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  • मेरठ सांप कांड में पत्नी रविता और प्रेमी अमरदीप को फांसी, पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खुला हत्या का राज

    मेरठ सांप कांड में पत्नी रविता और प्रेमी अमरदीप को फांसी, पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खुला हत्या का राज


    नई दिल्ली ।उत्तर प्रदेश के मेरठ में चर्चित सांप कांड में अदालत ने अमित कश्यप की हत्या के मामले में उसकी पत्नी रविता और उसके प्रेमी अमरदीप को फांसी की सजा सुनाई है। बहसूमा थाना क्षेत्र के अकबरपुर सादात गांव से जुड़े इस मामले में दोनों को हत्या का दोषी पाया गया। अपर जिला जज, कोर्ट संख्या-12 ने मामले की सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया। इस प्रकरण में शुरुआत में अमित की मौत को सांप के काटने से हुई घटना माना जा रहा था, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद जांच की दिशा बदल गई।

    यह घटना 12 अप्रैल 2025 की है। उस दिन अमित कश्यप अपने घर के अंदर मृत पाया गया था। उसके शव के पास एक सांप भी मौजूद था। घटनास्थल पर पहुंचे पुलिसकर्मियों ने सांप को पकड़कर एक डिब्बे में बंद कर दिया और अमित के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। शुरुआती परिस्थितियों में आशंका जताई गई कि अमित की मौत सर्पदंश के कारण हुई होगी।

    हालांकि, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह दम घुटना सामने आई। इस खुलासे के बाद पुलिस ने मामले को संभावित हत्या के रूप में लेकर जांच शुरू की। जांच आगे बढ़ने पर अमित की पत्नी रविता और गांव के ही युवक अमरदीप के संबंधों की जानकारी सामने आई। पुलिस के मुताबिक, रविता और अमरदीप के बीच प्रेम संबंध थे और अमरदीप का अमित के घर आना-जाना लगा रहता था। वह अमित के साथ काम भी करता था।

    जांच में आरोप लगाया गया कि रविता और अमरदीप ने मिलकर अमित की हत्या की योजना बनाई थी। इसके बाद उसकी मौत को सांप के काटने से हुई घटना के रूप में दिखाने की कोशिश की गई। पुलिस ने इस मामले में उस व्यक्ति से भी पूछताछ की, जिस पर सांप उपलब्ध कराने का आरोप था। जांच के दौरान उसे सरकारी गवाह बनाया गया। अभियोजन पक्ष ने अदालत के समक्ष ऐसे साक्ष्य पेश किए, जिनके आधार पर दोनों आरोपियों के खिलाफ हत्या की साजिश और वारदात में शामिल होने का मामला रखा गया।

    अदालत ने सुनवाई के दौरान पेश किए गए साक्ष्यों और मामले से जुड़े तथ्यों पर विचार किया। सात अक्टूबर 2026 को रविता और अमरदीप को हत्या का दोषी ठहराया गया था। इसके बाद 16 अक्टूबर को दोनों को मृत्युदंड सुनाए जाने की जानकारी सामने आई। इस फैसले के साथ ही अमित कश्यप की हत्या का मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। हालांकि, मृत्युदंड के फैसले के बाद आगे की न्यायिक प्रक्रिया और अपील की स्थिति इस मामले में महत्वपूर्ण होगी।

    मेरठ में यह मामला उस चर्चित नीले ड्रम हत्याकांड की याद भी दिला रहा है, जिसमें सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में उसकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल को भी फांसी की सजा सुनाए जाने की खबर सामने आई थी। दोनों मामलों में पति की हत्या के आरोप में पत्नी और उसके प्रेमी को दोषी ठहराए जाने की समानता चर्चा का विषय बनी है।

    अमित कश्यप हत्याकांड में सबसे अहम मोड़ पोस्टमार्टम रिपोर्ट रही, जिसने शुरुआती तौर पर दिखाई दे रही सर्पदंश की आशंका को बदल दिया। इसके बाद पुलिस की जांच, आरोपियों के संबंधों और अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए साक्ष्यों के आधार पर मामला अदालत तक पहुंचा। अदालत के फैसले के बाद अब इस प्रकरण में आगे की कानूनी प्रक्रिया पर नजर रहेगी।

  • मेरठ ब्लू ड्रम हत्याकांड में मुस्कान और साहिल को मौत की सजा, सौरभ राजपूत हत्याकांड की पूरी कहानी डॉक्यू-सीरीज में दिखाई गई

