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  • ट्रंप और जिनपिंग के साथ बैठक करेंगे पुतिन….त्रिपक्षीय शिखर सम्मेलन का रखा प्रस्ताव

    ट्रंप और जिनपिंग के साथ बैठक करेंगे पुतिन….त्रिपक्षीय शिखर सम्मेलन का रखा प्रस्ताव


    मास्को।
    रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Russian President Vladimir Putin) ने अगले महीने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Chinese President Xi Jinping) के साथ एक त्रिपक्षीय शिखर सम्मेलन का प्रस्ताव रखा है। इस सम्मेलन में यूक्रेन संघर्ष पर चर्चा होगी। इसका उद्देश्य एक ऐसा शांति समझौता करना है जो मॉस्को के पक्ष में हो। यह जानकारी ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ (WSJ) की रिपोर्ट के अनुसार है।

    रिपोर्ट के अनुसार, यह प्रस्ताव राष्ट्रपति ट्रंप के साथ बेहतर होते संबंधों का फायदा उठाने की पुतिन की कोशिश को दिखाता है। इस कदम ने यूक्रेन और वाशिंगटन के यूरोपीय सहयोगियों के बीच चिंताएं पैदा कर दी हैं, खासकर इसलिए क्योंकि इसमें यूक्रेन का कोई प्रतिनिधित्व नहीं है।


    पुतिन ने बातचीत का प्रस्ताव कब रखा?

    इस मामले की जानकारी रखने वाले रूस के एक पूर्व खुफिया अधिकारी का हवाला देते हुए, डब्लूएसजे ने बताया कि पुतिन ने सबसे पहले 9 अक्तूबर को ट्रंप के साथ फोन पर बातचीत के दौरान एक त्रिपक्षीय बैठक का विचार रखा था। इसी बातचीत के दौरान एक समझौता भी हुआ, जिसके तहत अमेरिका को रूस से डीजल खरीदने और उसे वैश्विक बाजारों में वितरित करने की अनुमति मिल गई।


    क्रेमलिन के प्रवक्ता ने क्या कहा?

    क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने डब्लूएसजे को पुष्टि की कि एक संभावित बैठक को लेकर बातचीत चल रही है। पेस्कोव ने डब्लूएसजे से कहा, ‘बैठक या इसके संभावित एजेंडे को लेकर अभी तक कोई स्पष्ट सहमति नहीं बनी है, हालांकि तीनों पक्ष इस बात को मानते हैं कि ऐसी बैठक होने की एक संभावना हो सकती है।’


    अमेरिका के एक वरिष्ठ अधिकारी ने क्या कहा?

    वहीं, अमेरिका के एक वरिष्ठ अधिकारी ने ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ को बताया कि ट्रंप ने इस शिखर सम्मेलन के लिए औपचारिक रूप से सहमति नहीं दी है, लेकिन अधिकारी ने संकेत दिया कि युद्ध को सुलझाने की अपनी कोशिशों को देखते हुए, अमेरिकी राष्ट्रपति इस प्रस्ताव पर विचार कर सकते हैं।


    कब हो सकती है बैठक?

    बातचीत से जुड़े सूत्रों ने ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ को बताया कि क्रेमलिन ने सुझाव दिया है कि यह त्रिपक्षीय वार्ता आगामी ‘एशिया-पैसिफिक इकोनॉमिक कोऑपरेशन’ (APEC) शिखर सम्मेलन के साथ आयोजित की जा सकती है। यह सम्मेलन 18 और 19 नवंबर को दक्षिणी चीन के टेक हब, शेन्जेन में होने वाला है।

    मॉस्को और बीजिंग के बीच हाल ही में हुई बातचीत से जुड़े सूत्रों ने ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ को बताया कि रूसी राजनयिकों ने चीनी अधिकारियों के सामने एक प्रस्ताव रखा। चीनी अधिकारियों ने संकेत दिया कि अगर ट्रंप इसमें शामिल होने के लिए सहमत हो जाते हैं, तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं होगी।


    ट्रंप ने जेलेंस्की पर क्या आरोप लगाया?

    रविवार को ट्रंप ने दावा किया कि रूस-यूक्रेन संघर्ष को खत्म करने के लिए चल रही बातचीत में काफी प्रगति हो रही है। उन्होंने मॉस्को के प्रति अपने प्रशासन के राजनयिक रुख का बचाव किया और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की पर आरोप लगाया कि वे दो साल पहले एक बेहतर समझौता करने में विफल रहे थे।

    इसके साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस और रूसी ऊर्जा खरीदने वाले बड़े देशों पर नए कड़े प्रतिबंधों और टैरिफ को फिलहाल लागू न करने के अपने फैसले का बचाव किया है। उनका कहना है कि वह यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के लिए चल रही शांति वार्ता को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहते। ट्रंप ने कहा कि उनकी सरकार युद्ध को खत्म करने के लिए बातचीत में प्रगति कर रही है। उनके मुताबिक, अगर इस समय रूस पर नए आर्थिक दबाव डाले गए, तो वह बातचीत की मेज छोड़ सकता है।

  • जबलपुर में होटल में पति को दूसरी महिला संग देख भड़की पत्नी, मोबाइल चैट से मिला था मिलने का सुराग; जमकर थप्पड़बाजी

    जबलपुर में होटल में पति को दूसरी महिला संग देख भड़की पत्नी, मोबाइल चैट से मिला था मिलने का सुराग; जमकर थप्पड़बाजी


    जबलपुर।
    मध्य प्रदेश के जबलपुर में पति को दूसरी महिला के साथ होटल के कमरे में देखकर पत्नी का गुस्सा फूट पड़ा। शारदा चौक स्थित होटल बैलेंसिंग रॉक में पत्नी ने कमरा खुलवाया तो अंदर पति और महिला को साथ देखकर हंगामा शुरू हो गया। देखते ही देखते विवाद कहासुनी से थप्पड़बाजी तक पहुंच गया। होटल में अफरा-तफरी मचने के बाद पुलिस को सूचना दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने दोनों पक्षों को शांत कराया। पुलिस के मुताबिक, फिलहाल किसी भी पक्ष ने शिकायत दर्ज नहीं कराई है।

