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  • फडणवीस और शिंदे से मुलाकात के बाद तेज हुई सियासी चर्चा, शरद गुट ने NDA में शामिल होने की अटकलों को बताया निराधार

    फडणवीस और शिंदे से मुलाकात के बाद तेज हुई सियासी चर्चा, शरद गुट ने NDA में शामिल होने की अटकलों को बताया निराधार


    मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में उस समय हलचल तेज हो गई जब राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल और जितेंद्र आव्हाड ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से उनके सरकारी आवास ‘नंदनवन’ में करीब 45 मिनट तक बंद कमरे में मुलाकात की। इससे पहले जयंत पाटिल मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से भी देर रात मुलाकात कर चुके थे।

    लगातार हुई इन बैठकों के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा शुरू हो गई कि क्या शरद पवार की पार्टी सत्तारूढ़ एनडीए गठबंधन के करीब आ रही है। हालांकि दोनों नेताओं ने इन अटकलों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि मुलाकात का राजनीतिक गठबंधन से कोई संबंध नहीं है।

    जयंत पाटिल ने मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि उनकी शिंदे से मुलाकात क्षेत्र के विकास कार्यों और शहरी विकास विभाग से जुड़े लंबित मामलों को लेकर थी। उन्होंने बताया कि एक नगर परिषद अध्यक्ष की अयोग्यता के खिलाफ दायर अपील पर भी चर्चा की गई।

    वहीं, जितेंद्र आव्हाड ने भी कहा कि इतने लंबे राजनीतिक अनुभव वाला कोई भी नेता यदि किसी बड़े राजनीतिक गठबंधन पर चर्चा करना चाहता है, तो वह इस तरह सार्वजनिक रूप से मुलाकात नहीं करेगा। उनके मुताबिक, इन बैठकों को लेकर लगाए जा रहे राजनीतिक कयास बेबुनियाद हैं।

    आव्हाड ने आरोप लगाया कि उनके क्षेत्र के नगर परिषद अध्यक्ष को अयोग्य ठहराने की कार्रवाई सत्तारूढ़ गठबंधन की दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा है। उनका कहना है कि इस फैसले के जरिए उन्हें राजनीतिक रूप से झुकाने की कोशिश की जा रही है।

    उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सत्ताधारी दल जानबूझकर ऐसी अफवाहें फैला रहे हैं ताकि जयंत पाटिल की साफ-सुथरी छवि को नुकसान पहुंचे और पार्टी अध्यक्ष शरद पवार के प्रति उनकी निष्ठा पर सवाल खड़े किए जा सकें। आव्हाड ने कहा कि वे केवल इस पूरे मामले को राज्य के शीर्ष नेतृत्व के सामने रख रहे हैं, क्योंकि इतना बड़ा प्रशासनिक फैसला मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री की जानकारी के बिना संभव नहीं हो सकता।

  • अग्निवीर सेना भर्ती रैली की तैयारियों को लेकर मंत्री सारंग ने ली उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक

    अग्निवीर सेना भर्ती रैली की तैयारियों को लेकर मंत्री सारंग ने ली उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक


    भोपाल। मध्‍य प्रदेश के खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने गुरुवार को राजधानी भोपाल के अंतर्राष्ट्रीय स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, नाथू बरखेड़ा में 28 जुलाई से 8 अगस्त तक होने वाली अग्निवीर सेना भर्ती रैली की तैयारियों को लेकर सेना भर्ती कार्यालय (एआरओ), जिला प्रशासन एवं खेल और युवा कल्याण विभाग सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों की संयुक्त समीक्षा बैठक ली।

