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  • एक्सपायरी दवाओं के आरोपों के बीच हड़ताल: कटनी में मेडिकल स्टोर्स पर ताले

    एक्सपायरी दवाओं के आरोपों के बीच हड़ताल: कटनी में मेडिकल स्टोर्स पर ताले


    कटनी । कटनी में बुधवार को दवा कारोबार पूरी तरह प्रभावित रहा, जब ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स के आह्वान पर पूरे शहर और ग्रामीण क्षेत्रों की दवा दुकानें बंद रहीं। इस एक दिवसीय बंद का नेतृत्व कटनी केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट्स एसोसिएशन ने किया, जिसने ऑनलाइन दवा बिक्री के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन करते हुए प्रशासन को ज्ञापन सौंपा।

    सुबह से ही शहर के मेडिकल स्टोरों के शटर बंद रहे, जिससे दवा बाजार में सन्नाटा पसरा रहा। केवल आपातकालीन सेवाओं से जुड़े स्टोर और पीएम जन औषधि केंद्रों को इस बंद से छूट दी गई, ताकि मरीजों को जरूरी दवाओं की उपलब्धता में कोई बाधा न आए।

    ऑनलाइन दवा कंपनियों पर गंभीर आरोप
    एसोसिएशन के अध्यक्ष चंदू जादवानी ने आरोप लगाया कि ऑनलाइन दवा कंपनियां भारी डिस्काउंट और ऑफर्स का लालच देकर व्यापार कर रही हैं, जिससे स्थानीय दवा कारोबारियों को भारी नुकसान हो रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि निगरानी व्यवस्था कमजोर होने के कारण ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर एक्सपायरी दवाओं की बिक्री तक के मामले सामने आ रहे हैं, जो आम जनता के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है।

    व्यापारियों का कहना है कि ऑनलाइन फार्मेसी के बढ़ते प्रभाव ने छोटे और मध्यम दवा विक्रेताओं के अस्तित्व पर संकट खड़ा कर दिया है। कई दुकानदारों का कारोबार लगातार घट रहा है और वे आर्थिक दबाव में आ रहे हैं।

    16 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा गया
    दोपहर के समय एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल ने जिला प्रशासन को 16 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा। इसमें मुख्य रूप से ऑनलाइन दवा बिक्री पर पूर्ण नियंत्रण या प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है। इसके साथ ही दवाओं पर दिए जा रहे अत्यधिक डिस्काउंट को रोकने और एक मजबूत नियामक व्यवस्था बनाने की बात भी रखी गई।

    संघ के सचिव सागर आहूजा ने कहा कि बिना सख्त नियमों के चल रही ऑनलाइन फार्मेसी व्यवस्था पारंपरिक दवा कारोबारियों के अधिकारों का हनन कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका विरोध मरीजों के खिलाफ नहीं, बल्कि अनियंत्रित ऑनलाइन व्यापार प्रणाली के खिलाफ है।

    आंदोलन तेज करने की चेतावनी
    एसोसिएशन ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं की गई, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। व्यापारियों ने कहा कि वे अपने हितों और आम जनता की सुरक्षा दोनों के लिए एक मजबूत और पारदर्शी दवा बिक्री प्रणाली की मांग कर रहे हैं।

    कटनी का यह बंद केवल व्यापारिक विरोध नहीं बल्कि दवा वितरण प्रणाली में सुधार की मांग के रूप में देखा जा रहा है। अब देखना होगा कि प्रशासन और सरकार इस मुद्दे पर क्या कदम उठाते हैं।

  • केमिस्ट एसोसिएशन की रैली: ई-फार्मेसी के खिलाफ कलेक्ट्रेट पहुंचा विरोध

    केमिस्ट एसोसिएशन की रैली: ई-फार्मेसी के खिलाफ कलेक्ट्रेट पहुंचा विरोध


    मध्य प्रदेश । अशोकनगर में बुधवार को ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में जिला केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के आह्वान पर मेडिकल दुकानों का एक दिवसीय बंद देखने को मिला। जिलेभर के दवा व्यापारियों ने ई-फार्मेसी और बड़े कॉरपोरेट्स की कथित अनुचित व्यापारिक नीतियों के खिलाफ विरोध जताते हुए अपनी दुकानें बंद रखीं। शहर की लगभग 180 और जिले की कुल 297 मेडिकल दुकानों ने इस बंद में भाग लिया, जिससे दिनभर बाजार में मेडिकल स्टोरों के शटर बंद नजर आए।

    दोपहर के समय बड़ी संख्या में केमिस्ट और दवा व्यापारी एकत्रित हुए और शहर में रैली निकालकर विरोध प्रदर्शन किया। व्यापारी हाथों में बैनर और तख्तियां लेकर ऑनलाइन दवा बिक्री पर रोक लगाने की मांग कर रहे थे। रैली शहर के प्रमुख मार्गों से होती हुई कलेक्ट्रेट पहुंची, जहां प्रतिनिधिमंडल ने तहसीलदार को कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में केंद्र सरकार से ऑनलाइन दवा बिक्री से जुड़ी अधिसूचनाएं वापस लेने और ई-फार्मेसी पर सख्त नियंत्रण लगाने की मांग की गई।

    एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने बताया कि जिला संगठन मध्यप्रदेश केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स एसोसिएशन और राष्ट्रीय संगठन ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स से संबद्ध है, जो देशभर के करीब 12.40 लाख केमिस्ट और दवा वितरकों का प्रतिनिधित्व करता है। संगठन का आरोप है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स और बड़े कॉरपोरेट्स भारी छूट और प्रिडेटोरी प्राइसिंग के जरिए छोटे और मध्यम मेडिकल संचालकों के व्यापार को खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं। इससे लाखों परिवारों की आजीविका पर संकट खड़ा हो गया है।

    दवा व्यापारियों ने जनस्वास्थ्य को लेकर भी गंभीर चिंता जताई। उनका कहना है कि ऑनलाइन माध्यम से बिना वैध डॉक्टर पर्चे के दवाइयों की बिक्री हो रही है। एंटीबायोटिक्स, नशीली और आदत बनाने वाली दवाओं की आसान उपलब्धता मरीजों के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो सकती है। साथ ही नकली प्रिस्क्रिप्शन और दवाओं के गलत भंडारण जैसी समस्याएं भी लगातार बढ़ रही हैं। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि इस पर नियंत्रण नहीं लगाया गया तो एंटी-माइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या तेजी से बढ़ सकती है।

    ज्ञापन में विशेष रूप से केंद्र सरकार की 28 अगस्त 2018 की अधिसूचना GSR 817(E) और 26 मार्च 2020 की अधिसूचना GSR 220(E) को वापस लेने की मांग उठाई गई। व्यापारियों का कहना है कि कोविड काल में लागू की गई इन व्यवस्थाओं का अब गलत तरीके से इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे पारंपरिक मेडिकल व्यापार प्रभावित हो रहा है।

    प्रदर्शनकारी व्यापारियों ने कहा कि वे सरकार से ऑनलाइन दवा बिक्री पर स्पष्ट और सख्त नियम लागू करने की मांग कर रहे हैं, ताकि जनस्वास्थ्य सुरक्षित रहे और छोटे व्यापारियों का अस्तित्व बचाया जा सके। पूरे दिन चले इस विरोध प्रदर्शन के दौरान दवा बाजार में सन्नाटा पसरा रहा और कई लोगों को मेडिकल स्टोर बंद होने के कारण दिक्कतों का सामना भी करना पड़ा।

    अशोकनगर में ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में 297 मेडिकल दुकानें बंद रहीं। जिला केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन ने रैली निकालकर कलेक्ट्रेट में ज्ञापन सौंपा और ई-फार्मेसी पर रोक लगाने की मांग की। व्यापारियों ने जनस्वास्थ्य और छोटे कारोबारियों की आजीविका पर खतरे की बात कही।

  • ई-फार्मेसी के विरोध में सड़कों पर उतरे केमिस्ट, पीएम के नाम सौंपा ज्ञापन

    ई-फार्मेसी के विरोध में सड़कों पर उतरे केमिस्ट, पीएम के नाम सौंपा ज्ञापन


    मध्य प्रदेश । शिवपुरी में बुधवार को ऑनलाइन दवाओं की बिक्री के विरोध में केमिस्टों की देशव्यापी हड़ताल का बड़ा असर देखने को मिला। ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) के आह्वान पर जिलेभर के करीब 350 मेडिकल स्टोर पूरे दिन बंद रहे। इनमें शहर के लगभग 150 मेडिकल प्रतिष्ठान भी शामिल थे। केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट्स एसोसिएशन ने इस दौरान विरोध प्रदर्शन करते हुए कलेक्टर के माध्यम से प्रधानमंत्री Narendra Modi के नाम ज्ञापन सौंपा और ऑनलाइन दवा बिक्री पर रोक लगाने की मांग की।

    केमिस्टों ने ज्ञापन में आरोप लगाया कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स बिना वैध चिकित्सकीय पर्चे के दवाओं की होम डिलीवरी कर रहे हैं, जो नियमों के खिलाफ है। साथ ही भारी डिस्काउंट देकर छोटे मेडिकल व्यापारियों के कारोबार को प्रभावित किया जा रहा है। एसोसिएशन ने केंद्र सरकार से नियम GSR 817(E) और GSR 220(E) को तत्काल वापस लेने की मांग उठाई है।

    एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. चन्द्र प्रकाश गोयल और सचिव गोपाल दास अग्रवाल ने कहा कि दवाएं कोई सामान्य उपभोक्ता वस्तु नहीं हैं, बल्कि सीधे जन स्वास्थ्य से जुड़ी होती हैं। उनका कहना है कि अनियंत्रित ऑनलाइन बिक्री मरीजों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि बार-बार शिकायतों के बावजूद सरकार इस मुद्दे पर प्रभावी कार्रवाई नहीं कर रही है।