    मोबाइल चैट से मिला होटल में मिलने का सुराग

    जानकारी के मुताबिक, सविता यादव को अपने पति अरुण यादव और ज्योति कोरी के बीच संबंध होने का शक था। सविता का आरोप है कि दोनों के बीच करीब एक साल से प्रेम प्रसंग चल रहा था। इसी दौरान मोबाइल चैट के जरिए उसे कथित तौर पर पता चला कि अरुण और ज्योति होटल में मिलने वाले हैं।

    इसके बाद सविता ने पति का पीछा किया और शारदा चौक स्थित होटल बैलेंसिंग रॉक पहुंच गई। पत्नी के मुताबिक, होटल के कमरा नंबर 103 में अरुण और ज्योति कोरी मौजूद थे।

    कमरा खुलते ही भड़की पत्नी, शुरू हुई थप्पड़बाजी

    सविता ने जब कमरे का दरवाजा खुलवाया और पति को दूसरी महिला के साथ देखा तो वह अपना आपा खो बैठी। इसके बाद कमरे के अंदर ही तीनों के बीच कहासुनी शुरू हो गई। विवाद बढ़ने पर सविता ने कथित तौर पर पति और ज्योति को थप्पड़ मारने शुरू कर दिए।

    होटल में हंगामा बढ़ता देख वहां मौजूद लोगों ने पुलिस को सूचना दी। कुछ ही देर में पुलिस टीम मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों को अलग कर स्थिति को नियंत्रित किया। इसके बाद होटल में चल रहा विवाद शांत हुआ।

    पति पर दूरी बनाने और महिला पर ब्लैकमेलिंग का आरोप

    सविता ने आरोप लगाया कि अरुण और ज्योति के बीच लंबे समय से संबंध थे। उसका दावा है कि दूसरी महिला के करीब आने के बाद पति उससे दूरी बनाने लगा था। पत्नी ने ज्योति कोरी पर अरुण को ब्लैकमेल करने का आरोप भी लगाया है।

    हालांकि, संबंधों और ब्लैकमेलिंग को लेकर लगाए गए ये आरोप फिलहाल सविता के दावे हैं। इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस की ओर से भी इन आरोपों की पुष्टि किए जाने की जानकारी सामने नहीं आई है।

    पुलिस बोली- अभी किसी ने शिकायत नहीं की

    घटना की सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची पुलिस ने दोनों पक्षों के बीच विवाद शांत कराया। पुलिस के अनुसार, अभी तक किसी भी पक्ष की ओर से लिखित शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है। पुलिस का कहना है कि शिकायत मिलने पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    फिलहाल, होटल के कमरे में पति और दूसरी महिला की मौजूदगी को लेकर शुरू हुआ विवाद पुलिस तक पहुंच गया है। लेकिन औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं होने के कारण मामले में आगे की कार्रवाई का इंतजार है।

  • ट्रंप-जिनपिंग की मुलाकात में दिखी गर्मजोशी, लेकिन बड़े मुद्दे अभी बाकी, बैठक से निकले 5 अहम संकेत

    ट्रंप-जिनपिंग की मुलाकात में दिखी गर्मजोशी, लेकिन बड़े मुद्दे अभी बाकी, बैठक से निकले 5 अहम संकेत


    नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की व्हाइट हाउस में हुई मुलाकात में दोनों देशों के बीच रिश्तों में नरमी के संकेत जरूर दिखे, लेकिन कई बड़े और संवेदनशील मुद्दों पर अभी अंतिम समाधान सामने नहीं आया है। व्यापार समझौते की अवधि बढ़ाने से लेकर ताइवान, अमेरिका-चीन रणनीतिक प्रतिस्पर्धा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तक, बैठक में ऐसे पांच मुद्दे सामने आए जो आने वाले समय में दोनों देशों के रिश्तों की दिशा तय कर सकते हैं।

    1. ट्रेड डील सिर्फ दो महीने के लिए आगे बढ़ी

    बैठक से सबसे बड़ा व्यावहारिक नतीजा व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने के रूप में सामने आया। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट के मुताबिक, अमेरिका और चीन उस ट्रेड डील को दो महीने के लिए बढ़ाने पर सहमत हुए हैं, जिसने पिछले साल दोनों देशों के बीच चल रहे ट्रेड वॉर को खत्म करने में भूमिका निभाई थी। यह समझौता नवंबर में खत्म होने वाला था।

    हालांकि, यह विस्तार लंबी अवधि का समाधान नहीं है। टैरिफ, चीन की खरीद, रेयर-अर्थ सप्लाई और तकनीकी प्रतिबंध जैसे जटिल मुद्दों पर दोनों देशों के बीच बातचीत आगे भी जारी रहेगी। यानी फिलहाल इन मुद्दों पर अंतिम सहमति के बजाय बातचीत के लिए समय बढ़ाया गया है।

    2. व्हाइट हाउस में अमेरिकी अंदाज में हुआ भव्य स्वागत

    जिनपिंग के दौरे के दौरान व्हाइट हाउस में भव्य समारोहों का आयोजन किया गया। ट्रंप ने चीनी राष्ट्रपति के स्वागत के लिए अमेरिकी सैन्य परंपरा और शान-शौकत को खास तौर पर प्रदर्शित किया।

    बुधवार और गुरुवार को आयोजित कार्यक्रमों में त्रिकोणीय टोपियां और विशेष वेशभूषा पहने सैनिकों ने मार्च किया। संगीत के साथ आसमान में फाइटर जेट्स और बमवर्षक विमानों ने भी उड़ान भरी। एक मौके पर जेट की तेज आवाज से राष्ट्रपति ट्रंप भी चौंक गए।

    ट्रंप ने जिनपिंग को व्हाइट हाउस के नए हेलीपैड और ‘मरीन वन’ हेलीकॉप्टर की जानकारी भी दी। इस तरह बैठक के राजनीतिक एजेंडे के साथ दोनों नेताओं की मुलाकात में प्रतीकात्मक और औपचारिक पहलू भी नजर आया।