    मंत्री सारंग ने बैठक में भर्ती रैली के सफल, सुरक्षित एवं सुव्यवस्थित आयोजन के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं की बिंदुवार समीक्षा करते हुए सभी संबंधित विभागों को निर्धारित समय-सीमा में तैयारियां पूर्ण करने के निर्देश दिए गए। मंत्री सारंग ने कहा कि अग्निवीर भर्ती रैली केवल एक प्रशासनिक आयोजन नहीं, बल्कि प्रदेश के हजारों युवाओं के लिए भारतीय सेना में शामिल होकर राष्ट्रसेवा का स्वर्णिम अवसर है। इसलिए सभी विभाग यह सुनिश्चित करें कि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी, व्यवस्थित एवं अभ्यर्थी हितैषी वातावरण में संपन्न हो। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सेना भर्ती कार्यालय एवं जिला प्रशासन के साथ पूरा समन्वय स्थापित कर प्रत्येक आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराएगी।

    मंत्री सारंग ने कहा कि भर्ती रैली में प्रदेश के विभिन्न जिलों के साथ पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ से भी बड़ी संख्या में अभ्यर्थी भोपाल आएंगे। ऐसे में यातायात, सुरक्षा, पेयजल, चिकित्सा, स्वच्छता एवं अन्य मूलभूत व्यवस्थाओं में किसी प्रकार की कमी नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी व्यवस्थाओं का पूर्वाभ्यास एवं संयुक्त निरीक्षण समय रहते कर लिया जाए ताकि आयोजन के दौरान किसी प्रकार की असुविधा उत्पन्न नहीं हो।

    बैठक में सेना भर्ती कार्यालय द्वारा विभिन्न विभागों को सौंपे गए दायित्वों की विस्तार से समीक्षा की गई। मंत्री सारंग ने खेल एवं युवा कल्याण विभाग को अंतर्राष्ट्रीय स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में 400 मीटर एथलेटिक्स ट्रैक, परीक्षण क्षेत्र, खेल मैदान एवं अन्य खेल अधोसंरचना पूरी तरह तैयार रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आयोजन स्थल पर सेना एवं प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय के लिए नोडल अधिकारी की नियुक्ति सुनिश्चित की जाए। उन्होंने पुलिस विभाग को भर्ती रैली की संपूर्ण अवधि में पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था, भीड़ नियंत्रण तथा सुचारु यातायात संचालन के निर्देश दिए। वहीं स्वास्थ्य विभाग को मेडिकल टीम, चिकित्सकों, एम्बुलेंस एवं प्राथमिक उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा।

    मंत्री सारंग ने नगर निगम एवं लोक निर्माण विभाग को परीक्षण क्षेत्र में आवश्यक बैरिकेडिंग, स्वच्छता, मोबाइल शौचालय, कचरा प्रबंधन तथा परिसर की नियमित साफ-सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही आयोजन स्थल पर पर्याप्त पेयजल, टेंट, शेड, बैठने की व्यवस्था, मौसम के अनुरूप पंखे, सार्वजनिक उद्घोषणा प्रणाली (पब्लिक एड्रेस सिस्टम) तथा अग्निशमन वाहन उपलब्ध रखने के निर्देश भी दिए।

    बैठक में सेना के अधिकारियों एवं जवानों के आवास, परिवहन एवं पार्किंग व्यवस्था की भी समीक्षा की गई। मंत्री सारंग ने निर्देश दिए कि सेना के अधिकारियों एवं जवानों के ठहरने के लिए उपयुक्त व्यवस्था की जाए तथा उनके आवागमन के लिये आवश्यक वाहन उपलब्ध कराए जाएं। साथ ही अभ्यर्थियों के रात्रि विश्राम एवं परिवहन की समुचित व्यवस्था भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। बैठक में निर्णय लिया गया कि आयोजन स्थल पर अस्थायी विद्युत कनेक्शन, निर्बाध विद्युत आपूर्ति के लिए जनरेटर बैकअप, इंटरनेट कनेक्शन, रेलवे स्टेशन एवं बस स्टैंड पर आवश्यक सहायता व्यवस्था तथा दस्तावेजों के सत्यापन के लिए कंप्यूटर एवं ऑपरेटर उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके अलावा अभ्यर्थियों की सुविधा के लिए न्यूनतम दरों पर भोजन एवं नाश्ते के स्टॉल भी लगाए जाएंगे।

