया है। उनका कहना है कि केवल खबरों की सामग्री पसंद नहीं आने के आधार पर पत्रकारों की पहुंच रोकना संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर सवाल है।

    विवाद की शुरुआत पत्रकारों के प्रवेश बैज निष्क्रिय किए जाने के बाद हुई। इसके बाद संबंधित संस्थानों के संवाददाताओं को व्हाइट हाउस परिसर में प्रवेश से रोक दिया गया। मीडिया संस्थानों का आरोप है कि प्रशासन ने बिना उचित सूचना और प्रक्रिया के उनके पत्रकारों की पहुंच सीमित की।

    मीडिया संस्थानों की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि राष्ट्रपति या किसी सरकारी अधिकारी को केवल खबरों की सामग्री से असहमति के कारण प्रेस के संवैधानिक अधिकारों और स्वतंत्रता से जुड़े हितों को खत्म करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने पत्रकारों की व्हाइट हाउस तक पहुंच से जुड़े प्रतिबंधों को चुनौती दी है।

    इसी बीच प्रमुख टीवी नेटवर्कों के बीच राष्ट्रपति के कार्यक्रमों की साझा कवरेज को लेकर भी बदलाव देखने को मिला। सोमवार को सीएनएन को उस प्रेस पूल व्यवस्था से हटा दिया गया, जिसके तहत प्रमुख समाचार नेटवर्क व्हाइट हाउस की महत्वपूर्ण गतिविधियों की कवरेज आपस में साझा करते हैं।

    विवाद के बीच व्हाइट हाउस ने अपना 24 घंटे चलने वाला टीवी प्लेटफॉर्म शुरू किया। इसका उद्देश्य प्रशासन की महत्वपूर्ण सूचनाओं, घोषणाओं और फैसलों को सीधे दर्शकों तक पहुंचाना बताया गया है। इस सेवा पर राष्ट्रपति ट्रंप के भाषण और प्रशासन से संबंधित वीडियो सामग्री दिखाई जाएगी।

    व्हाइट हाउस की ओर से कहा गया कि इस माध्यम से ऐसी महत्वपूर्ण जानकारियां और घोषणाएं लोगों तक पहुंचेंगी, जो पहले उनकी नजर से छूट जाती थीं। सेवा को प्रशासन की गतिविधियों और राष्ट्रपति के कार्यक्रमों की जानकारी सीधे उपलब्ध कराने वाले मंच के रूप में पेश किया गया है।

    दूसरी ओर, प्रतिबंधित मीडिया संस्थानों का कहना है कि सरकारी परिसर में पत्रकारों की पहुंच को केवल खबरों की सामग्री के आधार पर सीमित नहीं किया जा सकता। उनका तर्क है कि प्रेस की स्वतंत्रता से जुड़े संवैधानिक अधिकारों की रक्षा जरूरी है और किसी भी प्रतिबंध के लिए उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए।

    राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा है कि व्हाइट हाउस स्वतंत्र प्रेस को निशाना नहीं बना रहा, बल्कि उनके अनुसार गलत खबरों के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है। उन्होंने ऐसी खबरों को अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया और कहा कि इसे रोका जाना चाहिए।

    व्हाइट हाउस का तर्क है कि संविधान में मीडिया के अधिकारों का सम्मान किया गया है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि हर मीडिया संस्थान को व्हाइट हाउस, ब्रीफिंग रूम या राष्ट्रपति के प्रेस पूल तक स्वतः पहुंच का अधिकार मिल जाता है।

    अब इस पूरे विवाद में अदालत की सुनवाई महत्वपूर्ण होगी। एक तरफ मीडिया संस्थान पत्रकारों की पहुंच और प्रेस स्वतंत्रता से जुड़े अधिकारों का सवाल उठा रहे हैं, वहीं प्रशासन अपने फैसले को उचित बता रहा है। इसी बीच ‘ट्रंप टीवी’ की शुरुआत ने व्हाइट हाउस और अमेरिकी मीडिया के बीच चल रहे विवाद को एक नया रूप दे दिया है।

  • मीडिया जगत की सबसे बड़ी डील का रास्ता साफ…. पैरामाउंट-वार्नर मर्जर को चुनौती देने वाले राज्यों से हुआ समझौता

