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  • हार्ट ट्रीटमेंट में नई उपलब्धि बुजुर्ग मरीज को लगाया 25 साल तक चलने वाला आधुनिक हार्ट वाल्व जटिल प्रक्रिया रही सफल

    हार्ट ट्रीटमेंट में नई उपलब्धि बुजुर्ग मरीज को लगाया 25 साल तक चलने वाला आधुनिक हार्ट वाल्व जटिल प्रक्रिया रही सफल


    नई दिल्ली। हृदय रोगों के उपचार में आधुनिक चिकित्सा तकनीक ने एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। टेंडरपाम हॉस्पिटल के कार्डियोलॉजी विभाग ने 78 वर्षीय एक बुजुर्ग मरीज पर अत्यंत जटिल हृदय प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा करते हुए उन्हें नई जिंदगी देने का दावा किया है। मरीज को गंभीर हृदय संबंधी समस्याओं के साथ एक ऐसा अत्याधुनिक हार्ट वाल्व लगाया गया है जिसकी अनुमानित कार्यक्षमता लगभग 25 वर्षों तक बनी रह सकती है।

    अस्पताल के अनुसार मरीज मधुमेह कोरोनरी आर्टरी डिजीज सौम्य प्रोस्टेट वृद्धि पेसमेकर और गंभीर एओर्टिक स्टेनोसिस जैसी कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित थे। इन बीमारियों के कारण पारंपरिक ओपन हार्ट सर्जरी का जोखिम काफी अधिक था। ऐसे में विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने कम जोखिम वाली आधुनिक तकनीक अपनाते हुए एक ही सत्र में ट्रांसकैथेटर एओर्टिक वाल्व इम्प्लांटेशन और जटिल कोरोनरी एंजियोप्लास्टी करने का निर्णय लिया।

    प्रक्रिया के दौरान मरीज में एडवर्ड सैपियन अल्ट्रा रेसिलिया नाम का अत्याधुनिक ट्रांसकैथेटर हार्ट वाल्व प्रत्यारोपित किया गया। इस वाल्व की सबसे बड़ी विशेषता इसका विशेष रेसिलिया टिश्यू है जो सामान्य बायोलॉजिकल वाल्व की तुलना में अधिक समय तक टिकाऊ माना जाता है। उपलब्ध वैज्ञानिक अध्ययनों के आधार पर इसकी अनुमानित आयु लगभग 25 वर्ष बताई जाती है। इसी कारण इसे सरल भाषा में पूरी जिंदगी के लिए एक वाल्व के रूप में भी प्रचारित किया जा रहा है।

    इलाज के दौरान की गई कोरोनरी एंजियोग्राफी में मरीज की हृदय धमनियों में गंभीर कैल्सीफाइड ब्लॉकेज का पता चला। यह स्थिति सामान्य एंजियोप्लास्टी से उपचार के लिए काफी चुनौतीपूर्ण मानी जाती है। डॉक्टरों ने आधुनिक ऑर्बिटल एथेरेक्टॉमी तकनीक की मदद से धमनियों में जमा कैल्शियम को हटाया और इंट्रावास्कुलर लिथोट्रिप्सी तकनीक का उपयोग कर ब्लॉकेज को खोला। इसके बाद मुख्य धमनी एलएडी में दो स्टेंट सफलतापूर्वक लगाए गए।

    अस्पताल के अनुसार एक ही सत्र में दोनों जटिल प्रक्रियाएं पूरी करने से मरीज का कुल जोखिम कम हुआ और उपचार अधिक प्रभावी रहा। ऑपरेशन के बाद मरीज की स्थिति स्थिर रही तथा उन्हें केवल तीन दिन बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी तकनीकों के कारण अब ऐसे बुजुर्ग और उच्च जोखिम वाले मरीजों का भी सफल उपचार संभव हो रहा है जिनके लिए पारंपरिक ओपन हार्ट सर्जरी सुरक्षित विकल्प नहीं मानी जाती। अस्पताल ने इस उपलब्धि को उत्तर प्रदेश में अपनी तरह की शुरुआती जटिल प्रक्रियाओं में से एक बताया है।

    हालांकि चिकित्सा विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि किसी भी हार्ट वाल्व की वास्तविक आयु मरीज की स्वास्थ्य स्थिति जीवनशैली संक्रमण के जोखिम और नियमित चिकित्सकीय देखभाल जैसे कई कारकों पर निर्भर करती है। इसलिए हर मरीज के लिए उपचार और परिणाम अलग हो सकते हैं।

  • कैंसर से पीड़ित मरीजों के लिए एक खुशखबरी आई है। भारतीय दवाई नियामक बोर्ड ने कैंसर के लिए 7 मिनट टेंकेट्रिक इंजेक्शन को मंजूरी दे दी है।

    कैंसर से पीड़ित मरीजों के लिए एक खुशखबरी आई है। भारतीय दवाई नियामक बोर्ड ने कैंसर के लिए 7 मिनट टेंकेट्रिक इंजेक्शन को मंजूरी दे दी है।