    3. ताइवान पर चीन ने अमेरिका से सावधानी बरतने को कहा

    बैठक में ताइवान का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। चीन की सरकारी समाचार एजेंसी के मुताबिक, शी जिनपिंग ने ट्रंप से ताइवान के सवाल पर चर्चा की और उम्मीद जताई कि अमेरिका इस मुद्दे को बेहद सावधानी से संभालेगा।

    चीनी पक्ष ने यह भी कहा कि बीजिंग चाहता है कि अमेरिका ताइवान की स्वतंत्रता का स्पष्ट रूप से विरोध करे।

    हालांकि, अमेरिका ने ताइवान को लेकर अपने पुराने रुख में कोई बदलाव नहीं किया है। इस मुद्दे पर किसी बड़े बदलाव का असर ताइवान की सुरक्षा और अमेरिकी कांग्रेस में राजनीतिक प्रतिक्रिया पर भी पड़ सकता है।

    4. ‘थ्यूसीडाइड्स ट्रैप’ का जिक्र, टकराव के जोखिम पर संकेत

    शी जिनपिंग ने मुलाकात के दौरान एक बार फिर ‘थ्यूसीडाइड्स ट्रैप’ का जिक्र किया। यह एक अकादमिक अवधारणा है, जिसके मुताबिक किसी उभरती हुई महाशक्ति और मौजूदा प्रमुख महाशक्ति के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा से टकराव का खतरा पैदा हो सकता है।

    जिनपिंग ने हालांकि यह भी कहा कि इस जोखिम से बचा जा सकता है। उनके इस संदर्भ को अमेरिका और चीन के बीच जारी रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के संदर्भ में देखा गया। दोनों देशों के बीच आर्थिक और तकनीकी प्रतिस्पर्धा के साथ सैन्य टकराव की आशंका भी लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय चर्चा का विषय रही है।

    5. AI को लेकर दोनों नेताओं की सोच अलग

    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के भविष्य और उसके नियमन को लेकर ट्रंप और जिनपिंग के विचारों में अंतर दिखाई दिया।

    राष्ट्रपति ट्रंप AI को ‘सुपर इंटेलिजेंस’ यानी ‘SI’ कहने पर जोर देते हैं और उनका रुख नई तरह के नियंत्रण लागू करने के प्रति सतर्कता का रहा है। दूसरी ओर, जिनपिंग ने कहा कि दुनिया की प्रमुख शक्तियों के रूप में अमेरिका और चीन की जिम्मेदारी है कि AI के विकास को नियंत्रित किया जाए।

    जिनपिंग ने जोर दिया कि यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि AI इंसानों के नियंत्रण में रहे और मानवता के हित में काम करे। इससे संकेत मिलता है कि तकनीक के भविष्य को लेकर दोनों देशों के बीच सहयोग की संभावनाओं के साथ नीति और नियमन को लेकर मतभेद भी बने हुए हैं।

    स्टेट डिनर में टेक जगत के दिग्गज भी पहुंचे

    ट्रंप ने जिनपिंग के साथ बैठक के बाद व्हाइट हाउस में चीनी राष्ट्रपति के सम्मान में शानदार स्टेट डिनर का आयोजन किया। इसमें टेक्नोलॉजी जगत की कई प्रमुख हस्तियां भी शामिल हुईं।

    डिनर में गूगल के सुंदर पिचई, OpenAI के सैम ऑल्टमैन और Nvidia के जेनसेन ह्वांग जैसे टेक जगत के दिग्गज मौजूद रहे। ऐसे में बैठक के राजनीतिक और व्यापारिक एजेंडे के साथ AI और तकनीकी क्षेत्र की भूमिका भी खास तौर पर चर्चा में रही।

    कुल मिलाकर, ट्रंप-जिनपिंग मुलाकात में व्यापार के मोर्चे पर सीमित अवधि का समझौता जरूर हुआ, लेकिन ताइवान, तकनीकी प्रतिबंध, रेयर-अर्थ सप्लाई और AI जैसे कई अहम मुद्दे अभी भी बातचीत के दायरे में हैं। दोनों देशों के रिश्तों में आगे की दिशा इन मुद्दों पर होने वाली अगली बातचीत से तय होगी।

  • UNGA से पहले ट्रंप-ममदानी की ग्रेसी मैन्शन में मुलाकात, एक घंटे चली बैठक, जाने क्‍या हुई चर्चा ?

    UNGA से पहले ट्रंप-ममदानी की ग्रेसी मैन्शन में मुलाकात, एक घंटे चली बैठक, जाने क्‍या हुई चर्चा ?


    नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में हिस्सा लेने न्यूयॉर्क पहुंचे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को मेयर जोहरान ममदानी से मुलाकात की। दोनों की बैठक ममदानी के आधिकारिक आवास ग्रेसी मैन्शन में करीब एक घंटे चली। मुलाकात के बाद दोनों नेताओं ने मीडिया से बातचीत की और न्यूयॉर्क में आवास तथा शहर को कामकाजी वर्ग के लिए अधिक किफायती बनाने से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की जानकारी दी।

    ट्रंप ने ग्रेसी मैन्शन पहुंचने के बाद न्यूयॉर्क के मेयर के आधिकारिक आवास से जुड़ी अपनी पुरानी यादें भी साझा कीं। उन्होंने कहा कि इस इमारत में उन्होंने पहले भी कई मेयरों के साथ समय बिताया है और यहां कई महत्वपूर्ण काम हुए हैं। UNGA के लिए दुनिया के कई नेता इस समय न्यूयॉर्क में मौजूद हैं और ट्रंप मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करने वाले हैं।

    क्वींस में 12 हजार घर और 30 हजार नौकरियों पर चर्चा

    बैठक में न्यूयॉर्क के क्वींस इलाके में Sunnyside Yards के संभावित पुनर्विकास पर विशेष चर्चा हुई। ममदानी के मुताबिक इस परियोजना से करीब 12 हजार घर और 30 हजार नौकरियां पैदा हो सकती हैं। दोनों पक्षों ने इस योजना को आगे बढ़ाने के लिए न्यूयॉर्क सिटी हॉल और व्हाइट हाउस की हाउसिंग तथा ऑपरेशंस टीमों के बीच समन्वय बढ़ाने पर सहमति जताई।