    मीडिया जगत की सबसे बड़ी डील का रास्ता साफ…. पैरामाउंट-वार्नर मर्जर को चुनौती देने वाले राज्यों से हुआ समझौता


    शिकागो।
    स्काइडांस (Skydance) के स्वामित्व वाली पैरामाउंट (Paramount) ने वार्नर ब्रदर्स डिस्कवरी (Warner Bros. Discovery) को खरीदने की डील के खिलाफ मुकदमा करने वाले अमेरिकी राज्यों के साथ समझौता कर लिया है। इससे 81 अरब डॉलर की इस बड़ी मीडिया डील के आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो गया है। मामले की जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति ने एसोसिएटेड प्रेस को यह जानकारी दी। उस व्यक्ति को सार्वजनिक रूप से बोलने की अनुमति नहीं थी, इसलिए उसने नाम न बताने की शर्त पर जानकारी दी।


    किन राज्यों ने इस डील को अदालत में चुनौती दी थी?

    कैलिफोर्निया और न्यूयॉर्क जैसे बड़े मनोरंजन बाजार वाले राज्यों समेत कई राज्यों ने जुलाई में इस विलय को रोकने के लिए मुकदमा दायर किया था। उनका आरोप था कि पैरामाउंट और वार्नर का एक साथ आना प्रतिस्पर्धा को खत्म कर सकता है और अमेरिकी उपभोक्ताओं के पास विकल्प कम हो सकते हैं। खास चिंता सिनेमाघरों में फिल्म देखने वालों और केबल टीवी ग्राहकों को लेकर जताई गई थी।

    पैरामाउंट और वार्नर ब्रदर्स डिस्कवरी की प्रस्तावित डील की इक्विटी वैल्यू 81 अरब डॉलर बताई गई थी। राज्यों के गठबंधन ने जुलाई में इस डील को रोकने के लिए मुकदमा किया था। राज्यों का आरोप था कि विलय से मनोरंजन क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा घट सकती है। मुकदमे की सुनवाई अगले साल मार्च में पूरी एंटीट्रस्ट ट्रायल के रूप में शुरू होने वाली थी। पैरामाउंट ने आरोपों को निराधार बताया था और डील को अगले साल तक टालने पर सहमति दी थी।

    पैरामाउंट का कहना था कि दुनिया भर में जरूरी नियामकीय मंजूरियां मिल चुकी हैं और राज्यों का मुकदमा अंतिम बड़ी बाधा है। बाद के समझौते में घरेलू फिल्म निर्माण बढ़ाने और समाचार संचालन की संपादकीय स्वतंत्रता की निगरानी जैसी शर्तें शामिल की गई हैं।


    यह डील इतनी बड़ी क्यों मानी जा रही है?

    पैरामाउंट और वार्नर ब्रदर्स डिस्कवरी के जुड़ने से हॉलीवुड की दो बड़ी मीडिया कंपनियों के फिल्म, टेलीविजन और स्ट्रीमिंग कारोबार एक साथ आ जाएंगे। इसी वजह से राज्यों ने प्रतिस्पर्धा पर असर को लेकर चिंता जताई थी। पैरामाउंट का कहना था कि उसने दुनिया भर में जरूरी नियामकीय मंजूरियां हासिल कर ली हैं और राज्यों का मुकदमा डील पूरी करने की दिशा में आखिरी बड़ी रुकावट था।


    क्या मुकदमा यहीं खत्म हो गया और डील को मंजूरी मिल गई?

    समझौते से डील के रास्ते की बड़ी कानूनी अड़चन दूर हुई है, लेकिन समझौते को अंतिम रूप देने के लिए अदालत की मंजूरी अभी जरूरी है। कैलिफोर्निया के अटॉर्नी जनरल रॉब बोंटा ने भी साफ कहा कि समझौता इस विलय के समर्थन का वोट नहीं है। समझौते में पैरामाउंट की ओर से अमेरिकी फिल्म निर्माण बढ़ाने और समाचार संस्थानों की संपादकीय स्वतंत्रता की निगरानी जैसे प्रावधान शामिल हैं।


    विरोध करने वालों की सबसे बड़ी चिंता क्या?

