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  • मीनाक्षी नटराजन के नामांकन रद्द होने पर मंदसौर में कांग्रेस का उग्र प्रदर्शन, पुलिस ने पानी की बौछार और बल प्रयोग कर रोका

    मीनाक्षी नटराजन के नामांकन रद्द होने पर मंदसौर में कांग्रेस का उग्र प्रदर्शन, पुलिस ने पानी की बौछार और बल प्रयोग कर रोका


    मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी माहौल लगातार गरमाता जा रहा है। कांग्रेस प्रत्याशी Meenakshi Natarajan का नामांकन निरस्त होने के विरोध में सोमवार को मंदसौर में कांग्रेस और युवक कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच तनावपूर्ण स्थिति बन गई, जिसके बाद पुलिस ने पानी की बौछार कर भीड़ को नियंत्रित करने का प्रयास किया और बाद में बल प्रयोग भी किया।

    जानकारी के अनुसार, बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता जिला कांग्रेस कार्यालय पर एकत्रित हुए थे। यहां से वे रैली के रूप में भाजपा कार्यालय का घेराव करने के लिए निकले। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि राज्यसभा चुनाव प्रक्रिया में लोकतांत्रिक मूल्यों की अनदेखी की गई है और इसी के विरोध में वे अपना प्रतिरोध दर्ज कराने पहुंचे थे।

    पुलिस प्रशासन ने गांधी चौराहे से बालाजी मंदिर के बीच पहले से ही बैरिकेडिंग कर सुरक्षा व्यवस्था की थी। जब प्रदर्शनकारी भाजपा कार्यालय की ओर बढ़ने लगे तो पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इसके बाद कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। कई प्रदर्शनकारी बैरिकेड्स पर चढ़ गए और सरकार विरोधी नारेबाजी करने लगे।

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों को शांतिपूर्वक समझाने का प्रयास किया गया, लेकिन भीड़ आगे बढ़ने पर अड़ी रही। इसके बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए फायर ब्रिगेड की मदद से पानी की बौछार की गई। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी सड़क पर बैठ गए और विरोध जारी रखा। बाद में पुलिस ने उन्हें हटाने के लिए हल्का बल प्रयोग किया।

    प्रदर्शन के दौरान कुछ कांग्रेस कार्यकर्ताओं के घायल होने की भी सूचना है। कांग्रेस नेताओं का दावा है कि कई कार्यकर्ताओं को चोटें आई हैं, जबकि पुलिस का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए।

    जिला कांग्रेस अध्यक्ष महेंद्र सिंह गुर्जर ने आरोप लगाया कि कांग्रेस कार्यकर्ता शांतिपूर्ण और गांधीवादी तरीके से विरोध प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन पुलिस ने अनावश्यक बल प्रयोग किया। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन किया जा रहा है और विपक्ष की आवाज दबाने का प्रयास हो रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि कार्यकर्ताओं को जबरन हिरासत में लिया गया।

    वहीं, पुलिस प्रशासन ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया है। सीएसपी जितेंद्र भास्कर के अनुसार, भाजपा कार्यालय घेराव के लिए आवश्यक अनुमति नहीं ली गई थी। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने और समझाने का प्रयास किया, लेकिन वे नहीं माने। इसके बाद कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पानी की बौछार और अन्य आवश्यक कदम उठाए गए।

    पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान 10 से अधिक कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया। बाद में उनके विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई। सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिले के विभिन्न थानों से अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात किया गया था।

    इस घटना के बाद मंदसौर में राजनीतिक माहौल और अधिक गरमा गया है। कांग्रेस नेताओं ने विरोध प्रदर्शन जारी रखने के संकेत दिए हैं, जबकि प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सतर्कता बढ़ा दी है।

  • राज्यसभा सांसद महेश केवट का दावा- मतदान होता तो कांग्रेस में टूट तय थी, हाईकोर्ट में भी नहीं टिकेगी चुनौती

    राज्यसभा सांसद महेश केवट का दावा- मतदान होता तो कांग्रेस में टूट तय थी, हाईकोर्ट में भी नहीं टिकेगी चुनौती


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश की तीसरी राज्यसभा सीट पर निर्विरोध निर्वाचित हुए भाजपा के नेता और नवनिर्वाचित सांसद Mahesh Kewat ने अपनी जीत को पार्टी नेतृत्व और संगठन के भरोसे की जीत बताया है। दैनिक भास्कर को दिए एक विशेष साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि भाजपा के पास पहले से ही पर्याप्त समर्थन मौजूद था और यदि मतदान की स्थिति बनती, तब भी पार्टी तीसरी सीट जीतने में सफल रहती।

    राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और तेलंगाना प्रभारी Meenakshi Natarajan का नामांकन खारिज होने के बाद महेश केवट निर्विरोध राज्यसभा सदस्य चुने गए। कांग्रेस ने इस फैसले को चुनौती देते हुए चुनाव आयोग और बाद में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन राहत नहीं मिली। अब कांग्रेस की ओर से हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दायर करने की तैयारी की जा रही है।

    इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए महेश केवट ने दावा किया कि कांग्रेस की ओर से प्रस्तुत दस्तावेजों और शपथ पत्र को लेकर जो विवाद सामने आया, उसमें जांच और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान भाजपा का पक्ष मजबूत साबित हुआ। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी कांग्रेस परिणाम स्वीकार करने को तैयार नहीं है, जबकि लोकतांत्रिक व्यवस्था में न्यायालयों के निर्णयों का सम्मान किया जाना चाहिए।

    महेश केवट ने कहा कि यदि चुनाव मतदान तक पहुंचता तो भाजपा को और अधिक समर्थन मिलता। उनका दावा था कि कई विधायक विकास और प्रदेश हित के मुद्दों को प्राथमिकता देते हैं तथा मुख्यमंत्री Mohan Yadav के नेतृत्व में चल रहे विकास कार्यों के कारण भाजपा को अतिरिक्त समर्थन हासिल होता। हालांकि यह उनका राजनीतिक दावा है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

    साक्षात्कार के दौरान उन्होंने अपने राजनीतिक सफर पर भी बात की। उन्होंने कहा कि वे लंबे समय से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा की विचारधारा से जुड़े रहे हैं तथा पार्टी द्वारा दिए गए विभिन्न दायित्वों का निर्वहन करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा संगठन कार्यकर्ताओं की क्षमता और योगदान को ध्यान में रखकर जिम्मेदारियां देता है। हाल ही में उन्हें मछुआ कल्याण बोर्ड का अध्यक्ष बनाया गया था और उसके बाद राज्यसभा के लिए उम्मीदवार घोषित किया गया।

    महेश केवट ने यह भी कहा कि निषाद और केवट समाज से राज्यसभा पहुंचने का अवसर मिलना उनके लिए गर्व की बात है। उन्होंने इसे भाजपा नेतृत्व द्वारा समाज के विभिन्न वर्गों को प्रतिनिधित्व देने की नीति का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि इससे समाज के लोगों में उत्साह का माहौल है और वे इसे सम्मान के रूप में देख रहे हैं।

    बुंदेलखंड क्षेत्र से आने वाले महेश केवट ने कहा कि राज्यसभा में पहुंचने के बाद उनकी प्राथमिकता क्षेत्रीय विकास, जल, रोजगार और आधारभूत सुविधाओं से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की रहेगी। उन्होंने प्रधानमंत्री Narendra Modi के विकसित भारत 2047 के विजन और राज्य सरकार के विकसित मध्य प्रदेश के लक्ष्य को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता भी जताई।

    दूसरी ओर, कांग्रेस लगातार यह आरोप लगाती रही है कि राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया में अनियमितताएं हुई हैं और वह कानूनी लड़ाई जारी रखेगी। अब इस मामले पर सभी की नजरें संभावित हाईकोर्ट याचिका और उसके परिणाम पर टिकी हैं।

  • मीनाक्षी नटराजन नामांकन विवाद पर कांग्रेस का हमला, भाजपा पर लगाया राजनीतिक षड्यंत्र का आरोप

    मीनाक्षी नटराजन नामांकन विवाद पर कांग्रेस का हमला, भाजपा पर लगाया राजनीतिक षड्यंत्र का आरोप


    मध्‍य प्रदेश । मंदसौर जिला कांग्रेस कार्यालय में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान कांग्रेस नेताओं ने राज्यसभा चुनाव से जुड़ा बड़ा राजनीतिक विवाद उठाया। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द कर दिया जाना भाजपा की राजनीतिक साजिश का हिस्सा है और यह लोकतांत्रिक मूल्यों पर सीधा हमला है।

    इस प्रेस वार्ता में पूर्व मंत्री नरेंद्र नाहटा, जिला कांग्रेस अध्यक्ष महेंद्र सिंह गुर्जर, पूर्व विधायक नवकृष्ण पाटिल, पूर्व विधायक पुष्पा भारती और पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष प्रकाश रातड़िया सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।