    मेरठ ब्लू ड्रम हत्याकांड में मुस्कान और साहिल को मौत की सजा, सौरभ राजपूत हत्याकांड की पूरी कहानी डॉक्यू-सीरीज में दिखाई गई

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के मेरठ में चर्चित ब्लू ड्रम हत्याकांड में जिला अदालत ने सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में उनकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को मौत की सजा सुनाई है। बुधवार को आए इस फैसले के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। इस हत्याकांड की घटनाओं, पुलिस जांच और आरोपियों से जुड़े घटनाक्रम को ‘हनीमून से हत्या’ नाम की डॉक्यू-सीरीज में भी प्रस्तुत किया गया है।

    यह डॉक्यू-सीरीज पांच गंभीर आपराधिक मामलों पर आधारित है। इसमें उन महिलाओं की घटनाओं को दिखाया गया है, जिन्होंने अपने पतियों की हत्या की। घटनाओं को समझाने के लिए पुलिस जांच, संबंधित लोगों के साक्षात्कार और घटनाओं के पुनर्निर्माण का सहारा लिया गया है। मेरठ का ब्लू ड्रम हत्याकांड भी इसमें शामिल है। इस मामले में हत्या के बाद शव को ठिकाने लगाने के लिए नीले ड्रम का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई थी।

    यह घटना 3 मार्च 2022 की बताई गई है। सौरभ राजपूत लंदन में रहते थे। आरोपों के मुताबिक, उनकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला ने मिलकर उनकी हत्या कर दी थी। बताया गया कि हत्या के बाद दोनों पूरी रात शव के साथ घर में रहे। अगले दिन उन्होंने चाकू, सीमेंट और एक बड़ा नीला ड्रम खरीदा। इसके बाद शव के चार टुकड़े किए गए और उन्हें तकिए के कवर में लपेटकर ड्रम में रखा गया। शव को छिपाने के लिए ड्रम में सीमेंट का घोल भी डाला गया।

    आरोपियों की योजना ड्रम को किसी दूसरी जगह ले जाकर ठिकाने लगाने की थी, लेकिन उसका वजन अधिक होने के कारण वे उसे घर से बाहर नहीं ले जा सके। परिणामस्वरूप ड्रम उसी मकान में छिपा रह गया। इस घटनाक्रम के बाद दोनों के हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड घूमने जाने की जानकारी भी सामने आई थी।

    बताया गया कि 4 मार्च को दोनों ने ड्राइवर अजब सिंह के साथ कैब बुक की और घूमने निकल गए। इस दौरान वे मनाली, शिमला और कसोल गए। ड्राइवर के अनुसार, दोनों ने यात्रा के दौरान शराब पी और छुट्टियां बिताईं। 17 मार्च को मेरठ लौटने के बाद मुस्कान ने अपनी मां कविता को फोन कर सौरभ की हत्या की जानकारी दी। उसने बताया कि शव किराए के मकान में पड़ा है।

    इसके बाद मुस्कान के पिता प्रमोद ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने मकान पर पहुंचकर तलाशी ली, जहां नीले ड्रम के अंदर सौरभ का शव बरामद हुआ। जांच के बाद मुस्कान और साहिल को गिरफ्तार किया गया। 19 मार्च को दोनों को अदालत में पेश किया गया, जिसके बाद उन्हें जेल भेज दिया गया।
    इस मामले में एक अन्य घटनाक्रम तब सामने आया, जब जेल में रहते हुए मुस्कान ने 24 नवंबर को एक बेटी को जन्म दिया। यह उसकी दूसरी बेटी बताई गई है। उसकी पहली बेटी पीहू अपने दादा-दादी के पास रह रही है। इस घटना ने मामले से जुड़े पारिवारिक पहलुओं को भी चर्चा में ला दिया था।

    अब जिला अदालत द्वारा मुस्कान और साहिल को मौत की सजा सुनाए जाने के बाद यह हत्याकांड फिर सुर्खियों में है। इस मामले को विस्तार से समझने के इच्छुक दर्शक ‘हनीमून से हत्या’ डॉक्यू-सीरीज देख सकते हैं, जिसमें अपराध की घटनाओं, जांच और उनसे जुड़े सवालों को प्रस्तुत किया गया है।

  • प्रेमानंद महाराज के आश्रम पहुंचा मेरठ का परिवार, बेटे प्रिंस की फोटो लेकर मां ने लगाई वापसी की गुहार