    ट्रंप ने कहा कि Sunnyside Yards का विकास लंबे समय से चर्चा में है। परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए संघीय स्तर पर मंजूरी और फंडिंग की जरूरत पड़ सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रस्तावित विकास में कम और मध्यम आय वाले लोगों के लिए पर्याप्त आवास शामिल होना चाहिए।

    महंगाई और शहर को किफायती बनाने पर भी बात

    मुलाकात के दौरान न्यूयॉर्क में बढ़ती जीवन-यापन लागत और कामकाजी वर्ग के लिए शहर को अधिक किफायती बनाने के तरीकों पर भी चर्चा हुई। ममदानी ने कहा कि उनका फोकस न्यूयॉर्कवासियों के लिए रहने का खर्च कम करने और ज्यादा आवास उपलब्ध कराने पर है।

    ममदानी ने मुलाकात के बाद कहा कि ट्रंप के साथ उनके राजनीतिक मतभेद हैं, लेकिन वह शहर के लोगों को राहत दिलाने की दिशा में काम करने वाले सभी पक्षों के साथ बातचीत जारी रखेंगे। उन्होंने बैठक को उपयोगी बताया और कहा कि दोनों पक्षों के बीच आवास से जुड़े मुद्दों पर आगे भी बातचीत होगी।

    ट्रंप और ममदानी की तीसरी आमने-सामने मुलाकात

    ग्रेसी मैन्शन में हुई यह मुलाकात ट्रंप और ममदानी की तीसरी आमने-सामने बैठक थी और पहली बार दोनों न्यूयॉर्क में मिले। इससे पहले नवंबर 2025 में ममदानी ने व्हाइट हाउस में ट्रंप से मुलाकात की थी। इसके बाद फरवरी में भी ममदानी ने वॉशिंगटन जाकर ट्रंप के साथ न्यूयॉर्क में आवास विकास से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की थी।

    इस बार की बैठक में दोनों नेताओं ने अपने मतभेदों के बावजूद न्यूयॉर्क से जुड़े व्यावहारिक मुद्दों पर बातचीत जारी रखने पर जोर दिया। ट्रंप ने ममदानी के साथ मीडिया के सामने सकारात्मक लहजे में बात की और न्यूयॉर्क के लिए उनके काम करने की उम्मीद जताई।

  • विजय को PM कैंडिडेट बनाने की मांग से कांग्रेस नाराज, अब TVK की सहयोगी दलों की बुलाई गई है बैठक

    विजय को PM कैंडिडेट बनाने की मांग से कांग्रेस नाराज, अब TVK की सहयोगी दलों की बुलाई गई है बैठक


    चेन्नई। तमिलनाडु में सत्ता के गठबंधन के बीच अब राष्ट्रीय राजनीति को लेकर खींचतान शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय को 2029 के लोकसभा चुनाव में विपक्ष का प्रधानमंत्री पद का चेहरा बनाने की मांग TVK के भीतर तेज हो रही है। पार्टी नेताओं के इन बयानों से उसकी प्रमुख सहयोगी कांग्रेस असहज है। इसी बीच TVK ने 9 सितंबर को सहयोगी दलों की बैठक बुलाई है, जिसे मौजूदा राजनीतिक तनाव के बीच काफी अहम माना जा रहा है।

    TVK सरकार में मंत्री आधव अर्जुन, राज मोहन और आर. निर्मल कुमार ने CPI(M), CPI और MDMK को बैठक में शामिल होने का न्योता दिया है। हालांकि गठबंधन की सबसे बड़ी सहयोगी कांग्रेस को बैठक में बुलाया गया है या नहीं, इसकी अभी पुष्टि नहीं हुई है। बैठक का एजेंडा भी आधिकारिक तौर पर स्पष्ट नहीं किया गया है।

    PM पद को लेकर क्यों गरमाया मामला?
    बैठक ऐसे समय हो रही है जब TVK के कुछ विधायक खुले तौर पर विजय को 2029 के लिए प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने की मांग कर रहे हैं। विधायक कनिमोझी ने दावा किया कि 2029 में विजय TVK की ओर से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार होंगे। उन्होंने यहां तक कहा कि देश का अगला प्रधानमंत्री कौन होगा, इसका फैसला दिल्ली नहीं बल्कि तमिलनाडु करेगा।

    कनिमोझी ने विजय को राष्ट्रीय राजनीति में बड़ा बदलाव लाने वाला नेता बताते हुए एक और बड़ा दावा किया। उनके मुताबिक राहुल गांधी अंततः विजय की उम्मीदवारी का समर्थन करेंगे। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के समर्थन से ही विजय मुख्यमंत्री बने हैं और आगे राहुल ही उनका हाथ पकड़कर उन्हें प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंचाएंगे।

    रानीपेट की विधायक आई. ताहिरा, ऊर्जा संसाधन एवं कानून मंत्री आर. निर्मल कुमार समेत TVK के कई अन्य नेताओं ने भी विजय की राष्ट्रीय भूमिका की पैरवी की है।

    कांग्रेस ने साफ किया- राहुल गांधी ही पसंद
    TVK नेताओं के बयानों पर कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया है कि 2029 के प्रधानमंत्री पद को लेकर उसकी पसंद राहुल गांधी हैं। कांग्रेस विधायक दल की नेता थरहाई कथबर्ट ने विजय को PM उम्मीदवार बनाने के अभियान को TVK के कुछ पहली बार चुने गए विधायकों का ‘फैन माइंडसेट’ करार दिया।

    कांग्रेस का कहना है कि विजय पहले ही राहुल गांधी को गठबंधन का उम्मीदवार स्वीकार कर चुके हैं। ऐसे में कुछ विधायकों के व्यक्तिगत बयान पार्टी की तय रणनीति नहीं माने जा सकते।

    तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष मणिकम टैगोर ने भी विजय की PM दावेदारी से जुड़े बयानों को मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का चुनाव आखिरकार देश के मतदाता ही करेंगे।