    मंत्री सारंग ने निर्देशित किया कि भर्ती रैली प्रारंभ होने से पूर्व सेना भर्ती कार्यालय, जिला प्रशासन एवं संबंधित विभागों की संयुक्त बैठक एवं स्थल निरीक्षण कर सभी व्यवस्थाओं का अंतिम परीक्षण कर लिया जाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार का उद्देश्य केवल सफल आयोजन नहीं, बल्कि प्रत्येक अभ्यर्थी को सम्मानजनक, सुरक्षित एवं सुविधाजनक वातावरण उपलब्ध कराना है।

    उल्लेखनीय है कि सेना भर्ती कार्यालय, भोपाल द्वारा आयोजित यह अग्निवीर भर्ती रैली 28 जुलाई से 8 अगस्त तक अंतर्राष्ट्रीय स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, नाथू बरखेड़ा, भोपाल में होगी। भर्ती रैली में मध्यप्रदेश के 15 जिले—भोपाल, सीहोर, रायसेन, विदिशा, राजगढ़, अशोकनगर, गुना, नर्मदापुरम, हरदा, बैतूल, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, नरसिंहपुर, दमोह एवं पन्ना के अभ्यर्थी अग्निवीर जनरल ड्यूटी, अग्निवीर तकनीकी एवं अग्निवीर ट्रेड्समैन श्रेणियों में भाग लेंगे। इसके अतिरिक्त मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ के सभी जिलों के अभ्यर्थियों के लिए धर्म गुरु एवं एजुकेशन हवलदार श्रेणी की भर्ती भी की जाएगी।

    मंत्री सारंग ने कहा कि भारतीय सेना में भर्ती होने का सपना देखने वाले युवाओं के लिए यह एक महत्वपूर्ण अवसर है और राज्य सरकार भर्ती रैली को सफल बनाने के लिए सभी आवश्यक संसाधन एवं सहयोग उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

  • पंजाब कांग्रेस में नेतृत्व विवाद जारी, बघेल-चन्नी की बैठक बेनतीजा, राजा वड़िंग को हटाने की मांग फिर उठी

    पंजाब कांग्रेस में नेतृत्व विवाद जारी, बघेल-चन्नी की बैठक बेनतीजा, राजा वड़िंग को हटाने की मांग फिर उठी


    चंडीगढ़। पंजाब कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को लेकर चल रहा नेतृत्व विवाद फिलहाल सुलझता नजर नहीं आ रहा है। शनिवार को कांग्रेस के पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल ने पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के समर्थक नेताओं के साथ करीब दो घंटे तक बंद कमरे में बैठक की, लेकिन किसी ठोस नतीजे पर सहमति नहीं बन सकी। बैठक में कई वरिष्ठ नेताओं ने एक बार फिर राजा वड़िंग को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाने की मांग दोहराई।

    सूत्रों के अनुसार, बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा समेत कई नेताओं ने कहा कि 2027 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत के लिए मजबूत नेतृत्व जरूरी है। नेताओं ने अपनी आपत्तियां कांग्रेस हाईकमान तक पहुंचाने का आग्रह करते हुए प्रदेश अध्यक्ष बदलने की मांग रखी।

    हालांकि बैठक के बाद भूपेश बघेल ने विवाद को ज्यादा तूल देने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि पिछले कई दिनों से वह अलग-अलग नेताओं से लगातार चर्चा कर रहे हैं। उनके अनुसार, कोई भी नेता हाईकमान के फैसले का विरोध नहीं कर रहा है, लेकिन कुछ आशंकाएं और संगठन से जुड़े मुद्दे हैं, जिन्हें पार्टी नेतृत्व के सामने रखा जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि सभी नेताओं के हितों का ध्यान रखते हुए उचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाएगा। वहीं, जब उनसे पूछा गया कि क्या बैठक में राजा वड़िंग को हटाने की मांग उठी, तो उन्होंने इससे इनकार किया।

