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  • NEET UG में 70 साल से अधिक उम्र के उम्मीदवारों की भागीदारी के बीच आयु और प्रयासों की सीमा तय करने पर विचार

    NEET UG में 70 साल से अधिक उम्र के उम्मीदवारों की भागीदारी के बीच आयु और प्रयासों की सीमा तय करने पर विचार


    नई दिल्ली ।
    नीट यूजी परीक्षा में अधिकतम आयु सीमा और प्रयासों की संख्या निर्धारित करने पर विचार किया जा सकता है। संसदीय स्थायी समिति ने इस संबंध में शिक्षा मंत्रालय, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और अन्य संबंधित पक्षों के साथ मिलकर उचित सीमा तय करने की संभावनाओं पर विचार करने की सिफारिश की है। फिलहाल नीट यूजी में शामिल होने के लिए उम्मीदवारों की अधिकतम आयु निर्धारित नहीं है और वे कितनी भी बार परीक्षा दे सकते हैं। इसी व्यवस्था के कारण 70 वर्ष से अधिक उम्र के उम्मीदवार भी मेडिकल प्रवेश परीक्षा में शामिल हो रहे हैं। वर्ष 2026 की नीट यूजी परीक्षा में 71 वर्षीय अशोक बहारा ने भी भाग लिया था।

    शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल मामलों की संसदीय स्थायी समिति ने शुक्रवार को राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी यानी एनटीए में सुधारों से संबंधित अपनी 382वीं रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट में नीट यूजी समेत प्रमुख परीक्षाओं के लिए आयु और प्रयासों की उचित सीमा तय करने की संभावनाओं पर विचार करने की जरूरत बताई गई है। समिति की अध्यक्षता राज्यसभा में कांग्रेस सांसद मुकुल वासनिक कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, समिति को जानकारी दी गई कि नीट यूजी में न तो प्रयासों की अधिकतम संख्या निर्धारित है और न ही उम्मीदवारों के लिए ऊपरी आयु सीमा लागू है।

    रिपोर्ट में नीट की पात्रता व्यवस्था की तुलना संयुक्त प्रवेश परीक्षा एडवांस्ड यानी जेईई एडवांस्ड से भी की गई है। जेईई एडवांस्ड में उम्र के आधार पर पात्रता तय होती है और उम्मीदवार लगातार दो वर्षों में अधिकतम दो बार परीक्षा दे सकते हैं। इसके विपरीत नीट यूजी में अधिकतम आयु और प्रयासों की कोई सीमा नहीं है। रिपोर्ट में इस व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए संबंधित मंत्रालयों और अन्य पक्षों के साथ विचार-विमर्श करके बड़ी परीक्षाओं के लिए उचित नियम तय करने की संभावनाओं पर विचार करने की सिफारिश की गई है।

    नीट में आयु सीमा लागू करने की कोशिश पहले भी हो चुकी है। वर्ष 2017 में केंद्र सरकार ने परीक्षा में शामिल होने के लिए अधिकतम तीन प्रयासों की सीमा तय की थी। इसके साथ सामान्य श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए ऊपरी आयु सीमा 25 वर्ष और आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए 30 वर्ष निर्धारित की गई थी। हालांकि, उसी वर्ष सुप्रीम कोर्ट ने आयु सीमा के मामले में हस्तक्षेप किया। इसके बाद अदालत में कार्यवाही लंबित रहने के दौरान 25 वर्ष और उससे अधिक उम्र के उम्मीदवारों को नीट यूजी 2019 के लिए अस्थायी रूप से आवेदन करने की अनुमति दी गई। बाद में मार्च 2022 में राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने अधिकतम आयु सीमा हटा दी।

    समिति ने नीट यूजी की परीक्षा प्रणाली में भी बदलाव का सुझाव दिया है। उसने कलम और कागज से होने वाली परीक्षा के स्थान पर कंप्यूटर आधारित परीक्षा यानी सीबीटी प्रणाली अपनाने की सिफारिश की। इसके लिए परीक्षा केंद्रों को केंद्र या राज्य सरकार के स्वामित्व और संचालन में रखने का सुझाव दिया गया है। समिति ने कहा कि इस व्यवस्था को लागू करने से पहले सुरक्षित सरकारी बुनियादी ढांचे में निवेश किया जाना चाहिए। खासतौर पर दूसरे और तीसरे दर्जे के शहरों तथा ग्रामीण क्षेत्रों में आवश्यक सुविधाओं का विस्तार करने पर जोर दिया गया है।

