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  • NEET-PG 2026 परीक्षा देशभर में संपन्न! 2.65 लाख अभ्यर्थियों ने दी परीक्षा, जयपुर के 2445 उम्मीदवारों को फिर मिलेगा मौका

    NEET-PG 2026 परीक्षा देशभर में संपन्न! 2.65 लाख अभ्यर्थियों ने दी परीक्षा, जयपुर के 2445 उम्मीदवारों को फिर मिलेगा मौका


    नई दिल्ली। देशभर में रविवार को नीट-पीजी 2026 की परीक्षा निर्धारित व्यवस्था के तहत संपन्न हो गई। मेडिकल पीजी पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए आयोजित इस महत्वपूर्ण परीक्षा में बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया। परीक्षा के लिए कुल 2 लाख 73 हजार 096 अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया था जिनमें से 2 लाख 65 हजार 980 उम्मीदवार परीक्षा में शामिल हुए। इनमें करीब 2 लाख 63 हजार 535 अभ्यर्थियों की परीक्षा सफलतापूर्वक पूरी हो गई। परीक्षा का आयोजन देश के 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 339 शहरों में बनाए गए 1111 परीक्षा केंद्रों पर किया गया। हालांकि जयपुर के दो परीक्षा केंद्रों पर तकनीकी समस्या के कारण 2445 अभ्यर्थियों की परीक्षा पूरी नहीं हो सकी। इन सभी प्रभावित उम्मीदवारों के लिए अब 5 सितंबर 2026 को दोबारा परीक्षा आयोजित की जाएगी।

    केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक नीट-पीजी परीक्षा को निष्पक्ष सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से कराने के लिए व्यापक सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था लागू की गई थी। देशभर के परीक्षा केंद्रों की गतिविधियों पर लगातार रियल टाइम निगरानी रखी गई। परीक्षा संचालन की निगरानी और मूल्यांकन के लिए 2527 संकाय सदस्यों को स्वतंत्र मूल्यांकनकर्ता के रूप में तैनात किया गया था। इसके साथ ही डीन निदेशक चिकित्सा अधीक्षक और वरिष्ठ प्रोफेसरों सहित 700 से अधिक वरिष्ठ संकाय सदस्यों को फ्लाइंग स्क्वायड में शामिल किया गया था। इस व्यवस्था का उद्देश्य परीक्षा के दौरान किसी भी तरह की गड़बड़ी को तत्काल पकड़ना और परीक्षा की विश्वसनीयता बनाए रखना था।

    राष्ट्रीय चिकित्सा विज्ञान परीक्षा बोर्ड के अनुसार जयपुर के आईऑन डिजिटल जोन आईडीजेड सीतापुरा स्थित परीक्षा केंद्र संख्या 41682 और 41683 पर आंतरिक बिजली आपूर्ति से जुड़ी तकनीकी समस्या सामने आई। बिजली व्यवस्था में आई इस परेशानी के चलते इन दोनों केंद्रों पर परीक्षा दे रहे 2445 अभ्यर्थियों की परीक्षा पूरी नहीं हो पाई। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि यह समस्या परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी टीसीएस लिमिटेड की आंतरिक बिजली आपूर्ति व्यवस्था से संबंधित थी। प्रभावित उम्मीदवारों को किसी तरह का नुकसान न हो इसलिए बोर्ड ने उन्हें दोबारा परीक्षा देने का समान अवसर देने का फैसला किया है।

    जयपुर के दोनों प्रभावित केंद्रों के सभी 2445 अभ्यर्थियों के लिए पुनर्परीक्षा 5 सितंबर 2026 शनिवार को दोपहर 3 बजे जयपुर में आयोजित की जाएगी। पुनर्परीक्षा के केंद्र और अन्य आवश्यक दिशा निर्देश संबंधित अभ्यर्थियों को अलग से उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे प्रभावित उम्मीदवारों को अपनी परीक्षा पूरी करने का अवसर मिलेगा और तकनीकी समस्या के कारण उनके मेडिकल करियर पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।