    डील की आलोचना करने वालों ने मीडिया और मनोरंजन उद्योग में और ज्यादा एकीकरण को लेकर चिंता जताई है। एसोसिएटेड प्रेस की मूल रिपोर्ट में अमेरिकन इकोनॉमिक लिबर्टीज प्रोजेक्ट के वरिष्ठ सलाहकार और पूर्व एफटीसी आयुक्त अल्वारो बेदोया ने कहा कि इस तरह के एकीकरण के बाद छंटनी और छोटे कारोबारों के अनुबंध खोने का खतरा हो सकता है। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि उपभोक्ताओं के केबल बिल और सिनेमाघर टिकट महंगे हो सकते हैं। ये उनकी आलोचनात्मक टिप्पणियां हैं, न कि इस रिपोर्ट में स्थापित तथ्य।

  • सेंसेक्स 74,902 और निफ्टी 23,477 पर बंद, पश्चिम एशिया तनाव के बीच भारतीय बाजार ने गिरावट का सिलसिला तोड़ा

    सेंसेक्स 74,902 और निफ्टी 23,477 पर बंद, पश्चिम एशिया तनाव के बीच भारतीय बाजार ने गिरावट का सिलसिला तोड़ा

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में लगातार तीन कारोबारी सत्रों से जारी गिरावट का सिलसिला गुरुवार को थम गया। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच घरेलू शेयर बाजार बढ़त के साथ हरे निशान में बंद हुआ। बीएसई सेंसेक्स 138.36 अंक यानी 0.19 प्रतिशत की बढ़त के साथ 74,902.59 पर बंद हुआ। वहीं एनएसई निफ्टी 50 में 46.30 अंक यानी 0.20 प्रतिशत की तेजी रही और यह 23,477.80 के स्तर पर बंद हुआ।

    कारोबार के दौरान बाजार में उतार-चढ़ाव भी देखने को मिला। सेंसेक्स अपने पिछले बंद स्तर 74,764.23 से 21.69 अंक नीचे 74,742.54 पर खुला। इसके बाद दिन में यह 146.73 अंक यानी 0.19 प्रतिशत बढ़कर 74,910.96 के उच्चतम स्तर तक पहुंचा। कारोबार के दौरान सेंसेक्स 165.75 अंक यानी 0.22 प्रतिशत की गिरावट के साथ 74,598.47 के निचले स्तर तक भी गया।

    निफ्टी 50 ने पिछले बंद स्तर 23,431.50 की तुलना में 15 अंक की बढ़त के साथ 23,446.60 पर कारोबार की शुरुआत की। दिन के दौरान इंडेक्स 63.45 अंक यानी 0.27 प्रतिशत चढ़कर 23,494.95 के उच्चतम स्तर तक पहुंचा। वहीं एक समय यह 51.40 अंक यानी 0.21 प्रतिशत गिरकर 23,380.10 के इंट्रा-डे निचले स्तर पर भी पहुंचा।

    व्यापक बाजार में हालांकि दबाव बना रहा। निफ्टी मिडकैप और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स क्रमशः 0.38 प्रतिशत और 0.07 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए। यानी प्रमुख सूचकांकों में तेजी के बावजूद मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में कमजोरी देखने को मिली।

    सेक्टरवार कारोबार में निफ्टी मीडिया, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज, निफ्टी पीएसयू बैंक और निफ्टी प्राइवेट बैंक का प्रदर्शन बेहतर रहा। इसके विपरीत निफ्टी मेटल, निफ्टी फार्मा, निफ्टी ऑटो, निफ्टी हेल्थकेयर और निफ्टी एफएमसीजी में दबाव देखा गया।

    निफ्टी 50 में एचसीएल टेक, हिंडाल्को और टाटा स्टील सबसे ज्यादा नुकसान उठाने वाले शेयरों में रहे। दूसरी ओर एचडीएफसी लाइफ, पावरग्रिड, ओएनजीसी, भारतीय एयरटेल और टेक महिंद्रा के शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी दर्ज की गई।

    गुरुवार के कारोबार के दौरान बाजार के लिए पश्चिम एशिया का तनाव भी महत्वपूर्ण कारक बना रहा। मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष के बीच कच्चे तेल की कीमतें 102 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रहीं। तेल की कीमतों में यह मजबूती भारत के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का कच्चा तेल आयात करता है।