    चन्नी और वड़िंग को साथ नहीं ला सके बघेल
    पंजाब में पिछले छह दिनों से संगठनात्मक विवाद सुलझाने की कोशिश कर रहे भूपेश बघेल शनिवार दोपहर छत्तीसगढ़ रवाना हो गए। इस दौरान वह चरणजीत सिंह चन्नी और अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को एक मंच पर लाने में भी सफल नहीं हो सके।

    बैठक के बाद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा कि सभी मांगें भूपेश बघेल के सामने रख दी गई हैं। उनका कहना था कि पार्टी की प्राथमिकता 2027 में पंजाब में कांग्रेस की सरकार बनाना है और इसके लिए मजबूत नेतृत्व की आवश्यकता है, न कि समझौता करने वाले नेता की।

    रंधावा ने बिना किसी का नाम लिए कहा कि प्रदेश कांग्रेस का नेतृत्व ऐसा होना चाहिए जो मुख्यमंत्री भगवंत मान की राजनीतिक चुनौतियों का मजबूती से सामना कर सके। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक दल समय-समय पर अपने फैसलों में बदलाव करते हैं और कांग्रेस भी ऐसा कर सकती है।

    गौरतलब है कि कांग्रेस हाईकमान ने हाल ही में पंजाब संगठन की नई सूची जारी करते हुए अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को दोबारा प्रदेश अध्यक्ष बनाए रखने का फैसला किया था। इसके बाद से पार्टी के भीतर दो स्पष्ट खेमे दिखाई दे रहे हैं और चन्नी समर्थक नेता लगातार इस फैसले का विरोध कर रहे हैं।

    बैठक में कई वरिष्ठ नेता रहे मौजूद
    भूपेश बघेल के साथ हुई बैठक में चरणजीत सिंह चन्नी, सुखजिंदर सिंह रंधावा, ओपी सोनी, नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा, विधायक परगट सिंह, पूर्व मंत्री तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा, भारत भूषण आशु, पूर्व सांसद शेर सिंह घुबाया, पूर्व युवा कांग्रेस अध्यक्ष बरिंदर ढिल्लों सहित कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए।

    रंधावा के बयान पर राजा वड़िंग का पलटवार
    सुखजिंदर सिंह रंधावा के “समझौता करने वाला नेता नहीं चाहिए” वाले बयान पर अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि किसी का नाम नहीं लिया गया, तो इशारा उनकी ओर क्यों किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पार्टी में स्लीपर सेल या समझौता करने वाले नेताओं के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए।

    राजा वड़िंग ने कहा कि वह और रंधावा करीब साढ़े चार साल तक साथ काम कर चुके हैं। यदि वह समझौता करने वाले नेता होते तो रंधावा उनके साथ काम नहीं करते। वहीं, भाजपा नेता सुनील जाखड़ के बयान पर पलटवार करते हुए उन्होंने कहा कि जाखड़ लंबे समय तक कांग्रेस में रहे और बाद में यह कहते हुए पार्टी छोड़ दी कि यहां हिंदुओं की नहीं सुनी जाती। उन्होंने कहा कि “असली गद्दार तो वही हैं।”

  • राष्ट्रीय मुद्दों पर मंथन के लिए दिल्ली में उच्च स्तरीय बैठक, सरकार की रणनीति और संभावित बदलावों पर नजर

    राष्ट्रीय मुद्दों पर मंथन के लिए दिल्ली में उच्च स्तरीय बैठक, सरकार की रणनीति और संभावित बदलावों पर नजर


    नई दिल्ली ।
    विदेश दौरे से लौटने के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर सक्रिय राजनीतिक और प्रशासनिक मोड में दिखाई दे रहे हैं। गुरुवार को राजधानी दिल्ली में होने वाली मंत्रिपरिषद की अहम बैठक को लेकर पूरे राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब देश के सामने कई आंतरिक और बाहरी चुनौतियाँ मौजूद हैं और सरकार की नीतिगत दिशा पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं। इस उच्च स्तरीय बैठक में सभी केंद्रीय मंत्रियों, स्वतंत्र प्रभार वाले मंत्रियों और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी रहने की संभावना है, जिससे यह साफ संकेत मिलता है कि चर्चा केवल औपचारिक समीक्षा तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसमें महत्वपूर्ण निर्णय और भविष्य की रणनीति पर भी मंथन किया जा सकता है।