    प्रेमानंद महाराज के आश्रम पहुंचा मेरठ का परिवार, बेटे प्रिंस की फोटो लेकर मां ने लगाई वापसी की गुहार


    नई दिल्ली: मेरठ का एक परिवार सोमवार को लापता बेटे प्रिंस की तलाश में वृंदावन स्थित संत प्रेमानंद महाराज के राधा केलि कुंज आश्रम के बाहर पहुंचा। नेत्रपाल अपनी पत्नी पूनम के साथ बेटे की फोटो हाथ में लेकर उसकी वापसी की गुहार लगाते नजर आए। परिजनों के मुताबिक, प्रिंस नीट परीक्षा देने के बाद 8 मई 2024 को अपने माता-पिता के साथ वृंदावन आया था। अगले दिन लाइन में लगने के बाद 10 मई को उसे एकांतिक वार्ता के लिए पास मिला। वार्ता के लिए प्रिंस अकेला आश्रम के अंदर गया, लेकिन इसके बाद वह बाहर नहीं आया। परिवार का कहना है कि उन्होंने आश्रम के साधकों से इसकी जानकारी मांगी, लेकिन प्रिंस का पता नहीं चल सका।

    पूनम ने बताया कि प्रिंस के वापस नहीं आने के बाद परिवार ने मामले की शिकायत मथुरा पुलिस से भी की थी। इसके बावजूद अब तक बेटे का पता नहीं चला है। परिजन लगातार मेरठ और वृंदावन के बीच आ-जा रहे हैं और उसकी तलाश कर रहे हैं। परिवार को उम्मीद है कि जिस तरह अनुज और मयंक की सकुशल बरामदगी हुई, उसी तरह उनका बेटा प्रिंस भी उन्हें मिल सकता है। इसी उम्मीद के साथ परिवार आश्रम के बाहर पहुंचा और लोगों से बेटे की वापसी में मदद की गुहार लगाई।

    वहीं, झारखंड से 17 वर्षीय एक किशोर भी बिना बताए वृंदावन पहुंच गया और प्रेमानंद महाराज के केलि कुंज आश्रम में जाकर संत से दीक्षा लेने की इच्छा जताई। किशोर की उम्र और परिस्थितियों को देखते हुए आश्रम प्रबंधन ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस उसे सुरक्षित रमणरेती पुलिस चौकी ले गई और उसके परिजनों से संपर्क किया। आश्रम के बाहर पिछले कुछ दिनों से लापता बच्चों के परिजनों के पहुंचने का सिलसिला भी जारी है।

    सोमवार को प्रिंस की तलाश में आश्रम पहुंचे मेरठ के परिवार को बाहर मौजूद भक्तों की भीड़ से नोकझोंक का सामना भी करना पड़ा। मौके पर मौजूद पुलिस ने अभद्रता करने के आरोप में एक युवक को हिरासत में लिया। पिछले दो दिनों से आश्रम के बाहर इसी तरह का माहौल बना हुआ है। इस बीच संत प्रेमानंद महाराज के भक्तों ने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर चैनल चलाने वाले एक पत्रकार का पुतला भी फूंका। भक्तों का आरोप है कि पत्रकार संत की छवि खराब करने का प्रयास कर रहे हैं। संत के दीक्षित साधक रसिक दुलारी शरण की मौत के बाद सामने आ रही खबरों को लेकर भक्तों में आक्रोश बताया गया है।

    आश्रम से जुड़े विवाद के बीच श्री कृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष दिनेश शर्मा फलाहारी ने भी आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि दो गुटों में बंटे आश्रम के शिष्य परिकर की ओर से प्रचार के लिए पैसे देकर एक मशहूर हस्ती को आश्रम बुलाया गया था। उन्होंने आश्रम से जुड़े लोगों की उच्चस्तरीय जांच की मांग की। इस पूरे घटनाक्रम के बीच मेरठ का परिवार अपने बेटे प्रिंस की तलाश में आश्रम पहुंचा और उसकी सकुशल वापसी की उम्मीद जताई।

  • ब्लू ड्रम हत्याकांड में आज फैसले की घड़ी, मेरठ कोर्ट पहले तय करेगी मुस्कान-साहिल दोषी हैं या नहीं

    ब्लू ड्रम हत्याकांड में आज फैसले की घड़ी, मेरठ कोर्ट पहले तय करेगी मुस्कान-साहिल दोषी हैं या नहीं