    जिला कांग्रेस अध्यक्ष महेंद्र सिंह गुर्जर ने कहा कि राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के पास स्पष्ट बहुमत था, इसके बावजूद भाजपा ने तीसरा उम्मीदवार उतारकर राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश की। उन्होंने आरोप लगाया कि जब यह रणनीति सफल नहीं हुई तो “मिथ्या आधार” पर आपत्ति लगाकर मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त कराया गया।

    कांग्रेस नेताओं ने इस पूरे घटनाक्रम को लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर गंभीर प्रहार बताया। उनका कहना है कि यह केवल एक उम्मीदवार का मामला नहीं, बल्कि निष्पक्ष चुनाव व्यवस्था और संवैधानिक मूल्यों को कमजोर करने की कोशिश है।

    पूर्व मंत्री नरेंद्र नाहटा ने कहा कि भाजपा लगातार लोकतंत्र को कमजोर करने की दिशा में काम कर रही है, जबकि पूर्व विधायक नवकृष्ण पाटिल ने आरोप लगाया कि सत्ता का दुरुपयोग कर पूरी चुनावी व्यवस्था को प्रभावित करने का प्रयास किया जा रहा है।

    पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष प्रकाश रातड़िया ने दावा किया कि मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ किसी भी आपराधिक मामले में न तो कोर्ट ने संज्ञान लिया है और न ही कोई मामला लंबित है। उन्होंने कहा कि नामांकन निरस्त करने का कोई वैधानिक आधार नहीं था। कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी कि वे इस मामले को लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से आगे भी उठाते रहेंगे।

  • राज्यसभा नामांकन विवाद पर भाजपा का कांग्रेस पर हमला, ‘नारी सम्मान’ पर उठाए सवाल

    राज्यसभा नामांकन विवाद पर भाजपा का कांग्रेस पर हमला, ‘नारी सम्मान’ पर उठाए सवाल


    मध्य प्रदेश। मध्यप्रदेश के मंदसौर में राज्यसभा नामांकन विवाद को लेकर राजनीतिक तनाव बढ़ गया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए उसके ‘नारी सम्मान’ के दावे को केवल नारा बताया और उस पर दोहरे चरित्र का आरोप लगाया।

    जिला भाजपा कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में भाजपा जिलाध्यक्ष राजेश दीक्षित और जिला पंचायत अध्यक्ष दुर्गा पाटीदार ने कांग्रेस पर कई गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि कांग्रेस महिला सम्मान की बात तो करती है, लेकिन उसके व्यवहार में यह दिखाई नहीं देता।

    भाजपा नेताओं ने कहा कि राज्यसभा नामांकन विवाद के बाद कांग्रेस द्वारा मीनाक्षी नटराजन के नामांकन रद्द होने को महिला सम्मान का मुद्दा बनाया जा रहा है, जबकि वास्तविक मामला नामांकन पत्र में तथ्यों को छिपाने का है।

    प्रेस वार्ता में यह भी आरोप लगाया गया कि कांग्रेस नेतृत्व ने एक महिला कार्यकर्ता से जुड़े मामले में गंभीर शिकायतों को अनदेखा किया। भाजपा ने दावा किया कि संबंधित प्रकरण में कांग्रेस नेता कुंभम शिवकुमार रेड्डी पर गंभीर आरोप लगे थे और उस समय तत्कालीन तेलंगाना प्रभारी के रूप में मीनाक्षी नटराजन की भूमिका पर भी सवाल उठे थे।

    भाजपा का कहना है कि नामांकन पत्र में न्यायिक कार्यवाही और संबंधित तथ्यों का उल्लेख नहीं किया गया, जो कि नामांकन निरस्त होने का प्रमुख कारण बना। साथ ही यह भी आरोप लगाया गया कि कांग्रेस ने आरोपी नेता को संरक्षण दिया और पीड़ित महिला की शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया।

    भाजपा नेताओं ने कांग्रेस से कई सवाल पूछते हुए कहा कि यदि न्यायिक कार्यवाही की जानकारी थी तो उसे शपथ पत्र में क्यों नहीं बताया गया और महिला शिकायतों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

    प्रेस वार्ता में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का भी उल्लेख किया गया, जिसमें मीनाक्षी नटराजन की याचिका को खारिज कर दिया गया था। अदालत ने चुनावी प्रक्रिया में हस्तक्षेप की सीमाओं का हवाला देते हुए कहा था कि ऐसे मामलों में चुनाव परिणाम के बाद ही कानूनी चुनौती दी जा सकती है।