    परीक्षा के दौरान सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए देशभर में 16 क्षेत्रीय कमान केंद्र सक्रिय किए गए थे। सभी परीक्षा केंद्रों को लाइव सीसीटीवी निगरानी से जोड़ा गया था जिसकी निगरानी द्वारका स्थित राष्ट्रीय चिकित्सा विज्ञान परीक्षा बोर्ड के मुख्यालय में बनाए गए कमान केंद्र से की गई। रियल टाइम मॉनिटरिंग के लिए बोर्ड और टीसीएस के 190 कर्मचारियों की विशेष टीम भी तैनात रही। मुख्यालय में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड और टीसीएस समेत संबंधित संस्थाओं के अधिकारी पूरे दिन परीक्षा की स्थिति पर नजर रखते रहे।

    नकल और दूसरे उम्मीदवार की जगह परीक्षा देने जैसी संभावित गड़बड़ियों को रोकने के लिए अभ्यर्थियों का आधार आधारित प्रमाणीकरण भी किया गया। विभिन्न सरकारी एजेंसियों ने भी परीक्षा के सुरक्षित संचालन में सहयोग दिया। बोर्ड ने कहा कि देशभर के 1111 केंद्रों और 339 शहरों में परीक्षा का सफल आयोजन परीक्षा अधिकारियों चिकित्सा संस्थानों संकाय सदस्यों सुरक्षा एजेंसियों तकनीकी टीमों और अन्य संबंधित संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय का परिणाम रहा। कुल मिलाकर नीट-पीजी 2026 की परीक्षा व्यापक सुरक्षा निगरानी और तकनीकी व्यवस्था के बीच संपन्न हुई जबकि जयपुर के प्रभावित 2445 अभ्यर्थियों को अब 5 सितंबर को परीक्षा पूरी करने का अवसर मिलेगा।

  • स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने दिया प्रभावी, पारदर्शी एवं समयबद्ध क्रियान्वयन का निर्देश

    स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने दिया प्रभावी, पारदर्शी एवं समयबद्ध क्रियान्वयन का निर्देश


    भोपाल : उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण, अधोसंरचना विकास, चिकित्सकीय मैनपावर की उपलब्धता और चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा हुई। उप मुख्यमंत्री ने सभी योजनाओं का प्रभावी, पारदर्शी और समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

    बैठक में अधोसंरचना विकास, चिकित्सकीय सहायक और चिकित्सकीय मैनपावर की नियुक्ति, स्वास्थ्य संस्थानों के उन्नयन से जुड़े प्रस्तावों की गहन समीक्षा की गई। उप मुख्यमंत्री ने इन प्रस्तावों को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र आगे बढ़ाने और रिमोट लोकेशन में स्थित मेडिकल कॉलेजों में शिक्षण स्टाफ की नियुक्ति को प्रोत्साहित करने हेतु अतिरिक्त इंसेंटिव प्रस्ताव को कैबिनेट अनुमोदन के लिए शीघ्र भेजने के निर्देश दिए उन्होंने कहा कि दूरस्थ क्षेत्रों में योग्य शिक्षण स्टाफ की उपलब्धता गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। बैठक में विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर औपचारिकताओं की पूर्ति प्राथमिकता से करने का निर्देश भी दिया गया ताकि योजनाओं के क्रियान्वयन में विलंब न हो।

    सीएम केयर्स के अंतर्गत टर्शरी केयर स्वास्थ्य सुविधाओं में अत्याधुनिक उपकरण और आवश्यक मैनपावर की उपलब्धता सुनिश्चित करने के प्रस्तावों को प्राथमिकता से अग्रेषित करने के निर्देश भी उप मुख्यमंत्री ने दिए। उन्होंने कहा कि गंभीर रोगों के उपचार हेतु टर्शरी केयर सेवाओं को और अधिक मजबूत किया जाना आवश्यक है, ताकि नागरिकों को उच्च स्तरीय चिकित्सा सेवाएं प्रदेश के हर क्षेत्र में उपलब्ध हो सकें।

