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  • ‘छोटी सर्जरी’ बनी जिंदगी का संकट: ऑपरेशन के बाद कोमा में इंजीनियर, अस्पताल पर गंभीर सवाल

    ‘छोटी सर्जरी’ बनी जिंदगी का संकट: ऑपरेशन के बाद कोमा में इंजीनियर, अस्पताल पर गंभीर सवाल


    मध्यप्रदेश। मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले से एक गंभीर मेडिकल मामला सामने आया है, जहां एक मामूली चोट के इलाज के दौरान 36 वर्षीय सिविल इंजीनियर विवेक तिरपुड़े कोमा में चले गए। घटना के बाद परिवार ने अस्पताल पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है, जबकि अस्पताल प्रबंधन ने मरीज के ड्रग एडिक्ट होने का दावा किया है।

    जानकारी के अनुसार, 10 फरवरी को स्कूटी स्लिप होने के बाद विवेक को हाथ की उंगली में चोट आई थी। स्थानीय अस्पताल में जांच के बाद उनके हाथ की एक हड्डी में फ्रैक्चर पाया गया, जिसके बाद डॉक्टरों ने प्लास्टर कर दिया। परिजनों के मुताबिक, इसके बाद डॉक्टरों ने तेजी से रिकवरी के लिए एक छोटी सर्जरी की सलाह दी और भरोसा दिलाया कि प्रक्रिया में कोई जोखिम नहीं है।

    परिवार का आरोप है कि सर्जरी के दौरान एनेस्थीसिया प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ी हुई, जिसके चलते सांस की नली की ट्यूब गलत स्थान पर चली गई और ब्रेन तक ऑक्सीजन की आपूर्ति बाधित हो गई। इसी घटना के बाद मरीज की हालत बिगड़ती गई और वह कोमा में चले गए। पिछले लगभग 100 दिनों से विवेक बेहोशी की हालत में हैं।

    परिजन लगातार अलग-अलग अस्पतालों में इलाज के लिए भटक रहे हैं और अब तक इलाज पर लगभग 50 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। परिवार का कहना है कि उन्हें शुरुआत में बताया गया था कि यह एक सामान्य और सुरक्षित प्रक्रिया है, लेकिन परिणाम बेहद गंभीर निकले।

    पीड़ित परिवार ने यह भी आरोप लगाया है कि अस्पताल में इमरजेंसी सुविधाओं और विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी थी, जिसके बावजूद सर्जरी की गई। मामले में पुलिस में शिकायत दर्ज की गई है और मेडिकल काउंसिल भी जांच कर रही है।

    वहीं अस्पताल प्रबंधन ने सभी आरोपों को खारिज किया है। डायरेक्टर का कहना है कि मरीज ड्रग एडिक्ट था और शराब का सेवन करता था, जिसके कारण एनेस्थीसिया का असर सही तरह से नहीं हुआ। अस्पताल ने लापरवाही के आरोपों से इनकार किया है।

    इस मामले में डॉक्टरों की अलग-अलग सफाई भी सामने आई है, जिसमें दावा किया गया है कि सर्जरी शुरू होने से पहले ही मरीज की स्थिति बिगड़ गई थी।

    फिलहाल यह मामला जांच के दायरे में है और मेडिकल लापरवाही के आरोपों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। परिजन न्याय और जिम्मेदारी तय करने की मांग कर रहे हैं।

  • खरगोन अस्पताल में बड़ी लापरवाही प्रसूता के पेट में नैपकिन छूटने पर डॉक्टर नर्स निलंबित

    खरगोन अस्पताल में बड़ी लापरवाही प्रसूता के पेट में नैपकिन छूटने पर डॉक्टर नर्स निलंबित


    खरगोन । मध्यप्रदेश के खरगोन जिला अस्पताल में प्रसव के दौरान हुई गंभीर लापरवाही के मामले में बड़ी कार्रवाई की गई है। जांच के बाद प्रसूता के पेट में सर्जिकल नैपकिन छूट जाने की घटना को गंभीर चिकित्सा चूक मानते हुए संबंधित डॉक्टर और नर्सिंग ऑफिसर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