    भाजपा नेताओं ने कहा कि कांग्रेस को महिला सम्मान के मुद्दे पर बयानबाजी करने से पहले अपने संगठनात्मक व्यवहार की समीक्षा करनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी में महिलाओं से जुड़े मामलों में कई बार शिकायतों को अनदेखा किया जाता है।

    अंत में भाजपा ने कहा कि यह मामला केवल एक चुनावी विवाद नहीं है, बल्कि कांग्रेस की जवाबदेही और महिला सम्मान के प्रति उसके वास्तविक दृष्टिकोण पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

  • मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने पर उज्जैन में युवा कांग्रेस का प्रदर्शन, चुनाव आयोग का पुतला जलाने पर पुलिस से हुई नोकझोंक

    मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने पर उज्जैन में युवा कांग्रेस का प्रदर्शन, चुनाव आयोग का पुतला जलाने पर पुलिस से हुई नोकझोंक


    मध्य प्रदेश। उज्जैन में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने के विरोध में गुरुवार शाम युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शहर के टावर चौक पर प्रदर्शन किया। इस दौरान चुनाव आयोग के खिलाफ नारेबाजी की गई और प्रतीकात्मक रूप से पुतला दहन कर विरोध जताया गया। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच कुछ समय के लिए तनावपूर्ण स्थिति भी बन गई।

    जानकारी के अनुसार युवा कांग्रेस के शहर अध्यक्ष अर्पित यादव के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शाम करीब सात बजे टावर चौक पर एकत्रित हुए। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ नारे लगाए तथा नामांकन निरस्तीकरण के फैसले पर नाराजगी व्यक्त की। विरोध प्रदर्शन के तहत कार्यकर्ताओं ने टावर चौक क्षेत्र में रैली निकालते हुए दो चक्कर लगाए और इसके बाद पुतला दहन की तैयारी की।

    मौके पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल की तैनाती की गई थी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार जैसे ही प्रदर्शनकारी पुतले को दहन के लिए आगे बढ़ाने लगे, पुलिस ने उसे रोकने और अपने कब्जे में लेने का प्रयास किया। इस दौरान पुलिसकर्मियों और कार्यकर्ताओं के बीच पुतला छीनने को लेकर छीना-झपटी की स्थिति बन गई।

    बताया गया कि पुलिस पुतले का एक हिस्सा अपने कब्जे में लेने में सफल रही, लेकिन उससे पहले पुतला आंशिक रूप से जल चुका था। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने चुनाव आयोग के एक अधिकारी की तस्वीर लगे कागज को प्रतीकात्मक रूप से जलाकर अपना विरोध दर्ज कराया। घटना के दौरान कुछ समय के लिए टावर चौक पर अफरा-तफरी जैसी स्थिति भी बनी रही, हालांकि पुलिस ने हालात को नियंत्रित कर लिया।

    युवा कांग्रेस अध्यक्ष अर्पित यादव ने आरोप लगाया कि राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया में निष्पक्षता और पारदर्शिता का पालन नहीं किया गया। उनका दावा है कि कांग्रेस प्रत्याशी के नामांकन को निरस्त किया जाना लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। उन्होंने कहा कि पार्टी लोकतंत्र और संवैधानिक प्रक्रियाओं की रक्षा के लिए अपना संघर्ष जारी रखेगी।

    हालांकि नामांकन निरस्तीकरण को लेकर अंतिम निर्णय और उससे जुड़े कानूनी पहलुओं पर संबंधित निर्वाचन अधिकारियों की प्रक्रिया अलग से जारी है। मामले को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों की ओर से भी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

    प्रदर्शन में शहर कांग्रेस अध्यक्ष मुकेश भाटी सहित पार्टी के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल हुए। पूरे घटनाक्रम के दौरान पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने स्थिति पर नजर बनाए रखी। फिलहाल प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से समाप्त हो गया, लेकिन इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक बयानबाजी जारी रहने की संभावना है।

  • कांग्रेस में फिर दिखी अंदरूनी कलह! मंच पर दिग्विजय-हरीश चौधरी की कथित तकरार, राज्यसभा विवाद पर गरमाई सियासत

    कांग्रेस में फिर दिखी अंदरूनी कलह! मंच पर दिग्विजय-हरीश चौधरी की कथित तकरार, राज्यसभा विवाद पर गरमाई सियासत


    मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश की राजनीति इन दिनों राज्यसभा चुनाव को लेकर काफी गरमाई हुई है। कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने के बाद जहां पार्टी लगातार विरोध दर्ज करा रही है, वहीं इस पूरे घटनाक्रम के बीच कांग्रेस के भीतर की कथित खींचतान भी चर्चा में आ गई है। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का वीडियो सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में तेजी से चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और प्रदेश कांग्रेस प्रभारी हरीश चौधरी के बीच कथित असहजता नजर आती है।

    वीडियो में दिखाई देता है कि प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिग्विजय सिंह, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी की ओर संकेत करते हुए कांग्रेस नेता जेपी धनोपिया को अपनी बात रखने के लिए कहते हैं। इसी दौरान हरीश चौधरी उन्हें रोकते हुए कुछ कहते नजर आते हैं। इसके बाद दिग्विजय सिंह हाथ जोड़कर उनका अभिवादन करते हैं, धन्यवाद कहते हैं और फिर शांत होकर बैठ जाते हैं। हालांकि वीडियो में दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत स्पष्ट रूप से सुनाई नहीं देती, लेकिन उनके हाव-भाव को लेकर राजनीतिक विश्लेषण शुरू हो गया है।

    इसके बाद जीतू पटवारी कई बार दिग्विजय सिंह से अपनी बात रखने का आग्रह करते दिखाई देते हैं, लेकिन दिग्विजय सिंह ‘हो गया’ कहकर मना कर देते हैं। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक पर्यवेक्षक अलग-अलग राय व्यक्त कर रहे हैं। कुछ इसे कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के बीच मतभेद का संकेत मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे पार्टी की आंतरिक राजनीति और गुटबाजी से जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि कांग्रेस की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक टिप्पणी सामने नहीं आई है।

    इधर राज्यसभा चुनाव में भाजपा के तीन उम्मीदवारों के निर्विरोध निर्वाचित होने के बावजूद पार्टी कार्यालय में जश्न का माहौल नहीं दिखाई दिया। प्रमाण पत्र प्राप्त करने के बाद नवनिर्वाचित सांसद सीधे पार्टी नेतृत्व से मिलने पहुंचे, लेकिन प्रदेश कार्यालय में सामान्य चुनावी जीत की तरह न तो ढोल-नगाड़े बजे और न ही सार्वजनिक उत्सव देखने को मिला। राजनीतिक हलकों में इसे लेकर भी चर्चाओं का दौर जारी है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्यसभा की तीसरी सीट को लेकर चल रहा कानूनी विवाद इसका एक कारण हो सकता है। कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने के मामले में न्यायिक प्रक्रिया जारी है और मामला उच्चतम न्यायालय तक पहुंच चुका है। ऐसे में भाजपा की ओर से संयमित रवैया अपनाए जाने की चर्चा हो रही है, हालांकि पार्टी ने इस विषय पर कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया है।

    इस बीच पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने नामांकन निरस्त होने के मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के साथ अन्याय हुआ है और पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं रही। दिग्विजय सिंह ने दावा किया कि इस मामले में कई संस्थाओं की भूमिका सवालों के घेरे में है। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी याचिका पर समय रहते सुनवाई नहीं होने से कांग्रेस को नुकसान उठाना पड़ा। उनके इन आरोपों पर भाजपा ने कड़ा विरोध जताते हुए इसे न्यायपालिका की गरिमा पर सवाल खड़ा करने वाला बयान बताया है। भाजपा नेताओं ने कहा है कि न्यायालय के संबंध में की गई ऐसी टिप्पणियां अनुचित हैं और मामले पर उचित संज्ञान लिया जाना चाहिए।

    राज्यसभा चुनाव का यह विवाद अब केवल चुनावी प्रक्रिया तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसके राजनीतिक और संगठनात्मक प्रभाव भी सामने आने लगे हैं। आने वाले दिनों में न्यायालय की सुनवाई और राजनीतिक दलों की अगली रणनीति पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी।

  • मीनाक्षी नटराजन के नामांकन विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में कल सुनवाई: कांग्रेस ने तेज की कानूनी और राजनीतिक लड़ाई

    मीनाक्षी नटराजन के नामांकन विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में कल सुनवाई: कांग्रेस ने तेज की कानूनी और राजनीतिक लड़ाई


    मध्‍य प्रदेश । मध्य प्रदेश की राज्यसभा चुनावी राजनीति में मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पत्र को लेकर जारी विवाद अब सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में पहुंच गया है। कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द किए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई की मांग पर फैसला सुरक्षित रखते हुए मामले को शुक्रवार के लिए सूचीबद्ध कर दिया है। इस बीच कांग्रेस ने कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर अपनी सक्रियता बढ़ा दी है।

    सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान कांग्रेस की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि मामले की तत्काल सुनवाई आवश्यक है क्योंकि नामांकन वापसी की समय-सीमा बेहद निकट है। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि यदि विस्तृत सुनवाई अगले दिन हो तो भी तब तक चुनाव परिणाम घोषित न किए जाएं। दूसरी ओर चुनाव आयोग की ओर से कहा गया कि याचिका की प्रति उन्हें उपलब्ध नहीं कराई गई है और मामले का अध्ययन करने के लिए समय चाहिए।

    अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मामले को शुक्रवार तक के लिए सूचीबद्ध कर दिया। इसके बाद कांग्रेस नेतृत्व ने दिल्ली में वरिष्ठ नेताओं की बैठक बुलाई, जिसमें आगे की रणनीति पर चर्चा की जा रही है। वहीं मध्य प्रदेश कांग्रेस के विधायक राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर इस पूरे प्रकरण को उठाने की तैयारी में हैं।

    राजनीतिक गलियारों में इस मामले को लेकर चर्चाएं तेज हैं क्योंकि मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने के बाद राज्यसभा चुनाव का गणित पूरी तरह बदल गया है। यदि कांग्रेस उम्मीदवार चुनावी मैदान से बाहर रहती हैं तो भाजपा के तीनों उम्मीदवारों के निर्विरोध निर्वाचित होने की संभावना बढ़ जाएगी। भाजपा की ओर से महेश केवट के साथ-साथ अन्य दो उम्मीदवारों का निर्वाचन भी बिना मतदान के संभव हो सकता है।

    विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि आयोग ने समय रहते निर्णय नहीं लिया। उन्होंने कहा कि आयोग चाहे तो इस मामले में हस्तक्षेप कर सकता था, जैसा कि अन्य राज्यों के कुछ मामलों में किया गया था। हालांकि ये आरोप कांग्रेस की राजनीतिक प्रतिक्रिया का हिस्सा हैं और इस संबंध में चुनाव आयोग की ओर से कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

    विवाद की जड़ 9 जून को हुई नामांकन पत्रों की जांच प्रक्रिया में है, जब रिटर्निंग ऑफिसर ने मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज कर दिया था। भाजपा ने आपत्ति उठाई थी कि उम्मीदवार ने अपने चुनावी हलफनामे में तेलंगाना की एक अदालत से जुड़े मामले की जानकारी नहीं दी। कांग्रेस का तर्क है कि संबंधित प्रकरण केवल एक निजी शिकायत और नोटिस तक सीमित है तथा इसे लंबित आपराधिक मामला नहीं माना जा सकता।

    अब सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि आयोग या अदालत कांग्रेस के पक्ष में राहत देती है तो राज्यसभा चुनाव फिर से मुकाबले की स्थिति में आ सकता है। वहीं यदि नामांकन रद्द रहने का फैसला बरकरार रहता है तो भाजपा के उम्मीदवारों के निर्विरोध निर्वाचित होने का रास्ता साफ हो सकता है।

    फिलहाल कानूनी प्रक्रिया जारी है और अंतिम स्थिति अदालत तथा संवैधानिक संस्थाओं के निर्णय के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

  • मीनाक्षी नटराजन के नामांकन निरस्त होने पर देवास में कांग्रेस का धरना, भाजपा पर लगाए गंभीर आरोप

    मीनाक्षी नटराजन के नामांकन निरस्त होने पर देवास में कांग्रेस का धरना, भाजपा पर लगाए गंभीर आरोप


    मध्यप्रदेश। राज्यसभा चुनाव को लेकर मध्यप्रदेश की राजनीति में जारी हलचल के बीच कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र निरस्त होने के विरोध में देवास में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। बुधवार को शहर कांग्रेस इकाई के नेतृत्व में पुष्कर मंडूक तालाब के समीप धरना आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने भाजपा सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपना विरोध दर्ज कराया।

    कांग्रेस का यह धरना करीब पांच घंटे तक चला। इस दौरान पार्टी नेताओं ने नामांकन पत्र निरस्त किए जाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए और इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए चिंताजनक बताया। कांग्रेस नेताओं का कहना था कि राज्यसभा चुनाव जैसे महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस प्रत्याशी का नामांकन खारिज होना सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक सुनियोजित राजनीतिक कदम प्रतीत होता है।