    सूत्रों के अनुसार बैठक में सरकार विभिन्न मंत्रालयों के कार्यों की विस्तृत समीक्षा कर सकती है। खासतौर पर ऐसे विभाग जिन पर हाल के समय में प्रदर्शन को लेकर सवाल उठे हैं, उन पर अधिक ध्यान दिए जाने की संभावना जताई जा रही है। इसके साथ ही देश की मौजूदा आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों को देखते हुए नीतिगत सुधारों पर भी विचार किया जा सकता है। बैठक में वैश्विक परिस्थितियों का असर भारत की अर्थव्यवस्था पर कैसे पड़ रहा है, इस विषय को भी गंभीरता से लिया जा सकता है। विशेष रूप से ऊर्जा आपूर्ति, अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता और उसके घरेलू प्रभाव जैसे मुद्दे चर्चा के केंद्र में रहने की संभावना है।

    इसी बीच देश में NEET परीक्षा से जुड़े विवाद ने सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती खड़ी कर दी है। लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ा यह मुद्दा लगातार राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बना हुआ है। परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और संस्थागत कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवालों के बीच सरकार पर दबाव बढ़ा है कि वह इस पूरे मामले में ठोस और भरोसेमंद कदम उठाए। माना जा रहा है कि बैठक में इस विषय पर भी विस्तृत चर्चा हो सकती है और भविष्य में परीक्षा प्रणाली को अधिक मजबूत और सुरक्षित बनाने के लिए कुछ नए निर्णय सामने आ सकते हैं।

    इसके अलावा वैश्विक स्तर पर चल रहे तनावपूर्ण हालात भी भारत की नीति निर्धारण प्रक्रिया को प्रभावित कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा संसाधनों की स्थिति और आपूर्ति श्रृंखला में संभावित बाधाओं को देखते हुए सरकार इस दिशा में पहले से अधिक सतर्क रुख अपनाने की कोशिश कर रही है। बैठक में यह भी विचार किया जा सकता है कि आम जनता पर किसी भी तरह के आर्थिक दबाव को कम करने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं।

    राजनीतिक दृष्टि से भी इस बैठक को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसे सरकार के वर्तमान कार्यकाल की एक बड़ी समीक्षा बैठक के रूप में देखा जा रहा है। प्रशासनिक गलियारों में यह चर्चा भी है कि आने वाले समय में कुछ विभागों में बदलाव या नई जिम्मेदारियों का पुनर्वितरण संभव है। हालांकि इस पर कोई आधिकारिक संकेत नहीं दिया गया है, लेकिन बैठक के एजेंडे को लेकर उत्सुकता लगातार बढ़ती जा रही है।

  • ब्रिक्स बैठक में पश्चिम एशिया पर फूटा मतभेद, संयुक्त बयान अटका; 63 बिंदुओं का अलग दस्तावेज जारी

    ब्रिक्स बैठक में पश्चिम एशिया पर फूटा मतभेद, संयुक्त बयान अटका; 63 बिंदुओं का अलग दस्तावेज जारी



    नई दिल्ली। भारत की अध्यक्षता में हुई ब्रिक्स (BRICS) विदेश मंत्रियों की बैठक में पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को लेकर गंभीर मतभेद सामने आए, जिसके चलते इस बार कोई संयुक्त बयान जारी नहीं किया जा सका। बैठक में ईरान, इजरायल और अमेरिका से जुड़े मुद्दों पर सदस्य देशों के बीच अलग-अलग राय देखने को मिली, जिससे साझा सहमति बनाना मुश्किल हो गया। इसके बाद अध्यक्ष की ओर से एक विस्तृत बयान जारी किया गया, जिसमें 63 बिंदुओं के जरिए सभी देशों के विचारों को शामिल किया गया।

