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  • सागर मेडिकल कॉलेज की बड़ी लापरवाही ऑपरेशन से एक दिन पहले लगा हाई रिस्क इंजेक्शन मरीज की गई जान

    सागर मेडिकल कॉलेज की बड़ी लापरवाही ऑपरेशन से एक दिन पहले लगा हाई रिस्क इंजेक्शन मरीज की गई जान


    सागर  सागर के बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान हुई एक मरीज की मौत ने अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि जिस एनेस्थीसिया इंजेक्शन का उपयोग ऑपरेशन के दौरान मरीज को बेहोश करने के लिए किया जाना था उसे निर्धारित समय से एक दिन पहले ही नस के जरिए लगा दिया गया। घटना के बाद मरीज की हालत तेजी से बिगड़ी और कई दिनों तक जिंदगी और मौत से संघर्ष करने के बाद उसकी मौत हो गई। मामले में ड्यूटी पर तैनात नर्स को जांच पूरी होने तक निलंबित कर दिया गया है।

    जानकारी के अनुसार देवेंद्र पाठक को गले में गांठ की समस्या के चलते बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के ईएनटी विभाग में भर्ती कराया गया था। अगले दिन उनकी बायोप्सी होनी थी। परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन में उपयोग होने वाला हाई रिस्क एनेस्थीसिया इंजेक्शन नर्स ने पहले ही मरीज को लगा दिया। इंजेक्शन लगने के कुछ ही मिनट बाद मरीज की सांसें उखड़ने लगीं और उसकी हार्टबीट रुक गई। डॉक्टरों ने करीब 45 मिनट तक सीपीआर देकर उसे बचाने की कोशिश की और बाद में वेंटिलेटर पर शिफ्ट किया। इलाज के दौरान कुछ समय के लिए हालत में सुधार जरूर हुआ लेकिन 23 जून की सुबह मरीज ने दम तोड़ दिया।

    मृतक की पत्नी रीता पाठक ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि इंजेक्शन लगाते समय संबंधित नर्स मोबाइल फोन और ब्लूटूथ इयरफोन पर बातचीत में व्यस्त थी। इसी लापरवाही के कारण गलत समय पर दवा दे दी गई जिससे मरीज की जान चली गई। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

    कॉलेज प्रशासन ने परिजनों की शिकायत और प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के आधार पर नर्स शिखा पटले को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। कॉलेज प्रबंधन का कहना है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और विस्तृत जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस भी पूरे मामले की अलग से जांच कर रही है।

    घटना पर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने भी संज्ञान लिया है। उन्होंने पूरे मामले की विस्तृत जांच कराने और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों तथा कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि एनेस्थीसिया जैसी हाई अलर्ट दवाएं केवल निर्धारित प्रक्रिया और विशेषज्ञ डॉक्टर की निगरानी में ही दी जानी चाहिए। यदि किसी स्वास्थ्यकर्मी को दवा को लेकर जरा भी संदेह हो तो पहले वरिष्ठ डॉक्टर या नर्सिंग अधिकारी से पुष्टि करना अनिवार्य होता है। विशेषज्ञों के अनुसार यह मामला केवल व्यक्तिगत लापरवाही तक सीमित नहीं हो सकता बल्कि दवा वितरण प्रणाली डबल वेरिफिकेशन सुपरविजन प्रशिक्षण और अस्पताल की मानक संचालन प्रक्रिया में संभावित खामियों की भी गंभीर जांच की जानी चाहिए।

  • एम्स भोपाल में दर्दनाक लापरवाही: कैंसर पीड़ित 3 साल के मासूम को दवा की जगह लगा दिया फॉर्मेलिन, मौत के बाद दो नर्सों पर FIR

    एम्स भोपाल में दर्दनाक लापरवाही: कैंसर पीड़ित 3 साल के मासूम को दवा की जगह लगा दिया फॉर्मेलिन, मौत के बाद दो नर्सों पर FIR


    मध्‍य प्रदेश । राजधानी भोपाल के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) से एक बेहद संवेदनशील और चिंताजनक मामला सामने आया है। अस्पताल में भर्ती तीन वर्षीय कैंसर पीड़ित बच्चे की मौत के मामले में आंतरिक जांच में गंभीर लापरवाही उजागर हुई है। जांच रिपोर्ट के अनुसार बच्चे को इलाज के दौरान दवा के स्थान पर गलती से फॉर्मेलिन इंजेक्ट कर दिया गया, जिसके बाद उसकी हालत तेजी से बिगड़ी और कुछ ही समय में उसकी मौत हो गई। इस मामले में पुलिस ने दो नर्सिंग अधिकारियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    पुलिस और जांच रिपोर्ट के अनुसार सागर जिले की बीना तहसील के ग्राम कौरजा निवासी तीन वर्षीय सार्थक यादव ब्लड कैंसर से पीड़ित था। उसका इलाज एम्स भोपाल में चल रहा था और गंभीर स्थिति के चलते उसे पीडियाट्रिक वार्ड में भर्ती कराया गया था। 17 दिसंबर 2025 की सुबह इलाज के दौरान यह दुखद घटना हुई।