    धरना स्थल पर मौजूद नेताओं ने भाजपा पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि विपक्षी उम्मीदवार को चुनावी मुकाबले से बाहर करने के उद्देश्य से साजिश रची गई है। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित पक्ष की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सभी राजनीतिक दलों को समान अवसर मिलना चाहिए और चुनावी प्रक्रिया किसी भी प्रकार के पक्षपात या दबाव से मुक्त होनी चाहिए।

    प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि नामांकन पत्र निरस्त होने की घटना लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करती है। कांग्रेस नेताओं ने इसे लोकतंत्र के इतिहास का एक “काला दिन” बताते हुए कहा कि यदि ऐसी घटनाओं पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो लोकतांत्रिक परंपराओं को नुकसान पहुंच सकता है। उन्होंने कहा कि पार्टी इस मुद्दे को केवल राजनीतिक मामला नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा विषय मानती है।

    धरने में शहर कांग्रेस जिला अध्यक्ष प्रयास गौतम सहित पार्टी के कई वरिष्ठ पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। नेताओं ने अपने संबोधन में कहा कि कांग्रेस लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की रक्षा के लिए संघर्ष करती रहेगी और इस मुद्दे को जन-जन तक पहुंचाएगी। उन्होंने निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया सुनिश्चित करने और पूरे मामले की पारदर्शी समीक्षा की मांग भी उठाई।

    धरना-प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखी और प्रशासन के माध्यम से संबंधित अधिकारियों तक अपनी आपत्तियां पहुंचाने का प्रयास किया। पार्टी नेताओं ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध दर्ज कराना जनता और राजनीतिक दलों का संवैधानिक अधिकार है तथा वे इसी अधिकार के तहत अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं।

    फिलहाल राज्यसभा चुनाव और नामांकन विवाद को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर प्रदेश की राजनीति में और भी गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं। वहीं कांग्रेस ने संकेत दिए हैं कि वह इस मामले को लेकर अपना विरोध आगे भी जारी रखेगी।

  • राज्यसभा नामांकन विवाद पर जबलपुर में कांग्रेस का धरना, भाजपा और निर्वाचन प्रक्रिया पर उठाए सवाल

    राज्यसभा नामांकन विवाद पर जबलपुर में कांग्रेस का धरना, भाजपा और निर्वाचन प्रक्रिया पर उठाए सवाल


    मध्यप्रदेश। राज्यसभा चुनाव को लेकर मध्यप्रदेश की राजनीति में जारी विवाद अब सड़कों तक पहुंच गया है। कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त किए जाने के विरोध में बुधवार को जबलपुर तहसील कार्यालय के बाहर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने गांधीवादी तरीके से धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में पार्टी के नगर और ग्रामीण संगठन से जुड़े पदाधिकारी, कार्यकर्ता और जनप्रतिनिधि शामिल हुए। कांग्रेस नेताओं ने निर्वाचन प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए फैसले के खिलाफ विरोध दर्ज कराया।

    दोपहर 12 बजे शुरू हुआ यह धरना शाम तक जारी रहा। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखी और निर्वाचन आयोग के निर्णय पर पुनर्विचार की मांग की। कार्यक्रम में कांग्रेस के नगर अध्यक्ष, ग्रामीण अध्यक्ष सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे। धरना स्थल पर पार्टी नेताओं ने संबोधन करते हुए राज्यसभा चुनाव से जुड़े घटनाक्रम को लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंताजनक बताया।

    कांग्रेस विधायक एवं पूर्व मंत्री लखन घनघोरिया ने सभा को संबोधित करते हुए भाजपा और राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया को लेकर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस की उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन लंबे समय से सामाजिक और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में सक्रिय रही हैं, लेकिन उनके नामांकन को निरस्त कर लोकतांत्रिक मूल्यों की अनदेखी की गई है। घनघोरिया ने कहा कि उनकी पार्टी इस फैसले को लोकतंत्र और राजनीतिक शुचिता के खिलाफ मानती है।

    अपने संबोधन में कांग्रेस विधायक ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कई राजनीतिक टिप्पणियां भी कीं। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ताधारी दल लोकतांत्रिक संस्थाओं और राजनीतिक परंपराओं का सम्मान नहीं कर रहा है। घनघोरिया ने यह भी दावा किया कि कांग्रेस के पास राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए पर्याप्त समर्थन था और राजनीतिक परंपरा के अनुसार विपक्ष को प्रतिनिधित्व मिलने का अवसर दिया जाना चाहिए था।

    कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि राज्यसभा चुनाव के दौरान विपक्ष को कमजोर करने के प्रयास किए गए। हालांकि ये आरोप कांग्रेस की ओर से लगाए गए हैं और इन पर संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है। प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने कहा कि वे इस मुद्दे को लोकतांत्रिक और संवैधानिक दायरे में उठाते रहेंगे।

    धरना-प्रदर्शन में मौजूद कार्यकर्ताओं ने हाथों में तख्तियां लेकर शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराया। कांग्रेस का कहना है कि नामांकन निरस्त किए जाने के फैसले को लेकर पार्टी कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर अपनी लड़ाई जारी रखेगी। वहीं पार्टी नेताओं ने निर्वाचन प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई।

    राज्यसभा चुनाव को लेकर उत्पन्न यह विवाद प्रदेश की राजनीति में लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। एक ओर कांग्रेस इस फैसले को लोकतांत्रिक अधिकारों पर चोट बता रही है, वहीं दूसरी ओर निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े निर्णयों की वैधता और नियमों को लेकर बहस जारी है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

    फिलहाल जबलपुर में हुए इस धरना-प्रदर्शन ने राज्यसभा चुनाव से जुड़े विवाद को एक बार फिर राजनीतिक केंद्र में ला दिया है। अब सभी की नजर इस मामले में आगे होने वाली राजनीतिक और कानूनी कार्रवाई पर टिकी हुई है।

  • मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने पर कांग्रेस का मौन सत्याग्रह, लोकतंत्र पर हमले का लगाया आरोप

    मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने पर कांग्रेस का मौन सत्याग्रह, लोकतंत्र पर हमले का लगाया आरोप


    मध्यप्रदेश। राज्यसभा चुनाव को लेकर मध्य प्रदेश की राजनीति में जारी हलचल के बीच कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। इसी कड़ी में मंगलवार को उज्जैन में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मौन प्रदर्शन कर अपना विरोध दर्ज कराया। पार्टी ने नामांकन निरस्त किए जाने की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए चिंताजनक बताया।

    उज्जैन के टॉवर चौक स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा के समक्ष आयोजित इस मौन प्रदर्शन में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, पदाधिकारी और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए। दोपहर एक बजे शुरू हुए कार्यक्रम में नेता प्रतिपक्ष रवि राय, कांग्रेस नेता अजित सिंह, महिला कांग्रेस, सेवा दल, यूथ कांग्रेस, एनएसयूआई, आईटी सेल, ब्लॉक अध्यक्ष, ब्लॉक प्रभारी, पार्षद और अन्य संगठनात्मक इकाइयों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

    प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने हाथों में तख्तियां लेकर शांतिपूर्ण तरीके से विरोध जताया। नेताओं का कहना था कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता सर्वोपरि होती है तथा किसी भी उम्मीदवार के नामांकन से जुड़े निर्णयों में सभी संवैधानिक प्रावधानों का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

    नेता प्रतिपक्ष रवि राय ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त किया जाना लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस फैसले से न केवल पार्टी के उम्मीदवार को चुनावी प्रक्रिया से बाहर किया गया, बल्कि कांग्रेस के विधायकों के मतदान अधिकार भी प्रभावित हुए। उन्होंने यह भी दावा किया कि यदि नामांकन पत्र में किसी प्रकार की तकनीकी या प्रक्रियागत कमी थी तो उसे नियमानुसार दूर करने का अवसर दिया जा सकता था।

    कांग्रेस नेता अजित सिंह ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पार्टी इस पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से देख रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि नामांकन निरस्त किए जाने के पीछे सुनियोजित प्रयास हो सकते हैं। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

    प्रदर्शनकारियों ने डॉ. आंबेडकर की प्रतिमा के समक्ष संविधान और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की बात कही। कांग्रेस नेताओं ने संकेत दिया कि यदि उनकी मांगों पर उचित विचार नहीं किया गया तो पार्टी आगे भी विभिन्न लोकतांत्रिक माध्यमों से विरोध दर्ज कराएगी।

    राज्यसभा चुनाव के इस घटनाक्रम ने प्रदेश की राजनीति में नई बहस को जन्म दिया है। एक ओर कांग्रेस चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठा रही है, वहीं दूसरी ओर निर्वाचन संबंधी प्रक्रियाओं और नियमों को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा का केंद्र बना रह सकता है।

    फिलहाल उज्जैन में हुआ यह मौन प्रदर्शन कांग्रेस के उस व्यापक विरोध अभियान का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके माध्यम से पार्टी नामांकन निरस्त किए जाने के फैसले के खिलाफ अपनी आपत्ति दर्ज करा रही है।