    नई दिल्ली । भारत में हर वर्ष हजारों की संख्या में लोग कैंसर की चपेट में आकर मौत के मुंह में समा जाते हैं। लाखों भारतीय हर समय इस जानलेवा बीमारी से जूझ रहे हैं। इतना ही नहीं जितनी भी रिपोर्ट्स इस बीमारी को लेकर सामने आती हैं, उसमें भारतीयों के ऊपर सबसे बड़ा खतरा कैंसर को ही बताया जाता है। कैंसर को लेकर कई लोगों की आम धारणा है कि बीमारी से पहले इंसान इसके इलाज से ज्यादा कमजोर हो जाता है। अब इस परेशानी को दूर करने के लिए कैंसर की एक नई ‘7 मिनट कैंसर इंजेक्शन’ को मंजूरी मिली है। इससे कैंसर का इलाज काफी आसान और सरल होने की संभावना है।
    मेडीकल के क्षेत्र की बड़ी कंपनी रोश की कैंसर दवा के नए टेंकेट्रिक इंजेक्शन को भारत दवा नियामक संस्था CDSCO ने मंजूरी दे दी है। मुंबई के कैंसर विशेषज्ञ डॉक्टर रमन नारंग के मुताबिक सामान्य तौर पर इम्यूनोथेरेपी में दवाईयां नसों के जरिए दी जाती है, जिसमें 30 मिनट से एक घंटे का वक्त लगता है। लेकिन इस नए इंजेक्शन में सिर्फ सात मिनट का वक्त लगता है। दूसरी बात इसे ड्रिप के जरिए नहीं बल्कि त्वचा के जरिए भी दिया जा सकता है।
    कैसे काम करती है नया 7 मिनट टेकेंट्रिक इंजेक्शन
    सामान्य रूप से कैंसर का इलाज कीमोथैरेपी के जरिए किया जाता है। इस इलाज प्रक्रिया में थैरेपी सीधा कैंसर कोशिकाओं पर हमला करती हैं। इसकी वजह से शरीर की जो स्वस्थ कोशिकाओं होती हैं, वह भी प्रभावित होती हैं, जिसकी वजह से मरीजों को बाल झड़ना, कमजोरी, उल्टी और थकान जैसी समस्या महसूस होती है। कीमोथैरपी की प्रक्रिया में इंसान बहुत ही ज्यादा कमजोर भी हो जाता है।
    विशेषज्ञों के मुताबिक नई 7 मिनट टेकेंट्रिक इंजेक्शन की इम्यूनोथेरेपी अलग तरीके से काम करती है। डॉक्टर्स के मुताबिक यह इंजेक्शन शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाकर कैंसर कोशिकाओं से लड़ने में मदद करती है। इस इंजेक्शन की दवा शरीर में मौजूद कैंसर कोशिकाओं को छिपने नहीं देती बल्कि प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत करके सीधा उस पर हमला करती है। दूसरी बात कैंसर की दवाई को सामान्य तौर पर नसों के जरिए शरीर में भेजा जाता है, लेकिन इस इंजेक्शन को त्वचा के नीचे से सीधा प्रवेशित कराया जा सकता है। इसकी वजह से यह जल्दी काम करती है।
    इस मामले के जानकार लोगों के मुताबिक, 7 मिनट इंजेक्शन भारत में बढ़ते कैंसर मरीजों के लिए एक चमत्कार साबित हो सकता है। इससे लंबी दूरी से अस्पताल आने वाले मरीजों को राहत मिलेगी, दूसरी तरफ अस्पताल में भी उनको कम समय लगेगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत में हर साल 14 से 15 लाख नए कैंसर मरीज सामने आते हैं। अगर यह दवाई कारगर सिद्द होती है तो इससे इन मरीजों के लिए इलाज थोड़ा आसान साबित होगा।
    दवाई अपने साथ कुछ समस्याएं लेकर भी आई
    हर दवाई के अपने कुछ साइड इफेक्ट भी होते हैं। डॉक्टर्स के मुताबिक यह इंजेक्शन हर कैंसर मरीज के लिए उपयुक्त नहीं है। इसके अलावा इसके कुछ साइड इफेक्ट जैसे- बुखार, कमजोरी, सांस लेने में दिक्कत, स्किन की दिक्कत या फेंफड़ों में सूजन भी आ सकती है। ऐसे में किसी भी तरह के इलाज के लिए डॉक्टर्स की निगरानी बहुत जरूरी है।
    भले ही कंपनी और डॉक्टर्स इस इलाज को कैंसर मरीजों के लिए चमत्कार बता रहे हैं। लेकिन इसकी सबसे बड़ी परेशानी इसकी कीमत है। रिपोर्ट्स के मुताबिक एक कैंसर मरीज को अपना इलाज पूरा करवाने के लिए इस इंजेक्शन के कम से कम 6 डोज की जरूरत होती है। वर्तमान में इस इंजेक्शन के एक डोज की कीमत 3.7 लाख रुपए है। ऐसे में अगर कोई पूरा इलाज लेता है, तो केवल दवाई का खर्च ही 22 लाख रुपए के आसपास पहुंच जाएगा। भारत जैसे मध्यम आय वाली जनता के लिए यह रकम बहुत ज्यादा है।
    भले ही कंपनी और रिपोर्ट्स इस इलाज को बेहतर बता रही हों। लेकिन डॉक्टर्स ने इसको लेकर अपना दूसरा नजरिया भी रखा है। डॉक्टर्स का कहना है कि यह कोई जादुई इलाज नहीं है। लेकिन वर्तमान में कैंसर मरीजों को लंबे इलाज और परेशानी का सामना करना पड़ता है, उससे राहत देने के लिए यह पर्याप्त है।