    मेरठ। ब्रह्मपुरी के चर्चित ब्लू ड्रम हत्याकांड में बुधवार, 30 सितंबर को मेरठ जिला जज की अदालत फैसला सुनाएगी। मर्चेंट नेवी अधिकारी सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में आरोपी मुस्कान और साहिल के खिलाफ पहले अदालत यह तय करेगी कि दोनों दोषी हैं या नहीं। दोष सिद्ध होने पर सजा के बिंदु पर सुनवाई होगी।

    मामले में 17 सितंबर को अंतिम बहस पूरी हो चुकी है। अभियोजन पक्ष ने परिस्थितिजन्य साक्ष्यों और मामले से जुड़े तथ्यों के आधार पर दोनों आरोपियों के लिए मृत्युदंड की मांग की है। अभियोजन की ओर से हत्या से पहले और बाद में की गई कथित तैयारियों को भी अदालत के सामने रखा गया।

    22 गवाहों की गवाही, दुकानदार भी शामिल

    सौरभ के परिवार की ओर से मुकदमा लड़ रहे अधिवक्ता विजय बहादुर के मुताबिक, वादी पक्ष ने अदालत में 22 गवाह पेश किए हैं। इनमें सौरभ का भाई बबलू, उसकी मां और सौरभ का दोस्त शामिल हैं।

    इसके अलावा नशीली दवाओं, चाकू, नीले ड्रम, सीमेंट और रेत की खरीद से जुड़े दुकानदारों की भी गवाही कराई गई। हत्या के बाद आरोपी जिन स्थानों पर घूमने गए थे, उनसे जुड़े साक्ष्य भी अदालत के सामने रखे गए हैं।

    अभियोजन पक्ष का तर्क है कि हत्या से पहले नशीली दवा और चाकू की व्यवस्था की गई, जबकि हत्या के बाद शव को छिपाने के लिए ड्रम, सीमेंट और रेत खरीदी गई। अभियोजन के मुताबिक, शव को ड्रम में भरकर सीमेंट से सील करने और उसे दूसरी जगह ले जाकर ठिकाने लगाने की योजना थी, लेकिन इससे पहले ही मामला सामने आ गया।

    बचाव पक्ष ने हत्या से ही इनकार किया

    मुस्कान की ओर से अधिवक्ता रेखा जैन ने बचाव पक्ष रखा। विजय बहादुर के अनुसार, बचाव पक्ष ने आरोपियों द्वारा हत्या किए जाने के आरोप से ही इनकार किया है। वादी पक्ष ने अपने साक्ष्य और गवाह अदालत के सामने पेश किए हैं।

    अभियोजन पक्ष ने ऐसे मामलों से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए अधिकतम सजा की मांग की है। अधिवक्ता के मुताबिक, इस मामले में न्यूनतम सजा आजीवन कारावास और अधिकतम सजा मृत्युदंड है और अभियोजन ने अधिकतम सजा की मांग की है।

    बच्ची की DNA जांच पर भी हुई चर्चा

    मुस्कान की बेटी के संबंध में DNA जांच की मांग को लेकर अधिवक्ता विजय बहादुर ने कहा कि फिलहाल हत्या का ट्रायल चल रहा है। उनके मुताबिक, इस दौरान ऐसी मांग का मुकदमे पर प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि सौरभ के परिवार से इस संबंध में उनकी कोई बातचीत नहीं हुई है।

    अधिवक्ता के अनुसार, बच्ची के मामले में सहानुभूति का कोई आधार बनता है या नहीं, इसका फैसला अदालत ही करेगी।

    जेल में पूजा-पाठ कर रही मुस्कान

    मेरठ जेल के वरिष्ठ जेल अधीक्षक वीरेश राज शर्मा ने बताया कि अदालत में चल रही कार्यवाही के संबंध में उन्हें जानकारी नहीं है। उन्होंने बताया कि मुस्कान पहले की तुलना में अब धार्मिक गतिविधियों में अधिक समय दे रही है।

    उनके मुताबिक, मुस्कान नियमित रूप से संध्या और सुंदरकांड करती है। इसके अलावा वह शिव पूजा भी कर रही है। बच्ची के अलावा जो समय उसे मिलता है, उसमें वह पूजा-पाठ करती है। वहीं, साहिल अन्य बंदियों से ज्यादा बातचीत नहीं करता और अपने काम में लगा रहता है।