    ईरान की ओर से कहा गया कि छह महीने से चल रहे संघर्ष के दौरान जहाजों पर हुए सबसे बड़े हमलों में अमेरिका ने पांच ईरानी तेल टैंकरों को डुबो दिया। इसके बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास 10 जहाजों पर हमला करने की बात कही। इस घटनाक्रम के बीच कच्चे तेल की कीमतों पर असर बना रहा।

    ऊंची कच्चे तेल की कीमतों से भारत का आयात बिल बढ़ सकता है। इसके साथ ही इससे मुद्रास्फीति पर दबाव बढ़ने और आर्थिक विकास तथा कंपनियों की लाभप्रदता पर नकारात्मक असर पड़ने की आशंका रहती है। गुरुवार के सत्र में इन वैश्विक परिस्थितियों के बीच भी भारतीय बाजार ने तीन सत्रों की लगातार गिरावट के बाद कारोबार बढ़त के साथ समाप्त किया।

  • अभिनेता ऋतिक रोशन और सबा आजाद के रिश्ते को लेकर सोशल मीडिया पर तेज हुईं कई तरह की अटकलें

    अभिनेता ऋतिक रोशन और सबा आजाद के रिश्ते को लेकर सोशल मीडिया पर तेज हुईं कई तरह की अटकलें

    नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेता ऋतिक रोशन और अभिनेत्री व संगीतकार सबा आजाद के व्यक्तिगत संबंधों को लेकर सोशल मीडिया पर विभिन्न प्रकार की चर्चाएं और अटकलें तेजी से फैल रही हैं। पिछले कुछ समय से दोनों कलाकारों के रिश्ते में बदलाव को लेकर इंटरनेट पर कई तरह के दावे किए जा रहे हैं। इन चर्चाओं की मुख्य वजह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सामने आई कुछ कथित तस्वीरें और प्रोफाइल बताई जा रही हैं, जिन्हें लेकर नेटिजन्स तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं व्यक्त कर रहे हैं।

    सोशल मीडिया पर एक नेटवर्किंग ऐप से जुड़े प्रोफाइल की तस्वीरें प्रसारित हो रही हैं, जिसमें अभिनेता ऋतिक रोशन की तस्वीर और उनके पेशे का विवरण दर्ज है। इन वायरल तस्वीरों के आधार पर कई लोग यह अनुमान लगा रहे हैं कि अभिनेता और सबा आजाद के बीच सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। हालांकि, प्रसारित की जा रही इन जानकारियों और तस्वीरों की सत्यता तथा प्रामाणिकता की स्वतंत्र रूप से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।

    ऑनलाइन मंचों पर इन खबरों के सामने आने के बाद प्रशंसकों और इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की ओर से मिला-जुला रुख देखने को मिल रहा है। जहां कुछ लोग इन अफवाहों के आधार पर तरह-तरह के कयास लगा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अभिनेता के कई प्रशंसकों ने उनका बचाव किया है। प्रशंसकों का कहना है कि किसी भी वायरल सामग्री के आधार पर निष्कर्ष निकालना अनुचित है और संभव है कि यह किसी फर्जी प्रोफाइल या पुरानी जानकारी का परिणाम हो।

    गौरतलब है कि ऋतिक रोशन और सबा आजाद के बीच संबंधों की खबरें पहली बार वर्ष 2021 के अंत में सामने आई थीं। इसके बाद वर्ष 2022 की शुरुआत में दोनों को कई सार्वजनिक स्थलों और कार्यक्रमों में एक साथ देखा गया, जिसके बाद उनके रिश्ते को लेकर आधिकारिक रूप से बातें सामने आईं। दोनों कलाकारों को अक्सर विभिन्न फिल्म समारोहों, पारिवारिक आयोजनों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में साथ देखा जाता रहा है, जहां उनकी बॉन्डिंग की काफी सराहना भी की जाती थी।

    ऋतिक रोशन के व्यक्तिगत जीवन की बात करें तो उन्होंने वर्ष 2000 में सुजैन खान से विवाह किया था। हालांकि, वर्ष 2014 में दोनों ने आपसी सहमति से एक-दूसरे से अलग होने का निर्णय लिया था। इसके बाद से ही ऋतिक रोशन अपनी व्यक्तिगत और व्यावसायिक जिंदगी को लेकर अक्सर चर्चा में बने रहते हैं। वहीं दूसरी तरफ सबा आजाद भी फिल्म उद्योग का एक जाना-माना नाम हैं, जो अभिनय के साथ-साथ संगीत और रंगमंच के क्षेत्र में भी सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं।