    परीक्षा केंद्रों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए समिति ने प्रत्येक जिले में कम से कम एक केंद्र स्थापित करने की सिफारिश की है। इसका उद्देश्य ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले उम्मीदवारों को परीक्षा व्यवस्था में बदलाव के कारण होने वाली असुविधा से बचाना और उनके यात्रा तथा ठहरने के खर्च को कम करना है। समिति ने यह भी कहा कि नई व्यवस्था तैयार करते समय उम्मीदवारों की जरूरतों और परीक्षा तक उनकी पहुंच का ध्यान रखा जाना चाहिए।

    एनटीए की कार्यप्रणाली और जवाबदेही को लेकर भी रिपोर्ट में कई सुझाव दिए गए हैं। नीट यूजी प्रश्नपत्र लीक होने और परीक्षा रद्द होने जैसी घटनाओं को ध्यान में रखते हुए समिति ने एजेंसी की संसद के दोनों सदनों के प्रति जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए विधायी तंत्र बनाने की सिफारिश की। रिपोर्ट में परीक्षा व्यवस्था पर विश्वास बनाए रखने को सामाजिक न्याय और राष्ट्रीय अखंडता से जुड़ा विषय बताया गया है। इसके अतिरिक्त, प्रश्न बैंकों का व्यापक विस्तार करने और परीक्षा केंद्र पर देर से पहुंचने वाले विद्यार्थियों को लिखित वचन देने के बाद परीक्षा में शामिल होने की अनुमति देने का सुझाव दिया गया है। समिति के अनुसार, प्रश्न बैंकों में निवेश प्रश्नपत्र लीक होने के जोखिम को लंबे समय तक कम करने का व्यावहारिक उपाय हो सकता है। एक ही प्रश्न समूह का बार-बार इस्तेमाल करना या हर वर्ष परीक्षकों से नए प्रश्नपत्र तैयार करवाना परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता के लिए जोखिम पैदा कर सकता है।

  • मध्य प्रदेश में इंटर्न डॉक्टरों के स्टाइपेंड पर बड़ा फैसला, 14,337 से बढ़कर अब 21,500 रुपये प्रतिमाह

    मध्य प्रदेश में इंटर्न डॉक्टरों के स्टाइपेंड पर बड़ा फैसला, 14,337 से बढ़कर अब 21,500 रुपये प्रतिमाह


    मध्य प्रदेश: के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में इंटर्न डॉक्टरों के लिए स्टाइपेंड बढ़ाने का औपचारिक आदेश जारी कर दिया गया है। लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने मासिक स्टाइपेंड 14,337 रुपये से बढ़ाकर 21,500 रुपये करने की प्रशासनिक स्वीकृति दी है। आदेश के अनुसार बढ़ी हुई राशि 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी मानी जाएगी। इससे प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप कर रहे छात्रों को बढ़ा हुआ स्टाइपेंड मिलेगा।

    विभाग की ओर से जारी आदेश में वर्तमान में प्रचलित 14,337 रुपये की राशि को संशोधित कर 21,500 रुपये प्रतिमाह निर्धारित किया गया है। इस तरह इंटर्न डॉक्टरों के मासिक स्टाइपेंड में 7,163 रुपये की वृद्धि हुई है। सितंबर में सरकार और इंटर्न डॉक्टरों के बीच सहमति बनने के बाद अब विभागीय स्तर पर इसकी औपचारिक प्रक्रिया पूरी कर दी गई है।