    केमिस्टों ने यह भी कहा कि कोविड महामारी के दौरान स्थानीय मेडिकल स्टोरों ने फ्रंटलाइन हेल्थ सपोर्ट की भूमिका निभाई थी और लोगों तक दवाएं पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया था। इसके बावजूद आज छोटे दवा व्यापारियों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।

    हालांकि जिलेभर में मेडिकल स्टोर बंद रहने के बावजूद मरीजों को ज्यादा परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा। हड़ताल को ध्यान में रखते हुए एसोसिएशन ने पहले से ही आवश्यक और आपातकालीन दवाओं की व्यवस्था कर दी थी। इसके अलावा प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र और अस्पताल परिसरों में संचालित मेडिकल स्टोर सामान्य रूप से खुले रहे, जहां जरूरतमंद मरीजों को दवाएं उपलब्ध कराई गईं।

    दवा व्यापारियों का कहना है कि यदि सरकार ने ऑनलाइन दवा बिक्री को नियंत्रित करने के लिए सख्त कदम नहीं उठाए, तो आने वाले समय में आंदोलन और तेज किया जाएगा। उनका मानना है कि बिना निगरानी के ऑनलाइन दवा वितरण से न केवल छोटे व्यापारियों को नुकसान हो रहा है, बल्कि मरीजों के स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर पड़ सकता है।

  • नशीली दवा बिक्री के विरोध में उबाल: बुरहानपुर में 500 मेडिकल स्टोर्स बंद

    नशीली दवा बिक्री के विरोध में उबाल: बुरहानपुर में 500 मेडिकल स्टोर्स बंद


    बुरहानपुर/मध्यप्रदेश। जिले में ऑनलाइन दवा बिक्री और कथित नशीली दवाओं की अवैध सप्लाई के विरोध में बुधवार को बड़ा आंदोलन देखने को मिला। ऑल इंडिया केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के आह्वान पर बुरहानपुर जिले में 500 से अधिक मेडिकल स्टोर पूरी तरह बंद रहे, जिससे आम जनता को दवाइयों के लिए भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

    सुबह से ही कई क्षेत्रों में मेडिकल स्टोर बंद रहे और मरीज दवा के लिए इधर-उधर भटकते नजर आए। दोपहर होते-होते बड़ी संख्या में दवा विक्रेता बाइक रैली के रूप में एकजुट होकर एसडीएम कार्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने एसडीएम अजमेर सिंह गौड़ को राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।

    दवा विक्रेताओं ने आरोप लगाया कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए दवाओं की अनियंत्रित बिक्री हो रही है, जिससे न केवल छोटे व्यापारियों का व्यवसाय प्रभावित हो रहा है, बल्कि जन स्वास्थ्य पर भी गंभीर खतरा पैदा हो रहा है। एसोसिएशन के सचिव शरद जैन ने बताया कि जिले की सभी प्रमुख दवा दुकानें बंद रहीं और यह विरोध पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा।

    ज्ञापन में केमिस्टों ने केंद्र सरकार द्वारा लागू जीएसआर 817(E) और जीएसआर 220(E) नियमों का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि इनका दुरुपयोग हो रहा है। उनका कहना है कि इन प्रावधानों के चलते ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर दवाओं की निगरानी कमजोर पड़ रही है और इसी का फायदा उठाकर कुछ अवैध गतिविधियां बढ़ रही हैं।

    केमिस्टों ने यह भी गंभीर आरोप लगाया कि नशीली दवाओं की अवैध बिक्री और गर्भपात किट (अबॉर्शन किट) की अनियंत्रित सप्लाई बढ़ रही है, जिससे युवा वर्ग में नशे की लत और स्वास्थ्य जोखिम बढ़ रहे हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि ऑनलाइन दवा सप्लाई पर सख्त नियंत्रण लगाया जाए और मौजूदा नियमों की समीक्षा कर उन्हें वापस लिया जाए।

    इसी तरह नेपानगर क्षेत्र में भी अखिल भारतीय दवा विक्रेता संघ के आह्वान पर मेडिकल स्टोर बंद रहे। वहां के दवा विक्रेताओं ने भी एसडीएम कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा और ऑनलाइन दवा बिक्री पर रोक लगाने की मांग की।

    नेपा केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रमोद चौहान ने कहा कि बिना नियंत्रण के हो रही ऑनलाइन दवा बिक्री से मरीजों को गलत या कम गुणवत्ता वाली दवाएं मिल रही हैं, जिससे इलाज पर विपरीत असर पड़ रहा है। उन्होंने इसे स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया।

    हालांकि, इस पूरे आंदोलन का सबसे बड़ा असर आम मरीजों पर पड़ा, जिन्हें दिनभर दवाओं के लिए परेशान होना पड़ा। ग्रामीण और जरूरतमंद मरीज सबसे ज्यादा प्रभावित नजर आए।