    जांच में सामने आया है कि बायोप्सी और अन्य मेडिकल नमूनों को सुरक्षित रखने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला रसायन फॉर्मेलिन एक सिरिंज में भरकर वार्ड में रखा गया था। आरोप है कि ड्यूटी पर मौजूद नर्सिंग ऑफिसर ने इस खतरनाक रसायन को निर्धारित सुरक्षित स्थान पर रखने के बजाय मरीजों के बेड के आसपास छोड़ दिया, जो अस्पताल के सुरक्षा नियमों के विपरीत था।

    रिपोर्ट के अनुसार जब बच्चे की आईवी लाइन में समस्या आई तो ड्यूटी पर मौजूद दूसरी नर्स ने बिना सिरिंज की पहचान और लेबल की जांच किए उसे उठा लिया और बच्चे की नस में इंजेक्ट कर दिया। परिजनों का दावा है कि इंजेक्शन लगाने के दौरान बच्चे के पिता ने तीन बार नर्स को चेताया था कि सिरिंज में दवा नहीं है, लेकिन उनकी बात पर ध्यान नहीं दिया गया।

    बताया गया है कि इंजेक्शन लगते ही बच्चे की हालत अचानक बिगड़ने लगी। वह अचेत हो गया और उसे तत्काल पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (PICU) में शिफ्ट किया गया। डॉक्टरों ने उसे बचाने के लिए सीपीआर समेत सभी जरूरी चिकित्सकीय प्रयास किए, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी और उसकी मौत हो गई।

    एम्स द्वारा गठित आंतरिक जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि बच्चे की मौत का प्रमुख कारण फॉर्मेलिन का नस के जरिए शरीर में पहुंचना था। रिपोर्ट में नर्सिंग स्टाफ की गंभीर लापरवाही को घटना के लिए जिम्मेदार बताया गया है। इसी आधार पर बागसेवनिया थाना पुलिस ने दोनों नर्सिंग अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस के अनुसार एक नर्स पर लापरवाही से मौत कारित करने और दूसरी पर खतरनाक रसायन को असुरक्षित तरीके से रखने से संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है। मामले की जांच अभी जारी है।

    गौरतलब है कि सार्थक बी-सेल एक्यूट लिम्फोब्लास्टिक ल्यूकेमिया नामक ब्लड कैंसर से जूझ रहा था। यह बीमारी बच्चों में होने वाले गंभीर कैंसरों में शामिल मानी जाती है। परिवार इलाज की उम्मीद लेकर एम्स पहुंचा था, लेकिन कथित लापरवाही ने उनके इकलौते सहारे को छीन लिया।

    विशेषज्ञों के अनुसार फॉर्मेलिन एक अत्यंत विषैला रसायन है, जिसका उपयोग मेडिकल संस्थानों में ऊतकों और बायोप्सी नमूनों को संरक्षित रखने के लिए किया जाता है। यदि यह शरीर में, विशेषकर रक्त प्रवाह के जरिए पहुंच जाए, तो यह गंभीर अंग क्षति, शॉक और मृत्यु का कारण बन सकता है। यही वजह है कि अस्पतालों में इसके उपयोग और भंडारण के लिए सख्त सुरक्षा प्रोटोकॉल बनाए जाते हैं।

  • झोलाछाप डॉक्टर की लापरवाही से किसान की मौत, गलत इंजेक्शन लगाते ही बिगड़ी हालत, आरोपी फरार

    झोलाछाप डॉक्टर की लापरवाही से किसान की मौत, गलत इंजेक्शन लगाते ही बिगड़ी हालत, आरोपी फरार