    पहले दोष पर फैसला, फिर सजा पर सुनवाई

    अब बुधवार को अदालत के फैसले पर सभी की निगाहें हैं। अदालत पहले यह तय करेगी कि मुस्कान और साहिल के खिलाफ लगाए गए आरोप साबित हुए हैं या नहीं। यदि दोष सिद्ध होता है, तो इसके बाद सजा के बिंदु पर सुनवाई होगी।

    अभियोजन पक्ष की ओर से मृत्युदंड की मांग की गई है, लेकिन अंतिम फैसला अदालत के समक्ष पेश साक्ष्यों, गवाहियों और कानूनी दलीलों के आधार पर होगा।

  • सावन में दिखी सांप्रदायिक सौहार्द की तस्वीर, मुस्लिम युवक ने 201 लीटर गंगाजल की कांवड़ चढ़ाने का लिया संकल्प

    सावन में दिखी सांप्रदायिक सौहार्द की तस्वीर, मुस्लिम युवक ने 201 लीटर गंगाजल की कांवड़ चढ़ाने का लिया संकल्प


    नई दिल्ली। श्रावण मास में देशभर में भगवान शिव की भक्ति का उत्साह चरम पर है। कांवड़ यात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालु हरिद्वार और अन्य तीर्थस्थलों से गंगाजल लाकर शिवालयों में जलाभिषेक कर रहे हैं। इसी बीच उत्तर प्रदेश के मेरठ से एक ऐसी प्रेरणादायक तस्वीर सामने आई है, जिसने आस्था, मानवता और सांप्रदायिक सौहार्द का संदेश एक साथ दिया है। मेरठ के फलावदा कस्बे के रहने वाले 22 वर्षीय मुस्लिम युवक शाकिर ने हरिद्वार से 201 लीटर गंगाजल की कांवड़ उठाकर भगवान शिव के प्रति अपनी गहरी श्रद्धा का परिचय दिया है।

    फलावदा के मोहल्ला होली चौक, मंदवाड़ी रोड निवासी शाकिर एक साधारण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से हैं। उनके पिता मंजूर मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं और स्वयं शाकिर भी मेहनत-मजदूरी कर अपने घर की जिम्मेदारियों में हाथ बंटाते हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद उनकी भगवान भोलेनाथ के प्रति आस्था लगातार मजबूत होती गई। बताया जाता है कि पिछले तीन वर्षों से वह नियमित रूप से भगवान शिव की आराधना कर रहे हैं और हर वर्ष कांवड़ यात्रा में भाग लेते हैं।

    पिछले वर्ष शाकिर हरिद्वार से 101 लीटर गंगाजल लेकर आए थे और क्षेत्र के शिवालयों में जलाभिषेक किया था। इस बार उन्होंने अपनी श्रद्धा को और आगे बढ़ाते हुए 201 लीटर गंगाजल की कांवड़ उठाई। उनकी यह यात्रा केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं बल्कि समाज में भाईचारे और पारस्परिक सम्मान का संदेश भी बन गई है।

    श्रावण मास में भगवान शिव को करुणा, समरसता और लोककल्याण का देवता माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार महादेव के दरबार में किसी भी प्रकार का जाति, धर्म या वर्ग का भेद नहीं होता। शाकिर की कांवड़ यात्रा इसी भावना को साकार करती नजर आती है। उनकी इस पहल की स्थानीय लोगों के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी व्यापक चर्चा हो रही है। कई लोग इसे गंगा-जमुनी तहजीब और भारत की साझा सांस्कृतिक विरासत की खूबसूरत मिसाल बता रहे हैं।

    हरिद्वार से लौटते समय रुड़की सहित कई पड़ावों पर कांवड़ सेवा शिविरों में शाकिर का गर्मजोशी से स्वागत किया गया। शिवभक्तों ने तालियों के साथ उनका उत्साह बढ़ाया और उनकी आस्था को सम्मान दिया। रास्ते भर उन्हें शुभकामनाएं मिलती रहीं, जिससे उनकी यात्रा और भी यादगार बन गई।

    इसी दौरान मेरठ से ही एक और भावुक तस्वीर सामने आई। मवाना तहसील के बहादुरपुर गांव निवासी अमरपाल अपनी 81 वर्षीय मां ओमवती को कांवड़ में बैठाकर यात्रा करा रहे हैं। कांवड़ के एक ओर गंगाजल और दूसरी ओर अपनी मां को बैठाकर वह सेवा और श्रद्धा का अनूठा उदाहरण पेश कर रहे हैं। परिवार का कहना है कि बुजुर्ग मां की वर्षों पुरानी कांवड़ यात्रा की इच्छा को पूरा करने के लिए यह निर्णय लिया गया।