    कांग्रेस का साथ जरूरी, अपने दम पर बहुमत नहीं
    विजय की सरकार की मजबूरी यह है कि TVK के पास अकेले बहुमत नहीं है। सरकार कांग्रेस, वामपंथी दलों, VCK और IUML के समर्थन पर टिकी है। TVK की सबसे बड़ी सहयोगी कांग्रेस के राज्य सरकार में पांच विधायक और दो मंत्री हैं।

    ऐसे में राष्ट्रीय स्तर पर विजय और राहुल गांधी को लेकर टकराव लंबा खिंचता है तो इसका असर राज्य सरकार की स्थिरता पर भी पड़ सकता है। यही वजह है कि 9 सितंबर की बैठक को गठबंधन के भीतर पैदा हुई तल्खी कम करने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है।

    INDIA ब्लॉक में नहीं, फिर भी कांग्रेस सरकार में
    TVK अभी औपचारिक रूप से INDIA ब्लॉक का हिस्सा नहीं बनी है। इसके बावजूद तमिलनाडु में कांग्रेस उसकी सरकार का हिस्सा है। इससे दोनों दलों को राज्य में साथ काम करते हुए राष्ट्रीय राजनीति में अलग-अलग रुख अपनाने की गुंजाइश मिलती है।

    हालांकि विजय को PM बनाने की मांग और कांग्रेस की राहुल गांधी को लेकर स्पष्ट पसंद ने गठबंधन के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। अब बड़ा सवाल यही है कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले क्या राज्य में विजय-कांग्रेस की साझेदारी राष्ट्रीय नेतृत्व की महत्वाकांक्षाओं के टकराव के बावजूद कायम रह पाएगी?

  • जयशंकर की जेलेंस्की से मुलाकात के बीच कीव पर रूसी ड्रोन हमला

    जयशंकर की जेलेंस्की से मुलाकात के बीच कीव पर रूसी ड्रोन हमला

    कीव। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने दावा किया है कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर जब कीव में उनसे मुलाकात कर रहे थे, उसी दौरान रूस ने यूक्रेन पर ड्रोन हमला किया। जेलेंस्की के मुताबिक, रूस की ओर से जेट इंजन वाले ‘शाहेद’ ड्रोन लॉन्च किए गए थे। यूक्रेन पहले भी इन ड्रोन के विकास में ईरान की मदद का आरोप लगाता रहा है।

    जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेनी लड़ाकू विमानों ने ज्यादातर ड्रोन को हवा में ही मार गिराया, जिसके चलते जयशंकर के नेतृत्व वाला भारतीय प्रतिनिधिमंडल सुरक्षित रहा।

    युद्ध खत्म करने के रास्तों पर हुई चर्चा

    विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने गुरुवार को यूक्रेन की राजधानी कीव में राष्ट्रपति जेलेंस्की से मुलाकात की। बातचीत में रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के संभावित रास्तों के साथ-साथ भारत और यूक्रेन के द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई।

    जयशंकर ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए बताया कि उन्होंने जेलेंस्की को यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा के साथ हुई बातचीत की जानकारी दी। दोनों पक्षों के बीच चर्चा का प्रमुख मुद्दा युद्ध का समाधान तलाशना रहा।

    इसी मुलाकात के दौरान कीव में रूसी ड्रोन हमले की खबर सामने आई।

    जेलेंस्की ने भारतीय प्रतिनिधिमंडल का किया जिक्र

    जेलेंस्की ने अपने बयान में खास तौर पर जयशंकर के प्रतिनिधिमंडल की सुरक्षा का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यूक्रेनी लड़ाकू विमानों ने ज्यादातर ड्रोन को नष्ट कर दिया और इसी कारण भारतीय प्रतिनिधिमंडल सुरक्षित रहा।

    यूक्रेनी राष्ट्रपति के मुताबिक, जिस समय जयशंकर उनके साथ कीव में मौजूद थे, उसी वक्त रूस ने एक बार फिर जेट इंजन वाले शाहेद ड्रोन लॉन्च किए। यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि जयशंकर ऐसे समय यूक्रेन पहुंचे थे जब राजधानी में रूसी हवाई हमलों का खतरा बना हुआ था।

    जेलेंस्की ने दुनिया से मांगा स्पष्ट रुख

    जेलेंस्की ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और दुनिया की प्रमुख शक्तियों से रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर स्पष्ट रुख अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि युद्ध को समाप्त करने की जरूरत है और शांति ऐसी होनी चाहिए जो भरोसेमंद और लंबे समय तक टिकाऊ रहे।

    उन्होंने भारत के रुख का भी उल्लेख करते हुए कहा कि यूक्रेन युद्ध समाप्त करने की भारत की प्रतिबद्धता की सराहना करता है।

    बंदरगाहों और खाद्य आपूर्ति को लेकर रूस पर आरोप

    यूक्रेनी राष्ट्रपति ने रूस पर यूक्रेन के बंदरगाहों, खाद्य गलियारे और आपूर्ति व्यवस्था को बाधित करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने खास तौर पर ब्लैक सी में नागरिक जहाजों की सुरक्षा को महत्वपूर्ण बताया।

    जेलेंस्की का तर्क है कि समुद्री मार्गों में किसी भी तरह की रुकावट का असर केवल यूक्रेन तक सीमित नहीं रहेगा। इससे उन क्षेत्रों में भी खाद्य आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जो इन समुद्री रास्तों पर निर्भर हैं।

    जयशंकर की कीव यात्रा के दौरान हुई यह मुलाकात और उसी समय सामने आया ड्रोन हमला रूस-यूक्रेन युद्ध की मौजूदा स्थिति की गंभीरता को भी रेखांकित करता है।

  • मोदी-पेजेशकियन की मुलाकात पर अमेरिका बोला-भारत-ईरान के बीच कोई व्यापार समझौता नहीं….

    मोदी-पेजेशकियन की मुलाकात पर अमेरिका बोला-भारत-ईरान के बीच कोई व्यापार समझौता नहीं….