    जानकारी के अनुसार यह मामला जिला अस्पताल खरगोन में डिलीवरी के दौरान सामने आया था, जब प्रसूता के ऑपरेशन के बाद उसके पेट में सर्जिकल नैपकिन रह जाने की बात उजागर हुई। इस घटना के बाद मरीज की हालत को लेकर चिंता बढ़ गई और पूरे मामले की जांच शुरू की गई।

    मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी दौलत सिंह चौहान ने बताया कि आयुक्त, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. मोहित गुप्ता को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही क्षेत्रीय संचालक, स्वास्थ्य सेवाएं इंदौर संभाग द्वारा नर्सिंग ऑफिसर दिव्या वर्मा को भी निलंबित किया गया है।

    अधिकारियों के अनुसार यह मामला चिकित्सा प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही का संकेत देता है, जहां ऑपरेशन के दौरान मानक सावधानियों का पालन नहीं किया गया। ऐसी घटनाएं न केवल मरीज की सुरक्षा को खतरे में डालती हैं बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाती हैं।

    प्रशासन ने कहा है कि मामले की विस्तृत जांच की जा रही है और यदि आगे किसी अन्य कर्मचारी की भूमिका सामने आती है तो उस पर भी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही अस्पतालों में सर्जिकल प्रक्रिया के दौरान सुरक्षा मानकों को और सख्त करने के निर्देश दिए गए हैं। यह घटना स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही को लेकर एक गंभीर चेतावनी के रूप में देखी जा रही है, जिससे भविष्य में ऐसी गलतियों को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने की जरूरत और अधिक बढ़ गई है।

  • इलाज के नाम पर लापरवाही, सतना में ऑपरेशन के दौरान बड़ी चूक ,युवक की मौत से मचा हड़कंप

    इलाज के नाम पर लापरवाही, सतना में ऑपरेशन के दौरान बड़ी चूक ,युवक की मौत से मचा हड़कंप


    सतना । मध्यप्रदेश के सतना शहर से एक बेहद गंभीर और झकझोर देने वाला मामला सामने आया है जहां कथित तौर पर डॉक्टरों की लापरवाही ने एक युवक की जान ले ली। यह घटना न केवल चिकित्सा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है बल्कि मरीजों की सुरक्षा को लेकर भी चिंताएं बढ़ा देती है। पन्ना जिले के देवेंद्रनगर निवासी रवि रजक को किडनी में पथरी की शिकायत के बाद इलाज के लिए सतना लाया गया था लेकिन जो इलाज जीवन बचाने के लिए होना था वही उसकी मौत का कारण बन गया।

    जानकारी के मुताबिक परिजन रवि को इलाज के लिए सतना के एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे जहां जांच के बाद डॉक्टरों ने एक किडनी में गंभीर समस्या बताते हुए ऑपरेशन की सलाह दी। 4 अप्रैल को ऑपरेशन किया गया जो करीब पांच घंटे तक चला। परिजनों का आरोप है कि इस दौरान डॉक्टरों ने गंभीर लापरवाही बरती और जिस किडनी का इलाज होना था उसके साथ साथ दूसरी स्वस्थ किडनी में भी कट लगा दिया गया।

    ऑपरेशन के बाद ही मरीज की हालत बिगड़ने लगी जिससे परिजनों की चिंता बढ़ गई। स्थिति को गंभीर होता देख अस्पताल प्रबंधन ने बिना समय गंवाए उसे रीवा के सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। हालांकि परिजनों का कहना है कि यह रेफरल भी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश थी क्योंकि उस समय तक स्थिति काफी खराब हो चुकी थी।

    रीवा पहुंचने के बाद जब डॉक्टरों ने जांच की तो मामला और भी चौंकाने वाला निकला। दूसरी किडनी पर गहरा कट पाया गया था जिसे कथित तौर पर धागे से बांध दिया गया था। इससे लगातार खून का रिसाव होता रहा और किडनी ने काम करना बंद कर दिया। डॉक्टरों ने मरीज की जान बचाने के लिए इमरजेंसी में दूसरी किडनी को भी निकालना पड़ा लेकिन तब तक संक्रमण और आंतरिक क्षति इतनी बढ़ चुकी थी कि स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई।