    सूत्रों के अनुसार, बैठक में ईरान ने मांग रखी थी कि इजरायल और अमेरिका द्वारा किए गए हमलों की निंदा ब्रिक्स मंच से की जाए, लेकिन इस पर सभी सदस्य देश सहमत नहीं हो सके। कुछ देशों ने कहा कि किसी एक पक्ष को सीधे तौर पर निशाना बनाना कूटनीतिक संतुलन के खिलाफ होगा, जबकि अन्य देशों ने क्षेत्रीय तनाव को देखते हुए सख्त रुख अपनाने की वकालत की।

    इसी असहमति के कारण संयुक्त बयान पर सहमति नहीं बन सकी। बाद में जारी अध्यक्षीय बयान में कहा गया कि पश्चिम एशिया की स्थिति पर सदस्य देशों के विचार अलग-अलग हैं, लेकिन सभी देशों ने इस बात पर सहमति जताई कि संकट का समाधान संवाद और कूटनीति के जरिए ही संभव है। बयान में अंतरराष्ट्रीय कानून, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान पर भी जोर दिया गया।

    बयान में यह भी कहा गया कि ब्रिक्स देशों ने एकतरफा प्रतिबंधों और अंतरराष्ट्रीय कानून के विपरीत दंडात्मक उपायों की आलोचना की है। साथ ही मानवीय संकटों से निपटने के लिए वैश्विक सहयोग को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया गया। बैठक में फलस्तीन के मुद्दे पर भी चर्चा हुई, जिसमें 1967 की सीमाओं के आधार पर स्वतंत्र फलस्तीन राज्य के समर्थन की बात दोहराई गई।

    इस तरह पश्चिम एशिया के संवेदनशील मुद्दों पर अलग-अलग दृष्टिकोण के कारण ब्रिक्स बैठक में एकजुटता की कमी दिखी, हालांकि संवाद और शांति की आवश्यकता पर सभी देशों ने सहमति व्यक्त की।

  • बंगाल का नया CM कौन…. आज MLAs संग अमित शाह की बैठक पर सभी की नजरें

    बंगाल का नया CM कौन…. आज MLAs संग अमित शाह की बैठक पर सभी की नजरें


    कोलकाता।
    पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव (West Bengal Assembly Elections) के नतीजों के बाद अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि राज्य की कमान किसके हाथों में होगी। भारतीय जनता पार्टी के भीतर मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर सस्पेंस बरकरार है। इसी गुत्थी को सुलझाने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज कोलकाता में नवनिर्वाचित विधायकों के साथ एक हाई-प्रोफाइल बैठक करने वाले हैं। बैठक के बाद जल्द ही राज्य के अगले सीएम के नाम का आधिकारिक ऐलान कर दिया जाएगा।


    अमित शाह और मोहन चरण माझी को अहम जिम्मेदारी

    पार्टी आलाकमान ने विधायक दल के नेता के चुनाव की प्रक्रिया को सुचारू रूप से पूरा करने के लिए वरिष्ठ केंद्रीय नेताओं को पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। पश्चिम बंगाल के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को मुख्य पर्यवेक्षक (ऑब्जर्वर) की जिम्मेदारी दी गई है। उनके साथ ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी सह-पर्यवेक्षक की भूमिका निभाएंगे।


    बैठक में कैसे तय होगा विधायक दल का नेता?

    आज होने वाली इस बैठक में दोनों पर्यवेक्षक सभी नवनिर्वाचित विधायकों के साथ विस्तार से चर्चा करेंगे। सूत्रों के अनुसार, शाह व्यक्तिगत स्तर पर और सामूहिक रूप से विधायकों से बात करेंगे ताकि मुख्यमंत्री के नाम पर आम सहमति बनाई जा सके। विधायकों की राय जानने के बाद विधायक दल के नेता और अगले मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम मुहर लगाई जाएगी। माना जा रहा है कि पार्टी के वरिष्ठ नेता शमिक भट्टाचार्य बैठक में नए मुख्यमंत्री के नाम का प्रस्ताव रख सकते हैं, जिसके बाद इस फैसले को आधिकारिक रूप दिया जाएगा।