    स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों के इंटर्न डॉक्टर लंबे समय से अपनी मांग उठा रहे थे। सितंबर में यह मामला आंदोलन तक पहुंच गया था। भोपाल में प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारी डॉक्टरों के बीच स्थिति तनावपूर्ण हुई और वाटर कैनन के इस्तेमाल की घटना भी सामने आई। इसके बाद डॉक्टरों की मांग और प्रदर्शन से जुड़े घटनाक्रम को लेकर सरकार की ओर से हस्तक्षेप किया गया।

    इंटर्न डॉक्टरों की मांग पर उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल के साथ प्रतिनिधिमंडल की बातचीत हुई थी। चर्चा के दौरान स्टाइपेंड बढ़ाने के मुद्दे पर सहमति बनी और 21,500 रुपये प्रतिमाह देने की घोषणा की गई। इसके बाद आंदोलन समाप्त हुआ और विभागीय आदेश का इंतजार किया जा रहा था। अब आदेश जारी होने के साथ बढ़े हुए स्टाइपेंड को लागू करने की प्रक्रिया स्पष्ट हो गई है।

    इससे पहले इंटर्न डॉक्टरों को हर महीने 14,337 रुपये स्टाइपेंड मिलता था। आंदोलन के दौरान डॉक्टरों की ओर से इससे काफी अधिक राशि की मांग रखी गई थी। सरकार और डॉक्टरों के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत के बाद 21,500 रुपये की राशि पर सहमति बनी। अब आदेश में इसे 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी किए जाने से अप्रैल से सितंबर तक की अवधि के भुगतान को लेकर भी बढ़ी हुई दर लागू होने का आधार तैयार हो गया है।

    स्टाइपेंड में यह संशोधन सरकारी मेडिकल कॉलेजों में प्रशिक्षण ले रहे इंटर्न डॉक्टरों के लिए सीधे आर्थिक लाभ से जुड़ा फैसला है। इंटर्नशिप के दौरान डॉक्टर अस्पतालों में मरीजों की देखभाल, विभिन्न विभागों में चिकित्सकीय कार्य और प्रशिक्षण से जुड़ी जिम्मेदारियां निभाते हैं। ऐसे में स्टाइपेंड में बढ़ोतरी उनके प्रशिक्षण काल के दौरान मिलने वाली मासिक आर्थिक सहायता को बढ़ाएगी।

    सरकार और इंटर्न डॉक्टरों के बीच विवाद का एक प्रमुख मुद्दा स्टाइपेंड था, लेकिन आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई भी चर्चा में रही। प्रदर्शन के दौरान वाटर कैनन और बल प्रयोग के बाद मामला और गंभीर हुआ था। उप मुख्यमंत्री ने इस घटनाक्रम पर कार्रवाई की बात कही थी। इसके बाद स्टाइपेंड बढ़ाने के निर्णय के साथ आंदोलन समाप्त होने का रास्ता साफ हुआ।

    अब लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के आदेश के बाद 21,500 रुपये मासिक स्टाइपेंड की नई दर औपचारिक रूप से लागू हो गई है। 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होने के कारण यह निर्णय केवल आगे की अवधि तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आदेश में निर्धारित प्रभावी तारीख के आधार पर भुगतान की गणना की जाएगी।

  • इंडिगो के सह-संस्थापक राकेश गंगवाल की IIT कानपुर को 300 करोड़ की मदद, मेडिकल स्कूल और अस्पताल को मिलेगा विस्तार

    इंडिगो के सह-संस्थापक राकेश गंगवाल की IIT कानपुर को 300 करोड़ की मदद, मेडिकल स्कूल और अस्पताल को मिलेगा विस्तार


    नई दिल्ली ।आईआईटी कानपुर के पूर्व छात्र और इंडिगो के सह-संस्थापक राकेश गंगवाल ने अपने संस्थान को 300 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आर्थिक मदद देने का ऐलान किया है। यह राशि आईआईटी कानपुर में विकसित किए जा रहे गंगवाल स्कूल ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी के विस्तार और विकास में इस्तेमाल की जाएगी। इससे पहले वर्ष 2022 में गंगवाल ने इसी संस्थान के लिए 100 करोड़ रुपये का योगदान दिया था। इस तरह मेडिकल स्कूल के लिए उनका कुल योगदान 400 करोड़ रुपये हो जाएगा।