    लगातार बिगड़ती हालत के बीच आखिरकार युवक ने दम तोड़ दिया जिससे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। जैसे ही मौत की खबर परिजनों को मिली उनका गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने अस्पताल में जमकर हंगामा किया। इसके बाद कोलगवां थाना क्षेत्र में भी विरोध प्रदर्शन हुआ और परिजनों ने दोषी डॉक्टरों और अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।

    इस पूरे मामले ने स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि परिजनों के आरोप सही साबित होते हैं तो यह केवल एक चिकित्सकीय गलती नहीं बल्कि घोर लापरवाही का मामला बन सकता है। ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई बेहद जरूरी हो जाती है ताकि भविष्य में किसी और को इस तरह की त्रासदी का सामना न करना पड़े। फिलहाल प्रशासन की ओर से मामले की जांच की उम्मीद जताई जा रही है और सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि पीड़ित परिवार को न्याय कब और कैसे मिल पाता है।

  • UP Medical Negligence: मोतियाबिंद सर्जरी बनी काल! 42 मरीजों में फैला खतरनाक संक्रमण, स्वास्थ्य विभाग ने सील किया अस्पताल का ओटी

    UP Medical Negligence: मोतियाबिंद सर्जरी बनी काल! 42 मरीजों में फैला खतरनाक संक्रमण, स्वास्थ्य विभाग ने सील किया अस्पताल का ओटी


    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले से एक ऐसी झकझोर देने वाली खबर सामने आई है, जिसने स्वास्थ्य मानकों और निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। सिकरीगंज स्थित न्यू राजेश हाईटेक हॉस्पिटल में एक और दो फरवरी को मोतियाबिंद की सर्जरी कराने वाले परिवारों के लिए यह ऑपरेशन किसी भयावह दुस्वप्न में बदल गया है। अस्पताल में सर्जरी कराने वाले कुल 42 मरीजों में से 22 की हालत इतनी बिगड़ी कि उन्हें आनन-फानन में दिल्ली के एम्स अस्पताल रेफर करना पड़ा। संक्रमण की तीव्रता इतनी घातक थी कि अब तक चार मरीजों की आंखें सर्जरी कर निकालनी पड़ी हैं, जबकि छह अन्य की आंखों की रोशनी हमेशा के लिए बुझ चुकी है। यह पूरी घटना स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और संक्रमण नियंत्रण की पोल खोलती नजर आ रही है।

    एम्स के विशेषज्ञों की देखरेख में चल रहे इस उपचार के दौरान कई दर्दनाक कहानियां सामने आई हैं। बताया जा रहा है कि शुरुआत में सात मरीजों को भर्ती कराया गया था, लेकिन संक्रमण की गंभीरता के चलते मंगलवार और बुधवार के बीच 15 और मरीज दिल्ली पहुंच गए। इन सभी की आंखों में संक्रमण फैल चुका है और उनका इलाज विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में जारी है। जिन 12 मरीजों में संक्रमण की स्थिति बेहद गंभीर थी, उनमें से चार की आंखें निकालनी पड़ीं ताकि संक्रमण दिमाग तक न पहुंचे। तीन अन्य मरीजों की स्थिति अभी भी नाजुक बनी हुई है और डॉक्टर एक से दो दिन में आगे की सर्जरी या उपचार को लेकर निर्णय लेंगे।

    बेलघाट क्षेत्र की रहने वाली 60 वर्षीय महिला बहाउद्दीन का इलाज एम्स में चल रहा है। उनकी बेटी के अनुसार संक्रमण के कारण उनकी मां की आंखों की रोशनी चली गई। इसी तरह बारी गांव की देवराजी की आंख में संक्रमण इतना बढ़ गया कि मवाद और खून आने लगा। जांच के बाद डॉक्टरों ने पाया कि रोशनी पूरी तरह जा चुकी है और संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए आंख निकालनी पड़ी। परिजनों का कहना है कि डॉक्टरों ने बताया कि देरी होती तो संक्रमण का असर दिमाग तक पहुंच सकता था। इन्नडीह के अर्जुन सिंह और बेलीपार के रामदरश सहित अन्य मरीजों की भी आंखें निकालनी पड़ी हैं या अतिरिक्त सर्जरी की तैयारी चल रही है। इन घटनाओं ने पूरे इलाके में दहशत फैला दी है।