    श्रावण मास में सामने आई ये दोनों घटनाएं केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं हैं, बल्कि समाज को प्रेम, सेवा, सम्मान और सामाजिक सौहार्द का मजबूत संदेश भी देती हैं। शाकिर की शिवभक्ति और अमरपाल की मातृसेवा यह साबित करती है कि सच्ची आस्था इंसान को जोड़ने का काम करती है। ऐसे प्रेरक उदाहरण समाज में विश्वास, भाईचारे और मानवीय मूल्यों को और मजबूत करने का काम करते हैं।

  • राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का बड़ा दावा, विश्वविद्यालय हॉस्टलों में हो रही ड्रग्स की सप्लाई

    राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का बड़ा दावा, विश्वविद्यालय हॉस्टलों में हो रही ड्रग्स की सप्लाई


    उत्तर प्रदेश । मेरठ स्थित Chaudhary Charan Singh University के 38वें दीक्षांत समारोह में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल Anandiben Patel ने विश्वविद्यालयों में बढ़ती नशे की समस्या को लेकर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने दावा किया कि कई विश्वविद्यालयों के हॉस्टलों में बाहर से आने वाले खाने के जरिए ड्रग्स की सप्लाई हो रही है और परिसर के बाहर शराब की बोतलें भी मिली हैं। उन्होंने बताया कि इस संबंध में वह कई कुलपतियों और हॉस्टल प्रबंधन को तस्वीरें भी दिखा चुकी हैं।

    समारोह में राज्यपाल ने 199 मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक प्रदान किए। उन्होंने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि नशा किसी भी समस्या का समाधान नहीं है, बल्कि यह धीरे-धीरे व्यक्ति के सपनों, प्रतिभा, स्वास्थ्य और परिवार की उम्मीदों को खत्म कर देता है। उन्होंने युवाओं से नशे से दूर रहकर शिक्षा, अनुशासन और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।

    राज्यपाल ने कहा कि उन्होंने लगभग 15 विश्वविद्यालयों के हॉस्टलों का निरीक्षण किया है, जहां कई चिंताजनक स्थितियां सामने आईं। उन्होंने कहा कि चार पीढ़ियों से उनके परिवार में चाय तक नहीं पी जाती, जबकि आज के कई युवा नशे की गिरफ्त में आ रहे हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से हॉस्टलों की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने की अपील की।

    अपने संबोधन में उन्होंने युवाओं की सामाजिक जिम्मेदारी पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि बिना किसी विषय की पूरी जानकारी के केवल भीड़ का हिस्सा बन जाना उचित नहीं है। विद्यार्थियों को देशहित, संविधान और महापुरुषों के विचारों को समझकर आगे बढ़ना चाहिए।

    राज्यपाल ने बेटियों की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि इस दीक्षांत समारोह में लगभग 75 प्रतिशत स्वर्ण पदक छात्राओं ने हासिल किए हैं। उन्होंने कहा कि बेटियां हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं और समाज को उनके प्रति अपनी सोच बदलनी चाहिए।

    उन्होंने शिक्षकों से भी शोध और लेखन पर अधिक ध्यान देने का आग्रह किया। उनका कहना था कि लंबे समय तक अध्यापन करने वाले शिक्षकों को अधिक पुस्तकें और शोध कार्य प्रकाशित करने चाहिए, ताकि नई पीढ़ी को बेहतर शैक्षणिक सामग्री मिल सके।

    राज्यपाल ने अपने हालिया रेल सफर का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि रेलवे ट्रैक के आसपास गंदगी और जलभराव की तस्वीरें संबंधित अधिकारियों को भेजने के बाद सफाई कराई गई। साथ ही उन्होंने युवाओं से अंतरिक्ष विज्ञान, नई तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ने का आह्वान करते हुए कहा कि देश के वैज्ञानिक और इंजीनियर वैश्विक स्तर पर नई उपलब्धियां हासिल कर रहे हैं।

  • मेरठ छात्रा हत्याकांड: पीड़ित परिवार से मिलने जा रहे कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल को रोका, पार्टी ने पुलिस पर लगाए आरोप