    वॉशिंगटन
    । अमेरिका (America) के विदेश मंत्री मार्को रूबियो (Foreign Minister Marco Rubio) ने बुधवार को कहा कि उन्हें नहीं लगता कि भारत और ईरान (India and Iran) के बीच किसी व्यापार समझौते (Trade Agreement) को लेकर बातचीत हो रही है। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई देश ईरान की सरकार से बातचीत करते हैं। रूबियो ने यह टिप्पणी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन (Iranian President Masoud Pezeshkian) के बीच बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन से इतर हुई मुलाकात को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में की। यह सवाल फॉक्स न्यूज रेडियो के ‘द ब्रायन किल्मीड शो’ में उनसे पूछा गया था।

    कार्यक्रम के दौरान प्रस्तोता ब्रायन किल्मीड ने कहा कि पीएम मोदी और पेजेशकियन की मुलाकात में ऐसा लगा कि दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते की तैयारी हो रही है। इसके जवाब में रूबियो ने कहा, ”खैर, मुझे नहीं लगता कि भारत और ईरान के बीच कोई व्यापार समझौता है। जाहिर तौर पर, सभी देश अपनी-अपनी विदेश नीति तय करते हैं और दुनिया के कई देश ईरान की सरकार से बातचीत करते हैं।”


    ईरान की मदद करने वाले देशों पर अमेरिका क्या करेगा कार्रवाई?

    अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा, ”मेरा मतलब है कि हम भी ईरान की सरकार के कुछ लोगों के साथ मिले हैं। कुछ चर्चाओं के संदर्भ में हमारी उनसे बातचीत और संपर्क हुआ है।” रूबियो ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी देश को ईरान को अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने में मदद नहीं करनी चाहिए।

    उन्होंने कहा, ”किसी भी देश को ऐसे तंत्र बनाने में उनकी मदद नहीं करनी चाहिए, जिनके जरिए वे राजस्व जुटा सकें और फिर उसका इस्तेमाल आतंकवाद को बढ़ावा देने के साथ परमाणु हथियार बनाने की कोशिश में कर सकें। और अगर देश ऐसा करने का फैसला करते हैं, तो हमें उन पर भी प्रतिबंध लगाना पड़ेगा।”


    पीएम मोदी से पेजेशकियन ने क्यों की मुलाकात?

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 31 अगस्त को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन से इतर ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के साथ बैठक की थी। ईरान की अर्द्ध सरकारी एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने आपसी रिश्तों की मौजूदा स्थिति का जायजा लिया और दोनों देशों के लिए अहम क्षेत्रों में ईरान और भारत के बीच आपसी सहयोग को मजबूत करने की जरूरत पर बल दिया गया।

    पश्चिम एशिया संकट के बीच दोनों शीर्ष नेताओं में संवाद कायम रहा है। जून में, पीएम मोदी और पेजेशकियन के बीच फोन पर बातचीत हुई थी, जिसमें ईरानी राष्ट्रपति ने भारतीय पीएम को पश्चिम एशिया में हो रही घटनाओं और आगे की राह के बारे में जानकारी दी थी। बातचीत के दौरान, पीएम मोदी ने संघर्ष खत्म करने के लिए बनी सहमति का स्वागत किया था और स्थायी शांति और स्थिरता के लिए लगातार कोशिशों की जरूरत को दोहराया।

  • फडणवीस और शिंदे से मुलाकात के बाद तेज हुई सियासी चर्चा, शरद गुट ने NDA में शामिल होने की अटकलों को बताया निराधार

    फडणवीस और शिंदे से मुलाकात के बाद तेज हुई सियासी चर्चा, शरद गुट ने NDA में शामिल होने की अटकलों को बताया निराधार


    मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में उस समय हलचल तेज हो गई जब राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल और जितेंद्र आव्हाड ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से उनके सरकारी आवास ‘नंदनवन’ में करीब 45 मिनट तक बंद कमरे में मुलाकात की। इससे पहले जयंत पाटिल मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से भी देर रात मुलाकात कर चुके थे।

    लगातार हुई इन बैठकों के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा शुरू हो गई कि क्या शरद पवार की पार्टी सत्तारूढ़ एनडीए गठबंधन के करीब आ रही है। हालांकि दोनों नेताओं ने इन अटकलों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि मुलाकात का राजनीतिक गठबंधन से कोई संबंध नहीं है।

    जयंत पाटिल ने मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि उनकी शिंदे से मुलाकात क्षेत्र के विकास कार्यों और शहरी विकास विभाग से जुड़े लंबित मामलों को लेकर थी। उन्होंने बताया कि एक नगर परिषद अध्यक्ष की अयोग्यता के खिलाफ दायर अपील पर भी चर्चा की गई।

    वहीं, जितेंद्र आव्हाड ने भी कहा कि इतने लंबे राजनीतिक अनुभव वाला कोई भी नेता यदि किसी बड़े राजनीतिक गठबंधन पर चर्चा करना चाहता है, तो वह इस तरह सार्वजनिक रूप से मुलाकात नहीं करेगा। उनके मुताबिक, इन बैठकों को लेकर लगाए जा रहे राजनीतिक कयास बेबुनियाद हैं।

    आव्हाड ने आरोप लगाया कि उनके क्षेत्र के नगर परिषद अध्यक्ष को अयोग्य ठहराने की कार्रवाई सत्तारूढ़ गठबंधन की दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा है। उनका कहना है कि इस फैसले के जरिए उन्हें राजनीतिक रूप से झुकाने की कोशिश की जा रही है।

    उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सत्ताधारी दल जानबूझकर ऐसी अफवाहें फैला रहे हैं ताकि जयंत पाटिल की साफ-सुथरी छवि को नुकसान पहुंचे और पार्टी अध्यक्ष शरद पवार के प्रति उनकी निष्ठा पर सवाल खड़े किए जा सकें। आव्हाड ने कहा कि वे केवल इस पूरे मामले को राज्य के शीर्ष नेतृत्व के सामने रख रहे हैं, क्योंकि इतना बड़ा प्रशासनिक फैसला मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री की जानकारी के बिना संभव नहीं हो सकता।