    मामले की जांच के लिए बीआरडी मेडिकल कॉलेज की माइक्रोबायोलॉजी टीम ने अस्पताल पहुंचकर ऑपरेशन थियेटर और अन्य स्थानों से 10 से अधिक सैंपल लिए हैं। विभागाध्यक्ष डॉ. अमरेश सिंह के अनुसार जांच रिपोर्ट गुरुवार तक आने की संभावना है। रिपोर्ट से संक्रमण के असली कारणों का पता चल सकेगा। अस्पताल संचालक राजेश राय का कहना है कि उनके यहां वर्षों से मोतियाबिंद की सर्जरी की जा रही है और पहली बार इस तरह की घटना सामने आई है।

    एसीएमओ डॉ. एके चौधरी ने बताया कि अस्पताल का ऑपरेशन थियेटर सील कर दिया गया है और स्वास्थ्य विभाग पूरे मामले पर नजर रखे हुए है। रिपोर्ट आने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इस घटना ने एक बार फिर निजी अस्पतालों में संक्रमण नियंत्रण और ऑपरेशन थियेटर की स्वच्छता को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। फिलहाल पीड़ित परिवारों की उम्मीद एम्स के डॉक्टरों पर टिकी है।

  • "जुकाम का इंजेक्शन, 30 सेकंड और साध्वी की मौत! पढ़िए वो रहस्य जो सबको कर देगा हैरान!"

    "जुकाम का इंजेक्शन, 30 सेकंड और साध्वी की मौत! पढ़िए वो रहस्य जो सबको कर देगा हैरान!"

    नई दिल्ली जोधपुर के एक प्राइवेट अस्पताल में साध्वी और कथावाचक प्रेम बाईसा की अचानक मौत ने उनके अनुयायियों और ग्रामीण समाज को गहरे शोक में डुबो दिया। इंजेक्शन लगने के कुछ ही पलों बाद तबीयत बिगड़ना, अस्पताल पहुंचते ही मृत घोषित कर दिया जाना और सोशल मीडिया पर उठे सवाल उनकी मौत को रहस्यमयी और चिंता का विषय बना रहे हैं।
    हर घटना की कड़ी अपने आप में गंभीर सवाल खड़े कर रही है और लोग इस हादसे की सही वजह जानने के लिए बेसब्र हैं।

    पार्थिव शरीर परेऊ गांव पहुंचा, शोक और न्याय की मांग
    आज साध्वी प्रेम बाईसा का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव परेऊ (बालोतरा) पहुंचा, तो पूरे गांव में शोक का माहौल बन गया। सैकड़ों अनुयायी, ग्रामीण और संत समाज के लोग अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे। परिजनों ने परंपरा के अनुसार उन्हें समाधि देने का निर्णय लिया, लेकिन इस बीच न्याय की मांग भी जोर पकड़ने लगी, क्योंकि लोग चाहते हैं कि उनकी मौत के रहस्यमयी पहलुओं की निष्पक्ष जांच हो।

    साध्वी पूरी तरह स्वस्थ, हल्का जुकाम ही था शिकायत
    साध्वी प्रेम बाईसा के पिता वीरम नाथ ने बताया कि उनकी बेटी पूरी तरह स्वस्थ थी और कोई गंभीर बीमारी नहीं थी।

    लगातार धार्मिक कार्यक्रमों में व्यस्त रहने के कारण थकान जरूर थी, लेकिन स्वास्थ्य सामान्य था। 28 जनवरी को साध्वी को हल्का जुकाम और गले में खराश की शिकायत हुई। वीरम नाथ के अनुसार, “मैंने कहा कि अस्पताल चल लेते हैं, लेकिन उसने कहा कि यह मामूली जुकाम है, डॉक्टर को घर ही बुला लो।”