    उप मुख्यमंत्री ने दमोह, छतरपुर और बुधनी मेडिकल कॉलेजों के संचालन के लिए आवश्यक शिक्षण स्टाफ की भर्ती प्रक्रिया को निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए और आगामी शैक्षणिक सत्र में संचालन शुरू करने के लिए प्राथमिकता से सभी औपचारिकताओं को पूरा करने का निर्देश भी दिया। बैठक में केंद्रीय बजट प्रावधानों और उपलब्ध संसाधनों के समयबद्ध एवं प्रभावी उपयोग पर भी चर्चा हुई।बैठक में प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा श्री संदीप यादव, आयुक्त श्री धनराज एस, एमडी एमपीपीएचएससीएल श्री मयंक अग्रवाल, एमडी एनएचएम डॉ. सलोनी सिडाना, संचालक चिकित्सा शिक्षा डॉ. अरुणा कुमार सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

  • जबलपुर मेडिकल कॉलेज में रैगिंग पर कड़ा प्रहार 8 MBBS छात्र सस्पेंड..

    जबलपुर मेडिकल कॉलेज में रैगिंग पर कड़ा प्रहार 8 MBBS छात्र सस्पेंड..


    जबलपुर/मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज में रैगिंग के एक मामले में कॉलेज प्रशासन ने सख्त कार्रवाई करते हुए अनुशासन का स्पष्ट संदेश दिया है। जांच में दोषी पाए गए एमबीबीएस थर्ड ईयर के आठ सीनियर छात्रों को छह महीने के लिए निलंबित कर दिया गया है। इसके साथ ही प्रत्येक छात्र पर दस हजार रुपये का आर्थिक जुर्माना भी लगाया गया है। यह पूरी कार्रवाई राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग के एंटी रैगिंग नियमों के तहत की गई है।

    यह मामला मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल नंबर एक से जुड़ा हुआ है। करीब एक सप्ताह पहले एक जूनियर एमबीबीएस छात्र ने डीन कार्यालय में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में छात्र ने बताया था कि सीनियर छात्रों ने देर रात उसे हॉस्टल में कमरे के बाहर खड़ा रखा और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया। छात्र ने इस व्यवहार को रैगिंग की श्रेणी में बताते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की थी शिकायत मिलते ही कॉलेज प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए एंटी रैगिंग कमेटी को जांच के निर्देश दिए। कमेटी ने पीड़ित छात्र का बयान दर्ज किया और आरोपित छात्रों से भी अलग अलग पूछताछ की गई। जांच के दौरान उपलब्ध तथ्यों साक्ष्यों और बयानों के आधार पर एमबीबीएस थर्ड ईयर के आठ छात्रों को दोषी पाया गया।

    जांच रिपोर्ट के आधार पर कॉलेज प्रबंधन ने अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए सभी दोषी छात्रों को छह महीने के लिए कक्षाओं से निलंबित कर दिया। इसके साथ ही उन्हें हॉस्टल से भी निष्कासित कर दिया गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि निलंबन की अवधि के दौरान ये छात्र किसी भी शैक्षणिक गतिविधि परीक्षा या प्रशिक्षण में शामिल नहीं हो सकेंगे।

    कॉलेज प्रशासन के अनुसार यह कार्रवाई राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग नई दिल्ली द्वारा 18 नवंबर 2021 को जारी गजट अधिसूचना के प्रावधानों के अनुसार की गई है। एनएमसी के नियमों में रैगिंग को गंभीर अपराध माना गया है और इसमें निलंबन जुर्माना तथा आवश्यकता पड़ने पर पुलिस कार्रवाई तक का प्रावधान है।मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ नवनीत सक्सेना ने कहा कि रैगिंग जैसी घटनाएं मेडिकल शिक्षा की गरिमा अनुशासन और मानवीय मूल्यों के खिलाफ हैं। उन्होंने कहा कि जूनियर छात्र की शिकायत पर निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की गई और उसी के आधार पर नियमों के तहत कार्रवाई की गई है। डीन ने साफ शब्दों में कहा कि कॉलेज परिसर या हॉस्टल में रैगिंग को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