    मेरठ छात्रा हत्याकांड: पीड़ित परिवार से मिलने जा रहे कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल को रोका, पार्टी ने पुलिस पर लगाए आरोप

    मेरठ। मेरठ छात्रा हत्याकांड को लेकर पीड़ित परिवार की शिकायत वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) तक पहुंचाने जा रहे कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल को सोमवार को मेरठ-दिल्ली हाईवे स्थित काशी टोल प्लाजा पर पुलिस ने रोक दिया। इसके बाद कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मौके पर विरोध प्रदर्शन करते हुए पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की।

    काशी टोल प्लाजा पर रोका गया काफिला
    कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल एसएसपी कार्यालय जाने के लिए मेरठ पहुंच रहा था। इसी दौरान पुलिस ने काशी टोल प्लाजा पर उनके काफिले को आगे बढ़ने से रोक दिया। पुलिस की इस कार्रवाई के विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ता सड़क पर उतर आए और प्रदर्शन शुरू कर दिया।

    कांग्रेस ने पुलिस पर लगाए आरोप
    कांग्रेस नेताओं का कहना था कि वे केवल पीड़ित परिवार की शिकायत लेकर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से मिलने जा रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें जबरन रोक दिया। उनका आरोप है कि इस तरह की कार्रवाई लोकतांत्रिक व्यवस्था की भावना के अनुरूप नहीं है और इससे प्रदेश का माहौल प्रभावित होता है।

    प्रदेश सरकार पर भी साधा निशाना
    प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने उत्तर प्रदेश सरकार की भी आलोचना की। उनका आरोप था कि पुलिस को सरकार का संरक्षण प्राप्त है, जिसके कारण आम लोगों के साथ मनमानी की जा रही है। नेताओं ने पुलिस की कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन बताते हुए इस पर नाराजगी जताई।

    प्रतिनिधिमंडल में ये नेता रहे शामिल
    कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल में महानगर अध्यक्ष रंजन शर्मा, उत्तर प्रदेश कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र गौतम, सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद और बाराबंकी से सांसद तनुज पूनिया सहित अन्य नेता शामिल थे।

  • मेरठ लाठीचार्ज मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की सख्ती, यूपी के डीजीपी और गृह विभाग से तलब की विस्तृत रिपोर्ट

    मेरठ लाठीचार्ज मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की सख्ती, यूपी के डीजीपी और गृह विभाग से तलब की विस्तृत रिपोर्ट

    नई दिल्ली । मेरठ में एक प्रदर्शन के दौरान हुई कथित पुलिस लाठीचार्ज की घटना पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान लेते हुए उत्तर प्रदेश सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक और प्रमुख सचिव (गृह) को नोटिस जारी कर घटना से जुड़े सभी तथ्यों, पुलिस कार्रवाई की परिस्थितियों और घायलों को उपलब्ध कराई गई सहायता की जानकारी निर्धारित समय में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। इस कार्रवाई के बाद मामला प्रशासनिक और कानूनी स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।

    आयोग के समक्ष प्रस्तुत शिकायत में आरोप लगाया गया है कि मेरठ में आयोजित एक शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने बल प्रयोग किया, जिससे कई प्रदर्शनकारी घायल हो गए। शिकायत के अनुसार, यह प्रदर्शन एक हत्या के मामले में न्याय की मांग को लेकर आयोजित किया गया था। आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान बिना पर्याप्त कारण के लाठीचार्ज किया गया और इससे कई लोगों को चोटें आईं। इन आरोपों के आधार पर आयोग ने मामले की प्रारंभिक जांच शुरू करने का निर्णय लिया।

    राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने अपनी कार्यवाही के तहत राज्य सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा है कि पुलिस को बल प्रयोग की आवश्यकता किन परिस्थितियों में महसूस हुई। साथ ही आयोग ने यह भी पूछा है कि पुलिस कार्रवाई किस कानूनी आधार पर की गई, प्रदर्शनकारियों को कितनी और किस प्रकार की चोटें आईं तथा घायलों को तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के लिए क्या कदम उठाए गए।

    आयोग ने अपने नोटिस में जवाबदेही के पहलू पर भी विशेष जोर दिया है। यदि जांच के दौरान यह पाया जाता है कि पुलिस द्वारा निर्धारित नियमों या मानवाधिकार संबंधी मानकों का उल्लंघन हुआ है, तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध क्या कार्रवाई की गई है अथवा भविष्य में क्या कार्रवाई प्रस्तावित है, इसकी जानकारी भी मांगी गई है। आयोग ने इस पूरे प्रकरण को संभावित मानवाधिकार उल्लंघन के दृष्टिकोण से गंभीर माना है।