    इंजेक्शन के 30 सेकंड में तबीयत बिगड़ी
    कंपाउंडर ने शुरुआती जांच के बाद इंजेक्शन लगाया, लेकिन महज 30 सेकंड में ही साध्वी की हालत बिगड़ गई। सांस लेने में दिक्कत, बेचैनी और अचानक कमजोरी ने सबको हैरान कर दिया। घबराए परिजन तुरंत उन्हें जोधपुर के प्रेक्षा हॉस्पिटल ले गए, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए-क्या यह एलर्जिक रिएक्शन था, क्या बिना जरूरी जांच के दवा दी गई, या यह मेडिकल लापरवाही थी।

    अंतिम शब्द और न्याय की पुकार
    वीरम नाथ की आंखें भर आती हैं, जब वह अपनी बेटी के अंतिम शब्द याद करते हैं। साध्वी ने कहा था, “मुझे जीते जी तो न्याय नहीं मिला, लेकिन मरने के बाद मुझे न्याय जरूर मिलना चाहिए।” परिवार का कहना है कि वे किसी पर बेबुनियाद आरोप नहीं लगाना चाहते, लेकिन निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग कर रहे हैं।

    सोशल मीडिया विवाद ने बढ़ाई पीड़ा
    सोशल मीडिया पर इस मामले में आग में घी डालने का काम हुआ। तरह-तरह की पोस्ट, अफवाहें और आपत्तिजनक टिप्पणियां सामने आने लगीं। कुछ पोस्टों में निजी रिश्तों और भगवे को लेकर भी सवाल उठाए गए, जिससे संत समाज में नाराजगी फैली। मेवाड़ से श्रद्धांजलि देने पहुंचे महामंडलेश्वर ईश्वरी नंद गिरी ने कहा कि बिना तथ्य जाने साधु-संतों की छवि खराब की जा रही है और बाप-बेटी के पवित्र रिश्ते को कलंकित करना शर्मनाक है।

    उन्होंने पुलिस से मांग की कि मौत की निष्पक्ष जांच हो और सोशल मीडिया पर अनर्गल लिखने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।

    संत समाज की एक सुर में मांग
    संत समाज भी एक सुर में यही मांग कर रहा है

    साध्वी प्रेम बाईसा की मौत की सच्चाई सामने लाई जाए। कई संतों का कहना है कि बिना प्रमाण की टिप्पणियां न केवल दिवंगत साध्वी का अपमान हैं, बल्कि समाज में भ्रम और नफरत फैलाने का काम कर रही हैं। ऐसे गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार करने वालों पर कानूनी कार्रवाई की भी मांग की जा रही है।
    कंपाउंडर आया और शुरुआती जांच के बाद उसने इंजेक्शन लगाया गया.
    परेऊ गांव में अंतिम दर्शन का भावुक माहौल
    गांव परेऊ में अंतिम दर्शन के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। महिलाएं भजन गा रही थीं, पुरुषों की आंखों में आंसू थे। हर कोई यही कह रहा था कि प्रेम बाईसा का जीवन सादगी और सेवा का प्रतीक था।
    समाधि देने के फैसले को लेकर गांव में भावनात्मक माहौल था। अनुयायियों का मानना है कि यह कदम साध्वी की साधना और त्याग के प्रति सम्मान व्यक्त करने का तरीका है।

    आश्रम से कैमरे हटने और पिछले विवाद की जांच जरूरी
    साध्वी के समर्थक प्रेमराज चौधरी ने कहा कि पूरी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, क्योंकि हाल ही में आश्रम से सीसीटीवी कैमरे हटाए गए हैं, जो संदेह पैदा करते हैं। मृत्यु के बाद डॉक्टरों ने पोस्टमॉर्टम करवाने को कहा, लेकिन पिता ने मना कर दिया। गत वर्ष जुलाई में सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो और पुलिस की कार्रवाई ने भी साध्वी पर दबाव बनाए रखा।