    इस कार्रवाई के बाद कॉलेज प्रशासन ने सभी छात्रों को एंटी रैगिंग नियमों का सख्ती से पालन करने की चेतावनी दी है। साथ ही जूनियर छात्रों से अपील की गई है कि यदि उन्हें किसी भी प्रकार की रैगिंग या मानसिक दबाव का सामना करना पड़े तो बिना डर के प्रशासन या एंटी रैगिंग हेल्पलाइन से संपर्क करें।

  • एमपी सरकार ने 1 रुपये में 25 एकड़ जमीन दी अब खुलेंगे चार मेडिकल कॉलेज 2027 से एमबीबीएस प्रवेश

    एमपी सरकार ने 1 रुपये में 25 एकड़ जमीन दी अब खुलेंगे चार मेडिकल कॉलेज 2027 से एमबीबीएस प्रवेश


    भोपाल । मध्यप्रदेश में अब देश में पहली बार सार्वजनिक-निजी भागीदारी पीपीपी मॉडल पर चार नए मेडिकल कॉलेज खुलने जा रहे हैं। इन कॉलेजों में 2027-28 से एमबीबीएस कोर्स में प्रवेश शुरू होगा। यह योजना राज्य में चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव लेकर आएगी क्योंकि इन कॉलेजों के जरिए 2035 तक डॉक्टरों की बड़ी संख्या तैयार हो सकेगी।इन मेडिकल कॉलेजों में हर कॉलेज में कम से कम 100 सीटें होंगी हालांकि सरकार ने प्रवेश 150 सीटों से शुरू करने का प्रस्ताव रखा है। भविष्य में कॉलेजों की सीटों की संख्या बढ़कर 250 तक हो सकती है। इस प्रकार इन कॉलेजों से हर साल बड़ी संख्या में डॉक्टर निकलकर चिकित्सा सेवा के क्षेत्र में योगदान देंगे।

    सरकार की शर्त

    इस योजना में सरकार ने खास शर्त रखी थी कि निवेशक को खुद कॉलेज बनाना होगा। हालांकि पीपीपी मॉडल को लेकर पहले कई बार निविदाएं आमंत्रित की गईं लेकिन पहले चार फिर दस और बाद में बारह जिलों में मेडिकल कॉलेज खोलने के लिए कोई निवेशक सामने नहीं आया। यह परियोजना सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण थी लेकिन अंततः सरकार ने फैसला किया कि वह निवेशकों को 1 रुपये में 25 एकड़ ज़मीन देगी। इस निर्णय के बाद ही निवेशक मेडिकल कॉलेज स्थापित करने के लिए सामने आए। इस निर्णय के बाद राज्य सरकार ने चार मेडिकल कॉलेज खोलने के लिए निवेशकों से प्रस्ताव स्वीकार किए और इस परियोजना की शुरुआत की। इन कॉलेजों के खुलने से मध्यप्रदेश में चिकित्सा शिक्षा का स्तर बढ़ेगा और स्थानीय युवाओं को चिकित्सा क्षेत्र में करियर बनाने का एक नया अवसर मिलेगा।

    राज्य में चिकित्सा शिक्षा का सुधार

    पीपीपी मॉडल के तहत इन कॉलेजों के खुलने से न केवल स्वास्थ्यसेवाओं में सुधार होगा बल्कि राज्य में शिक्षा के क्षेत्र में भी एक नया मोड़ आएगा। यह कदम राज्य में डॉक्टरों की कमी को दूर करने और भविष्य में अधिक चिकित्सा सेवाएं प्रदान करने के लिए महत्वपूर्ण है। इसके अलावा इन कॉलेजों में स्नातक एमबीबीएस के अलावा पोस्ट ग्रेजुएट और सुपर स्पेशलिटी कोर्स भी शुरू किए जा सकते हैं।