    मानवाधिकार आयोग का हस्तक्षेप ऐसे मामलों में तथ्यों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की प्रक्रिया का हिस्सा माना जाता है। आयोग का उद्देश्य किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी संबंधित पक्षों से जानकारी प्राप्त करना और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय करना होता है। इसलिए फिलहाल आयोग ने केवल रिपोर्ट तलब की है और मामले पर अंतिम राय जांच पूरी होने के बाद ही बनाई जाएगी।

    कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि सार्वजनिक प्रदर्शन के दौरान पुलिस को कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी होती है, वहीं प्रदर्शनकारियों को भी शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है। ऐसी स्थिति में यदि बल प्रयोग किया जाता है तो उसकी आवश्यकता, अनुपात और प्रक्रिया का परीक्षण संबंधित प्राधिकारियों द्वारा किया जाना आवश्यक होता है।

    अब सभी की निगाहें उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आयोग को भेजी जाने वाली रिपोर्ट पर टिकी हैं। रिपोर्ट के अध्ययन के बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग यह तय करेगा कि मामले में आगे किसी अतिरिक्त जांच, सिफारिश या अन्य कानूनी कार्रवाई की आवश्यकता है या नहीं। फिलहाल यह प्रकरण जांच की प्रक्रिया में है और आयोग द्वारा मांगी गई जानकारी के आधार पर आगे की कार्यवाही निर्धारित की जाएगी।

  • मेरठ में वलीमा फायरिंग कांड के इनामी बदमाशों का एनकाउंटर, तीन घायल गिरफ्तार पुलिस मुठभेड़ में बदमाशों के पैर में लगी गोली, हेड कांस्टेबल भी घायल

    मेरठ में वलीमा फायरिंग कांड के इनामी बदमाशों का एनकाउंटर, तीन घायल गिरफ्तार पुलिस मुठभेड़ में बदमाशों के पैर में लगी गोली, हेड कांस्टेबल भी घायल



    मेरठ। मेरठ में वलीमा समारोह के दौरान हुई ताबड़तोड़ फायरिंग के मामले में फरार चल रहे 25-25 हजार के इनामी बदमाशों का पुलिस ने एनकाउंटर में पकड़ लिया है। यह कार्रवाई शनिवार तड़के लोहिया नगर और परतापुर पुलिस तथा स्वाट टीम की संयुक्त कार्रवाई में की गई, जिसमें तीनों आरोपी गोली लगने से घायल हो गए और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

    घटना मेरठ के स्टार हेरिटेज मंडप में हुई थी, जहां पुरानी रंजिश के चलते बदमाशों ने वलीमा की दावत के दौरान करीब दस राउंड फायरिंग की थी। इस हमले में एक मासूम समेत तीन लोग घायल हो गए थे, जिससे पूरे इलाके में दहशत फैल गई थी। घटना के बाद से आरोपी फरार चल रहे थे और पुलिस उनकी लगातार तलाश कर रही थी।

    शनिवार तड़के पुलिस टीम बजौट में अंडरपास के पास चेकिंग कर रही थी, तभी बाइक सवार तीन संदिग्धों को रोकने का प्रयास किया गया। लेकिन बदमाशों ने पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में दो आरोपी जुनैद उर्फ काला और हरीश गोली लगने से घायल हो गए, जबकि उनका साथी सुहेल मौके से भाग निकला।

    फरार आरोपी सुहेल को बाद में परतापुर पुलिस ने घेर लिया। खुद को घिरता देख उसने भी पुलिस पर फायरिंग की, जिसके जवाब में उसके पैर में गोली लगी और उसे भी गिरफ्तार कर लिया गया। इस पूरी मुठभेड़ में हेड कांस्टेबल मोहित कुमार भी घायल हो गए।

    पुलिस ने तीनों आरोपियों के पास से अवैध हथियार, कारतूस और बाइक बरामद की है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आरोपियों ने वलीमा समारोह में रंजिश के चलते फायरिंग की थी, जिसमें राजा, इरफान और दो वर्षीय मासूम हम्माद घायल हुए थे।

    फिलहाल तीनों आरोपियों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है और पुलिस मामले की आगे की जांच में जुटी हुई है। इस एनकाउंटर के बाद इलाके में पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी है।