    भिण्ड । मध्यप्रदेश के भिण्ड जिले के मिहोना कस्बे में झोलाछाप डॉक्टर की गंभीर लापरवाही से एक किसान की जान चली गई। सर्दी-खांसी के सामान्य इलाज के लिए क्लिनिक पहुंचे 40 वर्षीय किसान को डॉक्टर द्वारा गलत इंजेक्शन लगाए जाने से उसकी हालत अचानक बिगड़ गई और कुछ ही मिनटों में उसकी मौत हो गई। घटना के बाद से आरोपी झोलाछाप डॉक्टर फरार बताया जा रहा है। पुलिस के अनुसार, मृतक किसान की पहचान जगनपुरा गांव निवासी अखिलेंद्र सिंह राजावत 40 के रूप में हुई है। अखिलेंद्र को सर्दी खांसी और जुकाम की शिकायत थी जिसके चलते वह 13 दिसंबर 2025 की दोपहर इलाज के लिए मिहोना कस्बे के कश्मीर क्षेत्र में संचालित झोलाछाप डॉक्टर विजय बंगाली की क्लिनिक पर गया था। परिजनों को उम्मीद थी कि सामान्य इलाज के बाद वह जल्द ठीक हो जाएगा लेकिन यह फैसला उसके लिए जानलेवा साबित हुआ।

    इलाज के दौरान जैसे ही डॉक्टर ने अखिलेंद्र को इंजेक्शन लगाया उसकी तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार इंजेक्शन लगते ही किसान को बेचैनी होने लगी और वह तड़पने लगा। परिजन और आसपास मौजूद लोग कुछ समझ पाते या उसे किसी बड़े अस्पताल ले जाने का प्रयास करते इससे पहले ही उसकी मौके पर ही मौत हो गई। अचानक हुई इस घटना से परिजनों में कोहराम मच गया।घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और प्रारंभिक जांच में डॉक्टर की लापरवाही सामने आने के बाद पुलिस ने आरोपी झोलाछाप डॉक्टर विजय बंगाली के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस का कहना है कि बिना वैध डिग्री और पंजीकरण के इलाज करना कानूनन अपराध है और इस मामले में सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    घटना के बाद से ही आरोपी डॉक्टर क्लिनिक बंद कर फरार हो गया है। पुलिस उसकी तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है। वहीं इस घटना के बाद इलाके में झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग तेज हो गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे फर्जी डॉक्टर खुलेआम क्लिनिक चला रहे हैं, जिन पर प्रशासन की सख्त निगरानी जरूरी है। पुलिस अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि आरोपी को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा और मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी। साथ ही स्वास्थ्य विभाग को भी अवैध रूप से संचालित क्लिनिकों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए जाने की बात कही गई है।

  • भोपाल के जेपी अस्पताल में मरीज को दी फफूंद लगी दवा सीनियर डॉक्टर नदारद ओपीडी में इंटर्न डॉक्टरों के भरोसे इलाज

    भोपाल के जेपी अस्पताल में मरीज को दी फफूंद लगी दवा सीनियर डॉक्टर नदारद ओपीडी में इंटर्न डॉक्टरों के भरोसे इलाज


    भोपाल । भोपाल के जेपी अस्पताल जिला चिकित्सालय में एक गंभीर घटना सामने आई है जहां शुक्रवार शाम एक मरीज को फफूंद लगी दवा दी गई। यह मामला दवाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठाता है और अस्पताल प्रशासन की लापरवाही को उजागर करता है। मरीज ने दवा लेने से पहले उसे देखा जिससे किसी बड़ी दुर्घटना से बचा जा सका। यदि मरीज ने दवा की स्थिति का ध्यान नहीं किया होता तो यह स्वास्थ्य के लिए गंभीर समस्या बन सकती थी।

    मरीज सतीष सेन ने बताया कि वे शुक्रवार शाम करीब पांच बजे पैर में फ्रैक्चर की आशंका के चलते जेपी अस्पताल की आर्थोपेडिक ओपीडी में पहुंचे थे। ओपीडी में उस वक्त कोई सीनियर डॉक्टर मौजूद नहीं थे और इंटर्न डॉक्टरों ने उनका परीक्षण किया। इसके बाद मरीज को एक्स-रे की सिफारिश की गई और दर्द की दवा लिखी गई जो बाद में फफूंद लगी हुई मिली।

    इस घटना ने अस्पताल में चिकित्सा गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मरीज को अगर दवा की स्थिति का पता न चलता तो इसे स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा माना जा सकता था। इसके अलावा सीनियर डॉक्टरों की अनुपस्थिति ने भी ओपीडी में इलाज के स्तर को प्रभावित किया।

    इस मामले को लेकर स्थानीय नागरिकों और स्वास्थ्य संगठनों नेप्रशासन से कार्रवाई की मांग की है ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही से बचा जासके और मरीजों को बेहतर इलाज और दवाइयां मिल सकें। अस्पताल प्रशासन को इस गंभीर मुद्दे पर तुरंत कदम उठाने चाहिए और सुनिश्चित करना चाहिए कि मरीजों को गुणवत्ता वाली दवाइयां और इलाज मिले।