    वर्तमान में प्रसारित हो रही इन तमाम अटकलों और सोशल मीडिया दावों पर ऋतिक रोशन या सबा आजाद की ओर से कोई आधिकारिक टिप्पणी या स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। दोनों ही कलाकारों ने इस पूरे विषय पर चुप्पी साध रखी है। फिल्म उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि सेलिब्रिटीज के व्यक्तिगत जीवन को लेकर अक्सर इस तरह की निराधार अफवाहें उड़ती रहती हैं और जब तक संबंधित पक्षों की ओर से कोई बयान नहीं आता, तब तक इन खबरों को महज एक अटकलबाजी ही माना जाना चाहिए।

  • कंगना रनौत ने बयान पर दी सफाई, बोलीं- अशोभनीय हरकतों का किया था विरोध, मीडिया पर लगाया बयान तोड़-मरोड़कर पेश करने का आरोप

    कंगना रनौत ने बयान पर दी सफाई, बोलीं- अशोभनीय हरकतों का किया था विरोध, मीडिया पर लगाया बयान तोड़-मरोड़कर पेश करने का आरोप

    नई दिल्ली । अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत के छात्र विरोध प्रदर्शन को लेकर दिए गए हालिया बयान पर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। बढ़ते विवाद के बीच कंगना ने एक नया वीडियो जारी कर अपने बयान पर विस्तृत सफाई दी है। उन्होंने कहा कि उनके शब्दों का गलत अर्थ निकाला गया और उनके पूरे बयान को दिखाने के बजाय केवल चुनिंदा हिस्सों को प्रचारित किया गया। उनका कहना है कि उन्होंने किसी वर्ग विशेष को निशाना नहीं बनाया, बल्कि सार्वजनिक स्थानों पर अशोभनीय व्यवहार का विरोध किया था।

    कंगना ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा किए गए वीडियो में कहा कि उन्होंने सड़क पर बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की मौजूदगी में होने वाली अभद्र भाषा और अश्लील हरकतों को सामान्य मानने से इनकार किया था। उनके अनुसार ऐसे व्यवहार को सामाजिक स्वीकृति नहीं दी जा सकती और समाज को इस तरह की प्रवृत्तियों के प्रति सजग रहने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वस्थ सामाजिक वातावरण बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।

    अभिनेत्री ने आरोप लगाया कि उनके बयान के बाद मीडिया के एक वर्ग ने उन्हें लगातार निशाना बनाया है। उन्होंने कहा कि उनके सकारात्मक विचारों और अन्य मुद्दों पर दिए गए बयानों को नजरअंदाज किया जा रहा है, जबकि विवादित हिस्से को बार-बार प्रसारित किया जा रहा है। उनके मुताबिक टीआरपी, लाइक्स और व्यूज की होड़ में उनके पूरे संदेश को सामने नहीं रखा गया, जिससे लोगों के बीच भ्रम की स्थिति बनी।

    कंगना ने यह भी कहा कि उन्होंने हाल के दिनों में देश की वैज्ञानिक उपलब्धियों की सराहना की है और युवाओं, विशेष रूप से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों तथा देश को आगे बढ़ाने वाली नई पीढ़ी की प्रशंसा भी की है। उनका दावा है कि इन सकारात्मक बयानों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया और केवल विवाद से जुड़े अंशों को प्रमुखता मिली।

    वीडियो में उन्होंने अपने आलोचकों की प्रतिक्रियाओं पर भी टिप्पणी की। कंगना ने कहा कि कुछ लोग अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की गलत व्याख्या कर रहे हैं। उनके अनुसार व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अर्थ यह नहीं है कि सार्वजनिक स्थानों पर ऐसा व्यवहार किया जाए जिससे दूसरे लोगों की भावनाएं, आस्था या सम्मान प्रभावित हों। उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक समाज में अधिकारों के साथ जिम्मेदारियां भी जुड़ी होती हैं और सार्वजनिक जीवन में मर्यादा बनाए रखना आवश्यक है।