  • अग्निवीर सेना भर्ती रैली की तैयारियों को लेकर मंत्री सारंग ने ली उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक

    अग्निवीर सेना भर्ती रैली की तैयारियों को लेकर मंत्री सारंग ने ली उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक


    भोपाल। मध्‍य प्रदेश के खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने गुरुवार को राजधानी भोपाल के अंतर्राष्ट्रीय स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, नाथू बरखेड़ा में 28 जुलाई से 8 अगस्त तक होने वाली अग्निवीर सेना भर्ती रैली की तैयारियों को लेकर सेना भर्ती कार्यालय (एआरओ), जिला प्रशासन एवं खेल और युवा कल्याण विभाग सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों की संयुक्त समीक्षा बैठक ली।

    मंत्री सारंग ने बैठक में भर्ती रैली के सफल, सुरक्षित एवं सुव्यवस्थित आयोजन के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं की बिंदुवार समीक्षा करते हुए सभी संबंधित विभागों को निर्धारित समय-सीमा में तैयारियां पूर्ण करने के निर्देश दिए गए। मंत्री सारंग ने कहा कि अग्निवीर भर्ती रैली केवल एक प्रशासनिक आयोजन नहीं, बल्कि प्रदेश के हजारों युवाओं के लिए भारतीय सेना में शामिल होकर राष्ट्रसेवा का स्वर्णिम अवसर है। इसलिए सभी विभाग यह सुनिश्चित करें कि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी, व्यवस्थित एवं अभ्यर्थी हितैषी वातावरण में संपन्न हो। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सेना भर्ती कार्यालय एवं जिला प्रशासन के साथ पूरा समन्वय स्थापित कर प्रत्येक आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराएगी।

    मंत्री सारंग ने कहा कि भर्ती रैली में प्रदेश के विभिन्न जिलों के साथ पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ से भी बड़ी संख्या में अभ्यर्थी भोपाल आएंगे। ऐसे में यातायात, सुरक्षा, पेयजल, चिकित्सा, स्वच्छता एवं अन्य मूलभूत व्यवस्थाओं में किसी प्रकार की कमी नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी व्यवस्थाओं का पूर्वाभ्यास एवं संयुक्त निरीक्षण समय रहते कर लिया जाए ताकि आयोजन के दौरान किसी प्रकार की असुविधा उत्पन्न नहीं हो।

    बैठक में सेना भर्ती कार्यालय द्वारा विभिन्न विभागों को सौंपे गए दायित्वों की विस्तार से समीक्षा की गई। मंत्री सारंग ने खेल एवं युवा कल्याण विभाग को अंतर्राष्ट्रीय स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में 400 मीटर एथलेटिक्स ट्रैक, परीक्षण क्षेत्र, खेल मैदान एवं अन्य खेल अधोसंरचना पूरी तरह तैयार रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आयोजन स्थल पर सेना एवं प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय के लिए नोडल अधिकारी की नियुक्ति सुनिश्चित की जाए। उन्होंने पुलिस विभाग को भर्ती रैली की संपूर्ण अवधि में पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था, भीड़ नियंत्रण तथा सुचारु यातायात संचालन के निर्देश दिए। वहीं स्वास्थ्य विभाग को मेडिकल टीम, चिकित्सकों, एम्बुलेंस एवं प्राथमिक उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा।

    मंत्री सारंग ने नगर निगम एवं लोक निर्माण विभाग को परीक्षण क्षेत्र में आवश्यक बैरिकेडिंग, स्वच्छता, मोबाइल शौचालय, कचरा प्रबंधन तथा परिसर की नियमित साफ-सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही आयोजन स्थल पर पर्याप्त पेयजल, टेंट, शेड, बैठने की व्यवस्था, मौसम के अनुरूप पंखे, सार्वजनिक उद्घोषणा प्रणाली (पब्लिक एड्रेस सिस्टम) तथा अग्निशमन वाहन उपलब्ध रखने के निर्देश भी दिए।

    बैठक में सेना के अधिकारियों एवं जवानों के आवास, परिवहन एवं पार्किंग व्यवस्था की भी समीक्षा की गई। मंत्री सारंग ने निर्देश दिए कि सेना के अधिकारियों एवं जवानों के ठहरने के लिए उपयुक्त व्यवस्था की जाए तथा उनके आवागमन के लिये आवश्यक वाहन उपलब्ध कराए जाएं। साथ ही अभ्यर्थियों के रात्रि विश्राम एवं परिवहन की समुचित व्यवस्था भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। बैठक में निर्णय लिया गया कि आयोजन स्थल पर अस्थायी विद्युत कनेक्शन, निर्बाध विद्युत आपूर्ति के लिए जनरेटर बैकअप, इंटरनेट कनेक्शन, रेलवे स्टेशन एवं बस स्टैंड पर आवश्यक सहायता व्यवस्था तथा दस्तावेजों के सत्यापन के लिए कंप्यूटर एवं ऑपरेटर उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके अलावा अभ्यर्थियों की सुविधा के लिए न्यूनतम दरों पर भोजन एवं नाश्ते के स्टॉल भी लगाए जाएंगे।

    मंत्री सारंग ने निर्देशित किया कि भर्ती रैली प्रारंभ होने से पूर्व सेना भर्ती कार्यालय, जिला प्रशासन एवं संबंधित विभागों की संयुक्त बैठक एवं स्थल निरीक्षण कर सभी व्यवस्थाओं का अंतिम परीक्षण कर लिया जाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार का उद्देश्य केवल सफल आयोजन नहीं, बल्कि प्रत्येक अभ्यर्थी को सम्मानजनक, सुरक्षित एवं सुविधाजनक वातावरण उपलब्ध कराना है।