    राकेश गंगवाल का आईआईटी कानपुर से पुराना और मजबूत संबंध रहा है। उन्होंने वर्ष 1975 में संस्थान से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक की पढ़ाई पूरी की थी। इसके बाद उन्होंने अमेरिका के यूनिवर्सिटी ऑफ पेन्सिलवेनिया स्थित व्हार्टन स्कूल से एमबीए किया। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने विमानन क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत की और कई बड़ी एयरलाइनों के साथ काम किया।

    गंगवाल ने US एयरवेज, एयर फ्रांस और यूनाइटेड एयरलाइंस जैसी कंपनियों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। बाद में वर्ष 2006 में उन्होंने राहुल भाटिया के साथ मिलकर इंटरग्लोब एविएशन की शुरुआत की। इसी कंपनी के जरिए इंडिगो एयरलाइन का संचालन हुआ और भारतीय विमानन क्षेत्र में कंपनी ने तेजी से अपनी पहचान बनाई।

    आईआईटी कानपुर में मेडिकल शिक्षा और तकनीक को बढ़ावा देने के उद्देश्य से गंगवाल स्कूल ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी की स्थापना की गई है। संस्थान ने इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी के साथ चिकित्सा क्षेत्र में शोध, नवाचार और क्लिनिकल सुविधाओं को जोड़ने की दिशा में इस पहल को महत्वपूर्ण कदम के तौर पर विकसित किया है।

    गंगवाल स्कूल की विकास योजना में आईआईटी कानपुर परिसर में 500 बेड वाले सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल की स्थापना शामिल है। इसके अलावा 200 बेड वाले कैंसर केयर एवं रिसर्च सेंटर का भी प्रस्ताव है। इन सुविधाओं के जरिए मेडिकल शिक्षा, चिकित्सा अनुसंधान और मरीजों के लिए उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं को एक साथ आगे बढ़ाने की योजना है।

    राकेश गंगवाल की ओर से दी जा रही 300 करोड़ रुपये की नई राशि मैचिंग ग्रांट के तौर पर दी गई है। इसका मतलब है कि संस्थान के विकास के लिए अन्य सहयोगियों की ओर से जुटाए गए योगदान के बराबर गंगवाल ने भी सहयोग दिया है। इससे मेडिकल स्कूल की विकास योजनाओं को वित्तीय मजबूती मिलने की उम्मीद है।

    आईआईटी कानपुर ने वर्ष 2021 में मेडिकल स्कूल स्थापित करने का फैसला लिया था। इसका उद्देश्य इंजीनियरिंग, तकनीक और चिकित्सा के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना तथा स्वास्थ्य सेवाओं और मेडिकल रिसर्च के क्षेत्र में नई संभावनाएं तैयार करना था। वर्ष 2022 में गंगवाल के 100 करोड़ रुपये के योगदान के बाद इस योजना को महत्वपूर्ण आर्थिक आधार मिला।

    गंगवाल स्कूल ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी के डीन प्रो. अनिल के लालवानी हैं। संस्थान का मानना है कि गंगवाल का योगदान मेडिकल शिक्षा और शोध के क्षेत्र में दीर्घकालिक प्रभाव पैदा कर सकता है। उत्तर प्रदेश में उन्नत स्वास्थ्य सुविधाओं और चिकित्सा अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिहाज से भी इस परियोजना को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    राकेश गंगवाल का योगदान यह भी दर्शाता है कि किसी प्रतिष्ठित संस्थान के पूर्व छात्र उसके भविष्य के विकास में किस तरह बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। पांच दशक से अधिक समय पहले आईआईटी कानपुर से बीटेक करने वाले गंगवाल अब उसी संस्थान में मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए बड़ी आर्थिक भागीदारी कर रहे हैं।

  • इमरान खान की छह डॉक्टरों ने की मेडिकल जांच, अस्पताल में भर्ती नहीं किया गया, फिर अदियाला जेल भेजे गए

    इमरान खान की छह डॉक्टरों ने की मेडिकल जांच, अस्पताल में भर्ती नहीं किया गया, फिर अदियाला जेल भेजे गए