    उन्होंने आगे कहा कि समाज में अनुशासन और शालीनता का पालन प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। उनके मुताबिक यदि कोई व्यक्ति सामाजिक या पेशेवर जीवन में मर्यादाओं का पालन नहीं करता तो उसे इसके परिणाम भी भुगतने पड़ सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जीवन का उद्देश्य स्वयं को बेहतर बनाना और सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ना होना चाहिए, न कि ऐसे आचरण को बढ़ावा देना जिससे सामाजिक व्यवस्था प्रभावित हो।

    वीडियो के अंत में कंगना रनौत ने सभी देशवासियों को गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने लोगों से अपने गुरुओं के बताए मार्ग पर चलने, जीवन में अनुशासन अपनाने और निरंतर बेहतर इंसान बनने का संदेश दिया। उनके इस नए वीडियो के सामने आने के बाद भी उनके बयान को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा जारी है, जबकि समर्थक और आलोचक दोनों अपने-अपने पक्ष पर कायम दिखाई दे रहे हैं।

  • CJP प्रदर्शन पर पाकिस्तान में छिड़ी बहस, भारत की कवरेज और PoK पर चुप्पी को लेकर पाकिस्तानी मीडिया पर सवाल

    CJP प्रदर्शन पर पाकिस्तान में छिड़ी बहस, भारत की कवरेज और PoK पर चुप्पी को लेकर पाकिस्तानी मीडिया पर सवाल

    नई दिल्ली । भारत में छात्रों के विरोध प्रदर्शनों को लेकर पाकिस्तान के मीडिया में लगातार कवरेज देखने को मिल रही है। इस बीच पाकिस्तान की वरिष्ठ पत्रकार कुर्रत-उल-ऐन शिराज़ी ने अपने देश के मीडिया की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि भारत की घटनाओं को प्रमुखता से दिखाया जा रहा है, जबकि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में चल रही गतिविधियों और वहां के हालात को पर्याप्त स्थान नहीं मिल रहा है। उनके इस बयान के बाद पाकिस्तान के मीडिया कवरेज को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।

    कुर्रत-उल-ऐन शिराज़ी ने कहा कि समाचार माध्यमों का दायित्व केवल पड़ोसी देशों की घटनाओं को दिखाना नहीं, बल्कि अपने देश और उससे जुड़े क्षेत्रों की महत्वपूर्ण घटनाओं को भी समान प्राथमिकता देना है। उन्होंने सवाल उठाया कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में कई महीनों से सामने आ रहे घटनाक्रमों और स्थानीय लोगों से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय मीडिया में अपेक्षित स्थान क्यों नहीं मिल रहा है। उनके अनुसार संतुलित पत्रकारिता के लिए सभी महत्वपूर्ण विषयों पर समान रूप से ध्यान देना आवश्यक है।

    दूसरी ओर, पाकिस्तान के कई प्रमुख समाचार माध्यमों ने भारत में छात्रों के विरोध प्रदर्शनों और उससे जुड़े राजनीतिक घटनाक्रमों को विस्तार से प्रकाशित और प्रसारित किया है। विभिन्न रिपोर्टों में प्रदर्शन, विपक्ष की प्रतिक्रिया और राजनीतिक माहौल का उल्लेख किया गया है। कई विश्लेषणों में यह भी कहा गया कि छात्र आंदोलन ने देश की राजनीतिक चर्चा को नई दिशा दी है और विभिन्न दलों की सक्रियता बढ़ी है।

    कुछ अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों ने भी भारत में जारी विरोध प्रदर्शनों को प्रमुखता से प्रकाशित किया है। इन रिपोर्टों में प्रदर्शन, राजनीतिक प्रतिक्रियाओं और प्रशासनिक कदमों का उल्लेख किया गया है। साथ ही यह भी बताया गया कि शिक्षा व्यवस्था और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर देशभर में बहस तेज हुई है। हालांकि अलग-अलग मीडिया संस्थानों ने घटनाक्रम को अपने-अपने दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया है।

    इधर पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर को लेकर भी समय-समय पर विभिन्न दावे और रिपोर्ट सामने आती रही हैं। स्थानीय परिस्थितियों, प्रशासनिक व्यवस्थाओं और जनभावनाओं को लेकर अलग-अलग पक्ष अपनी राय रखते रहे हैं। इसी संदर्भ में कुर्रत-उल-ऐन शिराज़ी ने कहा कि यदि मीडिया अंतरराष्ट्रीय घटनाओं को विस्तार से दिखा सकता है तो उसे अपने क्षेत्र से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को भी समान गंभीरता के साथ सामने लाना चाहिए।

    विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में मीडिया की भूमिका निष्पक्ष और संतुलित सूचना उपलब्ध कराने की होती है। जब किसी एक विषय को अत्यधिक महत्व दिया जाता है और दूसरे महत्वपूर्ण विषय अपेक्षाकृत कम दिखाई देते हैं, तो मीडिया की प्राथमिकताओं पर सवाल उठना स्वाभाविक माना जाता है। यही कारण है कि पाकिस्तान में भी इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज होती दिखाई दे रही है।

    भारत में जारी छात्र प्रदर्शनों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी निगरानी की जा रही है और विभिन्न विदेशी मीडिया संस्थान अपने-अपने दृष्टिकोण से घटनाक्रम का विश्लेषण कर रहे हैं। वहीं पाकिस्तान के भीतर मीडिया कवरेज को लेकर उठे सवाल यह संकेत देते हैं कि समाचार प्रस्तुति और संपादकीय प्राथमिकताओं पर बहस केवल एक देश तक सीमित नहीं है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया इन विषयों को किस प्रकार प्रस्तुत करते हैं तथा दोनों देशों से जुड़े घटनाक्रमों को किस संतुलन के साथ स्थान दिया जाता है।

  • शशि थरूर ने ठुकराया वीर सावरकर अवॉर्ड, आयोजकों का दावा: कांग्रेस के डर से पीछे हटे सांसद

    शशि थरूर ने ठुकराया वीर सावरकर अवॉर्ड, आयोजकों का दावा: कांग्रेस के डर से पीछे हटे सांसद


    नई दिल्ली: कांग्रेस सांसद शशि थरूर एक बार फिर विवादों में आ गए हैं। इस बार वजह है वीर सावरकर अवॉर्ड। हाल ही में पुरस्कार आयोजकों ने इस वर्ष के विजेताओं की सूची में थरूर का नाम शामिल किया, लेकिन सांसद ने यह अवॉर्ड स्वीकार करने से साफ इंकार कर दिया।

    थरूर का पक्ष

    शशि थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि उन्हें मीडिया रिपोर्ट्स के माध्यम से ही पता चला कि उन्हें अवॉर्ड के लिए चुना गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें इसके बारे में कोई पूर्व जानकारी नहीं थी और न ही उन्होंने इसे स्वीकार किया था। थरूर ने इसे आयोजकों की गैर-जिम्मेदाराना कार्रवाई बताया।

    उन्होंने कहा, “पुरस्कार की प्रकृति, इसे देने वाले संगठन या अन्य विवरणों की जानकारी न होने के कारण, मेरे शामिल होने या पुरस्कार स्वीकार करने का सवाल ही नहीं उठता।”

    आयोजकों का पलटवार

    वहीं, पुरस्कार आयोजक हाई रेंज रूरल डेवलपमेंट सोसाइटी (HRDS) इंडिया ने थरूर के आरोपों को खारिज कर दिया। HRDS के सचिव अजी कृष्णन ने कहा कि थरूर को काफी पहले ही सूचित किया गया था। उन्होंने दावा किया कि संगठन और जूरी के चेयरमैन ने थरूर से उनके आवास पर मुलाकात कर उन्हें समारोह में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया था।

    कृष्णन ने कहा कि थरूर ने उस समय अन्य अवॉर्ड विजेताओं की सूची भी मांगी और उन्हें वह सूची दे दी गई। उन्होंने सीधे आरोप लगाया कि शायद थरूर कांग्रेस की प्रतिक्रिया के डर से अवॉर्ड लेने से पीछे हटे।

    राजनीतिक बहस

    सावरकर पर अपनी बेबाक टिप्पणियों के लिए जाने जाने वाले थरूर का यह कदम अब राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। कांग्रेस पार्टी, जो ऐतिहासिक रूप से सावरकर की विचारधारा की आलोचक रही है, के एक सांसद का पुरस्कार ठुकराना पार्टी लाइन के अनुरूप है।

    हालांकि आयोजकों के दावे ने विवाद को नया आयाम दिया है। अब यह मामला केवल पुरस्कार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक बहस और मीडिया में बड़े पैमाने पर चर्चा का केंद्र बन गया है।