    उल्लेखनीय है कि सेना भर्ती कार्यालय, भोपाल द्वारा आयोजित यह अग्निवीर भर्ती रैली 28 जुलाई से 8 अगस्त तक अंतर्राष्ट्रीय स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, नाथू बरखेड़ा, भोपाल में होगी। भर्ती रैली में मध्यप्रदेश के 15 जिले—भोपाल, सीहोर, रायसेन, विदिशा, राजगढ़, अशोकनगर, गुना, नर्मदापुरम, हरदा, बैतूल, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, नरसिंहपुर, दमोह एवं पन्ना के अभ्यर्थी अग्निवीर जनरल ड्यूटी, अग्निवीर तकनीकी एवं अग्निवीर ट्रेड्समैन श्रेणियों में भाग लेंगे। इसके अतिरिक्त मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ के सभी जिलों के अभ्यर्थियों के लिए धर्म गुरु एवं एजुकेशन हवलदार श्रेणी की भर्ती भी की जाएगी।

    मंत्री सारंग ने कहा कि भारतीय सेना में भर्ती होने का सपना देखने वाले युवाओं के लिए यह एक महत्वपूर्ण अवसर है और राज्य सरकार भर्ती रैली को सफल बनाने के लिए सभी आवश्यक संसाधन एवं सहयोग उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

  • पंजाब कांग्रेस में नेतृत्व विवाद जारी, बघेल-चन्नी की बैठक बेनतीजा, राजा वड़िंग को हटाने की मांग फिर उठी

    पंजाब कांग्रेस में नेतृत्व विवाद जारी, बघेल-चन्नी की बैठक बेनतीजा, राजा वड़िंग को हटाने की मांग फिर उठी


    चंडीगढ़। पंजाब कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को लेकर चल रहा नेतृत्व विवाद फिलहाल सुलझता नजर नहीं आ रहा है। शनिवार को कांग्रेस के पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल ने पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के समर्थक नेताओं के साथ करीब दो घंटे तक बंद कमरे में बैठक की, लेकिन किसी ठोस नतीजे पर सहमति नहीं बन सकी। बैठक में कई वरिष्ठ नेताओं ने एक बार फिर राजा वड़िंग को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाने की मांग दोहराई।

    सूत्रों के अनुसार, बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा समेत कई नेताओं ने कहा कि 2027 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत के लिए मजबूत नेतृत्व जरूरी है। नेताओं ने अपनी आपत्तियां कांग्रेस हाईकमान तक पहुंचाने का आग्रह करते हुए प्रदेश अध्यक्ष बदलने की मांग रखी।

    हालांकि बैठक के बाद भूपेश बघेल ने विवाद को ज्यादा तूल देने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि पिछले कई दिनों से वह अलग-अलग नेताओं से लगातार चर्चा कर रहे हैं। उनके अनुसार, कोई भी नेता हाईकमान के फैसले का विरोध नहीं कर रहा है, लेकिन कुछ आशंकाएं और संगठन से जुड़े मुद्दे हैं, जिन्हें पार्टी नेतृत्व के सामने रखा जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि सभी नेताओं के हितों का ध्यान रखते हुए उचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाएगा। वहीं, जब उनसे पूछा गया कि क्या बैठक में राजा वड़िंग को हटाने की मांग उठी, तो उन्होंने इससे इनकार किया।

    चन्नी और वड़िंग को साथ नहीं ला सके बघेल
    पंजाब में पिछले छह दिनों से संगठनात्मक विवाद सुलझाने की कोशिश कर रहे भूपेश बघेल शनिवार दोपहर छत्तीसगढ़ रवाना हो गए। इस दौरान वह चरणजीत सिंह चन्नी और अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को एक मंच पर लाने में भी सफल नहीं हो सके।

    बैठक के बाद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा कि सभी मांगें भूपेश बघेल के सामने रख दी गई हैं। उनका कहना था कि पार्टी की प्राथमिकता 2027 में पंजाब में कांग्रेस की सरकार बनाना है और इसके लिए मजबूत नेतृत्व की आवश्यकता है, न कि समझौता करने वाले नेता की।

    रंधावा ने बिना किसी का नाम लिए कहा कि प्रदेश कांग्रेस का नेतृत्व ऐसा होना चाहिए जो मुख्यमंत्री भगवंत मान की राजनीतिक चुनौतियों का मजबूती से सामना कर सके। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक दल समय-समय पर अपने फैसलों में बदलाव करते हैं और कांग्रेस भी ऐसा कर सकती है।

    गौरतलब है कि कांग्रेस हाईकमान ने हाल ही में पंजाब संगठन की नई सूची जारी करते हुए अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को दोबारा प्रदेश अध्यक्ष बनाए रखने का फैसला किया था। इसके बाद से पार्टी के भीतर दो स्पष्ट खेमे दिखाई दे रहे हैं और चन्नी समर्थक नेता लगातार इस फैसले का विरोध कर रहे हैं।

    बैठक में कई वरिष्ठ नेता रहे मौजूद
    भूपेश बघेल के साथ हुई बैठक में चरणजीत सिंह चन्नी, सुखजिंदर सिंह रंधावा, ओपी सोनी, नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा, विधायक परगट सिंह, पूर्व मंत्री तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा, भारत भूषण आशु, पूर्व सांसद शेर सिंह घुबाया, पूर्व युवा कांग्रेस अध्यक्ष बरिंदर ढिल्लों सहित कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए।

    रंधावा के बयान पर राजा वड़िंग का पलटवार
    सुखजिंदर सिंह रंधावा के “समझौता करने वाला नेता नहीं चाहिए” वाले बयान पर अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि किसी का नाम नहीं लिया गया, तो इशारा उनकी ओर क्यों किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पार्टी में स्लीपर सेल या समझौता करने वाले नेताओं के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए।

    राजा वड़िंग ने कहा कि वह और रंधावा करीब साढ़े चार साल तक साथ काम कर चुके हैं। यदि वह समझौता करने वाले नेता होते तो रंधावा उनके साथ काम नहीं करते। वहीं, भाजपा नेता सुनील जाखड़ के बयान पर पलटवार करते हुए उन्होंने कहा कि जाखड़ लंबे समय तक कांग्रेस में रहे और बाद में यह कहते हुए पार्टी छोड़ दी कि यहां हिंदुओं की नहीं सुनी जाती। उन्होंने कहा कि “असली गद्दार तो वही हैं।”