    9 मई को होगा भव्य शपथ ग्रहण समारोह

    नए मुख्यमंत्री के नाम की आधिकारिक घोषणा के बाद सरकार गठन की प्रक्रिया तुरंत शुरू कर दी जाएगी। इस बीच राजनीतिक हलचलें तेज हो गई हैं क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 9 मई को नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए कोलकाता पहुंच रहे हैं। पीएम मोदी की मौजूदगी पश्चिम बंगाल की राजनीति में होने जा रहे इस बड़े बदलाव को और भी खास बनाएगी।


    रेस में और कौन?

    नंदीग्राम के बाद भवानीपुर में भी जीत का परचम लहराने वाले विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे शुभेंदु अधिकारी का नाम इस रेस में सबसे आगे चल रहा है। हालांकि बीजेपी अक्सर अपने फैसलों से चौंकाती रही है। शुभेंदु के अलावा कुछ अन्य नामों पर भी चर्चा गर्म है।

    सुकांत मजूमदार: प्रदेश अध्यक्ष के रूप में उनके शांत स्वभाव और आरएसएस (RSS) के साथ उनके गहरे जुड़ाव को देखते हुए उन्हें एक ‘डार्क हॉर्स’ माना जा रहा है।

    दिलीप घोष: पार्टी को जमीनी स्तर पर खड़ा करने वाले दिलीप घोष का नाम भी चर्चा से बाहर नहीं है। उनका आक्रामक अंदाज कार्यकर्ताओं में जोश भरता है।

    महिला कार्ड या नया चेहरा: महिला वोटरों को साधने के लिए बीजेपी किसी महिला विधायक या फिर केंद्र से किसी अनुभवी चेहरे को भी बंगाल की कमान सौंप सकती है।

    पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा ने 207 सीटें जीतकर दो-तिहाई से अधिक बहुमत हासिल कर लिया, जिससे राज्य में टीएमसी के लगातार 15 वर्षों के शासन का अंत हो गया। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी ने 80 सीटों पर जीत दर्ज की।

  • PM मोदी आज पश्चिम एशिया संकट को लेकर मुख्यमंत्रियों के साथ करेंगे बैठक

    PM मोदी आज पश्चिम एशिया संकट को लेकर मुख्यमंत्रियों के साथ करेंगे बैठक


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) चुनाव वाले राज्यों को छोड़कर अन्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों (Chief Ministers) के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (Video Conferencing.) के जरिये आज शाम बातचीत करेंगे। खाड़ी क्षेत्र में संघर्ष (West Asia crisis) शुरू होने के बाद पीएम मोदी की मुख्यमंत्रियों के साथ पहली बार बैठक होगी। कैबिनेट सचिवालय चुनाव वाले राज्यों तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, असम, केरल और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी के मुख्य सचिवों के साथ अलग-अलग बैठक करेगा।

    केंद्र सरकार के सूत्रों ने बताया, प्रधानमंत्री शुक्रवार शाम वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मुख्यमंत्रियों से जुड़ेंगे और इस दौरान संकट से निपटने में राज्यों की तैयारियों और योजनाओं की समीक्षा भी होगी। इस पहल का उद्देश्य ‘टीम इंडिया’ की भावना से प्रेरित होकर सरकार के प्रयासों में तालमेल सुनिश्चित करना है।

    प्रधानमंत्री मोदी ईरान संघर्ष से उत्पन्न संकट पर लगातार सक्रिय हैं। सोमवार को उन्होंने लोकसभा सांसदों को इस बारे में सरकार की ओर से उठाए जा रहे कदमों की जानकारी दी जबकि मंगलवार को राज्यसभा को इस बारे में संबोधित किया। बुधवार को सर्वदलीय बैठक में उनके वरिष्ठ मंत्रियों ने विपक्ष के सभी दलों के सवालों के जवाब दिए। चूंकि तेल-गैस की आपूर्ति से निपटने में राज्यों की महत्वपूर्ण भूमिका है इसलिए इस बारे में अब मोदी मुख्यमंत्रियों से चर्चा करेंगे।