    नई दिल्ली ।पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को मेडिकल जांच के बाद एक बार फिर अदियाला जेल भेज दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद उन्हें कड़ी सुरक्षा के बीच शिफा इंटरनेशनल हॉस्पिटल ले जाया गया था। वहां छह विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने उनकी स्वास्थ्य संबंधी जांच की। जांच पूरी होने के बाद डॉक्टरों ने फिलहाल उन्हें अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत नहीं बताई, जिसके बाद उन्हें वापस जेल भेज दिया गया।

    इमरान खान लंबे समय से अदियाला जेल में बंद हैं और उनकी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। उनकी मेडिकल जांच कराने का मामला सुप्रीम कोर्ट के निर्देश से जुड़ा हुआ था। अदालत ने उनकी सेहत को ध्यान में रखते हुए निर्धारित समय के भीतर मेडिकल जांच कराने और जरूरत पड़ने पर उपचार उपलब्ध कराने की व्यवस्था करने को कहा था।

    सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद इमरान खान को शिफा इंटरनेशनल हॉस्पिटल ले जाने की प्रक्रिया शुरू हुई। अदालत की ओर से मेडिकल जांच के लिए मेडिकल बोर्ड गठित करने की बात भी कही गई थी। जांच और उपचार के दौरान डॉ. उजमा तथा इमरान खान के निजी चिकित्सक को भी मौजूद रहने की अनुमति दी गई थी। उनके इलाज से संबंधित खर्च उनके परिवार द्वारा वहन किए जाने की बात सामने आई थी।

    इमरान खान के अस्पताल पहुंचने से पहले वहां सुरक्षा व्यवस्था को काफी बढ़ा दिया गया था। अस्पताल के आसपास बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने भी मौके पर पहुंचकर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। अस्पताल में इमरान खान की मौजूदगी को देखते हुए प्रवेश और आवाजाही पर विशेष निगरानी रखी गई।

    छह विशेषज्ञ डॉक्टरों ने इमरान खान की स्वास्थ्य स्थिति का परीक्षण किया। मेडिकल जांच पूरी होने के बाद डॉक्टरों की राय के आधार पर उन्हें अस्पताल में भर्ती नहीं किया गया। इसके बाद सुरक्षा व्यवस्था के बीच उन्हें वापस अदियाला जेल ले जाया गया। फिलहाल उनकी स्वास्थ्य निगरानी जेल में ही किए जाने की बात सामने आई है।

    इमरान खान को निजी अस्पताल में जांच के लिए भेजे जाने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पाकिस्तान सरकार ने पहले असहमति जताई थी। केंद्र सरकार ने अदालत के आदेश पर पुनर्विचार की मांग करते हुए कहा था कि इमरान खान की स्वास्थ्य जांच पहले भी कई बार हो चुकी है और उनके लिए मेडिकल बोर्ड गठित किए जा चुके हैं।

    सरकार का तर्क था कि किसी कैदी को अस्पताल भेजने का फैसला उसकी वास्तविक स्वास्थ्य स्थिति और डॉक्टरों की सलाह के आधार पर होना चाहिए। सरकार ने निजी अस्पताल में जांच के आदेश पर सवाल उठाते हुए इसे लेकर अदालत में पुनर्विचार की कोशिश की थी।

    हालांकि, सरकार की पुनर्विचार याचिका को सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार कार्यालय ने कुछ कमियां बताते हुए वापस कर दिया था। इसके बाद अदालत के निर्देश के तहत इमरान खान को मेडिकल जांच के लिए अस्पताल ले जाया गया।

    मेडिकल जांच के बाद अस्पताल में भर्ती न किए जाने से फिलहाल इमरान खान को वापस जेल भेज दिया गया है। इस घटनाक्रम में अदालत के निर्देश, सरकार की आपत्ति और डॉक्टरों की मेडिकल राय तीनों महत्वपूर्ण पहलू रहे। इमरान खान की आगे की स्वास्थ्य निगरानी अदियाला जेल में ही किए जाने की संभावना है।

  • पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट से इमरान खान को बड़ी राहत, मेडिकल जांच के लिए दो दिन में अस्पताल शिफ्ट करने का आदेशपरिवार की हर सप्ताह मुलाकात होगी

    पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट से इमरान खान को बड़ी राहत, मेडिकल जांच के लिए दो दिन में अस्पताल शिफ्ट करने का आदेशपरिवार की हर सप्ताह मुलाकात होगी

    नई दिल्ली । पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को लंबे समय बाद सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। जेल में बंद इमरान खान के स्वास्थ्य से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने उन्हें मेडिकल जांच के लिए अस्पताल ले जाने का निर्देश दिया है। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को आदेश दिया है कि उन्हें दो दिन के भीतर इस्लामाबाद स्थित शिफा इंटरनेशनल अस्पताल में जांच के लिए ले जाया जाए।

    सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में इमरान खान के परिवार के सदस्यों से मुलाकात की व्यवस्था को लेकर भी स्पष्ट निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा कि जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री के परिवार के सदस्यों को उनसे प्रत्येक सप्ताह मुलाकात करने की सुविधा उपलब्ध कराई जानी चाहिए। इस व्यवस्था को सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों की होगी।

    मामले की सुनवाई तीन न्यायाधीशों की पीठ ने की। पीठ की अध्यक्षता जस्टिस शाहिद वाहिद ने की, जबकि जस्टिस नईम अख्तर अफगान और जस्टिस इश्तियाक इब्राहिम भी इसमें शामिल थे। इमरान खान के स्वास्थ्य और मेडिकल जांच से जुड़े मामले में दायर याचिका पर विस्तार से सुनवाई के बाद अदालत ने ये निर्देश जारी किए।

    अदालत ने संबंधित अधिकारियों से इमरान खान की स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखते हुए आवश्यक मेडिकल जांच कराने को कहा है। अस्पताल में उनकी जांच कराने का उद्देश्य उनके स्वास्थ्य से जुड़ी स्थिति का चिकित्सकीय आकलन करना है। सुप्रीम कोर्ट ने इसके साथ परिवार से नियमित संपर्क के अधिकार को लेकर भी स्पष्ट व्यवस्था करने का निर्देश दिया है।

    इससे पहले रावलपिंडी की अदियाला जेल के अधिकारियों ने अदालत को इमरान खान की आंखों की स्थिति के बारे में जानकारी दी थी। जेल अधिकारियों के मुताबिक उनकी आंखों की रोशनी अब लगभग सामान्य हो गई है और पहले की तुलना में उनकी स्थिति में सुधार हुआ है। इसके बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल जांच के लिए अस्पताल ले जाने का निर्देश दिया है।

    इमरान खान अगस्त 2023 से जेल में बंद हैं। उन्हें पांच अगस्त 2023 को तोशाखाना मामले में गिरफ्तार किया गया था। इस मामले में उन पर प्रधानमंत्री पद पर रहते हुए विदेशी मेहमानों से मिले महंगे उपहारों का कथित तौर पर गलत तरीके से निपटान करने और उनसे संबंधित जानकारी छिपाने के आरोप लगे थे।

    इमरान खान की जेल में लंबी अवधि के दौरान उनके स्वास्थ्य और परिवार से मुलाकात का मुद्दा लगातार चर्चा में रहा है। उनके समर्थक और परिवार समय समय पर उनके स्वास्थ्य तथा जेल में उपलब्ध सुविधाओं को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। अब सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश से उनके मेडिकल परीक्षण और परिवार से नियमित मुलाकात को लेकर स्पष्ट व्यवस्था बनने की उम्मीद है।

    अदालत के निर्देश के बाद संबंधित जेल और प्रशासनिक अधिकारियों के सामने अब इमरान खान को निर्धारित समयसीमा में अस्पताल ले जाने और उनके परिवार की साप्ताहिक मुलाकात सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी है। मेडिकल जांच के बाद उनकी स्वास्थ्य स्थिति से जुड़ी आगे की व्यवस्था चिकित्सकीय रिपोर्ट और संबंधित अधिकारियों के आकलन पर निर्भर करेगी।

    सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश इमरान खान के लिए इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे उन्हें जेल से बाहर अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकीय जांच कराने का अवसर मिलेगा। साथ ही परिवार से हर सप्ताह मुलाकात की व्यवस्था उनके परिजनों के साथ नियमित संपर्क बनाए रखने में मदद करेगी। अब संबंधित अधिकारियों द्वारा अदालत के निर्देशों के पालन पर नजर रहेगी।

  • नीट-यूजी के परीक्षा पैटर्न में बदलाव की तैयारी, कंप्यूटर आधारित परीक्षा और दो फेज मॉडल पर सरकार कर रही विचार

    नीट-यूजी के परीक्षा पैटर्न में बदलाव की तैयारी, कंप्यूटर आधारित परीक्षा और दो फेज मॉडल पर सरकार कर रही विचार

    नई दिल्ली । देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG के स्वरूप में आने वाले समय में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकते हैं। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने हलफनामे में बताया है कि परीक्षा को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और आधुनिक बनाने के लिए विभिन्न विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। इनमें कंप्यूटर आधारित परीक्षा प्रणाली और संयुक्त प्रवेश परीक्षा (JEE) की तर्ज पर दो चरणों में परीक्षा आयोजित करने का प्रस्ताव भी शामिल है। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस संबंध में अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।

    सरकार के अनुसार वर्तमान में NEET-UG पारंपरिक पेन और पेपर मोड में आयोजित की जाती है, लेकिन भविष्य में इसे कंप्यूटर आधारित परीक्षा यानी CBT मोड में कराने की संभावना पर विचार किया जा रहा है। इसके साथ ही परीक्षा को दो चरणों में आयोजित करने के विकल्प का भी अध्ययन किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि इन बदलावों से परीक्षा प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित, सुरक्षित और तकनीकी रूप से मजबूत बनाया जा सकता है।

    हलफनामे में यह भी कहा गया है कि परीक्षा प्रणाली में किसी भी प्रकार का बदलाव व्यापक विचार-विमर्श और विशेषज्ञों की सिफारिशों के आधार पर ही लागू किया जाएगा। इस उद्देश्य से गठित टास्क फोर्स अपनी रिपोर्ट तैयार कर रही है। रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद संबंधित मंत्रालयों, परीक्षा एजेंसियों और अन्य हितधारकों से चर्चा की जाएगी। इसके बाद ही किसी नए प्रारूप पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

    सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को यह भी आश्वस्त किया है कि यदि परीक्षा पैटर्न में कोई बदलाव किया जाता है तो उसे अचानक लागू नहीं किया जाएगा। छात्रों को पर्याप्त समय पहले नई व्यवस्था की जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी ताकि वे उसी के अनुरूप अपनी तैयारी कर सकें। इससे अभ्यर्थियों को नए प्रारूप को समझने और उसके अनुसार अभ्यास करने का पर्याप्त अवसर मिलेगा।

    परीक्षा की सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए भी कई उपायों पर विचार किया जा रहा है। इनमें बायोमेट्रिक सत्यापन, सुरक्षित प्रश्नपत्र वितरण प्रणाली, डिजिटल निगरानी और अन्य तकनीकी सुरक्षा उपाय शामिल हो सकते हैं। हाल के वर्षों में परीक्षा प्रक्रिया को लेकर उठे विभिन्न प्रश्नों और पारदर्शिता संबंधी चिंताओं को देखते हुए सरकार परीक्षा संचालन को अधिक विश्वसनीय बनाने की दिशा में काम कर रही है।

    शिक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भविष्य में कंप्यूटर आधारित परीक्षा और बहु-चरणीय प्रणाली लागू होती है तो इससे परीक्षा संचालन अधिक सुव्यवस्थित हो सकता है। हालांकि इसके लिए देशभर में तकनीकी ढांचे, परीक्षा केंद्रों की क्षमता और सभी अभ्यर्थियों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करना भी आवश्यक होगा। फिलहाल सरकार ने स्पष्ट किया है कि सभी पहलुओं पर विचार करने और आवश्यक तैयारियां पूरी होने के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।