    पीएम मोदी लगातार यह कहते रहे हैं कि ईरान संघर्ष से पैदा संकट लंबा खिंच सकता है। उन्होंने यह आशंका भी जताई है कि संकट की स्थिति में कुछ तत्व इसका फायदा उठाने की कोशिश कर सकते हैं और इससे निपटने में राज्यों को सख्त कदम उठाने होंगे। लोकसभा में अपने संबोधन में भी उन्होंने इस बात पर जोर दिया था।


    भारत के पास 60 दिन का ईंधन: सरकार

    इससे पहले सरकार ने नागरिकों को आश्वस्त किया कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बावजूद कोई तात्कालिक खतरा नहीं है। सरकार ने बताया कि देश के पास 60 दिनों का ईंधन उपलब्ध है। लोगों से ईंधन की कमी से जुड़ी अटकलों पर ध्यान न देने की अपील की गई। सरकार ने पुष्टि की कि देश की ऊर्जा आपूर्ति स्थिर और अच्छी तरह प्रबंधित है और मौजूदा मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त भंडार मौजूद है।

    पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, कच्चे तेल की आपूर्ति अगले लगभग दो महीने के लिए पहले ही सुनिश्चित कर ली गई है। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल बाजार कंपनियों ने पहले से ही आयात की व्यवस्था कर ली है, जिससे आपूर्ति में निरंतरता बनी रहे। होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधाओं के बावजूद भारत 40 से अधिक देशों से कच्चा तेल खरीद रहा है, जिससे किसी एक मार्ग या क्षेत्र पर निर्भरता कम हो जाती है।

  • दिल्ली में केंद्रीय मंत्रियों से बैठक: मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बजट और प्रशासनिक मुद्दों पर जताई कड़ी अपील

    दिल्ली में केंद्रीय मंत्रियों से बैठक: मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बजट और प्रशासनिक मुद्दों पर जताई कड़ी अपील

    नई दिल्ली। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दिल्ली प्रवास के दौरान केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह से मुलाकात की, जिसमें दोनों ने राजनीतिक और प्रशासनिक मामलों पर विस्तृत चर्चा की। इस बैठक में राज्य सरकार के बजट संबंधी बकाया राशि को समय पर जारी करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। चालू वित्त वर्ष में केंद्र से प्रदेश को कुल 44,000 करोड़ रुपए मिलने हैं, लेकिन जनवरी तक मात्र 9,500 करोड़ रुपए ही जारी किए जा सके हैं। इसी मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केंद्रीय मंत्रियों से आग्रह किया कि बची हुई राशि 31 मार्च से पहले राज्य सरकार को उपलब्ध कराई जाए, ताकि प्रदेश में विकास कार्य और योजनाएं समय पर पूरी हो सकें।

    इसके अलावा मुख्यमंत्री ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से सौजन्य भेंट की। इस दौरान प्रदेश में संगठनात्मक सुधार और आगामी नियुक्तियों पर चर्चा हुई। इसी क्रम में पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल ने केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से भी दिल्ली में मुलाकात की। इस बैठक में नर्मदा परियोजना के वैज्ञानिक अध्ययन और बलिदानी वीरनारी कार्यक्रम के संबंध में भी चर्चा की गई।

    मुख्यमंत्री का यह दिल्ली दौरा वित्तीय और प्रशासनिक मामलों के साथ-साथ संगठनात्मक सुधार और प्रदेश के विकास लक्ष्यों को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। केंद्रीय मंत्रियों और अन्य अधिकारियों से संवाद के जरिए प्रदेश सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि बकाया राशि समय पर मिले और विकास योजनाएं बाधा रहित ढंग से लागू हो सकें। इस दौरे में प्रशासनिक मामलों, बजट वितरण और संगठनात्मक स्थिरता के मुद्दों पर फोकस किया गया।